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Home Study Material Semester 3 विज्ञान दैनिक जीवन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
Chapter 1 • विज्ञान

दैनिक जीवन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

UP DELED Semester 3 विज्ञान विषय के इस अध्याय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का अर्थ, वैज्ञानिक विधि, भारतीय एवं विदेशी वैज्ञानिकों का योगदान, प्रौद्योगिकी की अवधारणा, आधुनिक समाज पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की देन, परिवहन, संचार, चिकित्सा, मनोरंजन, उद्योग, कृषि, मत्स्यपालन, कुक्कुट पालन, दूरस्थ शिक्षा, आधुनिक ईंधन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से मानव समाज को होने वाले लाभ एवं हानि का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

10
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Topic 1 विज्ञान का अर्थ, परिचय एवं वैज्ञानिक विधि

विज्ञान का अर्थ, परिचय एवं वैज्ञानिक विधि

विज्ञान का अर्थ

विज्ञान शब्द वि + ज्ञान से मिलकर बना है। इसका अर्थ विशेष प्रकार का ज्ञान, परिष्कृत ज्ञान अथवा विशिष्ट ज्ञान है।

इस प्रकार अनुभवों तथा वैज्ञानिक तरीकों के माध्यम से प्राप्त विशेष ज्ञान या क्रमबद्ध जानकारी को विज्ञान कहा जाता है।

आधुनिक युग को विज्ञान का युग कहा जाता है, क्योंकि मानव जीवन का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जो विज्ञान के प्रभाव से अछूता हो।

विज्ञान की उत्पत्ति का आधार

परिवर्तन प्रकृति का नियम है और इन परिवर्तनों का प्रभाव मानव पर भी पड़ता है। मनुष्य का मन प्रारम्भ से ही जिज्ञासु रहा है। वह अपने आसपास होने वाली प्राकृतिक तथा सामाजिक घटनाओं को समझने का प्रयास करता रहा है।

इसी जिज्ञासा और खोज की प्रवृत्ति को विज्ञान के विकास का आधार माना जा सकता है।

मनुष्य प्राकृतिक वस्तुओं तथा घटनाओं को देखकर अनेक प्रश्न करता रहा है, जैसे—

  • नदियाँ और पहाड़ कैसे बने?
  • जीव-जंतु किस प्रकार जीवित रहते हैं?
  • हवा कैसे चलती है?
  • दिन और रात कैसे होते हैं?
  • बीज से वृक्ष कैसे बनता है?

इन प्रश्नों के उत्तर खोजने के लिए किए गए निरन्तर प्रयासों से वैज्ञानिक ज्ञान का विकास हुआ।

विज्ञान की प्रमुख धारणा

विज्ञान की यह मान्यता है कि जो भी घटना घटित होती है, उसके पीछे कोई-न-कोई कारण अवश्य होता है।

विज्ञान का कार्य केवल किसी घटना को देखना या उसका वर्णन करना नहीं है, बल्कि उसके पीछे उपस्थित कारण को खोजने और समझने का प्रयास करना भी है।

मनुष्य ने अपने जीवन को सरल और सुखमय बनाने के लिए निरन्तर नई-नई खोजें कीं। इन खोजों के आधार पर अनेक आविष्कार हुए और इनके व्यावहारिक प्रयोग से तकनीकी का विकास हुआ।

विज्ञान और तकनीकी का प्रारम्भिक सम्बन्ध

वैज्ञानिक खोजों से प्राप्त ज्ञान का जब निर्माण और व्यावहारिक कार्यों में उपयोग किया जाता है, तब वह तकनीकी विकास में सहायक होता है।

सामान्य भाषा में तकनीकी का सम्बन्ध कला, निर्माण और वैज्ञानिक ज्ञान के व्यावहारिक प्रयोग से माना जाता है।

वैज्ञानिक विधि (Scientific Method)

किसी घटना या समस्या के वास्तविक कारण का वैज्ञानिक ढंग से पता लगाने की प्रक्रिया को वैज्ञानिक विधि के रूप में समझा जा सकता है।

मनुष्य अपने आसपास अनेक घटनाएँ देखता है और उनके कारणों के बारे में प्रश्न करता है। वैज्ञानिक विधि द्वारा इन कारणों का अध्ययन करके उचित निष्कर्ष निकाला जाता है।

वैज्ञानिक विधि को उदाहरण से समझें

यदि किसी वस्तु को हवा में ऊपर उछाला जाए, तो वह कुछ समय बाद पुनः जमीन पर गिर जाती है।

प्रश्न उत्पन्न होता है कि वस्तु नीचे ही क्यों गिरती है?

इसका कारण गुरुत्वाकर्षण बल है। न्यूटन के अनुसार पृथ्वी में उपस्थित गुरुत्वाकर्षण बल किसी वस्तु को अपनी ओर खींचने की शक्ति रखता है।

इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि विज्ञान किसी घटना को केवल स्वीकार नहीं करता, बल्कि उसके पीछे के कारण को जानने का प्रयास करता है।

वैज्ञानिक सोच की सरल प्रक्रिया

वैज्ञानिक सोच की प्रक्रिया को सरल क्रम में इस प्रकार समझ सकते हैं—

घटना का अवलोकन → जिज्ञासा या प्रश्न → कारण की खोज → वैज्ञानिक विधि से अध्ययन → निष्कर्ष

विज्ञान का मानव जीवन में महत्त्व

विज्ञान ने मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वैज्ञानिक खोजों और उनसे विकसित तकनीकी साधनों के कारण निर्माण, परिवहन, चिकित्सा, संचार, कृषि तथा दैनिक जीवन के अनेक कार्य अधिक सरल हुए हैं।

इस प्रकार विज्ञान ज्ञान प्रदान करता है और उस ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक होता है।

विज्ञान का सार एक नजर में

आधार मुख्य तथ्य
शब्द निर्माण वि + ज्ञान
अर्थ विशेष, परिष्कृत अथवा विशिष्ट ज्ञान
ज्ञान का आधार अनुभव एवं वैज्ञानिक तरीके
विकास का आधार मानव की जिज्ञासा और खोज की प्रवृत्ति
मुख्य मान्यता प्रत्येक घटना के पीछे कोई-न-कोई कारण होता है
वैज्ञानिक विधि घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन कर निष्कर्ष निकालना
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • विज्ञान शब्द वि + ज्ञान से मिलकर बना है और इसका अर्थ विशेष अथवा परिष्कृत ज्ञान है।
  • अनुभवों तथा वैज्ञानिक तरीकों से प्राप्त क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कहा जाता है।
  • मानव की जिज्ञासा और प्राकृतिक तथा सामाजिक घटनाओं को जानने की इच्छा विज्ञान के विकास का आधार है।
  • विज्ञान की मान्यता है कि प्रत्येक घटना के पीछे कोई-न-कोई कारण अवश्य होता है।
  • वैज्ञानिक विधि द्वारा घटनाओं के कारणों का अध्ययन करके निष्कर्ष निकाला जाता है।
  • वस्तु का पृथ्वी पर गिरना गुरुत्वाकर्षण बल का उदाहरण है।
  • वैज्ञानिक खोजों के व्यावहारिक उपयोग से तकनीकी का विकास होता है।

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Topic 2 वैज्ञानिक खोजों में भारतीय एवं विदेशी वैज्ञानिकों का योगदान

वैज्ञानिक खोजों में भारतीय एवं विदेशी वैज्ञानिकों का योगदान

वैज्ञानिक खोजों में वैज्ञानिकों का योगदान

विज्ञान के विकास में भारतीय तथा विदेशी वैज्ञानिकों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक अनेक वैज्ञानिकों ने चिकित्सा, गणित, वनस्पति विज्ञान, कृषि, अन्तरिक्ष, आनुवंशिकी तथा अन्य क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण खोजें और आविष्कार किए।

भारतीय वैज्ञानिकों का योगदान

भारतीय वैज्ञानिकों ने प्राचीन काल से ही वैज्ञानिक खोजों में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। प्राचीन भारत के कुछ प्रमुख विद्वान एवं उनके योगदान निम्नलिखित हैं—

  • चरक— प्राचीन काल के महान चिकित्सक चरक ने जड़ी-बूटियों का औषधि के रूप में उपयोग करना बताया।
  • श्रीधराचार्य— श्रीधराचार्य ने वर्ग का समीकरण दिया।
  • आर्यभट्ट— महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने पाई (π) का मान लगभग 3.14 बताया।

आधुनिक भारतीय वैज्ञानिक एवं उनका योगदान

1. जगदीश चन्द्र बोस (Jagdish Chandra Bose)

जगदीश चन्द्र बोस वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक थे।

पौधों में चेतना शक्ति की खोज का श्रेय उन्हें दिया गया है। उन्होंने क्रेस्कोग्राफ का आविष्कार किया, जिसकी सहायता से पौधों में होने वाली वृद्धि का मापन किया जाता है।

2. प्रो. सतीश धवन (Prof. Satish Dhawan)

प्रो. सतीश धवन प्रमुख भारतीय वैज्ञानिक थे। उन्होंने अन्तरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

भारतीय कृत्रिम उपग्रह आर्यभट्ट तथा रोहिणी के प्रक्षेपण में उनके प्रयासों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा।

3. डॉ. ए.बी. जोशी (Dr. A. B. Joshi)

डॉ. ए.बी. जोशी ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

वे इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक थे। कृषि के क्षेत्र में उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 1975 में बोरलॉग पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

4. डॉ. हरगोविन्द खुराना (Dr. Hargovind Khurana)

डॉ. हरगोविन्द खुराना भारत के मूल निवासी थे और बाद में अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने वाले वैज्ञानिक बने।

उन्हें जेनेटिक कोड पर किए गए शोध कार्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने कृत्रिम जीन का निर्माण भी किया।

5. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam)

ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन (Missile Man) के नाम से भी जाना जाता है।

उन्होंने अग्नि एवं पृथ्वी जैसे प्रक्षेपास्त्रों को स्वदेशी तकनीक से विकसित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

भारत सरकार द्वारा उन्हें 1981 में पद्म भूषण सम्मान प्रदान किया गया।

आधुनिक भारतीय वैज्ञानिक एक नजर में

वैज्ञानिक प्रमुख क्षेत्र / योगदान
जगदीश चन्द्र बोस वनस्पति विज्ञान, पौधों में चेतना शक्ति, क्रेस्कोग्राफ
प्रो. सतीश धवन अन्तरिक्ष अनुसंधान, आर्यभट्ट एवं रोहिणी उपग्रहों के प्रक्षेपण में योगदान
डॉ. ए.बी. जोशी कृषि विज्ञान, 1975 में बोरलॉग पुरस्कार
डॉ. हरगोविन्द खुराना जेनेटिक कोड पर शोध, कृत्रिम जीन का निर्माण
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मिसाइल तकनीक, अग्नि एवं पृथ्वी प्रक्षेपास्त्र

विदेशी वैज्ञानिकों का योगदान

वैज्ञानिक खोजों में विदेशी वैज्ञानिकों का भी महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। कुछ प्रमुख विदेशी वैज्ञानिक तथा उनकी खोजें निम्नलिखित हैं—

1. एडवर्ड जेनर (Edward Jenner)

एडवर्ड जेनर ने वैक्सीन का निर्माण किया।

2. अलेक्जेंडर फ्लेमिंग (Alexander Fleming)

अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने पेनिसिलिन की खोज की।

3. गैलीलियो (Galileo)

गैलीलियो का सम्बन्ध दूरबीन की खोज से बताया गया है।

4. सर आइजक न्यूटन (Sir Isaac Newton)

सर आइजक न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण की खोज की।

5. मारकोनी (Marconi)

मारकोनी ने रेडियो का आविष्कार किया।

विदेशी वैज्ञानिक एवं उनकी प्रमुख खोजें

वैज्ञानिक प्रमुख खोज / योगदान
एडवर्ड जेनर वैक्सीन का निर्माण
अलेक्जेंडर फ्लेमिंग पेनिसिलिन की खोज
गैलीलियो दूरबीन की खोज
सर आइजक न्यूटन गुरुत्वाकर्षण की खोज
मारकोनी रेडियो का आविष्कार

भारतीय एवं विदेशी वैज्ञानिकों के योगदान का महत्त्व

इन वैज्ञानिकों की खोजों और आविष्कारों ने चिकित्सा, गणित, कृषि, वनस्पति विज्ञान, अन्तरिक्ष विज्ञान, आनुवंशिकी तथा संचार जैसे अनेक क्षेत्रों के विकास में सहायता की।

इन खोजों से यह स्पष्ट होता है कि विज्ञान का विकास किसी एक समय या एक देश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभिन्न कालों में अनेक वैज्ञानिकों के योगदान से वैज्ञानिक ज्ञान का विस्तार हुआ।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • चरक ने जड़ी-बूटियों के औषधीय उपयोग के बारे में बताया।
  • श्रीधराचार्य ने वर्ग का समीकरण दिया तथा आर्यभट्ट ने π का मान लगभग 3.14 बताया।
  • जगदीश चन्द्र बोस वनस्पति विज्ञान के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे तथा उन्होंने क्रेस्कोग्राफ का आविष्कार किया।
  • प्रो. सतीश धवन ने अन्तरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
  • डॉ. ए.बी. जोशी ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में योगदान दिया और 1975 में बोरलॉग पुरस्कार से सम्मानित हुए।
  • डॉ. हरगोविन्द खुराना को जेनेटिक कोड पर शोध के लिए नोबेल पुरस्कार मिला तथा उन्होंने कृत्रिम जीन का निर्माण किया।
  • ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन कहा जाता है तथा उन्होंने अग्नि और पृथ्वी प्रक्षेपास्त्रों के विकास में योगदान दिया।
  • एडवर्ड जेनर का सम्बन्ध वैक्सीन तथा अलेक्जेंडर फ्लेमिंग का पेनिसिलिन से है।
  • गैलीलियो का सम्बन्ध दूरबीन, न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण तथा मारकोनी का रेडियो से है।
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Topic 3 प्रौद्योगिकी की अवधारणा एवं विज्ञान से सम्बन्ध

प्रौद्योगिकी की अवधारणा एवं विज्ञान से सम्बन्ध

प्रौद्योगिकी की अवधारणा (Concept of Technology)

प्रौद्योगिकी या तकनीकी का प्रयोग कला एवं व्यावहारिक कार्यों के क्षेत्र में किया जाता है। इसका सम्बन्ध कौशल (Skill) एवं दक्षता (Expertise) में सुधार और वृद्धि करने से है।

यह एक प्रकार का परिवर्तन है, जो सृजन एवं उत्पादन में सहायक होता है।

सरल शब्दों में, वैज्ञानिक ज्ञान का व्यावहारिक रूप से प्रयोग करना ही तकनीकी या प्रौद्योगिकी कहलाता है।

तकनीकी केवल मशीन का प्रयोग नहीं है

सामान्यतः लोग तकनीकी शब्द को मशीन अथवा मशीन से सम्बन्धित कार्यों से जोड़ते हैं, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि तकनीकी में हमेशा किसी मशीन का ही प्रयोग किया जाए।

तकनीकी का सम्बन्ध ऐसे किसी भी प्रयोगात्मक कार्य से हो सकता है, जिसमें वैज्ञानिक ज्ञान अथवा वैज्ञानिक सिद्धान्तों का व्यावहारिक रूप से उपयोग किया जाए।

अर्थात् मशीन तकनीकी का एक साधन हो सकती है, लेकिन तकनीकी की अवधारणा केवल मशीनों तक सीमित नहीं है।

Technology शब्द की उत्पत्ति

Technology शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द Technikes से हुई है, जिसका अर्थ कला है।

इसका पर्याय लैटिन भाषा का शब्द Texere है, जिसका अभिप्राय बुनने तथा निर्माण करने से है।

प्रौद्योगिकी की प्रमुख परिभाषाएँ

1. ऑफीश के अनुसार

ऑफीश के अनुसार—

“तकनीकी विज्ञान का प्रयोग कला में होता है।”

इस परिभाषा में वैज्ञानिक ज्ञान के व्यावहारिक उपयोग पर बल दिया गया है।

2. जैकोटा ब्लूमर के अनुसार

जैकोटा ब्लूमर के अनुसार—

“तकनीकी व्यावहारिक जीवन में वैज्ञानिक सिद्धान्तों का अनुप्रयोग है।”

अर्थात् वैज्ञानिक सिद्धान्तों को दैनिक एवं व्यावहारिक जीवन में उपयोग करने की प्रक्रिया प्रौद्योगिकी है।

3. डॉ. दास के अनुसार

डॉ. दास के अनुसार—

“वांछित उद्देश्य की प्राप्ति हेतु वैज्ञानिक विधियों से सुव्यवस्थित अन्तर्सम्बन्धित भागों की प्रणाली को तकनीकी कहा जा सकता है।”

इस परिभाषा में तकनीकी को ऐसी संगठित प्रणाली माना गया है, जिसमें वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किसी निश्चित उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

प्रौद्योगिकी की परिभाषाओं का सार

विद्वान मुख्य विचार
ऑफीश तकनीकी विज्ञान का कला में प्रयोग है।
जैकोटा ब्लूमर व्यावहारिक जीवन में वैज्ञानिक सिद्धान्तों का अनुप्रयोग तकनीकी है।
डॉ. दास वांछित उद्देश्य के लिए वैज्ञानिक विधियों से व्यवस्थित अन्तर्सम्बन्धित भागों की प्रणाली तकनीकी है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का सम्बन्ध

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि वैज्ञानिक ज्ञान के व्यावहारिक रूप को तकनीकी कहा जाता है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित हैं, परन्तु दोनों का मुख्य बल अलग-अलग पक्षों पर होता है।

विज्ञान सिद्धान्तों पर बल देता है, जबकि प्रौद्योगिकी उन सिद्धान्तों के प्रयोगात्मक एवं व्यावहारिक पक्ष पर विशेष बल देती है।

विज्ञान क्या बताता है और तकनीकी क्या बताती है?

विज्ञान हमें यह जानने में सहायता करता है कि किसी वस्तु, प्रक्रिया अथवा सिद्धान्त को क्या और क्यों जानना चाहिए।

इसके विपरीत तकनीकी इस तथ्य पर बल देती है कि उस वैज्ञानिक ज्ञान या सिद्धान्त को व्यवहार में कैसे प्रयोग किया जाए

जब विज्ञान के नियमों और सिद्धान्तों का प्रयोग करके किसी वस्तु या प्रक्रिया का आविष्कार किया जाता है, मानव जीवन की किसी समस्या का समाधान किया जाता है अथवा मानव की सुख-सुविधाओं एवं समाज के विकास में सहायता प्राप्त होती है, तब वह प्रौद्योगिकी का रूप ले लेता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अन्तर

आधार विज्ञान प्रौद्योगिकी
मुख्य स्वरूप वैज्ञानिक ज्ञान एवं सिद्धान्त वैज्ञानिक ज्ञान का व्यावहारिक प्रयोग
मुख्य बल सिद्धान्तों पर प्रयोगात्मक पक्ष पर
प्रमुख प्रश्न वस्तु या सिद्धान्त को जानना उस ज्ञान का प्रयोग कैसे किया जाए
उद्देश्य ज्ञान एवं सिद्धान्तों की समझ समस्या का समाधान, सृजन, निर्माण एवं मानव सुविधा

विज्ञान से प्रौद्योगिकी तक

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सम्बन्ध को सरल क्रम में इस प्रकार समझा जा सकता है—

वैज्ञानिक ज्ञान एवं सिद्धान्त → व्यावहारिक प्रयोग → वस्तु या प्रक्रिया का निर्माण/आविष्कार → समस्या का समाधान एवं मानव सुविधा → प्रौद्योगिकी

इस प्रकार विज्ञान ज्ञान और सिद्धान्त प्रदान करता है, जबकि प्रौद्योगिकी उन्हीं सिद्धान्तों को व्यवहार में उपयोगी बनाती है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • तकनीकी का सम्बन्ध कौशल एवं दक्षता में सुधार और वृद्धि से है।
  • तकनीकी सृजन एवं उत्पादन में सहायक होती है।
  • वैज्ञानिक ज्ञान के व्यावहारिक प्रयोग को तकनीकी या प्रौद्योगिकी कहा जाता है।
  • तकनीकी का अर्थ केवल मशीनों का प्रयोग नहीं है; इसमें वैज्ञानिक सिद्धान्तों पर आधारित अन्य प्रयोगात्मक कार्य भी शामिल होते हैं।
  • Technology शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द Technikes से हुई है, जिसका अर्थ कला है।
  • जैकोटा ब्लूमर के अनुसार तकनीकी व्यावहारिक जीवन में वैज्ञानिक सिद्धान्तों का अनुप्रयोग है।
  • विज्ञान सिद्धान्तों पर बल देता है, जबकि तकनीकी उनके प्रयोगात्मक एवं व्यावहारिक पक्ष पर बल देती है।
  • विज्ञान के नियमों और सिद्धान्तों का प्रयोग करके मानव जीवन की समस्या का समाधान या सुख-सुविधाओं में वृद्धि करना प्रौद्योगिकी का रूप है।

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Topic 4 आधुनिक समाज पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की देन

आधुनिक समाज पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की देन

आधुनिक समाज पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की देन

आधुनिक समाज के विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का महत्त्वपूर्ण योगदान है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, संचार, उद्योग, रक्षा, जैव-प्रौद्योगिकी तथा अन्तरिक्ष जैसे अनेक क्षेत्रों में वैज्ञानिक प्रगति ने मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाया है।

1. कृषि के क्षेत्र में

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है। आधुनिक कृषि में उर्वरकों, कीटनाशकों तथा उन्नत किस्म के बीजों का प्रयोग किया जाता है।

कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन तथा मत्स्यपालन के विकास में भी विज्ञान का महत्त्वपूर्ण योगदान है।

वैज्ञानिक तकनीकों की सहायता से खाद्य पदार्थों को अधिक समय तक सुरक्षित रखना तथा उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना भी सरल हुआ है।

2. अनुसंधान के क्षेत्र में

मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वैज्ञानिक निरन्तर अनुसंधान करते रहते हैं। अनुसंधान के कारण नई-नई खोजें तथा मशीनें विकसित हुई हैं।

मशीनों के प्रयोग से कम शारीरिक श्रम में अधिक कार्य करना सम्भव हुआ है। वैज्ञानिक अनुसंधान का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है तथा इसके माध्यम से मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने के निरन्तर प्रयास किए जाते हैं।

3. भवन निर्माण के क्षेत्र में

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने भवन निर्माण के क्षेत्र में भी व्यापक परिवर्तन किए हैं।

सीमेंट, लोहा, हल्की धातुओं, लकड़ी तथा अन्य निर्माण सामग्रियों की सहायता से ऊँचे भवन, स्टेडियम, प्लेटफार्म तथा संग्रहालय आदि का निर्माण किया जाता है।

4. स्वास्थ्य के क्षेत्र में

विज्ञान की प्रगति से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक सुविधाएँ विकसित हुई हैं। हैजा, चेचक आदि रोगों के उपचार तथा रोकथाम के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हुई हैं।

टीकों के विकास से अनेक रोगों पर नियंत्रण प्राप्त किया गया है। पोलियो जैसे रोगों को समाप्त करने के लिए भी व्यापक प्रयास किए गए हैं।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के कारण अंग प्रत्यारोपण जैसे जटिल उपचार भी सम्भव हुए हैं।

5. परिवहन, संचार एवं जल संसाधन के क्षेत्र में

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास से परिवहन के साधनों में अत्यधिक प्रगति हुई है। भाप के इंजन के विकास से रेल तथा बड़े जहाजों का प्रयोग बढ़ा।

पेट्रोलियम के प्रयोग से हल्के इंजनों का विकास हुआ तथा हवाई जहाज एवं अन्य आधुनिक परिवहन साधनों का निर्माण सम्भव हुआ।

आधुनिक परिवहन साधनों के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान तक कम समय में पहुँचना सम्भव हो गया है।

संचार के साधनों के विकास से दूर स्थित व्यक्तियों के बीच भी शीघ्र सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है।

जल संसाधनों के क्षेत्र में बड़े बाँध, नहरें तथा नलकूप विकसित किए गए हैं। इनकी सहायता से सिंचाई, जल आपूर्ति तथा विद्युत उत्पादन जैसे कार्य किए जाते हैं।

6. शिक्षा के क्षेत्र में

विज्ञान के विकास से शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रगति हुई है। विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ी है तथा चिकित्सा एवं इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में शिक्षा का विस्तार हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों की स्थापना तथा शिक्षा के प्रसार से अधिक लोगों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है।

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी विभिन्न नई शाखाओं का विकास हुआ है।

7. व्यापार एवं उद्योग के क्षेत्र में

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने उद्योगों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे उद्योगों के साथ-साथ बड़े-बड़े उद्योग एवं कारखाने स्थापित हुए हैं।

कम्प्यूटर के प्रयोग से अनेक कार्य कम समय में पूरे किए जा सकते हैं, जिससे उत्पादन की गति में वृद्धि हुई है।

आधुनिक परिवहन एवं संचार साधनों के कारण व्यापार का विस्तार देश की सीमाओं से बाहर भी हुआ है।

8. रक्षा एवं परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

भारत में पृथ्वी, अग्नि तथा त्रिशूल जैसे प्रक्षेपास्त्रों का विकास किया गया है। आधुनिक सैन्य उपकरणों के निर्माण से रक्षा क्षमता में वृद्धि हुई है।

परमाणु ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन तथा अन्य उपयोगी कार्यों में किया जाता है। इससे ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में सहायता मिलती है।

9. जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में

जैव-प्रौद्योगिकी के माध्यम से कृषि, चिकित्सा तथा अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई है।

कृषि में रोग-प्रतिरोधक फसलों, उन्नत बीजों तथा जैविक उर्वरकों के विकास में इसका उपयोग किया जाता है।

अपराधियों की पहचान के लिए फिंगर प्रिन्ट तथा डी.एन.ए. जैसी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।

नई दवाओं के विकास तथा रोगों की पहचान एवं अध्ययन में भी जैव-प्रौद्योगिकी उपयोगी है।

10. अन्तरिक्ष के क्षेत्र में

अन्तरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास से उपग्रहों का उपयोग अनेक कार्यों में किया जाने लगा है।

उपग्रहों की सहायता से दूरस्थ शिक्षा, दूरसंचार, मौसम सम्बन्धी जानकारी तथा पर्यावरण एवं महासागरों की निगरानी जैसे कार्य किए जाते हैं।

अन्तरिक्ष तकनीक ने संचार और सूचना के क्षेत्र को अधिक व्यापक तथा प्रभावी बनाया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की प्रमुख देन

क्षेत्र प्रमुख योगदान
कृषि उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि
अनुसंधान नई खोजें, मशीनें तथा कम श्रम में अधिक कार्य
भवन निर्माण आधुनिक भवन, स्टेडियम, प्लेटफार्म तथा संग्रहालय
स्वास्थ्य रोगों का उपचार, टीकाकरण तथा अंग प्रत्यारोपण
परिवहन एवं संचार रेल, जहाज, विमान तथा तीव्र संचार सुविधाएँ
जल संसाधन बाँध, नहर, नलकूप, सिंचाई तथा विद्युत उत्पादन
शिक्षा शिक्षा का विस्तार तथा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग की नई शाखाएँ
व्यापार एवं उद्योग बड़े उद्योग, कम्प्यूटर का प्रयोग तथा उत्पादन में वृद्धि
रक्षा आधुनिक सैन्य उपकरण एवं प्रक्षेपास्त्र
जैव-प्रौद्योगिकी उन्नत फसलें, डी.एन.ए., फिंगर प्रिन्ट तथा चिकित्सा अनुसंधान
अन्तरिक्ष उपग्रह, दूरसंचार, मौसम तथा पर्यावरण की निगरानी
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने आधुनिक समाज के लगभग सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है।
  • कृषि में उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक तथा आधुनिक तकनीकों से उत्पादन बढ़ा है।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान से नई मशीनों एवं सुविधाओं का विकास हुआ है।
  • स्वास्थ्य के क्षेत्र में रोगों का उपचार, टीकाकरण तथा अंग प्रत्यारोपण सम्भव हुआ है।
  • परिवहन एवं संचार के विकास से दूरी और समय दोनों कम हुए हैं।
  • जल संसाधनों में बाँध, नहर एवं नलकूपों का विकास हुआ है।
  • कम्प्यूटर के प्रयोग से उद्योग एवं व्यापार के कार्य अधिक तीव्र हुए हैं।
  • रक्षा क्षेत्र में पृथ्वी, अग्नि और त्रिशूल जैसे प्रक्षेपास्त्र विकसित किए गए हैं।
  • जैव-प्रौद्योगिकी का उपयोग कृषि, चिकित्सा और अपराध नियंत्रण में किया जाता है।
  • अन्तरिक्ष तकनीक का उपयोग दूरसंचार, मौसम, दूरस्थ शिक्षा तथा पर्यावरण की निगरानी में किया जाता है।
Topic 5 परिवहन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की उपयोगिता

परिवहन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की उपयोगिता

परिवहन का अर्थ

मनुष्य अथवा वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने की प्रक्रिया को परिवहन कहते हैं।

प्राचीन समय में मनुष्य पैदल अथवा पशुओं की सहायता से यात्रा करता था। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास से विभिन्न प्रकार के आधुनिक परिवहन साधनों का विकास हुआ।

आज परिवहन के माध्यम से यात्रियों के साथ-साथ वस्तुओं एवं माल को भी कम समय में दूर-दूर तक पहुँचाया जा सकता है।

परिवहन के प्रमुख प्रकार

परिवहन को मुख्य रूप से चार प्रकारों में बाँटा जाता है—

  1. सड़क परिवहन
  2. रेल परिवहन
  3. जल परिवहन
  4. वायु परिवहन

1. सड़क परिवहन

सड़क परिवहन दैनिक जीवन में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले परिवहन साधनों में से एक है। इसके अन्तर्गत बस, कार, ट्रक, मोटरसाइकिल तथा अन्य सड़क वाहन आते हैं।

भारत में सड़क मार्गों का विस्तृत जाल है। विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग तथा सीमावर्ती सड़कें विकसित की गई हैं।

भारत की सड़क व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ—

  • भारत में लगभग 33 लाख किलोमीटर सड़कों का जाल बताया गया है।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग तथा सीमावर्ती सड़कें सड़क परिवहन के महत्त्वपूर्ण भाग हैं।
  • राजमार्ग कुल सड़कों का लगभग 2 प्रतिशत से भी कम भाग हैं, फिर भी उन पर लगभग 40 प्रतिशत यातायात चलता है।
  • सड़क परिवहन द्वारा लगभग 85 प्रतिशत यात्री तथा 65 प्रतिशत माल का परिवहन किया जाता है।

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 7 को वाराणसी से कन्याकुमारी तक लगभग 2369 किलोमीटर लम्बा बताया गया है।

सड़क परिवहन का महत्त्व

  • गाँवों, कस्बों और शहरों को आपस में जोड़ता है।
  • यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाता है।
  • माल एवं वस्तुओं के परिवहन में उपयोगी है।
  • कम दूरी की यात्रा के लिए अत्यन्त उपयोगी साधन है।

2. रेल परिवहन

रेल परिवहन बड़ी संख्या में यात्रियों तथा भारी मात्रा में माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का महत्त्वपूर्ण साधन है।

भारत में रेल सेवा का प्रारम्भ 16 अप्रैल 1853 को हुआ। पहली रेल मुम्बई से ठाणे के बीच लगभग 34 किलोमीटर की दूरी तक चलाई गई।

भारत का रेल नेटवर्क लगभग 65,808 किलोमीटर बताया गया है।

रेल परिवहन में समय के साथ अनेक आधुनिक सुविधाओं का विकास हुआ है। तेज गति से यात्रा कराने वाली विभिन्न रेलगाड़ियों का संचालन किया जाता है।

प्रमुख रेलगाड़ियों के उदाहरण—

  • राजधानी एक्सप्रेस
  • शताब्दी एक्सप्रेस
  • तेज गति वाली आधुनिक रेलगाड़ियाँ

रेल परिवहन का महत्त्व

  • लम्बी दूरी की यात्रा के लिए उपयोगी है।
  • एक साथ बड़ी संख्या में यात्रियों को ले जा सकता है।
  • भारी माल को दूरस्थ स्थानों तक पहुँचाने में सहायक है।
  • देश के विभिन्न भागों को आपस में जोड़ता है।

3. जल परिवहन

नदियों, नहरों, समुद्रों तथा महासागरों के माध्यम से होने वाले परिवहन को जल परिवहन कहते हैं।

जल परिवहन में विभिन्न प्रकार के साधनों का प्रयोग किया जाता है, जैसे—

  • जहाज
  • स्टीमर
  • युद्धपोत
  • पनडुब्बी
  • मछली पकड़ने वाली नौकाएँ

जल परिवहन को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जा सकता है—

  1. आन्तरिक जल परिवहन
  2. समुद्री परिवहन

भारत में लगभग 14,500 किलोमीटर लम्बे जलमार्गों को नौगम्य बताया गया है।

जल परिवहन का महत्त्व

  • भारी वस्तुओं एवं माल के परिवहन में उपयोगी है।
  • नदियों और समुद्री मार्गों से दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़ता है।
  • समुद्री व्यापार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

4. वायु परिवहन

वायु मार्ग से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने की व्यवस्था को वायु परिवहन कहते हैं।

वायु परिवहन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की महत्त्वपूर्ण देन है। इसके द्वारा बहुत कम समय में लम्बी दूरी तय की जा सकती है।

वायु परिवहन के प्रमुख साधन—

  • हवाई जहाज
  • हेलीकॉप्टर
  • युद्धक विमान
  • अन्तरिक्ष यान

भारत में वायु परिवहन का विकास

भारत में वायु परिवहन की शुरुआत 1911 में इलाहाबाद से नैनी के बीच डाक पहुँचाने के लिए की गई।

इसके बाद 1922 में कराची से मद्रास के बीच अन्तर्राष्ट्रीय वायु सेवा प्रारम्भ होने का उल्लेख किया गया है।

सियाचिन ग्लेशियर को अत्यधिक ऊँचाई पर स्थित हेलिपैड के लिए भी जाना जाता है।

वायु परिवहन का महत्त्व

  • सबसे कम समय में लम्बी दूरी तय करने में उपयोगी है।
  • देश-विदेश के बीच तीव्र यातायात सम्भव बनाता है।
  • दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँचने में उपयोगी है।
  • रक्षा तथा अन्य आवश्यक सेवाओं में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

परिवहन के चारों प्रकार एक नजर में

परिवहन का प्रकार प्रमुख साधन मुख्य उपयोग
सड़क परिवहन बस, कार, ट्रक, मोटरसाइकिल कम एवं मध्यम दूरी पर यात्री और माल परिवहन
रेल परिवहन रेलगाड़ी बड़ी संख्या में यात्री तथा भारी माल का परिवहन
जल परिवहन जहाज, स्टीमर, नाव, पनडुब्बी जलमार्ग से यात्री एवं माल परिवहन
वायु परिवहन हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर कम समय में लम्बी दूरी की यात्रा

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का परिवहन में योगदान

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास से परिवहन के साधन अधिक तेज, सुविधाजनक और उपयोगी बने हैं। सड़क, रेल, जल तथा वायु परिवहन के विकास ने यात्रियों और वस्तुओं को कम समय में दूर-दूर तक पहुँचाना सम्भव बनाया है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • मनुष्य एवं वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने की प्रक्रिया परिवहन कहलाती है।
  • परिवहन के चार प्रमुख प्रकार हैं— सड़क, रेल, जल एवं वायु परिवहन।
  • भारत में सड़क मार्गों का विस्तृत जाल है और सड़क परिवहन यात्रियों तथा माल के लिए महत्त्वपूर्ण है।
  • भारत में पहली रेल 16 अप्रैल 1853 को मुम्बई से ठाणे के बीच लगभग 34 किमी चली।
  • जल परिवहन आन्तरिक जलमार्ग तथा समुद्री मार्ग से किया जाता है।
  • जहाज, स्टीमर, युद्धपोत, पनडुब्बी और नौकाएँ जल परिवहन के साधन हैं।
  • भारत में वायु परिवहन की शुरुआत 1911 में इलाहाबाद से नैनी के बीच डाक सेवा से हुई।
  • हवाई जहाज एवं हेलीकॉप्टर कम समय में लम्बी दूरी तय करने के प्रमुख साधन हैं।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने परिवहन को तेज, सरल तथा सुविधाजनक बनाया है।

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Topic 6 संचार एवं भारत की संचार सेवाएँ

संचार एवं भारत की संचार सेवाएँ

संचार का अर्थ

किसी संदेश, समाचार अथवा सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सफलतापूर्वक पहुँचाने की प्रक्रिया को संचार कहते हैं।

एक स्थान से दूसरे स्थान तक सूचनाओं और संदेशों को पहुँचाने के लिए जिन सुविधाओं का प्रयोग किया जाता है, उन्हें संचार सेवाएँ कहा जाता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास से संचार के साधनों में अत्यधिक प्रगति हुई है। इनके माध्यम से दूर स्थित व्यक्तियों एवं स्थानों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान सरल और तीव्र हुआ है।

संचार के प्रमुख साधन

संचार के लिए अनेक साधनों का प्रयोग किया जाता है। इनमें प्रमुख हैं—

  • टेलीफोन
  • डाक एवं तार सेवाएँ
  • फैक्स
  • टेलेक्स
  • समाचार-पत्र
  • पत्र-पत्रिकाएँ
  • ई-मेल
  • उपग्रह

इन साधनों के द्वारा व्यक्तिगत संदेशों से लेकर व्यापारिक, सामाजिक तथा राष्ट्रीय स्तर की सूचनाओं तक का आदान-प्रदान किया जाता है।

संचार का महत्त्व

आधुनिक जीवन में संचार का विशेष महत्त्व है। इसका उपयोग केवल संदेश भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

1. सामाजिक सम्बन्धों में सहायक

संचार सेवाएँ लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करती हैं। इनके माध्यम से दूर रहने वाले व्यक्ति भी परस्पर सम्पर्क बनाए रख सकते हैं।

2. राष्ट्रीय एकता में सहायक

संचार के साधन देश के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आपस में जोड़ते हैं। इस प्रकार वे राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में सहायक होते हैं।

3. आर्थिक विकास में सहायक

व्यापार, उद्योग तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए सूचना का शीघ्र आदान-प्रदान आवश्यक होता है। संचार सेवाएँ इस कार्य को सरल बनाकर आर्थिक विकास में सहायता करती हैं।

4. विचारों एवं धन के आदान-प्रदान में सहायक

संचार के माध्यम से व्यक्तियों और संस्थाओं के बीच विचारों तथा आवश्यक सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है। इससे धन के लेन-देन तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों में भी सुविधा होती है।

5. व्यापार के विकास में सहायक

संचार सेवाओं की सहायता से व्यापारी विभिन्न स्थानों से सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं तथा व्यापार सम्बन्धी सूचनाओं का शीघ्र आदान-प्रदान कर सकते हैं।

6. पिछड़े क्षेत्रों के आर्थिक विकास में सहायक

संचार सुविधाओं के विस्तार से दूरस्थ एवं पिछड़े क्षेत्रों को अन्य क्षेत्रों से जोड़ने में सहायता मिलती है। इससे उन क्षेत्रों के आर्थिक विकास के अवसर बढ़ते हैं।

भारत की प्रमुख संचार सेवाएँ

भारत में विभिन्न प्रकार की संचार सेवाओं का उपयोग किया जाता है। प्रमुख सेवाएँ निम्नलिखित हैं—

1. डाक सेवा

डाक सेवा भारत की महत्त्वपूर्ण संचार सेवाओं में से एक है।

भारत में डाकघरों का विस्तृत जाल है। 31 मार्च 2011 तक देश में लगभग 1,54,866 डाकघर थे।

डाक व्यवस्था को सरल और व्यवस्थित बनाने के लिए छः अंकों की पिन संख्या (PIN Code) का प्रयोग किया जाता है।

पिन संख्या की सहायता से राज्य, जिला, तहसील तथा सम्बन्धित डाकघर की पहचान करने में सुविधा होती है।

2. जनसंचार सेवा

जब किसी सूचना या संदेश को एक साथ बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचाया जाता है, तब जनसंचार के साधनों का प्रयोग किया जाता है।

इसके प्रमुख साधन हैं—

  • रेडियो
  • टेलीविजन

भारत में टेलीविजन प्रसारण के विस्तार के लिए 1415 ट्रांसमीटर स्थापित किए गए थे।

3. इलेक्ट्रॉनिक डाक सेवा

इलेक्ट्रॉनिक डाक सेवा आधुनिक संचार का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।

इसके माध्यम से उपग्रह की सहायता से विभिन्न देशों के बीच सूचनाओं एवं संदेशों का आदान-प्रदान किया जा सकता है।

4. मुद्रण माध्यम

मुद्रित सामग्री भी संचार का महत्त्वपूर्ण माध्यम है।

इसके अन्तर्गत मुख्य रूप से—

  • समाचार-पत्र
  • पत्र-पत्रिकाएँ

आते हैं। इनके माध्यम से विभिन्न प्रकार की सूचनाएँ बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचाई जाती हैं।

भारत की संचार सेवाएँ एक नजर में

संचार सेवा प्रमुख माध्यम / विशेषता
डाक सेवा डाकघर तथा छः अंकों की पिन संख्या
जनसंचार रेडियो एवं टेलीविजन
इलेक्ट्रॉनिक डाक सेवा उपग्रह के माध्यम से सूचना एवं संदेशों का आदान-प्रदान
मुद्रण माध्यम समाचार-पत्र एवं पत्र-पत्रिकाएँ

संचार एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास ने संचार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया है। टेलीफोन, डाक, फैक्स, ई-मेल, रेडियो, टेलीविजन तथा उपग्रह जैसे साधनों ने दूर स्थित स्थानों के बीच संदेश एवं सूचनाएँ पहुँचाना सरल बनाया है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • संदेश, समाचार या सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने की प्रक्रिया संचार कहलाती है।
  • टेलीफोन, डाक, तार, फैक्स, टेलेक्स, समाचार-पत्र, ई-मेल और उपग्रह संचार के प्रमुख साधन हैं।
  • संचार सामाजिक सम्बन्धों एवं राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है।
  • संचार सेवाएँ आर्थिक विकास, व्यापार तथा विचारों एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान में सहायक हैं।
  • संचार सुविधाएँ पिछड़े क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायक होती हैं।
  • भारत में डाक सेवा, जनसंचार, इलेक्ट्रॉनिक डाक सेवा एवं मुद्रण माध्यम प्रमुख संचार सेवाएँ हैं।
  • पिन कोड में छः अंक होते हैं।
  • रेडियो एवं टेलीविजन जनसंचार के प्रमुख साधन हैं।
  • समाचार-पत्र एवं पत्र-पत्रिकाएँ मुद्रण माध्यम के अन्तर्गत आते हैं।
Topic 7 चिकित्सा, मनोरंजन एवं उद्योग में विज्ञान की उपयोगिता

चिकित्सा, मनोरंजन एवं उद्योग में विज्ञान की उपयोगिता

चिकित्सा, मनोरंजन एवं उद्योग में विज्ञान की उपयोगिता

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने मानव जीवन के अनेक क्षेत्रों को प्रभावित किया है। चिकित्सा के क्षेत्र में रोगों की पहचान और उपचार, मनोरंजन के क्षेत्र में विभिन्न साधनों का विकास तथा उद्योगों में उत्पादन की वृद्धि विज्ञान की महत्त्वपूर्ण देन है।

1. चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान की उपयोगिता

चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान ने अत्यन्त महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। अनेक रोगों के उपचार के लिए औषधियों तथा टीकों का विकास किया गया है।

कुष्ठ रोग, टाइफाइड तथा बुखार जैसे रोगों के उपचार के लिए विभिन्न प्रकार की औषधियों का प्रयोग किया जाता है।

टीकाकरण का महत्त्व

विज्ञान की सहायता से अनेक रोगों से बचाव के लिए टीकों का विकास किया गया है।

प्रमुख उदाहरण हैं—

  • चेचक
  • इन्फ्लुएंजा
  • काली खाँसी
  • पोलियो

टीकाकरण के माध्यम से इन रोगों की रोकथाम में सहायता मिलती है।

रोगों की जाँच में वैज्ञानिक उपकरण

आधुनिक चिकित्सा में रोगों की पहचान एवं शरीर के आन्तरिक भागों की जाँच के लिए विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों और तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।

इनमें प्रमुख हैं—

  • अल्ट्रासाउण्ड
  • एक्स-रे
  • एण्डोस्कोपी

इन तकनीकों की सहायता से चिकित्सकों को रोग की पहचान तथा उपचार में सुविधा होती है।

चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान की प्रमुख देन

क्षेत्र उपयोग
औषधियाँ विभिन्न रोगों के उपचार में
टीके रोगों की रोकथाम में
अल्ट्रासाउण्ड शरीर के आन्तरिक भागों की जाँच में
एक्स-रे आन्तरिक संरचनाओं की जाँच में
एण्डोस्कोपी शरीर के आन्तरिक भागों के परीक्षण में

2. मनोरंजन के क्षेत्र में विज्ञान की उपयोगिता

आधुनिक जीवन अत्यन्त व्यस्त हो गया है। दिनभर के कार्य और तनाव के बाद मनुष्य को मानसिक विश्राम एवं मनोरंजन की आवश्यकता होती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास से मनोरंजन के अनेक साधन उपलब्ध हुए हैं।

प्रमुख मनोरंजन साधन हैं—

  • सिनेमा
  • रेडियो
  • टेलीविजन

इन साधनों के माध्यम से मनुष्य अपने खाली समय का उपयोग मनोरंजन एवं मानसिक विश्राम के लिए कर सकता है।

मनोरंजन में विज्ञान का महत्त्व

  • व्यस्त जीवन में मनोरंजन की सुविधा प्रदान करता है।
  • मानसिक तनाव कम करने में सहायक होता है।
  • खाली समय के उपयोग का साधन प्रदान करता है।

3. उद्योग के क्षेत्र में विज्ञान की उपयोगिता

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने औद्योगिक क्षेत्र के विकास में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वस्त्र, भोजन तथा दैनिक उपयोग की अनेक वस्तुओं के निर्माण में वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।

भारत में विभिन्न प्रकार के उद्योग विकसित हुए हैं। इनमें प्रमुख हैं—

  • लोहा एवं इस्पात उद्योग
  • सीमेंट उद्योग
  • कोयला उद्योग
  • पेट्रोलियम उद्योग
  • वस्त्र उद्योग
  • रत्न एवं आभूषण उद्योग
  • चीनी उद्योग

उद्योगों के विकास में विज्ञान का योगदान

वैज्ञानिक तकनीकों के प्रयोग से विभिन्न वस्तुओं का उत्पादन अधिक व्यवस्थित रूप से किया जा सकता है।

औद्योगिक विकास के कारण दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली अनेक आवश्यक वस्तुओं का निर्माण बड़े स्तर पर सम्भव हुआ है।

चिकित्सा, मनोरंजन एवं उद्योग की तुलना

क्षेत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की प्रमुख देन
चिकित्सा औषधियाँ, टीके, अल्ट्रासाउण्ड, एक्स-रे एवं एण्डोस्कोपी
मनोरंजन सिनेमा, रेडियो एवं टेलीविजन
उद्योग विभिन्न वस्तुओं का निर्माण एवं अनेक प्रकार के उद्योगों का विकास
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान ने औषधियों, टीकों तथा रोगों की जाँच की तकनीकों के विकास में योगदान दिया है।
  • चेचक, इन्फ्लुएंजा, काली खाँसी तथा पोलियो से बचाव के लिए टीकों का उपयोग किया जाता है।
  • अल्ट्रासाउण्ड, एक्स-रे एवं एण्डोस्कोपी चिकित्सा में उपयोगी वैज्ञानिक तकनीकें हैं।
  • सिनेमा, रेडियो और टेलीविजन विज्ञान द्वारा विकसित प्रमुख मनोरंजन साधन हैं।
  • मनोरंजन मनुष्य को व्यस्त जीवन में मानसिक विश्राम प्रदान करता है।
  • विज्ञान ने वस्त्र, भोजन तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं के निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • लोहा-इस्पात, सीमेंट, कोयला, पेट्रोलियम, वस्त्र, रत्न-आभूषण तथा चीनी प्रमुख उद्योग हैं।

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Topic 8 कृषि, मत्स्यपालन एवं कुक्कुट पालन

कृषि, मत्स्यपालन एवं कुक्कुट पालन

कृषि में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की उपयोगिता

भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। स्वतंत्रता के बाद देश के सामने खाद्यान्न की कमी एक बड़ी समस्या थी। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक विधियों, उन्नत बीजों, सिंचाई, उर्वरकों तथा आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग प्रारम्भ किया गया।

कृषि के विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने उत्पादन बढ़ाने, फसलों की गुणवत्ता सुधारने तथा खेती को अधिक व्यवस्थित बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कृषि विकास के प्रमुख वैज्ञानिक साधन

  • उन्नत एवं अधिक उपज देने वाले बीजों का प्रयोग
  • सिंचाई की बेहतर व्यवस्था
  • रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग
  • कीटनाशकों का प्रयोग
  • ट्रैक्टर तथा आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग
  • नलकूपों द्वारा सिंचाई
  • वैज्ञानिक कृषि विधियों का प्रयोग

हरित क्रांति

कृषि उत्पादन में तीव्र वृद्धि के लिए अधिक उपज देने वाली फसलों, उन्नत बीजों, सिंचाई, उर्वरकों तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के व्यापक प्रयोग को हरित क्रांति से जोड़ा जाता है।

भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न चरणों में नई योजनाएँ एवं तकनीकें अपनाई गईं।

  • 1960-61 में सात जिलों में गहन कृषि जिला कार्यक्रम लागू किया गया।
  • 1965-66 में नई कृषि रणनीति अपनाई गई तथा अधिक उपज देने वाली मैक्सिकन एवं ताइवानी किस्मों का प्रयोग बढ़ा।
  • भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 1967-68 से मानी गई है।
  • 1983-84 से दूसरी हरित क्रांति का उल्लेख किया गया है।

हरित क्रांति से जुड़े प्रमुख व्यक्ति

व्यक्ति सम्बन्ध
विलियम गॉड हरित क्रांति शब्द के प्रयोग से सम्बन्धित
नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग हरित क्रांति के जनक
डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन भारत में हरित क्रांति के विकास से सम्बन्धित

नॉर्मन बोरलॉग का योगदान

कृषि उत्पादन बढ़ाने में नॉर्मन बोरलॉग का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। अधिक उपज देने वाली गेहूँ की किस्मों के विकास ने खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि करने में सहायता की।

भारतीय कृषि में विज्ञान की भूमिका

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के कारण कृषि में ट्रैक्टर, हल, नलकूप, कीटनाशक, उत्तम गुणवत्ता वाले बीज तथा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बढ़ा।

इन साधनों ने कृषि उत्पादन बढ़ाने तथा खेती के कार्यों को सरल बनाने में सहायता की।

गेहूँ भारत की प्रमुख फसलों में से एक है। भारत को गेहूँ उत्पादन में चीन के बाद दूसरे स्थान पर बताया गया है तथा लगभग 15 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पर गेहूँ की खेती का उल्लेख मिलता है।

मत्स्यपालन (Pisciculture)

मछलियों का वैज्ञानिक ढंग से पालन एवं उत्पादन करना मत्स्यपालन कहलाता है।

बढ़ती जनसंख्या की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने में मत्स्यपालन का महत्त्व बढ़ा है। तालाबों तथा अन्य जल स्रोतों में मछलियों का पालन किया जाता है।

मत्स्यपालन को अन्य गतिविधियों के साथ भी जोड़ा जा सकता है, जैसे—

  • मछली एवं सूअर पालन
  • मछली एवं बत्तख पालन

इस प्रकार एक ही क्षेत्र से अनेक प्रकार का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

भारत में मत्स्य उत्पादन

भारत को मत्स्य उत्पादन में चीन के बाद दूसरे स्थान पर बताया गया है तथा विश्व के कुल मत्स्य उत्पादन में भारत का योगदान लगभग 6 प्रतिशत माना गया है।

मछलियों के प्रमुख प्रकार

मछलियों को उनके निवास के आधार पर मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जा सकता है—

प्रकार उदाहरण
मीठे पानी की मछलियाँ रोहू, कतला, लोबियो
समुद्री मछलियाँ टूना, हाउण्ड

मत्स्यपालन का महत्त्व

  • खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराता है।
  • मछली उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।
  • अन्य पशुपालन गतिविधियों के साथ संयुक्त रूप से किया जा सकता है।
  • वैज्ञानिक विधियों से उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।

कुक्कुट पालन (Poultry Farming)

पालतू पक्षियों के प्रजनन, पालन-पोषण एवं देखभाल के वैज्ञानिक अध्ययन को कुक्कुट पालन कहा जाता है।

Poultry शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच भाषा के Poult शब्द से मानी गई है।

कुक्कुट पालन के अन्तर्गत विभिन्न पालतू पक्षियों का पालन किया जाता है, जैसे—

  • मुर्गियाँ
  • बत्तख
  • हंस
  • टर्की
  • गिनी फाउल
  • कबूतर

कुक्कुट पालन के उद्देश्य

कुक्कुट पालन मुख्य रूप से अण्डे एवं मांस प्राप्त करने के लिए किया जाता है। अच्छे उत्पादन के लिए पक्षियों के उचित भोजन, स्वास्थ्य, आवास तथा देखभाल का ध्यान रखा जाता है।

लेयर एवं ब्रॉयलर

प्रकार मुख्य उद्देश्य
लेयर (Layers) अण्डा उत्पादन के लिए पाले जाने वाले पक्षी
ब्रॉयलर (Broilers) मांस उत्पादन के लिए पाले जाने वाले पक्षी

भारत में कुक्कुट पालन

भारत को अण्डा उत्पादन में चीन, सोवियत संघ, अमेरिका तथा जापान के बाद पाँचवें स्थान पर बताया गया है।

कुक्कुट पालन का महत्त्व

  • अण्डों का उत्पादन होता है।
  • मांस की प्राप्ति होती है।
  • वैज्ञानिक देखभाल से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
  • पक्षियों की उचित प्रजनन एवं पालन व्यवस्था सम्भव होती है।

कृषि, मत्स्यपालन एवं कुक्कुट पालन एक नजर में

क्षेत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की प्रमुख भूमिका
कृषि उन्नत बीज, सिंचाई, उर्वरक, कीटनाशक एवं आधुनिक कृषि उपकरण
मत्स्यपालन मछलियों का वैज्ञानिक पालन एवं उत्पादन
कुक्कुट पालन पक्षियों का वैज्ञानिक प्रजनन, पालन तथा अण्डा एवं मांस उत्पादन
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • कृषि उत्पादन बढ़ाने में उन्नत बीज, सिंचाई, उर्वरक, कीटनाशक तथा आधुनिक कृषि यंत्र महत्त्वपूर्ण हैं।
  • भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 1967-68 से मानी गई है।
  • नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग को हरित क्रांति का जनक तथा डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को भारत की हरित क्रांति से जोड़ा जाता है।
  • 1983-84 से दूसरी हरित क्रांति का उल्लेख किया गया है।
  • मछलियों के वैज्ञानिक पालन एवं उत्पादन को मत्स्यपालन कहते हैं।
  • रोहू, कतला एवं लोबियो मीठे पानी की मछलियों के उदाहरण हैं।
  • टूना एवं हाउण्ड समुद्री मछलियों के उदाहरण हैं।
  • पालतू पक्षियों के प्रजनन, पालन-पोषण एवं देखभाल को कुक्कुट पालन कहा जाता है।
  • लेयर पक्षियों को अण्डा उत्पादन तथा ब्रॉयलर पक्षियों को मांस उत्पादन के लिए पाला जाता है।
Topic 9 दूरस्थ शिक्षा एवं आधुनिक ईंधन

दूरस्थ शिक्षा एवं आधुनिक ईंधन

दूरस्थ शिक्षा (Distance Education)

दूरस्थ शिक्षा परम्परागत शिक्षा की एक वैकल्पिक व्यवस्था है। इसमें विद्यार्थी और शिक्षक का एक ही स्थान पर उपस्थित होना आवश्यक नहीं होता। संचार के आधुनिक साधनों की सहायता से विद्यार्थी दूर रहकर भी शिक्षा प्राप्त कर सकता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास से दूरस्थ शिक्षा का विस्तार हुआ है। इसके माध्यम से ऐसे विद्यार्थियों को भी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है, जो नियमित रूप से शिक्षण संस्थान में उपस्थित नहीं हो सकते।

दूरस्थ शिक्षा के प्रमुख साधन

  • मुद्रित अध्ययन सामग्री
  • श्रव्य-दृश्य सामग्री
  • रेडियो
  • टेलीविजन
  • कम्प्यूटर
  • अध्ययन केन्द्र
  • इंटरनेट

कम्प्यूटर तथा इंटरनेट के माध्यम से विद्यार्थियों तक अध्ययन सामग्री और आवश्यक सूचनाएँ पहुँचाना सरल हो गया है।

दूरस्थ शिक्षा का महत्त्व

दूरस्थ शिक्षा उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है जो दूरी, समय अथवा अन्य कारणों से नियमित शिक्षण संस्थानों में अध्ययन नहीं कर पाते। आधुनिक संचार साधनों ने इस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया है।

आधुनिक ईंधन (Modern Fuel)

ऐसे पदार्थ जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर ऊष्मा तथा प्रकाश उत्पन्न करते हैं, ईंधन कहलाते हैं।

लकड़ी, कोयला, पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस तथा मार्श गैस आदि ईंधन के उदाहरण हैं।

ईंधन के दहन को सामान्य रूप में इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है—

ईंधन + O₂ → उत्पाद + ऊष्मा (ऊर्जा) + प्रकाश

आधुनिक ईंधनों में अधिक ऊष्मीय क्षमता, कम प्रदूषण तथा उपयोग में सुविधा जैसे गुण पाए जाते हैं। बायोगैस, LPG तथा CNG आधुनिक ईंधनों के प्रमुख उदाहरण हैं।

1. बायोगैस (Biogas)

पशुओं के गोबर तथा अन्य वनस्पति एवं जैविक अपशिष्टों को पानी के साथ मिलाकर वायु की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित करने पर जो गैस प्राप्त होती है, उसे बायोगैस कहते हैं।

बायोगैस में मुख्य रूप से मीथेन गैस पाई जाती है। इसके अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन तथा हाइड्रोजन सल्फाइड आदि गैसें भी पाई जाती हैं।

बायोगैस का संघटन

गैस लगभग मात्रा
मीथेन 50–60%
कार्बन डाइऑक्साइड 30–40%
हाइड्रोजन 5–10%
नाइट्रोजन 2–6%
हाइड्रोजन सल्फाइड 0–8%

बायोगैस संयंत्र की संरचना एवं कार्य

बायोगैस बनाने के लिए जमीन में लगभग 10 से 15 फीट गहरा पाचन टैंक बनाया जाता है।

गोबर तथा अन्य जैविक पदार्थों को पानी में मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है। इस मिश्रण को पाचन टैंक में डाला जाता है और ऊपर से ढक दिया जाता है।

वायु की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीव इन पदार्थों का अपघटन करते हैं, जिससे बायोगैस उत्पन्न होती है।

उत्पन्न गैस टैंक के ऊपरी भाग में एकत्रित होती है। गैस के दबाव से ढक्कन ऊपर उठता है तथा गैस आउटलेट पाइप एवं वाल्व की सहायता से गैस को उपयोग के स्थान तक पहुँचाया जाता है।

पाचन के बाद बची हुई स्लरी बाहर निकलती है, जिसका उपयोग खाद के रूप में किया जा सकता है।

बायोगैस संयंत्र की संरचना
बायोगैस संयंत्र — मिश्रण टैंक, पाचन टैंक, गैस आउटलेट तथा स्लरी आउटलेट

बायोगैस के लाभ

  • इसका उपयोग चूल्हे में ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
  • इसका उपयोग भोजन पकाने, प्रकाश तथा इंजनों को चलाने में किया जा सकता है।
  • यह धुएँ रहित ईंधन है तथा प्रदूषण कम करने में सहायक है।
  • बायोगैस संयंत्र से प्राप्त बची हुई स्लरी का उपयोग खाद के रूप में किया जाता है।

2. LPG (Liquefied Petroleum Gas)

LPG का पूरा नाम Liquefied Petroleum Gas है। प्राकृतिक गैस में मीथेन, एथेन, प्रोपेन एवं ब्यूटेन जैसे हाइड्रोकार्बन पाए जाते हैं।

उच्च दाब पर प्रोपेन तथा ब्यूटेन जैसे घटकों को अलग करके द्रव अवस्था में इस्पात के सिलिण्डरों में भरा जाता है। इसे LPG के रूप में उपयोग किया जाता है।

LPG का संघटन

घटक लगभग मात्रा
n-ब्यूटेन 27%
आइसो-ब्यूटेन 43%
प्रोपेन 2.5%
ब्यूटीन 25%
प्रोपिलीन 2.5%

LPG का ऊष्मीय मान लगभग 27,800 किलो कैलोरी प्रति घन मीटर दिया गया है।

LPG का उपयोग घरेलू ईंधन के साथ-साथ मोटर ईंधन के रूप में भी किया जाता है।

LPG के लाभ

  • LPG का दहन स्वच्छ होता है।
  • इससे कालिख बहुत कम बनती है, इसलिए बर्नर की देखभाल कम करनी पड़ती है।
  • इससे जंग लगने की सम्भावना कम होती है।
  • आवश्यकतानुसार लौ को तुरन्त कम या अधिक किया जा सकता है।
  • इससे दुर्गन्ध एवं विषैली गैसों का उत्सर्जन कम होता है।
  • यह सुविधाजनक एवं उपयोगी घरेलू ईंधन है।

3. CNG (Compressed Natural Gas)

CNG का पूरा नाम Compressed Natural Gas है। प्राकृतिक गैस को अधिक दाब पर संपीडित करके CNG के रूप में उपयोग किया जाता है।

इसमें मुख्य रूप से मीथेन तथा एथेन पाए जाते हैं।

CNG में लगभग 80–90 प्रतिशत मीथेन तथा लगभग 10 प्रतिशत एथेन के साथ अन्य गैसें अल्प मात्रा में पाई जाती हैं।

यह नीली लौ के साथ जलती है।

इसका ऊष्मीय मान लगभग 1000–1100 B.Th.U. प्रति घन फुट दिया गया है।

CNG के प्रमुख उपयोग

  • मोटर वाहनों में ईंधन के रूप में
  • विद्युत उत्पादन केन्द्रों में
  • उर्वरक कारखानों में
  • अस्पतालों में

CNG के लाभ

  • वाहनों के इंजनों में इसका प्रयोग उपयोगी है।
  • इंजन को अपेक्षाकृत स्वच्छ रखने में सहायता करती है।
  • इंजन में बार-बार स्नेहन की आवश्यकता कम होती है।
  • इसके प्रयोग से धुआँ एवं वायु प्रदूषण कम होता है।

बायोगैस, LPG एवं CNG की तुलना

ईंधन मुख्य आधार प्रमुख उपयोग
बायोगैस गोबर एवं जैविक अपशिष्ट खाना पकाना, प्रकाश एवं इंजन
LPG पेट्रोलियम गैस के द्रवीकृत घटक घरेलू एवं मोटर ईंधन
CNG संपीडित प्राकृतिक गैस वाहन, विद्युत संयंत्र एवं उद्योग
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • दूरस्थ शिक्षा परम्परागत शिक्षा की वैकल्पिक व्यवस्था है, जिसमें संचार साधनों द्वारा दूर रहकर शिक्षा प्राप्त की जाती है।
  • मुद्रित सामग्री, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर, इंटरनेट तथा अध्ययन केन्द्र दूरस्थ शिक्षा के प्रमुख साधन हैं।
  • ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर ऊष्मा एवं प्रकाश उत्पन्न करने वाले पदार्थ ईंधन कहलाते हैं।
  • बायोगैस गोबर एवं जैविक अपशिष्टों के वायु की अनुपस्थिति में अपघटन से प्राप्त होती है।
  • बायोगैस में लगभग 50–60% मीथेन तथा 30–40% कार्बन डाइऑक्साइड होती है।
  • बायोगैस संयंत्र से बची हुई स्लरी का उपयोग खाद के रूप में किया जाता है।
  • LPG का पूरा नाम Liquefied Petroleum Gas है और इसे इस्पात के सिलिण्डरों में संग्रहित किया जाता है।
  • CNG का पूरा नाम Compressed Natural Gas है तथा इसमें मुख्य रूप से मीथेन पाई जाती है।
  • LPG तथा CNG आधुनिक एवं उपयोगी ईंधन हैं।

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Topic 10 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से मानव समाज को लाभ तथा हानि

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से मानव समाज को लाभ तथा हानि

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी : लाभ तथा हानि

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने मानव जीवन को अनेक प्रकार से सुविधाजनक बनाया है। चिकित्सा, परिवहन, संचार, उद्योग तथा मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में इसके कारण व्यापक परिवर्तन हुए हैं।

इसके साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का अनुचित अथवा अत्यधिक प्रयोग मानव समाज और पर्यावरण के लिए हानिकारक भी हो सकता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से मानव समाज को लाभ

1. चिकित्सा एवं रोगों के उपचार में लाभ

विज्ञान के विकास से विभिन्न प्रकार की औषधियों का निर्माण हुआ है। इससे अनेक रोगों की पहचान, उपचार तथा रोकथाम सम्भव हुई है।

आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विकास से मानव स्वास्थ्य की रक्षा करने में सहायता मिली है।

2. समय की बचत

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की सहायता से अनेक कार्य कम समय में पूरे किए जा सकते हैं।

उदाहरण के लिए—

  • प्रेशर कुकर द्वारा भोजन जल्दी बनाया जा सकता है।
  • प्रिंटिंग मशीन द्वारा कम समय में बड़ी मात्रा में छपाई की जा सकती है।
  • मोटरसाइकिल तथा बस जैसे परिवहन साधनों से कम समय में अधिक दूरी तय की जा सकती है।

3. औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि

वैज्ञानिक मशीनों एवं तकनीकों के प्रयोग से उद्योगों में उत्पादन की गति बढ़ी है।

मशीनों की सहायता से कम समय में अधिक वस्तुओं का निर्माण किया जा सकता है।

4. मनोरंजन एवं सुरक्षा के साधनों का विकास

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने मनोरंजन के अनेक साधन उपलब्ध कराए हैं।

इसके साथ ही मानव की सुरक्षा से सम्बन्धित अनेक साधनों और तकनीकों का भी विकास हुआ है।

5. संचार के क्षेत्र में लाभ

विज्ञान के विकास से संचार के साधनों में अत्यधिक प्रगति हुई है।

इन साधनों की सहायता से दूर स्थित व्यक्तियों तक संदेश एवं सूचनाएँ शीघ्र पहुँचाई जा सकती हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रमुख लाभ एक नजर में

क्षेत्र प्रमुख लाभ
चिकित्सा दवाओं का विकास तथा रोगों का उपचार
समय मशीनों एवं आधुनिक साधनों से समय की बचत
उद्योग उत्पादन में वृद्धि
मनोरंजन एवं सुरक्षा नई सुविधाओं एवं साधनों का विकास
संचार सूचनाओं एवं संदेशों का तीव्र आदान-प्रदान

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से मानव समाज को हानियाँ

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मानव जीवन के लिए लाभदायक है, परन्तु इसके अत्यधिक अथवा अनुचित प्रयोग से अनेक समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं।

वाहनों की संख्या बढ़ने से वायु प्रदूषण में वृद्धि होती है। इसी प्रकार चिकित्सा सुविधाओं के विकास से मृत्यु दर में कमी आने के कारण जनसंख्या वृद्धि जैसी समस्या भी सामने आती है।

1. व्यसन की प्रवृत्ति

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से प्राप्त कुछ साधनों का अत्यधिक उपयोग मनुष्य में व्यसन या आदत की प्रवृत्ति उत्पन्न कर सकता है।

2. पर्यावरण प्रदूषण

वैज्ञानिक एवं तकनीकी साधनों के अत्यधिक प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ सकता है।

वाहनों तथा औद्योगिक गतिविधियों से वायु एवं अन्य प्रकार के प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है।

3. खाद्य पदार्थों में विषाक्तता

विज्ञान एवं तकनीकी का अनुचित प्रयोग खाद्य पदार्थों में विषाक्तता उत्पन्न करने का कारण बन सकता है।

4. औद्योगिक अपशिष्ट से प्रदूषण

कारखानों एवं उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ नदियों और भूमि को प्रदूषित कर सकते हैं।

इससे जल तथा भूमि की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

5. बेरोजगारी की समस्या

स्वचालित मशीनों के प्रयोग से अनेक कार्य मशीनों द्वारा किए जाने लगे हैं।

इससे कुछ क्षेत्रों में मानव श्रम की आवश्यकता कम होती है, जिसके कारण बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

6. ध्वनि प्रदूषण

मनोरंजन के साधनों की अधिकता एवं उनके अत्यधिक प्रयोग से ध्वनि प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की प्रमुख हानियाँ एक नजर में

हानि प्रभाव
व्यसन तकनीकी साधनों के अत्यधिक प्रयोग की आदत
पर्यावरण प्रदूषण वाहनों एवं अन्य साधनों से प्रदूषण में वृद्धि
खाद्य विषाक्तता खाद्य पदार्थों पर प्रतिकूल प्रभाव
औद्योगिक अपशिष्ट नदियों एवं भूमि का प्रदूषण
बेरोजगारी स्वचालित मशीनों के कारण मानव श्रम की आवश्यकता में कमी
ध्वनि प्रदूषण मनोरंजन के साधनों के अत्यधिक प्रयोग से शोर में वृद्धि

लाभ और हानि का तुलनात्मक रूप

लाभ हानि
रोगों के उपचार में सहायता कुछ साधनों के अत्यधिक प्रयोग से व्यसन
समय की बचत पर्यावरण प्रदूषण
औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि औद्योगिक अपशिष्ट से जल एवं भूमि प्रदूषण
मनोरंजन एवं सुरक्षा के साधनों का विकास ध्वनि प्रदूषण
संचार सुविधाओं का विकास मशीनों के कारण बेरोजगारी की समस्या

निष्कर्ष

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मानव समाज के लिए अत्यन्त उपयोगी है। इससे चिकित्सा, परिवहन, संचार, उद्योग और मनोरंजन के क्षेत्रों में अनेक सुविधाएँ प्राप्त हुई हैं। परन्तु इसके अत्यधिक या अनुचित प्रयोग से प्रदूषण, बेरोजगारी, व्यसन और अन्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • विज्ञान ने दवाओं के विकास एवं रोगों के उपचार में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • प्रेशर कुकर, प्रिंटिंग मशीन, मोटरसाइकिल एवं बस जैसे साधनों से समय की बचत होती है।
  • वैज्ञानिक मशीनों के प्रयोग से औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि हुई है।
  • विज्ञान ने मनोरंजन, सुरक्षा एवं संचार के साधनों का विकास किया है।
  • वाहनों एवं तकनीकी साधनों के अत्यधिक प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ सकता है।
  • औद्योगिक अपशिष्ट नदियों एवं भूमि को प्रदूषित कर सकता है।
  • स्वचालित मशीनों के अधिक प्रयोग से कुछ क्षेत्रों में बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • मनोरंजन के साधनों की अधिकता से ध्वनि प्रदूषण हो सकता है।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का उचित प्रयोग मानव समाज के लिए लाभदायक है।

अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

निम्नलिखित में से कौन-सा परिवहन साधन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की देन है?

व्याख्या: मोटरसाइकिल आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी द्वारा विकसित परिवहन साधन है।
Q 2

विज्ञान से किस क्षेत्र को लाभ हुआ है?

व्याख्या: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने शिक्षा, दूरसंचार और कृषि सहित अनेक क्षेत्रों के विकास में योगदान दिया है।
Q 3

प्रौद्योगिकी के विकास से क्या हुआ है?

व्याख्या: प्रौद्योगिकी के विकास ने मानव जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है।
Q 4

एक्स-रे का आविष्कार किसने किया?

व्याख्या: एक्स-रे की खोज का श्रेय विलियम रॉन्टजन को दिया जाता है।
Q 5

निम्नलिखित में से परिवहन का साधन कौन-सा है?

व्याख्या: रेलवे यात्रियों और माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने वाला परिवहन साधन है।
Q 6

निम्नलिखित में सबसे तेज परिवहन साधन कौन-सा है?

व्याख्या: दिए गए विकल्पों में हवाई जहाज सबसे तेज परिवहन साधन है।
Q 7

EDUSAT क्या है?

व्याख्या: EDUSAT शिक्षा से सम्बन्धित उपग्रह है, जिसका उपयोग दूरस्थ शिक्षा में किया जाता है।
Q 8

विज्ञान शब्द किससे मिलकर बना है?

व्याख्या: विज्ञान शब्द वि + ज्ञान से मिलकर बना है, जिसका अर्थ विशेष या परिष्कृत ज्ञान है।
Q 9

वैज्ञानिक ज्ञान के व्यावहारिक प्रयोग को क्या कहा जाता है?

व्याख्या: वैज्ञानिक ज्ञान एवं सिद्धान्तों के व्यावहारिक प्रयोग को प्रौद्योगिकी कहा जाता है।
Q 10

क्रेस्कोग्राफ का आविष्कार किस वैज्ञानिक ने किया?

व्याख्या: जगदीश चन्द्र बोस ने पौधों की वृद्धि के मापन के लिए क्रेस्कोग्राफ का आविष्कार किया।
Q 11

जेनेटिक कोड पर शोध के लिए किस वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार मिला?

व्याख्या: डॉ. हरगोविन्द खुराना को जेनेटिक कोड पर किए गए शोध कार्य के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।
Q 12

हरित क्रांति के जनक किसे कहा जाता है?

व्याख्या: नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग को हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।
Q 13

अण्डा उत्पादन के लिए पाले जाने वाले पक्षियों को क्या कहा जाता है?

व्याख्या: अण्डा उत्पादन के लिए पाले जाने वाले पक्षियों को लेयर कहा जाता है, जबकि ब्रॉयलर मांस उत्पादन के लिए पाले जाते हैं।
Q 14

बायोगैस में मीथेन की मात्रा लगभग कितनी होती है?

व्याख्या: बायोगैस में मीथेन की मात्रा लगभग 50–60 प्रतिशत होती है।
Q 15

CNG में मुख्य रूप से कौन-सी गैस पाई जाती है?

व्याख्या: CNG में मुख्य रूप से मीथेन पाई जाती है, जिसकी मात्रा लगभग 80–90 प्रतिशत बताई गई है।

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पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 3 के विषय विज्ञान के अध्याय दैनिक जीवन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1

दैनिक जीवन में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के महत्त्व का उल्लेख कीजिए।

Q 2

विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी से होने वाली हानियाँ बताइए।

Q 3

कृषि पर टिप्पणी लिखिए।

Q 4

जनसंचार से आप क्या समझते हैं?

Q 5

प्रौद्योगिकी का अर्थ बताते हुए इसके लाभ बताइए।

Q 6

प्रौद्योगिकी के उपयोगों की व्याख्या कीजिए।

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Practice More Questions

इसी semester और subject के MCQ Tests तथा Previous Year Papers practice करके अपनी तैयारी को और मजबूत बनाइए।

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