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PYQ 2025 • हिन्दी

हिन्दी Previous Year Paper 2025

UP DELED Semester 4 हिन्दी Previous Year Question Paper 2025 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. अनुस्वार एवं विसर्ग कहलाते हैं—

(a) स्वर

(b) व्यंजन

(c) अयोगवाह

(d) उत्क्षिप्त

उत्तर: (c) अयोगवाह

अनुस्वार (ं) और विसर्ग (ः) को अयोगवाह कहा जाता है। इन्हें न पूर्णतः स्वर माना जाता है और न ही व्यंजन।

प्रश्न 2. 'सुन्दरता' शब्द कौन-सी संज्ञा है?

(a) व्यक्तिवाचक संज्ञा

(b) भाववाचक संज्ञा

(c) जातिवाचक संज्ञा

(d) समुदायवाचक संज्ञा

उत्तर: (b) भाववाचक संज्ञा

‘सुन्दरता’ किसी गुण या भाव का बोध कराती है, इसलिए यह भाववाचक संज्ञा है। ‘सुन्दर’ शब्द में ‘ता’ प्रत्यय जोड़कर ‘सुन्दरता’ बनता है।

प्रश्न 3. 'आँसू' किस कवि की कृति है?

(a) प्रेमचन्द

(b) जयशंकर प्रसाद

(c) महादेवी वर्मा

(d) सुमित्रानंदन पंत

उत्तर: (b) जयशंकर प्रसाद

‘आँसू’ जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध गीतिकाव्य-कृति है। इसका प्रथम संस्करण 1925 ई. में प्रकाशित हुआ था।

प्रश्न 4. हलन्त वर्ण कहलाते हैं—

(a) स्वरयुक्त व्यंजन

(b) स्वररहित व्यंजन

(c) संयुक्त व्यंजन

(d) शुद्ध स्वर

उत्तर: (b) स्वररहित व्यंजन

जिस व्यंजन के साथ हलन्त (्) लगाया जाता है, उसमें अन्तर्निहित स्वर का उच्चारण नहीं होता; जैसे— क्, त्, म्।

प्रश्न 5. 'राजपुरुष' में समास है—

(a) कर्मधारय

(b) तत्पुरुष

(c) द्विगु

(d) बहुव्रीहि

उत्तर: (b) तत्पुरुष

‘राजपुरुष’ का समास-विग्रह राजा का पुरुष है। इसमें ‘का’ सम्बन्ध कारक का लोप हुआ है, इसलिए यह षष्ठी तत्पुरुष समास है।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6. वाचन के चार प्रकार लिखिए।

उत्तर: वाचन के प्रमुख रूप हैं— सस्वर वाचन, मौन वाचन, वैयक्तिक वाचन और सामूहिक वाचन। सामान्य वर्गीकरण में सस्वर और मौन वाचन दो मुख्य प्रकार माने जाते हैं।

प्रश्न 7. मैथिलीशरण गुप्त के दो काव्यों के नाम लिखिए।

उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त के दो प्रसिद्ध काव्य हैं— साकेत और यशोधरा।

प्रश्न 8. कारक किसे कहते हैं?

उत्तर: संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका वाक्य के अन्य पदों, विशेषकर क्रिया से सम्बन्ध प्रकट हो, उसे कारक कहते हैं।

प्रश्न 9. 'असतो मा सद्गमय' सूक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: ‘असतो मा सद्गमय’ का अर्थ है— मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो। यह बृहदारण्यक उपनिषद् के पवमान मन्त्र का अंश है।

प्रश्न 10. नदीशः एवं इत्यादि शब्दों का सन्धि-विच्छेद कीजिए।

उत्तर: नदीशः = नदी + ईशः — दीर्घ सन्धि; इत्यादि = इति + आदि — यण् सन्धि।

प्रश्न 11. 'पतन्ति' शब्द का संस्कृत भाषा में वाक्य-प्रयोग कीजिए।

उत्तर: वृक्षात् पत्राणि पतन्ति। — पेड़ से पत्ते गिरते हैं।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 12. उच्चारण के मुख्य तत्वों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: शुद्ध एवं प्रभावी उच्चारण के प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं—

  1. उच्चारण-स्थान: कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त और ओष्ठ आदि का सही प्रयोग।
  2. वर्णों की शुद्धता: स्वर और व्यंजन का स्पष्ट एवं सही उच्चारण।
  3. मात्रा: ह्रस्व और दीर्घ ध्वनियों की उचित अवधि का ध्यान रखना।
  4. बलाघात: आवश्यक वर्ण या शब्द पर उचित बल देना।
  5. अनुतान: वाणी के आरोह-अवरोह का उचित प्रयोग।
  6. लय एवं गति: न बहुत तेज और न बहुत धीमी गति से बोलना।
  7. विराम: अर्थ के अनुसार उचित स्थान पर रुकना।

प्रश्न 13. छात्रों के लिए पत्र-पत्रिकाएँ पढ़ना क्यों आवश्यक है?

उत्तर: विद्यार्थियों के लिए पत्र-पत्रिकाओं का नियमित पठन अत्यन्त उपयोगी है। इसके प्रमुख लाभ हैं—

  1. देश-दुनिया की समसामयिक घटनाओं की जानकारी मिलती है।
  2. सामान्य ज्ञान तथा सामाजिक जागरूकता बढ़ती है।
  3. शब्द-भण्डार एवं भाषा-अभिव्यक्ति का विकास होता है।
  4. पठन-बोध और आलोचनात्मक चिन्तन की क्षमता बढ़ती है।
  5. विज्ञान, शिक्षा, खेल, साहित्य और संस्कृति आदि विविध विषयों का ज्ञान मिलता है।
  6. विद्यार्थियों में स्वतंत्र पठन एवं अध्ययन की आदत विकसित होती है।

प्रश्न 14. अनिवार्य संस्कृत में उच्चारण दोषों के निराकरण के उपायों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: संस्कृत में उच्चारण-दोष दूर करने के लिए निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं—

  1. वर्णों के सही उच्चारण-स्थान और प्रयत्न का ज्ञान कराया जाए।
  2. शिक्षक स्वयं शुद्ध एवं स्पष्ट आदर्श उच्चारण प्रस्तुत करे।
  3. विद्यार्थियों से नियमित अनुकरण एवं उच्चारण-अभ्यास कराया जाए।
  4. ह्रस्व-दीर्घ स्वर, अनुस्वार, विसर्ग तथा संयुक्त व्यंजनों का विशेष अभ्यास कराया जाए।
  5. क्षेत्रीय बोली अथवा मातृभाषा के प्रभाव से होने वाली त्रुटियों की पहचान कर सुधार किया जाए।
  6. लय, गति, बलाघात, अनुतान एवं विराम का उचित अभ्यास कराया जाए।

प्रश्न 15. प्रयाग में लगने वाले 'महाकुम्भ' का महत्त्व बताते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए।

उत्तर:

प्रयागराज
दिनांक — ________

प्रिय मित्र बिहारी,
सप्रेम नमस्कार।

आशा है तुम सकुशल होगे। प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ का वातावरण अत्यन्त भव्य और आकर्षक है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम पर आयोजित यह मेला भारतीय धार्मिक आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का महत्त्वपूर्ण प्रतीक है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-सन्त और पर्यटक यहाँ आते हैं।

महाकुम्भ में संगम-स्नान के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इतनी विविधता के लोगों को एक स्थान पर देखकर भारतीय संस्कृति की ‘एकता में अनेकता’ का अद्भुत स्वरूप दिखाई देता है।

मेरी इच्छा है कि तुम भी अपने परिवार के साथ यहाँ आओ और इस अद्भुत आयोजन का अनुभव करो। अपने आने के कार्यक्रम की सूचना अवश्य देना।

माता-पिता को मेरा प्रणाम।
तुम्हारा मित्र,
आनन्द

प्रश्न 16. निम्नलिखित श्लोक का अर्थ लिखिए—
अक्रोधेन जयेत् क्रोधम् असाधुं साधुना जयेत्।
जयेत् कदर्यं दानेन जयेत् सत्येन चानृतम्॥

उत्तर: क्रोध को अक्रोध अर्थात् शान्ति से, दुष्टता को सदाचार से, कृपणता को दान से और असत्य को सत्य से जीतना चाहिए। इस श्लोक में बुराइयों पर उनके विपरीत सद्गुणों द्वारा विजय प्राप्त करने की शिक्षा दी गई है।

प्रश्न 17. लेखन किसे कहते हैं? एवं लेखन के भेद लिखिए।

उत्तर: अपने विचारों, भावों एवं अनुभवों को भाषा के लिखित रूप में स्पष्ट और व्यवस्थित ढंग से व्यक्त करने की क्रिया को लेखन कहते हैं। भाषा-शिक्षण में लेखन के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—

  1. सुलेख: वर्णों एवं शब्दों को स्पष्ट, सुन्दर, सुडौल तथा व्यवस्थित रूप में लिखना सुलेख कहलाता है।
  2. अनुलेख: पुस्तक, श्यामपट्ट अथवा किसी लिखित नमूने को देखकर उसी के अनुसार लिखना अनुलेख कहलाता है।
  3. श्रुतलेख: शिक्षक अथवा वक्ता द्वारा बोले गए शब्दों या वाक्यों को सुनकर शुद्ध रूप में लिखना श्रुतलेख कहलाता है।

प्रश्न 18. आत्मकथा एवं जीवनी में अन्तर बताते हुए एक-एक रचना का नामोल्लेख कीजिए।

उत्तर:

आत्मकथा जीवनी
आत्मकथा में लेखक स्वयं अपने जीवन का वर्णन करता है। जीवनी में लेखक किसी अन्य व्यक्ति के जीवन का वर्णन करता है।
लेखक और वर्णित व्यक्ति एक ही होता है। लेखक और वर्णित व्यक्ति अलग-अलग होते हैं।
यह मुख्यतः लेखक के निजी अनुभवों और स्मृतियों पर आधारित होती है। यह दस्तावेजों, साक्ष्यों, घटनाओं और अन्य स्रोतों पर आधारित होती है।
वर्णन सामान्यतः प्रथम पुरुष में होता है। वर्णन सामान्यतः तृतीय पुरुष में होता है।

उदाहरण:

विधा रचना लेखक
आत्मकथा क्या भूलूँ क्या याद करूँ हरिवंश राय बच्चन
जीवनी प्रेमचन्द: कलम का सिपाही अमृत राय
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