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Home Study Material Semester 1 हिन्दी शब्दों की पहचान
Chapter 3 • हिन्दी

शब्दों की पहचान

UP DELED Semester 1 के हिन्दी विषय के इस अध्याय में विलोम शब्द, समानार्थी एवं पर्यायवाची शब्द, अनेकार्थी शब्द, तुकान्त शब्द, समान ध्वनियों वाले शब्द तथा वाक्यांश के लिए एक शब्द का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

6
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Notes
Topic 1 विलोम शब्द—अर्थ, उदाहरण एवं शिक्षण गतिविधियाँ

विलोम शब्द—अर्थ, उदाहरण एवं शिक्षण गतिविधियाँ

विलोम शब्द का अर्थ

जो शब्द किसी दूसरे शब्द का उल्टा या विपरीत अर्थ प्रकट करते हैं, उन्हें विलोम शब्द या विपरीतार्थक शब्द कहते हैं। अर्थात् जिस शब्द से किसी दूसरे विशिष्ट शब्द का उल्टा अर्थ निकलता है, वह उसका विलोम शब्द कहलाता है।

जैसे—‘अथ’ का विलोम ‘इति’ है। इसी प्रकार राजा–रंक, राजा–रानी, राजा–प्रजा, पिता–पुत्र, पिता–माता, मोटा–पतला, उत्तर–दक्षिण तथा राम–रावण आदि उदाहरण हैं।

विलोम शब्द लिंग, आर्थिक स्थिति, सम्बन्ध, आकार, दशा, दिशा, कार्य, भूगोल, इतिहास तथा स्वभाव आदि अनेक आधारों पर बन सकते हैं।

विलोम शब्द बनाते समय ध्यान देने योग्य बातें

विलोम शब्द बनाते समय शब्द की प्रकृति और वर्ग का ध्यान रखना आवश्यक है। यदि मूल शब्द संज्ञा है तो उसका विलोम भी संज्ञा होना चाहिए और यदि मूल शब्द विशेषण है तो उसका विलोम भी विशेषण होना चाहिए।

शब्द-भेद का ध्यान न रखने पर विलोम शब्द व्याकरणिक दृष्टि से अनुचित हो सकता है। पुस्तक में उदाहरण दिया गया है कि अनुशासन का विपरीतार्थक अननुशासन होगा, न कि अनुशासनहीन या अनुशासनहीनता।

विलोम शब्दों के प्रमुख उदाहरण

  • रात — दिन
  • अथ — इति
  • अल्पायु — दीर्घायु
  • उत्कर्ष — अपकर्ष
  • आदि — अन्त
  • उत्थान — पतन
  • एकता — अनेकता
  • आकर्षण — विकर्षण
  • अधिक — न्यून
  • उर्वर — ऊसर
  • आलस्य — स्फूर्ति
  • उधार — नगद
  • उपस्थित — अनुपस्थित
  • उत्कृष्ट — निकृष्ट
  • अमृत — विष
  • अन्धकार — प्रकाश
  • इच्छा — अनिच्छा
  • अनुराग — विराग
  • आगामी — गत
  • आग्रह — दुराग्रह
  • अनुज — अग्रज
  • उद्यमी — आलसी
  • आदान — प्रदान
  • एक — अनेक
  • अर्थ — अनर्थ
  • अपेक्षा — उपेक्षा
  • अतिवृष्टि — अनावृष्टि
  • उत्तम — अधम
  • आदर्श — यथार्थ
  • स्वाधीन — पराधीन
  • दाता — याचक
  • गुप्त — प्रकट
  • घृणा — प्रेम
  • सुगंध — दुर्गन्ध
  • संक्षेप — विस्तार
  • निन्दा — स्तुति
  • सरस — नीरस
  • मोक्ष — बन्धन
  • क्रय — विक्रय
  • निरक्षर — साक्षर
  • बन्धन — मुक्ति
  • यश — अपयश
  • सगुण — निर्गुण
  • रुग्ण — स्वस्थ
  • वरदान — अभिशाप
  • हर्ष — शोक
  • विधि — निषेध
  • शयन — जागरण
  • सक्रिय — निष्क्रिय
  • सज्जन — दुर्जन
  • सन्तोष — असन्तोष
  • आगामी — विगत
  • आचार — अनाचार
  • आदर — अनादर
  • आह्वान — विसर्जन
  • आकर्ष — विकर्ष
  • आर्द्र — शुष्क
  • आहार — निराहार
  • आधुनिक — प्राचीन
  • आसक्त — अनासक्त
  • आगमन — गमन
  • आस्था — अनास्था
  • इहलोक — परलोक
  • ईर्ष्या — प्रेम
  • उषा — संध्या
  • उदार — अनुदार
  • उपकार — अपकार
  • उन्मीलन — निमीलन
  • उपयुक्त — अनुपयुक्त
  • एकांगी — सर्वांगीण
  • आर्य — अनार्य
  • अतल — वितल
  • आय — व्यय
  • राहत — प्रकोप
  • खेद — प्रसन्नता
  • प्रत्यक्ष — परोक्ष
  • सजीव — निर्जीव
  • मौखिक — लिखित
  • घात — प्रतिघात
  • मितव्यय — अपव्यय
  • सौभाग्य — दुर्भाग्य
  • कृतज्ञ — कृतघ्न
  • दुर्जन — सुजन
  • नूतन — पुरातन
  • ठोस — तरल
  • मूक — वाचाल
  • रक्षक — भक्षक
  • क्षणिक — शाश्वत
  • विधवा — सधवा
  • शीत — उष्ण
  • सफल — असफल
  • शुभ — अशुभ
  • आतुर — शान्त
  • आरोह — अवरोह
  • आदत — प्रदत्त
  • आरम्भ — अन्त
  • आवृत — अनावृत
  • आच्छादित — अनाच्छादित
  • आशा — निराशा
  • आशीर्वाद — अभिशाप
  • आध्यात्मिक — भौतिक
  • ईश्वर — अनीश्वर
  • उग्र — सौम्य
  • सम्पन्न — विपन्न
  • संश्लेषण — विश्लेषण
  • उन्नति — अवनति
  • उपाय — निरुपाय
  • कनिष्ठ — ज्येष्ठ
  • कृष्ण — शुक्ल
  • ग्रामीण — शहरी
  • छूत — अछूत
  • जन्म — मृत्यु
  • दयालु — निर्दयी
  • नश्वर — शाश्वत
  • निन्दा — प्रशंसा
  • पूर्ण — अपूर्ण
  • भाव — अभाव
  • राग — विराग, द्वेष
  • चल — अचल
  • निर्मल — मलिन
  • प्रभु — दास
  • मानव — दानव
  • रात्रि — दिवस
  • विरोध — समर्थन
  • सामिष — निरामिष
  • हास्य — रुदन
  • दुर्लभ — सुलभ
  • पतिव्रता — कुलटा
  • भूत — भविष्य
  • मिथ्या — सत्य
  • योगी — भोगी
  • अग्नि — जल
  • अर्पण — ग्रहण
  • विस्तृत — संक्षिप्त
  • आयात — निर्यात
  • अज्ञ — विज्ञ
  • रचना — ध्वंस
  • वृष्टि — अनावृष्टि
  • ऐश्वर्य — दारिद्र्य
  • कृश — स्थूल
  • ग्राम्य — शिष्ट
  • रत — विरत
  • रिक्त — पूर्ण
  • लोभी — सन्तोषी
  • लोह — स्वर्ण
  • छल — निश्चल
  • जल — थल
  • जंगली — पालतू
  • धीर — अधीर
  • पक्ष — विपक्ष
  • परकीय — स्वकीय
  • मृत — अमृत
  • जटिल — सरल
  • नश्वर — अनश्वर
  • बाढ़ — सूखा
  • मिलन — विछोह
  • रहित — सहित
  • लोभ — सन्तोष
  • विशुद्ध — दूषित
  • शकुन — अपशकुन
  • सूक्ष्म — स्थूल
  • तरुण — वृद्ध
  • पंडित — मूर्ख
  • मनुष्यता — पशुता
  • अगम — सुगम
  • असली — नकली
  • अमर — मर्त्य
  • आश्रित — अनाश्रित
  • उचित — अनुचित
  • उत्तीर्ण — अनुत्तीर्ण
  • स्वार्थ — परमार्थ
  • ऋजु — कुटिल
  • असुर — सुर
  • अभिजात्य — अकुलीन
  • रचना — विनाश
  • राजतन्त्र — प्रजातन्त्र
  • रंगीन — रंगहीन
  • लेन — देन
  • वन — मरु
  • विशालकाय — लघुकाय
  • निःसीम — ससीम
  • शोषण — पोषण
  • शासक — शासित
  • आनन्द — विषाद
  • स्थावर — जंगम
  • संगत — असंगत
  • संश्लिष्ट — विश्लिष्ट
  • विवाद — निर्णय
  • सदाशय — दुराशय
  • समाज — व्यक्ति
  • संकीर्ण — उदार
  • सन्धि — विच्छेद
  • प्रमाद — सतर्कता
  • विरह — मिलन
  • विश्वास — सन्देह
  • शुचि — अशुचि
  • समास — व्यास
  • श्वेत — श्याम
  • सुपूत — कपूत
  • ससीम — असीम
  • क्षम — अक्षम
  • सुगम — दुर्गम
  • क्षुद्र — महान
  • सुभग — दुर्भग
  • क्षर — अक्षर
  • अवाचीन — प्राचीन
  • संयोग — वियोग
  • मसृण — रूक्ष

विलोम शब्द शिक्षण की गतिविधियाँ

गतिविधि–1 : वस्तुओं एवं अनुभव द्वारा

शिक्षक भिन्न प्रकृति वाली वस्तुओं या स्थितियों को विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत करके उनके स्वभाव, आकार, अनुभव तथा प्रयोग के बारे में वार्तालाप कर सकता है।

जैसे—फूल–काँटा, कम–ज्यादा, मोटा–पतला तथा लाभ–हानि। इस प्रकार बच्चे विपरीत भाव को प्रत्यक्ष उदाहरणों के माध्यम से समझ सकते हैं।

गतिविधि–2 : शब्द-कार्ड द्वारा
  1. विद्यार्थियों को दो समूहों में बाँटा जाए। एक समूह के विद्यार्थियों को शब्द-कार्ड तथा दूसरे समूह को उनके विपरीत अर्थ वाले शब्द-कार्ड दिए जाएँ।
  2. प्रत्येक विद्यार्थी अपने शब्द के विपरीत अर्थ वाला कार्ड रखने वाले विद्यार्थी को खोजे। जैसे—रात–दिन, आगे–पीछे और मोटा–पतला।
  3. इसके बाद दोनों शब्दों के अर्थ स्पष्ट कराए जाएँ।
  4. शिक्षक स्वयं कुछ शब्द बोले और विद्यार्थियों से उनके विपरीत अर्थ वाले शब्द कहलवाए।
  5. अन्त में विद्यार्थियों को समझाया जाए कि विलोम शब्द बनाते समय शब्द की प्रकृति और व्याकरणिक वर्ग का ध्यान रखना आवश्यक है।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • किसी शब्द का उल्टा या विपरीत अर्थ प्रकट करने वाला शब्द विलोम या विपरीतार्थक शब्द कहलाता है।
  • विलोम शब्द लिंग, सम्बन्ध, आर्थिक स्थिति, आकार, दशा, दिशा, कार्य, भूगोल, इतिहास और स्वभाव आदि विभिन्न आधारों पर हो सकते हैं।
  • विलोम बनाते समय मूल शब्द की प्रकृति और व्याकरणिक वर्ग का ध्यान रखना चाहिए।
  • अथ–इति, रात–दिन, उत्थान–पतन, एकता–अनेकता, अमृत–विष, आशा–निराशा और प्रत्यक्ष–परोक्ष प्रमुख उदाहरण हैं।
  • वस्तुओं, वार्तालाप और शब्द-कार्ड जैसी गतिविधियों द्वारा विलोम शब्दों का प्रभावी शिक्षण किया जा सकता है।

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Topic 2 समानार्थी/पर्यायवाची शब्द—अर्थ एवं उदाहरण

समानार्थी/पर्यायवाची शब्द—अर्थ एवं उदाहरण

समानार्थी/पर्यायवाची शब्द का अर्थ

वे शब्द जिनमें एक ही अर्थ के लिए अनेक शब्द प्रयोग किए जाते हैं, समानार्थी या पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।

पर्यायवाची शब्दों के अर्थ में समानता होते हुए भी उनमें सूक्ष्म अन्तर हो सकता है। परिस्थिति, घटना, विशेषता और प्रयोग के अनुसार किसी स्थान पर एक शब्द अधिक उपयुक्त होता है तो किसी दूसरे स्थान पर दूसरा शब्द।

पर्यायवाची शब्दों को प्रतिशब्द अथवा समानार्थक शब्द भी कहा जाता है।

पर्यायवाची शब्दों के प्रयोग की विशेषता

समानार्थी शब्द पूर्णतः एक-दूसरे के स्थान पर हर परिस्थिति में प्रयुक्त नहीं किए जा सकते। प्रत्येक शब्द की महत्ता उसके विषय और प्रयोग-स्थान के अनुसार होती है। इसलिए पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग प्रसंग को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

प्रमुख समानार्थी/पर्यायवाची शब्द

  • अंगूर — द्राक्षा, दाख, इंगुर
  • आम — आम्र, सौरभ, अमृतफल, रसाल, कामशर
  • अंधकार — तिमिर, अँधेरा, तम
  • आग — अग्नि, अनल, पावक, दहन, ज्वलन, धूमकेतु, कृशानु
  • अच्छा — उचित, शोभन, उपयुक्त, शुभ, सौम्य
  • अजेय — अजित, अपराजित, अपराजेय
  • अतिथि — पाहुन, आगंतुक, अभ्यागत, मेहमान
  • अनुचर — नौकर, दास, सेवक, परिचारक
  • अनुपम — अनूठा, अनोखा, अपूर्व, निराला, अभूतपूर्व
  • अन्य — पृथक, और, भिन्न, दूसरा
  • अनाज — शस्य, अन्न, धान्य
  • अरण्य — विपिन, वन, कानन, कान्तार, जंगल
  • आभूषण — विभूषण, भूषण, गहना, अलंकार
  • आज्ञा — हुक्म, आदेश, निर्देश
  • अमृत — सुधा, अमिय, पीयूष, सोम, मधु, अमी
  • असुर — दैत्य, दानव, राक्षस, निशाचर, रजनीचर, दनुज
  • अश्व — वाजि, घोड़ा, घोटक, रविपुत्र, हय, तुरंग, सैंधव
  • अहंकार — गर्व, अभिमान, दर्प, मद, घमण्ड
  • आँख — लोचन, नयन, नेत्र, चक्षु, दृग, विलोचन, दृष्टि
  • आकाश — नभ, गगन, अम्बर, व्योम, अनन्त, आसमान
  • आनन्द — हर्ष, सुख, आमोद, मोद, प्रमोद, उल्लास
  • आश्रम — कुटी, विहार, मठ, संघ, अखाड़ा
  • आँसू — नेत्रजल, नयनजल, चक्षुजल, अश्रु
  • इन्द्र — देवराज, सुरेन्द्र, सुरपति, अमरेश, देवेन्द्र, वासव, सुरराज, सुरेश
  • इन्द्राणी — इन्द्रवधू, शची, पुलोमजा
  • ईश्वर — भगवान, परमेश्वर, जगदीश्वर, विधाता
  • इच्छा — अभिलाषा, चाह, कामना, लालसा, मनोरथ, आकांक्षा
  • उन्नति — प्रगति, विकास, उत्कर्ष, अभ्युदय, उत्थान, वृद्धि
  • उत्साह — आवेग, जोश, उमंग
  • उद्यान — बाग, कुसुमाकर, वाटिका, उपवन, बगीचा
  • ओंठ — ओष्ठ, अधर, होठ
  • कमल — पद्म, पंकज, नीरज, सरोज, जलज, जलजात
  • कपड़ा — चीर, पट, वसन, अम्बर, वस्त्र
  • कनक — स्वर्ण, धतूरा, सोना
  • कृषक — हलवाहा, किसान, कृषिजीवी, खेतिहर
  • कान — श्रवण, श्रुतिपट, कर्ण, श्रवणेन्द्रिय
  • कोमल — नाजुक, नरम, मृदु, सुकुमार, मुलायम
  • कोष — भंडार, खजाना, निधि
  • कोयल — वनप्रिय, पिक, कोकिला, काकपाली, वसंतदूत
  • किरण — मरीचि, कर, अंशु, रश्मि, मयूख, ज्योति, प्रभा, दीप्ति
  • किनारा — कगार, कूल, तट, तीर
  • कृपा — प्रसाद, करुणा, दया, अनुग्रह
  • क्रोध — रोष, कोप, अमर्ष, कोह, प्रतिघात
  • कंगन — कड़ा, चूड़ा, वलय, कंकण
  • करधनी — कमरबन्द, किंकिणी, तगड़ी
  • काजल — काजर, कज्जल, अंजन, सुरमा
  • किताब — पोथी, ग्रन्थ, पुस्तक
  • कामदेव — मन्मथ, मनोज, काम, मार, कन्दर्प, अनंग, मनसिज, रतिनाथ, मीनकेतु
  • कुबेर — किन्नरपति, किन्नरनरेश, यक्षराज, धनाधिप, धनराज, धनेश
  • किसान — कृषक, भूमिपुत्र, हलधर, खेतिहर, अन्नदाता
  • कृष्ण — राधापति, घनश्याम, वासुदेव, माधव, मोहन, केशव, गोविन्द, गिरिधारी
  • कल्पवृक्ष — कल्पतरु, देवतरु, कल्पलता, देववृक्ष, पारिजात
  • खल — अधम, दुर्जन, दुष्ट, कुटिल, नीच
  • गाय — गौ, धेनु, सुरभि, भद्रा, रोहिणी
  • गधा — गर्दभ, खर, धूसर, शीतलावाहन, चक्रीवान
  • गंगा — देवनदी, मंदाकिनी, भागीरथी, विष्णुपगा, देवपगा, धुवनंदा
  • गणेश — गजानन, गौरीनन्दन, गणपति, गणनायक, शंकरसुवन, लम्बोदर, महाकाय
  • गज — हाथी, हस्ती, मतंग, कूम्भा, मदकल
  • गुरु — शिक्षक, बड़ा, भारी, बृहस्पति
  • ग्रीष्म — तप, घाम, निदाघ, गर्मी
  • गृह — घर, सदन, गेह, भवन, धाम, निकेतन, निवास
  • चन्द्रमा — चन्द्र, शशि, हिमकर, राकेश, रजनीश, निशानाथ, सोम, मयंक, सारंग, सुधाकर, कलानिधि
  • चतुर — चालक, कुशल, पटु, नागर, दक्ष, प्रवीण
  • चरण — पद, पग, पाँव, पैर
  • चातक — सारंग, मेघजीवन, पपीहा, स्वातिमुक्त
  • जल — वारि, नीर, तोय, अम्बु, उदक, पानी, जीवन, पय, पेय
  • जहाज — पोत, जलयान
  • जंगल — विपिन, कानन, वन, अरण्य, गहन
  • जमुना — सूर्यसुता, कृष्णा, अर्कजा, रवितनया, कालिंदी
  • जीभ — रसना, वाणी, गिरा, रसज्ञा
  • झंडा — फरहरा, ध्वज, पताका, निशान
  • झरना — प्रपात, उत्स, निर्झर, सोता, स्रोत
  • झूठ — असत्य, मिथ्या, मृषा, अनृत
  • तन — काया, तनु, शरीर, देह, कलेवर
  • तरु — विटप, पादप, पेड़, द्रुम, वृक्ष
  • तात — परम, प्यारा, पूज्य, पिता
  • तालाब — सरोवर, जलाशय, सर, पुष्कर, पोखरा, जलवान, सरसी
  • तलवार — असि, करवाल, कृपाण, खड्ग, शायक, चन्द्रहास
  • तीर — वाण, सर, नाराच, विहंग शिलिमुख
  • तोता — सुग्गा, शुक, सुआ, कीर, दाडिमप्रिय
  • दास — सेवक, नौकर, चाकर, परिचारक, अनुचर
  • दरिद्र — निर्धन, गरीब, रंक, कंगाल, दीन
  • दिन — दिवस, याम, दिवा, वार, प्रमान
  • दुःख — पीड़ा, कष्ट, व्यथा, वेदना, संताप, शोक, खेद, पीर, लेश
  • दूध — दुग्ध, क्षीर, पय
  • दुष्ट — पापी, नीच, दुर्जन, अधम, खल, पामर
  • दर्पण — शीशा, आरसी, आइना, मुकुर
  • दांत — दन्त, दशन, रद, द्विज
  • दुर्गा — चंडिका, भवानी, कुमारी, कल्याणी, महागौरी, कालिका, शिवा
  • देवता — सुर, देव, अमर, वसु, आदित्य, लेख
  • धनुष — धनुही, धनु, सारंग, चाप, शरासन
  • धन — दौलत, सम्पत्ति, सम्पदा, वित्त
  • धरती — पृथ्वी, भू, भूमि, धरणी, वसुंधरा, अचला, मही, रत्नवती, रत्नगर्भा
  • पर्वत — पहाड़, गिरि, अचल, नग, भूधर, महीधर, शैल, नगपति, शिखर, अद्रि, तुंग, कूट, धरणीधर
  • समुद्र — सागर, जलधि, सिंधु, रत्नाकर, नीरनिधि, पयोधि, नदीश, नीरधि, वारिधि, अर्णव, उदधि, पयोनिधि, जलधाम, वारीश, पारावार, अब्धि
  • सूर्य — रवि, सूरज, दिनकर, प्रभाकर, दिवाकर, भास्कर, सविता, भानु, दिनेश, मार्तण्ड, अंशुमाली
  • बसंत — ऋतुराज, ऋतुपति, मधुमास, कुसुमाकर, माधव
  • सरस्वती — वागेश्वरी, शारदा, भारती, हंसवाहिनी, वाग्देवी, ज्ञानदा, महाश्वेता
  • अभूत — अपूर्व, विलक्षण, अनोखा
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • एक ही अर्थ के लिए प्रयुक्त अनेक शब्द समानार्थी या पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं।
  • इन्हें प्रतिशब्द या समानार्थक शब्द भी कहा जाता है।
  • पर्यायवाची शब्दों में अर्थ-समानता होती है, परन्तु उनके प्रयोग में सूक्ष्म अन्तर हो सकता है।
  • अग्नि—अनल, पावक; सूर्य—रवि, दिनकर; समुद्र—सागर, सिंधु; आँख—नयन, नेत्र इसके उदाहरण हैं।
  • पर्यायवाची शब्द का चयन प्रसंग और प्रयोग-स्थान के अनुसार करना चाहिए।
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Topic 3 अनेकार्थी शब्द—अर्थ एवं उदाहरण

अनेकार्थी शब्द—अर्थ एवं उदाहरण

अनेकार्थी शब्द का अर्थ

ऐसे शब्द जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं, अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं। अर्थात् एक ही शब्द अलग-अलग प्रसंगों में अलग-अलग अर्थ व्यक्त कर सकता है।

अनेकार्थी शब्द का सही अर्थ वाक्य या प्रसंग के आधार पर समझा जाता है।

अनेकार्थी शब्दों के प्रमुख उदाहरण

  • अनन्त — समुद्र, आकाश, सर्पों का राजा, ब्रह्म, अन्तहीन
  • अर्थ — प्रयोजन, मतलब, धन, तात्पर्य
  • अली — भ्रमर, सखी
  • अर्क — रस, आक, सूर्य
  • अज — बकरा, ब्रह्म, दशरथ के पिता का नाम, ब्रह्मा
  • अम्बर — बादल, आकाश, वस्त्र
  • अंक — नाटक के अंक, गोद, परिच्छेद, संख्या के अंक
  • अंकुश — हाथी पर नियंत्रण हेतु लोहे का हुक, रोक, बंधन
  • अंचल — क्षेत्र, साड़ी का छोर
  • अक्षर — अविनाशी, सत्य, गगन, वर्ण
  • अतिथि — मेहमान, यात्री, साधु, अग्नि
  • अक्षत — चावल का दाना, सम्पूर्ण, अखण्ड
  • अनल — वायु, पित्त, आग, परमेश्वर, जीव, विष्णु
  • अमृत — अमर, घी, सूर्य, न मरा हुआ, जल, दूध, पारा, स्वर्ण
  • उत्तर — जवाब, बाद का, एक दिशा, अगला
  • कनक — सोना, गेहूँ, धतूरा
  • कमल — नलिन, पंकज, पानी, आँख की पुतली, पीलिया रोग
  • कपि — चंचल, बन्दर, हाथी, ईश्वर
  • कंचन — लाल कचनार, सोना, धन-सम्पत्ति, धतूरा, निर्मल
  • कृष्ण — वासुदेव पुत्र, कौआ, अंधकार
  • कर — टैक्स, हाथी की सूण्ड, हाथ, किरण
  • कर्ण — कुन्ती का पुत्र, कान, समकोण त्रिभुज में समकोण के सामने की भुजा
  • गुण — रस्सी, स्वभाव, धनुष की डोर, ओज, माधुर्य, साहित्य में प्रसाद
  • गौ — वाणी, बैल, गाय, पृथ्वी, इन्द्रिय, दिशा
  • गुरु — दीर्घ स्वर, शिक्षक, दीक्षा देने वाला, भारी
  • घन — लोहे का बड़ा हथौड़ा, ठोस, बादल, घना
  • जलज — शंख, कमल, मोती, चन्द्रमा, शैवाल, काई, मछली
  • जनक — राजा जनक, पिता, उत्पन्न करने वाला
  • जड़ — निर्जीव, वृक्ष की मूल, मूल कारण, मूर्ख, अचेतन
  • तात — भाई, पिता, गुरु, पूज्य व्यक्ति हेतु सम्बोधन, मित्र
  • तारा — नक्षत्र, आँख की पुतली
  • तीर — किनारा, बाण, सीमा
  • तनया — पुत्री, गिरि, कलिंगा
  • दण्ड — एक व्यायाम, खण्डा, सीमा
  • द्विज — पक्षी, श्रेष्ठ, दाँत, ब्राह्मण, क्षत्रिय
  • दल — मांसल भाग, समूह
  • दक्षिण — सरल, चतुर, अनुकूल
  • नकुल — चौथा पाण्डव, नेवला
  • नाग — एक देश, एक जाति, बादल, हाथी, पर्वत, साँप
  • नग — वृक्ष, पर्वत, नगीन, अदद
  • नाक — आकाश मण्डल, स्वर्ग, नासिका, मगर, नाक से निकलने वाला श्वेत तरल पदार्थ
  • नागर — नगरवासी, नम्र, नामहीन, चतुर
  • नगेश — हिमालय, सुमेरु, पर्वतों का राजा
  • नदी — सरिता, दरिया
  • प्रकाश — स्पष्ट, खुला, धूप, प्रसिद्ध, दीप्ति
  • पतंग — पक्षी, नौका, एक खिलौना, सूर्य, विष्णु, दीपक की लौ पर उड़ने वाला कीट
  • पद — स्थान, गीत, पैर, छंद का चरण
  • पत्र — पंख, पत्ता, चिट्ठी, पुस्तक का पृष्ठ
  • पयोधर — बादल, समुद्र
  • पत्नी — सहधर्मिणी, भार्या, परिणीता
  • पय — शुक्र, वीर्य, अन्न, दूध, जल, ओज, शक्ति, आहार
  • फल — लाभ, भाले की नोक
  • फूल — घुटने की गोल हड्डी, पुष्प, एक आभूषण, श्वेतकुष्ठ का दाग
  • बाल — बालक, अनाज की बाली, रोम, दूध
  • बादल — मेघ, अभ्र, दूधिया रंग का एक पत्थर
  • बाण — बाणभट्ट, बाणासुर, तीर, निशाना, गाय का थन
  • बिजली — तड़ित, रगड़, एक गहना, विद्युत, आम की गुठली के भीतर का गूदा
  • भुजंग — जार, पति, विदूषक, साँप, सीसा
  • माधव — शहद से बना, वासंती, कृष्ण, मक्खन
  • मित्र — सूर्य, बारह आदित्यों में से एक, दोस्त
  • मधु — शराब, शहद, वसंत ऋतु, चैत्र मास, पराग, मीठा
  • मंगल — वीर, शुभ, सौभाग्य, एक दिन, एक ग्रह
  • रस — आनन्द, स्वाद, साहित्य का रस, गन्ने या फलों का रस, जल, अमृत, सार
  • रज — धूल, भस्म, सार, तरल पदार्थ
  • राग — गाने की लय, प्रेम, आसक्ति, रागिनी
  • राजा — शासक, धनी, प्रिय, स्वामी, एक उपाधि
  • लक्ष्य — निशाना, बहाना, उद्देश्य, अभीष्ट वस्तु
  • लगन — चाह, मुहूर्त, लगाव, संलग्न
  • वन — जंगल, समूह, बाग, घर, जल, फूलों का गुच्छा
  • वर्ण — रंग, जाति, रूप, वंश, प्रशंसा, समाज के चार वर्ण
  • वर — दूल्हा, श्रेष्ठ, वरदान
  • वार — दिन, प्रहार, अवसर, बारी
  • वारिद — बादल, जल देने वाला, नागर मोथा
  • विधि — ब्रह्मा, कानून, भाग्य, रीति
  • शशांक — चंद्रमा, मौर, एक राजा
  • श्रुति — वेद, संज्ञा, कान, ज्ञान, सुनना, कथन, उक्ति
  • शिखा — चोटी, किरण, ज्वाला
  • संज्ञा — चेतना, नाम, सूर्य की पत्नी, जानकारी, समझ
  • साधना — आराधना, उपासना, कार्यसिद्धि, अभ्यास करना
  • सारंग — मोर, साँप, कोयल, स्त्री, यात्री, बादल, एक राग, कमल
  • सूर्य — सूरज, मदार का पौधा, उच्च पद, मित्र
  • सुरभि — सुगंध, वसंत, कामधेनु
  • स्रोत — सोता, धारा, ज्ञानेंद्रिय, जरिया
  • स्नेह — तेल, प्रेम, चिकनाई
  • सोम — सोम रस, कुबेर, सोमवार, चंद्र, स्वर्ण
  • हय — घोड़ा, इंद्र, एक छंद का नाम
  • हंस — पक्षी, आत्मा, सूर्य
  • हरि — विष्णु, वानर, सिंह, मोर, तोता, कामदेव
  • हर — शंकर, हरण, आग
  • हलधर — किसान, बैल, बलराम
  • हार — पराजय, गले का आभूषण, पुष्प माला
  • हेम — सोना, हिम, जल, बुध ग्रह, धतूरा
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • एक से अधिक अर्थ रखने वाले शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं।
  • अनेकार्थी शब्द का सही अर्थ उसके वाक्य और प्रसंग से निर्धारित होता है।
  • ‘अर्थ’ के अर्थ प्रयोजन, मतलब, धन और तात्पर्य हैं।
  • ‘अम्बर’ के अर्थ बादल, आकाश और वस्त्र हैं।
  • ‘कर’ के अर्थ टैक्स, हाथ, हाथी की सूँड़ और किरण हैं।
  • ‘तीर’ के अर्थ किनारा, बाण और सीमा हैं।

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Topic 4 तुकान्त शब्द—अर्थ एवं उदाहरण

तुकान्त शब्द—अर्थ एवं उदाहरण

तुकान्त शब्द का अर्थ

तुक वाले शब्द तुकान्त शब्द कहलाते हैं। इन शब्दों के उच्चारण में तुक की प्रधानता रहती है, जिसके कारण उनका उच्चारण छन्दबद्ध और लयात्मक प्रतीत होता है।

तुकान्त शब्दों का प्रयोग प्रायः काव्य-रचनाओं में किया जाता है। समान या मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द कविता में लय और आकर्षण उत्पन्न करते हैं।

तुकान्त शब्दों के उदाहरण

  • मुआ — अधमुआ, जममुआ, जुआ, जूआ, टकुआ, टटुआ
  • टेकुआ — टेघुआ, ठठुआ, ठिठुआ, डबुआ, डमरुआ, डोआ, ढबुआ, तंबुआ, तकुआ, तलुआ, तिआ

तुकान्त शब्दों के सामान्य जोड़े

  • मुआ — अधमुआ, जममुआ (ईर्ष्यालु), जुआ, जूआ, टकुआ (चरखे में लगा सुआ), टटुआ, टरुआ (आँसू), टहलुआ (टहलदार)
  • टेकुआ (ओटनी) — टेसुआ, ठठुआ (निठल्ला), ठिठुआ (निठल्ला), डबुआ (कुल्हड़), डमरुआ, डोआ (काठ का चमचा), ढबुआ (मचान का छप्पर), तंबुआ, तकुआ, तलुआ, तिआ

तुकान्त शब्दों के सामान्य जोड़े

  • शाम — नाम
  • साया — लाया
  • यहाँ — जहाँ
  • चलाया — मनाया
  • नहाया — बहाया
  • झट — पट
  • काम — दाम
  • माया — खाया
  • पाना — खोना
  • सोना — रोना
  • हँसना — फँसना
  • मिलना — जुलना
  • खाना — पीना
  • लाल — बाल
  • छोटा — मोटा
  • आना — जाना
  • हाथ — साथ
  • काट — छाँट
  • रंग — अंग
  • उमंग — तरंग
  • रात — बात
  • हद — कद
  • संग — दंग
  • पद — बद
  • हाल — माल
  • बाल — खाल
  • ढंग — भंग
  • बाट — चाट
  • काला — पीला
  • जात — पात
  • जात — भात
  • नट — खट
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • तुक वाले शब्द तुकान्त शब्द कहलाते हैं।
  • तुकान्त शब्दों के उच्चारण में समान या मिलती-जुलती लय सुनाई देती है।
  • इनका प्रयोग विशेष रूप से काव्य-रचनाओं में किया जाता है।
  • शाम–नाम, रात–बात, हाथ–साथ, उमंग–तरंग तथा आना–जाना तुकान्त शब्दों के उदाहरण हैं।
Topic 5 समान ध्वनियों वाले शब्द—अर्थ एवं उदाहरण

समान ध्वनियों वाले शब्द—अर्थ एवं उदाहरण

समान ध्वनियों वाले शब्द

समान ध्वनियों वाले किन्तु अलग-अलग अर्थ रखने वाले शब्दों को श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द कहा जाता है।

‘श्रुतिसमभिन्नार्थक’ शब्द श्रुति + सम + भिन्न + अर्थ से बना है। अर्थात् ऐसे शब्द जो सुनने अथवा उच्चारण करने में लगभग समान प्रतीत होते हैं, किन्तु उनके अर्थ अलग-अलग होते हैं।

हिन्दी में ऐसे अनेक शब्द मिलते हैं जिनका उच्चारण बहुत समान होता है, इसलिए उनके सही अर्थ और वर्तनी की पहचान आवश्यक है।

श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्दों के प्रमुख उदाहरण

  • अंस — कंधा; अंश — हिस्सा
  • अंत — समाप्त; अंत्य — नीच
  • अन्न — अनाज; अन्य — दूसरा
  • अभिराम — सुन्दर; अविराम — लगातार
  • अम्बुज — कमल; अम्बुधि — सागर
  • अनिल — हवा; अनल — आग
  • अश्व — घोड़ा; अश्म — पत्थर
  • अनिष्ट — हानि; अनिष्ठ — श्रद्धाहीन
  • अचर — न चलने वाला; अनुचर — नौकर
  • अमित — बहुत; अमीत — शत्रु
  • अभय — निर्भय; उभय — दोनों
  • अस्र — आँसू; अस्त्र — हथियार
  • असित — काला; अशित — भोथरा
  • अर्घ — जलदान; अर्घ्य — पूजा सामग्री
  • अली — सखी; अलि — भौंरा
  • अवधि — समय; अवधी — अवध की भाषा
  • आरति — दुःख; आरती — धूप-दीप
  • आहूत — निमंत्रित; आहुति — होम/हवन
  • आसन — बैठने की वस्तु; आसन्न — निकट
  • आवास — मकान; आभास — झलक
  • आभरण — आभूषण; आमरण — मरण तक
  • आर्त — दुखी; आर्द्र — गीला
  • ऋत — सत्य; ऋतु — मौसम
  • कुल — वंश; कूल — किनारा
  • कंगाल — दरिद्र; कंकाल — हड्डी का ढाँचा
  • कृति — रचना; कृती — निपुण
  • कान्ति — चमक; क्रान्ति — उलटफेर
  • कलि — कलयुग; कली — अधखिला फूल
  • कपिश — मटमैला; कपीश — वानरों का राजा
  • कुच — स्तन; कूच — प्रस्थान
  • कटिबन्ध — कमरबन्ध; कटिबद्ध — तैयार/तत्पर
  • छात्र — विद्यार्थी; क्षात्र — क्षत्रिय
  • गण — समूह; गण्य — गिनने योग्य
  • चषक — प्याला; चसक — लत
  • चक्रवाक — चकवा पक्षी; चक्रवात — तूफान
  • जलद — बादल; जलज — कमल
  • तरणी — नाव; तरुणी — युवती
  • तनु — दुबला; तनू — पुत्र
  • दारु — लकड़ी; दारू — शराब
  • दीप — दिया; द्वीप — टापू
  • दिवा — दिन; दीवा — दीपक
  • देव — देवता; दैव — भाग्य
  • नत — झुका हुआ; नित — प्रतिदिन
  • नीर — जल; नीड़ — घोंसला
  • नियत — निश्चित; नियति — भाग्य
  • नगर — शहर; नागर — चतुर
  • निशित — तीक्ष्ण; निशीथ — आधी रात
  • नमित — झुका हुआ; निमित — हेतु
  • नीरद — बादल; नीरज — कमल
  • निसान — झंडा; निशान — चिह्न
  • निशाकर — चन्द्रमा; निशाचर — राक्षस
  • पुरुष — आदमी; परुष — कठोर
  • प्रसाद — कृपा; प्रासाद — महल
  • परिणाम — नतीजा; परिमाण — मात्रा
  • अचार — आम, नींबू का अचार; आचार — आचरण
  • अनु — पीछे; अणु — कण
  • अपेक्षा — उम्मीद, तुलना में; उपेक्षा — अनादर
  • अवध्य — न मारने योग्य; अवध — एक प्रदेश
  • ओर — तरफ; और — तथा
  • कपट — धोखा; कपाट — दरवाजा
  • कृपण — कंजूस; कृपाण — तलवार
  • कोटि — करोड़; कटि — कमर
  • कोश — शब्द-भंडार; कोष — खजाना
  • क्षति — नुकसान; क्षिति — धरती
  • चिर — देर; चीर — वस्त्र
  • तरंग — लहर; तुरंग — घोड़ा
  • दिन — दिवस; दीन — गरीब
  • दिशा — तरफ; दशा — हालत
  • द्वार — दरवाजा; द्वारा — के माध्यम से
  • धन — दौलत/सम्पत्ति; धान — चावल
  • नादान — नासमझ; निदान — उपचार/समाधान
  • पका — पका हुआ; पक्का — मजबूत
  • प्रणय — प्यार; परिणय — विवाह
  • प्रमाण — सबूत; प्रणाम — नमस्कार
  • बालू — रेत; भालू — रीछ
  • शोक — दुःख; शौक — पसन्द या चाव
  • श्याम — काला; शाम — संध्या
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • सुनने में समान किन्तु भिन्न अर्थ रखने वाले शब्द श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं।
  • ‘श्रुतिसमभिन्नार्थक’ का निर्माण श्रुति + सम + भिन्न + अर्थ से हुआ है।
  • ऐसे शब्दों में उच्चारण की समानता के कारण वर्तनी और अर्थ की सही पहचान आवश्यक है।
  • अंस–अंश, दिन–दीन, देव–दैव, धन–धान और शोक–शौक इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

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Topic 6 वाक्यांश के लिए एक शब्द

वाक्यांश के लिए एक शब्द

वाक्यांश के लिए एक शब्द

कम-से-कम शब्दों में अधिक-से-अधिक भाव या विचार व्यक्त करना अच्छे लेखक और वक्ता का गुण माना जाता है। इसके लिए ऐसे शब्दों का ज्ञान आवश्यक है जो किसी पूरे वाक्यांश या शब्द-समूह का अर्थ एक ही शब्द में व्यक्त कर सकें।

वाक्यांश के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग करने से भाषा में कसावट आती है और अभिव्यक्ति अधिक प्रभावशाली बनती है।

इस प्रकार के अनेक शब्दों की रचना उपसर्ग, प्रत्यय और समास की सहायता से की जाती है।

प्रमुख वाक्यांश और उनके लिए एक शब्द

  • जहाँ पहुँचा न जा सके — अगम्य
  • जिसे सबसे पहले गिनना उचित हो — अग्रगण्य
  • दोपहर के बाद का समय — अपराह्न
  • जिसका जन्म पहले हुआ हो — अग्रज
  • जिसके पास कुछ न हो — अकिंचन
  • जिसका जन्म बाद/पीछे हुआ हो — अनुज
  • जिसकी आशा न की गई हो — अप्रत्याशित
  • जिसकी उपमा न हो — अनुपमेय
  • जो कामना रहित हो — निष्काम
  • जिसका मूल्य न हो — अमूल्य
  • जो सबको एक सा समझता हो — समदर्शी
  • जो दूर की न देखे/सोचे — अदूरदर्शी
  • जो न जाना जा सके — अज्ञेय
  • जिसके समान कोई दूसरा न हो — अद्वितीय
  • जिसके आने की कोई तिथि न हो — अतिथि
  • जिसकी गहराई न नापी जा सके — अथाह
  • जो जीता न जा सके — अजेय
  • पहाड़ का ऊपरी भाग — अधित्यका
  • अधिक बढ़ा-चढ़ाकर कहना — अतिशयोक्ति
  • एक व्यक्ति की शासन-सत्ता — अधिनायकवाद
  • जिसे बुलाया न गया हो — अनाहूत
  • जिस पर अभियोग लगाया गया हो — अभियुक्त
  • जिसका परिणाम न जाना जा सके — अपरिमेय
  • जो सबके अन्तःकरण की बात जान सके — अन्तर्यामी
  • जो पढ़ा न जा सके — अवाच्य, अपठनीय
  • जाँघों तक भुजाओं वाला — आजानुबाहु
  • जिसका अनुभव किया जा चुका हो — अनुभूत
  • जो सदा से चला आ रहा हो — चिरन्तन (शाश्वत)
  • ग्रन्थ के बचे हुए अंश, जो प्रायः जोड़े जाते हैं — परिशिष्ट
  • जिसके नीचे रेखाएँ लगाई गई हों — रेखांकित
  • थोड़ा खिला हुआ फूल — मुकुल
  • दूसरे के काम में दखल देना — हस्तक्षेप
  • किसी वस्तु को प्राप्त करने की तीव्र इच्छा — अभीप्सा
  • युद्ध की इच्छा रखने वाला — युयुत्सु
  • खाने की इच्छा — बुभुक्षा
  • सांसारिक वस्तुओं को प्राप्त करने की इच्छा — एषणा
  • पसीने से उत्पन्न जीव — स्वेदज
  • ज्ञान देने वाली देवी — सरस्वती
  • जो पहले कभी न हुआ हो — अभूतपूर्व

वाक्यांश के लिए एक शब्द का महत्त्व

  • लम्बे वाक्यांश को संक्षिप्त रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
  • भाषा में कसावट और स्पष्टता आती है।
  • लेखन और वक्तव्य अधिक प्रभावशाली बनता है।
  • कम शब्दों में अधिक भाव व्यक्त करना सम्भव होता है।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • किसी पूरे वाक्यांश का अर्थ एक शब्द में व्यक्त करने वाले शब्द को वाक्यांश के लिए एक शब्द कहा जाता है।
  • इन शब्दों के प्रयोग से भाषा संक्षिप्त, स्पष्ट और प्रभावशाली बनती है।
  • ऐसे अनेक शब्द उपसर्ग, प्रत्यय और समास की सहायता से बनाए जाते हैं।
  • जहाँ पहुँचा न जा सके—अगम्य, जिसकी उपमा न हो—अनुपमेय और जो जीता न जा सके—अजेय इसके उदाहरण हैं।
  • जिसके समान कोई दूसरा न हो—अद्वितीय तथा जो पहले कभी न हुआ हो—अभूतपूर्व कहलाता है।

अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

‘उत्कर्ष’ शब्द का विलोम है—

व्याख्या: ‘उत्कर्ष’ का विलोम ‘अपकर्ष’ है।
Q 2

‘स्वाधीन’ शब्द का विलोम है—

व्याख्या: ‘स्वाधीन’ का विपरीतार्थक शब्द ‘पराधीन’ है।
Q 3

‘अमृत’ का समानार्थी शब्द है—

व्याख्या: सुधा, अमिय, पीयूष, सोम आदि ‘अमृत’ के पर्यायवाची शब्द हैं।
Q 4

निम्न में से कौन-सा ‘समुद्र’ का पर्यायवाची शब्द नहीं है?

व्याख्या: सागर, सिंधु और रत्नाकर समुद्र के पर्यायवाची हैं, जबकि ‘मरु’ का अर्थ रेगिस्तान है।
Q 5

‘कर’ शब्द के अनेक अर्थों में कौन-सा सम्मिलित नहीं है?

व्याख्या: ‘कर’ के अर्थ टैक्स, हाथी की सूँड़, हाथ और किरण हैं।
Q 6

‘अम्बर’ शब्द के अर्थ हैं—

व्याख्या: ‘अम्बर’ एक अनेकार्थी शब्द है, जिसके अर्थ बादल, आकाश और वस्त्र हैं।
Q 7

तुक वाले शब्द कहलाते हैं—

व्याख्या: जिन शब्दों के उच्चारण में तुक या समान लय होती है, उन्हें तुकान्त शब्द कहते हैं।
Q 8

निम्न में से कौन-सा तुकान्त शब्दों का सही जोड़ा है?

व्याख्या: ‘रात—बात’ के अन्त में समान तुक आती है, इसलिए ये तुकान्त शब्द हैं।
Q 9

सुनने में समान किन्तु भिन्न अर्थ वाले शब्द कहलाते हैं—

व्याख्या: सुनने या उच्चारण में समान प्रतीत होने वाले किन्तु अलग अर्थ रखने वाले शब्द श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं।
Q 10

‘दिन’ और ‘दीन’ के सही अर्थ क्रमशः हैं—

व्याख्या: ‘दिन’ का अर्थ दिवस तथा ‘दीन’ का अर्थ गरीब होता है।
Q 11

‘प्रमाण’ और ‘प्रणाम’ के सही अर्थ क्रमशः हैं—

व्याख्या: ‘प्रमाण’ का अर्थ सबूत तथा ‘प्रणाम’ का अर्थ नमस्कार है।
Q 12

“जहाँ पहुँचा न जा सके” के लिए एक शब्द है—

व्याख्या: जहाँ पहुँचा न जा सके, उसे ‘अगम्य’ कहा जाता है।
Q 13

“युद्ध की इच्छा रखने वाला” के लिए एक शब्द है—

व्याख्या: युद्ध की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को ‘युयुत्सु’ कहा जाता है।
Q 14

“जो पहले कभी न हुआ हो” के लिए एक शब्द है—

व्याख्या: जो पहले कभी न हुआ हो, उसे ‘अभूतपूर्व’ कहते हैं।
Q 15

“जो सबको एक सा समझता हो” के लिए एक शब्द है—

व्याख्या: जो सभी को समान दृष्टि से देखता या समझता हो, उसे ‘समदर्शी’ कहा जाता है।

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पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 1 के विषय हिन्दी के अध्याय शब्दों की पहचान से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1

तुकान्त शब्द का अर्थ बताते हुए इसको उदाहरण सहित समझाइए।

Q 2 2018

अग्नि, अमृत, गंगा और गुरु के एक-एक समानार्थी शब्द लिखिए।

Q 3 2019

आँख, अश्व, समुद्र और सूर्य के एक-एक समानार्थी शब्द लिखिए।

Q 4 2020

‘सरस्वती’ एवं ‘बसंत’ शब्द के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।

Q 5 2022

विलोम, तुकान्त एवं समानार्थी शब्दों के आशय को उदाहरण सहित समझाइए।

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Practice More Questions

इसी semester और subject के MCQ Tests तथा Previous Year Papers practice करके अपनी तैयारी को और मजबूत बनाइए।

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