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Chapter 4 • विज्ञान

भौतिक मापन

UP DELED Semester 1 विज्ञान विषय के इस अध्याय में भौतिक मापन का अर्थ, सदिश एवं अदिश राशियाँ, मापन की आवश्यकता एवं महत्त्व, मापन की विभिन्न पद्धतियाँ, SI के मूल एवं व्युत्पन्न मात्रक, विभिन्न राशियों का मापन, वर्नियर कैलिपर्स, रेन गेज, थर्मामीटर तथा अन्य मापन उपकरणों का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

10
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15
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Notes
Topic 1 भौतिक मापन तथा सदिश एवं अदिश राशियाँ

भौतिक मापन तथा सदिश एवं अदिश राशियाँ

भौतिक मापन (Physical Measurement)

किसी भौतिक राशि के परिमाण को संख्याओं में व्यक्त करने की प्रक्रिया को मापन कहते हैं।

मापन मूलतः तुलना करने की प्रक्रिया है। इसमें किसी भौतिक राशि की मात्रा की तुलना उसी प्रकार की एक पहले से निर्धारित मानक मात्रा से की जाती है।

इस पूर्व निर्धारित मानक मात्रा को उस भौतिक राशि का मात्रक (Unit) कहा जाता है।

मापन को उदाहरण से समझें

यदि हम कहते हैं कि किसी पेड़ की ऊँचाई 10 मीटर है, तो यहाँ—

  • 10 उस राशि का संख्यात्मक मान है।
  • मीटर लम्बाई का मानक मात्रक है।

अर्थात् किसी भी भौतिक राशि को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए एक संख्या तथा एक मानक मात्रक दोनों की आवश्यकता होती है।

इसे सरल रूप में इस प्रकार समझ सकते हैं—

भौतिक राशि = संख्यात्मक मान × मात्रक

मात्रक की आवश्यकता

किसी भौतिक राशि की मात्रा तभी स्पष्ट और उपयोगी रूप से व्यक्त की जा सकती है, जब उसे किसी निश्चित मानक मात्रक के साथ लिखा जाए।

जैसे—

  • लम्बाई के लिए — मीटर
  • समय के लिए — सेकण्ड
  • द्रव्यमान के लिए — किलोग्राम

मूल राशियाँ एवं मूल मात्रक

कुछ प्रमुख भौतिक राशियों को मूल राशियाँ कहा जाता है। इन राशियों को व्यक्त करने के लिए जिन मात्रकों का उपयोग किया जाता है, उन्हें मूल मात्रक कहते हैं।

प्रमुख मूल राशियाँ हैं—

  • लम्बाई
  • द्रव्यमान
  • समय
  • ताप
  • विद्युत धारा
  • पदार्थ की मात्रा
  • ज्योति तीव्रता

सदिश तथा अदिश राशियाँ

भौतिक राशियों को उनके परिमाण और दिशा के आधार पर मुख्य रूप से दो प्रकारों में समझा जाता है—

  1. सदिश राशि (Vector Quantity)
  2. अदिश राशि (Scalar Quantity)

1. सदिश राशि (Vector Quantity)

जिस भौतिक राशि में परिमाण के साथ-साथ दिशा भी निहित होती है, उसे सदिश राशि कहते हैं।

किसी सदिश राशि को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए उसके परिमाण के साथ उसकी दिशा बताना भी आवश्यक होता है।

प्रमुख उदाहरण—

  • विस्थापन
  • वेग
  • बल
  • त्वरण
  • संवेग
  • बल-आघूर्ण
  • आवेग
  • भार
  • विद्युत क्षेत्र
  • चुम्बकीय क्षेत्र
  • कोणीय वेग

2. अदिश राशि (Scalar Quantity)

जिस भौतिक राशि को व्यक्त करने के लिए केवल उसके परिमाण की आवश्यकता होती है और दिशा की आवश्यकता नहीं होती, उसे अदिश राशि कहते हैं।

प्रमुख उदाहरण—

  • लम्बाई
  • दूरी
  • समय
  • क्षेत्रफल
  • द्रव्यमान
  • आयतन
  • चाल
  • घनत्व
  • दाब
  • कार्य
  • ऊर्जा
  • आवेश
  • आवृत्ति
  • विशिष्ट ऊष्मा
  • शक्ति
  • कोण
  • ताप
  • विद्युत धारा
  • विद्युत विभव

सदिश एवं अदिश राशि में अन्तर

आधार सदिश राशि अदिश राशि
परिमाण परिमाण आवश्यक होता है। परिमाण आवश्यक होता है।
दिशा दिशा भी आवश्यक होती है। दिशा की आवश्यकता नहीं होती।
पूर्ण अभिव्यक्ति परिमाण और दिशा दोनों से पूर्ण रूप से व्यक्त होती है। केवल परिमाण से पूर्ण रूप से व्यक्त होती है।
उदाहरण विस्थापन, वेग, बल, त्वरण दूरी, चाल, समय, द्रव्यमान

सदिश और अदिश को सरल रूप में समझें

यदि किसी राशि के लिए केवल यह बताना पर्याप्त है कि वह कितनी है, तो वह अदिश राशि है। यदि यह भी बताना आवश्यक हो कि वह किस दिशा में है, तो वह सदिश राशि है।

उदाहरण के लिए दूरी केवल परिमाण से व्यक्त की जाती है, जबकि विस्थापन को पूर्ण रूप से बताने के लिए परिमाण के साथ दिशा भी आवश्यक होती है।

सदिश एवं अदिश राशियों में अन्तर
सदिश राशियों में परिमाण एवं दिशा दोनों, जबकि अदिश राशियों में केवल परिमाण होता है
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • किसी भौतिक राशि के परिमाण को संख्याओं में व्यक्त करने की प्रक्रिया मापन कहलाती है।
  • मापन किसी भौतिक राशि की तुलना उसी प्रकार की पूर्व निर्धारित मानक मात्रा से करने की प्रक्रिया है।
  • पूर्व निर्धारित मानक मात्रा को मात्रक कहते हैं।
  • किसी भौतिक राशि को व्यक्त करने के लिए संख्यात्मक मान और मात्रक दोनों आवश्यक होते हैं।
  • जिस राशि में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं, वह सदिश राशि कहलाती है।
  • जिस राशि में केवल परिमाण होता है और दिशा आवश्यक नहीं होती, वह अदिश राशि कहलाती है।
  • विस्थापन, वेग, बल और त्वरण सदिश राशियों के उदाहरण हैं।
  • दूरी, चाल, समय और द्रव्यमान अदिश राशियों के उदाहरण हैं।
Topic 2 भौतिक मापन की आवश्यकता एवं महत्त्व

भौतिक मापन की आवश्यकता एवं महत्त्व

भौतिक मापन की आवश्यकता

दैनिक जीवन, विज्ञान, स्वास्थ्य, उद्योग, परिवहन तथा व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में सही निर्णय लेने के लिए भौतिक राशियों का शुद्ध एवं विश्वसनीय मापन आवश्यक होता है।

भौतिक मापन की आवश्यकता निम्नलिखित प्रमुख कार्यों में होती है—

  1. स्वास्थ्य निदान एवं उपचार में— रोगों के निदान, उपचार की सुरक्षा तथा उसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए सही मापन आवश्यक है।
  2. घरेलू एवं वाहन सम्बन्धी मापन में— घरों में ऊर्जा, मूल्य तथा गैस की मात्रा के मापन अथवा वाहनों में ईंधन की मात्रा ज्ञात करने के लिए मापन की आवश्यकता होती है।
  3. विमान के सुरक्षित संचालन में— उड़ान के दौरान विभिन्न भौतिक राशियों का सही मापन विमान के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने में सहायता करता है।
  4. अन्तर्राष्ट्रीय समय की एकरूपता में— अन्तर्राष्ट्रीय समय मानकों की स्थिरता बनाए रखने के लिए मापन आवश्यक है, जिससे पूरी दुनिया में विश्वसनीय रूप से संचार किया जा सके।
  5. जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में— जलवायु परिवर्तन को समझने तथा उसे कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का मापन किया जाता है।
  6. खाद्य आपूर्ति की सुरक्षा में— खाद्य आपूर्ति की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में मापन का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
  7. व्यापार में निष्पक्षता हेतु— बाजार में खरीदार और विक्रेता के बीच उचित एवं निष्पक्ष लेन-देन सुनिश्चित करने के लिए सही मापन आवश्यक है।

भौतिक मापन का महत्त्व

लॉर्ड केल्विन ने मापन के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए यह विचार व्यक्त किया कि जब किसी वस्तु या घटना को मापा जा सके और उसे संख्याओं में व्यक्त किया जा सके, तभी उसके बारे में हमारा ज्ञान अधिक स्पष्ट एवं वैज्ञानिक माना जा सकता है।

भौतिक मापन का महत्त्व निम्नलिखित बिन्दुओं से समझा जा सकता है—

1. वैज्ञानिक ज्ञान को संख्यात्मक रूप देना

जिस वस्तु या राशि को मापा नहीं जा सकता, उसे सही रूप से संख्याओं में व्यक्त करना कठिन होता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में किसी भी तथ्य को स्पष्ट एवं विश्वसनीय रूप से प्रस्तुत करने के लिए संख्यात्मक मान आवश्यक होता है।

2. भौतिक राशियों के नियंत्रण में

यदि किसी भौतिक राशि को नियंत्रित करना हो, तो पहले उसका मापन करना आवश्यक है। शुद्ध मापन के बिना शुद्ध नियंत्रण सम्भव नहीं है।

3. उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखने में

विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं द्वारा वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है। इन प्रक्रियाओं से प्राप्त उत्पादों की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रक्रिया में शामिल भौतिक राशियों को कितनी शुद्धता से नियंत्रित किया गया है।

इसलिए उत्पादन प्रक्रिया में ताप, दाब, द्रव्यमान, समय आदि का सही मापन आवश्यक होता है।

4. प्रकृति के नियमों और सम्बन्धों को समझने में

प्रकृति के रहस्यों को जानने के लिए मापन आवश्यक है। विभिन्न भौतिक राशियों को मापने से उनके बीच सम्बन्ध ज्ञात किए जा सकते हैं।

इन्हीं सम्बन्धों के आधार पर आगे चलकर नए नियम और सिद्धान्त दिए जाते हैं।

5. पदार्थों के गुणधर्म जानने में

किसी पदार्थ की उपयोगिता उसके गुणधर्मों पर निर्भर करती है। पदार्थों के गुणों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए उनके विभिन्न गुणधर्मों का मापन आवश्यक होता है।

6. विभिन्न विज्ञानों एवं अन्य क्षेत्रों में उपयोग

मापन का उपयोग केवल अभियान्त्रिकी और भौतिकी तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग अन्य विज्ञानों के साथ-साथ मनोविज्ञान तथा स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी किया जाता है।

भौतिक मापन की आवश्यकता एवं महत्त्व एक नजर में

क्षेत्र मापन का उपयोग
स्वास्थ्य निदान, उपचार की सुरक्षा एवं प्रभावशीलता
परिवहन विमान का सुरक्षित संचालन तथा वाहन में ईंधन मापन
संचार अन्तर्राष्ट्रीय समय मानकों की स्थिरता
पर्यावरण ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का मापन
व्यापार खरीदार एवं विक्रेता के बीच निष्पक्षता
उद्योग उत्पादन प्रक्रिया एवं उत्पादों की गुणवत्ता का नियंत्रण
विज्ञान भौतिक राशियों के सम्बन्ध, नियम एवं सिद्धान्त ज्ञात करना

परीक्षा में लिखने योग्य निष्कर्ष

भौतिक मापन विज्ञान और दैनिक जीवन दोनों का आधार है। इसके द्वारा किसी राशि को संख्यात्मक रूप में व्यक्त किया जाता है, उसका नियंत्रण किया जाता है तथा विभिन्न प्रक्रियाओं की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाती है। वैज्ञानिक नियमों के निर्माण, उद्योगों में गुणवत्ता नियंत्रण, स्वास्थ्य, व्यापार और पर्यावरण के अध्ययन में भी भौतिक मापन का विशेष महत्त्व है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • स्वास्थ्य निदान एवं उपचार की सुरक्षा के लिए सही मापन आवश्यक है।
  • विमान संचालन, ईंधन मापन और अन्तर्राष्ट्रीय समय की एकरूपता में भौतिक मापन उपयोगी है।
  • ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का मापन जलवायु परिवर्तन को समझने में सहायक है।
  • बाजार में खरीदार और विक्रेता के बीच निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मापन आवश्यक है।
  • किसी भौतिक राशि का शुद्ध नियंत्रण उसके सही मापन के बिना सम्भव नहीं है।
  • औद्योगिक उत्पादों की गुणवत्ता सही मापन एवं नियंत्रण पर निर्भर करती है।
  • मापन द्वारा विभिन्न भौतिक राशियों के सम्बन्ध ज्ञात होते हैं, जिनसे नए नियम और सिद्धान्त विकसित किए जाते हैं।
  • मापन का उपयोग भौतिकी एवं अभियान्त्रिकी के अतिरिक्त मनोविज्ञान और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी होता है।
Topic 3 भौतिक मापन की विधियाँ एवं महत्त्वपूर्ण तथ्य

भौतिक मापन की विधियाँ एवं महत्त्वपूर्ण तथ्य

भौतिक मापन की विधियाँ

भौतिक राशियों के मापन के लिए अलग-अलग समय पर विभिन्न मात्रक पद्धतियों का प्रयोग किया गया है। भौतिक मापन की प्रमुख चार पद्धतियाँ हैं—

  1. सी.जी.एस. पद्धति (CGS System)
  2. एफ.पी.एस. पद्धति (FPS System)
  3. एम.के.एस. पद्धति (MKS System)
  4. अन्तर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति या SI पद्धति

1. सी.जी.एस. पद्धति (Centimeter Gram Second System)

इस पद्धति में लम्बाई, द्रव्यमान तथा समय के मात्रक क्रमशः—

  • सेंटीमीटर (Centimeter)
  • ग्राम (Gram)
  • सेकण्ड (Second)

होते हैं। इसलिए इसे सेंटीमीटर-ग्राम-सेकण्ड या CGS पद्धति कहा जाता है।

इसे फ्रेंच या मीट्रिक पद्धति भी कहा जाता है।

2. एफ.पी.एस. पद्धति (Foot Pound Second System)

इस पद्धति में लम्बाई, द्रव्यमान और समय के मात्रक क्रमशः—

  • फुट (Foot)
  • पाउण्ड (Pound)
  • सेकण्ड (Second)

होते हैं। इसे एफ.पी.एस. या ब्रिटिश पद्धति भी कहा जाता है।

3. एम.के.एस. पद्धति (Meter Kilogram Second System)

इस पद्धति में लम्बाई, द्रव्यमान तथा समय के मात्रक क्रमशः—

  • मीटर (Meter)
  • किलोग्राम (Kilogram)
  • सेकण्ड (Second)

होते हैं। इसलिए इसे मीटर-किलोग्राम-सेकण्ड या MKS पद्धति कहा जाता है।

4. अन्तर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति या SI पद्धति

1960 ई. में अन्तर्राष्ट्रीय माप-तौल व्यवस्था में SI पद्धति को स्वीकार किया गया।

SI शब्द फ्रेंच भाषा से लिया गया है। इसका पूरा नाम International System of Units है।

SI पद्धति में सात मूल मात्रक तथा दो सम्पूरक मात्रक माने गए हैं।

चारों मात्रक पद्धतियाँ एक नजर में

पद्धति लम्बाई द्रव्यमान समय अन्य नाम
CGS सेंटीमीटर ग्राम सेकण्ड फ्रेंच / मीट्रिक पद्धति
FPS फुट पाउण्ड सेकण्ड ब्रिटिश पद्धति
MKS मीटर किलोग्राम सेकण्ड मीटर-किलोग्राम-सेकण्ड पद्धति
SI अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मात्रक पद्धति International System of Units

भौतिक मापन से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य

भौतिक मापन से जुड़े कुछ महत्त्वपूर्ण एवं परीक्षा उपयोगी तथ्य निम्नलिखित हैं—

  1. मीटर की परिभाषा— लम्बाई के मात्रक मीटर को प्रकाश में तरंगदैर्ध्य के पदों में 1960 ई. में परिभाषित किया गया।
  2. क्रिप्टॉन-86 के आधार पर मीटर— 1 मीटर को क्रिप्टॉन-86 के नारंगी प्रकाश की 1650763.73 तरंगदैर्ध्यों की लम्बाई के रूप में बताया गया है।
  3. माइक्रॉन— सूक्ष्म जीवों की लम्बाई मापने के लिए माइक्रॉन (μ) का प्रयोग किया जाता है।
  4. फर्मी या फेम्टोमीटर— परमाणुओं के नाभिक का व्यास मापने की इकाई फर्मी या फेम्टोमीटर है।
  5. प्रकाश वर्ष— प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई दूरी को एक प्रकाश वर्ष कहते हैं।
  6. खगोलीय इकाई— सूर्य तथा पृथ्वी के बीच की औसत दूरी को मापने की इकाई 1 खगोलीय इकाई कहलाती है।
  7. पारसेक— प्रकाश वर्ष से भी अधिक बड़ी दूरियों को पारसेक में मापा जाता है।
  8. सौर दिन— एक मध्याह्न से दूसरे मध्याह्न के बीच की अवधि को सौर दिन कहते हैं।
  9. माध्य सौर दिवस— एक वर्ष के सौर दिनों के माध्य को माध्य सौर दिवस कहा जाता है।
  10. सेकण्ड— माध्य सौर दिवस का 1/86400 भाग एक सेकण्ड के बराबर होता है।
  11. परमाणु घड़ी— सीजियम पर आधारित परमाणु घड़ी का उपयोग अत्यन्त शुद्ध समय मापन के लिए किया जाता है।
  12. फोटोमीटर— ज्योति तीव्रता मापने का यंत्र फोटोमीटर है।
  13. कैण्डेला— कैण्डेला का दूसरा नाम ल्यूमेन/स्टेरेडियन दिया गया है।
  14. विभवान्तर— विभवान्तर की इकाई वोल्ट है।
  15. विद्युत शक्ति— विद्युत शक्ति की इकाई किलोवाट/घण्टा दी गई है।
  16. ऊष्मा— ऊष्मा की इकाई कैलोरी है।
  17. चुम्बकीय फ्लक्स— चुम्बकीय फ्लक्स की व्यावहारिक इकाई वेबर है।
  18. प्रेरकत्व— प्रेरकत्व की व्यावहारिक इकाई हेनरी है।

महत्त्वपूर्ण मात्रक एवं यंत्र एक नजर में

राशि / तथ्य मात्रक / उपकरण
सूक्ष्म जीवों की लम्बाई माइक्रॉन
परमाणु नाभिक का व्यास फर्मी / फेम्टोमीटर
बहुत बड़ी खगोलीय दूरी प्रकाश वर्ष, पारसेक
ज्योति तीव्रता का मापन फोटोमीटर
विभवान्तर वोल्ट
ऊष्मा कैलोरी
चुम्बकीय फ्लक्स वेबर
प्रेरकत्व हेनरी

परीक्षा में याद रखने की सरल युक्ति

CGS = सेंटीमीटर + ग्राम + सेकण्ड
FPS = फुट + पाउण्ड + सेकण्ड
MKS = मीटर + किलोग्राम + सेकण्ड
SI = अन्तर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • भौतिक मापन की चार प्रमुख पद्धतियाँ CGS, FPS, MKS और SI हैं।
  • CGS में सेंटीमीटर, ग्राम एवं सेकण्ड का प्रयोग किया जाता है।
  • FPS में फुट, पाउण्ड एवं सेकण्ड और MKS में मीटर, किलोग्राम एवं सेकण्ड मूल मात्रक हैं।
  • SI अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मात्रक पद्धति है।
  • प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई दूरी को प्रकाश वर्ष कहते हैं।
  • सूर्य और पृथ्वी की औसत दूरी को एक खगोलीय इकाई कहा जाता है।
  • बहुत बड़ी खगोलीय दूरियाँ पारसेक में भी मापी जाती हैं।
  • ज्योति तीव्रता मापने का यंत्र फोटोमीटर है।
  • विभवान्तर की इकाई वोल्ट, चुम्बकीय फ्लक्स की व्यावहारिक इकाई वेबर और प्रेरकत्व की व्यावहारिक इकाई हेनरी है।
Topic 4 SI पद्धति एवं उसके सात मूल मात्रक

SI पद्धति एवं उसके सात मूल मात्रक

SI पद्धति (International System of Units)

वर्तमान समय में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मापन के लिए SI पद्धति का प्रयोग किया जाता है। इसका पूरा नाम International System of Units है और इसे संक्षेप में SI लिखा जाता है।

SI पद्धति के मात्रकों तथा उनके संकेताक्षरों की व्यवस्था को 1971 ई. में माप-तौल के महासम्मेलन द्वारा विकसित कर वैज्ञानिक, तकनीकी, औद्योगिक तथा व्यापारिक कार्यों में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयोग के लिए अनुमोदित किया गया।

SI पद्धति दशमलव प्रणाली पर आधारित है, इसलिए एक मात्रक से दूसरे मात्रक में रूपान्तरण करना सरल और सुविधाजनक होता है।

SI मात्रकों के प्रकार

मात्रक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—

  1. मूल मात्रक या मूल इकाइयाँ (Fundamental Units)
  2. व्युत्पन्न मात्रक या व्युत्पन्न इकाइयाँ (Derived Units)

1. मूल मात्रक (Fundamental Units)

किसी भौतिक राशि को व्यक्त करने के लिए जिन स्वतंत्र मानकों का प्रयोग किया जाता है और जो अन्य मात्रकों पर निर्भर नहीं होते, उन्हें मूल मात्रक कहते हैं।

उदाहरण के लिए लम्बाई, द्रव्यमान और समय के मात्रक क्रमशः मीटर, किलोग्राम और सेकण्ड मूल मात्रक हैं।

2. व्युत्पन्न मात्रक (Derived Units)

जब किसी भौतिक राशि का मात्रक दो या दो से अधिक मूल मात्रकों के संयोजन से प्राप्त होता है, तो उसे व्युत्पन्न मात्रक कहते हैं।

उदाहरण—

  • बल — न्यूटन
  • दाब — पास्कल
  • कार्य — जूल
  • विभव — वोल्ट

SI पद्धति के सात मूल मात्रक

मूल राशि SI मात्रक प्रतीक
लम्बाई मीटर m
द्रव्यमान किलोग्राम kg
समय सेकण्ड sec
विद्युत धारा एम्पियर A
ताप केल्विन K
पदार्थ की मात्रा मोल mol
ज्योति-तीव्रता कैण्डेला cd

1. लम्बाई का मूल मात्रक — मीटर

SI पद्धति में लम्बाई का मूल मात्रक मीटर है।

1 मीटर वह दूरी है जिसे प्रकाश निर्वात में 1/299792458 सेकण्ड में तय करता है।

मीटर का प्रतीक m है।

2. द्रव्यमान का मूल मात्रक — किलोग्राम

SI पद्धति में द्रव्यमान का मूल मात्रक किलोग्राम है।

फ्रांस के सेवरेस नामक स्थान पर अन्तर्राष्ट्रीय माप-तौल ब्यूरो में सुरक्षित रखे गए प्लेटिनम-इरिडियम मिश्रधातु के बेलन के द्रव्यमान को मानक किलोग्राम माना गया है।

किलोग्राम का प्रतीक kg है।

3. समय का मूल मात्रक — सेकण्ड

SI पद्धति में समय का मूल मात्रक सेकण्ड है।

सीजियम-133 परमाणु की मूल अवस्था के दो निश्चित ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण से उत्पन्न विकिरण के 9,192,631,770 आवर्तकालों की अवधि को 1 सेकण्ड कहते हैं।

4. विद्युत धारा का मूल मात्रक — एम्पियर

SI पद्धति में विद्युत धारा का मूल मात्रक एम्पियर है।

यदि निर्वात में दो लम्बे तथा पतले तारों को 1 मीटर की दूरी पर समानान्तर रखा जाए और उनमें समान विद्युत धारा प्रवाहित की जाए, जिससे उनके बीच प्रति मीटर लम्बाई पर 2 × 10-7 न्यूटन का बल उत्पन्न हो, तो उस विद्युत धारा के परिमाण को 1 एम्पियर कहा जाता है।

एम्पियर का प्रतीक A है।

5. ताप का मूल मात्रक — केल्विन

SI पद्धति में ताप का मूल मात्रक केल्विन है।

जल के त्रिक बिन्दु (Triple Point) के ऊष्मागतिक ताप के 1/273.16 भाग को एक केल्विन कहा जाता है।

केल्विन का प्रतीक K है।

6. ज्योति-तीव्रता का मूल मात्रक — कैण्डेला

SI पद्धति में ज्योति-तीव्रता का मूल मात्रक कैण्डेला है।

किसी निश्चित दिशा में किसी प्रकाश स्रोत की ज्योति-तीव्रता 1 कैण्डेला तब मानी जाती है, जब वह स्रोत उस दिशा में 540 × 1012 हर्ट्ज आवृत्ति का एकवर्णीय प्रकाश उत्सर्जित करता है और उसकी तीव्रता 1/683 वाट प्रति स्टेरेडियन होती है।

कैण्डेला का प्रतीक cd है।

ज्योति-तीव्रता मापने का यंत्र फोटोमीटर है।

7. पदार्थ की मात्रा का मूल मात्रक — मोल

SI पद्धति में पदार्थ की मात्रा का मूल मात्रक मोल है।

एक मोल पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उसके अवयवी तत्वों, जैसे परमाणु या अणु, की संख्या 6.023 × 1023 होती है।

इस संख्या को आवोगाद्रो नियतांक कहा जाता है।

मोल का प्रतीक mol है।

सात मूल मात्रक एक नजर में

लम्बाई → मीटर (m)
द्रव्यमान → किलोग्राम (kg)
समय → सेकण्ड (sec)
विद्युत धारा → एम्पियर (A)
ताप → केल्विन (K)
पदार्थ की मात्रा → मोल (mol)
ज्योति-तीव्रता → कैण्डेला (cd)

SI पद्धति के सात मूल मात्रक
SI पद्धति की सात मूल राशियाँ, उनके मात्रक एवं प्रतीक
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • SI का पूरा नाम International System of Units है और इसे संक्षेप में SI लिखा जाता है।
  • मात्रक मुख्यतः मूल मात्रक और व्युत्पन्न मात्रक दो प्रकार के होते हैं।
  • SI पद्धति में सात मूल मात्रक हैं।
  • लम्बाई का मूल मात्रक मीटर तथा द्रव्यमान का किलोग्राम है।
  • समय का मूल मात्रक सेकण्ड तथा विद्युत धारा का एम्पियर है।
  • ताप का मूल मात्रक केल्विन तथा पदार्थ की मात्रा का मोल है।
  • ज्योति-तीव्रता का मूल मात्रक कैण्डेला है।
  • एक मोल में 6.023 × 1023 अवयवी कण होते हैं, जिसे आवोगाद्रो नियतांक कहा जाता है।
Topic 5 SI के पूरक एवं व्युत्पन्न मात्रक

SI के पूरक एवं व्युत्पन्न मात्रक

SI पद्धति की पूरक राशियाँ

SI पद्धति में सात मूल राशियों के अतिरिक्त दो पूरक राशियाँ भी दी गई हैं—

पूरक राशि पूरक मात्रक प्रतीक
समतलीय कोण रेडियन rad
घन-कोण स्टेरेडियन sr

1. समतलीय कोण (Plane Angle)

किसी वृत्त के चाप की लम्बाई और उसकी त्रिज्या के अनुपात को समतलीय कोण कहते हैं।

यदि चाप की लम्बाई ds, त्रिज्या r तथा समतलीय कोण dθ हो, तो—

समतलीय कोण = चाप की लम्बाई / त्रिज्या

dθ = ds / r

रेडियन (Radian)

किसी वृत्त में जब चाप की लम्बाई उसकी त्रिज्या के बराबर हो, तब उस चाप द्वारा वृत्त के केन्द्र पर बनाया गया कोण एक रेडियन कहलाता है।

रेडियन का प्रयोग समतल पर बने कोणों को मापने के लिए किया जाता है।

रेडियन का प्रतीक rad है। इसे विमाहीन राशि माना जाता है।

2. घन-कोण (Solid Angle)

किसी बिन्दु O को केन्द्र मानकर उसके चारों ओर निर्मित गोलीय पृष्ठ के क्षेत्रफल dA और त्रिज्या r के वर्ग के अनुपात को घन-कोण कहते हैं।

यदि घन-कोण dΩ हो, तो—

dΩ = dA / r2

स्टेरेडियन (Steradian)

किसी गोले की सतह पर उसकी त्रिज्या के बराबर भुजा वाले वर्गाकार क्षेत्रफल द्वारा गोले के केन्द्र पर बनाया गया घन-कोण एक स्टेरेडियन कहलाता है।

स्टेरेडियन का प्रयोग ठोस या घन कोणों को मापने के लिए किया जाता है।

इसका प्रतीक sr है और इसे भी विमाहीन राशि माना जाता है।

रेडियन एवं स्टेरेडियन का चित्र
समतलीय कोण के लिए रेडियन तथा घन-कोण के लिए स्टेरेडियन

विमाहीन राशियाँ (Dimensionless Quantities)

वे भौतिक राशियाँ जिनकी विमा शून्य होती है, विमाहीन भौतिक राशियाँ कहलाती हैं।

विमाहीन राशियों के प्रमुख उदाहरण हैं—

  • कोण
  • घनकोण
  • आपेक्षिक घनत्व
  • विशिष्ट ऊष्मा
  • पॉइसन अनुपात
  • विकृति
  • अपवर्तनांक

विमाहीन राशि का आंकिक मान सभी मात्रक पद्धतियों में समान रहता है।

व्युत्पन्न राशियाँ एवं व्युत्पन्न मात्रक

वे राशियाँ जिन्हें मूल राशियों के पदों में व्यक्त किया जाता है, व्युत्पन्न राशियाँ कहलाती हैं।

इन राशियों को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त मात्रकों को व्युत्पन्न मात्रक कहते हैं।

उदाहरण— क्षेत्रफल, आयतन, दाब, चाल, घनत्व आदि।

SI पद्धति के कुछ प्रमुख व्युत्पन्न मात्रक

भौतिक राशि SI मात्रक
क्षेत्रफल m2
आयतन m3
घनत्व kg/m3
चाल m/s
वेग m/s
त्वरण m/s2
बल kg m/s2 = N
संवेग kg m/s
आवेग N.s
दाब N/m2
कार्य या ऊर्जा Nm = Joule
शक्ति J/s = Watt

दस की विभिन्न घातों के पूर्वलग्न (Prefixes)

भौतिकी में बहुत बड़ी तथा बहुत छोटी राशियों के मानों को सरल रूप में व्यक्त करने के लिए 10 की विभिन्न घातों पर आधारित पूर्वलग्नों का प्रयोग किया जाता है।

इन पूर्वलग्नों को किसी मात्रक के साथ जोड़कर उसके बहुत बड़े अथवा बहुत छोटे गुणज को आसानी से लिखा जा सकता है।

बड़े मानों के प्रमुख पूर्वलग्न

पूर्वलग्न संकेत 10 की घात
योट्टा (yotta) Y 1024
जेट्टा (zetta) Z 1021
एक्सा (exa) E 1018
पेटा (peta) P 1015
टेरा (tera) T 1012
गीगा (giga) G 109
मेगा (mega) M 106
किलो (kilo) K 103
हेक्टो (hecto) H 102
डेका (deca) da 101

छोटे मानों के प्रमुख पूर्वलग्न

पूर्वलग्न संकेत 10 की घात
डेसी (deci) d 10-1
सेन्टी (centi) c 10-2
मिली (milli) m 10-3
माइक्रो (micro) μ 10-6
नैनो (nano) n 10-9
पिको (pico) p 10-12
फेम्टो (femto) f 10-15
एटो (atto) a 10-18
जेप्टो (zepto) z 10-21
योक्टो (yocto) y 10-24

परीक्षा में याद रखने योग्य मुख्य सम्बन्ध

  • समतलीय कोण = चाप / त्रिज्या
  • dθ = ds/r
  • घन-कोण = क्षेत्रफल / त्रिज्या2
  • dΩ = dA/r2
  • समतलीय कोण का मात्रक = रेडियन (rad)
  • घन-कोण का मात्रक = स्टेरेडियन (sr)
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • SI पद्धति की दो पूरक राशियाँ समतलीय कोण और घन-कोण हैं।
  • समतलीय कोण का पूरक मात्रक रेडियन (rad) तथा घन-कोण का स्टेरेडियन (sr) है।
  • रेडियन समतल कोणों तथा स्टेरेडियन घन कोणों के मापन में प्रयुक्त होता है।
  • विमाहीन राशियों की विमा शून्य होती है और उनका आंकिक मान सभी मात्रक पद्धतियों में समान रहता है।
  • क्षेत्रफल का SI मात्रक m2, आयतन का m3 तथा घनत्व का kg/m3 है।
  • बल का SI मात्रक न्यूटन, कार्य या ऊर्जा का जूल तथा शक्ति का वाट है।
  • बहुत बड़ी एवं बहुत छोटी राशियों को व्यक्त करने के लिए 10 की घातों पर आधारित पूर्वलग्नों का प्रयोग किया जाता है।
  • किलो = 103, मेगा = 106, गीगा = 109, मिली = 10-3, माइक्रो = 10-6 और नैनो = 10-9 हैं।
Topic 6 दूरी, द्रव्यमान एवं समय का मापन

दूरी, द्रव्यमान एवं समय का मापन

विभिन्न प्रकार के मापन एवं उनके मात्रक

भौतिक विज्ञान में अलग-अलग राशियों के मापन के लिए अलग-अलग उपकरण और मात्रकों का प्रयोग किया जाता है। दूरी, द्रव्यमान और समय के मापन के लिए भी अलग-अलग साधनों और मात्रकों का उपयोग होता है।

1. दूरी का मापन (Measurement of Distance)

सामान्य छोटी दूरियों के मापन के लिए मीटर स्केल का प्रयोग किया जाता है।

मीटर स्केल की सहायता से लगभग 0.1 सेमी तक की दूरी मापी जा सकती है।

बहुत सूक्ष्म दूरियों या आकारों को मापने के लिए अधिक परिशुद्ध उपकरणों का प्रयोग किया जाता है, जैसे—

  • स्क्रू गेज
  • वर्नियर कैलिपर्स
  • स्फेरोमीटर

बहुत बड़ी दूरियों, जैसे पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी, के मापन के लिए लंबन विधि का प्रयोग किया जाता है।

दूरी के प्रमुख मात्रक एवं रूपान्तरण

मात्रक मीटर में मान
1 सेंटीमीटर 10-2 मीटर
1 मिलीमीटर 10-3 मीटर
1 माइक्रोमीटर 10-6 मीटर
1 नैनोमीटर 10-9 मीटर
1 एंगस्ट्रॉम 10-10 मीटर
1 फर्मी 10-15 मीटर
1 किलोमीटर 103 मीटर

बहुत बड़ी दूरियों के मात्रक

मात्रक मान
1 खगोलीय मात्रक (AU) 1.496 × 1011 मीटर
1 प्रकाश वर्ष (ly) 9.461 × 1015 मीटर
1 पारसेक 3.08 × 1016 मीटर

अन्य दूरी मात्रक

  • 1 मील = 1.609 × 103 मीटर
  • 1 गज = 0.9144 मीटर
  • 1 इंच = 0.0254 मीटर

2. द्रव्यमान का मापन (Measurement of Mass)

द्रव्यमान के मापन के लिए सामान्यतः तुला का प्रयोग किया जाता है।

परमाणु तथा अणुओं के द्रव्यमान के मापन के लिए कार्बन-12 के द्रव्यमान को मानक के रूप में लिया जाता है।

द्रव्यमान के प्रमुख मात्रक एवं रूपान्तरण

मात्रक किलोग्राम में मान
1 ग्राम 10-3 kg
1 क्विंटल 100 kg
1 टन 1000 kg
1 स्लग (Slug) 14.59 kg

3. समय का मापन (Measurement of Time)

समय के सामान्य मापन के लिए साधारण घड़ी का प्रयोग किया जाता है।

अत्यन्त परिशुद्ध समय मापन के लिए सीजियम घड़ी या परमाणु घड़ी का उपयोग किया जाता है।

सीजियम घड़ी इतनी परिशुद्ध होती है कि यह एक वर्ष में तीन सेकण्ड से भी कम समय की त्रुटि दर्शाती है।

समय के प्रमुख मात्रक एवं रूपान्तरण

समय मात्रक सेकण्ड में मान
1 मिलीसेकण्ड 10-3 सेकण्ड
1 माइक्रोसेकण्ड 10-6 सेकण्ड
1 नैनोसेकण्ड 10-9 सेकण्ड
1 घण्टा 60 मिनट = 3600 सेकण्ड
1 दिन 24 घण्टे = 86400 सेकण्ड
1 वर्ष 365 दिन = 3.156 × 107 सेकण्ड
1 शेक (Shake) 10-8 सेकण्ड

दूरी, द्रव्यमान एवं समय का मापन एक नजर में

भौतिक राशि सामान्य मापन उपकरण SI मात्रक
दूरी / लम्बाई मीटर स्केल मीटर
सूक्ष्म दूरी स्क्रू गेज, वर्नियर कैलिपर्स, स्फेरोमीटर मीटर के छोटे मात्रक
द्रव्यमान तुला किलोग्राम
समय घड़ी सेकण्ड
अत्यन्त परिशुद्ध समय सीजियम / परमाणु घड़ी सेकण्ड

परीक्षा में याद रखने योग्य प्रमुख रूपान्तरण

  • 1 km = 103 m
  • 1 cm = 10-2 m
  • 1 mm = 10-3 m
  • 1 μm = 10-6 m
  • 1 nm = 10-9 m
  • 1 प्रकाश वर्ष = 9.461 × 1015 m
  • 1 क्विंटल = 100 kg
  • 1 टन = 1000 kg
  • 1 दिन = 86400 सेकण्ड
  • 1 वर्ष = 3.156 × 107 सेकण्ड

संख्यात्मक मान और मात्रक का सम्बन्ध

किसी भौतिक राशि को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए उसके संख्यात्मक मान तथा मात्रक दोनों की आवश्यकता होती है।

उदाहरण के लिए एक ही लम्बाई को अलग-अलग मात्रकों में इस प्रकार लिखा जा सकता है—

15 m = 1500 cm = 15000 mm

यहाँ भौतिक राशि का वास्तविक परिमाण समान रहता है, लेकिन मात्रक बदलने पर उसका संख्यात्मक मान बदल जाता है। छोटा मात्रक लेने पर संख्यात्मक मान बड़ा तथा बड़ा मात्रक लेने पर संख्यात्मक मान छोटा हो जाता है।

अतः किसी भौतिक राशि का संख्यात्मक मान उसके मात्रक के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

भौतिक राशि = संख्यात्मक मान × मात्रक

यदि किसी भौतिक राशि के दो अलग-अलग मात्रक u1 और u2 तथा उनके संख्यात्मक मान n1 और n2 हों, तो—

n1u1 = n2u2

उदाहरण: धारिता का मात्रक रूपान्तरण

यदि किसी बर्तन की धारिता 12 लीटर है, तो इसे घन मीटर तथा घन सेंटीमीटर में इस प्रकार बदल सकते हैं—

1 लीटर = 10-3 m3

अतः,

12 लीटर = 12 × 10-3 m3 = 0.012 m3

इसी प्रकार,

1 लीटर = 1000 cm3

अतः,

12 लीटर = 12 × 1000 cm3 = 12000 cm3

इस प्रकार 12 लीटर की धारिता 0.012 m3 अथवा 12000 cm3 के बराबर होती है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • छोटी दूरियों के लिए मीटर स्केल तथा सूक्ष्म दूरियों के लिए स्क्रू गेज, वर्नियर कैलिपर्स और स्फेरोमीटर का प्रयोग किया जाता है।
  • 1 सेंटीमीटर = 10-2 मीटर तथा 1 मिलीमीटर = 10-3 मीटर होता है।
  • 1 खगोलीय मात्रक = 1.496 × 1011 मीटर तथा 1 प्रकाश वर्ष = 9.461 × 1015 मीटर है।
  • द्रव्यमान के सामान्य मापन के लिए तुला का प्रयोग किया जाता है।
  • 1 ग्राम = 10-3 kg, 1 क्विंटल = 100 kg तथा 1 टन = 1000 kg होता है।
  • समय के सामान्य मापन के लिए घड़ी और अत्यन्त परिशुद्ध मापन के लिए सीजियम या परमाणु घड़ी का उपयोग किया जाता है।
  • 1 घण्टा = 3600 सेकण्ड और 1 दिन = 86400 सेकण्ड होता है।
  • 1 शेक = 10-8 सेकण्ड होता है।
Topic 7 वर्नियर कैलिपर्स: अल्पतमांक एवं शून्यांक त्रुटि

वर्नियर कैलिपर्स: अल्पतमांक एवं शून्यांक त्रुटि

वर्नियर कैलिपर्स (Vernier Calipers)

वर्नियर कैलिपर्स एक सूक्ष्म मापक यंत्र है, जिसकी सहायता से साधारण पैमाने की तुलना में अधिक शुद्धता से छोटी दूरियों तथा वस्तुओं के विभिन्न आयामों का मापन किया जाता है।

वैज्ञानिक पियरे वर्नियर (Pierre Vernier) ने ऐसा यंत्र बनाया जिसकी सहायता से 1 मिलीमीटर के दसवें भाग तक की दूरी को अधिक शुद्धता से मापा जा सकता है। इसी यंत्र को वर्नियर कैलिपर्स कहते हैं।

वर्नियर कैलिपर्स के उपयोग

वर्नियर कैलिपर्स की सहायता से मुख्यतः निम्न मापन किए जाते हैं—

  • बेलन की लम्बाई मापना
  • वृत्त का व्यास मापना
  • वस्तु के बाहरी आयाम मापना
  • वस्तु के आन्तरिक आयाम मापना
  • गहराई मापना

वर्नियर कैलिपर्स के प्रमुख भाग

वर्नियर कैलिपर्स के प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं—

  1. मुख्य स्केल— यह यंत्र का स्थिर पैमाना होता है, जिस पर मुख्य माप पढ़ा जाता है।
  2. वर्नियर पैमाना— यह मुख्य स्केल के साथ चलने वाला छोटा पैमाना है, जो सूक्ष्म मापन करने में सहायता करता है।
  3. बाहरी आयाम मापने के जबड़े— इनकी सहायता से किसी वस्तु का बाहरी व्यास या बाहरी आयाम मापा जाता है।
  4. आन्तरिक आयाम मापने के जबड़े— इनका उपयोग किसी खोखली वस्तु के आन्तरिक आयाम को मापने के लिए किया जाता है।
  5. स्क्रू क्लैम्प— मापन के समय चलायमान भाग को उचित स्थिति में स्थिर रखने में सहायता करता है।
  6. गहराई मापक ब्लेड— इसका उपयोग किसी खोखली वस्तु या छिद्र की गहराई मापने के लिए किया जाता है।

अल्पतमांक (Least Count)

किसी पैमाने द्वारा शुद्धतापूर्वक मापी जा सकने वाली न्यूनतम माप को उस पैमाने का अल्पतमांक कहते हैं।

किसी मापक यंत्र का अल्पतमांक जितना छोटा होगा, वह उतनी ही छोटी माप को अधिक सूक्ष्मता से माप सकेगा।

वर्नियर कैलिपर्स का अल्पतमांक निम्न सम्बन्ध द्वारा ज्ञात किया जाता है—

अल्पतमांक (LC) = मुख्य पैमाने पर दो चिह्नों के बीच की दूरी / वर्नियर पैमाने पर चिह्नों की संख्या

वर्नियर कैलिपर्स की शुद्धता

साधारण पैमाने का अल्पतमांक लगभग 0.1 सेमी होता है, जबकि वर्नियर कैलिपर्स द्वारा उससे अधिक सूक्ष्म दूरी का मापन किया जा सकता है।

इस कारण छोटी लम्बाइयों, व्यास तथा अन्य सूक्ष्म आयामों के मापन में वर्नियर कैलिपर्स अधिक उपयोगी होता है।

शून्यांक त्रुटि (Zero Error)

वर्नियर कैलिपर्स के दोनों जबड़ों को पूरी तरह मिलाने पर मुख्य पैमाने का शून्य और वर्नियर पैमाने का शून्य एक ही सीध में होना चाहिए।

यदि दोनों शून्य चिह्न ठीक एक सीध में हों, तो यंत्र में शून्यांक त्रुटि नहीं होती।

यदि दोनों शून्य चिह्नों के बीच कुछ अन्तर हो, तो इस अन्तर से उत्पन्न त्रुटि को शून्यांक त्रुटि कहते हैं।

शून्यांक त्रुटि दो प्रकार की होती है—

  1. धनात्मक शून्यांक त्रुटि
  2. ऋणात्मक शून्यांक त्रुटि

1. धनात्मक शून्यांक त्रुटि (Positive Zero Error)

जब वर्नियर कैलिपर्स के दोनों जबड़े मिलाने पर वर्नियर पैमाने का शून्य, मुख्य पैमाने के शून्य के दाईं ओर स्थित होता है, तो इसे धनात्मक शून्यांक त्रुटि कहते हैं।

वर्नियर का शून्य दाईं ओर → धनात्मक शून्यांक त्रुटि

2. ऋणात्मक शून्यांक त्रुटि (Negative Zero Error)

जब दोनों जबड़े मिलाने पर वर्नियर पैमाने का शून्य, मुख्य पैमाने के शून्य के बाईं ओर स्थित होता है, तो इसे ऋणात्मक शून्यांक त्रुटि कहते हैं।

वर्नियर का शून्य बाईं ओर → ऋणात्मक शून्यांक त्रुटि

धनात्मक एवं ऋणात्मक शून्यांक त्रुटि में अन्तर

आधार धनात्मक शून्यांक त्रुटि ऋणात्मक शून्यांक त्रुटि
वर्नियर शून्य की स्थिति मुख्य पैमाने के शून्य के दाईं ओर मुख्य पैमाने के शून्य के बाईं ओर
त्रुटि का प्रकार धनात्मक ऋणात्मक

वर्नियर कैलिपर्स को एक नजर में

भाग / अवधारणा मुख्य कार्य
मुख्य स्केल मुख्य माप बताता है
वर्नियर पैमाना सूक्ष्म माप ज्ञात करने में सहायता करता है
बाहरी जबड़े बाहरी आयाम मापते हैं
आन्तरिक जबड़े आन्तरिक आयाम मापते हैं
गहराई मापक ब्लेड गहराई मापता है
अल्पतमांक यंत्र द्वारा शुद्धतापूर्वक मापी जा सकने वाली न्यूनतम माप
वर्नियर कैलिपर्स के भाग और शून्यांक त्रुटि
वर्नियर कैलिपर्स के प्रमुख भाग तथा धनात्मक एवं ऋणात्मक शून्यांक त्रुटि
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • वर्नियर कैलिपर्स सूक्ष्म लम्बाई, व्यास, आन्तरिक आयाम और गहराई मापने वाला यंत्र है।
  • इस यंत्र का सम्बन्ध वैज्ञानिक पियरे वर्नियर से है।
  • मुख्य स्केल और वर्नियर पैमाना इसके प्रमुख मापक पैमाने हैं।
  • किसी यंत्र द्वारा शुद्धतापूर्वक मापी जा सकने वाली न्यूनतम माप उसका अल्पतमांक कहलाती है।
  • अल्पतमांक = मुख्य पैमाने पर दो चिह्नों के बीच की दूरी / वर्नियर पैमाने पर चिह्नों की संख्या।
  • दोनों जबड़े मिलाने पर मुख्य स्केल और वर्नियर स्केल के शून्य एक सीध में होने चाहिए।
  • वर्नियर का शून्य मुख्य स्केल के शून्य के दाईं ओर हो तो धनात्मक शून्यांक त्रुटि होती है।
  • वर्नियर का शून्य मुख्य स्केल के शून्य के बाईं ओर हो तो ऋणात्मक शून्यांक त्रुटि होती है।
Topic 8 रेन गेज: वर्षा मापन, प्रकार एवं लाभ

रेन गेज: वर्षा मापन, प्रकार एवं लाभ

रेन गेज (Rain Gauge)

आकाश से बरसने वाले पानी की मात्रा को मापने के लिए जिस यंत्र का प्रयोग किया जाता है, उसे रेन गेज कहते हैं।

हिन्दी में रेन गेज को वर्षामापी यंत्र कहा जाता है। इसकी सहायता से यह ज्ञात किया जाता है कि किसी निश्चित समय अवधि में किसी स्थान पर कितनी वर्षा हुई है।

रेन गेज का इतिहास

1662 ई. में क्रिस्टोफर रेन (Christopher Wren) ने ब्रिटेन में पहला रेन गेज बनाया था।

रेन गेज की कार्य-विधि

रेन गेज में एक फनल होता है। वर्षा का पानी इस फनल द्वारा एकत्र होता है। एकत्र हुए वर्षा जल की मात्रा को मापकर किसी निश्चित समय में हुई वर्षा का पता लगाया जाता है।

रेन गेज में गिरने वाला पानी वाष्पित नहीं होता, इसलिए संचित जल की मात्रा के आधार पर वर्षा का मापन किया जा सकता है।

वर्षा की मात्रा सामान्यतः निम्न इकाइयों में व्यक्त की जाती है—

  • मिलीमीटर (mm)
  • इंच (inch)

रेन गेज की स्थापना

वर्षा का सही मापन करने के लिए रेन गेज को पेड़ों तथा इमारतों से दूर रखा जाना चाहिए, जिससे वर्षा जल के संग्रह में बाधा न आए और मापन उचित ढंग से हो सके।

रेन गेज की सीमाएँ

रेन गेज उपयोगी यंत्र है, परन्तु इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं—

  1. तेज तूफान में कठिनाई— तेज तूफान के साथ वर्षा होने पर सही जानकारी प्राप्त करना कठिन हो सकता है तथा यंत्र के टूटने-फूटने की आशंका रहती है।
  2. एक निश्चित स्थान का मापन— रेन गेज केवल उस स्थान की वर्षा मापता है जहाँ इसे स्थापित किया गया हो।
  3. बहुत बड़े क्षेत्र की वर्षा नहीं बताता— किसी विस्तृत क्षेत्र की सम्पूर्ण वर्षा को केवल एक रेन गेज द्वारा नहीं मापा जा सकता।
  4. ओले या बर्फबारी में उपयोग सीमित— ओले या बर्फबारी के समय रेन गेज से वर्षा का मापन नहीं हो पाता।

रेन गेज के प्रकार

वर्षा जल के मापन के लिए विभिन्न प्रकार के रेन गेज प्रयोग किए जाते हैं। इसके प्रमुख चार प्रकार हैं—

  1. ग्रेजुएट सिलेंडर— इसे मानक या प्रत्यक्ष रीडिंग गेज भी कहा जाता है।
  2. टिपिंग बाल्टी
  3. वजन गेज
  4. रेन गेज ऑप्टिकल

रेन गेज के प्रकार एक नजर में

क्रम रेन गेज का प्रकार
1 ग्रेजुएट सिलेंडर — मानक या प्रत्यक्ष रीडिंग गेज
2 टिपिंग बाल्टी
3 वजन गेज
4 रेन गेज ऑप्टिकल

रेन गेज के लाभ

रेन गेज के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—

  1. वर्षा की छोटी मात्रा का मापन— रेन गेज बगीचे में पानी की छोटी मात्रा को मापने में भी सक्षम होता है।
  2. निश्चित समयावधि की वर्षा ज्ञात करना— इसकी सहायता से किसी समय अवधि में हुई वर्षा की मात्रा आसानी से ज्ञात की जा सकती है।
  3. प्रदूषण विश्लेषण में उपयोग— यह प्रदूषण के विश्लेषण के लिए वर्षा के नमूने प्राप्त करने में सहायता करता है।
  4. मौसम एवं जलवायु का पूर्वानुमान— वर्षा के आँकड़े किसी क्षेत्र के मौसम के पैटर्न तथा जलवायु के पूर्वानुमान में सहायता करते हैं।

रेन गेज को सरल रूप में समझें

रेन गेज वर्षा जल को एकत्र करता है और एकत्रित पानी की मात्रा से यह बताया जाता है कि किसी निश्चित स्थान पर एक निश्चित समय में कितनी वर्षा हुई। इसका परिणाम सामान्यतः मिलीमीटर या इंच में व्यक्त किया जाता है।

रेन गेज द्वारा वर्षा मापन और उसके प्रकार
रेन गेज में वर्षा जल का संग्रह तथा रेन गेज के प्रमुख प्रकार
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • वर्षा की मात्रा मापने वाले यंत्र को रेन गेज या वर्षामापी यंत्र कहते हैं।
  • 1662 ई. में क्रिस्टोफर रेन ने ब्रिटेन में पहला रेन गेज बनाया था।
  • रेन गेज में फनल द्वारा वर्षा जल एकत्र किया जाता है और उसकी मात्रा से वर्षा ज्ञात की जाती है।
  • वर्षा की मात्रा मिलीमीटर या इंच में व्यक्त की जाती है।
  • सही मापन के लिए रेन गेज को पेड़ों एवं इमारतों से दूर रखा जाता है।
  • रेन गेज के चार प्रकार—ग्रेजुएट सिलेंडर, टिपिंग बाल्टी, वजन गेज और रेन गेज ऑप्टिकल हैं।
  • रेन गेज किसी निश्चित समयावधि में हुई वर्षा की मात्रा ज्ञात करने में उपयोगी है।
  • रेन गेज से प्राप्त आँकड़े मौसम के पैटर्न तथा क्षेत्र की जलवायु के पूर्वानुमान में सहायक होते हैं।
Topic 9 थर्मामीटर: प्रकार एवं प्रयोग में सावधानियाँ

थर्मामीटर: प्रकार एवं प्रयोग में सावधानियाँ

थर्मामीटर (Thermometer)

तापमान मापने वाले उपकरण को थर्मामीटर कहते हैं। इसका उपयोग किसी वस्तु अथवा मानव शरीर का तापमान ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

तापमान मापने के लिए सबसे सामान्य उपकरण काँच का थर्मामीटर है।

काँच के थर्मामीटर की संरचना एवं कार्य-विधि

सामान्य काँच का थर्मामीटर एक पतली काँच की नली से बना होता है। इसके भीतर पारा अथवा कोई अन्य द्रव भरा रहता है, जो कार्यकारी द्रव के रूप में कार्य करता है।

तापमान बढ़ने पर पारा फैलता है और नली में ऊपर की ओर चढ़ता है। पारे के स्तर को पैमाने पर देखकर तापमान का मान ज्ञात किया जाता है।

इसे सरल क्रम में इस प्रकार समझ सकते हैं—

तापमान में वृद्धि → पारे का प्रसार → पारा नली में ऊपर चढ़ता है → पैमाने से तापमान ज्ञात होता है

तापमान के पैमाने

तापमान मापने के लिए निम्न पैमानों का प्रयोग किया जाता है—

  • सेल्सियस पैमाना
  • केल्विन पैमाना
  • फारेनहाइट पैमाना

थर्मामीटर से सम्बन्धित ऐतिहासिक तथ्य

थर्मामीटर के विकास से सम्बन्धित कुछ प्रमुख ऐतिहासिक उल्लेख निम्नलिखित हैं—

  • एक उल्लेख में थर्मामीटर के आविष्कार का समय आरम्भिक 18वीं सदी बताया गया है।
  • आधुनिक थर्मामीटर का निर्माण 1612 ई. में इटली के संतोरियो द्वारा किए जाने का उल्लेख मिलता है।
  • 1654 ई. में ग्रैंड ड्यूक ऑफ टस्कनी फरडिनैंड द्वितीय ने एल्कोहॉल से भरा काँच का थर्मामीटर बनाया, परन्तु वह सही तापमान नहीं बताता था।
  • 1714 ई. में गेब्रियल फारेनहाइट ने पारे से भरा थर्मामीटर बनाया।

डॉक्टरी थर्मामीटर

मानव शरीर का तापमान मापने के लिए डॉक्टरी या चिकित्सीय थर्मामीटर का प्रयोग किया जाता है।

डॉक्टरी थर्मामीटर में मानव शरीर का तापमान 35°C से 42°C की सीमा के भीतर मापा जा सकता है।

थर्मामीटर के प्रकार

थर्मामीटर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—

  1. एनालॉग थर्मामीटर
  2. डिजिटल थर्मामीटर

1. एनालॉग थर्मामीटर

एनालॉग थर्मामीटर साधारण प्रकार का थर्मामीटर है। यह एक काँच की नली से बना होता है और उसके भीतर पारा भरा रहता है।

जब किसी वस्तु अथवा शरीर का तापमान बढ़ता है, तो पारा नली में ऊपर की ओर चढ़ता है। नली पर बने सेल्सियस के निशानों से तापमान का मान पढ़ा जाता है।

वर्तमान समय में एनालॉग थर्मामीटर का उपयोग मुख्यतः बुखार मापने के लिए किया जाता है।

2. डिजिटल थर्मामीटर

डिजिटल थर्मामीटर में तापमान का मान एक डिस्प्ले पर अंकों के रूप में दिखाई देता है।

इसके भीतर सेंसर लगे होते हैं, जिनकी सहायता से तापमान ज्ञात किया जाता है।

अधिकांश डिजिटल थर्मामीटर उपयोग करने के कुछ ही सेकण्ड के भीतर शरीर का तापमान मापकर प्रदर्शित कर देते हैं।

वर्तमान समय में डिजिटल थर्मामीटर का प्रयोग अधिक किया जाने लगा है।

एनालॉग एवं डिजिटल थर्मामीटर में अन्तर

आधार एनालॉग थर्मामीटर डिजिटल थर्मामीटर
संरचना काँच की नली तथा पारा इलेक्ट्रॉनिक सेंसर एवं डिस्प्ले
तापमान का प्रदर्शन पारे के स्तर और पैमाने से पढ़ा जाता है अंकों के रूप में डिस्प्ले पर दिखाई देता है
मापन का आधार ताप से पारे का प्रसार सेंसर द्वारा तापमान मापन
समय पारे का स्तर देखकर रीडिंग ली जाती है कुछ ही सेकण्ड में परिणाम प्रदर्शित कर सकता है

थर्मामीटर के प्रयोग में सावधानियाँ

थर्मामीटर का प्रयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए। विशेष रूप से पारे वाले काँच के थर्मामीटर के टूटने पर पारा बाहर निकल सकता है।

मुख्य सावधानियाँ निम्नलिखित हैं—

  1. शरीर का तापमान मापने से पहले थर्मामीटर को अच्छी तरह साफ या धो लेना चाहिए।
  2. प्रयोग से पहले यह जाँच लेना चाहिए कि थर्मामीटर कहीं से टूटा-फूटा तो नहीं है।
  3. पारे वाले थर्मामीटर को सावधानी से संभालना चाहिए, क्योंकि पारे का शरीर के भीतर जाना हानिकारक एवं अत्यन्त खतरनाक हो सकता है।

थर्मामीटर एक नजर में

तथ्य उत्तर
क्या मापता है? तापमान
सामान्य काँच के थर्मामीटर में द्रव पारा अथवा अन्य द्रव
प्रमुख प्रकार एनालॉग और डिजिटल
डॉक्टरी थर्मामीटर की सीमा 35°C से 42°C
पारे का थर्मामीटर गेब्रियल फारेनहाइट, 1714 ई.
एनालॉग एवं डिजिटल थर्मामीटर
एनालॉग तथा डिजिटल थर्मामीटर की कार्य-विधि एवं प्रमुख विशेषताएँ
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • तापमान मापने वाले उपकरण को थर्मामीटर कहते हैं।
  • काँच के थर्मामीटर में पारा अथवा अन्य द्रव कार्यकारी द्रव के रूप में प्रयुक्त होता है।
  • ताप बढ़ने पर पारा फैलकर नली में ऊपर चढ़ता है, जिससे तापमान पढ़ा जाता है।
  • तापमान को सेल्सियस, केल्विन तथा फारेनहाइट पैमानों में व्यक्त किया जा सकता है।
  • गेब्रियल फारेनहाइट ने 1714 ई. में पारे से भरा थर्मामीटर बनाया।
  • डॉक्टरी थर्मामीटर में मानव शरीर का तापमान 35°C से 42°C की सीमा में मापा जा सकता है।
  • थर्मामीटर मुख्यतः एनालॉग तथा डिजिटल दो प्रकार के होते हैं।
  • डिजिटल थर्मामीटर में सेंसर द्वारा तापमान मापा जाता है और परिणाम डिस्प्ले पर दिखाई देता है।
  • प्रयोग से पहले थर्मामीटर को साफ करना और यह जाँचना चाहिए कि वह टूटा हुआ न हो।
Topic 10 अन्य मापन उपकरण एवं भौतिक मापन गतिविधियाँ

अन्य मापन उपकरण एवं भौतिक मापन गतिविधियाँ

मापन में प्रयुक्त अन्य उपकरण

विज्ञान तथा दैनिक जीवन में अलग-अलग भौतिक राशियों, घटनाओं और स्थितियों को जानने के लिए विभिन्न प्रकार के उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

अनेक वैज्ञानिक यंत्र अलग-अलग प्रकार के मापन और कार्यों के लिए प्रयुक्त होते हैं। परीक्षा की दृष्टि से यंत्र का नाम और उसका प्रमुख उपयोग याद रखना महत्त्वपूर्ण है।

प्रमुख मापन एवं वैज्ञानिक उपकरण तथा उनके उपयोग

क्रम उपकरण / यंत्र उपयोग
1 अल्टीमीटर ऊँचाई ज्ञात करना
2 अमीटर विद्युत धारा मापना
3 एनीमोमीटर वायु का वेग मापना
4 ऑडियोफोन सुनने में सहायता करना
5 बाइनोक्यूलर दूर की वस्तुओं को देखना
6 बैरोग्राफ वायुमण्डलीय दाब का लेखा तैयार करना
7 क्रेस्कोग्राफ पौधों की वृद्धि का लेखा तैयार करना
8 क्रोनोमीटर शुद्ध समय ज्ञात करना; जहाजों में उपयोग
9 कार्डियोग्राफ हृदय की गति का लेखा तैयार करना
10 कार्डियोग्राम हृदय की गति मापना
11 डिप सर्किल नमन कोण ज्ञात करना
12 डायनेमो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलना
13 फैदोमीटर समुद्र की गहराई मापना
14 गैल्वेनोमीटर बहुत कम विद्युत धारा मापना
15 मैनोमीटर गैस का दाब मापना
16 माइक्रोटोम सूक्ष्मदर्शी द्वारा परीक्षण के लिए वस्तु के अति पतले भाग काटना
17 ओडोमीटर वाहन के पहिये द्वारा तय की गई दूरी ज्ञात करना
18 पेरिस्कोप सीधी दृष्टि-रेखा से बाहर स्थित वस्तुओं को देखना
19 फोटोमीटर प्रकाश की तीव्रता मापना
20 पाइरोमीटर अत्यधिक उच्च तापमान मापना
21 रेडियोमीटर विकिरण से उत्पन्न ऊर्जा मापना
22 सीस्मोमीटर भूकम्प की तीव्रता ज्ञात करना
23 ट्रांसफॉर्मर प्रत्यावर्ती विद्युत धारा के वोल्टेज में परिवर्तन करना
24 टेलीप्रिंटर टेलीग्राफ द्वारा प्राप्त समाचार को स्वतः छापना
25 टैक्सीमीटर टैक्सी का किराया प्रदर्शित करना
26 टैकोमीटर मोटरबोट तथा वायुयान की गति ज्ञात करना
27 टेलीस्कोप दूर की वस्तुओं को देखना
28 जाइरोस्कोप घूर्णन गति से सम्बन्धित मापन
29 ग्रैवीमीटर जल में उपस्थित तेल क्षेत्रों का पता लगाना
30 ग्रामोफोन रिकॉर्ड की गई ध्वनि को पुनः सुनना
31 कायमोग्राफ रक्तदाब एवं धड़कन का अध्ययन करना
32 किनेस्कोप टेलीविजन के पर्दे के रूप में प्रयोग
33 कैलिपर्स छोटी दूरियों का मापन करना
34 कैलोरीमीटर ऊष्मा का मापन करना
35 कार्ब्यूरेटर इंजन में पेट्रोल एवं वायु का निश्चित मिश्रण भेजना
36 कम्पास दिशा ज्ञात करना
37 कम्यूटेटर प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में बदलना
38 एपिकास्कोप अपारदर्शी चित्रों को पर्दे पर प्रदर्शित करना
39 एपिडायस्कोप पर्दे पर चित्र प्रदर्शित करना
40 एस्केलेटर चलती हुई यांत्रिक सीढ़ी
41 एक्टिनोमीटर सूर्य की किरणों की तीव्रता मापना
42 एयरोमीटर गैसों का द्रव्यमान अथवा घनत्व ज्ञात करना
43 एक्यूम्यूलेटर विद्युत ऊर्जा का संचय करना
44 ऑसिलोग्राफ विद्युत अथवा यांत्रिक कम्पनों का ग्राफीय लेखा तैयार करना
45 स्टेथोस्कोप हृदय तथा फेफड़ों की गति से उत्पन्न ध्वनि सुनना
46 जीटा शून्य ऊर्जाताप नाभिकीय संयोजन से सम्बन्धित
47 डेनियल सेल विद्युत परिपथ में विद्युत ऊर्जा प्रदान करना
48 डिक्टाफोन वार्तालाप को रिकॉर्ड करना तथा पुनः सुनना
49 डायलिसिस गुर्दे के कार्य न करने पर रक्त का शुद्धिकरण करना
50 थर्मामीटर तापमान मापना
51 थर्मोस्टेट तापमान को निश्चित बनाए रखना
52 हाइप्सोमीटर समुद्र तल से ऊँचाई ज्ञात करना
53 हाइड्रोफोन जल के भीतर उत्पन्न ध्वनि को रिकॉर्ड करना
54 स्पेक्ट्रोमीटर प्रकाश का अपवर्तनांक ज्ञात करना
55 हाइड्रोमीटर द्रव का आपेक्षिक घनत्व मापना
56 हाइग्रोमीटर वायु की आपेक्षिक आर्द्रता मापना
57 स्टीरियोस्कोप चित्र को त्रिविमीय रूप में दिखाना
58 वोल्टमीटर विभवान्तर मापना
59 लैक्टोमीटर दूध की शुद्धता ज्ञात करना
60 रिफ्रैक्टोमीटर माध्यम का अपवर्तनांक ज्ञात करना
61 रेन गेज वर्षा की मात्रा मापना
62 रेडिएटर वाहन के इंजन को ठण्डा रखना
63 रेफ्रिजरेटर खाद्य पदार्थों को ठण्डा रखना
64 राडार वायुयान की स्थिति ज्ञात करना
65 माइक्रोमीटर बहुत छोटी दूरियों का मापन करना
66 मेगाफोन ध्वनि को दूर तक पहुँचाना
67 बैटरी विद्युत ऊर्जा का संचय करना
68 बैरोमीटर वायुमण्डलीय दाब मापना
69 स्फिग्मोमैनोमीटर धमनियों में रक्तदाब की तीव्रता ज्ञात करना

परीक्षा में अधिक उपयोगी उपकरण

उपरोक्त सूची बड़ी है। परीक्षा की तैयारी में निम्न सामान्य यंत्रों के उपयोग विशेष रूप से याद रखे जा सकते हैं—

  • अमीटर — विद्युत धारा
  • वोल्टमीटर — विभवान्तर
  • गैल्वेनोमीटर — बहुत कम विद्युत धारा
  • बैरोमीटर — वायुमण्डलीय दाब
  • मैनोमीटर — गैस का दाब
  • एनीमोमीटर — वायु का वेग
  • रेन गेज — वर्षा की मात्रा
  • थर्मामीटर — तापमान
  • हाइग्रोमीटर — वायु की आपेक्षिक आर्द्रता
  • हाइड्रोमीटर — द्रव का आपेक्षिक घनत्व
  • लैक्टोमीटर — दूध की शुद्धता
  • ओडोमीटर — वाहन द्वारा तय दूरी
  • पाइरोमीटर — अत्यधिक उच्च तापमान
  • फैदोमीटर — समुद्र की गहराई
  • स्फिग्मोमैनोमीटर — रक्तदाब

भौतिक मापन के लिए गतिविधियाँ

बच्चों को भौतिक मापन की अवधारणा समझाने के लिए कक्षा में कुछ सरल गतिविधियाँ कराई जा सकती हैं।

1. विद्यार्थियों की ऊँचाई की तुलना

विद्यार्थियों को एक पंक्ति में खड़ा कर उनकी ऊँचाइयों का अवलोकन कराया जाए। इससे बच्चों को लम्बाई तथा ऊँचाई के मापन की प्रारम्भिक अवधारणा समझाई जा सकती है।

2. अलग-अलग भार की वस्तुओं की तुलना

विद्यार्थियों को अलग-अलग भार वाली वस्तुएँ उठाने के लिए दी जाएँ। वे अनुभव के आधार पर समझ सकते हैं कि कौन-सी वस्तु हल्की और कौन-सी भारी है। इसके बाद द्रव्यमान के मानक मापन की आवश्यकता समझाई जाए।

3. शरीर के विभिन्न भागों का मापन

मापन फीते की सहायता से छाती, हाथ, पैर आदि शरीर के विभिन्न भागों की लम्बाई या माप ज्ञात कराया जा सकता है।

4. मात्रकों एवं मापक उपकरणों का परिचय

विद्यार्थियों को विभिन्न भौतिक राशियों के मात्रक बताए जाएँ तथा उनसे सम्बन्धित मापक उपकरणों के चित्र दिखाए जाएँ।

5. थर्मामीटर एवं रेन गेज का प्रदर्शन

थर्मामीटर और रेन गेज जैसे उपकरण बच्चों को दिखाकर यह समझाया जाए कि किसी भौतिक राशि का मापन मानक उपकरण और मानक मात्रक की सहायता से किया जाता है।

6. अलग-अलग राशियों के लिए अलग उपकरण

विद्यार्थियों को बताया जाए कि प्रत्येक भौतिक राशि को एक ही उपकरण से नहीं मापा जा सकता। अलग-अलग राशियों के लिए अलग-अलग प्रकार के मापक यंत्र प्रयुक्त होते हैं।

उदाहरण के लिए—

  • तापमान — थर्मामीटर
  • वर्षा — रेन गेज
  • लम्बाई — स्केल या मापन फीता
  • द्रव्यमान — तुला

7. कक्षा की वस्तुओं का वास्तविक मापन

विद्यार्थियों से कक्षा में उपलब्ध विभिन्न वस्तुओं का मापन कराया जाए, जैसे—

  • डस्टर
  • ब्लैकबोर्ड
  • कॉपी
  • मेज
  • पेन
  • पेंसिल

इन वस्तुओं को मापते समय विद्यार्थियों को यह भी बताया जाए कि किसी माप को संख्यात्मक मान के साथ उचित मात्रक में व्यक्त करना आवश्यक है।

गतिविधियों का शैक्षिक उद्देश्य

इन गतिविधियों द्वारा विद्यार्थी केवल मात्रकों के नाम याद नहीं करते, बल्कि स्वयं वस्तुओं को देखकर, तुलना करके और मापकर भौतिक मापन की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझते हैं।

गतिविधि समझाई जाने वाली अवधारणा
विद्यार्थियों की ऊँचाई देखना लम्बाई एवं तुलना
अलग-अलग वस्तुएँ उठाना भारी-हल्की वस्तु एवं द्रव्यमान
मापन फीते से शरीर के भाग मापना लम्बाई का वास्तविक मापन
थर्मामीटर दिखाना तापमान का मानक मापन
रेन गेज दिखाना वर्षा का मापन
कक्षा की वस्तुओं को मापना संख्यात्मक मान एवं मात्रक का प्रयोग
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • विभिन्न भौतिक राशियों के मापन के लिए अलग-अलग मापक यंत्रों का प्रयोग किया जाता है।
  • अमीटर विद्युत धारा, वोल्टमीटर विभवान्तर और गैल्वेनोमीटर बहुत कम विद्युत धारा के मापन में प्रयुक्त होता है।
  • बैरोमीटर वायुमण्डलीय दाब, एनीमोमीटर वायु का वेग और रेन गेज वर्षा की मात्रा मापता है।
  • थर्मामीटर तापमान तथा हाइग्रोमीटर वायु की आपेक्षिक आर्द्रता मापता है।
  • ओडोमीटर वाहन द्वारा तय दूरी तथा फैदोमीटर समुद्र की गहराई ज्ञात करने में प्रयुक्त होता है।
  • स्फिग्मोमैनोमीटर का प्रयोग रक्तदाब ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
  • विद्यार्थियों को मापन समझाने के लिए ऊँचाई की तुलना, भार की तुलना और मापन फीते से वास्तविक मापन जैसी गतिविधियाँ कराई जा सकती हैं।
  • कक्षा की वस्तुओं का स्वयं मापन कराने से विद्यार्थी संख्यात्मक मान और मात्रक के सम्बन्ध को व्यावहारिक रूप से समझते हैं।

अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

M.K.S. पद्धति का मूल मात्रक है—

व्याख्या: M.K.S. पद्धति में लम्बाई के लिए मीटर, द्रव्यमान के लिए किलोग्राम तथा समय के लिए सेकण्ड का प्रयोग किया जाता है।
Q 2

निम्नलिखित में से कौन मूल मात्रक नहीं है—

व्याख्या: न्यूटन बल का व्युत्पन्न मात्रक है, जबकि सेकण्ड, किलोग्राम और कैण्डेला SI के मूल मात्रक हैं।
Q 3

S.I. के मूल मात्रक होते हैं—

व्याख्या: SI पद्धति में सात मूल मात्रक हैं—मीटर, किलोग्राम, सेकण्ड, एम्पियर, केल्विन, मोल और कैण्डेला।
Q 4

भौतिक मापन की विधि है—

व्याख्या: C.G.S. तथा M.K.S. दोनों भौतिक मापन की मात्रक पद्धतियाँ हैं।
Q 5

थर्मामीटर में ताप का मापक्रम होता है—

व्याख्या: स्रोत में सामान्य थर्मामीटर के ताप मापक्रम के रूप में सेल्सियस दिया गया है।
Q 6

समय का मानक मात्रक है—

व्याख्या: SI पद्धति में समय का मूल एवं मानक मात्रक सेकण्ड है।
Q 7

विद्युत धारा का S.I. मात्रक होता है—

व्याख्या: विद्युत धारा का SI मूल मात्रक एम्पियर है और इसका प्रतीक A है।
Q 8

1 माइक्रोन बराबर है—

व्याख्या: 1 माइक्रोन का मान 10⁻⁶ मीटर होता है।
Q 9

भौतिक मात्रकों की अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति में आता है—

व्याख्या: S.I. भौतिक मात्रकों की अन्तर्राष्ट्रीय रूप से स्वीकृत पद्धति है।
Q 10

रेन गेज है—

व्याख्या: रेन गेज या वर्षामापी यंत्र का प्रयोग किसी स्थान पर हुई वर्षा की मात्रा मापने के लिए किया जाता है।
Q 11

किसी वस्तु के तल के क्षेत्रफल का मात्रक है—

व्याख्या: क्षेत्रफल का SI मात्रक वर्ग मीटर (m²) है। यह प्रश्न 2016 की परीक्षा में पूछा गया था।
Q 12

1 गज बराबर होता है—

व्याख्या: 1 गज में 3 फुट होते हैं। यह प्रश्न 2017 की परीक्षा में पूछा गया था।
Q 13

1 फुट बराबर है—

व्याख्या: 1 फुट का मान 30.48 सेंटीमीटर होता है। यह प्रश्न 2018 की परीक्षा में पूछा गया था।
Q 14

S.I. पद्धति में बल का मात्रक है—

व्याख्या: SI पद्धति में बल का मात्रक न्यूटन (N) है। यह प्रश्न 2020 की परीक्षा में पूछा गया था।
Q 15

द्रव्यमान का मानक मात्रक है—

व्याख्या: SI पद्धति में द्रव्यमान का मानक मात्रक किलोग्राम है। यह प्रश्न 2023 की परीक्षा में पूछा गया था।

पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 1 के विषय विज्ञान के अध्याय भौतिक मापन से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1

भौतिक मात्रकों की अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति का उल्लेख कीजिए।

Q 2 2018

अदिश एवं सदिश राशि में अन्तर, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

Q 3

भौतिक मापन की विधियाँ समझाइए।

Q 4

एस.आई. के सम्पूरक मात्रक लिखिए।

Q 5

भौतिक मापन की आवश्यकता बताइए।

Q 6 2016

एक बर्तन की धारिता 12 लीटर है। इसकी धारिता घन सेंटीमीटर एवं घन मीटर में ज्ञात कीजिए।

Q 7 2017

विभिन्न प्रकार के मापक यंत्रों का उपयोग आप कहाँ-कहाँ करते हैं? लिखिए।

Q 8 2023

बेलन की लम्बाई तथा वृत्त के व्यास का मापन किस यंत्र से किया जा सकता है? उसका नाम बताते हुए, उस यंत्र का अल्पतमांक लिखिए।

Practice More Questions

इसी semester और subject के MCQ Tests तथा Previous Year Papers practice करके अपनी तैयारी को और मजबूत बनाइए।

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