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Home Study Material Semester 1 गणित गुणा, भाग एवं भिन्न पर आधारित विभिन्न संक्रियाएँ
Chapter 2 • गणित

गुणा, भाग एवं भिन्न पर आधारित विभिन्न संक्रियाएँ

UP DELED Semester 1 गणित विषय के इस अध्याय में गुणा एवं भाग की अवधारणा और प्रक्रिया, विभाज्यता के नियम, हासिल एवं शेषफल सहित भाग, भिन्न का अर्थ एवं प्रकार, भिन्नों का जोड़-घटाव, गुणा-भाग, आरोही क्रम, प्रतिलोम तथा चाल-दूरी-समय से संबंधित प्रश्नों का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

8
Topics
15
MCQs
10+
PYQs
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Notes
Topic 1 गुणा की अवधारणा एवं प्रक्रिया

गुणा की अवधारणा एवं प्रक्रिया

गुणा का अर्थ

जब किसी एक संख्या को समान रूप से बार-बार जोड़ा जाता है, तो इस बार-बार जोड़ने की प्रक्रिया को गुणा कहते हैं। इसलिए गुणा को पुनरावृत्त जोड़ का संक्षिप्त रूप भी समझा जा सकता है।

गुणा को × चिह्न द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

जैसे यदि संख्या 2 को चार बार जोड़ा जाए—

2 + 2 + 2 + 2 = 8

इसी को गुणा के रूप में लिखा जा सकता है—

2 × 4 = 8

अर्थात 2 को 4 बार जोड़ने पर 8 प्राप्त होता है।

गुणा से संबंधित प्रमुख पद

गुणा की प्रक्रिया में मुख्य रूप से तीन पदों का प्रयोग किया जाता है—

  • गुण्य— वह संख्या जिसका गुणा किया जाता है अथवा जिसे बार-बार जोड़ा जाता है।
  • गुणक— वह संख्या जिससे गुण्य का गुणा किया जाता है।
  • गुणनफल— गुण्य और गुणक का गुणा करने पर प्राप्त परिणाम।

उदाहरण

7 × 9 = 63

  • 7 = गुण्य
  • 9 = गुणक
  • 63 = गुणनफल

इसी प्रकार—

2 × 4 = 8

यहाँ 2 गुण्य, 4 गुणक तथा 8 गुणनफल है।

पुनरावृत्त जोड़ द्वारा गुणा को समझना

किसी संख्या को जितनी बार जोड़ा जाता है, उसी संख्या को उतनी ही बार गुणा के रूप में लिखा जा सकता है।

उदाहरण के लिए 5 के पहाड़े को पुनरावृत्त जोड़ द्वारा इस प्रकार समझा जा सकता है—

  • 5 = 5 × 1 = 5
  • 5 + 5 = 5 × 2 = 10
  • 5 + 5 + 5 = 5 × 3 = 15
  • 5 + 5 + 5 + 5 = 5 × 4 = 20
  • 5 + 5 + 5 + 5 + 5 = 5 × 5 = 25
  • 5 × 6 = 30
  • 5 × 7 = 35
  • 5 × 8 = 40
  • 5 × 9 = 45
  • 5 × 10 = 50

इस प्रकार किसी संख्या को 1 से 10 तक की संख्याओं से गुणा करके उसका पहाड़ा बनाया जा सकता है।

गुणा की प्रक्रिया

दो संख्याओं का गुणा उसी संख्या के बार-बार जोड़ के बराबर होता है। बड़ी संख्या में वस्तुओं की गणना करते समय बार-बार जोड़ना लंबा हो सकता है, इसलिए गुणा का प्रयोग गणना को सरल और संक्षिप्त बनाता है।

उदाहरण के लिए यदि 5 समूह हैं और प्रत्येक समूह में 3 सेब हैं, तो कुल सेबों की संख्या पुनरावृत्त जोड़ से—

3 + 3 + 3 + 3 + 3 = 15

इसी गणना को गुणा द्वारा—

5 × 3 = 15

अतः कुल सेब = 15

पुनरावृत्त जोड़ और समान समूहों द्वारा गुणा की अवधारणा
पुनरावृत्त जोड़ एवं समान समूहों द्वारा गुणा को समझना

समान समूहों द्वारा गुणा को समझना

गुणा को वस्तुओं के बराबर-बराबर समूह बनाकर भी सरलता से समझा जा सकता है। प्रत्येक समूह में वस्तुओं की संख्या समान रखी जाती है।

जैसे यदि प्रत्येक समूह में 2 पेड़ हों और ऐसे 3 समूह बनाए जाएँ, तो—

2 + 2 + 2 = 6

अर्थात—

2 × 3 = 6

इसी प्रकार यदि 2-2 पेड़ों के 4 समूह हों—

2 + 2 + 2 + 2 = 8

अर्थात—

2 × 4 = 8

इस प्रकार समान समूहों की सहायता से बच्चों को गुणा का अर्थ प्रत्यक्ष रूप से समझाया जा सकता है।

पुनरावृत्त जोड़ द्वारा 2 का पहाड़ा

2 का पहाड़ा समान वस्तुओं के समूह बनाकर धीरे-धीरे सिखाया जा सकता है—

  • 2 × 1 = 2
  • 2 × 2 = 4
  • 2 × 3 = 6
  • 2 × 4 = 8
  • 2 × 5 = 10
  • 2 × 6 = 12
  • 2 × 7 = 14
  • 2 × 8 = 16
  • 2 × 9 = 18
  • 2 × 10 = 20

इस प्रक्रिया में पहली संख्या स्थिर रहती है तथा दूसरी संख्या क्रमशः बढ़ती जाती है।

पंक्तियों और स्तम्भों द्वारा गुणा

वस्तुओं को समान पंक्तियों और स्तम्भों में व्यवस्थित करके भी गुणा को समझा जा सकता है।

यदि 5 कतारें हों और प्रत्येक कतार में 6 वस्तुएँ हों, तो कुल वस्तुएँ—

5 × 6 = 30

अर्थात बार-बार 6 को पाँच बार जोड़ने के स्थान पर सीधे गुणा करके कुल 30 वस्तुएँ ज्ञात की जा सकती हैं।

जिन दो संख्याओं का आपस में गुणा किया जाता है, उन्हें गुणनखण्ड भी कहा जाता है और प्राप्त परिणाम को गुणनफल कहा जाता है।

गुणा से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

1. क्रम बदलने पर गुणनफल नहीं बदलता

गुण्य और गुणक का क्रम बदल देने पर गुणनफल में कोई परिवर्तन नहीं होता।

जैसे—

2 × 3 = 6
3 × 2 = 6

दोनों स्थितियों में गुणनफल 6 ही है।

2. शून्य से गुणा

किसी भी संख्या को 0 से गुणा करने पर गुणनफल सदैव 0 प्राप्त होता है।

जैसे—

2 × 0 = 0
3 × 0 = 0

3. एक से गुणा

किसी संख्या को 1 से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है।

जैसे—

2 × 1 = 2
3 × 1 = 3

गुणा सिखाने में समान समूहों का महत्व

बच्चों को गुणा सिखाते समय पेड़, बीज, चौकोर टुकड़े या अन्य वस्तुओं के समान समूह बनवाए जा सकते हैं। इससे बच्चा पहले वस्तुओं की वास्तविक संख्या देखता है, फिर पुनरावृत्त जोड़ करता है और अंत में उसी स्थिति को गुणा के रूप में लिखना सीखता है।

इस प्रकार—

समान समूह → पुनरावृत्त जोड़ → गुणा

का संबंध स्पष्ट हो जाता है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • किसी संख्या को समान रूप से बार-बार जोड़ने की संक्षिप्त प्रक्रिया को गुणा कहते हैं।
  • गुणा का संकेत × है।
  • गुणा के प्रमुख पद गुण्य, गुणक और गुणनफल हैं।
  • 2 + 2 + 2 + 2 = 8 को 2 × 4 = 8 के रूप में लिखा जा सकता है।
  • समान वस्तुओं के समूह बनाकर गुणा की अवधारणा सरलता से समझी जा सकती है।
  • 5 समूहों में प्रत्येक में 3 वस्तुएँ हों तो कुल वस्तुएँ 5 × 3 = 15 होंगी।
  • गुण्य और गुणक का क्रम बदलने पर गुणनफल नहीं बदलता, जैसे 2 × 3 = 3 × 2 = 6।
  • किसी संख्या को 0 से गुणा करने पर गुणनफल 0 होता है।
  • किसी संख्या को 1 से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
  • पुनरावृत्त जोड़ की सहायता से पहाड़ों का निर्माण और गुणा की अवधारणा समझाई जा सकती है।

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Topic 2 बिना हासिल एवं हासिल वाला गुणा

बिना हासिल एवं हासिल वाला गुणा

बिना हासिल वाला गुणा

जब गुणा करते समय किसी स्थान पर प्राप्त गुणनफल 10 से कम होता है और अगले स्थान पर कोई संख्या हासिल के रूप में नहीं ले जानी पड़ती, तो ऐसे गुणा को बिना हासिल वाला गुणा कहा जाता है।

गुणा करते समय गुण्य को ऊपर और गुणक को नीचे लिखा जाता है। गुणा की प्रक्रिया दाईं ओर अर्थात इकाई के स्थान से प्रारम्भ की जाती है।

बिना हासिल वाले गुणा के मुख्य चरण

  1. गुण्य को ऊपर तथा गुणक को नीचे सही स्थानीय मान पर लिखें।
  2. गुणा दाईं ओर अर्थात इकाई के अंक से प्रारम्भ करें।
  3. इकाई के बाद दहाई, फिर सैकड़ा आदि का गुणा करें।
  4. प्रत्येक प्राप्त अंक को उसके सही स्थान पर लिखें।

उदाहरण 1 — 33 × 3

इकाई के स्थान पर—

3 × 3 = 9

दहाई के स्थान पर—

3 × 3 = 9

   33
×   3
-----
   99

अतः 33 × 3 = 99

उदाहरण 2 — 241 × 2

इकाई—

1 × 2 = 2

दहाई—

4 × 2 = 8

सैकड़ा—

2 × 2 = 4

   241
×    2
------
   482

अतः 241 × 2 = 482

हासिल वाला गुणा

जब किसी स्थान के अंकों का गुणा करने पर प्राप्त संख्या 10 या उससे अधिक हो, तो इकाई का अंक उसी स्थान पर लिखा जाता है और शेष संख्या अगले स्थान पर हासिल के रूप में ले जाई जाती है।

बिना हासिल और हासिल वाले गुणा की प्रक्रिया
बिना हासिल तथा हासिल वाले गुणा की चरणबद्ध प्रक्रिया

उदाहरण 3 — 643 × 6

सबसे पहले इकाई के अंक 3 का गुणा 6 से करेंगे—

3 × 6 = 18

18 में 8 इकाई और 1 दहाई है। इसलिए 8 नीचे लिखेंगे और 1 हासिल ले जाएँगे।

अब दहाई—

4 × 6 = 24

हासिल का 1 जोड़ने पर—

24 + 1 = 25

अतः 5 लिखेंगे और 2 हासिल ले जाएँगे।

अब सैकड़ा—

6 × 6 = 36

हासिल का 2 जोड़ने पर—

36 + 2 = 38

   643
×    6
------
  3858

अतः 643 × 6 = 3858

उदाहरण 4 — 837 × 4

इकाई—

7 × 4 = 28 → 8 लिखेंगे और 2 हासिल।

दहाई—

3 × 4 + 2 = 12 + 2 = 14 → 4 लिखेंगे और 1 हासिल।

सैकड़ा—

8 × 4 + 1 = 32 + 1 = 33

   837
×    4
------
  3348

अतः 837 × 4 = 3348

शून्य वाले अंक का गुणा

यदि किसी संख्या में कोई अंक 0 हो, तो उस स्थान पर उसका गुणनफल भी 0 होता है।

उदाहरण — 302 × 3

   302
×    3
------
   906

क्योंकि—

  • 2 × 3 = 6
  • 0 × 3 = 0
  • 3 × 3 = 9

अतः 302 × 3 = 906

दो अंकों वाली संख्या से गुणा

जब गुणक दो अंकों का हो, तो पहले उसके इकाई वाले अंक से गुण्य का गुणा किया जाता है। इसके बाद दहाई वाले अंक से गुणा किया जाता है। दहाई वाले अंक से प्राप्त दूसरा आंशिक गुणनफल एक स्थान बाईं ओर से लिखा जाता है।

अंत में दोनों आंशिक गुणनफलों को जोड़ दिया जाता है।

उदाहरण 5 — 235 × 24

पहले 235 का गुणा 4 से—

235 × 4 = 940

अब 235 का गुणा दहाई के अंक 2 से—

235 × 2 = 470

यह 2 वास्तव में 20 है, इसलिए दूसरा आंशिक गुणनफल 4700 होगा।

    235
×    24
-------
    940
   4700
-------
   5640

अतः 235 × 24 = 5640

उदाहरण 6 — 1075 × 36

पहले इकाई के अंक 6 से—

1075 × 6 = 6450

अब दहाई के अंक 3 से—

1075 × 3 = 3225

दहाई का स्थान होने के कारण इसका वास्तविक मान 32250 होगा।

    1075
×     36
--------
    6450
   32250
--------
   38700

अतः 1075 × 36 = 38700

तीन अंकों वाली संख्या से गुणा

यदि गुणक तीन अंकों का हो, तो गुण्य का गुणा क्रमशः गुणक के इकाई, दहाई और सैकड़े के अंकों से किया जाता है।

  • इकाई वाले अंक से प्राप्त गुणनफल सामान्य स्थान से लिखा जाता है।
  • दहाई वाले अंक से प्राप्त गुणनफल एक स्थान बाईं ओर से लिखा जाता है।
  • सैकड़े वाले अंक से प्राप्त गुणनफल दो स्थान बाईं ओर से लिखा जाता है।
  • अंत में सभी आंशिक गुणनफलों को जोड़ दिया जाता है।

उदाहरण 7 — 5419 × 312

इकाई के अंक 2 से—

5419 × 2 = 10838

दहाई के अंक 1 से—

5419 × 10 = 54190

सैकड़े के अंक 3 से—

5419 × 300 = 1625700

       5419
×       312
-----------
      10838
      54190
    1625700
-----------
    1690728

अतः 5419 × 312 = 1690728

उदाहरण 8 — 5783 × 237

इकाई के अंक 7 से—

5783 × 7 = 40481

दहाई के अंक 3 से—

5783 × 30 = 173490

सैकड़े के अंक 2 से—

5783 × 200 = 1156600

       5783
×       237
-----------
      40481
     173490
    1156600
-----------
    1370571

अतः 5783 × 237 = 1370571

गुणा करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • गुणा सदैव इकाई के स्थान से प्रारम्भ करें।
  • हासिल को अगले स्थान के गुणनफल में अवश्य जोड़ें।
  • दो अंकों वाले गुणक की दूसरी पंक्ति एक स्थान बाईं ओर से लिखें।
  • तीन अंकों वाले गुणक की तीसरी पंक्ति दो स्थान बाईं ओर से लिखें।
  • अंत में सभी आंशिक गुणनफलों का सही जोड़ करें।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • जिस गुणा में हासिल न ले जाना पड़े, वह बिना हासिल वाला गुणा है।
  • 33 × 3 = 99 तथा 241 × 2 = 482
  • गुणनफल 10 या अधिक आने पर इकाई का अंक नीचे और शेष भाग हासिल के रूप में अगले स्थान पर जाता है।
  • 643 × 6 = 3858 तथा 837 × 4 = 3348
  • दो अंकों वाले गुणक में दूसरी पंक्ति दहाई के स्थान से प्रारम्भ होती है।
  • 235 × 24 = 5640 तथा 1075 × 36 = 38700
  • तीन अंकों वाले गुणक में इकाई, दहाई और सैकड़ा क्रम से गुणा किया जाता है।
  • 5419 × 312 = 1690728
  • 5783 × 237 = 1370571
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Topic 3 भाग की अवधारणा एवं विभाज्यता के नियम

भाग की अवधारणा एवं विभाज्यता के नियम

भाग की अवधारणा

किसी संख्या को बराबर-बराबर भागों या समूहों में बाँटने की गणितीय क्रिया को भाग कहते हैं। भाग को ÷ चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है।

भाग को गुणा की विपरीत प्रक्रिया भी माना जाता है। जिस प्रकार गुणा में किसी संख्या को बार-बार जोड़ा जाता है, उसी प्रकार भाग को किसी संख्या को बार-बार घटाने के रूप में भी समझा जा सकता है।

उदाहरण के लिए यदि 30 वस्तुओं को 5 बराबर समूहों में बाँटना हो, तो—

30 ÷ 5 = 6

अर्थात प्रत्येक समूह में 6 वस्तुएँ आएँगी।

भाग से संबंधित प्रमुख पद

भाग की क्रिया में चार प्रमुख पद होते हैं—

  • भाज्य— वह संख्या जिसका भाग किया जाता है।
  • भाजक— वह संख्या जिससे भाज्य को भाग दिया जाता है।
  • भागफल— भाग करने पर प्राप्त परिणाम को भागफल कहते हैं।
  • शेषफल— भाग करने के बाद बची हुई संख्या को शेषफल कहते हैं।

उदाहरण—

18 ÷ 7 = 2, शेष 4

  • भाज्य = 18
  • भाजक = 7
  • भागफल = 2
  • शेषफल = 4

भाज्य, भाजक, भागफल एवं शेषफल का संबंध

भाग के पदों के बीच निम्न महत्वपूर्ण संबंध होता है—

भाज्य = (भाजक × भागफल) + शेषफल

इसी सूत्र से—

भाज्य − शेषफल = भाजक × भागफल

शेषफल का मान हमेशा भाजक से छोटा होता है। यदि कोई शेष न बचे, तो शेषफल 0 होता है।

भाग से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • किसी संख्या को 1 से भाग देने पर भागफल वही संख्या होता है।
  • किसी संख्या को उसी संख्या से भाग देने पर भागफल 1 होता है।
  • यदि भाज्य भाजक से पूर्णतः विभाजित हो जाए, तो शेषफल 0 होता है।

विभाज्यता का अर्थ

यदि किसी संख्या को दूसरी संख्या से भाग देने पर शेषफल 0 प्राप्त हो, तो पहली संख्या दूसरी संख्या से पूर्णतः विभाज्य कहलाती है।

हर संख्या को वास्तव में भाग देकर जाँच करना आवश्यक नहीं होता। कुछ सरल नियमों की सहायता से यह पता लगाया जा सकता है कि कोई संख्या 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 या 10 से विभाज्य है या नहीं।

2 से 10 तक की संख्याओं से विभाज्यता के नियम
2 से 10 तक विभाज्यता की जाँच के प्रमुख नियम

1. 2 से विभाज्यता का नियम

यदि किसी संख्या के इकाई के स्थान पर 0, 2, 4, 6 या 8 हो, तो वह संख्या 2 से पूर्णतः विभाजित होती है।

जैसे—

  • 6442
  • 5370
  • 7898
  • 754
  • 956

इन सभी संख्याओं का अंतिम अंक सम है, इसलिए ये 2 से विभाज्य हैं।

2. 3 से विभाज्यता का नियम

यदि किसी संख्या के सभी अंकों का योग 3 से पूर्णतः विभाजित हो, तो वह संख्या भी 3 से विभाज्य होती है।

उदाहरण—

95712

अंकों का योग—

9 + 5 + 7 + 1 + 2 = 24

24, 3 से विभाज्य है। अतः 95712 भी 3 से विभाज्य है।

3. 4 से विभाज्यता का नियम

यदि किसी संख्या के अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से पूर्णतः विभाजित हो जाए, तो पूरी संख्या 4 से विभाज्य होती है।

उदाहरण—

संख्या 8975436476 के अंतिम दो अंक 76 हैं।

76 ÷ 4 = 19

अतः 76 पूर्णतः 4 से विभाजित है, इसलिए 8975436476 भी 4 से विभाज्य है।

4. 5 से विभाज्यता का नियम

जिस संख्या के इकाई के स्थान पर 0 या 5 हो, वह संख्या 5 से पूर्णतः विभाज्य होती है।

जैसे—

  • 56325
  • 85320
  • 64585

5. 6 से विभाज्यता का नियम

जो संख्या 2 और 3 दोनों से पूर्णतः विभाज्य हो, वह संख्या 6 से भी विभाज्य होती है।

अर्थात किसी संख्या की 6 से विभाज्यता जाँचने के लिए—

  • पहले देखें कि संख्या 2 से विभाज्य है या नहीं।
  • फिर देखें कि उसके अंकों का योग 3 से विभाज्य है या नहीं।

जैसे—

  • 7560
  • 58614

ये संख्याएँ 2 तथा 3 दोनों से विभाज्य हैं, इसलिए 6 से भी विभाज्य हैं।

6. 7 से विभाज्यता का नियम

किसी संख्या के इकाई अंक का दोगुना करके उसे शेष अंकों से बनी संख्या में से घटाते हैं। यदि प्राप्त संख्या 7 से विभाज्य हो, तो मूल संख्या भी 7 से विभाज्य होती है।

उदाहरण के लिए संख्या 348 लें—

इकाई अंक = 8
8 का दोगुना = 16

अब शेष संख्या 34 में से 16 घटाएँ—

34 − 16 = 18

18, 7 से पूर्णतः विभाजित नहीं होता। अतः 348 भी 7 से विभाज्य नहीं है।

7. 8 से विभाज्यता का नियम

यदि किसी संख्या के अंतिम तीन अंकों से बनी संख्या 8 से पूर्णतः विभाजित हो जाए, तो पूरी संख्या भी 8 से विभाज्य होती है।

उदाहरण—

संख्या 873680 के अंतिम तीन अंक 680 हैं।

680 ÷ 8 = 85

अतः 680 पूर्णतः 8 से विभाजित है। इसलिए 873680 भी 8 से विभाज्य है।

8. 9 से विभाज्यता का नियम

यदि किसी संख्या के सभी अंकों का योग 9 से पूर्णतः विभाजित हो, तो वह संख्या 9 से विभाज्य होती है।

उदाहरण—

संख्या 85491

अंकों का योग—

8 + 5 + 4 + 9 + 1 = 27

27, 9 से पूर्णतः विभाजित होता है। अतः 85491 भी 9 से विभाज्य है।

9. 10 से विभाज्यता का नियम

जिस संख्या के इकाई के स्थान पर 0 हो, वह संख्या 10 से पूर्णतः विभाज्य होती है।

जैसे—

  • 680
  • 450
  • 10000
  • 78640

विभाज्यता के नियम एक नजर में

  • 2 से— अंतिम अंक 0, 2, 4, 6 या 8 हो।
  • 3 से— सभी अंकों का योग 3 से विभाज्य हो।
  • 4 से— अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से विभाज्य हो।
  • 5 से— अंतिम अंक 0 या 5 हो।
  • 6 से— संख्या 2 और 3 दोनों से विभाज्य हो।
  • 7 से— इकाई अंक का दोगुना शेष संख्या से घटाने पर प्राप्त संख्या 7 से विभाज्य हो।
  • 8 से— अंतिम तीन अंकों से बनी संख्या 8 से विभाज्य हो।
  • 9 से— सभी अंकों का योग 9 से विभाज्य हो।
  • 10 से— अंतिम अंक 0 हो।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • किसी संख्या को बराबर भागों में बाँटने की क्रिया को भाग कहते हैं।
  • भाग को गुणा की विपरीत प्रक्रिया माना जाता है।
  • भाग के चार प्रमुख पद हैं—भाज्य, भाजक, भागफल और शेषफल।
  • भाज्य = (भाजक × भागफल) + शेषफल
  • शेषफल सदैव भाजक से छोटा होता है।
  • 2 से विभाज्यता के लिए अंतिम अंक सम होना चाहिए।
  • 3 और 9 से विभाज्यता की जाँच अंकों के योग द्वारा की जाती है।
  • 4 के लिए अंतिम दो तथा 8 के लिए अंतिम तीन अंकों की जाँच की जाती है।
  • 5 से विभाज्यता के लिए अंतिम अंक 0 या 5 होना चाहिए।
  • 6 से विभाज्य संख्या 2 और 3 दोनों से विभाज्य होती है।
  • 10 से विभाज्यता के लिए इकाई का अंक 0 होना आवश्यक है।

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Topic 4 भाग की प्रक्रिया—हासिल एवं शेषफल

भाग की प्रक्रिया—हासिल एवं शेषफल

भाग की प्रक्रिया

भाग, गुणा की विपरीत प्रक्रिया है। किसी संख्या या मात्रा को बराबर भागों में बाँटने की गणितीय क्रिया को भाग कहते हैं।

लम्बे भाग की विधि में भाज्य को बाईं ओर से क्रमशः भाजक द्वारा विभाजित किया जाता है। प्रत्येक चरण में भागफल का अंक लिखा जाता है, फिर भाजक से गुणा करके घटाया जाता है और आवश्यकता होने पर भाज्य का अगला अंक नीचे उतारा जाता है।

भाग करते समय मुख्य चरण

  1. भाज्य के बाईं ओर से आवश्यक अंक लें।
  2. देखें कि भाजक उस संख्या में अधिकतम कितनी बार जाता है।
  3. प्राप्त अंक को भागफल में लिखें।
  4. भाजक और भागफल के अंक का गुणा करें।
  5. प्राप्त संख्या को घटाएँ।
  6. भाज्य का अगला अंक नीचे उतारें।
  7. इसी प्रक्रिया को तब तक दोहराएँ जब तक सभी अंक समाप्त न हो जाएँ।

1. बिना शेषफल वाला सरल भाग

उदाहरण — 77 ÷ 7

पहले 7 को 7 से भाग देंगे—

7 ÷ 7 = 1

भागफल में 1 लिखेंगे।

7 × 1 = 7

7 − 7 = 0

अब अगला 7 नीचे उतारेंगे और फिर—

7 ÷ 7 = 1

       11
     ____
7  )  77
      7
      --
       7
       7
       -
       0

अतः—

77 ÷ 7 = 11

  • भागफल = 11
  • शेषफल = 0

2. बीच में हासिल वाला भाग

उदाहरण — 98 ÷ 7

सबसे पहले 9 को 7 से भाग देंगे।

7 × 1 = 7

अतः भागफल में 1 लिखेंगे।

अब—

9 − 7 = 2

अब भाज्य का अगला अंक 8 नीचे उतारेंगे—

संख्या बनेगी 28

28 ÷ 7 = 4

7 × 4 = 28

28 − 28 = 0

       14
     ____
7  )  98
      7
      --
      28
      28
      --
       0

अतः—

98 ÷ 7 = 14

  • भागफल = 14
  • शेषफल = 0

3. शेषफल वाला भाग

उदाहरण — 976 ÷ 5

सबसे पहले 9 को 5 से भाग देंगे।

5 × 1 = 5

9 − 5 = 4

अब 7 नीचे उतारने पर 47 प्राप्त होगा।

47 में 5 अधिकतम 9 बार जाएगा—

5 × 9 = 45

47 − 45 = 2

अब अंतिम अंक 6 नीचे उतारेंगे—

संख्या बनेगी 26।

26 में 5 अधिकतम 5 बार जाएगा—

5 × 5 = 25

26 − 25 = 1

        195
      _____
5  )  976
       5
       --
       47
       45
       --
        26
        25
        --
         1

अतः—

976 ÷ 5 = 195, शेषफल 1

  • भाज्य = 976
  • भाजक = 5
  • भागफल = 195
  • शेषफल = 1

4. एक और शेषफल वाला उदाहरण — 1026 ÷ 4

पहले 10 में 4 का भाग करेंगे—

4 × 2 = 8

10 − 8 = 2

अब 2 नीचे उतारने पर 22 मिलेगा।

4 × 5 = 20

22 − 20 = 2

अब अंतिम 6 नीचे उतारने पर 26 मिलेगा।

4 × 6 = 24

26 − 24 = 2

        256
      _____
4  )  1026
       8
       --
       22
       20
       --
        26
        24
        --
         2

अतः—

1026 ÷ 4 = 256, शेषफल 2

उत्तर की जाँच

भाग के उत्तर की जाँच निम्न सूत्र से की जा सकती है—

भाज्य = (भाजक × भागफल) + शेषफल

976 ÷ 5 के लिए—

(5 × 195) + 1
= 975 + 1
= 976

अतः उत्तर सही है।

इसी प्रकार 1026 ÷ 4 के लिए—

(4 × 256) + 2
= 1024 + 2
= 1026

भाग में शेषफल का नियम

अंतिम शेषफल सदैव भाजक से छोटा होता है।

जैसे 976 ÷ 5 में—

शेषफल = 1 और भाजक = 5

अतः—

1 < 5

भाग करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • भाग की शुरुआत भाज्य के बाईं ओर से होती है।
  • भाजक का ऐसा गुणज चुनें जो वर्तमान संख्या से अधिक न हो।
  • गुणा करने के बाद सही घटाव करें।
  • अगला अंक नीचे उतारते समय उसके स्थान का ध्यान रखें।
  • भागफल के अंकों को सही क्रम में लिखें।
  • अंतिम शेषफल भाजक से छोटा होना चाहिए।
  • उत्तर को सूत्र भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल से जाँचा जा सकता है।

चारों उदाहरण एक नजर में

  • 77 ÷ 7 = 11, शेषफल 0
  • 98 ÷ 7 = 14, शेषफल 0
  • 976 ÷ 5 = 195, शेषफल 1
  • 1026 ÷ 4 = 256, शेषफल 2
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • भाग में भाज्य को भाजक से बाईं ओर से क्रमशः विभाजित किया जाता है।
  • प्रत्येक चरण में भागफल लिखकर भाजक से गुणा और फिर घटाव किया जाता है।
  • बचे हुए शेष के साथ अगला अंक नीचे उतारा जाता है।
  • 77 ÷ 7 = 11, शेषफल 0।
  • 98 ÷ 7 = 14, शेषफल 0।
  • 976 ÷ 5 = 195, शेषफल 1।
  • 1026 ÷ 4 = 256, शेषफल 2।
  • शेषफल हमेशा भाजक से छोटा होता है।
  • भाज्य = (भाजक × भागफल) + शेषफल द्वारा उत्तर की जाँच की जा सकती है।
Topic 5 भिन्न की अवधारणा एवं प्रकार

भिन्न की अवधारणा एवं प्रकार

भिन्न की अवधारणा

भिन्न वह संख्या है जो किसी पूर्ण वस्तु या राशि के बराबर भागों में से एक या अधिक भागों को व्यक्त करती है।

यदि किसी वस्तु को दो बराबर भागों में बाँटा जाए, तो प्रत्येक भाग उस वस्तु का आधा होगा। इसी प्रकार तीन बराबर भाग करने पर प्रत्येक भाग एक तिहाई तथा चार बराबर भाग करने पर प्रत्येक भाग एक चौथाई होगा।

  • आधा भाग = 1/2
  • एक तिहाई भाग = 1/3
  • एक चौथाई भाग = 1/4

सामान्य रूप से भिन्न को p/q के रूप में लिखा जाता है, जहाँ q ≠ 0 होता है।

अंश एवं हर

भिन्न में ऊपर लिखी संख्या को अंश तथा नीचे लिखी संख्या को हर कहते हैं।

p/q = अंश/हर

उदाहरण के लिए भिन्न 4/5 में—

  • अंश = 4
  • हर = 5

हर यह बताता है कि पूर्ण वस्तु को कुल कितने बराबर भागों में बाँटा गया है, जबकि अंश यह बताता है कि उन भागों में से कितने भाग लिए गए हैं।

चित्र या छायांकित भाग से भिन्न समझना

यदि किसी आकृति को बराबर भागों में बाँटकर उनमें से कुछ भागों को छायांकित किया जाए, तो भिन्न इस प्रकार ज्ञात किया जाता है—

भिन्न = छायांकित भागों की संख्या ÷ कुल बराबर भागों की संख्या

उदाहरण—

  • कुल भाग = 4, छायांकित भाग = 1 → 1/4
  • कुल भाग = 8, छायांकित भाग = 3 → 3/8
  • कुल भाग = 16, छायांकित भाग = 7 → 7/16
भिन्न की अवधारणा अंश हर और भिन्न के विभिन्न प्रकार
भिन्न की अवधारणा, अंश-हर तथा भिन्नों के प्रमुख प्रकार

भिन्न के प्रकार

भिन्नों को उनकी संरचना और अंश-हर के संबंध के आधार पर विभिन्न प्रकारों में बाँटा जाता है।

1. उचित या सम भिन्न

ऐसे भिन्न जिनमें अंश का मान हर के मान से कम होता है, उचित या सम भिन्न कहलाते हैं।

जैसे—

2/5, 3/7, 3/10, 3/15

इन भिन्नों का मान एक पूर्ण इकाई से कम होता है।

2. अनुचित या विषम भिन्न

ऐसे भिन्न जिनमें अंश का मान हर के मान से अधिक होता है, अनुचित या विषम भिन्न कहलाते हैं।

जैसे—

8/7, 9/3, 11/2, 16/3

3. सजातीय भिन्न

जिन भिन्नों के हर समान होते हैं, उन्हें सजातीय भिन्न कहते हैं।

जैसे—

1/3, 5/3, 7/3, 9/3

इन सभी भिन्नों का हर 3 है, इसलिए ये सजातीय भिन्न हैं।

4. विजातीय भिन्न

जिन भिन्नों के हर असमान होते हैं, उन्हें विजातीय भिन्न कहते हैं।

जैसे—

1/7, 5/3, 4/2, 11/17

5. मिश्र भिन्न

ऐसी भिन्न जिसमें एक पूर्ण संख्या के साथ एक भिन्न लिखा होता है, मिश्र भिन्न कहलाती है।

जैसे—

3 4/2, 5 1/3, 7 8/3, 11 5/4

मिश्र भिन्न का प्रयोग ऐसी मात्रा को व्यक्त करने के लिए किया जाता है जिसमें एक या अधिक पूर्ण वस्तुओं के साथ किसी अन्य वस्तु का कुछ भाग भी सम्मिलित हो।

उदाहरण द्वारा मिश्र भिन्न को समझें

यदि किसी विद्यार्थी के पास 2 सेब हों, वह एक सेब पूरा खा ले और दूसरे का आधा भाग खाए, तो खाए गए सेबों की कुल मात्रा होगी—

1 + 1/2 = 1 1/2

इसी प्रकार यदि 4 सेबों में से 3 सेब पूरे और चौथे का आधा भाग खाया जाए, तो—

3 + 1/2 = 3 1/2

6. समतुल्य भिन्न

ऐसे भिन्न जिनके रूप अलग-अलग हों लेकिन उनका मान समान हो, समतुल्य भिन्न कहलाते हैं।

जैसे—

1/2 = 2/4

दोनों भिन्नों को सरल करने पर उनका मान समान प्राप्त होता है, इसलिए ये समतुल्य भिन्न हैं।

अनुचित भिन्न को मिश्र भिन्न में बदलना

अनुचित भिन्न को मिश्र भिन्न में बदलने के लिए अंश को हर से भाग दिया जाता है।

भाग करने पर—

  • भागफल → पूर्ण संख्या
  • शेषफल → नए भिन्न का अंश
  • भाजक → नए भिन्न का हर

उदाहरण — 11/4 को मिश्र भिन्न में बदलें

11 को 4 से भाग देने पर—

11 ÷ 4 = 2, शेष 3

जहाँ—

  • 2 = पूर्ण संख्या
  • 3 = शेष अर्थात नया अंश
  • 4 = भाजक अर्थात हर

अतः—

11/4 = 2 3/4

भिन्न के प्रकारों को एक नजर में

  • उचित/सम भिन्न— अंश < हर
  • अनुचित/विषम भिन्न— अंश > हर
  • सजातीय भिन्न— सभी भिन्नों के हर समान।
  • विजातीय भिन्न— भिन्नों के हर असमान।
  • मिश्र भिन्न— पूर्ण संख्या और भिन्न का संयुक्त रूप।
  • समतुल्य भिन्न— अलग रूप होते हुए भी समान मान वाले भिन्न।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • भिन्न किसी पूर्ण वस्तु के बराबर भागों में से एक या अधिक भागों को व्यक्त करती है।
  • भिन्न को p/q के रूप में लिखा जाता है, जहाँ q ≠ 0 होता है।
  • भिन्न में ऊपर की संख्या अंश तथा नीचे की संख्या हर कहलाती है।
  • उचित भिन्न में अंश हर से छोटा और अनुचित भिन्न में अंश हर से बड़ा होता है।
  • समान हर वाले भिन्न सजातीय तथा असमान हर वाले भिन्न विजातीय कहलाते हैं।
  • पूर्ण संख्या और भिन्न के संयुक्त रूप को मिश्र भिन्न कहते हैं।
  • समान मान वाले अलग-अलग भिन्न समतुल्य भिन्न कहलाते हैं, जैसे 1/2 और 2/4।
  • अनुचित भिन्न को मिश्र भिन्न में बदलने के लिए अंश को हर से भाग दिया जाता है।
  • 11/4 = 2 3/4

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Topic 6 भिन्नों का जोड़ एवं घटाव

भिन्नों का जोड़ एवं घटाव

भिन्नों का जोड़ एवं घटाव

भिन्नों का जोड़ या घटाव करते समय सबसे पहले उनके हर को देखा जाता है। यदि दोनों भिन्नों के हर समान हों, तो केवल अंशों को जोड़ना या घटाना होता है। यदि हर असमान हों, तो पहले उन्हें समान हर वाले समतुल्य भिन्नों में बदला जाता है।

1. समान हर वाले भिन्नों का जोड़

यदि दो या अधिक भिन्नों के हर समान हों, तो उनके अंशों को जोड़ दिया जाता है और हर में कोई परिवर्तन नहीं किया जाता।

सामान्य सूत्र—

a/b + c/b = (a + c)/b

अर्थात—

समान हर वाले भिन्नों का योग = अंशों का योग / समान हर

उदाहरण

3/8 + 7/8 को हल कीजिए।

दोनों भिन्नों का हर 8 है, इसलिए केवल अंश जोड़ेंगे—

3/8 + 7/8
= (3 + 7)/8
= 10/8
= 5/4

2. समान हर वाले भिन्नों का घटाव

यदि दोनों भिन्नों के हर समान हों, तो उनके अंशों को घटाया जाता है और हर समान रहता है।

सामान्य सूत्र—

a/b − c/b = (a − c)/b

अर्थात—

समान हर वाले भिन्नों का अंतर = अंशों का अंतर / समान हर

उदाहरण

5/6 − 7/6 को हल कीजिए।

दोनों का हर 6 है—

5/6 − 7/6
= (5 − 7)/6
= −2/6
= −1/3

3. असमान हर वाले भिन्नों का जोड़

जिन भिन्नों के हर अलग-अलग हों, उन्हें सीधे नहीं जोड़ा जाता। पहले सभी हरों का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) निकालकर भिन्नों को समान हर वाले समतुल्य भिन्नों में बदला जाता है।

असमान हर वाले भिन्नों को जोड़ने की विधि

  1. सभी भिन्नों के हरों का LCM निकालें।
  2. LCM को नया समान हर मानें।
  3. प्रत्येक पुराने हर से नए हर को भाग दें।
  4. प्राप्त संख्या से संबंधित अंश को गुणा करें।
  5. नए अंशों को जोड़ें।
  6. आवश्यक हो तो प्राप्त भिन्न को सरल करें।

उदाहरण — 3/5 + 2/4

5 और 4 का LCM = 20

पहला भिन्न—

3/5 = (3 × 4)/(5 × 4) = 12/20

दूसरा भिन्न—

2/4 = (2 × 5)/(4 × 5) = 10/20

अब—

12/20 + 10/20
= 22/20
= 11/10
= 1 1/10

उदाहरण — 2/5 + 1/3

5 और 3 का LCM = 15

2/5 = 6/15
1/3 = 5/15

अतः—

2/5 + 1/3
= 6/15 + 5/15
= 11/15

समान और असमान हर वाले भिन्नों के जोड़ और घटाव की विधि
समान हर और असमान हर वाले भिन्नों के जोड़-घटाव की सरल विधि

उदाहरण — 7/8 + 3/4

8 और 4 का LCM = 8

3/4 को हर 8 में बदलेंगे—

3/4 = 6/8

अब—

7/8 + 6/8
= 13/8
= 1 5/8

4. असमान हर वाले भिन्नों का घटाव

असमान हर वाले भिन्नों के घटाव में भी पहले हरों का LCM निकालकर दोनों भिन्नों के हर समान किए जाते हैं। इसके बाद अंशों का घटाव किया जाता है।

उदाहरण — 5/12 − 4/36

12 और 36 का LCM = 36

5/12 = 15/36

अतः—

5/12 − 4/36
= 15/36 − 4/36
= 11/36

5. मिश्र भिन्नों का जोड़-घटाव

मिश्र भिन्नों का जोड़ या घटाव करने से पहले उन्हें अनुचित भिन्न में बदलना सुविधाजनक होता है। इसके बाद हरों को समान करके सामान्य नियम से जोड़ या घटाव किया जाता है।

उदाहरण

3 1/2 + (−7 4/5) का मान ज्ञात कीजिए।

पहले मिश्र भिन्नों को अनुचित भिन्न में बदलेंगे—

3 1/2 = 7/2

−7 4/5 = −39/5

अब—

7/2 + (−39/5)

2 और 5 का LCM = 10

= 35/10 − 78/10
= −43/10
= −4 3/10

6. पूर्ण संख्या एवं भिन्नों का जोड़

पूर्ण संख्या के साथ भिन्नों को जोड़ते समय आवश्यकता के अनुसार सभी राशियों को समान हर में व्यक्त किया जा सकता है।

उदाहरण

25 + 3/100 + 4/1000 को हल कीजिए।

सभी राशियों को 1000 के हर में व्यक्त करने पर—

25 = 25000/1000
3/100 = 30/1000
4/1000 = 4/1000

अतः—

(25000 + 30 + 4)/1000
= 25034/1000
= 25.034

भिन्नों के जोड़-घटाव में ध्यान रखने योग्य बातें

  • समान हर होने पर हर को नहीं बदला जाता।
  • समान हर में केवल अंशों का जोड़ या घटाव किया जाता है।
  • असमान हर वाले भिन्नों में पहले हर समान करना आवश्यक है।
  • हर समान करने के लिए सामान्यतः हरों का LCM लिया जाता है।
  • भिन्न के हर को बदलते समय अंश में भी उसी अनुपात में परिवर्तन करना आवश्यक है।
  • अंतिम उत्तर को जहाँ संभव हो, सरलतम रूप में लिखना चाहिए।
  • अनुचित भिन्न को आवश्यकता के अनुसार मिश्र भिन्न में बदला जा सकता है।

जोड़ एवं घटाव की सरल पहचान

हर समान है → सीधे अंश जोड़ें या घटाएँ।

हर असमान है → LCM लें → हर समान करें → अंश जोड़ें या घटाएँ → उत्तर सरल करें।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • समान हर वाले भिन्नों में केवल अंशों को जोड़ा या घटाया जाता है।
  • a/b + c/b = (a + c)/b
  • a/b − c/b = (a − c)/b
  • असमान हर वाले भिन्नों में पहले हरों का LCM निकालकर हर समान किए जाते हैं।
  • 3/5 + 2/4 = 11/10 = 1 1/10
  • 2/5 + 1/3 = 11/15
  • 7/8 + 3/4 = 13/8 = 1 5/8
  • 5/12 − 4/36 = 11/36
  • मिश्र भिन्नों को जोड़ने या घटाने से पहले उन्हें अनुचित भिन्न में बदलना सुविधाजनक होता है।
  • प्राप्त उत्तर को अंत में सरलतम रूप में लिखना चाहिए।
Topic 7 भिन्नों का गुणा, भाग, प्रतिलोम एवं आरोही क्रम

भिन्नों का गुणा, भाग, प्रतिलोम एवं आरोही क्रम

भिन्नों का गुणा

भिन्नों के गुणा का नियम जोड़ और घटाव से अलग होता है। भिन्नों का गुणा करते समय उनके हर समान होना आवश्यक नहीं है। इसमें एक भिन्न के अंश को दूसरे भिन्न के अंश से तथा एक हर को दूसरे हर से गुणा किया जाता है।

सामान्य सूत्र—

a/b × c/d = (a × c)/(b × d)

अर्थात—

  • अंश × अंश = नया अंश
  • हर × हर = नया हर

उदाहरण

4/7 × 3/11

= (4 × 3)/(7 × 11)
= 12/77

इसी प्रकार—

−3/2 × 5/4 = −15/8

गुणा से पहले भिन्नों को सरल करना

भिन्नों का गुणा करने से पहले जहाँ संभव हो, अंश और हर के उभयनिष्ठ गुणनखण्डों को काटकर भिन्नों को सरल कर लेना चाहिए। इससे गणना छोटी और सरल हो जाती है।

उदाहरण — 27/16 × 8/81

इस प्रश्न में 27 और 81 तथा 8 और 16 में उभयनिष्ठ गुणनखण्ड हैं। इन्हें सरल करने पर—

27/81 = 1/3

और—

8/16 = 1/2

अतः—

27/16 × 8/81 = 1/3 × 1/2 = 1/6

परीक्षा में पूछा गया उदाहरण

1/2 × 3/5 को हल कीजिए।

= (1 × 3)/(2 × 5)
= 3/10

एक अन्य उदाहरण

15/24 × 48/45

भिन्नों को सरल करने पर—

15/24 = 5/8

और—

48/45 = 16/15

अतः—

5/8 × 16/15 = 2/3

भिन्नों का भाग

भिन्नों का भाग करते समय जिस भिन्न से भाग देना होता है, उसके अंश और हर को उलट दिया जाता है और भाग के चिह्न को गुणा के चिह्न में बदल दिया जाता है।

सामान्य सूत्र—

a/b ÷ c/d = a/b × d/c

अर्थात दूसरी भिन्न का व्युत्क्रम लेकर गुणा किया जाता है।

उदाहरण — 2/7 ÷ 3/8

दूसरी भिन्न 3/8 को उलटकर 8/3 करेंगे—

2/7 ÷ 3/8
= 2/7 × 8/3
= 16/21

उदाहरण — 3/5 ÷ 24/35

दूसरी भिन्न 24/35 का व्युत्क्रम 35/24 होगा।

3/5 ÷ 24/35
= 3/5 × 35/24
= 7/8

भिन्नों का गुणा भाग गुणात्मक प्रतिलोम और आरोही क्रम
भिन्नों के गुणा-भाग, प्रतिलोम तथा आरोही क्रम की प्रमुख विधियाँ

भिन्नों को आरोही क्रम में लिखना

भिन्नों को सबसे छोटे से सबसे बड़े क्रम में लिखने को आरोही क्रम कहते हैं। भिन्नों के हर समान या असमान होने के अनुसार तुलना की विधि बदलती है।

1. समान हर वाले भिन्नों का आरोही क्रम

यदि सभी भिन्नों के हर समान हों, तो उनके अंशों की तुलना की जाती है। छोटा अंश वाला भिन्न छोटा तथा बड़ा अंश वाला भिन्न बड़ा होता है।

उदाहरण

1/5, 4/5, 3/5, 2/5

हर सभी का 5 है। इसलिए अंशों को बढ़ते क्रम में लिखेंगे—

1/5 < 2/5 < 3/5 < 4/5

इसी प्रकार—

3/9, 5/9, 8/9, 2/9, 9/9

का आरोही क्रम होगा—

2/9 < 3/9 < 5/9 < 8/9 < 9/9

2. असमान हर वाले भिन्नों का आरोही क्रम

यदि भिन्नों के हर अलग-अलग हों, तो पहले उनके हर समान किए जाते हैं। इसके लिए सभी हरों का LCM लिया जाता है। इसके बाद प्राप्त समतुल्य भिन्नों के अंशों की तुलना की जाती है।

उदाहरण — 2/5, 3/4, 2/3 और 4/5

हर हैं—

5, 4, 3, 5

इनका LCM = 60

अब सभी भिन्नों को हर 60 में बदलेंगे—

2/5 = 24/60

3/4 = 45/60

2/3 = 40/60

4/5 = 48/60

अब अंशों की तुलना करने पर—

24 < 40 < 45 < 48

अतः आरोही क्रम—

2/5 < 2/3 < 3/4 < 4/5

समान अंश वाले भिन्नों की तुलना

यदि भिन्नों के अंश समान हों और हर अलग-अलग हों, तो बड़े हर वाला भिन्न छोटा होता है।

उदाहरण—

1/2, 1/4, 1/5, 1/3, 1/6

इनका आरोही क्रम—

1/6 < 1/5 < 1/4 < 1/3 < 1/2

गुणात्मक प्रतिलोम

किसी संख्या x का गुणात्मक प्रतिलोम उसके उल्टे रूप 1/x या x−1 से प्रदर्शित किया जाता है।

यदि कोई परिमेय संख्या a/b हो, तो उसका गुणात्मक प्रतिलोम—

b/a

होगा।

अर्थात गुणात्मक प्रतिलोम प्राप्त करने के लिए भिन्न के अंश और हर का स्थान आपस में बदल दिया जाता है।

उदाहरण

  • 3/2 का गुणात्मक प्रतिलोम = 2/3
  • 5/7 का गुणात्मक प्रतिलोम = 7/5
  • 9/11 का गुणात्मक प्रतिलोम = 11/9
  • 6/9 का गुणात्मक प्रतिलोम = 9/6

योज्य प्रतिलोम से संबंधित उदाहरण

उदाहरण में 3/4 का योज्य प्रतिलोम −3/4 लिया गया है।

अब −3/4 का गुणात्मक प्रतिलोम अंश और हर को उलटने पर—

−4/3

होगा।

महत्वपूर्ण बातें

  • भिन्नों के गुणा में हर समान करना आवश्यक नहीं होता।
  • गुणा में अंश का अंश से और हर का हर से गुणा किया जाता है।
  • जहाँ संभव हो, गुणा करने से पहले भिन्नों को सरल करना चाहिए।
  • भाग करते समय दूसरी भिन्न को उलटकर गुणा किया जाता है।
  • समान हर वाले भिन्नों में अंशों की तुलना करके आरोही क्रम बनाया जाता है।
  • असमान हर वाले भिन्नों में पहले LCM द्वारा हर समान किए जाते हैं।
  • भिन्न a/b का गुणात्मक प्रतिलोम b/a होता है।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • a/b × c/d = ac/bd
  • भिन्नों के गुणा में हर समान करने की आवश्यकता नहीं होती।
  • 27/16 × 8/81 = 1/6
  • 1/2 × 3/5 = 3/10
  • भिन्नों के भाग में दूसरी भिन्न को उलटकर गुणा किया जाता है।
  • a/b ÷ c/d = a/b × d/c
  • 2/7 ÷ 3/8 = 16/21
  • समान हर वाले भिन्नों में छोटा अंश वाला भिन्न छोटा होता है।
  • असमान हर वाले भिन्नों को LCM द्वारा समान हर में बदलकर तुलना की जाती है।
  • 2/5 < 2/3 < 3/4 < 4/5
  • भिन्न a/b का गुणात्मक प्रतिलोम b/a होता है।

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Topic 8 मिश्रित संक्रियाएँ एवं चाल-दूरी-समय

मिश्रित संक्रियाएँ एवं चाल-दूरी-समय

मिश्रित गणितीय संक्रियाएँ

जब किसी गणितीय व्यंजक में जोड़, घटाव, गुणा, भाग तथा विभिन्न प्रकार के कोष्ठक एक साथ दिए हों, तो संक्रियाओं को उचित क्रम में हल करना आवश्यक होता है।

कोष्ठक वाले प्रश्नों में सबसे पहले सबसे अंदर वाले कोष्ठक को हल किया जाता है और फिर क्रमशः बाहर की ओर बढ़ते हैं।

दिए गए उदाहरणों में कोष्ठकों का क्रम इस प्रकार समझा जा सकता है—

( ) → { } → [ ]

अर्थात पहले छोटे कोष्ठक की क्रिया, उसके बाद मंझले कोष्ठक और अंत में बड़े कोष्ठक की क्रिया की जाती है।

उदाहरण 1

15 − [6 − {5 + (4 − 2 − 1)}] को सरल कीजिए।

सबसे पहले अंदर का छोटा कोष्ठक हल करेंगे—

4 − 2 − 1 = 1

अब—

15 − [6 − {5 + 1}]

मंझला कोष्ठक—

5 + 1 = 6

अब—

15 − [6 − 6]

= 15 − 0

= 15

उदाहरण 2

(−5) − (−45) ÷ (−15) + (−3) × 5 को हल कीजिए।

पहले भाग तथा गुणा की क्रियाएँ करेंगे—

(−45) ÷ (−15) = 3

(−3) × 5 = −15

अब—

−5 − 3 − 15

= −23

उदाहरण 3

121 ÷ [16 − {14 − 3(9 − 6)}] को हल कीजिए।

सबसे पहले—

9 − 6 = 3

अब—

3 × 3 = 9

फिर—

14 − 9 = 5

इसके बाद—

16 − 5 = 11

अतः—

121 ÷ 11 = 11

उदाहरण 4

18 − [14 + {16 − (18 − 5)}] का मान ज्ञात कीजिए।

सबसे पहले—

18 − 5 = 13

अब—

16 − 13 = 3

फिर—

14 + 3 = 17

अंत में—

18 − 17 = 1

उदाहरण 5

13 − (8 × 2) + 3 का मान लिखिए।

पहले गुणा—

8 × 2 = 16

अब—

13 − 16 + 3

= 13 + 3 − 16

= 16 − 16

= 0

उदाहरण 6

121 ÷ [16 − {14 − 3(9 − 5)}] को सरल कीजिए।

9 − 5 = 4

3 × 4 = 12

14 − 12 = 2

16 − 2 = 14

अतः—

121 ÷ 14 = 8.64 लगभग

उदाहरण 7

156 ÷ [25 − {14 − 3(10 − 5)}] को सरल कीजिए।

सबसे पहले—

10 − 5 = 5

अब—

3 × 5 = 15

फिर—

14 − 15 = −1

अब—

25 − (−1) = 26

अतः—

156 ÷ 26 = 6

मिश्रित संक्रियाओं को हल करते समय ध्यान रखें

  • कोष्ठकों को अंदर से बाहर की ओर हल करें।
  • कोष्ठक के भीतर गुणा या भाग हो तो उसे जोड़-घटाव से पहले हल करें।
  • ऋण चिह्न के साथ गणना करते समय चिह्नों पर विशेष ध्यान दें।
  • एक चरण में केवल आवश्यक क्रिया करें और अगला रूप साफ लिखें।
मिश्रित गणितीय संक्रियाओं और चाल दूरी समय के सूत्रों की समझ
कोष्ठक वाली मिश्रित संक्रियाएँ तथा चाल, दूरी और समय के प्रमुख सूत्र

चाल, दूरी एवं समय

किसी पिण्ड द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी को उसकी चाल कहते हैं।

चाल, दूरी और समय के बीच सीधा संबंध होता है।

चाल का सूत्र

चाल = दूरी ÷ समय

दूरी का सूत्र

दूरी = चाल × समय

समय का सूत्र

समय = दूरी ÷ चाल

प्रमुख मात्रक

  • समय— सेकण्ड, मिनट, घण्टा
  • दूरी— मीटर, किलोमीटर
  • चाल— मीटर/सेकण्ड, किलोमीटर/घण्टा

मीटर/सेकण्ड को किलोमीटर/घण्टा में बदलना

मीटर/सेकण्ड में दी गई चाल को किलोमीटर/घण्टा में बदलने के लिए उसे 18/5 से गुणा किया जाता है।

किमी./घण्टा = मी./से. × 18/5

रेलगाड़ी एवं प्लेटफार्म का प्रश्न

यदि कोई रेलगाड़ी किसी प्लेटफार्म को पूरी तरह पार करती है, तो रेलगाड़ी द्वारा तय की गई कुल दूरी में रेलगाड़ी की लम्बाई और प्लेटफार्म की लम्बाई दोनों शामिल होती हैं।

कुल दूरी = रेलगाड़ी की लम्बाई + प्लेटफार्म की लम्बाई

उदाहरण — रेलगाड़ी और प्लेटफार्म

एक रेलगाड़ी की लम्बाई 30 मीटर है। वह 120 मीटर लम्बे प्लेटफार्म को 12 सेकण्ड में पार करती है। उसकी चाल ज्ञात कीजिए।

रेलगाड़ी की लम्बाई = 30 मीटर

प्लेटफार्म की लम्बाई = 120 मीटर

कुल दूरी—

30 + 120 = 150 मीटर

समय = 12 सेकण्ड

चाल—

150 ÷ 12 = 12.5 मीटर/सेकण्ड

अब किलोमीटर/घण्टा में—

12.5 × 18/5 = 45 किमी./घण्टा

अतः रेलगाड़ी की चाल 45 किमी./घण्टा है।

उदाहरण — खम्भे को पार करती रेलगाड़ी

एक रेलगाड़ी जिसकी लम्बाई 270 मीटर है, एक खम्भे को 9 सेकण्ड में पार करती है। उसकी चाल ज्ञात कीजिए।

खम्भे को पार करते समय रेलगाड़ी द्वारा तय दूरी उसकी अपनी लम्बाई के बराबर होगी।

दूरी = 270 मीटर

समय = 9 सेकण्ड

चाल—

270 ÷ 9 = 30 मीटर/सेकण्ड

किलोमीटर/घण्टा में—

30 × 18/5 = 108 किमी./घण्टा

अतः रेलगाड़ी की चाल 108 किमी./घण्टा है।

भोजन सामग्री पर आधारित प्रश्न

यदि निश्चित मात्रा की भोजन सामग्री कुछ विद्यार्थियों के लिए निश्चित दिनों तक पर्याप्त हो, तो पहले कुल भोजन को विद्यार्थी-दिन के रूप में ज्ञात करके बदली हुई विद्यार्थी संख्या के अनुसार नए दिनों की गणना की जा सकती है।

उदाहरण — छात्रावास की भोजन सामग्री

एक छात्रावास में 50 छात्रों के लिए 40 दिनों की भोजन सामग्री है। यदि 30 छात्र और आ जाएँ, तो भोजन सामग्री कितने दिनों में समाप्त होगी?

50 छात्रों के लिए 40 दिनों की कुल भोजन सामग्री—

50 × 40 = 2000 विद्यार्थी-दिन

नई छात्र संख्या—

50 + 30 = 80 छात्र

अतः भोजन चलने के दिन—

2000 ÷ 80 = 25 दिन

इसलिए भोजन सामग्री 25 दिनों में समाप्त हो जाएगी।

सूत्र एवं प्रश्न हल करने की सरल विधि

  • पहले प्रश्न में दी गई राशियों को पहचानें।
  • सभी राशियों के मात्रक ध्यान से देखें।
  • उपयुक्त सूत्र चुनें।
  • सूत्र में मान रखकर गणना करें।
  • अंतिम उत्तर के साथ सही मात्रक अवश्य लिखें।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • कोष्ठक वाली गणना में सबसे अंदर के कोष्ठक से हल करना शुरू किया जाता है।
  • दिए गए मिश्रित उदाहरणों में क्रम ( ) → { } → [ ] के रूप में दिखाई देता है।
  • चाल = दूरी ÷ समय
  • दूरी = चाल × समय
  • समय = दूरी ÷ चाल
  • मीटर/सेकण्ड को किलोमीटर/घण्टा में बदलने के लिए 18/5 से गुणा किया जाता है।
  • प्लेटफार्म पार करते समय कुल दूरी = रेलगाड़ी की लम्बाई + प्लेटफार्म की लम्बाई।
  • 30 मीटर की रेलगाड़ी द्वारा 120 मीटर के प्लेटफार्म को 12 सेकण्ड में पार करने पर चाल 45 किमी./घण्टा होती है।
  • 270 मीटर की रेलगाड़ी द्वारा खम्भे को 9 सेकण्ड में पार करने पर चाल 108 किमी./घण्टा होती है।
  • 50 छात्रों के लिए 40 दिनों की भोजन सामग्री 80 छात्रों के लिए 25 दिन चलेगी।

अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

किसी एक ही संख्या को बार-बार जोड़ने की क्रिया कहलाती है—

व्याख्या: किसी संख्या को बार-बार जोड़ने की प्रक्रिया को गुणा कहते हैं। जैसे 2 + 2 + 2 + 2 = 2 × 4 = 8।
Q 2

किसी संख्या में शून्य से गुणा करने पर प्राप्त होगा—

व्याख्या: किसी भी संख्या को 0 से गुणा करने पर गुणनफल सदैव 0 होता है।
Q 3

3/4 के योज्य प्रतिलोम का गुणात्मक प्रतिलोम होगा—

व्याख्या: 3/4 का योज्य प्रतिलोम -3/4 है और -3/4 का गुणात्मक प्रतिलोम -4/3 होगा।
Q 4

भाग की क्रिया में भाज्य होता है—

व्याख्या: जिस संख्या का भाग किया जाता है उसे भाज्य कहते हैं। जिस संख्या से भाग दिया जाता है, वह भाजक कहलाती है।
Q 5

निम्न में सम अथवा उचित भिन्न है—

व्याख्या: उचित या सम भिन्न में अंश का मान हर से कम होता है। 2/4, 3/5 और 3/6 तीनों उचित भिन्न हैं।
Q 6

निम्न में कौन मिश्र भिन्न नहीं है—

व्याख्या: मिश्र भिन्न में पूर्ण संख्या के साथ भिन्न लिखा होता है। 2/3 केवल एक उचित भिन्न है।
Q 7

3 1/2 + (−7 4/5) का हल है—

व्याख्या: 3 1/2 = 7/2 और −7 4/5 = −39/5। अतः 7/2 − 39/5 = −43/10 = −4 3/10।
Q 8

25 + 3/100 + 4/1000 का मान होगा—

व्याख्या: 25 + 3/100 + 4/1000 = 25 + 0.03 + 0.004 = 25.034।
Q 9

समतुल्य भिन्न का उदाहरण है—

व्याख्या: 1/2 = 2/4 तथा 1/3 = 3/9। अतः दोनों जोड़े समान मान वाले समतुल्य भिन्न हैं।
Q 10

3/2 का गुणात्मक प्रतिलोम है—

व्याख्या: किसी भिन्न का गुणात्मक प्रतिलोम प्राप्त करने के लिए उसके अंश और हर को उलट दिया जाता है। इसलिए 3/2 का प्रतिलोम 2/3 है।
Q 11

कौन-सा जोड़ा एक-दूसरे का व्युत्क्रम है—

व्याख्या: 5/6 का गुणात्मक प्रतिलोम 6/5 होता है। इसलिए ये दोनों एक-दूसरे के व्युत्क्रम हैं।
Q 12

निम्नांकित में से 5 से विभाज्य संख्या है—

व्याख्या: जिस संख्या का अंतिम अंक 0 या 5 हो, वह 5 से विभाज्य होती है। 3775 का अंतिम अंक 5 है।
Q 13

कोई संख्या 6 से पूर्णतः विभाज्य होगी, यदि वह—

व्याख्या: 6 से विभाज्यता के लिए संख्या का 2 और 3 दोनों से पूर्णतः विभाज्य होना आवश्यक है।
Q 14

भिन्न p/q में हर q के लिए आवश्यक शर्त है—

व्याख्या: भिन्न को p/q के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ हर q का मान शून्य नहीं हो सकता।
Q 15

976 को 5 से भाग देने पर भागफल और शेषफल होंगे—

व्याख्या: 976 ÷ 5 करने पर 5 × 195 = 975 होता है और 1 शेष बचता है। अतः भागफल 195 तथा शेषफल 1 है।

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पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 1 के विषय गणित के अध्याय गुणा, भाग एवं भिन्न पर आधारित विभिन्न संक्रियाएँ से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1 2020

15 − [6 − {5 + (4 − 2 − 1)}] को सरल कीजिए।

Q 2

27/16 × 8/81 को हल कीजिए।

Q 3

एक रेलगाड़ी जिसकी लम्बाई 30 मीटर है, 120 मीटर लम्बे प्लेटफार्म को 12 सेकण्ड में पार करती है। रेलगाड़ी की चाल किमी./घण्टा में ज्ञात कीजिए।

Q 4

सरल कीजिए— (i) −12/30 ÷ 3/5 + 8/10 (ii) −4/6 × −8/10 − 16/30

Q 5

निम्नलिखित का भागफल तथा शेषफल लिखिए— (i) 65 ÷ 65 (ii) 29 ÷ 0 (iii) 6049 ÷ 7

Q 6 2016

13 − (8 × 2) + 3 का मान लिखिए।

Q 7 2019

18 − [14 + {16 − (18 − 5)}] का मान ज्ञात कीजिए।

Q 8 2017

(−5) − (−45) ÷ (−15) + (−3) × 5 का मान ज्ञात कीजिए।

Q 9 2016

हल कीजिए— (i) 1/2 × 3/5 (ii) 7/8 + 3/4

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Practice More Questions

इसी semester और subject के MCQ Tests तथा Previous Year Papers practice करके अपनी तैयारी को और मजबूत बनाइए।

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