वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. शिक्षण अधिगम सिद्धान्त नहीं है—
(a) क्रियाशीलता का सिद्धान्त
(b) प्रेरणा का सिद्धान्त
(c) रुचि का सिद्धान्त
(d) प्रयोगात्मक कार्य प्रविधि
उत्तर: (d) प्रयोगात्मक कार्य प्रविधि।
व्याख्या: क्रियाशीलता, प्रेरणा तथा रुचि शिक्षण के प्रमुख सिद्धान्त हैं, जबकि प्रयोगात्मक कार्य एक शिक्षण प्रविधि है।
प्रश्न 2. सम्प्रेषण के घटक हैं—
(a) प्रेषक
(b) सन्देश
(c) ग्राही
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या: सम्प्रेषण के प्रमुख घटकों में प्रेषक, सन्देश, माध्यम, ग्राही तथा प्रतिपुष्टि सम्मिलित होते हैं। दिए गए तीनों विकल्प इसके घटक हैं।
प्रश्न 3. निम्नलिखित में से श्रव्य-दृश्य सामग्री नहीं है—
(a) रेडियो
(b) चलचित्र
(c) टेलीविजन
(d) कम्प्यूटर
उत्तर: (a) रेडियो।
व्याख्या: रेडियो केवल ध्वनि पर आधारित श्रव्य सामग्री है, जबकि चलचित्र, टेलीविजन तथा मल्टीमीडिया कम्प्यूटर में ध्वनि और दृश्य दोनों का प्रयोग किया जा सकता है।
प्रश्न 4. भ्रमण प्रविधि के चरण हैं—
(a) शैक्षिक उद्देश्य या प्रकरण का चुनाव
(b) पर्यटन स्थल का चयन
(c) पर्यटन स्थल हेतु सामग्री
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या: शैक्षिक भ्रमण की योजना में उद्देश्य निर्धारित करना, उपयुक्त स्थल का चयन करना तथा आवश्यक सामग्री एवं अन्य व्यवस्थाएँ करना प्रमुख चरण हैं।
प्रश्न 5. 'प्रयोग-प्रदर्शन' सर्वाधिक प्रयुक्त होता है—
(a) इतिहास विषय में
(b) भाषा विषय में
(c) विज्ञान विषय में
(d) नागरिकशास्त्र विषय में
उत्तर: (c) विज्ञान विषय में।
व्याख्या: विज्ञान शिक्षण में प्रयोग-प्रदर्शन द्वारा वैज्ञानिक तथ्य, प्रक्रिया तथा सिद्धान्तों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कराया जा सकता है।
प्रश्न 6. 'पाठ के प्रमुख तथ्यों को बार-बार दोहराना' किस शिक्षण सिद्धान्त के अन्तर्गत आता है?
(a) प्रेरणा का सिद्धान्त
(b) नियोजन का सिद्धान्त
(c) चयन का सिद्धान्त
(d) आवृत्ति का सिद्धान्त
उत्तर: (d) आवृत्ति का सिद्धान्त।
व्याख्या: आवृत्ति का सिद्धान्त महत्वपूर्ण तथ्यों एवं सीखी गई विषय-वस्तु की पुनरावृत्ति पर बल देता है, जिससे अधिगम अधिक स्थायी होता है।
प्रश्न 7. शिक्षण को आनन्ददायक, मनोरंजक और रुचिपूर्ण बनाने हेतु उत्तम विधि है—
(a) व्याख्यान प्रविधि
(b) खेल/गतिविधि प्रविधि
(c) स्पष्टीकरण प्रविधि
(d) अवलोकन एवं निरीक्षण प्रविधि
उत्तर: (b) खेल/गतिविधि प्रविधि।
व्याख्या: खेल एवं गतिविधियों द्वारा बालक सक्रिय होकर सीखता है। इससे शिक्षण स्वाभाविक, आनन्ददायक तथा रुचिपूर्ण बनता है।
प्रश्न 8. शिक्षण प्रविधियों के प्रकार हैं—
(a) प्रश्नोत्तर
(b) वर्णन
(c) कहानी कथन
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या: प्रश्नोत्तर, वर्णन तथा कहानी-कथन सभी शिक्षण की प्रचलित प्रविधियाँ हैं। इनका चयन विषय-वस्तु और शिक्षण उद्देश्यों के अनुसार किया जाता है।
प्रश्न 9. शिक्षण का सूत्र नहीं है—
(a) ज्ञात से अज्ञात की ओर
(b) पूर्ण से अंश की ओर
(c) स्थूल से सूक्ष्म की ओर
(d) प्रेरणा का सिद्धान्त
उत्तर: (d) प्रेरणा का सिद्धान्त।
व्याख्या: ज्ञात से अज्ञात, पूर्ण से अंश तथा स्थूल से सूक्ष्म शिक्षण-सूत्र हैं। प्रेरणा शिक्षण का सिद्धान्त है, शिक्षण-सूत्र नहीं।
प्रश्न 10. "शिक्षण को पूर्व ज्ञान पर ही नये ज्ञान को आधारित करना चाहिए।" यह कथन किस शिक्षण सूत्र की ओर संकेत करता है?
(a) ज्ञात से अज्ञात की ओर
(b) पूर्ण से अंश की ओर
(c) स्थूल से सूक्ष्म की ओर
(d) सरल से कठिन की ओर
उत्तर: (a) ज्ञात से अज्ञात की ओर।
व्याख्या: इस सूत्र के अनुसार नए ज्ञान को विद्यार्थी के पूर्वज्ञान एवं पूर्व अनुभवों से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है।
प्रश्न 11. सहयोग की भावना का विकास सम्भव है—
(a) समूह कार्य से
(b) वाद-विवाद से
(c) प्रश्नोत्तर से
(d) सहायक सामग्री से
उत्तर: (a) समूह कार्य से।
व्याख्या: समूह कार्य में विद्यार्थी साझा लक्ष्य के लिए मिलकर कार्य करते हैं, जिससे सहयोग, उत्तरदायित्व और सामाजिक सहभागिता का विकास होता है।
प्रश्न 12. बच्चे में कल्पनाशक्ति का विकास किया जा सकता है—
(a) कहानी द्वारा
(b) समूह कार्य द्वारा
(c) प्रश्नोत्तर द्वारा
(d) व्याख्यान द्वारा
उत्तर: (a) कहानी द्वारा।
व्याख्या: कहानी के पात्रों, घटनाओं और परिस्थितियों की मानसिक कल्पना करने से बालक की कल्पनाशक्ति एवं सृजनात्मकता का विकास होता है।
प्रश्न 13. "शिक्षण सूत्र पथ-प्रदर्शन करते हैं जिनमें सिद्धान्त से व्यवहार में सहायता के लिए अपेक्षा की जाती है।" यह कथन है—
(a) रूसो का
(b) रेमण्ट का
(c) हरबर्ट गुली का
(d) आर. के. शर्मा का
उत्तर: (b) रेमण्ट का।
व्याख्या: रेमण्ट के अनुसार शिक्षण-सूत्र शिक्षक को सिद्धान्तों को व्यवहार में लागू करने हेतु मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
प्रश्न 14. उपचारात्मक शिक्षण हेतु क्रियाकलाप कराये जाते हैं—
(a) अभ्यास कार्य करना
(b) खेल व अन्य गतिविधियों का आयोजन करना
(c) समूह चर्चा कराना
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या: उपचारात्मक शिक्षण में विद्यार्थी की अधिगम-कठिनाइयों के अनुसार अभ्यास, गतिविधि, समूह कार्य तथा अन्य उपयुक्त उपायों का प्रयोग किया जा सकता है।
प्रश्न 15. प्रभावी सम्प्रेषण की प्रक्रिया होती है—
(a) एकपक्षीय
(b) द्विपक्षीय
(c) एकपक्षीय और द्विपक्षीय दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (b) द्विपक्षीय।
व्याख्या: प्रभावी सम्प्रेषण में प्रेषक और ग्राही के बीच सन्देश के साथ प्रतिपुष्टि भी होती है। इसलिए यह द्विपक्षीय प्रक्रिया है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. किन्हीं दो शिक्षण सूत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: (1) ज्ञात से अज्ञात की ओर। (2) पूर्ण से अंश की ओर।
प्रश्न 17. शिक्षण में 'रुचि के सिद्धान्त' से क्या आशय है?
उत्तर: शिक्षण को बालक की रुचियों एवं आवश्यकताओं के अनुरूप बनाकर उसे सीखने में सक्रिय रखना रुचि का सिद्धान्त है।
प्रश्न 18. सम्प्रेषण के प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर: मौखिक, लिखित तथा अशाब्दिक सम्प्रेषण।
प्रश्न 19. शिक्षण में प्रश्नोत्तर प्रविधि का क्या महत्व है?
उत्तर: प्रश्नोत्तर प्रविधि विद्यार्थियों की रुचि, जिज्ञासा, सक्रियता और चिन्तन बढ़ाती है तथा उनकी समझ की जाँच में सहायक होती है।
प्रश्न 20. गतिविधि आधारित शिक्षण की दो उपयोगिता लिखिए।
उत्तर: (1) विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता बढ़ती है। (2) अधिगम अधिक रुचिकर एवं स्थायी बनता है।
प्रश्न 21. बहुस्तरीय कक्षा शिक्षण किसे कहते हैं?
उत्तर: एक ही कक्षा में विभिन्न उपलब्धि एवं क्षमता स्तर वाले विद्यार्थियों को उनके स्तर के अनुरूप पढ़ाना बहुस्तरीय शिक्षण कहलाता है।
प्रश्न 22. 'पूर्ण से अंश की ओर' शिक्षण सूत्र का क्या अभिप्राय है?
उत्तर: पहले किसी विषय या वस्तु का सम्पूर्ण स्वरूप समझाकर बाद में उसके विभिन्न भागों का अध्ययन कराना 'पूर्ण से अंश की ओर' सूत्र है।
प्रश्न 23. प्रश्नों की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: (1) प्रश्न सरल एवं संक्षिप्त हो। (2) प्रश्न स्पष्ट एवं विषयानुकूल हो।
प्रश्न 24. पुनर्बलन कौशल का क्या उद्देश्य है?
उत्तर: विद्यार्थियों के सही उत्तर एवं वांछित व्यवहार को प्रोत्साहित और सुदृढ़ करना पुनर्बलन कौशल का उद्देश्य है।
प्रश्न 25. शिक्षण-अधिगम सामग्री से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: शिक्षण को सरल, स्पष्ट, रुचिकर और प्रभावी बनाने में प्रयुक्त सहायक साधनों को शिक्षण-अधिगम सामग्री कहते हैं।
प्रश्न 26. शिक्षण के किन्हीं दो उद्देश्यों को लिखिए।
उत्तर: (1) ज्ञान एवं कौशल का विकास करना। (2) बालक के व्यवहार में वांछित परिवर्तन एवं सर्वांगीण विकास करना।
प्रश्न 27. उपचारात्मक शिक्षण किसे कहते हैं?
उत्तर: विद्यार्थी की अधिगम-कठिनाइयों का निदान करके उन्हें दूर करने हेतु दिया जाने वाला सुधारात्मक शिक्षण उपचारात्मक शिक्षण कहलाता है।
प्रश्न 28. कहानी कथन प्रविधि के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर: विद्यार्थियों में रुचि, कल्पनाशक्ति, भाषा-अभिव्यक्ति एवं नैतिक-सामाजिक मूल्यों का विकास करना कहानी-कथन के प्रमुख उद्देश्य हैं।
प्रश्न 29. शिक्षण में क्रियाशीलता के सिद्धान्त की क्या उपयोगिता है?
उत्तर: यह विद्यार्थी को स्वयं करके सीखने का अवसर देकर अधिगम को सक्रिय, रुचिकर एवं स्थायी बनाता है।
प्रश्न 30. विवरण प्रविधि किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी वस्तु, स्थान, घटना या प्रक्रिया का क्रमबद्ध एवं सजीव वर्णन करके उसका स्पष्ट मानसिक चित्र प्रस्तुत करना विवरण प्रविधि कहलाता है।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. प्रयोग प्रदर्शन प्रविधि का प्रयोग करते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
उत्तर: प्रयोग-प्रदर्शन करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए—
- प्रयोग का उद्देश्य पहले से स्पष्ट होना चाहिए।
- आवश्यक उपकरण एवं सामग्री पहले से तैयार और कार्यशील हों।
- प्रयोग इस प्रकार किया जाए कि सभी विद्यार्थी उसे स्पष्ट रूप से देख सकें।
- प्रयोग के प्रत्येक चरण को सरल भाषा में समझाया जाए।
- रसायनों, विद्युत उपकरणों एवं अन्य जोखिमपूर्ण सामग्री के प्रयोग में सुरक्षा नियमों का पालन किया जाए।
- विद्यार्थियों को निरीक्षण करने और आवश्यक प्रश्न पूछने के अवसर दिए जाएँ।
- अन्त में प्रयोग से प्राप्त निष्कर्ष को स्पष्ट किया जाए।
प्रश्न 32. खेल विधि पर आधारित शिक्षण पद्धतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: खेल एवं गतिविधि को महत्त्व देने वाली प्रमुख शिक्षण पद्धतियाँ निम्नलिखित हैं—
- किण्डरगार्टन पद्धति— फ्रेडरिक फ्रोबेल द्वारा विकसित इस पद्धति में खेल, गीत, गतिविधियों और उपहारों के माध्यम से बालक के स्वाभाविक विकास पर बल दिया जाता है।
- मॉन्टेसरी पद्धति— मारिया मॉन्टेसरी द्वारा विकसित इस पद्धति में बालक की स्वतंत्र क्रिया, ज्ञानेन्द्रिय प्रशिक्षण तथा विशेष शिक्षण-सामग्री के प्रयोग पर बल दिया जाता है।
प्रश्न 33. कक्षा शिक्षण में शिक्षण-अधिगम सामग्री की आवश्यकता तथा महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: शिक्षण-अधिगम सामग्री विषय-वस्तु को सरल, स्पष्ट, रुचिकर और अनुभवपरक बनाने में सहायता करती है। इसकी प्रमुख उपयोगिताएँ निम्नलिखित हैं—
- रुचि एवं प्रेरणा— आकर्षक सामग्री विद्यार्थियों का ध्यान खींचती है और सीखने की प्रेरणा बढ़ाती है।
- विषय की स्पष्टता— चित्र, मॉडल, मानचित्र एवं वास्तविक वस्तुओं से कठिन अवधारणाएँ सरल हो जाती हैं।
- ज्ञान की स्थायित्व— अनेक इन्द्रियों के प्रयोग से प्राप्त अनुभव अधिक समय तक स्मरण रहता है।
- सक्रियता— सामग्री के प्रयोग से विद्यार्थियों को स्वयं करके सीखने के अवसर मिलते हैं।
- समय की बचत— आरेख, मॉडल और अन्य साधन कम समय में अधिक जानकारी स्पष्ट कर सकते हैं।
प्रश्न 34. शिक्षण कौशलों की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए किन्हीं दो शिक्षण कौशलों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शिक्षण-कौशल शिक्षक के ऐसे विशिष्ट एवं अभ्यास योग्य व्यवहार हैं जिनके द्वारा वह शिक्षण उद्देश्यों की प्रभावी प्राप्ति करता है।
दो प्रमुख शिक्षण कौशल—
- प्रस्तावना कौशल— पाठ के आरम्भ में विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित करना, पूर्वज्ञान की जाँच करना तथा उसे नए ज्ञान से जोड़ना प्रस्तावना कौशल है।
- पुनर्बलन कौशल— विद्यार्थियों के उचित उत्तर एवं वांछित व्यवहार को प्रशंसा, स्वीकृति, संकेत अथवा अन्य उपयुक्त पुनर्बलन से प्रोत्साहित करना पुनर्बलन कौशल है।
प्रश्न 35. बहुकक्षा शिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: जब एक शिक्षक एक ही समय में दो या दो से अधिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाता है, तो इसे बहुकक्षा शिक्षण कहते हैं। इसकी प्रमुख उपयोगिताएँ निम्नलिखित हैं—
- कम शिक्षकों वाले विद्यालयों में अनेक कक्षाओं का शिक्षण सम्भव होता है।
- विद्यार्थियों में स्वाध्याय एवं स्वतंत्र रूप से कार्य करने की आदत विकसित होती है।
- समूह कार्य एवं सहपाठी अधिगम को बढ़ावा मिलता है।
- बड़े विद्यार्थी छोटे विद्यार्थियों की सहायता कर सकते हैं।
- विद्यार्थियों में सहयोग, सामाजिकता एवं उत्तरदायित्व का विकास होता है।
प्रश्न 36. शिक्षण प्रविधियों की कक्षा शिक्षण में क्या उपयोगिता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शिक्षण प्रविधियाँ शिक्षक को विषय-वस्तु को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में सहायता करती हैं। इनकी प्रमुख उपयोगिताएँ हैं—
- शिक्षण को सरल, स्पष्ट एवं उद्देश्यपूर्ण बनाती हैं।
- विद्यार्थियों की रुचि एवं सक्रिय सहभागिता बढ़ाती हैं।
- विषय और शिक्षण उद्देश्य के अनुसार उपयुक्त अधिगम-अनुभव प्रदान करती हैं।
- विद्यार्थियों में प्रश्न करने, तर्क करने तथा विचार व्यक्त करने की क्षमता विकसित करती हैं।
- शिक्षण में विविधता लाकर कक्षा की नीरसता कम करती हैं।
प्रश्न 37. किन्हीं चार शिक्षण सूत्रों का वर्णन करते हुए उनकी उपयोगिता बताइए।
उत्तर: चार प्रमुख शिक्षण सूत्र एवं उनकी उपयोगिता निम्नलिखित हैं—
-
सरल से कठिन की ओर— पहले सरल विषय-वस्तु और बाद में कठिन विषय-वस्तु का शिक्षण किया जाता है।
उपयोगिता: इससे विद्यार्थी क्रमशः कठिन अवधारणाओं को समझने के लिए तैयार होता है। -
ज्ञात से अज्ञात की ओर— नवीन ज्ञान को विद्यार्थी के पूर्वज्ञान से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है।
उपयोगिता: नए ज्ञान को समझना सरल एवं सार्थक हो जाता है। -
प्रत्यक्ष से अप्रत्यक्ष की ओर— पहले प्रत्यक्ष अनुभव वाली वस्तुओं एवं घटनाओं का ज्ञान दिया जाता है और बाद में अप्रत्यक्ष तथ्यों की ओर बढ़ा जाता है।
उपयोगिता: अमूर्त एवं अप्रत्यक्ष ज्ञान को समझने में सुविधा होती है। -
विशिष्ट से सामान्य की ओर— अनेक विशिष्ट उदाहरणों से सामान्य नियम अथवा सिद्धान्त तक पहुँचा जाता है।
उपयोगिता: विद्यार्थियों में तर्क, निरीक्षण और सामान्यीकरण की क्षमता विकसित होती है।
प्रश्न 38. शिक्षण में 'प्रेरणा के सिद्धान्त' का क्या महत्व है?
उत्तर: प्रेरणा विद्यार्थी को सीखने के लिए सक्रिय करती है और उसे निर्धारित लक्ष्य की ओर निरन्तर प्रयास करने के लिए प्रेरित करती है। शिक्षण में इसका महत्त्व निम्नलिखित है—
- विद्यार्थियों में सीखने की रुचि एवं इच्छा उत्पन्न करती है।
- अवधान एवं एकाग्रता बढ़ाती है।
- अधिगम में सक्रिय सहभागिता को बढ़ावा देती है।
- कठिन कार्यों को पूरा करने के लिए प्रयास एवं दृढ़ता बढ़ाती है।
- उपलब्धि एवं आत्मविश्वास में वृद्धि करती है।
प्रश्न 39. कक्षा सम्प्रेषण में प्रभावशीलता किन-किन तरीकों पर निर्भर करती है?
उत्तर: प्रभावी कक्षा-सम्प्रेषण निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है—
- स्पष्ट भाषा— शिक्षक की भाषा सरल, स्पष्ट एवं विद्यार्थियों के स्तर के अनुरूप हो।
- उपयुक्त विषय-वस्तु— सन्देश क्रमबद्ध, सटीक एवं उद्देश्य के अनुरूप हो।
- कक्षा-वातावरण— वातावरण सौहार्दपूर्ण, भयमुक्त एवं अनावश्यक शोर से मुक्त हो।
- उचित माध्यम— आवश्यकता के अनुसार मौखिक, लिखित तथा दृश्य-श्रव्य सामग्री का प्रयोग किया जाए।
- विद्यार्थियों की सक्रियता— प्रश्न पूछने एवं विचार व्यक्त करने के अवसर दिए जाएँ।
- प्रतिपुष्टि— शिक्षक यह सुनिश्चित करे कि विद्यार्थी ने सन्देश को सही अर्थ में समझा है।
प्रश्न 40. गतिविधि आधारित शिक्षण की उपयोगिता व महत्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: गतिविधि आधारित शिक्षण में विद्यार्थी विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर अनुभव द्वारा सीखता है। इसकी प्रमुख उपयोगिताएँ निम्नलिखित हैं—
- विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता बढ़ती है।
- शिक्षण रुचिकर एवं आनन्ददायक बनता है।
- करके सीखने के कारण ज्ञान अधिक स्थायी होता है।
- तर्क, सृजनात्मकता और समस्या-समाधान क्षमता का विकास होता है।
- सहयोग एवं सामाजिक कौशलों का विकास होता है।
- विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं स्वाध्याय की प्रवृत्ति बढ़ती है।
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