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शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त Previous Year Paper 2019

UP DELED Semester 1 शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त Previous Year Question Paper 2019 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. शिक्षण एक उद्देश्य-निर्देशित क्रिया है, यह किसने कहा है?

(a) एन. एल. गेज

(b) रायबर्न

(c) बी. ओ. स्मिथ

(d) सीकोर्ड

उत्तर: (c) बी. ओ. स्मिथ।

व्याख्या: बी. ओ. स्मिथ ने शिक्षण को उद्देश्य-निर्देशित क्रिया माना है। अर्थात् शिक्षण किसी निश्चित शैक्षिक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

प्रश्न 2. आगमन विधि का प्रयोग किया जाता है—

(a) व्याकरण में

(b) निबन्ध में

(c) गद्य शिक्षण में

(d) पद्य शिक्षण में

उत्तर: (a) व्याकरण में।

व्याख्या: व्याकरण शिक्षण में आगमन विधि के अन्तर्गत पहले उदाहरण प्रस्तुत किए जाते हैं और उनके आधार पर विद्यार्थी सामान्य नियम तक पहुँचते हैं।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से श्रव्य-दृश्य सामग्री के चयन में सर्वाधिक प्रमुख है—

(a) धन व्यवस्था

(b) विषय-वस्तु की प्रकृति

(c) शिक्षकों की पसन्द

(d) छात्रों की पसन्द

उत्तर: (b) विषय-वस्तु की प्रकृति।

व्याख्या: शिक्षण-अधिगम सामग्री का चयन मुख्यतः विषय-वस्तु, शिक्षण उद्देश्य तथा विद्यार्थियों के स्तर के अनुसार किया जाना चाहिए।

प्रश्न 4. कक्षा शिक्षण में कौन-सा सम्प्रेषण का घटक नहीं है?

(a) शिक्षक

(b) पाठ्य-वस्तु

(c) अभिभावक

(d) छात्र

उत्तर: (c) अभिभावक।

व्याख्या: कक्षा-सम्प्रेषण में शिक्षक प्रेषक, पाठ्य-वस्तु संदेश तथा विद्यार्थी ग्राही की भूमिका निभाता है। अभिभावक इसका प्रत्यक्ष कक्षागत घटक नहीं है।

प्रश्न 5. शिक्षक द्वारा कक्षा में अन्त्याक्षरी एवं काव्य-पाठ प्रतियोगिता कराना कौन-सा शिक्षण सिद्धान्त है?

(a) नियोजन का सिद्धान्त

(b) निश्चित उद्देश्य का सिद्धान्त

(c) क्रियाशीलता का सिद्धान्त

(d) अभिप्रेरण एवं रुचि का सिद्धान्त

उत्तर: (c) क्रियाशीलता का सिद्धान्त।

व्याख्या: अन्त्याक्षरी एवं काव्य-पाठ जैसी गतिविधियों में विद्यार्थी स्वयं सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इसलिए यह क्रियाशीलता के सिद्धान्त का उदाहरण है।

प्रश्न 6. उदाहरणों एवं दृष्टान्तों के द्वारा कोई सामान्य नियम या सिद्धान्त बनाना कौन-सा शिक्षण सूत्र है?

(a) तर्कना की ओर

(b) विशिष्ट से सामान्य की ओर

(c) विश्लेषण से संश्लेषण की ओर

(d) संश्लेषण से विश्लेषण की ओर

उत्तर: (b) विशिष्ट से सामान्य की ओर।

व्याख्या: इस शिक्षण-सूत्र में अनेक विशिष्ट उदाहरणों एवं तथ्यों के आधार पर सामान्य नियम अथवा सिद्धान्त तक पहुँचा जाता है।

प्रश्न 7. पाठशाला/विद्यालय को उद्यान की संज्ञा किसने दी है?

(a) हरबर्ट

(b) मॉन्टेसरी

(c) फ्रॉबेल

(d) फ्रेंकलिन

उत्तर: (c) फ्रॉबेल।

व्याख्या: फ्रेडरिक फ्रॉबेल ने किण्डरगार्टन पद्धति विकसित की। 'किण्डरगार्टन' का अर्थ 'बाल उद्यान' है, जिसमें शिक्षक को माली और बच्चों को पौधों के समान माना गया।

प्रश्न 8. छात्रों द्वारा अपने भावों एवं विचारों को व्यवस्थित ढंग से अभिव्यक्त करना किस प्रविधि में आता है?

(a) प्रश्नोत्तर प्रविधि

(b) वाद-विवाद प्रविधि

(c) प्रयोगशाला प्रविधि

(d) पाठ्य-पुस्तक प्रविधि

उत्तर: (b) वाद-विवाद प्रविधि।

व्याख्या: वाद-विवाद में विद्यार्थी किसी विषय के पक्ष या विपक्ष में अपने विचारों को तार्किक, स्पष्ट एवं क्रमबद्ध रूप से व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 9. प्रश्नोत्तर प्रविधि के जन्मदाता हैं—

(a) रूसो

(b) प्लेटो

(c) सुकरात

(d) अरस्तू

उत्तर: (c) सुकरात।

व्याख्या: सुकरात शिक्षण में क्रमबद्ध प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थी को स्वयं उत्तर तक पहुँचने के लिए प्रेरित करते थे। इसलिए प्रश्नोत्तर विधि को सुकराती विधि भी कहा जाता है।

प्रश्न 10. सम्प्रेषण प्रक्रिया प्रभावी होती है यदि सम्प्रेषण—

(a) मन्द गति से होता है

(b) अनेक व्यक्तियों के साथ होता है

(c) तीव्र गति से होता है

(d) स्पष्टता के साथ होता है

उत्तर: (d) स्पष्टता के साथ होता है।

व्याख्या: प्रभावी सम्प्रेषण के लिए संदेश सरल, स्पष्ट, सटीक और ग्राही के लिए बोधगम्य होना चाहिए।

प्रश्न 11. कक्षा-कक्षों की कमी होने पर शिक्षक अपनाता है—

(a) बहुकक्षा शिक्षण

(b) बहुस्तरीय शिक्षण विधि

(c) उपचारात्मक शिक्षण विधि

(d) सहभागी शिक्षण विधि

उत्तर: (a) बहुकक्षा शिक्षण।

व्याख्या: बहुकक्षा शिक्षण में एक शिक्षक एक ही समय में दो या दो से अधिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाता है। सीमित शिक्षक अथवा कक्षा-कक्ष वाले विद्यालयों में यह व्यवस्था उपयोगी होती है।

प्रश्न 12. कक्षा शिक्षण में प्रशंसात्मक शब्दों का प्रयोग किया जाता है—

(a) व्याख्यान कौशल

(b) नियमन कौशल

(c) पुनर्बलन कौशल

(d) उद्दीपन परिवर्तन कौशल

उत्तर: (c) पुनर्बलन कौशल।

व्याख्या: 'बहुत अच्छा', 'शाबाश' आदि प्रशंसात्मक शब्द धनात्मक पुनर्बलन के उदाहरण हैं। इनके प्रयोग से विद्यार्थी के उचित उत्तर एवं वांछित व्यवहार को प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 13. कक्षा शिक्षण करते समय शिक्षक द्वारा टी.एल.एम. का प्रयोग करने से—

(a) छात्रों को पाठ सहजता से बोधगम्य हो जाता है

(b) छात्रों का मानसिक विकास होता है

(c) छात्रों का बौद्धिक विकास होता है

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।

व्याख्या: उपयुक्त शिक्षण-अधिगम सामग्री से विषय-वस्तु अधिक स्पष्ट और बोधगम्य होती है तथा विद्यार्थियों की मानसिक एवं बौद्धिक सक्रियता को बढ़ावा मिलता है।

प्रश्न 14. फ्लैनल बोर्ड किस प्रकार का टी.एल.एम. है?

(a) दृश्य-श्रव्य

(b) श्रव्य

(c) दृश्य

(d) इलेक्ट्रॉनिक

उत्तर: (c) दृश्य।

व्याख्या: फ्लैनल बोर्ड पर चित्र, शब्द, आकृतियाँ एवं अन्य दृश्य सामग्री प्रदर्शित की जाती है। इसलिए यह दृश्य शिक्षण-अधिगम सामग्री है।

प्रश्न 15. कौन-सा प्रकृति-प्राप्त टी.एल.एम. नहीं है?

(a) कंकड़-पत्थर

(b) मानचित्र

(c) टहनियाँ

(d) पत्तियाँ

उत्तर: (b) मानचित्र।

व्याख्या: कंकड़-पत्थर, टहनियाँ तथा पत्तियाँ प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री हैं, जबकि मानचित्र मानव-निर्मित शिक्षण सामग्री है।

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Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. शिक्षण को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: शिक्षण एक उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक शिक्षार्थी को सीखने हेतु मार्गदर्शन एवं उपयुक्त अधिगम-अवसर प्रदान करता है।

प्रश्न 17. प्रभावी सम्प्रेषण के दो तरीके बताइए।

उत्तर: (1) सरल एवं स्पष्ट भाषा का प्रयोग। (2) उचित प्रतिपुष्टि प्राप्त करना।

प्रश्न 18. किन्हीं दो शिक्षण सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: (1) क्रियाशीलता का सिद्धान्त। (2) रुचि का सिद्धान्त।

प्रश्न 19. शिक्षण सूत्रों से होने वाले दो लाभ बताइए।

उत्तर: (1) शिक्षण को सरल एवं क्रमबद्ध बनाते हैं। (2) अधिगम को मनोवैज्ञानिक एवं बोधगम्य बनाते हैं।

प्रश्न 20. प्रकृति का अनुसरण-सूत्र से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तर: बालक की आयु, प्रकृति, रुचि, क्षमता तथा शारीरिक-मानसिक विकास के अनुरूप शिक्षा देना प्रकृति का अनुसरण-सूत्र है।

प्रश्न 21. प्रश्नोत्तर प्रविधि के दो लाभ बताइए।

उत्तर: (1) विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान एवं समझ की जाँच होती है। (2) रुचि, जिज्ञासा एवं चिन्तन का विकास होता है।

प्रश्न 22. शिक्षण में खेल प्रविधि का महत्व बताइए।

उत्तर: खेल प्रविधि शिक्षण को आनन्ददायक एवं सक्रिय बनाकर बालक के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास में सहायता करती है।

प्रश्न 23. बाल-केन्द्रित शिक्षण एवं शिक्षक-केन्द्रित शिक्षण में अन्तर बताइए।

उत्तर: बाल-केन्द्रित शिक्षण में बालक सक्रिय केन्द्र तथा शिक्षक मार्गदर्शक होता है, जबकि शिक्षक-केन्द्रित शिक्षण में शिक्षक की भूमिका प्रधान होती है।

प्रश्न 24. बहुस्तरीय शिक्षण का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: एक ही कक्षा में विभिन्न उपलब्धि एवं क्षमता स्तर वाले विद्यार्थियों को उनके स्तर के अनुरूप शिक्षण देना बहुस्तरीय शिक्षण कहलाता है।

प्रश्न 25. निदानात्मक एवं उपचारात्मक शिक्षण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: निदानात्मक प्रक्रिया में अधिगम-कठिनाइयों और उनके कारणों की पहचान की जाती है, जबकि उपचारात्मक शिक्षण द्वारा उन कठिनाइयों को दूर किया जाता है।

प्रश्न 26. एक अच्छी प्रस्तावना के दो गुणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: (1) प्रस्तावना रोचक एवं उद्देश्यपूर्ण हो। (2) वह विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान को नवीन पाठ से जोड़े।

प्रश्न 27. 'कठिन-निवारण' किस विषय की पाठ योजना का घटक है, यह क्यों किया जाता है?

उत्तर: कठिन-निवारण गद्य-शिक्षण की पाठ योजना का घटक है। इसका उद्देश्य कठिन शब्दों, मुहावरों एवं सन्दर्भों का अर्थ स्पष्ट करना है।

प्रश्न 28. अपेक्षित-अधिगम स्तर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी कक्षा एवं विषय के अध्ययन के बाद विद्यार्थी से अपेक्षित निर्धारित ज्ञान और दक्षता को अपेक्षित अधिगम स्तर कहते हैं।

प्रश्न 29. शिक्षण-अधिगम सामग्री के रख-रखाव में क्या सावधानी रखनी चाहिए?

उत्तर: सामग्री को स्वच्छ, सुरक्षित, व्यवस्थित एवं उचित स्थान पर रखकर टूट-फूट, नमी और धूल से बचाना चाहिए।

प्रश्न 30. गणित-किट के किन्हीं दो उपकरणों के नाम बताइए।

उत्तर: परकार और चाँदा।

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Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. उत्तम शिक्षण की क्या विशेषताएँ हैं?

उत्तर: उत्तम शिक्षण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  • शिक्षण उद्देश्यपूर्ण एवं योजनाबद्ध होता है।
  • यह विद्यार्थी के पूर्वज्ञान, रुचि, आयु एवं मानसिक स्तर पर आधारित होता है।
  • विद्यार्थियों को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सक्रिय रखता है।
  • विषय-वस्तु को सरल, स्पष्ट एवं क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करता है।
  • वैयक्तिक भिन्नताओं का ध्यान रखता है।
  • उचित शिक्षण-अधिगम सामग्री एवं गतिविधियों का प्रयोग करता है।
  • प्रतिपुष्टि एवं मूल्यांकन द्वारा अधिगम की जाँच करता है।
  • बालक के सर्वांगीण विकास में सहायता करता है।

प्रश्न 32. सम्प्रेषण में बाधक तत्व कौन-कौन हैं?

उत्तर: सम्प्रेषण में आने वाली वे परिस्थितियाँ जो संदेश के सही प्रेषण अथवा ग्रहण में बाधा उत्पन्न करती हैं, सम्प्रेषण-बाधाएँ कहलाती हैं। प्रमुख बाधाएँ हैं—

  • भाषागत बाधा— कठिन, अस्पष्ट अथवा दोहरे अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग।
  • भौतिक बाधा— शोर, दूरी, प्रकाश या बैठने की अनुपयुक्त व्यवस्था।
  • तकनीकी बाधा— माइक्रोफोन, प्रोजेक्टर या अन्य उपकरणों में खराबी।
  • मनोवैज्ञानिक बाधा— भय, तनाव, पूर्वाग्रह, अरुचि अथवा ध्यान की कमी।
  • अर्थगत बाधा— प्रेषक और ग्राही द्वारा संदेश का अलग-अलग अर्थ ग्रहण करना।
  • प्रतिपुष्टि का अभाव— ग्राही की प्रतिक्रिया न मिलने से यह स्पष्ट नहीं होता कि संदेश सही रूप में समझा गया या नहीं।

प्रश्न 33. शिक्षण में 'नियोजन के सिद्धान्त' से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: नियोजन के सिद्धान्त के अनुसार शिक्षक को कक्षा में शिक्षण प्रारम्भ करने से पूर्व उद्देश्य, विषय-वस्तु, शिक्षण-विधि, गतिविधि, शिक्षण-अधिगम सामग्री तथा मूल्यांकन की योजना तैयार करनी चाहिए।

नियोजन का महत्त्व—

  • शिक्षण को उद्देश्यपूर्ण एवं क्रमबद्ध बनाता है।
  • समय और उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग होता है।
  • उपयुक्त शिक्षण-विधि एवं सामग्री के चयन में सहायता मिलती है।
  • अधिगम उद्देश्यों एवं मूल्यांकन में समन्वय स्थापित होता है।
  • शिक्षक को कक्षा-शिक्षण के लिए स्पष्ट दिशा प्राप्त होती है।

प्रश्न 34. 'पूर्ण से अंश की ओर' शिक्षण-सूत्र को सोदाहरण समझाइए।

उत्तर: 'पूर्ण से अंश की ओर' सूत्र के अनुसार किसी वस्तु, तथ्य या विषय को पहले उसके सम्पूर्ण रूप में प्रस्तुत किया जाता है और बाद में उसके विभिन्न भागों का अध्ययन कराया जाता है। यह सूत्र गेस्टाल्ट मनोविज्ञान की सम्पूर्णता की धारणा से सम्बन्धित है।

उदाहरण: पौधे का अध्ययन कराते समय पहले पूरे पौधे को दिखाया जाए और उसके बाद जड़, तना, पत्ती, फूल आदि भागों का अलग-अलग अध्ययन कराया जाए।

प्रश्न 35. 'समूह चर्चा विधि' के लाभ लिखिए।

उत्तर: समूह चर्चा में विद्यार्थी किसी निश्चित विषय पर आपस में विचार-विमर्श करते हैं। इसके प्रमुख लाभ हैं—

  • विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता बढ़ती है।
  • विचारों को स्पष्ट एवं क्रमबद्ध ढंग से व्यक्त करने की क्षमता विकसित होती है।
  • तर्क एवं आलोचनात्मक चिन्तन का विकास होता है।
  • दूसरों के विचारों को सुनने एवं सम्मान करने की प्रवृत्ति विकसित होती है।
  • सहयोग, नेतृत्व एवं सामाजिक कौशलों का विकास होता है।
  • आत्मविश्वास एवं संचार-कौशल में वृद्धि होती है।

प्रश्न 36. कक्षा-शिक्षण करते समय अच्छे प्रश्न की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: अच्छे प्रश्न की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  • प्रश्न सरल, स्पष्ट एवं संक्षिप्त हो।
  • प्रश्न विषय-वस्तु एवं शिक्षण उद्देश्य से सम्बन्धित हो।
  • प्रश्न विद्यार्थियों की आयु एवं मानसिक स्तर के अनुरूप हो।
  • प्रश्न में अस्पष्टता अथवा अनावश्यक कठिन शब्द न हों।
  • प्रश्न विद्यार्थियों को सोचने एवं उत्तर देने के लिए प्रेरित करे।
  • प्रश्न क्रमबद्ध एवं विकासात्मक हों।

प्रश्न 37. 'बाल-केन्द्रित शिक्षण' की चार प्रविधियों के नाम लिखिए।

उत्तर:

  1. देखो और कहो प्रविधि।
  2. सामूहिक पाठन प्रविधि।
  3. वाक्य शिक्षण प्रविधि।
  4. कहानी प्रविधि।

प्रश्न 38. 'श्यामपट्ट लेखन' करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?

उत्तर: श्यामपट्ट लेखन करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए—

  • श्यामपट्ट साफ एवं विद्यार्थियों को स्पष्ट दिखाई देने वाला हो।
  • लेखन स्पष्ट, सीधा, पर्याप्त बड़ा और पठनीय हो।
  • मुख्य शीर्षकों एवं उपशीर्षकों को व्यवस्थित रूप से लिखा जाए।
  • अनावश्यक सामग्री लिखकर श्यामपट्ट को न भरा जाए।
  • वर्तनी, तथ्य एवं गणना की शुद्धता का ध्यान रखा जाए।
  • लिखते समय शिक्षक लगातार श्यामपट्ट की ओर पीठ करके न खड़ा रहे।
  • चित्र एवं आकृतियाँ साफ, सरल एवं उचित अनुपात में बनाई जाएँ।

प्रश्न 39. अपेक्षित अधिगम स्तर सम्प्राप्ति के चार उपाय लिखिए।

उत्तर: अपेक्षित अधिगम स्तर की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं—

  1. अपेक्षित ज्ञान एवं दक्षताओं को स्पष्ट रूप से निर्धारित करना।
  2. विद्यार्थियों के स्तर के अनुरूप गतिविधि एवं अनुभव आधारित शिक्षण कराना।
  3. नियमित एवं सतत मूल्यांकन द्वारा अधिगम-प्रगति की जाँच करना।
  4. अधिगम-कठिनाइयों वाले विद्यार्थियों को आवश्यक उपचारात्मक शिक्षण एवं अतिरिक्त अभ्यास देना।

प्रश्न 40. श्रव्य-दृश्य शिक्षण-अधिगम सामग्री की चार विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: श्रव्य-दृश्य शिक्षण-अधिगम सामग्री की चार प्रमुख विशेषताएँ हैं—

  1. यह सुनने और देखने दोनों इन्द्रियों को सक्रिय करती है।
  2. जटिल एवं अमूर्त विषय-वस्तु को सरल और स्पष्ट बनाती है।
  3. विद्यार्थियों की रुचि, ध्यान एवं सक्रियता बढ़ाती है।
  4. प्राप्त ज्ञान को अधिक प्रभावी एवं स्थायी बनाने में सहायता करती है।
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