वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. "शिक्षण अधिगम हेतु दिया गया उद्दीपन मार्गदर्शन, दिशाबोध और प्रोत्साहन है।"
(a) बर्टन
(b) रायबर्न
(c) एण्डरसन
(d) रेमण्ट
उत्तर: (a): बर्टन के अनुसार, "शिक्षण अधिगम हेतु दिया गया उद्दीपन, मार्गदर्शन, दिशा बोध और अधिगम का प्रोत्साहन है।"
प्रश्न 2. प्राचीन कालीन शिक्षण विधियाँ थी -
(a) पाठ्य पुस्तक केन्द्रित
(b) शिक्षक केन्द्रित
(c) बाल केन्द्रित
(d) केन्द्रित
उत्तर: (b): प्राचीन कालीन शिक्षण विधियाँ शिक्षक केन्द्रित थी। शिक्षक केन्द्रित शिक्षण में शिक्षक की सक्रिय भागीदारी होती है। जबकि शिक्षार्थी निष्क्रिय रूप से शिक्षक को सुनते हैं。
प्रश्न 3. शिक्षण करते समय ध्यान रखना चाहिए -
(a) पाठ्य - पुस्तकों का
(b) समयावधि का
(c) बच्चों की रूचि व मानसिक स्तर का
(d) परीक्षा का
उत्तर: (c) : शिक्षण करते समय बच्चों की रूचि व मानसिक स्तर का ध्यान रखना चाहिए。
प्रश्न 4. शिक्षण को सुव्यवस्थित व प्रभावपूर्ण बनाने का माध्यम है
(a) शिक्षण विधियाँ
(b) गतिविधियाँ
(c) अभ्यास कार्य
(d) प्रश्न
उत्तर: (a): शिक्षण को सुव्यवस्थित व प्रभावपूर्ण बनाने का माध्यम शिक्षण विधियाँ हैं。
प्रश्न 5. शिक्षण विधियाँ आधारित होती हैं -
(a) बच्चों की संख्या पर
(b) गतिविधियाँ पर
(c) शोध पर
(d) शिक्षण - सूत्रों पर
उत्तर: (d) : शिक्षण विधियाँ वह विधियाँ हैं जिनकी सहायता से एक शिक्षक कक्षा में पठन-पाठन का कार्य प्रांरम्भ एवं सम्पन्न करता है। शिक्षण विधियाँ शिक्षण सूत्रों पर आधारित होती हैं。
प्रश्न 6. किण्डरगार्टन शिक्षण पद्धति के जन्मदाता हैं -
(a) फ्रोबेल
(b) मनटेसरी
(c) हेलेन पार्कहस्ट
(d) हरवर्ट
उत्तर: (a) : किण्डरगार्टन शिक्षण पद्धति के जन्मदाता फ्रॉबेल हैं। 'किंडरगार्टन' शब्द का अर्थ बच्चों का उद्यान है。
प्रश्न 7. सम्प्रेषण की प्रक्रिया होती है
(a) एकपक्षीय
(b) द्विपक्षीय
(c) एकपक्षीय व द्विपक्षीय दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (b): सम्प्रेषण का अर्थ सूचना तथा विचारों का आदान-प्रदान करना है। सम्प्रेषण दो पक्षीय (द्विपक्षीय) होता हैं। एक संदेश भेजने वाला और दूसरा संदेश ग्रहण करने बाला होता है。
प्रश्न 8. निम्नलिखित में से उपयुक्त शिक्षण-सूत्र है
(a) अज्ञात से ज्ञात की ओर
(b) सूक्ष्म से स्थूल की ओर
(c) मूर्त से अमूर्त की ओर
(d) अंश से पूर्ण की ओर
उत्तर: (c) : मूर्त से अमूर्त की ओर सूत्र को 'स्थूल से सूक्ष्म की ओर' सूत्र भी कहा जाता है। इस सूत्र के अनुसार शिक्षक पहले छात्रों को स्थूल विषय का बोध कराते हुए उन्हें सूक्ष्म ज्ञान की ओर अग्रसर करता है。
प्रश्न 9. शिक्षण का सामान्य सिद्धान्त नहीं है
(a) क्रियाशीलता का सिद्धान्त
(b) रूचि का सिद्धान्त
(c) नियोजन का सिद्धान्त
(d) परिणाम का सिद्धान्त
उत्तर: (d) : शिक्षण के सामान्य सिद्धान्त निम्न हैं-
- प्रेरणा का सिद्धान्त
- क्रियाशीलता का सिद्धान्त
- नियोजन का सिद्धान्त
- रुचि का सिद्धान्त
अतः परिणाम का सिद्धान्त शिक्षण का सामान्य सिद्धांत नहीं है。
प्रश्न 10. 'पूर्ण से अंश की ओर' शिक्षण-सूत्र आधारित है
(a) शिक्षाशास्त्र
(b) गेस्टॉल्ट मनोविज्ञान पर
(c) जीव विज्ञान पर
(d) प्राणि विज्ञान पर
उत्तर: (b): 'पूर्ण से अंश की ओर' शिक्षण सूत्र गेस्टॉल्ट मनोविज्ञान पर आधारित है- गेस्टॉल्ट मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हम किसी वस्तु को उसके पूर्ण रूप में ही देखते हैं。
प्रश्न 11. "छात्र की शिक्षा सर्वदा स्थूल वस्तुओं तथा तथ्यों से होनी चाहिए शब्दों, परिभाषाओं तथा नियमों से नहीं।" यह परिभाषा है
(a) अरस्तु की
(b) महात्मा गाँधी
(c) पेस्टालॉजी की
(d) हरबर्ट स्पेन्सर की
उत्तर: (d): हरबर्ट स्पेन्सर के अनुसार, "छात्र की शिक्षा सर्वदा स्थूल वस्तुओं तथा तथ्यों से होनी चाहिए शब्दों, परिभाषाओं तथा नियमों से नहीं।"
प्रश्न 12. प्रयोग प्रदर्शन विधि सर्वाधिक उपयोगी है -
(a) विज्ञान शिक्षण में
(b) भाषा शिक्षण में
(c) इतिहास शिक्षण में
(d) नागरिक शास्त्र शिक्षण में
उत्तर: (a) : प्रयोग प्रदर्शन विधि विज्ञान शिक्षण में सर्वाधिक उपयोगी है। प्रयोग विधि प्रत्यक्ष ज्ञान प्रदान करने की सबसे सरल विधि है。
प्रश्न 13. सूक्ष्म अवलोकन व निरीक्षण शक्ति के विकास में सहायक शिक्षण प्रविधि है -
(a) व्याख्यान
(b) प्रश्नोत्तर
(c) कहानी
(d) पर्यटन
उत्तर: (d) : सूक्ष्म अवलोकन व निरीक्षण शक्ति के विकास में सहायक शिक्षण प्रविधि पर्यटन विधि है। पर्यटन विधि सर्वाधिक भूगोल शिक्षण में उपयुक्त है。
प्रश्न 14. छात्रों के पूर्व ज्ञान की जानकारी लेने हेतु प्रयुक्त शिक्षण कौशल है
(a) प्रस्तावना कौशल
(b) पुनर्बलन कौशल
(c) श्यामपट्ट लेखन कौशल
(d) उद्देश्य कथन कौशल
उत्तर: (a) : छात्रों के पूर्व ज्ञान की जाँच के लिए, पूर्वज्ञान को नवीन ज्ञान से जोड़ने के लिए, विद्यार्थियों का ध्यान केन्द्रित तथा रुचि जाग्रत करने के लिए प्रयुक्त शिक्षण कौशल प्रस्तावना कौशल है。
प्रश्न 15. बच्चों में कल्पनाशक्ति का विकास किया जा सकता है-
(a) प्रश्नोत्तर द्वारा
(b) कहानी द्वारा
(c) व्याख्या द्वारा
(d) समूह कार्य द्वारा
उत्तर: (b): बच्चों में कहानी द्वारा तर्क, विवेक, संकल्प व कल्पनाशक्ति की अभिवृद्धि होती है。
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. शिक्षण से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: शिक्षण से तात्पर्य- जब ज्ञान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाता है, तो यह क्रिया शिक्षण कहलाती है। शिक्षण का अर्थ है ज्ञान, अनुभव और कौशल को दूसरों के साथ साझा करना और उन्हें सीखना。
प्रश्न 17. शिक्षण के कोई दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: शिक्षण के दो उद्देश्य - शिक्षण के दो उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
- छात्रों में आत्मविश्वास विकसित करना।
- छात्रों में आजीवन चलने वाले अधिगम कौशल को बढ़ाना।
प्रश्न 18. शिक्षण में प्रेरणा के सिद्धान्त का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर: शिक्षण में प्रेरणा के सिद्धान्त "प्रेरणा एक प्रक्रिया है, जिसमें सीखने वाले की आन्तरिक शक्तियाँ या आवश्यकताएँ उसके वातावरण में विभिन्न लक्ष्यों की ओर निर्देशित होती हैं।" जोन्स एवं सिम्पसन के अनुसार "प्रेरणा का सिद्धान्त यह समझने का अध्ययन है कि किसी व्यक्ति को किसी विशेष लक्ष्य या परिणाम को प्राप्त करने के लिए काम करने के लिए क्या प्रेरित करता है।"
प्रश्न 19. 'मूर्त से अमूर्त' शिक्षण-सूत्र से क्या आशय है ?
उत्तर: 'मूर्त से अमूर्त' शिक्षण सूत्र- शिक्षण के इस सूत्र के अनुसार शिक्षक को पहले ऐसी बातों का ज्ञान छात्रों को कराना चाहिए जो मूर्त (दिखाई देने वाला) हों और फिर धीरे-धीरे अमूर्त (जो न दिखाई दे) की ओर बढ़ना चाहिए。
प्रश्न 20. सम्प्रेषण की कोई एक उपयुक्त परिभाषा लिखिए।
उत्तर: सम्प्रेषण सम्प्रेषण एक ऐसी कला है, जिसके माध्यम से विचारों, सूचनाओं, संदेशों एवं सुझावों का आदान-प्रदान चलता है। सम्प्रेषण एक निरन्तर (लगातार) चलने वाली तथा नैतिक प्रक्रिया है। सम्प्रेषण प्रक्रिया को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है-
प्रेषक $\xrightarrow{\text{सन्देश / माध्यम}}$ ग्राही
प्रश्न 21. सम्प्रेषण के दो प्रमुख प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: सम्प्रेषण के दो प्रमुख प्रकार सम्प्रेषण के दो प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं-
- शाब्दिक सम्प्रेषण - इस सम्प्रेषण में सदैव भाषा का प्रयोग किया जाता है।
- अशाब्दिक सम्प्रेषण- इस सम्प्रेषण में शरीर की भाषा, हावभाव और चेहरे के भावों का उपयोग दूसरों तक सूचना पहुँचाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 22. शिक्षण में प्रश्नोत्तर प्रविधि का क्या महत्व है ?
उत्तर: शिक्षण में प्रश्नोत्तर प्रविधि का महत्व
- (1) विद्यार्थी प्रश्न भी पूछता है और प्रश्नों के उत्तर भी देता है। अतः उसमें विश्वास की भावना जाग्रत होती है तथा साथ ही उसकी संकोच करने की प्रवृत्ति समाप्त होती है।
- (2) प्रश्नोत्तर प्रविधि में विद्यार्थी में सोचने, समझने एवं तर्क करने की क्षमता का विकास होता हैं।
- (3) विद्यार्थी इस प्रविधि के माध्यम से अध्ययन-अध्यापन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
- (4) इस प्रविधि से विद्यार्थी में रूचि एवं जिज्ञासा बनी रहती है। जिससे वह ज्ञान सरलता से प्राप्त करता है।
प्रश्न 23. व्याख्यान देते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए ?
उत्तर: किसी वस्तु विषय का गहन ढंग से विश्लेषण करना व्याख्यान कहलाता है। व्याख्यान देते समय निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए-
- व्याख्यान स्पष्ट एवं सरल भाषा में हो।
- व्याख्यान के दौरान वाक्यों में क्रमबद्धता रखनी चाहिए।
- व्याख्यान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए शिक्षक को मॉडलों, चित्रों एवं तुलना के तरीकों का उचित समावेश करना चाहिए।
- व्याख्यान स्तर के अनुकूल हो।
- दिये गए व्याख्यान का एक उचित निष्कर्ष प्राप्त होना चाहिए।
प्रश्न 24. विज्ञान शिक्षण में प्रयोग प्रदर्शन विधि का क्या महत्व है ?
उत्तर: विज्ञान शिक्षण का सबसे उचित तरीका होता है 'करके सीखना।' अतः विज्ञान शिक्षण के लिए 'प्रयोग प्रदर्शन विधि' का उपयोग शिक्षक द्वारा किया जाता है क्योंकि विज्ञान शिक्षण मुख्यतः प्रयोगों पर आधारित विषय है। विज्ञान शिक्षण में प्रयोग प्रदर्शन विधि का प्रयोग करने से बच्चों में तार्किकता, वैज्ञानिकता तथा भौतिकीय एवं रासायनिक तत्वों की सही जानकारी का विकास होता है。
प्रश्न 25. 'बाल केन्द्रित शिक्षण' का क्या अर्थ है ?
उत्तर: बाल केन्द्रित शिक्षण के अन्तर्गत शिक्षक द्वारा बालक को केन्द्र बिन्दु में रखकर शिक्षा दी जाती है जिसके अन्तर्गत शिक्षक बालक की स्वायत्तता व स्वतन्त्रता तथा विद्यार्थी के सीखने की सक्रिय भागीदारी का ख्याल रखते हैं。
प्रश्न 26. निदानात्मक परीक्षण किसे कहते है ?
उत्तर: निदान से तात्पर्य संबंधित समस्या का उपचार करना होता है। अतः निदानात्मक परीक्षण से तात्पर्य, ऐसी क्रिया विधि से है, जिसके अन्तर्गत शिक्षक बालक के विषयगत समस्याओं तथा अधिगम संबंधी त्रुटियों को समझकर उसका हल निकालता है। ठीक उसी प्रकार जैसे कोई चिकित्सक किसी रोगी की समस्याओं का इलाज करता है। गुड के अनुसार, "निदान का अर्थ है, अधिगम सम्बन्धी कठिनाइयों और कमियों के स्वरूप का निवारण।"
प्रश्न 27. बहुस्तरीय शिक्षण का क्या उद्देश्य है ?
उत्तर: बहुस्तरीय शिक्षण को बहुश्रेणी शिक्षण भी कहा जाता है। बहुस्तरीय शिक्षण ऐसा शिक्षण है, जो कक्षा में तेज, मध्यम और धीमी गति से सीखने वाले बच्चे होते हैं तो उनके शिक्षण के लिए शिक्षक जिस विधि का प्रयोग करता है उसे बहुस्तरीय शिक्षण कहते हैं, जिनके निम्नलिखित उद्देश्य हैं-
- बालकों में तार्किकता सृजनात्मक शक्ति का विकास करना।
- शिक्षण प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाना।
- विद्यालय में अनुशासन बनाए रखना।
- शैक्षिक समस्याओं का समाधान करना।
- छात्रों को पाठ्यक्रम में निर्देशित दक्षताओं में प्रवीण करना
प्रश्न 28. खेल पर आधारित किन्ही दो शिक्षण पद्धतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: यद्यपि शिक्षण के अन्तर्गत खेल विधि का जन्मदाता फ्रोबेल (Froebel) को माना जाता है लेकिन आधुनिक युग में बालकों को शिक्षा देने के लिए खेल विधि के प्रयोग का प्रबल समर्थन हेनरी काल्डवैल कुक (Henry Coldwell cook) को माना जाता है। खेल आधारित निम्नलिखित शिक्षण पद्धतियाँ हैं-
- (1) किण्डरगार्डन पद्धति-शिक्षण की किण्डरगार्डन प्रणाली एक जर्मन शिक्षाशास्त्र "फ्रेडरिक फ्रोबेल" द्वारा प्रस्तावित है, जिसने 1837 में जर्मनी में पहला किंडरगार्डन स्कूल स्थापित किया। इस विधि में फ्रोबेल ने बच्चों को 'पौधों' के रूप में और शिक्षकों को 'बागवान' के रूप में चित्रित किया क्योंकि वे आशावादी होते हैं। जो युवा अंकुर को बढ़ने और खिलने की क्षमता को बढ़ावा दे सकते हैं। यह बच्चे को स्वस्थ्य रखने के लिए विकास और वृद्धि के शारीरिक सिद्धान्त पर आधारित है। बच्चे के समग्र विकास और विषय की समझ को और अधिक प्रभावी बनाने में सक्षम बनाता है।
- (2) मान्टेसरी पद्धति-मान्टेसरी पद्धति के जनक मैडम 'मारिया मान्टेसरी' थी। मान्टेसरी पद्धति, शिक्षा की ऐसी पद्धति है जो बच्चे को स्वतंत्र रूप में देखती है और बच्चों को सभी प्रकार के खेलों, व्यक्तित्व विकास आदि के लिए प्रोत्साहित भी करती है। इस विधि को बालक की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
प्रश्न 29. गणित शिक्षण में उपयोगी किन्ही दो टी.एल.एम. का नामोल्लेख करते हुए उनका उपयोग लिखिए।
उत्तर: टी.एल.एम (T.L.M)-शिक्षण अधिगम सामग्री (Teaching Learning Material) इसका प्रयोग कक्षा शिक्षण कार्य को प्रभावी एवं रोचक बनाने में किया जाता है। दो टी.एल.एम. निम्न हैं-
- (1) श्यामपट्ट तथा चाक-गणित शिक्षण में उपयोग होने वाला यह अत्यन्त महत्वपूर्ण सामाग्री है। अंकगणित तथा बीजगणित के प्रश्नों को हल करने, रेखागणित के चित्र एवं आंकड़ों के ग्राफ गणित के अध्यापक श्यामपट्ट पर चाक की सहायता से लिखकर बताते हैं।
- (2) परकार अथवा चाँदा इसकी सहायता से कोण बनाया जाता है। किसी वृत्ताकार वस्तु को बनाने के लिए परकार की सहायता ली जाती है। परकार एवं चाँदा गणित शिक्षण में कोण बनाने में काफी उपयोगी सिद्ध हुआ है।
प्रश्न 30. शिक्षण अधिगम सामग्री का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर: शिक्षक अपने ज्ञान को जिस माध्यम से जिज्ञासु विद्यार्थियों तक पहुंचाते हैं उसे शिक्षण कहते हैं। ऐसी सामग्री जो पाठ को रोचक तथा सुबोध बनाने और किसी संकल्पना अथवा प्रत्यय विशेष के अर्थ को सुनिश्चित रूप से अधिक स्पष्ट करने में सहायक सिद्ध होती है, उसे शिक्षण अधिगम सामग्री (Teaching Aid) कहा जाता है पाठ्य सामग्री को सजीव तथा सरल बनाने में सहयोग देने के कारण ही उसे शैक्षणिक सहायक सामग्री कहते हैं महत्व-
- पाठ्यांश से संबंधित तथ्यों को समझना
- पाठ्यांश को रूच्यात्मक बनाना
- समझी हुई विषय वस्तु को आत्मसात् करना
- पाठ्यांश को समझने में विद्यार्थियों का ध्यान केन्द्रित करना।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. किन्हीं दो शिक्षण-सूत्रों का वर्णन करते हुए शिक्षण में उनका महत्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शिक्षण सूत्र-
- (1) ज्ञात से अज्ञात की ओर जिसे विद्यार्थी जानता है वह ज्ञात है। और जिसे नहीं जानता है वह अज्ञात है। इस शिक्षण सूत्र में छात्र के पूर्व ज्ञान को ध्यान में रखते हुए नवीन ज्ञान (अज्ञात) की जानकारी दी जाती है। जैसे-बच्चे को कमल पढ़ाना है तो उसे सबसे पहले वर्णमाला की जानकारी दी जानी चाहिए। शिक्षण में महत्व-इस शिक्षण के माध्यम से बालक को अज्ञात जानकारी प्राप्त हो जाती है। बच्चों में रूचि का विकास होता है।
- (2) अनुभव से तर्क की ओर अनुभव, अनुभूतियों पर आधारित होता है तो तर्क विज्ञान परक चिन्तन पर। ऐसी स्थिति में अनुभव को आधार बनाकर उसका तर्क संगत आधार खोजना ही प्रभावी शिक्षण का आधार होता है। इस शिक्षण सूत्र में प्राप्त अनुभव से तर्क की ओर शिक्षण किया जाता है। शिक्षण में महत्व-सोचने की क्षमता का विकास होता है। इससे वैज्ञानिक प्रवृत्ति विकसित होती है।
प्रश्न 32. सम्प्रेषण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: संप्रेषण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक संप्रेषण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-
- (1) छात्र-आज के बाल केन्द्रित शिक्षण में प्रमुख तत्व छात्र स्वयं हैं। अतः छात्र/छात्राओं की आयु, मूल आकांक्षाए, बौद्धिक स्तर तथा आदतें या मनोभाव शिक्षण संप्रेषण प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
- (2) विषय वस्तु का चयन-विषय वस्तु का सरल पदों में क्रमबद्ध विषय का अध्ययन शिक्षण क्रिया को प्रभावी बनाता है। यदि विषय वस्तु का चयन ठीक प्रकार से नहीं किया जाता है तो इससे संप्रेषण क्रिया भी प्रभावित होती है। इसलिए शिक्षण क्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विषय वस्तु का ठीक प्रकार से चयन करना चाहिए।
- (3) कक्षा का वातावरण-कक्षा का वातावरण संप्रेषण क्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों में से एक है। जिस कक्षा में संप्रेषण क्रिया चल रही हो, उसका वातावरण भौतिक एवं सामाजिक रूप से व्यवस्थित होना चाहिए। कक्षा का वातावरण कोलाहलपूर्ण रहने पर संप्रेषण क्रिया प्रभावित होती है।
प्रश्न 33. शिक्षण में क्रियाशीलता के सिद्धान्त का क्या महत्व है?
उत्तर: शिक्षण में क्रियाशीलता के सिद्धान्त का महत्व-फ्रॉबेल के अनुसार, "बालक कार्य करके ही सीखते हैं और क्रिया द्वारा सीखना स्थायी सीखना है।" क्रियाशीलता का सिद्धान्त भाषा प्रयोगों के अधिक अवसरों और सृजनात्मकता की ओर ध्यान देता है। इसके अनुसार कक्षा में परिचर्चा करना, प्रश्न पूछना आदि सहगामी क्रियाएँ बच्चों को सक्रिय पठन के प्रति प्रोत्साहित और आनंदित रखती हैं। इससे भाषा शिक्षण काफी आसान हो जाता है। उदाहरण के लिए जो छात्र साइकिल से विद्यालय जाते हैं तो साइकिल चलाना कैसे सीखा ? साइकिल को चलाने के सबसे पहले उसे पकड़ना सीखा, पैडल मारना सीखा, अनेक बार उसे साइकिल सीखते समय चोटें भी आयी। परिणामस्वरूप साइकिल सीखना आ ही गया। इस उदाहरण से यह जानकारी मिलती है कि जब तक आप स्वयं साइकिल के साथ क्रिया नहीं करते तब तक आप उसे सीख नहीं सकते। अतः शिक्षण प्रक्रिया में बिना क्रियाशील हुए कोई भी कार्य संभव नहीं हो सकता। छात्र किसी कार्य में जितना अधिक क्रियाशील होगा वह कार्य उतना सरल एवं रूचि पूर्ण होगा。
प्रश्न 34. बाल-केन्द्रित व शिक्षक केन्द्रित शिक्षण में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
| बाल केन्द्रित शिक्षण | शिक्षक केन्द्रित शिक्षण | | :--- | :--- | | 1. इस शिक्षण का केन्द्र बिन्दु बालक होता है। | 1. इस शिक्षण का केन्द्र बिन्दु शिक्षक होता है। | | 2. इसमें बालक की स्वतन्त्रता होती है। | 2. इसमें शिक्षक की स्वतन्त्रता होती है। | | 3. बाल केन्द्रित शिक्षा में व्यक्तिगत शिक्षण को महत्व दिया जाता है। | 3. शिक्षक केन्द्रित शिक्षण में व्यक्तिगत शिक्षण का कोई महत्व नहीं है। | | 4. इसमें बालक की रूचियों आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर शिक्षण कराया जाता है। | 4. इसमें शिक्षक की रूचियों, आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर शिक्षण कराया जाता है। | | 5. विस्तृत सामाजिक संदर्भों में सीखना या चहारदीवारी के बाहर सीखना। | 5. यह चहारदीवारी के अन्दर अधिगम है। | | 6. इसमें ज्ञान निर्मित होता है | 6. इसमें ज्ञान प्रदत्त के रूप में होता है। | | 7. इसमें बहुविधि अनुभव होता है। | 7. इसमें रैखिक अनुभव होता है। |प्रश्न 35. बहुकक्षा शिक्षण की क्या उपयोगिता है ? स्पष्ट कीजिए
उत्तर: बहुकक्षा शिक्षण की उपयोगिता-वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या और घटते शिक्षण साधनों के परिणामस्वरूप बहुकक्षा शिक्षण पद्धति का जन्म हुआ। बहुकक्षा शिक्षण पद्धति एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें एक अध्यापक एक कक्षा को न पढ़ाकर अनेक कक्षाओं को एक साथ देखता है। सन् 1986 में शैक्षिक सर्वेक्षण के अनुसार 28% प्राथमिक विद्यालय में एक शिक्षक तथा 32% विद्यालय में दो शिक्षक नियुक्त थे। बहुकक्षा शिक्षण से एक या दो ही अध्यापक प्राथमिक विद्यालय में एक साथ पाँच कक्षाओं को देखते हैं। इससे छात्रों में सामाजिकता का विकास होता है। शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए बहुकक्षा शिक्षण काफी उपयोगी सिद्ध हुई। इसकी वजह से सरकारी आय में भी वृद्धि हुई क्योंकि एक या दो शिक्षकों को उनकी तनख्वाह कम देनी पड़ती है。
प्रश्न 36. पुनर्बलन कौशल का क्या अर्थ है ? शिक्षण में पुनर्बलन का क्या महत्व है ?
उत्तर: पुनर्बलन कौशल का अर्थ-पुनर्बलन का अर्थ है, शिक्षक का वह व्यवहार जिससे छात्रों को पाठ के विकास में भाग लेने हेतु एवं प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त हो। पुनर्बलन छात्रों को प्रेरणा प्रदान करने की कला है। स्किनर के अनुसार, "पुनर्बलन वह स्थिति है जो छात्र की प्रतिक्रिया में वृद्धि करती है।" पुनर्बलन दो प्रकार का होता है-
- सकारात्मक पुनर्बलन-इससे सीखने में वृद्धि होती है।
- नकारात्मक पुनर्बलन-इससे सीखने में कमी होती है।
शिक्षण में पुनर्बलन का महत्व-शिक्षण में पुनर्बलन का महत्व निम्न है-
- पुनर्बलन द्वारा छात्रों में रूचि का विकास होता है।
- पुनर्बलन द्वारा छात्रों में आत्म विश्वास की वृद्धि होती है।
- पुनर्बलन द्वारा छात्रों में प्रोत्साहन प्रदान होता है।
- पुनर्बलन द्वारा छात्रों में पर्याप्त सहभागिता बनी रहती है।
- पुनर्बलन द्वारा छात्रों में नवीन ज्ञान के लिए मन में उत्सुकता जागृत होती है।
- पुनर्बलन से छात्र जल्दी सीखते हैं।
- पुनर्बलन द्वारा छात्रों का मानसिक विकास भी होता है उसके अन्दर चिन्तन करने की क्षमता बढ़ती है।
प्रश्न 37. गतिविधि आधारित शिक्षण की उपयोगिता व महत्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: गतिविधि आधारित शिक्षण की उपयोगिता का महत्व - यह शिक्षार्थियों के बीच स्व-सीखने का कौशल विकसित करता है। छात्र को अपने कौशल के अनुसार अध्ययन करने की अनुमति देता है। यह रचनात्मकता को बढ़ाता है। गतिविधि आधारित शिक्षण से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का निर्माण होता है। जिस छात्र में मौखिक अभिव्यक्ति की कमी है वह गतिविधि के माध्यम से इसे पूरा कर सकता है। यह सामाजिक संबंध, दूसरों के साथ घुलने-मिलने का अवसर प्रदान करते हैं। इसके माध्यम से अनुभव प्राप्त होता है। रुचि विकसित होती है और पढ़ने के लिए प्रेरणा मिलती है। गतिविधि आधारित शिक्षण में एक शिक्षक सुविधादाता का कार्य करता है, जिससे सीखने की क्रिया और रूचिकर हो जाती है। इसमें छात्र खोजी प्रवृति का हो जाता है अर्थात इस गतिविधि में छात्र में वैज्ञानिकता, तार्किकता, सोचने की क्षमता का विकास होता है। इससे छात्र स्वयं की जाँच और विश्लेषण द्वारा समस्या का समाधान खोजने के लिए सक्रिय हो जाता है。
प्रश्न 38. अपेक्षित अधिगम स्तर की सम्प्राप्ति में अधिगम अनुभवों की क्या भूमिका है ?
उत्तर: अपेक्षित अधिगम स्तर की सम्प्राप्ति में अधिगम अनुभवों की भूमिका अधिगम अनुभव, वह अनुभव है जिससे आप सीखते हैं। यह वास्तविक दुनिया, आभासी वातावरण या इन दोनों का संयोजन हो सकता है। अपेक्षित अधिगम स्तर की प्राप्ति के लिए अधिगम अनुभवों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। अधिगम अनुभव एक दर्शन और पद्धति है जिसमें शिक्षक ज्ञान बढ़ाने, कौशल विकसित करने और मूल्यों को स्पष्ट करने के लिए जानबूझकर छात्रों के साथ प्रत्यक्ष अनुभव और केन्द्रित प्रतिबिम्ब में संलग्न होते हैं। अपेक्षित अधिगम स्तर की सम्प्राप्ति में अधिगम अनुभवों की भूमिका निम्न हैं-
- इससे उपयुक्त ज्ञान एवं क्रिया का चयन होता है।
- इससे तत्परता जाग्रत होती है।
- इससे अनुभव स्थनान्तरण होता है।
- यह स्वक्रिया पर बल देता है।
- इसमें प्रेरकों का प्रयोग होता है।
- शिक्षा में गुणवत्ता की समानता को प्राप्त करने के लिए अधिगम अनुभव का प्रयोग किया गया।
प्रश्न 39. दूरदर्शन का शिक्षा में क्या महत्व है ?
उत्तर: दूरदर्शन का शिक्षा में महत्त्व - जनसंपर्क के माध्यमों में दूरदर्शन का स्थान अधिक महत्वपूर्ण है। दूरदर्शन शिक्षा का एक अनौपचारिक माध्यम है। इससे अधिक बहुमुखी गुणों वाला अन्य कोई संप्रेषण नहीं है। निम्नलिखित कारणों से शिक्षा के क्षेत्र में दूरदर्शन की उपयोगिता बढ़ती जा रही है-
- शिक्षा का जीवन्त साधन दूरदर्शन शिक्षा का जीवन्त साधन है। यह किसी बात को सर्वथा विकास युक्त रूप से उसी क्षण पर्दे पर प्रस्तुत करता है। जब वह घटित होता है तो, बच्चे उसे बड़ी रूचि के साथ ध्यानपूर्वक देखते हैं। वे जानते हैं कि जो कुछ वे देख रहे हैं, वह सचमुच उसी समय घटित हो रहा है।
- मानसिक थकान दूर करने का साधन जब बच्चे शैक्षिक कार्य करते-करते थक जाते हैं तो वे मानसिक थकान दूर करने के लिए दूरदर्शन की सहायता से नयी-नयी फिल्मे, नये-नये कार्टून देखते हैं। अतः मानसिक थकान दूर करने के लिए दूरदर्शन एक महत्वपूर्ण साधन है।
- त्वरित सूचना प्रदान करने का माध्यम - शिक्षा के क्षेत्र में कौन सी घटनाएँ घटित हो रहीं हैं उनकी त्वरित जानकारी हमे दूरदर्शन से ही प्राप्त होती है।
प्रश्न 40. उत्तम शिक्षण अधिगम सामग्री की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: उत्तम शिक्षण अधिगम सामग्री की विशेषताएँ-
- (1) आकर्षक और प्रासंगिक-
- सामग्री छात्रों की रूचि और उनकी उम्र के अनुरूप होनी चाहिए।
- यह वास्तविक जीवन से जुड़ी होनी चाहिए और छात्रों को सीखने के लिए प्रेरित करने वाली होनी चाहिए।
- (2) स्पष्ट और संक्षिप्त-
- भाषा सरल और समझने में आसान होनी चाहिए।
- जटिल अवधारणाओं को सरल शब्दों में समझाया जाना चाहिए।
- सामग्री में अनावश्यक विवरण नहीं होना चाहिए।
- (3) विविधतापूर्ण- विभिन्न प्रकार की सामग्री का प्रयोग किया जाना चाहिए, जैसे-पाठ, चित्र, वीडियो, ऑडियो और इन्टरैक्टिव गतिविधियाँ।
- (4) मूल्यांकन योग्य- छात्रों की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए सामग्री में मूल्यांकन के अवसर शामिल होने चाहिए।
- (5) सुलभ- सामग्री छात्रों के लिए सुलभ होनी चाहिए, जिसमें विभिन्न क्षमताओं और सीखने की शैलियों वाले छात्र शामिल हैं।