त्रिभुज की अवधारणा एवं प्रमुख तथ्य
त्रिभुज का अर्थ
तीन रेखाखण्डों से घिरी हुई समतलीय आकृति को त्रिभुज कहते हैं।
त्रिभुज में तीन भुजाएँ, तीन कोण तथा तीन शीर्ष होते हैं। किन्हीं तीन असंरेख बिन्दुओं को रेखाखण्डों द्वारा मिलाने पर त्रिभुज का निर्माण किया जा सकता है।
उपर्युक्त त्रिभुज ABC में—
- भुजाएँ — AB, BC और CA
- शीर्ष — A, B और C
- कोण — ∠A, ∠B और ∠C
त्रिभुज के अन्तः कोणों का योग
किसी भी त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग सदैव 180° होता है।
∠A + ∠B + ∠C = 180°
यदि किसी त्रिभुज के दो कोण ज्ञात हों, तो तीसरा कोण 180° में से उन दोनों कोणों का योग घटाकर ज्ञात किया जा सकता है।
तीसरा कोण = 180° − (पहला कोण + दूसरा कोण)
उदाहरण
यदि किसी त्रिभुज के दो कोण 45° और 75° हों, तो तीसरा कोण—
तीसरा कोण = 180° − (45° + 75°) = 180° − 120° = 60°
अतः तीसरा कोण 60° होगा।
त्रिभुज का क्षेत्रफल
त्रिभुज के क्षेत्रफल का सामान्य सूत्र है—
त्रिभुज का क्षेत्रफल = 1/2 × आधार × ऊँचाई
यहाँ आधार त्रिभुज की चुनी हुई भुजा तथा ऊँचाई उस आधार पर विपरीत शीर्ष से खींचा गया लम्ब होती है।
क्षेत्रफल की विस्तृत गणनाएँ, हीरोन सूत्र तथा अन्य उदाहरण आगे अलग Topic में पढ़े जाएँगे।
समकोण त्रिभुज
जिस त्रिभुज का एक कोण 90° हो, उसे समकोण त्रिभुज कहते हैं।
समकोण त्रिभुज में भुजाओं के विशेष नाम होते हैं—
- कर्ण — समकोण के सामने की भुजा।
- आधार — समकोण बनाने वाली एक भुजा।
- लम्ब — समकोण बनाने वाली दूसरी भुजा।
चित्र में ∠B = 90° है, इसलिए—
AC = कर्ण BC = आधार AB = लम्ब
पाइथागोरस प्रमेय
समकोण त्रिभुज की तीनों भुजाओं के बीच संबंध को पाइथागोरस प्रमेय द्वारा व्यक्त किया जाता है।
इस प्रमेय के अनुसार—
कर्ण² = आधार² + लम्ब²
अर्थात समकोण त्रिभुज में कर्ण पर बने वर्ग का क्षेत्रफल, शेष दोनों भुजाओं पर बने वर्गों के क्षेत्रफलों के योग के बराबर होता है।
पाइथागोरस प्रमेय से भुजा ज्ञात करना
यदि कर्ण और लम्ब ज्ञात हों, तो आधार—
आधार² = कर्ण² − लम्ब² आधार = √(कर्ण² − लम्ब²)
इसी प्रकार यदि आधार और कर्ण ज्ञात हों—
लम्ब = √(कर्ण² − आधार²)
त्रिभुज की दो भुजाओं का महत्वपूर्ण नियम
किसी भी त्रिभुज में किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से सदैव बड़ा होता है।
यदि त्रिभुज की भुजाएँ a, b और c हों, तो—
a + b > c b + c > a c + a > b
यह नियम यह जाँचने में भी सहायता करता है कि दी गई तीन लंबाइयों से त्रिभुज बनाया जा सकता है या नहीं।
बड़ी भुजा और बड़े कोण का संबंध
यदि किसी त्रिभुज की दो भुजाएँ बराबर न हों, तो बड़ी भुजा के सामने का कोण छोटी भुजा के सामने वाले कोण से बड़ा होता है।
बड़ी भुजा ↔ बड़ा सम्मुख कोण
त्रिभुज का बाह्य कोण
जब त्रिभुज की किसी भुजा को आगे बढ़ाया जाता है, तो त्रिभुज के बाहर बनने वाला कोण बाह्य कोण कहलाता है।
त्रिभुज के भीतर बना संबंधित कोण अन्तः कोण कहलाता है।
बाह्य कोण का महत्वपूर्ण गुण
किसी त्रिभुज का बाह्य कोण उसके सामने स्थित दोनों अन्तः कोणों के योग के बराबर होता है।
बाह्य कोण = सामने के दो अन्तः कोणों का योग
इसके कारण बाह्य कोण उन दोनों सम्मुख अन्तः कोणों में से प्रत्येक से बड़ा होता है।
त्रिभुज के मध्य बिन्दुओं से संबंधित तथ्य
यदि त्रिभुज की दो भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को रेखाखण्ड से मिलाया जाए, तो वह रेखाखण्ड—
- तीसरी भुजा के समान्तर होता है।
- तीसरी भुजा की लंबाई का आधा होता है।
मध्य बिन्दुओं को मिलाने वाला रेखाखण्ड ∥ तीसरी भुजा और उसकी लंबाई = तीसरी भुजा / 2
त्रिभुज से संबंधित प्रमुख तथ्य
- त्रिभुज का बाह्य कोण प्रत्येक सम्मुख अन्तः कोण से बड़ा होता है।
- त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता है।
- बड़ी भुजा के सामने बड़ा कोण होता है।
- समकोण त्रिभुज में कर्ण सबसे बड़ी भुजा होती है।
- त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग 180° होता है।
- समकोण त्रिभुज में कर्ण² = आधार² + लम्ब² होता है।
- दो भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को मिलाने वाला रेखाखण्ड तीसरी भुजा के समान्तर और उसकी आधी लंबाई का होता है।
याद रखने की सरल विधि
3 भुजाएँ + 3 कोण + 3 शीर्ष = त्रिभुज तीनों कोणों का योग = 180° दो भुजाओं का योग > तीसरी भुजा समकोण त्रिभुज: कर्ण² = आधार² + लम्ब² बाह्य कोण = दो सम्मुख अन्तः कोणों का योग
- तीन रेखाखण्डों से घिरी समतलीय आकृति त्रिभुज कहलाती है।
- त्रिभुज में तीन भुजाएँ, तीन शीर्ष और तीन कोण होते हैं।
- त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग 180° होता है।
- त्रिभुज का क्षेत्रफल 1/2 × आधार × ऊँचाई होता है।
- समकोण त्रिभुज में समकोण के सामने वाली भुजा कर्ण कहलाती है और वही सबसे बड़ी भुजा होती है।
- पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार कर्ण² = आधार² + लम्ब²।
- त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से सदैव बड़ा होता है।
- बड़ी भुजा के सामने का कोण छोटी भुजा के सामने के कोण से बड़ा होता है।
- किसी भुजा को बढ़ाने पर बाहर बनने वाला कोण बाह्य कोण कहलाता है।
- बाह्य कोण सामने स्थित दोनों अन्तः कोणों के योग के बराबर होता है।
- दो भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को मिलाने वाला रेखाखण्ड तीसरी भुजा के समान्तर तथा उसकी आधी लंबाई का होता है।
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त्रिभुजों का वर्गीकरण
त्रिभुजों का वर्गीकरण
त्रिभुजों का वर्गीकरण मुख्यतः दो आधारों पर किया जाता है—
- कोणों के आधार पर
- भुजाओं के आधार पर
त्रिभुजों का वर्गीकरण 1. कोणों के आधार पर 2. भुजाओं के आधार पर
1. कोणों के आधार पर त्रिभुजों का वर्गीकरण
कोणों के आधार पर त्रिभुज तीन प्रकार के होते हैं—
- समकोण त्रिभुज
- अधिककोण त्रिभुज
- न्यूनकोण त्रिभुज
समकोण त्रिभुज
जिस त्रिभुज का एक कोण 90° का हो, उसे समकोण त्रिभुज कहते हैं।
समकोण त्रिभुज में—
- 90° के सामने वाली भुजा कर्ण कहलाती है।
- जिस भुजा पर समकोण स्थित होता है, उसे आधार कहा जाता है।
- समकोण बनाने वाली दूसरी भुजा लम्ब कहलाती है।
यदि ∠ABC = 90° है, तो ΔABC एक समकोण त्रिभुज है।
अधिककोण त्रिभुज
जिस त्रिभुज का एक कोण 90° से अधिक हो, उसे अधिककोण त्रिभुज कहते हैं।
पाठ्यपुस्तक के उदाहरण में ΔABC में—
∠ABC = 120°
है। चूँकि 120° का कोण 90° से अधिक है, इसलिए यह अधिककोण त्रिभुज है।
न्यूनकोण त्रिभुज
जिस त्रिभुज के सभी कोण 90° से कम हों, उसे न्यूनकोण त्रिभुज कहते हैं।
इस प्रकार के त्रिभुज में—
∠A < 90° ∠B < 90° ∠C < 90°
अर्थात तीनों कोण न्यून कोण होते हैं।
कोणों के आधार पर तीनों त्रिभुजों में अंतर
| त्रिभुज | मुख्य पहचान |
|---|---|
| समकोण त्रिभुज | एक कोण = 90° |
| अधिककोण त्रिभुज | एक कोण > 90° |
| न्यूनकोण त्रिभुज | तीनों कोण < 90° |
2. भुजाओं के आधार पर त्रिभुजों का वर्गीकरण
भुजाओं के आधार पर त्रिभुज भी तीन प्रकार के होते हैं—
- समबाहु त्रिभुज
- समद्विबाहु त्रिभुज
- विषमबाहु त्रिभुज
समबाहु त्रिभुज
जिस त्रिभुज की तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं, उसे समबाहु त्रिभुज कहते हैं।
समबाहु त्रिभुज की तीनों भुजाएँ समान होने के साथ-साथ उसके तीनों कोण भी बराबर होते हैं।
AB = BC = CA और ∠A = ∠B = ∠C = 60°
समबाहु त्रिभुज की मुख्य विशेषताएँ
- तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं।
- तीनों कोण बराबर होते हैं।
- प्रत्येक कोण का माप 60° होता है।
समद्विबाहु त्रिभुज
जिस त्रिभुज की केवल दो भुजाएँ समान होती हैं, उसे समद्विबाहु त्रिभुज कहते हैं।
समद्विबाहु त्रिभुज में समान भुजाओं के सामने स्थित कोण भी बराबर होते हैं।
यदि ΔABC में—
AB = AC
तो—
∠ABC = ∠ACB
समद्विबाहु त्रिभुज की मुख्य विशेषताएँ
- दो भुजाएँ बराबर होती हैं।
- तीसरी भुजा अलग हो सकती है।
- समान भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं।
विषमबाहु त्रिभुज
जिस त्रिभुज की तीनों भुजाएँ असमान होती हैं, उसे विषमबाहु त्रिभुज कहते हैं।
विषमबाहु त्रिभुज में कोई भी दो भुजाएँ बराबर नहीं होतीं और उसके कोण भी सामान्यतः अलग-अलग माप के होते हैं।
AB ≠ BC ≠ CA
विषमबाहु त्रिभुज की मुख्य विशेषताएँ
- तीनों भुजाएँ अलग-अलग लंबाई की होती हैं।
- कोई दो भुजाएँ समान नहीं होतीं।
- कोई भी दो कोण समान होना आवश्यक नहीं है।
भुजाओं के आधार पर तीनों त्रिभुजों में अंतर
| त्रिभुज | भुजाओं की स्थिति | विशेष तथ्य |
|---|---|---|
| समबाहु | तीनों भुजाएँ समान | तीनों कोण 60° |
| समद्विबाहु | दो भुजाएँ समान | समान भुजाओं के सामने के कोण समान |
| विषमबाहु | तीनों भुजाएँ असमान | भुजाएँ और कोण समान नहीं होते |
एक नज़र में पूरा वर्गीकरण
कोणों के आधार पर एक कोण = 90° → समकोण त्रिभुज एक कोण > 90° → अधिककोण त्रिभुज तीनों कोण < 90° → न्यूनकोण त्रिभुज भुजाओं के आधार पर 3 भुजाएँ बराबर → समबाहु त्रिभुज 2 भुजाएँ बराबर → समद्विबाहु त्रिभुज 3 भुजाएँ असमान → विषमबाहु त्रिभुज
याद रखने की सरल विधि
कोण देखें → 90°, >90°, सभी <90° भुजाएँ देखें → 3 समान, 2 समान, कोई समान नहीं
- त्रिभुजों का वर्गीकरण कोणों और भुजाओं के आधार पर किया जाता है।
- एक कोण 90° हो तो वह समकोण त्रिभुज है।
- एक कोण 90° से अधिक हो तो वह अधिककोण त्रिभुज है।
- तीनों कोण 90° से कम हों तो वह न्यूनकोण त्रिभुज है।
- तीनों भुजाएँ बराबर हों तो वह समबाहु त्रिभुज है।
- समबाहु त्रिभुज के तीनों कोण बराबर तथा प्रत्येक 60° का होता है।
- दो भुजाएँ बराबर हों तो वह समद्विबाहु त्रिभुज है।
- समद्विबाहु त्रिभुज की समान भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं।
- तीनों भुजाएँ असमान हों तो वह विषमबाहु त्रिभुज है।
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त्रिभुज के प्रमुख केन्द्र एवं अंग
त्रिभुज के प्रमुख केन्द्र
त्रिभुज में कुछ विशेष रेखाएँ एक निश्चित बिन्दु पर मिलती हैं। इन प्रतिच्छेदन बिन्दुओं के आधार पर त्रिभुज के चार प्रमुख केन्द्र होते हैं—
- केन्द्रक
- अन्तःकेन्द्र
- परिकेन्द्र
- लम्ब केन्द्र
1. केन्द्रक
त्रिभुज की तीनों माध्यिकाओं के प्रतिच्छेदन बिन्दु को उस त्रिभुज का केन्द्रक कहते हैं।
चित्र में P, M और N क्रमशः भुजाओं AB, AC और BC के मध्य बिन्दु हैं। इसलिए AN, BM और CP त्रिभुज की माध्यिकाएँ हैं। ये तीनों माध्यिकाएँ O बिन्दु पर मिलती हैं।
AN, BM और CP = माध्यिकाएँ इनका प्रतिच्छेदन बिन्दु O = केन्द्रक
अर्थात—
तीनों माध्यिकाओं का मिलन → केन्द्रक
2. अन्तःकेन्द्र
त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों की समद्विभाजक रेखाएँ जिस बिन्दु पर मिलती हैं, वह बिन्दु उस त्रिभुज का अन्तःकेन्द्र कहलाता है।
चित्र में A, B और C कोणों के समद्विभाजक O बिन्दु पर मिलते हैं। इसलिए O त्रिभुज ABC का अन्तःकेन्द्र है।
अन्तःकेन्द्र O से त्रिभुज की तीनों भुजाओं पर डाले गए लम्ब क्रमशः OD, OQ और OR हैं। इनकी लंबाइयाँ समान होती हैं।
OD = OQ = OR
O को केन्द्र तथा OD, OQ या OR में से किसी एक को त्रिज्या मानकर खींचा गया वृत्त त्रिभुज की तीनों भुजाओं को स्पर्श करता है। इस वृत्त को अन्तःवृत्त कहते हैं।
अन्तःवृत्त त्रिभुज की भुजाओं को काटता नहीं है, बल्कि प्रत्येक भुजा को केवल एक बिन्दु पर स्पर्श करता है।
अन्तः कोणों के समद्विभाजकों का मिलन → अन्तःकेन्द्र अन्तःकेन्द्र से तीनों भुजाओं की दूरी → समान इसी दूरी को त्रिज्या मानने पर → अन्तःवृत्त
3. परिकेन्द्र
त्रिभुज की तीनों भुजाओं के लम्ब अर्द्धकों के प्रतिच्छेदन बिन्दु को उस त्रिभुज का परिकेन्द्र कहते हैं।
लम्ब अर्द्धक किसी भुजा को उसके मध्य बिन्दु पर 90° के कोण पर काटता है।
चित्र में ON, OM तथा OP क्रमशः त्रिभुज ABC की भुजाओं के लम्ब अर्द्धक हैं और ये O पर मिलते हैं। अतः O परिकेन्द्र है।
परिकेन्द्र O से त्रिभुज के तीनों शीर्ष A, B तथा C की दूरी बराबर होती है।
OA = OB = OC
O को केन्द्र तथा OA, OB या OC को त्रिज्या मानकर बनाया गया वृत्त तीनों शीर्ष A, B और C से होकर गुजरता है। इस वृत्त को त्रिभुज का परिवृत्त कहते हैं।
भुजाओं के लम्ब अर्द्धकों का मिलन → परिकेन्द्र OA = OB = OC → परिवृत्त की त्रिज्याएँ
4. लम्ब केन्द्र
किसी त्रिभुज के शीर्ष बिन्दुओं से उनकी सम्मुख भुजाओं पर डाले गए लम्बों के प्रतिच्छेदन बिन्दु को उस त्रिभुज का लम्ब केन्द्र कहते हैं।
चित्र में—
AM ⟂ BC BN ⟂ AC CP ⟂ AB
ये तीनों लम्ब O बिन्दु पर मिलते हैं। इसलिए O त्रिभुज ABC का लम्ब केन्द्र है।
यहाँ प्रत्येक लम्ब अपनी संबंधित सम्मुख भुजा को 90° पर काटता है और तीनों लम्ब एक ही बिन्दु O पर मिलते हैं।
तीनों शीर्षों से सम्मुख भुजाओं पर खींचे गए लम्ब ↓ एक बिन्दु पर मिलते हैं ↓ लम्ब केन्द्र
चारों प्रमुख केन्द्रों में अंतर
| केन्द्र | किन रेखाओं के मिलने से बनता है? |
|---|---|
| केन्द्रक | तीनों माध्यिकाएँ |
| अन्तःकेन्द्र | तीनों अन्तः कोणों के समद्विभाजक |
| परिकेन्द्र | तीनों भुजाओं के लम्ब अर्द्धक |
| लम्ब केन्द्र | तीनों शीर्षों से सम्मुख भुजाओं पर खींचे गए लम्ब |
त्रिभुज के अंग
पाठ्यपुस्तक में त्रिभुज के प्रमुख अंगों के रूप में भुजा, माध्यिका और ऊँचाई का वर्णन किया गया है।
1. भुजा
जिन सरल रेखाखण्डों से त्रिभुज का निर्माण होता है, उन्हें त्रिभुज की भुजाएँ कहते हैं।
ΔABC में—
AB, BC और AC = त्रिभुज की भुजाएँ
आधार कोण एवं शीर्ष कोण
यदि त्रिभुज की एक भुजा को आधार माना जाए, तो आधार के दोनों सिरों पर बने कोण आधार कोण तथा आधार के सामने वाले शीर्ष पर बना कोण शीर्ष कोण कहलाता है।
यदि ΔABC में BC को आधार माना जाए, तो—
BC = आधार ∠B और ∠C = आधार कोण ∠A = शीर्ष कोण
2. माध्यिका
त्रिभुज के किसी शीर्ष से उसकी सम्मुख भुजा के मध्य बिन्दु को मिलाने वाला रेखाखण्ड माध्यिका कहलाता है।
यदि ΔABC में D, भुजा BC का मध्य बिन्दु है, तो—
BD = DC
और A को D से मिलाने वाला रेखाखण्ड AD त्रिभुज की माध्यिका होगा।
माध्यिका त्रिभुज को दो भागों में बाँटती है। माध्यिका के लिए आवश्यक है कि वह सम्मुख भुजा के मध्य बिन्दु से मिले।
3. ऊँचाई
त्रिभुज के किसी शीर्ष से उसकी सम्मुख भुजा पर खींचा गया लम्ब, उस त्रिभुज की ऊँचाई कहलाता है।
यदि A से BC पर AD इस प्रकार खींचा जाए कि—
AD ⟂ BC
तो AD त्रिभुज ABC की ऊँचाई है।
माध्यिका और ऊँचाई में अंतर
| माध्यिका | ऊँचाई |
|---|---|
| शीर्ष को सम्मुख भुजा के मध्य बिन्दु से मिलाती है | शीर्ष से सम्मुख भुजा पर लम्ब खींची जाती है |
| मध्य बिन्दु आवश्यक है | 90° का कोण आवश्यक है |
| लम्ब होना आवश्यक नहीं है | सम्मुख भुजा पर लम्ब होती है |
| तीनों माध्यिकाएँ केन्द्रक पर मिलती हैं | तीनों ऊँचाइयाँ लम्ब केन्द्र पर मिलती हैं |
एक नज़र में पहचान
तीनों माध्यिकाएँ → केन्द्रक तीनों कोण समद्विभाजक → अन्तःकेन्द्र तीनों लम्ब अर्द्धक → परिकेन्द्र तीनों शीर्षों से खींचे लम्ब → लम्ब केन्द्र शीर्ष → सम्मुख भुजा का मध्य बिन्दु = माध्यिका शीर्ष → सम्मुख भुजा पर 90° = ऊँचाई
- तीनों माध्यिकाओं के प्रतिच्छेदन बिन्दु को केन्द्रक कहते हैं।
- तीनों अन्तः कोणों के समद्विभाजकों के प्रतिच्छेदन बिन्दु को अन्तःकेन्द्र कहते हैं।
- अन्तःकेन्द्र से तीनों भुजाओं की लम्बवत दूरियाँ समान होती हैं।
- अन्तःकेन्द्र को केन्द्र मानकर बना अन्तःवृत्त तीनों भुजाओं को स्पर्श करता है।
- तीनों भुजाओं के लम्ब अर्द्धकों के प्रतिच्छेदन बिन्दु को परिकेन्द्र कहते हैं।
- परिकेन्द्र से तीनों शीर्षों की दूरी समान होती है— OA = OB = OC।
- परिकेन्द्र को केन्द्र मानकर बनाया गया परिवृत्त तीनों शीर्षों से होकर गुजरता है।
- तीनों शीर्षों से सम्मुख भुजाओं पर खींचे गए लम्बों के प्रतिच्छेदन बिन्दु को लम्ब केन्द्र कहते हैं।
- त्रिभुज का निर्माण करने वाले सरल रेखाखण्ड उसकी भुजाएँ हैं।
- शीर्ष को सम्मुख भुजा के मध्य बिन्दु से मिलाने वाला रेखाखण्ड माध्यिका कहलाता है।
- शीर्ष से सम्मुख भुजा पर खींचा गया लम्ब त्रिभुज की ऊँचाई कहलाता है।
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त्रिभुज का क्षेत्रफल, पाइथागोरस प्रमेय एवं हीरोन सूत्र
त्रिभुज का क्षेत्रफल
यदि किसी त्रिभुज का आधार और उस आधार पर खींची गई ऊँचाई ज्ञात हो, तो उसका क्षेत्रफल निम्न सूत्र से ज्ञात किया जाता है—
त्रिभुज का क्षेत्रफल = 1/2 × आधार × ऊँचाई
उदाहरण 1 — आधार और ऊँचाई से क्षेत्रफल
एक त्रिभुज का आधार 10 सेमी तथा ऊँचाई 13 सेमी है। उसका क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
क्षेत्रफल = 1/2 × आधार × ऊँचाई = 1/2 × 10 × 13 = 130/2 = 65 सेमी²
अतः त्रिभुज का क्षेत्रफल 65 सेमी² है।
हीरोन सूत्र
जब किसी त्रिभुज की तीनों भुजाएँ ज्ञात हों, लेकिन उसकी ऊँचाई ज्ञात न हो, तो उसका क्षेत्रफल हीरोन सूत्र की सहायता से निकाला जा सकता है।
यदि त्रिभुज की तीन भुजाएँ a, b और c हों, तो सबसे पहले उसका अर्धपरिमाप s ज्ञात करते हैं—
s = (a + b + c) / 2
इसके बाद क्षेत्रफल—
क्षेत्रफल = √[s(s − a)(s − b)(s − c)]
उदाहरण 2 — भुजाएँ 8 सेमी, 10 सेमी और 6 सेमी
एक त्रिभुज की तीन भुजाएँ 8 सेमी, 10 सेमी और 6 सेमी हैं। उसका क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
सबसे पहले अर्धपरिमाप—
s = (8 + 10 + 6) / 2 = 24/2 = 12
हीरोन सूत्र से—
क्षेत्रफल = √[12(12 − 8)(12 − 10)(12 − 6)] = √[12 × 4 × 2 × 6] = √576 = 24 सेमी²
अतः त्रिभुज का क्षेत्रफल 24 सेमी² है।
एक और उदाहरण — भुजाएँ 12 सेमी, 8 सेमी और 6 सेमी
s = (12 + 8 + 6) / 2 = 26/2 = 13
क्षेत्रफल = √[13(13 − 12)(13 − 8)(13 − 6)] = √[13 × 1 × 5 × 7] = √455 ≈ 21.33 सेमी²
समकोण त्रिभुज और पाइथागोरस प्रमेय
समकोण त्रिभुज में समकोण के सामने वाली भुजा कर्ण कहलाती है। कर्ण सबसे बड़ी भुजा होती है।
पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार—
कर्ण² = आधार² + लम्ब²
यदि कर्ण और लम्ब दिए हों, तो आधार—
आधार = √(कर्ण² − लम्ब²)
यदि कर्ण और आधार दिए हों, तो लम्ब—
लम्ब = √(कर्ण² − आधार²)
उदाहरण 3 — कर्ण 5 सेमी और लम्ब 3 सेमी
एक समकोण त्रिभुज में कर्ण 5 सेमी और लम्ब 3 सेमी है। पहले आधार ज्ञात करेंगे—
आधार = √(कर्ण² − लम्ब²) = √(5² − 3²) = √(25 − 9) = √16 = 4 सेमी
अब त्रिभुज का क्षेत्रफल—
क्षेत्रफल = 1/2 × 4 × 3 = 6 सेमी²
अतः आधार 4 सेमी और क्षेत्रफल 6 सेमी² है।
आधार और ऊँचाई का अनुपात दिया हो
स्रोत में एक समकोण त्रिभुज के आधार और ऊँचाई का अनुपात 3 : 4 तथा क्षेत्रफल 96 सेमी² दिया गया है।
मान लेते हैं—
आधार = 3x ऊँचाई = 4x
क्षेत्रफल के सूत्र से—
1/2 × 3x × 4x = 96 6x² = 96 x² = 16 x = 4
अतः—
आधार = 3 × 4 = 12 सेमी ऊँचाई = 4 × 4 = 16 सेमी
अब पाइथागोरस प्रमेय से कर्ण—
कर्ण² = 12² + 16² = 144 + 256 = 400 कर्ण = 20 सेमी
समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल
समबाहु त्रिभुज की तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं। यदि प्रत्येक भुजा की लंबाई a हो, तो उसका क्षेत्रफल—
समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल = √3/4 × a²
उदाहरण 4 — भुजा 6 सेमी
यदि समबाहु त्रिभुज की एक भुजा 6 सेमी है, तो—
क्षेत्रफल = √3/4 × 6² = √3/4 × 36 = 9√3 ≈ 15.58 सेमी²
अतः क्षेत्रफल लगभग 15.58 सेमी² है।
समबाहु त्रिभुज का परिमाप दिया हो
यदि समबाहु त्रिभुज का परिमाप ज्ञात हो, तो उसकी एक भुजा—
भुजा = परिमाप / 3
स्रोत में समबाहु त्रिभुज का परिमाप 12 सेमी दिया गया है।
3a = 12 a = 4 सेमी
अब क्षेत्रफल—
क्षेत्रफल = √3/4 × a² = √3/4 × 4² = √3/4 × 16 = 4√3 सेमी²
यह प्रश्न स्रोत में 2022 और 2023 के प्रश्न के रूप में दिया गया है।
बीजीय भुजाओं से त्रिभुज का परिमाप
स्रोत में एक त्रिभुज की तीन भुजाएँ क्रमशः (2a − b) सेमी, (a + b) सेमी और (3a − b) सेमी दी गई हैं, जहाँ a = 3 तथा b = 2 है।
त्रिभुज का परिमाप तीनों भुजाओं के योग के बराबर होगा—
परिमाप = (2a − b) + (a + b) + (3a − b)
a = 3 और b = 2 रखने पर—
= (2×3 − 2) + (3 + 2) + (3×3 − 2) = 4 + 5 + 7 = 16 सेमी
अतः त्रिभुज का परिमाप 16 सेमी है। यह प्रश्न स्रोत में 2020 के प्रश्न के रूप में दिया गया है।
कौन-सा सूत्र कब प्रयोग करें?
| दिया गया हो | प्रयोग होने वाला सूत्र |
|---|---|
| आधार और ऊँचाई | 1/2 × आधार × ऊँचाई |
| तीनों भुजाएँ | हीरोन सूत्र |
| समकोण त्रिभुज की दो भुजाएँ | पाइथागोरस प्रमेय |
| समबाहु त्रिभुज की भुजा | √3/4 × (भुजा)² |
| समबाहु त्रिभुज का परिमाप | पहले भुजा = परिमाप ÷ 3 |
मुख्य सूत्र एक साथ
सामान्य त्रिभुज: क्षेत्रफल = 1/2 × आधार × ऊँचाई हीरोन सूत्र: s = (a + b + c) / 2 क्षेत्रफल = √[s(s−a)(s−b)(s−c)] समकोण त्रिभुज: कर्ण² = आधार² + लम्ब² समबाहु त्रिभुज: परिमाप = 3 × भुजा क्षेत्रफल = √3/4 × (भुजा)²
- त्रिभुज का क्षेत्रफल 1/2 × आधार × ऊँचाई होता है।
- तीनों भुजाएँ ज्ञात होने पर क्षेत्रफल निकालने के लिए हीरोन सूत्र का प्रयोग किया जाता है।
- हीरोन सूत्र में पहले अर्धपरिमाप s = (a + b + c)/2 ज्ञात किया जाता है।
- हीरोन सूत्र है— √[s(s−a)(s−b)(s−c)]।
- समकोण त्रिभुज में कर्ण² = आधार² + लम्ब² होता है।
- 8 सेमी, 10 सेमी और 6 सेमी भुजाओं वाले त्रिभुज का क्षेत्रफल 24 सेमी² है।
- कर्ण 5 सेमी और लम्ब 3 सेमी होने पर आधार 4 सेमी तथा क्षेत्रफल 6 सेमी² होता है।
- समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल √3/4 × (भुजा)² होता है।
- 6 सेमी भुजा वाले समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल 9√3 ≈ 15.58 सेमी² है।
- समबाहु त्रिभुज का परिमाप 12 सेमी होने पर उसकी भुजा 4 सेमी तथा क्षेत्रफल 4√3 सेमी² होता है।
आयत — अवधारणा, गुण, परिमाप एवं क्षेत्रफल
आयत
ऐसा चतुर्भुज जिसकी आमने-सामने की भुजाएँ बराबर तथा समान्तर हों और जिसके प्रत्येक कोण का माप 90° हो, आयत कहलाता है।
यदि ABCD एक आयत है, तो—
AB = DC AD = BC ∠A = ∠B = ∠C = ∠D = 90°
आयत के प्रमुख सूत्र
यदि आयत की लंबाई l तथा चौड़ाई b हो, तो—
परिमाप = 2 × (लंबाई + चौड़ाई) क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई विकर्ण = √(लंबाई² + चौड़ाई²)
आयत के अंग
पाठ्यपुस्तक में आयत के प्रमुख अंगों के रूप में आधार, लंबाई, कोण और विकर्ण का वर्णन किया गया है।
1. आधार
आयत में दो आधार होते हैं। ये आमने-सामने स्थित, आपस में बराबर तथा समान्तर होते हैं।
ABCD आयत में यदि AB और DC को आधार माना जाए, तो—
AB = DC और AB ∥ DC
2. लंबाई
आयत की दूसरी जोड़ी की आमने-सामने वाली भुजाएँ भी बराबर और समान्तर होती हैं।
ABCD आयत में—
AD = BC और AD ∥ BC
3. कोण
आयत में चार कोण होते हैं और प्रत्येक कोण 90° का होता है।
∠A = 90° ∠B = 90° ∠C = 90° ∠D = 90°
अतः चारों कोणों का कुल योग—
90° + 90° + 90° + 90° = 360°
4. विकर्ण
आयत के आमने-सामने के शीर्षों को मिलाने वाले रेखाखण्ड विकर्ण कहलाते हैं।
ABCD आयत में—
AC और BD = विकर्ण
आयत के दोनों विकर्ण उसे त्रिभुजों में बाँटते हैं तथा एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
आयत से संबंधित मुख्य तथ्य
- आमने-सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं।
- आमने-सामने की भुजाएँ समान्तर होती हैं।
- प्रत्येक अन्तः कोण 90° का होता है।
- आयत में दो विकर्ण होते हैं।
- विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
उदाहरण 1 — लंबाई और चौड़ाई से क्षेत्रफल
एक आयत की लंबाई 10 सेमी और चौड़ाई 15 सेमी है। उसका क्षेत्रफल—
क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई = 10 × 15 = 150 सेमी²
अतः आयत का क्षेत्रफल 150 सेमी² है।
उदाहरण 2 — विकर्ण और एक भुजा से क्षेत्रफल
एक आयत की एक भुजा 5 सेमी तथा विकर्ण 13 सेमी है। दूसरी भुजा ज्ञात करने के लिए विकर्ण से बने समकोण त्रिभुज में पाइथागोरस प्रमेय का प्रयोग करेंगे।
विकर्ण² = लंबाई² + चौड़ाई² 13² = 5² + दूसरी भुजा² दूसरी भुजा² = 169 − 25 = 144 दूसरी भुजा = 12 सेमी
अब क्षेत्रफल—
क्षेत्रफल = 12 × 5 = 60 सेमी²
अतः आयत का क्षेत्रफल 60 सेमी² है।
उदाहरण 3 — आयताकार कोर्ट में टुकड़े लगाने का खर्च
एक बैडमिंटन कोर्ट की लंबाई 30 मीटर और चौड़ाई 20 मीटर है। उसमें 3 मीटर × 2 मीटर के लकड़ी के टुकड़े लगाने हैं। एक टुकड़े का मूल्य ₹120 है।
सबसे पहले कोर्ट का क्षेत्रफल—
कोर्ट का क्षेत्रफल = 30 × 20 = 600 मी²
एक लकड़ी के टुकड़े का क्षेत्रफल—
= 3 × 2 = 6 मी²
आवश्यक टुकड़ों की संख्या—
= 600 / 6 = 100
कुल खर्च—
= 100 × ₹120 = ₹12,000
अतः पूरे कोर्ट में लकड़ी लगाने का खर्च ₹12,000 होगा।
उदाहरण 4 — आयताकार पार्क के अंदर सड़क
100 मीटर लंबे और 50 मीटर चौड़े आयताकार पार्क में चारों ओर अंदर की तरफ 3 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाती है।
पार्क का कुल क्षेत्रफल—
= 100 × 50 = 5000 मी²
सड़क दोनों ओर होने के कारण अंदर की लंबाई और चौड़ाई में 6-6 मीटर की कमी होगी।
अंदर की लंबाई = 100 − 6 = 94 मीटर अंदर की चौड़ाई = 50 − 6 = 44 मीटर
अंदर के भाग का क्षेत्रफल—
= 94 × 44 = 4136 मी²
अतः सड़क का क्षेत्रफल—
= 5000 − 4136 = 864 मी²
यदि सड़क बनवाने का खर्च ₹50 प्रति वर्ग मीटर हो, तो—
कुल खर्च = 864 × 50 = ₹43,200
अतः सड़क बनवाने का कुल खर्च ₹43,200 होगा।
उदाहरण 5 — क्षेत्रफल से चौड़ाई ज्ञात करना
एक आयताकार गत्ते का क्षेत्रफल 117 सेमी² तथा लंबाई 13 सेमी है।
क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई 117 = 13 × चौड़ाई चौड़ाई = 117 / 13 = 9 सेमी
अतः गत्ते की चौड़ाई 9 सेमी है। यह प्रश्न स्रोत में 2018 के प्रश्न के रूप में दिया गया है।
उदाहरण 6 — लंबाई और चौड़ाई का अनुपात
एक आयताकार बगीचे की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 5 : 3 है तथा उसका क्षेत्रफल 1500 वर्ग फीट है।
मान लेते हैं—
लंबाई = 5x चौड़ाई = 3x
क्षेत्रफल से—
5x × 3x = 1500 15x² = 1500 x² = 100 x = 10
अतः—
लंबाई = 5 × 10 = 50 फीट चौड़ाई = 3 × 10 = 30 फीट
बगीचे का परिमाप—
= 2(50 + 30) = 2 × 80 = 160 फीट
यदि तार का मूल्य ₹12 प्रति फीट हो, तो—
कुल खर्च = 160 × 12 = ₹1920
अतः चारों ओर तार लगाने का खर्च ₹1920 होगा। यह प्रश्न स्रोत में 2023 का है।
उदाहरण 7 — दशमलव माप वाला आयत
यदि आयत की लंबाई 6.0 सेमी और चौड़ाई 2.5 सेमी हो, तो—
क्षेत्रफल = 6.0 × 2.5 = 15 सेमी²
अतः क्षेत्रफल 15 सेमी² है। यह प्रश्न स्रोत में 2020 का है।
उदाहरण 8 — लंबाई और परिमाप से क्षेत्रफल
एक आयत की लंबाई 50 मीटर तथा परिमाप 180 मीटर है। मान लेते हैं कि चौड़ाई x मीटर है।
परिमाप = 2(लंबाई + चौड़ाई) 180 = 2(50 + x) 180 = 100 + 2x 2x = 80 x = 40 मीटर
अतः चौड़ाई 40 मीटर है।
क्षेत्रफल = 50 × 40 = 2000 मी²
अतः आयत का क्षेत्रफल 2000 मी² है। यह प्रश्न स्रोत में 2022 का है।
कौन-सा सूत्र कब प्रयोग करें?
| दिया गया हो | प्रयोग |
|---|---|
| लंबाई और चौड़ाई | क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई |
| चारों ओर की कुल लंबाई | परिमाप = 2(लंबाई + चौड़ाई) |
| एक भुजा और विकर्ण | पाइथागोरस प्रमेय से दूसरी भुजा |
| क्षेत्रफल और एक भुजा | दूसरी भुजा = क्षेत्रफल ÷ दी गई भुजा |
| परिमाप और एक भुजा | 2(l + b) से दूसरी भुजा ज्ञात करें |
मुख्य सूत्र एक साथ
आयत का परिमाप = 2(लंबाई + चौड़ाई) आयत का क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई आयत का विकर्ण = √(लंबाई² + चौड़ाई²) यदि क्षेत्रफल और लंबाई ज्ञात हो: चौड़ाई = क्षेत्रफल / लंबाई
- आयत की आमने-सामने की भुजाएँ बराबर और समान्तर होती हैं।
- आयत का प्रत्येक अन्तः कोण 90° होता है।
- चारों अन्तः कोणों का योग 360° होता है।
- आयत का परिमाप 2 × (लंबाई + चौड़ाई) होता है।
- आयत का क्षेत्रफल लंबाई × चौड़ाई होता है।
- आयत का विकर्ण √(लंबाई² + चौड़ाई²) होता है।
- आयत में दो विकर्ण होते हैं और वे एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
- 5 सेमी भुजा और 13 सेमी विकर्ण वाले आयत की दूसरी भुजा 12 सेमी तथा क्षेत्रफल 60 सेमी² है।
- 117 सेमी² क्षेत्रफल और 13 सेमी लंबाई वाले आयत की चौड़ाई 9 सेमी है।
- 6.0 सेमी × 2.5 सेमी आयत का क्षेत्रफल 15 सेमी² है।
- 50 मीटर लंबाई और 180 मीटर परिमाप वाले आयत की चौड़ाई 40 मीटर तथा क्षेत्रफल 2000 मी² है।
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वर्ग — अवधारणा, गुण, परिमाप एवं क्षेत्रफल
वर्ग
ऐसा चतुर्भुज जिसकी चारों भुजाएँ आपस में बराबर हों तथा प्रत्येक कोण समकोण अर्थात 90° का हो, वर्ग कहलाता है।
यदि ABCD एक वर्ग है, तो—
AB = BC = CD = DA और ∠A = ∠B = ∠C = ∠D = 90°
वर्ग के प्रमुख सूत्र
यदि वर्ग की एक भुजा की लंबाई a हो, तो—
वर्ग का परिमाप = 4 × भुजा = 4a
वर्ग का क्षेत्रफल = भुजा × भुजा = a²
यदि वर्ग का विकर्ण d दिया हो, तो क्षेत्रफल—
क्षेत्रफल = विकर्ण² / 2 = d² / 2
यदि वर्ग की भुजा a दी हो, तो उसका विकर्ण—
विकर्ण = भुजा × √2 = a√2
भुजा और विकर्ण का संबंध
वर्ग का एक विकर्ण उसे दो त्रिभुजों में बाँटता है। वर्ग का प्रत्येक कोण 90° होने के कारण विकर्ण और दो भुजाओं से बने त्रिभुज में पाइथागोरस संबंध लागू किया जा सकता है।
d² = a² + a² = 2a² d = a√2
इसी संबंध से—
d² = 2a² a² = d² / 2 क्षेत्रफल = d² / 2
वर्ग के अंग
पाठ्यपुस्तक में वर्ग के प्रमुख अंगों के रूप में आधार, कोण और विकर्ण बताए गए हैं।
1. आधार / भुजाएँ
वर्ग की चारों भुजाएँ लंबाई में बराबर होती हैं।
ABCD वर्ग में—
AB = BC = CD = DA
साथ ही आमने-सामने की भुजाएँ समान्तर होती हैं—
AB ∥ CD AD ∥ BC
2. कोण
वर्ग में चार कोण होते हैं और प्रत्येक कोण का माप 90° होता है।
∠A = ∠B = ∠C = ∠D = 90°
अतः वर्ग के चारों अन्तः कोणों का योग—
90° + 90° + 90° + 90° = 360°
3. विकर्ण
वर्ग के आमने-सामने के शीर्षों को मिलाने वाले रेखाखण्ड विकर्ण कहलाते हैं।
ABCD वर्ग में—
AC और BD = दो विकर्ण
एक विकर्ण वर्ग को दो बराबर भागों में बाँटता है और दो त्रिभुज बनाता है। दोनों विकर्ण एक-दूसरे को मध्य बिन्दु O पर समद्विभाजित करते हैं।
वर्ग से संबंधित मुख्य तथ्य
- वर्ग की चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।
- आमने-सामने की भुजाएँ समान्तर होती हैं।
- प्रत्येक अन्तः कोण 90° का होता है।
- चारों अन्तः कोणों का योग 360° होता है।
- वर्ग में दो विकर्ण AC और BD होते हैं।
- विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
- एक विकर्ण वर्ग को दो बराबर त्रिभुजों में बाँटता है।
उदाहरण 1 — भुजा 6 सेमी
यदि किसी वर्ग की एक भुजा 6 सेमी है, तो उसका क्षेत्रफल—
क्षेत्रफल = भुजा² = 6² = 36 सेमी²
अतः वर्ग का क्षेत्रफल 36 सेमी² है। यह प्रश्न स्रोत में 2018 का है।
उदाहरण 2 — भुजा 40 सेमी
यदि वर्ग की एक भुजा 40 सेमी हो, तो—
क्षेत्रफल = 40² = 1600 सेमी²
अतः क्षेत्रफल 1600 सेमी² होगा।
भुजा में 10% वृद्धि का क्षेत्रफल पर प्रभाव
यदि वर्ग की प्रत्येक भुजा की लंबाई में 10% की वृद्धि की जाए, तो क्षेत्रफल में वृद्धि 10% नहीं बल्कि 21% होती है।
इसे स्रोत के उदाहरण से समझें। मान लेते हैं प्रारम्भिक भुजा 100 मीटर है।
पुरानी भुजा = 100 मीटर पुराना क्षेत्रफल = 100² = 10,000 मी²
10% वृद्धि के बाद नई भुजा—
नई भुजा = 110 मीटर नया क्षेत्रफल = 110² = 12,100 मी²
क्षेत्रफल में वास्तविक वृद्धि—
= 12,100 − 10,000 = 2,100 मी²
प्रतिशत वृद्धि—
= (2100 / 10000) × 100 = 21%
अतः भुजा में 10% वृद्धि करने पर वर्ग के क्षेत्रफल में 21% वृद्धि होती है।
वर्गाकार टाइल से फर्श ढकना
एक कमरे की लंबाई 15 मीटर 17 सेमी तथा चौड़ाई 9 मीटर 2 सेमी है। पूरे फर्श को बिना काटे समान वर्गाकार टाइलों से ढकना है।
सबसे पहले दोनों मापों को सेमी में बदलते हैं—
15 मीटर 17 सेमी = 1517 सेमी 9 मीटर 2 सेमी = 902 सेमी
सबसे बड़ी ऐसी वर्गाकार टाइल की भुजा दोनों मापों के महत्तम समापवर्तक के बराबर होगी।
1517 और 902 का म.स. = 41 अतः टाइल की भुजा = 41 सेमी
लंबाई की दिशा में टाइलों की संख्या—
1517 / 41 = 37
चौड़ाई की दिशा में टाइलों की संख्या—
902 / 41 = 22
अतः कुल टाइलें—
37 × 22 = 814
अतः कमरे की छत के निचले भाग में कम-से-कम 814 वर्गाकार टाइलें लगेंगी। यह प्रश्न स्रोत में 2020 का है।
आयत और वर्ग का समान क्षेत्रफल
स्रोत के अभ्यास में 8 मीटर लंबाई तथा 2 मीटर चौड़ाई वाले आयत का क्षेत्रफल एक वर्ग के क्षेत्रफल के बराबर दिया गया है।
पहले आयत का क्षेत्रफल—
आयत का क्षेत्रफल = 8 × 2 = 16 मी²
अतः वर्ग का क्षेत्रफल भी 16 मी² होगा।
वर्ग की भुजा² = 16 भुजा = √16 = 4 मीटर
अब वर्ग का परिमाप—
परिमाप = 4 × भुजा = 4 × 4 = 16 मीटर
अतः वर्ग का परिमाप 16 मीटर होगा। यह प्रश्न स्रोत में 2022 का है।
कौन-सा सूत्र कब प्रयोग करें?
| दिया गया हो | प्रयोग |
|---|---|
| एक भुजा | क्षेत्रफल = भुजा² |
| एक भुजा और परिमाप चाहिए | परिमाप = 4 × भुजा |
| भुजा और विकर्ण चाहिए | विकर्ण = भुजा × √2 |
| विकर्ण दिया हो | क्षेत्रफल = विकर्ण² ÷ 2 |
| आयत के बराबर क्षेत्रफल वाला वर्ग | पहले आयत का क्षेत्रफल, फिर वर्ग की भुजा = √क्षेत्रफल |
मुख्य सूत्र एक साथ
चारों भुजाएँ = समान प्रत्येक कोण = 90° परिमाप = 4 × भुजा क्षेत्रफल = भुजा² विकर्ण = भुजा × √2 विकर्ण दिया हो तो: क्षेत्रफल = विकर्ण² / 2
- वर्ग की चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।
- वर्ग का प्रत्येक अन्तः कोण 90° होता है तथा चारों कोणों का योग 360° होता है।
- वर्ग का परिमाप 4 × भुजा होता है।
- वर्ग का क्षेत्रफल भुजा² होता है।
- वर्ग का विकर्ण भुजा × √2 होता है।
- विकर्ण दिया हो तो वर्ग का क्षेत्रफल विकर्ण²/2 होता है।
- वर्ग में दो विकर्ण होते हैं और वे एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
- 6 सेमी भुजा वाले वर्ग का क्षेत्रफल 36 सेमी² है।
- 40 सेमी भुजा वाले वर्ग का क्षेत्रफल 1600 सेमी² है।
- वर्ग की भुजा में 10% वृद्धि करने पर उसके क्षेत्रफल में 21% वृद्धि होती है।
- 15 मीटर 17 सेमी × 9 मीटर 2 सेमी के भाग को बिना काटे ढकने वाली सबसे बड़ी वर्गाकार टाइल की भुजा 41 सेमी तथा टाइलों की संख्या 814 है।
वृत्त — अवधारणा, अंग एवं प्रमुख सूत्र
वृत्त
किसी निश्चित बिन्दु से समान दूरी पर स्थित सभी बिन्दुओं से बनने वाला बन्द वक्र वृत्त कहलाता है। उस निश्चित बिन्दु को वृत्त का केन्द्र कहते हैं।
वृत्त के केन्द्र से उसकी परिधि तक की दूरी सदैव समान होती है। यही दूरी वृत्त की त्रिज्या होती है।
वृत्त के प्रमुख अंग
पाठ्यपुस्तक में वृत्त के मुख्य अंग निम्नलिखित बताए गए हैं—
- केन्द्र
- व्यास
- त्रिज्या
- परिधि
- जीवा
1. केन्द्र
वृत्त के बीच स्थित वह निश्चित बिन्दु, जिससे वृत्त की परिधि पर स्थित सभी बिन्दुओं की दूरी समान होती है, वृत्त का केन्द्र कहलाता है।
2. त्रिज्या
वृत्त के केन्द्र से उसकी परिधि के किसी भी बिन्दु तक की दूरी त्रिज्या कहलाती है। इसे सामान्यतः r से प्रदर्शित किया जाता है।
त्रिज्या = r
एक ही वृत्त की सभी त्रिज्याएँ बराबर होती हैं।
3. व्यास
वृत्त के केन्द्र से होकर गुजरने वाला वह रेखाखण्ड, जिसके दोनों सिरे वृत्त की परिधि पर स्थित हों, व्यास कहलाता है।
व्यास वृत्त को दो बराबर भागों में विभाजित करता है और उसकी लंबाई त्रिज्या की दुगुनी होती है।
व्यास = 2 × त्रिज्या d = 2r
अतः—
त्रिज्या = व्यास / 2 r = d/2
4. परिधि
वृत्त को चारों ओर से घेरने वाली वक्र रेखा की कुल लंबाई को वृत्त की परिधि कहते हैं। इसे वृत्त का परिमाप भी कहा जाता है।
वृत्त की परिधि = 2πr या = πd
जहाँ—
r = त्रिज्या d = व्यास π ≈ 22/7 या π ≈ 3.14
5. जीवा
वृत्त की परिधि पर स्थित किन्हीं दो बिन्दुओं को मिलाने वाला रेखाखण्ड जीवा कहलाता है।
वृत्त की सबसे बड़ी जीवा वह होती है जो उसके केन्द्र से होकर गुजरती है। इसलिए व्यास वृत्त की सबसे बड़ी जीवा होता है।
सबसे बड़ी जीवा = व्यास
वृत्त का क्षेत्रफल
यदि वृत्त की त्रिज्या r हो, तो उसका क्षेत्रफल—
वृत्त का क्षेत्रफल = πr²
अर्धवृत्त
व्यास वृत्त को दो बराबर भागों में बाँटता है। प्रत्येक भाग अर्धवृत्त कहलाता है।
अर्धवृत्त का क्षेत्रफल पूरे वृत्त के क्षेत्रफल का आधा होता है।
अर्धवृत्त का क्षेत्रफल = 1/2 × πr²
अर्धवृत्त की कुल परिमिति में आधी वृत्तीय परिधि के साथ व्यास भी सम्मिलित होता है।
अर्धवृत्त की परिमिति = πr + 2r
चाप की लंबाई
पूरे वृत्त के केन्द्र पर 360° का कोण बनता है। यदि केन्द्र पर θ° का कोण बने, तो उससे संबंधित चाप की लंबाई पूरी परिधि का θ/360 भाग होगी।
चाप की लंबाई = 2πr × θ/360°
इसी प्रकार θ° केन्द्रीय कोण से बने वृत्तीय भाग का क्षेत्रफल—
क्षेत्रफल = πr² × θ/360°
इसे चाप की लंबाई की सहायता से भी लिखा जा सकता है—
क्षेत्रफल = 1/2 × चाप की लंबाई × त्रिज्या
वृत्त के प्रमुख सूत्र एक साथ
| राशि | सूत्र |
|---|---|
| व्यास | 2r |
| त्रिज्या | व्यास ÷ 2 |
| परिधि | 2πr |
| क्षेत्रफल | πr² |
| अर्धवृत्त का क्षेत्रफल | 1/2 πr² |
| अर्धवृत्त की परिमिति | πr + 2r |
| θ° के चाप की लंबाई | 2πr × θ/360° |
उदाहरण 1 — 7.2 सेमी व्यास वाले वृत्त की त्रिज्या
यदि किसी वृत्त का व्यास 7.2 सेमी है, तो—
त्रिज्या = व्यास / 2 = 7.2 / 2 = 3.6 सेमी
अतः वृत्त की त्रिज्या 3.6 सेमी होगी। यह प्रश्न स्रोत में 2016 और 2017 में दिया गया है।
उदाहरण 2 — त्रिज्या 4 सेमी से क्षेत्रफल
यदि किसी वृत्त की त्रिज्या 4 सेमी है, तो—
क्षेत्रफल = πr² = 22/7 × 4² = 22/7 × 16 = 352/7 ≈ 50.28 सेमी²
अतः वृत्त का क्षेत्रफल लगभग 50.28 सेमी² है।
उदाहरण 3 — परिधि 88 सेमी से त्रिज्या
यदि वृत्त की परिधि 88 सेमी है, तो—
2πr = 88
π = 22/7 रखने पर—
2 × 22/7 × r = 88 r = (88 × 7) / 44 = 14 सेमी
अतः त्रिज्या 14 सेमी है।
उदाहरण 4 — पहिए के चक्करों से त्रिज्या
एक पहिया 880 मीटर दूरी तय करने में 10 चक्कर लगाता है।
एक चक्कर में तय दूरी पहिए की परिधि के बराबर होगी—
एक चक्कर की दूरी = 880 / 10 = 88 मीटर
अतः—
2πr = 88 2 × 22/7 × r = 88 r = 14 मीटर
अतः पहिए की त्रिज्या 14 मीटर होगी।
उदाहरण 5 — बस के पहिए के प्रति मिनट चक्कर
बस के एक पहिए की त्रिज्या 140 सेमी है और बस की चाल 60 किमी/घंटा है।
सबसे पहले चाल को मीटर प्रति मिनट में बदलते हैं—
60 किमी/घंटा = 60 × 1000 / 60 = 1000 मीटर/मिनट
त्रिज्या—
140 सेमी = 1.40 मीटर
पहिए की परिधि—
2πr = 2 × 22/7 × 1.40 = 8.8 मीटर
अतः प्रति मिनट चक्करों की संख्या—
= 1000 / 8.8 ≈ 113.63 चक्कर
अर्थात पहिया लगभग 113.63 चक्कर प्रति मिनट लगाएगा।
उदाहरण 6 — 35 सेमी व्यास वाले वृत्त की परिधि
यदि वृत्त का व्यास 35 सेमी है, तो पहले त्रिज्या—
त्रिज्या = व्यास / 2 = 35 / 2 = 17.5 सेमी
अब π = 3.14 लेने पर—
परिधि = 2πr = 2 × 3.14 × 17.5 = 109.9 सेमी ≈ 110 सेमी
अतः वृत्त की परिधि लगभग 110 सेमी है। यह प्रश्न स्रोत में 2019 में दिया गया है।
वृत्त के चित्र से अंगों की पहचान
स्रोत में दिए गए चित्र में A, B और C वृत्त की परिधि पर तथा O उसका केन्द्र है।
त्रिज्याएँ = OA, OB, OC जीवाएँ = AB, AC, BC व्यास = AC केन्द्र = O
यह प्रश्न स्रोत में 2019 में दिया गया है।
उदाहरण 7 — परिधि 22 मीटर से क्षेत्रफल
यदि किसी वृत्त की परिधि 22 मीटर है, तो—
2πr = 22 2 × 22/7 × r = 22 r = 7/2 = 3.5 मीटर
अब वृत्त का क्षेत्रफल—
क्षेत्रफल = πr² = 22/7 × 7/2 × 7/2 = 38.5 मीटर²
अतः वृत्त का क्षेत्रफल 38.5 मीटर² है। यह प्रश्न स्रोत में 2023 में दिया गया है।
कौन-सा सूत्र कब प्रयोग करें?
| दिया गया हो | प्रयोग |
|---|---|
| त्रिज्या और परिधि चाहिए | परिधि = 2πr |
| व्यास | त्रिज्या = व्यास ÷ 2 |
| त्रिज्या और क्षेत्रफल चाहिए | क्षेत्रफल = πr² |
| परिधि दी हो | 2πr = परिधि से पहले r निकालें |
| पहिए की दूरी और चक्कर | एक चक्कर की दूरी = परिधि |
| केन्द्रीय कोण θ° | चाप = 2πr × θ/360° |
मुख्य सूत्र एक साथ
व्यास = 2r त्रिज्या = व्यास / 2 परिधि = 2πr = πd क्षेत्रफल = πr² अर्धवृत्त का क्षेत्रफल = 1/2 πr² अर्धवृत्त की परिमिति = πr + 2r चाप की लंबाई = 2πr × θ/360°
- वृत्त के सभी बिन्दु उसके केन्द्र से समान दूरी पर होते हैं।
- केन्द्र से परिधि तक की दूरी त्रिज्या कहलाती है।
- केन्द्र से होकर गुजरने वाली तथा परिधि के दो बिन्दुओं को मिलाने वाली रेखा व्यास है।
- व्यास त्रिज्या का दुगुना होता है— d = 2r।
- वृत्त की परिधि 2πr तथा क्षेत्रफल πr² होता है।
- परिधि के किन्हीं दो बिन्दुओं को मिलाने वाला रेखाखण्ड जीवा कहलाता है।
- व्यास वृत्त की सबसे बड़ी जीवा होता है।
- अर्धवृत्त का क्षेत्रफल 1/2 πr² होता है।
- 7.2 सेमी व्यास वाले वृत्त की त्रिज्या 3.6 सेमी होती है।
- 88 सेमी परिधि वाले वृत्त की त्रिज्या 14 सेमी होती है।
- 35 सेमी व्यास वाले वृत्त की परिधि लगभग 110 सेमी होती है।
- 22 मीटर परिधि वाले वृत्त का क्षेत्रफल 38.5 मीटर² है।
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