वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. ब्लूम के अनुसार शिक्षण के उद्देश्य हैं—
(a) ज्ञानात्मक उद्देश्य
(b) भावात्मक उद्देश्य
(c) क्रियात्मक उद्देश्य
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या: शैक्षिक उद्देश्यों को सामान्यतः तीन क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जाता है—संज्ञानात्मक (ज्ञानात्मक), भावात्मक तथा मनोगत्यात्मक/क्रियात्मक क्षेत्र। अतः दिए गए सभी विकल्प सही हैं।
प्रश्न 2. 'सा विद्या या विमुक्तये' शिक्षा का उद्देश्य किस विचारधारा का मानना है?
(a) आदर्शवादी
(b) प्रकृतिवादी
(c) प्रयोजनवादी
(d) अस्तित्ववादी
उत्तर: (a) आदर्शवादी।
व्याख्या: 'सा विद्या या विमुक्तये' का अर्थ है—वही विद्या है जो मुक्ति प्रदान करे। आत्मिक उन्नति, सत्य एवं उच्च जीवन-मूल्यों पर बल देने के कारण इसे आदर्शवादी शिक्षा-दृष्टिकोण से जोड़ा जाता है।
प्रश्न 3. गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त पर आधारित शिक्षण सूत्र है—
(a) सूक्ष्म से स्थूल
(b) ज्ञात से अज्ञात
(c) पूर्ण से अंश
(d) विशिष्ट से सामान्य
उत्तर: (c) पूर्ण से अंश।
व्याख्या: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान सम्पूर्णता पर बल देता है। इसके अनुसार व्यक्ति पहले किसी वस्तु या परिस्थिति को पूर्ण रूप में ग्रहण करता है और बाद में उसके विभिन्न अंशों को समझता है।
प्रश्न 4. 'शिक्षण एक त्रिध्रुवीय प्रक्रिया है।' किसका कथन है?
(a) जॉन डीवी
(b) एडम्स
(c) रेमण्ट
(d) एण्डरसन
उत्तर: (a) जॉन डीवी।
व्याख्या: जॉन डीवी ने शिक्षा को त्रिध्रुवीय प्रक्रिया माना, जिसमें शिक्षक, शिक्षार्थी तथा सामाजिक वातावरण/पाठ्यवस्तु परस्पर अन्तःक्रिया करते हैं।
प्रश्न 5. सम्प्रेषण शब्द की उत्पत्ति किस लैटिन शब्द से हुई है?
(a) कम्यूनिस
(b) कम्यूनिकल
(c) कम्युनिकेशन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (a) कम्यूनिस।
व्याख्या: Communication शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द Communis से मानी जाती है, जिसका अर्थ सामान्य या साझा करना है।
प्रश्न 6. सम्प्रेषण के प्रकार हैं—
(a) चार
(b) दो
(c) एक
(d) तीन
उत्तर: (d) तीन।
व्याख्या: अभिव्यक्ति के माध्यम के आधार पर सम्प्रेषण को सामान्यतः मौखिक, लिखित तथा अशाब्दिक सम्प्रेषण में विभाजित किया जाता है।
प्रश्न 7. प्रोजेक्ट पद्धति के जन्मदाता हैं—
(a) फ्रोबेल
(b) मॉन्टेसरी
(c) किलपैट्रिक
(d) पेस्टालॉजी
उत्तर: (c) किलपैट्रिक।
व्याख्या: प्रोजेक्ट पद्धति का व्यवस्थित प्रतिपादन विलियम एच. किलपैट्रिक ने किया। यह जॉन डीवी के प्रयोजनवादी एवं 'करके सीखने' के विचारों से प्रभावित है।
प्रश्न 8. निम्न में से शिक्षण का सामान्य सिद्धान्त नहीं है—
(a) क्रियाशीलता का सिद्धान्त
(b) रुचि का सिद्धान्त
(c) नियोजन का सिद्धान्त
(d) परिमाण का सिद्धान्त
उत्तर: (d) परिमाण का सिद्धान्त।
व्याख्या: क्रियाशीलता, रुचि एवं नियोजन शिक्षण के सामान्य सिद्धान्त हैं। परिमाण का सिद्धान्त शिक्षण का सामान्य सिद्धान्त नहीं है।
प्रश्न 9. कल्पना एवं तर्क शक्ति का विकास किस शिक्षण प्रविधि के माध्यम से करते हैं?
(a) व्याख्यान प्रविधि
(b) प्रश्नोत्तर प्रविधि
(c) खेल प्रविधि
(d) कहानी प्रविधि
उत्तर: (d) कहानी प्रविधि।
व्याख्या: कहानी सुनते समय बालक पात्रों, घटनाओं और परिस्थितियों की कल्पना करता है तथा उनके कारण-परिणाम पर विचार करता है, जिससे कल्पना एवं तर्क शक्ति के विकास में सहायता मिलती है।
प्रश्न 10. सुकराती प्रविधि कहते हैं—
(a) कहानी प्रविधि
(b) प्रयोग प्रविधि
(c) प्रश्नोत्तर प्रविधि
(d) विश्लेषण प्रविधि
उत्तर: (c) प्रश्नोत्तर प्रविधि।
व्याख्या: सुकरात क्रमबद्ध प्रश्नों द्वारा शिक्षार्थी को स्वयं उत्तर एवं सत्य तक पहुँचने के लिए प्रेरित करते थे। इसलिए प्रश्नोत्तर विधि को सुकराती प्रविधि भी कहा जाता है।
प्रश्न 11. शिक्षक-केन्द्रित शिक्षण में शिक्षा का केन्द्र बिन्दु होता है—
(a) शिक्षक
(b) विद्यार्थी
(c) प्रधानाचार्य
(d) पाठ्यक्रम
उत्तर: (a) शिक्षक।
व्याख्या: शिक्षक-केन्द्रित शिक्षण में शिक्षण प्रक्रिया, विषय-वस्तु की प्रस्तुति तथा कक्षा की गतिविधियों में शिक्षक की भूमिका प्रधान होती है।
प्रश्न 12. सूक्ष्म-शिक्षण पद्धति के जन्मदाता हैं—
(a) डी. डब्ल्यू. एलन
(b) स्किनर
(c) बी. के. पासी
(d) रायबर्न
उत्तर: (a) डी. डब्ल्यू. एलन।
व्याख्या: ड्वाइट डब्ल्यू. एलन को सूक्ष्म शिक्षण के विकास से प्रमुख रूप से जोड़ा जाता है। इसका विकास 1960 के दशक में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में शिक्षक-प्रशिक्षण के लिए किया गया था।
प्रश्न 13. पाठ-प्रस्तावना कौशल का आधार बिन्दु है—
(a) पाठ्यक्रम
(b) परिवार
(c) पूर्वज्ञान
(d) पाठ
उत्तर: (c) पूर्वज्ञान।
व्याख्या: प्रस्तावना कौशल में विद्यार्थी के पूर्वज्ञान को आधार बनाकर उसे नवीन पाठ से जोड़ा जाता है तथा पाठ के प्रति रुचि एवं जिज्ञासा उत्पन्न की जाती है।
प्रश्न 14. व्याख्यान विधि में छात्र बने रहते हैं—
(a) मूक
(b) सक्रिय
(c) निष्क्रिय
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) निष्क्रिय।
व्याख्या: परम्परागत व्याख्यान विधि में शिक्षक की भूमिका प्रधान होती है तथा विद्यार्थी मुख्यतः श्रोता बने रहते हैं, इसलिए उनकी सक्रिय सहभागिता अपेक्षाकृत कम होती है।
प्रश्न 15. अधिगम का अर्थ है—
(a) लक्ष्य प्राप्त करना
(b) सीखना
(c) व्यवहार करना
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (b) सीखना।
व्याख्या: अधिगम का सामान्य अर्थ सीखना है। अनुभव और अभ्यास के परिणामस्वरूप ज्ञान, कौशल अथवा व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन अधिगम कहलाता है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. सम्प्रेषण की एक परिभाषा लिखिए।
उत्तर: विचारों, सूचनाओं, भावनाओं अथवा संदेशों के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आदान-प्रदान की प्रक्रिया सम्प्रेषण कहलाती है।
प्रश्न 17. सम्प्रेषण के प्रमुख घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर: प्रेषक, सन्देश, माध्यम, ग्राही तथा प्रतिपुष्टि।
प्रश्न 18. शिक्षण में अभिप्रेरणा के सिद्धान्त से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: विद्यार्थी में सीखने की इच्छा, रुचि एवं उत्साह उत्पन्न करके उसे लक्ष्य की ओर सक्रिय करना अभिप्रेरणा का सिद्धान्त है।
प्रश्न 19. शिक्षण के किन्हीं दो शिक्षण-सूत्रों को लिखिए।
उत्तर: (1) ज्ञात से अज्ञात की ओर। (2) सरल से कठिन की ओर।
प्रश्न 20. प्रशिक्षण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: किसी विशिष्ट कार्य या कौशल में दक्षता विकसित करने की व्यवस्थित प्रक्रिया को प्रशिक्षण कहते हैं।
प्रश्न 21. पुनर्बलन कितने प्रकार का होता है?
उत्तर: दो प्रकार—धनात्मक पुनर्बलन और ऋणात्मक पुनर्बलन।
प्रश्न 22. अपेक्षित अधिगम शब्द का शाब्दिक अर्थ बताइए।
उत्तर: 'अपेक्षित' का अर्थ जिसकी अपेक्षा की गई हो और 'अधिगम' का अर्थ सीखना है; अर्थात् विद्यार्थी से अपेक्षित सीख।
प्रश्न 23. बाल-केन्द्रित शिक्षण की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: (1) बालक शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का केन्द्र होता है। (2) उसकी रुचि, आवश्यकता एवं वैयक्तिक भिन्नताओं को महत्त्व दिया जाता है।
प्रश्न 24. खेल पर आधारित दो शिक्षण विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर: किण्डरगार्टन पद्धति और मॉन्टेसरी पद्धति।
प्रश्न 25. पर्यटन विधि का प्रयोग किन विषयों के शिक्षण हेतु लाभप्रद है?
उत्तर: पर्यटन विधि भूगोल, इतिहास, सामाजिक अध्ययन, पर्यावरण अध्ययन एवं विज्ञान के शिक्षण में विशेष रूप से लाभप्रद है।
प्रश्न 26. प्रयोग-प्रदर्शन विधि सर्वाधिक किस विषय में उपयोगी है?
उत्तर: प्रयोग-प्रदर्शन विधि विज्ञान विषय के शिक्षण में सर्वाधिक उपयोगी है।
प्रश्न 27. सूक्ष्म-शिक्षण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: सीमित समय, सीमित विषय-वस्तु एवं छोटे छात्र-समूह में किसी एक शिक्षण-कौशल का अभ्यास कराने की प्रशिक्षण प्रविधि सूक्ष्म-शिक्षण कहलाती है।
प्रश्न 28. शिक्षण-कौशल की एक परिभाषा दीजिए।
उत्तर: बी. के. पासी के अनुसार, शिक्षण-कौशल छात्रों के अधिगम को सुगम बनाने के लिए किए गए सम्बन्धित शिक्षण व्यवहारों का समूह है।
प्रश्न 29. श्यामपट्ट कौशल के किन्हीं दो घटकों के नाम लिखिए।
उत्तर: (1) स्पष्ट एवं पठनीय लेखन। (2) विषय-वस्तु का व्यवस्थित विन्यास एवं उचित स्थान-विभाजन।
प्रश्न 30. स्पष्टीकरण युक्ति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: किसी तथ्य, अवधारणा या प्रक्रिया को सरल, स्पष्ट एवं बोधगम्य रूप में समझाने की शिक्षण युक्ति को स्पष्टीकरण युक्ति कहते हैं।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. शिक्षा में मानचित्र व चार्ट की उपयोगिता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मानचित्र और चार्ट दोनों महत्वपूर्ण दृश्य शिक्षण-अधिगम सामग्री हैं। इनसे विषय-वस्तु को सरल, स्पष्ट और रोचक बनाया जा सकता है।
मानचित्र की उपयोगिता—
- स्थान, दिशा, दूरी एवं सीमाओं को स्पष्ट करता है।
- नदियों, पर्वतों, राज्यों, देशों एवं अन्य भौगोलिक तथ्यों की स्थिति समझने में सहायता करता है।
- विद्यार्थियों की स्थानिक समझ एवं निरीक्षण शक्ति विकसित करता है।
चार्ट की उपयोगिता—
- तथ्यों, प्रक्रियाओं और सम्बन्धों को चित्रात्मक एवं क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है।
- जटिल विषय-वस्तु को संक्षिप्त एवं सरल बनाता है।
- विद्यार्थियों का ध्यान एवं रुचि बढ़ाकर ज्ञान को अधिक स्थायी बनाता है।
प्रश्न 32. सम्प्रेषण के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: अभिव्यक्ति के माध्यम के आधार पर सम्प्रेषण के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—
- मौखिक सम्प्रेषण— जब विचार या संदेश बोलकर पहुँचाए जाते हैं, जैसे वार्तालाप, भाषण और कक्षा-चर्चा।
- लिखित सम्प्रेषण— जब सूचना लिखित शब्दों द्वारा दी जाती है, जैसे पत्र, सूचना, पुस्तक और श्यामपट्ट-लेखन।
- अशाब्दिक सम्प्रेषण— जब बिना शब्दों के हाव-भाव, मुख-मुद्रा, संकेत, शारीरिक भाषा आदि द्वारा संदेश दिया जाता है।
शिक्षण में प्रभावी सम्प्रेषण के लिए इन सभी प्रकारों का परिस्थितिनुसार प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 33. क्रियाशीलता के सिद्धान्तों की विवेचना कीजिए।
उत्तर: क्रियाशीलता का सिद्धान्त 'करके सीखने' पर बल देता है। इसके अनुसार विद्यार्थी जितना अधिक सक्रिय रूप से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में भाग लेता है, उसका अधिगम उतना ही प्रभावी एवं स्थायी होता है।
क्रियाशीलता के प्रमुख रूप—
- शारीरिक क्रियाशीलता— प्रयोग करना, मॉडल बनाना, लिखना, खेलना एवं अन्य गतिविधियों में भाग लेना।
- मानसिक क्रियाशीलता— सोचना, तर्क करना, समस्या-समाधान करना, तुलना एवं निर्णय करना।
महत्त्व—
- विद्यार्थी की सक्रिय सहभागिता बढ़ती है।
- अधिगम रुचिकर एवं स्थायी बनता है।
- आत्मविश्वास एवं स्वावलम्बन विकसित होता है।
- तर्क, चिन्तन, सृजनात्मकता एवं समस्या-समाधान क्षमता का विकास होता है।
प्रश्न 34. शिक्षण एवं प्रशिक्षण में अन्तर बताइए।
उत्तर:
| आधार | शिक्षण | प्रशिक्षण |
|---|---|---|
| उद्देश्य | ज्ञान, समझ, चिन्तन एवं व्यापक विकास करना। | किसी विशिष्ट कौशल या कार्य-दक्षता का विकास करना। |
| क्षेत्र | अपेक्षाकृत व्यापक होता है। | विशिष्ट कार्य या कौशल से सम्बन्धित होता है। |
| प्रकृति | ज्ञानात्मक एवं व्यवहारात्मक दोनों हो सकती है। | मुख्यतः व्यावहारिक एवं कौशलपरक होती है। |
| बल | ज्ञान, समझ एवं बौद्धिक विकास पर बल। | अभ्यास, शुद्धता एवं कार्य-निष्पादन पर बल। |
प्रश्न 35. उपचारात्मक शिक्षण को स्पष्ट करें।
उत्तर: विद्यार्थी की विशिष्ट अधिगम-कठिनाइयों एवं त्रुटियों का निदान करने के बाद उन्हें दूर करने के लिए दिया जाने वाला विशेष सुधारात्मक शिक्षण उपचारात्मक शिक्षण कहलाता है।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ—
- सबसे पहले विद्यार्थी की कठिनाई एवं उसके कारण की पहचान की जाती है।
- कठिनाई के अनुरूप विशेष शिक्षण योजना बनाई जाती है।
- सरल एवं छोटे-छोटे सोपानों में पुनः शिक्षण कराया जाता है।
- अतिरिक्त अभ्यास एवं व्यक्तिगत सहायता दी जाती है।
- पुनः मूल्यांकन द्वारा सुधार की जाँच की जाती है।
इसका उद्देश्य विद्यार्थी को उसकी अधिगम-कमियों से उबारकर अपेक्षित उपलब्धि स्तर तक पहुँचाना है।
प्रश्न 36. सूक्ष्म-शिक्षण की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर: सूक्ष्म-शिक्षण में किसी एक शिक्षण-कौशल का नियंत्रित परिस्थिति में अभ्यास किया जाता है। इसकी प्रक्रिया एक चक्र के रूप में चलती है—
- पाठ-योजना निर्माण— अभ्यास किए जाने वाले शिक्षण-कौशल का चयन कर संक्षिप्त पाठ-योजना बनाई जाती है।
- शिक्षण— छात्राध्यापक छोटे समूह को लगभग 5 से 10 मिनट तक पाठ पढ़ाता है।
- प्रतिपुष्टि— पर्यवेक्षक या सहपाठियों द्वारा शिक्षण-कौशल के प्रयोग पर तत्काल प्रतिपुष्टि दी जाती है।
- पुनः योजना— प्राप्त सुझावों के आधार पर पाठ-योजना में आवश्यक सुधार किया जाता है।
- पुनर्शिक्षण— संशोधित योजना के अनुसार पुनः शिक्षण किया जाता है।
- पुनः प्रतिपुष्टि— पुनर्शिक्षण का पुनः अवलोकन करके सुधार की जानकारी दी जाती है।
इस प्रकार इसका मूल चक्र है—योजना → शिक्षण → प्रतिपुष्टि → पुनः योजना → पुनर्शिक्षण → पुनः प्रतिपुष्टि।
प्रश्न 37. बहुक्षेत्रीय शिक्षण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: बहुक्षेत्रीय/बहुस्तरीय शिक्षण ऐसी शिक्षण व्यवस्था है जिसमें एक ही शिक्षण-परिस्थिति में विभिन्न कक्षाओं अथवा विभिन्न अधिगम स्तरों के विद्यार्थी साथ-साथ सीखते हैं।
इस व्यवस्था में विद्यार्थियों को केवल कक्षा के आधार पर न रखकर उनकी उपलब्धि, क्षमता एवं अधिगम स्तर के अनुसार समूहबद्ध किया जा सकता है। शिक्षक प्रत्येक समूह को उसके स्तर के अनुरूप गतिविधियाँ और शिक्षण-अवसर प्रदान करता है। इससे सीमित संसाधनों में भी विभिन्न स्तरों के विद्यार्थियों का अधिगम सम्भव होता है।
प्रश्न 38. कथन युक्ति को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शिक्षण में जब शिक्षक विषय-वस्तु, तथ्य, विचार अथवा जानकारी को मुख्यतः शाब्दिक रूप से कहकर विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत करता है, तो इसे कथन युक्ति कहा जाता है।
कथन स्पष्ट, सरल, क्रमबद्ध, विषयानुकूल तथा विद्यार्थियों के मानसिक स्तर के अनुरूप होना चाहिए। उचित उदाहरण, प्रश्न तथा हाव-भाव के प्रयोग से इसे अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। व्याख्यान, विवरण और स्पष्टीकरण जैसी शाब्दिक क्रियाओं में कथन का विशेष महत्त्व होता है।
प्रश्न 39. शिक्षण में 'अभिप्रेरणा का सिद्धान्त' से क्या आशय है?
उत्तर: अभिप्रेरणा का सिद्धान्त इस बात पर बल देता है कि प्रभावी अधिगम के लिए विद्यार्थी में सीखने की इच्छा, आवश्यकता, रुचि और लक्ष्य प्राप्त करने का उत्साह होना आवश्यक है।
शिक्षण में इसका प्रयोग—
- पाठ को विद्यार्थी की रुचियों एवं आवश्यकताओं से जोड़ना।
- स्पष्ट एवं प्राप्त करने योग्य लक्ष्य निर्धारित करना।
- प्रशंसा एवं उचित पुनर्बलन का प्रयोग करना।
- सफलता के अनुभव देकर आत्मविश्वास बढ़ाना।
- खेल, गतिविधि, उदाहरण एवं शिक्षण-सामग्री द्वारा रुचि उत्पन्न करना।
उचित अभिप्रेरणा से विद्यार्थी अधिक सक्रिय, एकाग्र एवं निरन्तर प्रयासशील रहता है।
प्रश्न 40. अपेक्षित अधिगम स्तर की संकल्पना क्या है?
उत्तर: किसी निश्चित कक्षा एवं विषय का अध्ययन करने के बाद विद्यार्थी से जिस निर्धारित ज्ञान, समझ, कौशल एवं दक्षता की प्राप्ति की अपेक्षा की जाती है, उसे अपेक्षित अधिगम स्तर कहते हैं।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ—
- अधिगम की अपेक्षित उपलब्धियों को स्पष्ट करता है।
- शिक्षक को शिक्षण-उद्देश्य निर्धारित करने में सहायता करता है।
- विद्यार्थी की उपलब्धि का मूल्यांकन करने का आधार प्रदान करता है।
- अधिगम-कमियों की पहचान एवं उपचारात्मक शिक्षण में सहायक होता है।
- प्रत्येक विद्यार्थी को आवश्यक दक्षताओं तक पहुँचाने पर बल देता है।
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