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शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त Previous Year Paper 2019

UP DELED Semester 1 शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त Previous Year Question Paper 2019 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. शिक्षण एक उद्देश्य निर्देशित क्रिया है, यह किसने कहा है?

(a) एन.एल. गेज

(b) रायबर्न

(c) वी.ओ. स्मिथ

(d) सीकोर्ड।

उत्तर: (c): वी. ओ. स्मिथ शिक्षण एक उद्देश्य निर्देशित क्रिया है, यह वी. ओ. स्मिथ ने कहा है।

प्रश्न 2. आगमन विधि का प्रयोग किया जाता है-

(a) व्याकरण में

(b) निबन्ध में

(c) गद्य शिक्षण में

(d) पद्य शिक्षण में।

उत्तर: (a): आगमन विधि का प्रयोग व्याकरण में किया जाता है।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन-सी श्रव्य दृश्य सामग्री के चयन में सर्वाधिक प्रमुख थे?

(a) धन व्यवस्था

(b) विषय-वस्तु की प्रकृति

(c) शिक्षकों की पसन्द

(d) छात्रों की पसन्द ।

उत्तर: (b) : विषय-वस्तु की प्रकृति- श्रव्य दृश्य सामग्री से तात्पर्य ऐसी सामग्री से है जो पाठ को ध्वनि और चित्रों दोनों रूप में प्रभावी तरीके से प्रस्तुत कर बच्चों के आँख और कान दोनों ज्ञानेंद्रियों को सक्रिय कर के सीखने को सार्थक बनाती है तथा विषय बहुत सरलता से समझने में मदद करती है।

प्रश्न 4. कक्षा शिक्षण में कौन-सा सम्प्रेषण का घटक नहीं है?

(a) शिक्षक

(b) पाठ्य-वस्तु

(c) अभिभावक

(d) छात्र।

उत्तर: (c) : अभिभावक सम्प्रेषण का घटक नहीं है। सम्प्रेषण- दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच मौखिक, लिखित, सांकेतिक या प्रतिकात्मक माध्यम से विचार एवं सूचनाओं के प्रेषण की प्रक्रिया है। सम्प्रेषण के घटक है- (1) प्रेषक (2) प्राप्तकर्ता (3) संदेश

प्रश्न 5. शिक्षक द्वारा कक्षा में अन्त्याक्षरी एवं काव्य पाठ प्रतियोगिता कराना कौन-सा शिक्षण सिद्धान्त है?

(a) नियोजन का सिद्धान्त

(b) निश्चित उद्देश्य का सिद्धान्त

(c) क्रियाशीलता का सिद्धान्त

(d) अभिप्रेरण एवं रुचि का सिद्धान्त।

उत्तर: (c) : शिक्षक द्वारा कक्षा में अन्त्याक्षरी एवं काव्य पाठ प्रतियोगिता कराना क्रियाशीलता का सिद्धान्त कहलाता है। क्रियाशीलता के सिद्धान्त का दूसरा नाम है अभ्यास का सिद्धान्त, जिससे बालक सतत् अभ्यास के द्वारा सीखता है।

प्रश्न 6. उदाहरणों एवं दृष्टान्तों के द्वारा कोई सामान्य नियम या सिद्धान्त बनाना कौन-सा शिक्षण सूत्र है?

(a) तर्कना की ओर

(b) विशिष्ट से सामान्य मान्य की ओर

(c) विश्लेषण से संश्लेषण की ओर

(d) संश्लेषण से विश्लेषण की ओर।

उत्तर: (b): उदाहरणों एवं दृष्टन्तों के द्वारा कोई सामान्य नियम या सिद्धान्त बनाना विशिष्ट से सामान्य की ओर शिक्षण सूत्र है। शिक्षण सूत्र- ये सूत्र उस मार्ग की ओर संकेत करते हैं जिस पर चलकर शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया सुगम, रुचिकर, प्रभावशाली व वैज्ञानिक बन जाती है।

प्रश्न 7. पाठशाला/विद्यालय को उद्यान की संज्ञा किसने दी है?

(a) हरबर्ट

(b) मॉण्टेसरी

(c) फ्रॉबेल

(d) फ्रेंकलिन।

उत्तर: (c) : पाठशाला/विद्यालय को उद्यान की संज्ञा फ्रॉबेल ने दी है। फ्रॉबेल- ये पहला शिक्षाशास्त्री था, जिसने खेल द्वारा शिक्षा देने की बात कही।

प्रश्न 8. छात्रों की अपने भावों एवं विचारों को व्यवस्थित ढंग से अभिव्यक्त करना किस प्रविधि में आता है?

(a) प्रश्नोत्तर प्रविधि

(b) वाद-विवाद प्रविधि

(c) प्रयोगशाला प्रविधि

(d) पाठ्य-पुस्तक प्रविधि।

उत्तर: (b): छात्रों की अपने भावों एवं विचारों को व्यवस्थित ढंग से अभिव्यक्त करना वाद-विवाद प्रविधि में आता है। वाद-विवाद, किसी विषय पर चर्चा की एक औपचारिक विधि है।

प्रश्न 9. प्रश्नोत्तर प्रविधि के जन्मदाता हैं-

(a) रूसो

(b) प्लेटो

(c) सुकरात

(d) अरस्तू।

उत्तर: (c) : प्रश्नोत्तर प्रविधि के जन्मदाता हैं- सुकरात, जो ऐथन्स के निवासी थे और एक महान दार्शनिक के रूप में प्रसिद्ध है।

प्रश्न 10. सम्प्रेषण प्रक्रिया प्रभावी होती है यदि सम्प्रेक्षण-

(a) मन्द गति से होता है

(b) अनेक व्यक्तियों के साथ होता है

(c) तीव्र गति से होता है

(d) स्पष्टता के साथ होता है

उत्तर: (b): सम्प्रेषण प्रक्रिया प्रभावी होती है यदि सम्प्रेक्षण- अनेक व्यक्तियों के साथ होता है।

प्रश्न 11. कक्षा-कक्षों की कमी होने पर शिक्षक अपनाता है-

(a) बहुकक्षा शिक्षण

(b) बहुस्तरीय शिक्षण विधि

(c) उपचारात्मक शिक्षण विधि

(d) सहभागी शिक्षण विधि

उत्तर: (a) : प्राथमिक विद्यालय में जहां शिक्षक का अभाव होता है या कक्षा ज्यादा और शिक्षक कम होते हैं, ऐसे विद्यालय में बहुकक्षा- बहुस्तरीय शिक्षण विधि की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 12. कक्षा शिक्षण में प्रशंसात्मक शब्दों का प्रयोग किया जाता है-

(a) व्याख्यान कौशल

(b) नियमन कौशल

(c) पुनर्बलन कौशल

(d) उद्दीपन परिवर्तन कौशल

उत्तर: (c) : पुनर्बलन कौशल- जिससे छात्र अनुक्रिया कर सकें। पुनर्बलन कौशल द्वारा छात्रों के मनोबल और उनके आत्मविश्वास में वृद्धि करने का कार्य किया जाता है। यह छात्रों को आंतरकि रूप से बदलने में उनकी सहायता करता है।

प्रश्न 13. कक्षा शिक्षण करते समय शिक्षक द्वारा टी.एल.एम. का प्रयोग करने से-

(a) छात्रों को पाठ सहजता से बोधगम्य हो जाता है

(b) छात्रों का मानसिक विकास होता है

(c) छात्रों का बौद्धिक विकास होता है

(d) उपर्युक्त सभी।

उत्तर: (d) : कक्षा शिक्षण करते समय शिक्षक द्वारा टी.एल.एम. का प्रयोग करने से निम्नलिखित का विकास होता है-

  1. छात्रों को पाठ सहजता से बोधगम्य हो जाता है।
  2. छात्रों का मानसिक विकास होता है।
  3. छात्रों का बौद्धिक विकास होता है।

प्रश्न 14. फ्लैनल बोर्ड किस प्रकार का टी.एल.एम. है?

(a) दृश्य-श्रव्य

(b) श्रव्य

(c) दृश्य

(d) इलेक्ट्रॉनिक।

उत्तर: (c) : फ्लैनल बोर्ड दृश्य प्रकार का टी. एल. एम. है। टी. एल. एम.- यह कोई भी सामग्री है जिसका उपयोग शिक्षक कक्षा में अपने शिक्षण को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए करता है। टी. एल. एम. सामग्रियों द्वारा उत्पादित श्रब्य और दृश्य प्रभावों पर आधारित होते हैं।

प्रश्न 15. कौन-सा प्रकृति प्राप्त टी.एल.एम. नहीं है?

(a) कंकड़-पत्थर

(b) मानचित्र

(c) टहनियाँ

(d) पत्तियाँ।

उत्तर: (b): मानचित्र, प्रकृति प्राप्त टी. एल. एम. नहीं हैं।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. शिक्षण को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: शिक्षण - शिक्षण एक व्यक्ति के ज्ञान और कौशल के प्रभावी संचरण से संबंधित एक प्रक्रिया है। यह उन तरीकों को सीमित या बढ़ाता है जिससे शिक्षार्थी संकल्पनाओं और विचारों को सीखते या आत्मसात करते हैं।

प्रश्न 17. प्रभावी सम्प्रेषण के दो तरीके बताइए।

उत्तर: सम्प्रेषण केवल सुनने या बोलने की योग्यता ही नहीं अपितु अपने को व्यक्त करने एवं दूसरों को समझने की कला है। सम्प्रेषण के मुख्य तीन प्रकार है- (i) मौखिक सम्प्रेषण (ii) लिखित सम्प्रेषण (iii) अशाब्दिक सम्प्रेषण

प्रश्न 18. किन्हीं दो शिक्षण सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: शिक्षण के दो सिद्धान्त निम्न है-

  1. क्रियाशीलता का सिद्धांत- बालक स्वभावतः ही क्रियाशील होते हैं। निष्क्रिय बैठे रहना उनकी प्राकृति के विपरीत है। उन्हे अपने हाथ, पैर व अन्य इन्द्रियों को प्रयोग में लाने में अत्यन्त आनन्द की प्राप्ति होती है स्वंय करने की क्रिया द्वारा बालक सीखता है।
  2. जीवन से सम्बद्धता का सिद्धान्त- अपने जीवन से सम्बन्धित वस्तुओं का ज्ञान करना बालकों की स्वाभाविक रूचि होती है। अतः पाठ्यवस्तु में जीवन से सम्बन्धित तथ्यों को ही शामिल करना चाहिए अर्थात वास्तविक जीवन की वास्तविक पारिस्थितियों से लिये गये तथ्यों को ही शामिल करना चाहिए। यदि अध्यापक काल्पनिक अथवा जीवन से असम्बन्धित तथ्यों को ही पढ़ाना चाहेगा तो छात्रों की रूचि उससे हट जायेगी।

प्रश्न 19. शिक्षण सूत्रों से होने वाले दो लाभ बताइए।

उत्तर:

  1. सरल से जटिल की ओर- इस सूत्र का आशय यह है कि छात्रों को पहले सरल व फिर जटिल बातों की जानकारी दी जाये जिससे पाठ व विषय मे उनकी रूचि व ध्यान लगा रहें।
  2. इस सूत्र के अनुसार शिक्षक को बालकों के पूर्व ज्ञान को जाँचकर उसी के आधार पर उन्हें नया ज्ञान देना चाहिए।
  3. स्थूल से सूक्ष्म की ओर- बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनका मानसिक विकास भी होता है शैशवावस्था में वह सूक्ष्म। अमूर्त वस्तुओं के बारे में नहीं जानता परन्तु स्थूल, मूर्त पदार्थों को सरलता से जान लेता है।
  4. पूर्ण से अंश की ओर- उस सूत्र का आधार गेस्टॉल्टवाद (अवयवीवाद) है। गेस्टॉल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हम किसी वस्तु को उसके पूर्ण रूप से ही देखते हैं बालक के सामने कोई वस्तु आने पर वह सर्वप्रथम पूर्ण वस्तु को ही देखता, जानता व समझता है।

प्रश्न 20. प्रकृति का अनुसरण-सूत्र से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तर: 'प्रकृति का अनुसरण-सूत्र' शिक्षा में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो शिक्षण और सीखने के तरीकों को प्रकृति के नियमों और सिद्धांतों से प्रेरित करती है। यह दर्शन इस बात पर आधारित है कि प्रकृति में सीखने के लिए बहुत कुछ है, और हम शिक्षा प्रणाली को डिजाइन करके और शिक्षण विधियों को लागू करके इस ज्ञान का लाभ उठा सकते हैं जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं का अनुकरण करते हैं।

प्रश्न 21. प्रश्नोत्तर प्रविधि के दो लाभ बताइए।

उत्तर: प्रश्नोंत्तर प्रविधि के दो लाभ निम्नलिखित है-

  1. पूर्व ज्ञान का पता लगाकर आगे आने वाले ज्ञान से उसका सम्बन्ध जोड़ने के लिए,
  2. यह ज्ञात करने के लिए कि बच्चे ने पढ़े हुए पाठ से कितना ज्ञान अर्जित किया है।

प्रश्न 22. शिक्षण में खेल प्रविधि का महत्व बताइए।

उत्तर: शिक्षण में खेल प्रविधि में खेल के द्वारा बच्चों को प्रभावी ढंग से शिक्षा दी जा सकती है। बच्चे खेलकूद में काफी कुछ सीख लेते हैं खेल के द्वारा बच्चे की मांसपेशियों का व्यायाम होता है, मस्तिष्क का विकास होता है।

प्रश्न 23. बाल-केन्द्रित शिक्षण एवं शिक्षक-केन्द्रित शिक्षण में अन्तर बताइए

उत्तर: बाल-केन्द्रित शिक्षण एवं शिक्षक-केन्द्रित शिक्षण में अन्तरः

| विशेषता | बाल-केंद्रित शिक्षण | शिक्षक-केंद्रित शिक्षण | | :--- | :--- | :--- | | केन्द्र | छात्र | शिक्षक | | पाठ्यक्रम | छात्रों की रूचियों और जरूरतों के आधार पर | शिक्षक द्वारा निर्धारित | | शिक्षण विधियाँ | सक्रिय सीखना, खोज, सहयोग | व्याख्यान, प्रदर्शन, अभ्यास | | शिक्षक की भूमिका | मार्गदर्शक, सूत्रधार | ज्ञान का दाता, निर्देशक | | छात्र की भूमिका | सक्रिय प्रतिभागी, ज्ञान निर्माता | निष्क्रिय प्राप्तकर्ता, ज्ञान ग्रहणकर्ता | | मूल्याकन | छात्र की प्रगति और विकास | छात्र द्वारा सीखे गये ज्ञान की मात्रा |

प्रश्न 24. बहुस्तरीय शिक्षण का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: बहुस्तरीय शिक्षणः बहरहाल, बहुस्तरीय शिक्षण एक व्यापक शब्द है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के शैक्षिक दृष्टिकोणों का वर्णन करने के लिए किया जा सकता है। सामान्य तौर पर, बहुस्तरीय शिक्षण में निम्नलिखित विशेषताएं शामिल होती हैं:

  • विभिन्न क्षमताओं और सीखने की शैलियों वाले छात्रों को एक ही कक्षा में रखा जाता है।
  • शिक्षक विभिन्न शिक्षण विधियों और गतिविधियों का उपयोग करते हैं ताकि सभी छात्रों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
  • छात्रों को उनके व्यक्तिगत लक्ष्यों और प्रगति के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।

प्रश्न 25. निदानात्मक एवं उपचारात्मक शिक्षण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: निदानात्मक शिक्षण एवं उपचारात्मक शिक्षण में अंतरः- निदानात्मक शिक्षण और उपचरात्मक शिक्षण शिक्षा के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं जो छात्रों के सीखने में सुधार करने के लिये मिलकर काम करते हैं। निदानात्मक शिक्षण का उद्देश्य छात्रों की सीखने की ताकत और कमजोरियों का पता लगाना है। इसमें विभिन्न प्रकार के मूल्यांकन का उपयोग करना शामिल है, जैसे कि औपचारिक परीक्षण, अवलोकन, और छात्र-शिक्षक वार्तालाप। उपचारात्मक शिक्षण का उद्देश्य उन क्षेत्रों में छात्रों की मदद करना है जहाँ उन्हें कठिनाई हो रही है। इसमें उन कौशलों और अवधारणाओं को फिर से पढ़ाना शामिल है जो छात्रों को समझने में परेशानी हो रही है, साथ ही उन्हें अतिरिक्त अभ्यास और सहायता प्रदान करना भी शामिल है。

प्रश्न 26. एक अच्छी प्रस्तावना के दो गुणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: एक अच्छी प्रस्तावना के दो गुण है-

  • सरल और स्पष्टः प्रश्न स्पष्ट और सटीक होने चाहिए।
  • उपयोगी प्रश्नः सभी असंदिग्ध प्रश्नों से सभी को बचना चाहिए, जटिल और लंबे शब्दों वाले प्रश्न उत्तरदाताओं को परेशान करते हैं जिसके परिणामस्वरूप लापरवाह होते हैं।

प्रश्न 27. 'कठिन-निवारण' किस विषय की पाठ योजना का घटक है, यह क्यों किया जाता है?

उत्तर: कठिन निवारण को गद्य शिक्षण की आत्मा कहते हैं इसकी निम्न तीन विधियाँ प्रचलित है-

  • उद्धोधन विधि - उस विधि का मुख्य उद्देश्य ज्ञानेद्रियों को प्रेरित करना है।
  • इस विधि को पढ़ाने के लिए प्रत्यक्ष विधि, प्रतिकृति, चित्र, अभिनय आदि साधन काम में लाये जाते हैं
  • छात्रों के माध्यम से अर्थ निकलवाना उद्धोधन है।
  • टीका विधि इस विधि को प्रवचन विधि भी कहते है
  • यह विधि उच्च स्तर व उच्चमाध्यमिक स्तर के लिए उपयोगी है
  • यह समन्वित विधि का रूप है।

प्रश्न 28. अपेक्षित-अधिगम स्तर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: अपेक्षित अधिगम की संरचना तीन शब्दों से हुई है जो इस प्रकार है-

  1. अपेक्षित,
  2. अधिगम,
  3. स्तर

अपेक्षित का अर्थ होता है ज्ञात करना, अधिगम का अर्थ होता है सीखना, स्तर का आशय है उपलब्धि

प्रश्न 29. शिक्षण-अधिगम सामग्री के रख-रखाव में क्या सावधानी रखनी चाहिए?

उत्तर: शिक्षण अधिगम सामग्री के रख-रखाव में निम्नलिखित सावधानी रखनी चाहिए-

  1. सभी प्रकार के बच्चों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखना चाहिए।
  2. समावेशी कक्षा को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  3. आधुनिक तकनीकि को कक्षा में लाना चाहिए।

प्रश्न 30. गणित-किट के किन्हीं दो उपकरणों के नाम बताइए।

उत्तर: गणित-किट के किन्हीं दो उपकरणों के नाम निम्नलिखित हैं-

  1. परकार,
  2. चाँदा
Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. उत्तम शिक्षण की क्या विशेषताएँ हैं?

उत्तर: उत्तम शिक्षण की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं।

  • (i) उत्तम शिक्षण शुद्ध जानकारी प्रदान करता है।
  • (ii) उत्तम शिक्षण सीखने के लिए आत्म-प्रेरणा बनाता है।
  • (iii) उत्तम शिक्षण द्वारा छात्र अच्छे शिक्षण में सक्रिय रहते हैं।
  • (iv) उत्तम शिक्षण चुनिंदा जानकारी पर केन्द्रित है।
  • (v) उत्तम शिक्षण जनतांत्रिक आदर्शों पर आधारित है।
  • (vi) उत्तम शिक्षण छात्रों में मूल्य एवं संस्कार पैदा करता है।
  • (vii) उत्तम शिक्षण गतिविधि पर आधिारित है।
  • (vii) उत्तम शिक्षण वह होता है। जिसमें शिक्षक अपने व्यक्तिगत गुणों से अंतः क्रिया द्वारा छात्र को प्रभावित कर उसमें ऐसे गुणों एवं मूल्यों का विकास करें, जो राज्य एवं शासन के हित में हो।
  • (ix) अच्छा शिक्षण छात्रों के पूर्व ज्ञान पर आधारित होता है।
  • (x) उत्तम शिक्षण छात्रों के लिए रूचिकर एवं प्रभावी होता है।

प्रश्न 32. सम्प्रेषण में बाधक तत्व कौन-कौन हैं?

उत्तर: संप्रेषण (Communication)-सम्प्रेषण शिक्षा की रीढ़ है। अधिगम के और शिक्षण के लिए सम्प्रेषण आवश्यक होता है। सम्प्रेषण दो शब्दों से मिलकर बना है। सम + प्रेषण, अर्थात् समान रूप से भेजा गया। अतः सम्प्रेषण का अर्थ है परस्पर सूचनाओं तथा विचारों का आदान-प्रदान करना। सम्प्रेषण में बाधक तत्व निम्नलिखित है-

  • (i) सम्प्रेषण साधनों में भाषा सबसे शक्तिशाली साधन है किसी भी भाषा की मुख्य ईकाई शब्द हैं। प्रयोग के आधार पर शब्दों के अनेक अर्थ है। प्राप्तकर्ता यदि उसी अर्थ में नहीं लेता तो सम्प्रेषण में अवरोध उपस्थित हो जाता है यदि संदेश बनाते समय प्रेषक उचित शब्दों का प्रयोग नहीं करता तो प्रभावपूर्ण संदेश नहीं बन पाता है।
  • (ii) सम्प्रेषण के लिए जिन यंत्रों एवं उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। कई बार उनमें खराबी हो जाने के कारण सम्प्रेषण में बाधा उत्पन्न हो जाती है।
  • (iii) संगठनात्मक बाधाएँ जिन व्यवसायिक संस्थानों में इस नियम का बहुत सख्ती से पालन किया जाता है कि सभी कार्य उपयुक्त मार्ग द्वारा ही होने चाहिए वहाँ सम्प्रेषण में अनेक बाधाएँ आती है। क्योंकि इसमें अधिकारी वर्ग तथा कर्मचारी के बीच सीधा सम्प्रेषण नहीं हो पाता।
  • (iv) भावनात्मक बाधाएँ वास्तव में प्रभावी संम्प्रेषण तभी सम्भव है जब प्रेषक तथा प्राप्तकर्ता दोनों की मनः स्थिति एक दूसरे के अनुकूल हो दोनों की सोच एक-दूसरे से मिलती हो प्रत्येक व्यक्ति का व्यवहार दृष्टिकोण एवं सोच अलग-अलग होती है। यदि संदेश प्रेषक तथा संदेश प्राप्तकर्ता का दृष्टिकोण एवं सोच समान होगी तो मध्य सम्प्रेषण प्रभावशाली होगा।

प्रश्न 33. शिक्षण में 'नियोजन के सिद्धान्त' से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: शिक्षण में नियोजन के सिद्धांत-एक प्रभावी शिक्षक का शिक्षण कक्षा कक्ष में प्रवेश करने और शिक्षण करने से पूर्व प्रारंभ हो जाता है। प्रभावशाली शिक्षण एक नियोजित क्रिया कलाप है। शिक्षक शिक्षण अनुदेश की विषय वस्तु का नियोजन करता है । शिक्षण सहायक सामग्री का चयन करता है। अधिगम क्रिया-कलापों का रूपांकन करता है। नियोजन एक चक्रीय प्रक्रिया होनी चाहिए जिसमें अधिगम प्रतिफलों का निर्णय और शिक्षण एवं मूल्यांकन की रणनीतियाँ सम्मिलित हों इसमें सम्पूर्ण विद्यालय विषय और कक्षा स्तर और नियोजन शामिल है। नियोजन सभी शिक्षार्थियों को अपना सर्वोत्तम निष्पादित करने के अवसर प्रदान करें क्लार्क (1983) ने नियोजन को परिभाषित करते हुए कहा "एक ऐसी बुनियादी प्रक्रिया है जिसमें एक व्यक्ति भविष्य के आविष्कारों साधनों और परिणामों को दृष्टिगत करता है, और अपने भविष्य के कार्यों के मार्गदर्शन हेतु एक संरचना तैयार करता है। अच्छा नियोजन एक शिक्षक को प्रगतिशील और सुसंगठित प्रारूप प्रदान करता है जो शिक्षार्थियों को निश्चित लक्ष्यों और उद्देश्यों को पूरा करने में उपयोग में लाया जा सकता है। एक अच्छी योजना को अधिगम की कार्य योजना (ब्लू प्रिंट) माना जा सकता है।

प्रश्न 34. 'पूर्ण से अंश की ओर' शिक्षण-सूत्र को सोदाहरण समझाइए।

उत्तर: पूर्ण से अंश की ओर इस शिक्षण सूत्र में बालक को पहले सम्पूर्ण वस्तु या तथ्य की जानकारी दी जाती है। इस सूत्र के अनुसार बच्चों को जो कुछ भी सिखाया जाए, उसे पहले पूर्ण रूप में सामने रखा जाए और बाद में उसके हर अंश को स्पष्ट रूप से स्पष्ट किया जाए इससे बच्चों में आगे पढ़ाये जाने वाले विषय के प्रति उत्साह और रूचि जागृत होती है। उदाहरण - इस शिक्षण-सूत्र में बालक को सबसे पहले सम्पूर्ण पेड़ को बताया जाता है। बालक पूरे पेड़ को समझ जाता है। उसके दिमाग में पेड़ का चित्र उपस्थित हो जाता है। वह पूरे पेड़ के बारे में सोचता है। पेड़ के विभिन्न भागों की ओर उसका ध्यान नही जाता है। शिक्षक बालक के इस पूर्ण पेड़ के ज्ञान के आधार पर पेड़ के अन्य भागों का ज्ञान कराता है। इसी आधार पर बालकों को पहले वाक्य का ज्ञान कराया जाता है, फिर अक्षरों का।

प्रश्न 35. 'समूह चर्चा विधि' के लाभ लिखिए।

उत्तर: समूह चर्चा विधि के लाभ-समूह चर्चा विधि से छात्रों के समूह को आमने-सामने बैठाकर किसी निश्चित विषय-वस्तु शीर्षक इत्यादि पर विचार-विमर्श किया जाता है। समूह चर्चा सीखने का सरल एवं सक्रिय ढंग है। इस विधि का उपयोग छोटी कक्षाओं के बच्चों में ज्यादा प्रभावी नहीं होता है। इस विधि का प्रयोग उच्च कक्षाओं के बच्चों पर किया जाता है। इस विधि के उपयोग से समय की बचत होती है।

प्रश्न 36. कक्षा-शिक्षण करते समय अच्छे प्रश्न की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: शिक्षण करते समय शिक्षक को प्रश्नोत्तर प्रविधि का ज्ञान अति आवश्यक होता है। प्रश्नीकरण कौशल शिक्षण का केन्द्र बिन्दु है। इसके उपयोग तथा संरचना पर शिक्षण निर्भर करता है। अच्छे प्रश्न की विशेषताएँ निम्नलिखित है -

  • (i) प्रश्न का आकार न तो अधिक छोटा और न अधिक बड़ा, हो।
  • (ii) प्रश्न की भाषा सरल एवं स्पष्ट होनी चाहिए।
  • (iii) प्रश्न छात्रों के विषय से सम्बन्धित होने चाहिए।
  • (iv) प्रश्न विकासात्मक होना चाहिए।
  • (v) प्रश्न छात्रों के आयु कक्षा के अनुरूप होना चाहिए।

प्रश्न 37. 'बाल-केन्द्रित शिक्षण' की चार प्रविधियों के नाम लिखिए।

उत्तर: बालकेन्द्रित शिक्षण एक प्रभावी शिक्षण माना जाता है। इसमें बालक और शिक्षक दोनों सक्रिय होकर सीखते हैं। इस विधि में बालक स्वतन्त्र रूप से सीखता है। जिससे बालक की सृजनात्मक क्षमता का विकास होता है। यह विधियाँ निम्न है।

  • (i) देखो और कहो।
  • (ii) अक्षर बोध विधि।
  • (iii) सामूहिक पाठन विधि।
  • (iv) साहचर्य विधि।
  • (v) वाक्य शिक्षण विधि।
  • (vi) कहानी विधि।

प्रश्न 38. 'श्यामपट्ट लेखन' करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?

उत्तर:

  • (1) श्यामपट्ट पर व्यर्थ की बातें नहीं लिखनी चाहिए।
  • (ii) श्यामपट्ट पर लिखते समय शिक्षक को यह ध्यान रखना चाहिए कि उसका कोई भाग किसी ओर बैठे हुए बालकों के लिए चमक तो नहीं रहा है।
  • (iii) श्यामपट्ट को ऊपर से नीचे तक नहीं भरना चाहिए क्योंकि पीछे बैठे बच्चों को उसे देखने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
  • (iv) श्यामपट्ट पर लिखते समय शिक्षक को बायां पैर आगे रखना चाहिए।

प्रश्न 39. अपेक्षित अधिगम स्तर सम्प्राप्ति के चार उपाय लिखिए।

उत्तर: आपेक्षित अधिगम स्तर सम्प्राप्ति के चार उपाय-

  1. (1) छात्रों को रहने की क्षमता तथा पाठ्य-पुस्तकों के अनाधिकृत बोझ को न्यून (कम) करने में।
  2. (2) प्राथमिक दक्षताओं को प्राप्त करने में।
  3. (3) अध्यापक को बोधजन्य एवं व्यवहारिक शिक्षण प्रदान करने में।
  4. (4) उपलब्धि परक मूल्यांकन एवं सम्प्रेणीय परीक्षण में।

प्रश्न 40. श्रव्य दृश्य शिक्षण अधिगम सामग्री की चार विशेषताएँ लिखिए

उत्तर: श्रव्य दृश्य शिक्षण अधिगम सामग्री की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. (1) श्रव्य दृश्य सामग्री स्थायी रूप से सीखने एवं समझने में सहायक है।
  2. (2) मौखिक बात को कम करती है।
  3. (3) यह अनुभवों के द्वारा ज्ञान प्रदान करती है।
  4. (4) यह नेरेशन के द्वारा शिक्षा देती है।

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