Home
App Install Updates
Home Study Material Semester 1 संस्कृत संस्कृत संख्याओं का ज्ञान
Chapter 6 • संस्कृत

संस्कृत संख्याओं का ज्ञान

UP DELED Semester 1 के संस्कृत विषय के इस अध्याय में संस्कृत संख्याओं का परिचय, 1 से 50 तक की संख्याएँ, बड़ी संख्याओं के संस्कृत रूप, संख्या सम्बन्धी महत्वपूर्ण घटक, संख्याओं के शिक्षण की विभिन्न विधियाँ, संख्यावाचक एवं क्रम संख्या बोधक विशेषण तथा संख्या आधारित गतिविधियों का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

7
Topics
15
MCQs
10+
PYQs
PDF
Notes
Topic 1 संस्कृत में संख्याओं का परिचय

संस्कृत में संख्याओं का परिचय

संस्कृत में संख्याओं का ज्ञान

संस्कृत शिक्षण में विद्यार्थियों को संख्याओं को संस्कृत में बोलना, समझना और लिखना सिखाया जाता है। संख्या-ज्ञान से विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि, उत्साह और लगन विकसित करने में सहायता मिलती है।

संख्यावाची शब्द

वस्तुओं की संख्या का ज्ञान कराने वाले शब्दों को संख्यावाची शब्द कहते हैं। जिन शब्दों से किसी संख्या का बोध होता है, वे उस संख्या के प्रतीक के रूप में जाने और समझे जाते हैं।

जैसे—

संख्या संस्कृत शब्द अर्थ
1 एकः एक
2 द्वौ दो
3 त्रयः तीन
4 चत्वारः चार

संख्या शब्दों की विशेषता

संस्कृत में संख्या शब्द अपने गुण, विशेषता और वचन के अनुसार अलग-अलग अर्थ प्रदान करते हैं। इसलिए संख्या शब्दों को केवल अंक के रूप में न देखकर उनके संस्कृत रूप को भी समझना आवश्यक है।

उदाहरण के लिए—

  • एकः शब्द से एक संख्या का बोध होता है।
  • द्वौ शब्द से दो संख्या का बोध होता है।
  • त्रयः शब्द से तीन संख्या का बोध होता है।
  • चत्वारः शब्द से चार संख्या का बोध होता है।

संख्या-ज्ञान का उद्देश्य

संस्कृत में संख्याओं का अध्ययन करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को संख्या-वाचक शब्दों की पहचान कराना तथा उन्हें संस्कृत में संख्याओं को सही रूप से बोलने, समझने और लिखने योग्य बनाना है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • वस्तुओं की संख्या का ज्ञान कराने वाले शब्द संख्यावाची शब्द कहलाते हैं।
  • जिन शब्दों से संख्या का बोध होता है, वे संख्या के प्रतीक माने जाते हैं।
  • एक, दो, तीन और चार के संस्कृत रूप क्रमशः एकः, द्वौ, त्रयः और चत्वारः हैं।
  • संख्या शब्द अपने गुण, विशेषता और वचन के कारण अलग-अलग रूप एवं अर्थ प्रदान करते हैं।
  • संस्कृत में संख्या-ज्ञान का उद्देश्य संख्याओं को बोलना, समझना और लिखना सीखना है।

Advertisement

Topic 2 1 से 50 तक संस्कृत संख्याएँ एवं बड़ी संख्याएँ

1 से 50 तक संस्कृत संख्याएँ एवं बड़ी संख्याएँ

1 से 50 तक संस्कृत संख्याएँ

हिन्दी की भाँति संस्कृत भाषा में भी संख्याओं के लिए निश्चित शब्दावली का प्रयोग किया जाता है। संख्याओं को संस्कृत में सही रूप से बोलने, समझने और लिखने के लिए उनके संख्यावाची शब्दों का अभ्यास आवश्यक है।

संख्या हिन्दी संस्कृत
1एकएकः
2दोद्वौ
3तीनत्रयः
4चारचत्वारः
5पाँचपञ्च
6छःषट्
7सातसप्त
8आठअष्ट
9नौनव
10दसदश
11ग्यारहएकादश
12बारहद्वादश
13तेरहत्रयोदश
14चौदहचतुर्दश
15पन्द्रहपञ्चदश
16सोलहषोडश
17सत्रहसप्तदश
18अठारहअष्टादश
19उन्नीसनवदश या एकोनविंशतिः
20बीसविंशतिः
21इक्कीसएकविंशतिः
22बाइसद्वाविंशतिः
23तेइसत्रयोविंशतिः
24चौबीसचतुर्विंशतिः
25पच्चीसपञ्चविंशतिः
26छब्बीसषड्विंशतिः
27सत्ताइससप्तविंशतिः
28अट्ठाइसअष्टाविंशतिः
29उनतीसनवविंशतिः या एकोनत्रिंशत्
30तीसत्रिंशत्
31इकतीसएकत्रिंशत्
32बत्तीसद्वात्रिंशत्
33तैंतीसत्रयत्रिंशत्
34चौंतीसचतुस्त्रिंशत्
35पैंतीसपञ्चत्रिंशत्
36छत्तीसषट्त्रिंशत्
37सैंतीससप्तत्रिंशत्
38अड़तीसअष्टात्रिंशत्
39उनतालीसएकोनचत्वारिंशत् / नवत्रिंशत्
40चालीसचत्वारिंशत्
41इकतालीसएकचत्वारिंशत्
42बयालीसद्विचत्वारिंशत् / द्वाचत्वारिंशत्
43तैंतालीसत्रिचत्वारिंशत् / त्रयश्चत्वारिंशत्
44चवालीसचतुश्चत्वारिंशत्
45पैंतालीसपञ्चचत्वारिंशत्
46छियालीसषट्चत्वारिंशत्
47सैंतालीससप्तचत्वारिंशत्
48अड़तालीसअष्टचत्वारिंशत्
49उनचासएकोनपञ्चाशत् / नवचत्वारिंशत्
50पचासपञ्चाशत्

अन्य महत्वपूर्ण संख्याएँ

1 से 50 के अतिरिक्त कुछ बड़ी संख्याओं तथा आधे के लिए भी संस्कृत में विशेष शब्द प्रयुक्त होते हैं।

संख्या हिन्दी संस्कृत
1000 हजार सहस्र
10,000 दस हजार अयुत
1,00,000 लाख लक्ष
1,00,00,000 करोड़ कोटि
1/2 आधा अर्द्धम् या अर्द्ध

विशेष रूप से ध्यान रखने योग्य संख्याएँ

  • 19 — नवदश या एकोनविंशतिः
  • 29 — नवविंशतिः या एकोनत्रिंशत्
  • 39 — एकोनचत्वारिंशत् या नवत्रिंशत्
  • 49 — एकोनपञ्चाशत् या नवचत्वारिंशत्
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • 1 से 10 तक प्रमुख रूप—एकः, द्वौ, त्रयः, चत्वारः, पञ्च, षट्, सप्त, अष्ट, नव और दश हैं।
  • 20 को विंशतिः, 30 को त्रिंशत्, 40 को चत्वारिंशत् और 50 को पञ्चाशत् कहते हैं।
  • 1000 के लिए सहस्र, 10,000 के लिए अयुत, 1,00,000 के लिए लक्ष और 1,00,00,000 के लिए कोटि शब्द प्रयुक्त होता है।
  • 19, 29, 39 और 49 के एक से अधिक संस्कृत रूप दिए गए हैं।
  • 1/2 के लिए अर्द्धम् या अर्द्ध शब्द प्रयुक्त होता है।
UP DELED Study App

Semester 1 की Complete तैयारी

  • Official Syllabus
  • Comprehensive Notes
  • Quick Revision Notes
  • Visual Revision Notes
  • Audio Revision
  • Solved MCQs
  • MCQ Tests
  • 2015–2025 Previous Year Papers
  • Repeated Exam Questions
  • 10 Model Papers
App में पढ़ाई शुरू करें
Topic 3 संख्या सम्बन्धी महत्वपूर्ण घटक

संख्या सम्बन्धी महत्वपूर्ण घटक

संख्या शब्दों में लिंग और वचन

संस्कृत भाषा में तीन वचन और तीन लिंग होते हैं। संख्या शब्दों के रूप भी लिंग और वचन के आधार पर समझे जाते हैं। विभिन्न संख्यावाची शब्दों के प्रयोग में अलग-अलग विशेषताएँ दिखाई देती हैं।

संख्या शब्दों की प्रमुख विशेषताएँ

  1. एक शब्द के रूप तीनों लिंगों एवं तीनों वचनों में चलते हैं।
  2. एकः (एक) शब्द का रूप केवल एकवचन में होता है।
  3. द्वि शब्द का रूप केवल द्विवचन में होता है।
  4. त्रि (तीन) शब्द के रूप तीनों वचनों एवं तीनों लिंगों में चलते हैं।
  5. त्रि (तीन) तथा इससे आगे के सभी संख्यावाची शब्दों के रूप बहुवचन में होते हैं।
  6. चतुर्थ या चत्वारः (चार) के रूप तीनों लिंगों एवं तीनों वचनों में चलते हैं।
  7. चत्वारः शब्द बहुवचन में तीनों लिंगों में अलग-अलग होता है।
  8. पञ्चम् (पाँच) शब्द के रूप तीनों लिंगों में समान रूप से चलते हैं।
  9. षष्ठम् (छः) तथा इससे आगे के संख्यावाची शब्द तीनों लिंगों में समान रूप से चलते हैं।

‘एक’ के लिंग के अनुसार रूप

शब्द पुल्लिंग स्त्रीलिंग नपुंसकलिंग
एक एकः एका एकम्

अर्थात् ‘एक’ संख्या का रूप लिंग के अनुसार बदलकर पुल्लिंग में एकः, स्त्रीलिंग में एका तथा नपुंसकलिंग में एकम् होता है।

‘द्वि’ के लिंग के अनुसार रूप

शब्द अर्थ पुल्लिंग स्त्रीलिंग नपुंसकलिंग
द्वि दो द्वौ द्वे द्वे

‘द्वि’ संख्या द्विवचन में प्रयुक्त होती है। इसके पुल्लिंग में द्वौ तथा स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग में द्वे रूप मिलता है।

चित्र द्वारा संख्या की पहचान

विद्यार्थियों को संख्या का ज्ञान कराने के लिए उनके स्वभाव और रुचि के अनुसार चित्रों का प्रयोग किया जा सकता है। किसी एक वस्तु का चित्र दिखाकर उसकी संख्या पूछी जाए और फिर उसी संख्या का संस्कृत रूप बताया जाए।

उदाहरण के लिए, एक फल का चित्र दिखाने पर विद्यार्थी उसकी संख्या एक बताएगा। इसके बाद संस्कृत में उसे एकः बताया जा सकता है।

सरल पहचान

संख्या शब्द मुख्य विशेषता
एक लिंग के अनुसार एकः, एका, एकम्
द्वि केवल द्विवचन; द्वौ, द्वे, द्वे
त्रि तीन संख्या का बोध
चत्वारः लिंग के अनुसार रूप अलग-अलग होते हैं
पञ्चम् एवं आगे तीनों लिंगों में समान रूप से प्रयोग
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • संस्कृत में तीन लिंग और तीन वचन होते हैं।
  • ‘एक’ के पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग रूप क्रमशः एकः, एका और एकम् हैं।
  • ‘द्वि’ शब्द केवल द्विवचन में प्रयुक्त होता है।
  • ‘द्वि’ का पुल्लिंग रूप द्वौ तथा स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग रूप द्वे है।
  • तीन तथा इससे आगे के संख्यावाची शब्दों के रूप बहुवचन में बताए गए हैं।
  • चित्रों की सहायता से विद्यार्थियों को संख्या और उसके संस्कृत रूप का ज्ञान सरलता से कराया जा सकता है।

Advertisement

Topic 4 विभिन्न विधियों के माध्यम से संख्याओं का ज्ञान

विभिन्न विधियों के माध्यम से संख्याओं का ज्ञान

संख्याओं के ज्ञान की विभिन्न विधियाँ

विद्यार्थियों को संस्कृत में संख्याओं का ज्ञान सरल, रोचक और व्यावहारिक ढंग से कराया जा सकता है। विशेष रूप से प्रारम्भिक कक्षाओं में बातचीत, चित्र, प्रश्नोत्तर, गायन और समूह जैसी गतिविधियों के माध्यम से संख्या-ज्ञान आसानी से विकसित किया जा सकता है।

1. वार्तालाप विधि द्वारा संख्याओं का ज्ञान

प्रारम्भिक कक्षाओं के विद्यार्थी सरल बातचीत के माध्यम से संख्याएँ जल्दी समझ लेते हैं। शिक्षक दैनिक जीवन की वस्तुओं का उदाहरण देकर संस्कृत संख्या-शब्दों का अभ्यास करा सकता है।

जैसे—बिस्किट खाते समय विद्यार्थी से कहा जाए कि वह पैकेट में से केवल दो बिस्किट निकाले। इसके बाद शिक्षक दो संख्या के संस्कृत रूप बताए—

लिंग दो का संस्कृत रूप
पुल्लिंग द्वौ
स्त्रीलिंग द्वे
नपुंसकलिंग द्वे

इस प्रकार बातचीत और दैनिक वस्तुओं के प्रयोग से विद्यार्थी संख्या तथा उसके संस्कृत रूप को सरलता से समझते हैं।

2. चित्रों द्वारा संख्याओं का ज्ञान

बच्चों को अपने खिलौने और चित्र बहुत प्रिय होते हैं। इसलिए चित्रों और खिलौनों को गिनवाकर भी संस्कृत संख्याओं का ज्ञान कराया जा सकता है।

प्राथमिक कक्षाओं में विद्यार्थियों से त्रिभुज, आयत, पेंसिल, गोला आदि विभिन्न वस्तुओं और आकृतियों को गिनने के लिए कहा जा सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि चित्र में कुल चार वस्तुएँ हैं तो विद्यार्थी पहले उनकी संख्या चार बताएगा। इसके बाद शिक्षक संस्कृत में इसका रूप चत्वारः बताएगा।

3. प्रश्नोत्तर विधि द्वारा संख्याओं का ज्ञान

प्रश्नोत्तर विधि से भी संख्याओं को सरलता से समझाया जा सकता है। शिक्षक कक्षा में उपस्थित वस्तुओं की संख्या पूछकर विद्यार्थियों से उनका हिन्दी तथा संस्कृत रूप कहलवा सकता है।

वस्तु संख्या संस्कृत
पेंसिल दो द्वौ
किताब चार चत्वारः
कॉपी पाँच पञ्चम्

समय से सम्बन्धित संख्याओं का अभ्यास भी प्रश्नोत्तर से कराया जा सकता है।

शिक्षक प्रश्न— त्वम् प्रातःकाले कदा उत्तिष्ठसि।
छात्र उत्तर— अहम् प्रातःकाले पञ्चवादने उत्तिष्ठामि।

पञ्चवादने का अर्थ है—पाँच बजे।

4. गायन विधि द्वारा संख्याओं का ज्ञान

शिक्षक विभिन्न वस्तुओं को सामने रखकर संख्या-शब्दों को गाकर तथा भाव-भंगिमाओं के साथ विद्यार्थियों को याद करा सकता है। गायन द्वारा अभ्यास करने से संख्या-शब्द रोचक बन जाते हैं।

जैसे—

  • एकः, एकम्, एका.....
  • एका बालिका.....
  • एकम् कमलम्.....
  • एकः मोहनः.....

इस प्रकार संख्या के अलग-अलग लिंग-रूपों का गायन कराकर विद्यार्थियों को संस्कृत संख्या-शब्दों का अभ्यास कराया जा सकता है।

5. समूह विधि द्वारा संख्याओं का ज्ञान

समूह विधि में कक्षा के बालक और बालिकाओं के अलग-अलग समूह बनाए जाते हैं। इसके बाद विद्यार्थियों से प्रत्येक समूह के सदस्यों की संख्या गिनवाई जाती है।

इस विधि में विद्यार्थी खेल-खेल में संख्या पहचानते और संस्कृत में उनका प्रयोग करना सीखते हैं।

वस्तुओं को गिनकर संख्या-ज्ञान

विद्यार्थियों के लंच बॉक्स और वाटर बोतल जैसी वस्तुओं का उपयोग भी संख्या-ज्ञान के लिए किया जा सकता है। शिक्षक सभी वस्तुओं को एक स्थान पर रखकर विद्यार्थियों से क्रम से गिनने को कह सकता है।

संख्या संस्कृत
1एकः
2द्वौ
3त्रयः
4चत्वारः
5पञ्च
6षट्
7सप्त
8अष्ट
9नव
10दश

ऐसी गतिविधियों से विद्यार्थी संस्कृत और हिन्दी दोनों में संख्याओं का सम्बन्ध स्थापित करते हैं तथा खेल-खेल में संख्या-ज्ञान प्राप्त करते हैं।

संख्या-शिक्षण की प्रमुख विधियाँ एक दृष्टि में

विधि प्रयोग
वार्तालाप विधि बातचीत और दैनिक वस्तुओं द्वारा संख्या समझाना
चित्र विधि चित्र, आकृति और खिलौनों को गिनवाना
प्रश्नोत्तर विधि वस्तुओं और समय से सम्बन्धित प्रश्न पूछना
गायन विधि संख्या-शब्दों को गाकर अभ्यास कराना
समूह विधि विद्यार्थियों के समूह बनाकर उनकी संख्या गिनवाना
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • संस्कृत संख्याओं का ज्ञान वार्तालाप, चित्र, प्रश्नोत्तर, गायन और समूह विधि से कराया जा सकता है।
  • वार्तालाप विधि में दैनिक जीवन की वस्तुओं के माध्यम से संख्या-ज्ञान कराया जाता है।
  • चित्र विधि में वस्तुओं, खिलौनों और आकृतियों को गिनवाया जाता है।
  • प्रश्नोत्तर विधि से वस्तुओं तथा समय से सम्बन्धित संख्याओं का अभ्यास कराया जा सकता है।
  • गायन विधि संख्या-शब्दों को रोचक ढंग से याद कराने में सहायक है।
  • समूह विधि और वस्तुओं को गिनने वाली गतिविधियों से विद्यार्थी खेल-खेल में संस्कृत संख्याएँ सीखते हैं।
Topic 5 संख्यावाचक विशेषण एवं संस्कृत संख्याओं का ज्ञान-विस्तार

संख्यावाचक विशेषण एवं संस्कृत संख्याओं का ज्ञान-विस्तार

संख्यावाचक विशेषण

संज्ञा एवं सर्वनाम की संख्या सम्बन्धी विशेषता बताने वाले शब्दों को संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। ये किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा समूह की संख्या का बोध कराते हैं।

उदाहरण—

संस्कृत प्रयोग अर्थ
एकम् फलम् एक फल
एकः बालकः एक बालक
त्रिषु बालकेषु तीन लड़कों में
द्वयोः फलयोः दो फलों में

इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि संख्या बताने वाला शब्द संज्ञा के साथ मिलकर उसकी संख्या सम्बन्धी विशेषता प्रकट करता है।

विशेषण के रूप में परिवर्तन

संस्कृत भाषा में विशेषण के लिंग, वचन तथा विभक्ति के रूप अपने विशेष्य के अनुसार बदलते हैं। इसलिए विशेषण का सही प्रयोग करते समय उस संज्ञा या सर्वनाम के लिंग, वचन और विभक्ति का ध्यान रखना आवश्यक है जिसकी वह विशेषता बता रहा है।

अकारान्त विशेषण

कुशलः, श्यामः, सुन्दरः आदि अकारान्त विशेषणों के रूप रामः के समान चलते हैं।

उकारान्त विशेषण

गुरुः, पटुः, लघुः आदि उकारान्त शब्दों के रूप गुरु के समान चलते हैं।

‘मत्’ अन्त वाले विशेषण

धीमत्, बुद्धिमत् आदि विशेषणों के रूप भगवत् के समान चलते हैं।

ईकारान्त स्त्रीलिंग विशेषण

सुन्दरी, बुद्धिमती, महती आदि विशेषणों के रूप ईकारान्त नदी के समान चलते हैं।

संख्यावाचक विशेषण को समझने का सरल तरीका

प्रयोग क्या बताता है?
एकम् फलम् फल की संख्या एक है
एकः बालकः बालक की संख्या एक है
त्रिषु बालकेषु बालकों की संख्या तीन है
द्वयोः फलयोः फलों की संख्या दो है

ध्यान रखने योग्य बातें

  • संख्यावाचक विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की संख्या सम्बन्धी विशेषता बताते हैं।
  • विशेषण का लिंग, वचन और विभक्ति अपने विशेष्य के अनुसार बदलता है।
  • अकारान्त विशेषणों के रूप रामः के समान चलते हैं।
  • गुरुः, पटुः और लघुः जैसे उकारान्त शब्द गुरु के समान चलते हैं।
  • धीमत् और बुद्धिमत् जैसे शब्द भगवत् के समान चलते हैं।
  • सुन्दरी, बुद्धिमती और महती जैसे ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्द नदी के समान चलते हैं।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • संज्ञा एवं सर्वनाम की संख्या सम्बन्धी विशेषता बताने वाले शब्द संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।
  • एकम् फलम्, एकः बालकः, त्रिषु बालकेषु और द्वयोः फलयोः संख्यावाचक प्रयोगों के उदाहरण हैं।
  • विशेषण के लिंग, वचन और विभक्ति अपने विशेष्य के अनुसार बदलते हैं।
  • कुशलः, श्यामः और सुन्दरः अकारान्त रूप हैं तथा रामः के समान चलते हैं।
  • गुरुः, पटुः और लघुः उकारान्त रूप हैं तथा गुरु के समान चलते हैं।
  • धीमत् और बुद्धिमत् भगवत् के समान तथा सुन्दरी, बुद्धिमती और महती नदी के समान चलते हैं।

Advertisement

Topic 6 क्रम संख्या बोधक विशेषण

क्रम संख्या बोधक विशेषण

क्रम संख्या बोधक विशेषण

किसी व्यक्ति या वस्तु के क्रम का बोध कराने वाले शब्द क्रम संख्या बोधक विशेषण कहलाते हैं। संस्कृत में इनके रूप पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग में अलग-अलग होते हैं।

1 से 10 तक क्रमवाचक रूप

संख्या पुल्लिंग स्त्रीलिंग नपुंसकलिंग
एक प्रथमः प्रथमा प्रथमम्
द्वि द्वितीयः द्वितीया द्वितीयम्
त्रि तृतीयः तृतीया तृतीयम्
चतुर्थः चतुर्थः चतुर्थी चतुर्थम्
पंच पंचमः पंचमी पंचमम्
षट् षष्ठः षष्ठी षष्ठम्
सप्तम् सप्तमः सप्तमी सप्तम्
अष्टम् अष्टमः अष्टमी अष्टम्
नवम् नवमः नवमी नवम्
दशम् दशमः दशमी दशम्

क्रमवाचक विशेषणों के रूप

क्रमवाचक विशेषणों में पुल्लिंग के रूप राम के समान चलते हैं। स्त्रीलिंग के अकारान्त रूप रमा के समान तथा ईकारान्त रूप नदी के समान चलते हैं।

संख्यक शब्द का प्रयोग

संख्यावाचक शब्द के आगे संख्यक शब्द जोड़कर अकारान्त शब्द भी बनाए जाते हैं।

उदाहरण—

पंचसंख्यकाः पाण्डवाः।

अर्थात् पाण्डवों की संख्या पाँच है।

‘च’ के प्रयोग से बड़ी संख्या

कभी-कभी अर्थात् ‘और’ का प्रयोग करके भी बड़ी संख्याओं को व्यक्त किया जाता है।

उदाहरण—

पंचशतानि पंचचत्वारिंशत् च — 545

‘कति’ शब्द का प्रयोग

कति का अर्थ ‘कितने’ होता है। इसका प्रयोग तीनों लिंगों में समान रूप से किया जाता है और यह सदैव बहुवचन में प्रयुक्त होता है।

विभक्ति रूप विभक्ति रूप
प्रथमा कति पंचमी कतिभ्यः
द्वितीया कति षष्ठी कतीनाम्
तृतीया कतिभिः सप्तमी कतिषु
चतुर्थी कतिभ्यः

संख्या-रूपों का संक्षिप्त पुनरावलोकन

  • एकः — एकम्, एका
  • द्वि — द्वौ, द्वे
  • त्रि — त्रयः, त्रीणि, तिस्रः
  • चतुर् — चत्वारः, चत्वारि, चतस्रः
  • पञ्चम् — पञ्च
  • षष् — षट्

सरल पहचान

संख्या क्रम
1प्रथम
2द्वितीय
3तृतीय
4चतुर्थ
5पंचम
6षष्ठ
7सप्तम
8अष्टम
9नवम
10दशम
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • क्रम संख्या बोधक विशेषण किसी व्यक्ति या वस्तु के क्रम का बोध कराते हैं।
  • प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्ठ, सप्तम, अष्टम, नवम और दशम प्रमुख क्रमवाचक रूप हैं।
  • क्रमवाचक विशेषणों के पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग रूप अलग-अलग होते हैं।
  • संख्यावाचक शब्द के साथ ‘संख्यक’ जोड़कर भी प्रयोग किया जाता है।
  • ‘कति’ का अर्थ ‘कितने’ है और इसका प्रयोग तीनों लिंगों में समान तथा बहुवचन में होता है।
Topic 7 संस्कृत में संख्या आधारित गतिविधियाँ

संस्कृत में संख्या आधारित गतिविधियाँ

संस्कृत में संख्या आधारित गतिविधियाँ

संस्कृत संख्याओं का ज्ञान केवल याद कराने के बजाय चित्रों, क्रमबद्ध अभ्यास और गिनती की गतिविधियों द्वारा अधिक सरल और रोचक बनाया जा सकता है। विद्यार्थी जब संख्याओं को देखकर, गिनकर और क्रम में लिखकर अभ्यास करते हैं, तो उनका संख्या-ज्ञान अधिक स्पष्ट होता है।

1. संख्याओं को उल्टे क्रम में लिखना

चित्र में अंकित संख्याओं को देखकर विद्यार्थियों से उन्हें उल्टे क्रम में संस्कृत में लिखवाया जा सकता है।

चित्र में क्रम इस प्रकार दिया गया है—

7, 6, 5, 4, 3, 2, 1

इस गतिविधि से विद्यार्थी संस्कृत संख्या-शब्दों को केवल सीधे क्रम में ही नहीं, बल्कि उल्टे क्रम में भी पहचानने और लिखने का अभ्यास करते हैं।

2. संख्याओं को सीधे क्रम में लिखना

चित्र में 11 से 17 तक की संख्याएँ देकर विद्यार्थियों से उनके संस्कृत रूप सीधे क्रम में लिखवाए जाते हैं।

अंक संस्कृत
11एकादश
12द्वादश
13त्रयोदश
14चतुर्दश
15पञ्चदश
16षोडश
17सप्तदश

3. बाद की संख्या लिखना

विद्यार्थियों को एक संख्या देकर उसके बाद आने वाली संख्या संस्कृत में लिखने का अभ्यास कराया जाता है।

  • एकः — __________
  • त्रयः — __________
  • पञ्चम् — __________
  • सप्तम् — __________
  • नवम् — __________

इस अभ्यास का उद्देश्य विद्यार्थी को संख्या-क्रम पहचानने और अगली संख्या का संस्कृत रूप याद करने में सक्षम बनाना है।

4. पहले की संख्या लिखना

विद्यार्थियों से दी गई संस्कृत संख्या से ठीक पहले आने वाली संख्या लिखवाई जाती है।

  • __________ द्वादश
  • __________ षोडश
  • __________ विंशतिः
  • __________ चतुर्दश
  • __________ अष्टादश

इस प्रकार विद्यार्थी संख्याओं के पूर्ववर्ती और परवर्ती क्रम को समझते हैं।

5. चिन्हित संख्या को संस्कृत में लिखना

1 से 10 तक की संख्याओं में जिन अंकों पर गोला लगाया गया है, उन्हें संस्कृत में लिखने का अभ्यास कराया जाता है।

चित्र में 2 और 4 पर गोला लगाया गया है।

अंक संस्कृत
2 द्वौ
4 चत्वारः

6. चित्रों को गिनकर संस्कृत में लिखना

विद्यार्थियों को विभिन्न वस्तुओं के चित्र दिखाकर उनकी संख्या गिनने और संस्कृत में लिखने के लिए प्रेरित किया जाता है।

चित्र में वस्तुओं की संख्या दिया गया संस्कृत रूप
8 अष्टमः
7 सप्तमः
6 षष्ठः
5 पञ्चमः

गतिविधियों का महत्व

  • विद्यार्थी संख्याओं को देखकर और गिनकर सीखते हैं।
  • सीधे तथा उल्टे क्रम में संख्या लिखने का अभ्यास होता है।
  • पहले और बाद की संख्या पहचानने की क्षमता विकसित होती है।
  • अंक देखकर उसका संस्कृत रूप लिखने का अभ्यास होता है।
  • चित्रों के माध्यम से संख्या-ज्ञान अधिक रोचक और सरल बनता है।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • संस्कृत संख्याओं को चित्र, गिनती और क्रमबद्ध गतिविधियों द्वारा सरलता से सिखाया जा सकता है।
  • सीधे और उल्टे क्रम में संख्याएँ लिखवाने से संख्या-क्रम का ज्ञान मजबूत होता है।
  • पूर्ववर्ती और परवर्ती संख्या लिखने से संख्याओं के क्रम की समझ विकसित होती है।
  • चिन्हित अंक को संस्कृत में लिखने से अंक और संख्या-शब्द का सम्बन्ध स्पष्ट होता है।
  • चित्रों में वस्तुओं को गिनकर संस्कृत में लिखना संख्या-ज्ञान का व्यावहारिक अभ्यास है।

Advertisement

अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

उन्नविंशति शब्द का अर्थ है—

व्याख्या: ‘उन्नविंशति’ का अर्थ उन्नीस होता है।
Q 2

एकादश शब्द का हिन्दी अर्थ है—

व्याख्या: ‘एकादश’ संख्या ग्यारह का बोध कराती है।
Q 3

एकोनत्रिंशत् शब्द का हिन्दी अर्थ है—

व्याख्या: ‘एकोनत्रिंशत्’ का अर्थ उनतीस होता है।
Q 4

तीन संख्या को संस्कृत भाषा में लिखा जाता है—

व्याख्या: तीन संख्या के लिए ‘त्रयः’ रूप का प्रयोग किया जाता है।
Q 5

चतुर्दशः शब्द का अर्थ है—

व्याख्या: ‘चतुर्दश’ संख्या चौदह का बोध कराती है।
Q 6

करोड़ को संस्कृत में कहते हैं—

व्याख्या: करोड़ के लिए संस्कृत में ‘कोटि’ शब्द प्रयुक्त होता है।
Q 7

पैंतीस को संस्कृत में लिखते हैं—

व्याख्या: पैंतीस का संस्कृत संख्यावाची रूप ‘पञ्चत्रिंशत्’ है।
Q 8

अष्टाविंशतिः का अर्थ है—

व्याख्या: ‘अष्टाविंशतिः’ संख्या अट्ठाइस का बोध कराती है।
Q 9

अष्टचत्वारिंशत् का अर्थ है—

व्याख्या: ‘अष्टचत्वारिंशत्’ का अर्थ अड़तालीस अर्थात् 48 है।
Q 10

एकोनत्रिंशत् शब्द बोधक है—

व्याख्या: ‘एकोनत्रिंशत्’ उनतीस संख्या का बोध कराता है।
Q 11

षोडशः शब्द का अर्थ है—

व्याख्या: ‘षोडश’ का अर्थ सोलह होता है।
Q 12

द्वादश शब्द बोधक है—

व्याख्या: ‘द्वादश’ बारह संख्या का बोध कराता है।
Q 13

‘एकोनविंशतिः’ पद संख्या का बोधक है—

व्याख्या: ‘एकोनविंशतिः’ उन्नीस संख्या का बोध कराता है।
Q 14

हजार को संस्कृत में कहते हैं—

व्याख्या: हजार के लिए संस्कृत में ‘सहस्र’ शब्द प्रयुक्त होता है।
Q 15

आधा (1/2) के लिए संस्कृत शब्द है—

व्याख्या: आधा अर्थात् 1/2 के लिए ‘अर्द्धम्’ या ‘अर्द्ध’ शब्द का प्रयोग होता है।

Advertisement

पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 1 के विषय संस्कृत के अध्याय संस्कृत संख्याओं का ज्ञान से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1 2023

पाँच से पन्द्रह तक की गिनती संस्कृत में लिखिए।

Q 2 2022

एक से दस तक की संख्याओं को संस्कृत में लिखिए।

Q 3 2021

1 से 10 तक की संख्याओं को संस्कृत पुल्लिंग शब्द में लिखिए।

Q 4 2016

बारह, तेरह, चौदह, पन्द्रह, सोलह, सत्रह, अठारह, उन्नीस और बीस संख्याओं को संस्कृत में लिखिए।

Q 5 2017

ग्यारह से उन्नीस तक के संख्यावाचक शब्दों को संस्कृत में लिखिए।

Q 6 2018

पन्द्रह से बीस तक के संख्यावाचक शब्दों को संस्कृत में लिखिए।

Q 7 2019

एक से दस तक की गिनतियों को संस्कृत में लिखिए।

Advertisement

Practice More Questions

इसी semester और subject के MCQ Tests तथा Previous Year Papers practice करके अपनी तैयारी को और मजबूत बनाइए।

PDF Store Join Telegram