दशमलव संख्या की अवधारणा एवं स्थानीय मान
दशमलव संख्या की अवधारणा
दशमलव संख्या ऐसी संख्या है जिसमें पूर्णांक भाग और अपूर्णांक भाग को एक बिन्दु द्वारा अलग किया जाता है। इस बिन्दु को दशमलव बिन्दु कहते हैं।
दशमलव संख्या पद्धति में गणना के लिए कुल दस अंकों—
0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9
का प्रयोग किया जाता है।
दशमलव बिन्दु संख्या के पूर्णांक भाग और अपूर्णांक भाग के बीच लगाया जाता है।
उदाहरण — 645.7
संख्या 645.7 को विस्तारित रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है—
600.0 + 40.0 + 5.0 + 0.7 = 645.7
या—
600 + 40 + 5 + 0.7 = 645.7
यहाँ दशमलव बिन्दु के बाईं ओर पूर्णांक भाग 645 तथा दाईं ओर अपूर्णांक भाग 7 है।
दशमलव के बाद के स्थान
दशमलव बिन्दु के बाद आने वाले स्थानों का मान क्रमशः दसवाँ, सौवाँ, हजारवाँ आदि होता है।
- दसवाँ भाग = 1/10 = 0.1
- सौवाँ भाग = 1/100 = 0.01
- हजारवाँ भाग = 1/1000 = 0.001
अर्थात दशमलव बिन्दु के दाईं ओर बढ़ने पर प्रत्येक अगला स्थान अपने पिछले स्थान का दसवाँ भाग होता है।
स्थानीय मान का अर्थ
किसी संख्या में किसी अंक का मान इस बात पर निर्भर करता है कि वह अंक किस स्थान पर स्थित है। अंक के स्थान के आधार पर प्राप्त मान को उसका स्थानीय मान कहते हैं।
दशमलव संख्याओं में स्थानीय मान दशमलव बिन्दु के दोनों ओर निर्धारित होता है।
उदाहरण — 543.426 का स्थानीय मान
संख्या 543.426 को स्थानीय मान के आधार पर इस प्रकार समझ सकते हैं—
| स्थान | अंक |
|---|---|
| सैकड़ा | 5 |
| दहाई | 4 |
| इकाई | 3 |
| दसवाँ | 4 |
| सौवाँ | 2 |
| हजारवाँ | 6 |
अतः—
- 5 का स्थानीय मान = 500
- 4 का स्थानीय मान = 40
- 3 का स्थानीय मान = 3
- दशमलव के बाद 4 का स्थानीय मान = 0.4
- 2 का स्थानीय मान = 0.02
- 6 का स्थानीय मान = 0.006
दशमलव संख्या का विस्तारित रूप
संख्या 543.426 को विस्तारित रूप में—
500 + 40 + 3 + 0.4 + 0.02 + 0.006
के रूप में लिखा जा सकता है।
स्थान बदलने पर अंक का मान बदलता है
एक ही अंक अलग-अलग स्थानों पर होने से उसका स्थानीय मान बदल जाता है।
उदाहरण के लिए संख्या 1 को देखें—
- 8651 में 1 का स्थानीय मान = 1
- 8615 में 1 का स्थानीय मान = 10
- 8165 में 1 का स्थानीय मान = 100
- 1865 में 1 का स्थानीय मान = 1000
इससे स्पष्ट है कि किसी अंक का वास्तविक स्थानीय मान उसके स्थान पर निर्भर करता है।
दशमलव भाग को पढ़ना
दशमलव बिन्दु के बाद के स्थानों को क्रमशः—
- दसवाँ
- सौवाँ
- हजारवाँ
आदि कहा जाता है।
इन्हें संख्या रूप में—
0.1, 0.01, 0.001
आदि लिखा जाता है।
उदाहरण — 5 का स्थानीय मान सबसे अधिक कहाँ है?
निम्न संख्याओं में 5 के स्थानीय मान की तुलना करें—
- 382.159 में 5 का स्थानीय मान = 0.05
- 385.159 में 5 का स्थानीय मान = 0.05
- 146.511 में 5 का स्थानीय मान = 0.5
- 286.058 में 5 का स्थानीय मान = 0.05
अतः 146.511 में 5 का स्थानीय मान सबसे अधिक है।
दशमलव संख्या में स्थानीय मान का क्रम
दशमलव बिन्दु के आसपास स्थानीय मान का क्रम इस प्रकार होता है—
सैकड़ा → दहाई → इकाई → दशमलव बिन्दु → दसवाँ → सौवाँ → हजारवाँ
दशमलव बिन्दु के बाईं ओर जाने पर स्थानीय मान दस गुना बढ़ता है, जबकि दाईं ओर जाने पर प्रत्येक अगला स्थान दसवें भाग के रूप में व्यक्त होता है।
- दशमलव संख्या में पूर्णांक और अपूर्णांक भाग को दशमलव बिन्दु द्वारा अलग किया जाता है।
- दशमलव संख्या पद्धति में 0 से 9 तक कुल दस अंकों का प्रयोग होता है।
- दशमलव बिन्दु के बाद पहला स्थान दसवाँ, दूसरा सौवाँ तथा तीसरा हजारवाँ होता है।
- 1/10 = 0.1, 1/100 = 0.01 तथा 1/1000 = 0.001।
- किसी अंक का मान उसके स्थान पर निर्भर करता है, इसे स्थानीय मान कहते हैं।
- 543.426 = 500 + 40 + 3 + 0.4 + 0.02 + 0.006।
- 543.426 में दशमलव के बाद 4, 2 और 6 क्रमशः दसवें, सौवें और हजारवें स्थान पर हैं।
- 8651, 8615, 8165 तथा 1865 में अंक 1 के स्थानीय मान क्रमशः 1, 10, 100 तथा 1000 हैं।
- 146.511 में 5 का स्थानीय मान 0.5 है, जो दिए गए उदाहरणों में सबसे अधिक है।
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दशमलव संख्याओं का जोड़ एवं घटाव
दशमलव संख्याओं का जोड़
दशमलव संख्याओं का जोड़ सामान्य संख्याओं के जोड़ के समान किया जाता है। मुख्य अंतर यह है कि संख्याओं को लिखते समय उनके दशमलव बिन्दु एक ही सीध में होने चाहिए।
दशमलव संख्याओं को जोड़ने के नियम
- सभी दशमलव संख्याओं के दशमलव बिन्दुओं को एक सीध में लिखें।
- इकाई, दहाई, दसवाँ, सौवाँ आदि अंकों को उनके सही स्थान पर रखें।
- अंकों को साधारण जोड़ की तरह दाईं ओर से जोड़ना प्रारम्भ करें।
- प्राप्त उत्तर में दशमलव बिन्दु उसी सीध में लगाएँ जिस सीध में ऊपर की संख्याओं के दशमलव बिन्दु हैं।
उदाहरण 1 — 8.76 + 7.54
दोनों संख्याओं के दशमलव बिन्दु एक सीध में रखेंगे—
8.76 + 7.54 ------- 16.30
अतः—
8.76 + 7.54 = 16.30
अलग-अलग दशमलव स्थान वाली संख्याओं का जोड़
यदि किसी संख्या में दशमलव के बाद कम अंक हों, तो उसे उसी स्थानीय मान के अनुसार लिखा जाता है। आवश्यकता होने पर दशमलव भाग के अंत में शून्य लगाकर सभी संख्याओं के दशमलव स्थान बराबर किए जा सकते हैं।
दशमलव भाग के अंत में शून्य लगाने से संख्या का मान नहीं बदलता।
जैसे—
- 6 = 6.000
- 6.6 = 6.600
- 6.66 = 6.660
- 6.666 = 6.666
उदाहरण 2 — 6 + 6.6 + 6.66 + 6.666
6.000
6.600
6.660
+ 6.666
---------
25.926
अतः—
6 + 6.6 + 6.66 + 6.666 = 25.926
दशमलव जोड़ का व्यावहारिक उदाहरण
एक व्यक्ति ने अलग-अलग साधनों से क्रमशः 5 किमी. 52 मी., 2 किमी. 265 मी. तथा 1 किमी. 30 मी. दूरी तय की।
क्योंकि 1 किमी. = 1000 मीटर होता है, इसलिए—
5 किमी. 52 मी. = 5052 मी.
इसे किलोमीटर में—
5052/1000 = 5.052 किमी.
इसी प्रकार—
- 2 किमी. 265 मी. = 2.265 किमी.
- 1 किमी. 30 मी. = 1.030 किमी.
अब कुल दूरी—
5.052
2.265
+ 1.030
---------
8.347
अतः कुल तय दूरी = 8.347 किमी.
दशमलव संख्याओं का घटाव
दशमलव संख्याओं का घटाव भी सामान्य घटाव की प्रक्रिया के समान होता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों संख्याओं के दशमलव बिन्दु एक ही सीध में लिखे जाएँ।
दशमलव संख्याओं को घटाने की विधि
- बड़ी संख्या को ऊपर तथा घटाई जाने वाली संख्या को नीचे लिखें।
- दोनों संख्याओं के दशमलव बिन्दुओं को एक सीध में रखें।
- सभी अंकों को उनके स्थानीय मान के अनुसार लिखें।
- दाईं ओर से सामान्य घटाव की प्रक्रिया प्रारम्भ करें।
- उत्तर में दशमलव बिन्दु ऊपर दिए गए दशमलव बिन्दुओं की सीध में लगाएँ।
उदाहरण 3 — 9.768 − 5.436
9.768 − 5.436 -------- 4.332
अतः—
9.768 − 5.436 = 4.332
उदाहरण 4 — 48.89 − 36.58
48.89 − 36.58 -------- 12.31
अतः—
48.89 − 36.58 = 12.31
उदाहरण 5 — ₹20.75 − ₹18.25
20.75
− 18.25
--------
2.50
अतः अंतर = ₹2.50।
उदाहरण 6 — 5.206 − 2.051
5.206 − 2.051 -------- 3.155
अतः—
5.206 − 2.051 = 3.155
उदाहरण 7 — 30.40 − 17.80
30.40 − 17.80 -------- 12.60
अतः—
30.40 − 17.80 = 12.60
जोड़ और घटाव में दशमलव बिन्दु का महत्व
दशमलव संख्या में प्रत्येक अंक का अपना निश्चित स्थानीय मान होता है। इसलिए जोड़ या घटाव करते समय दशमलव बिन्दु एक सीध में न होने पर इकाई का अंक दहाई, दसवें या सौवें स्थान के अंक के साथ जुड़ सकता है और उत्तर गलत हो जाएगा।
इसलिए—
इकाई के नीचे इकाई, दसवें के नीचे दसवाँ और सौवें के नीचे सौवाँ अंक ही लिखा जाना चाहिए।
अंत में शून्य लगाने का नियम
दशमलव संख्या के दशमलव भाग के अंत में आवश्यकतानुसार शून्य लगाए जा सकते हैं। इससे संख्या का मान नहीं बदलता।
जैसे—
- 6.6 = 6.60 = 6.600
- 30.4 = 30.40
- 1.03 = 1.030
यह नियम अलग-अलग दशमलव स्थान वाली संख्याओं को एक सीध में लिखने में उपयोगी होता है।
जोड़ एवं घटाव की सरल प्रक्रिया
दशमलव बिन्दु एक सीध में रखें → अंकों को सही स्थान पर लिखें → सामान्य जोड़/घटाव करें → उत्तर में दशमलव बिन्दु उसी सीध में लगाएँ।
- दशमलव संख्याओं का जोड़ और घटाव सामान्य जोड़-घटाव की तरह किया जाता है।
- सभी संख्याओं के दशमलव बिन्दु एक ही सीध में होने चाहिए।
- अंकों को उनके सही स्थानीय मान के अनुसार लिखा जाता है।
- उत्तर का दशमलव बिन्दु भी उसी सीध में लगाया जाता है।
- दशमलव भाग के अंत में शून्य लगाने से संख्या का मान नहीं बदलता।
- 8.76 + 7.54 = 16.30।
- 6 + 6.6 + 6.66 + 6.666 = 25.926।
- 9.768 − 5.436 = 4.332।
- 48.89 − 36.58 = 12.31।
- ₹20.75 − ₹18.25 = ₹2.50।
- 5.206 − 2.051 = 3.155।
- 30.40 − 17.80 = 12.60।
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दशमलव संख्याओं का गुणा एवं भाग
दशमलव संख्याओं का गुणा
दशमलव संख्याओं का गुणा सामान्य संख्याओं के गुणा की तरह किया जाता है। अंतर केवल इतना है कि गुणनफल प्राप्त होने के बाद उसमें सही स्थान पर दशमलव बिन्दु लगाया जाता है।
दशमलव संख्याओं के गुणा के नियम
- सबसे पहले दोनों संख्याओं को बिना दशमलव वाली पूर्ण संख्याएँ मानकर सामान्य गुणा करें।
- दोनों संख्याओं में दशमलव के दाईं ओर कुल कितने अंक हैं, उन्हें गिनें।
- प्राप्त गुणनफल में दाईं ओर से उतने अंक छोड़कर दशमलव बिन्दु लगाएँ।
उदाहरण 1 — 4.6 × 0.3
पहले दशमलव को हटाकर 46 × 3 का गुणा करेंगे—
46 × 3 ----- 138
अब दशमलव स्थान गिनेंगे—
- 4.6 में दशमलव के बाद 1 अंक है।
- 0.3 में दशमलव के बाद 1 अंक है।
- कुल दशमलव स्थान = 1 + 1 = 2
अतः गुणनफल 138 में दाईं ओर से दो अंक छोड़कर दशमलव लगाएँगे—
4.6 × 0.3 = 1.38
उदाहरण 2 — 1.45 × 15
पहले 145 × 15 का गुणा करें—
145
× 15
-------
725
1450
-------
2175
1.45 में दशमलव के बाद 2 अंक हैं और 15 में कोई दशमलव अंक नहीं है।
अतः गुणनफल 2175 में दाईं ओर से दो अंक छोड़कर दशमलव लगाएँगे—
1.45 × 15 = 21.75
उदाहरण 3 — 2.3 × 0.2
पहले 23 × 2—
23 × 2 ----- 46
2.3 में 1 और 0.2 में 1 दशमलव स्थान है।
कुल दशमलव स्थान = 2
अतः—
2.3 × 0.2 = 0.46
उदाहरण 4 — 1.25 × 10
पहले 125 × 10—
125
× 10
-------
1250
1.25 में दशमलव के बाद 2 अंक हैं। इसलिए 1250 में दाईं ओर से दो अंक छोड़कर दशमलव लगाएँगे—
1.25 × 10 = 12.5
उदाहरण 5 — 5.321 × 1.2
पहले 5321 × 12 का सामान्य गुणा करेंगे—
5321
× 12
---------
10642
53210
---------
63852
दशमलव स्थान—
- 5.321 में = 3
- 1.2 में = 1
- कुल = 4
अतः—
5.321 × 1.2 = 6.3852
उदाहरण 6 — 2.5143 × 1.1
पहले 25143 × 11—
25143
× 11
----------
25143
251430
----------
276573
दशमलव स्थान—
- 2.5143 में = 4
- 1.1 में = 1
- कुल = 5
अतः—
2.5143 × 1.1 = 2.76573
दशमलव गुणा में ध्यान रखने योग्य बातें
- पहले दशमलव को नजरअंदाज करके सामान्य गुणा करें।
- दोनों गुणकों में दशमलव के बाद के अंकों की कुल संख्या अवश्य गिनें।
- गुणनफल में दाईं ओर से उतने ही अंक छोड़कर दशमलव बिन्दु लगाएँ।
दशमलव संख्याओं का भाग
दशमलव संख्याओं का भाग करते समय दशमलव संख्या को पहले ऐसी भिन्न के रूप में लिखा जा सकता है जिसमें दशमलव बिन्दु हटाकर अंश और हर को पूर्णांक बनाया जाए। इसके बाद सामान्य भाग की प्रक्रिया की जाती है।
दशमलव संख्याओं के भाग के नियम
- दशमलव संख्या के अंश और हर को आवश्यकता के अनुसार पूर्णांक में बदलें।
- दशमलव बिन्दु हटाने के लिए 10, 100, 1000 आदि का प्रयोग करें।
- इसके बाद सामान्य भाग की प्रक्रिया करें।
- भागफल में भाज्य के दशमलव स्थानों के अनुसार दशमलव लगाएँ।
उदाहरण — 0.72 ÷ 8
0.72 को भिन्न के रूप में—
0.72/8 = 72/800
अब 72 ÷ 800 को सरल करने पर—
0.09
अतः—
0.72 ÷ 8 = 0.09
उदाहरण 7 — 0.81 ÷ 9
0.81 को भिन्न के रूप में लिखें—
0.81/9 = 81/900
अब सरल करने पर—
81/900 = 0.09
अतः—
0.81 ÷ 9 = 0.09
उदाहरण 8 — 0.119 ÷ 17
दशमलव हटाकर—
0.119/17 = 119/17000
अब 119 को 17 से भाग देने पर 7 प्राप्त होता है।
अतः—
0.119 ÷ 17 = 0.007
उदाहरण 9 — 0.195 ÷ 13
दशमलव हटाकर—
0.195/13 = 195/13000
195 ÷ 13 = 15
अतः—
0.195 ÷ 13 = 0.015
उदाहरण 10 — 25.15 ÷ 5
25.15 को दशमलव रहित रूप में—
25.15/5 = 2515/500
अब—
2515 ÷ 500 = 5.03
अतः—
25.15 ÷ 5 = 5.03
दशमलव भाग को सरल रूप में समझें
- 0.72 ÷ 8 = 0.09
- 0.81 ÷ 9 = 0.09
- 0.119 ÷ 17 = 0.007
- 0.195 ÷ 13 = 0.015
- 25.15 ÷ 5 = 5.03
गुणा एवं भाग में मुख्य अंतर
- गुणा में पहले सामान्य गुणा करके दोनों संख्याओं के कुल दशमलव स्थानों के अनुसार दशमलव बिन्दु लगाया जाता है।
- भाग में दशमलव संख्या को पूर्णांक या भिन्न के उपयुक्त रूप में बदलकर भाग किया जाता है।
- दोनों स्थितियों में दशमलव बिन्दु का सही स्थान उत्तर की शुद्धता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- दशमलव संख्याओं के गुणा में पहले सामान्य संख्याओं की तरह गुणा किया जाता है।
- दोनों गुणकों में दशमलव के बाद के कुल अंकों के बराबर स्थान गुणनफल में दाईं ओर से छोड़े जाते हैं।
- 4.6 × 0.3 = 1.38।
- 1.45 × 15 = 21.75।
- 2.3 × 0.2 = 0.46।
- 1.25 × 10 = 12.5।
- 5.321 × 1.2 = 6.3852।
- 2.5143 × 1.1 = 2.76573।
- दशमलव भाग में संख्या को आवश्यकता के अनुसार पूर्णांक या भिन्न के रूप में बदलकर सामान्य भाग किया जाता है।
- 0.72 ÷ 8 = 0.09।
- 0.119 ÷ 17 = 0.007।
- 0.195 ÷ 13 = 0.015।
- 25.15 ÷ 5 = 5.03।
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दशमलव भिन्न एवं उसके गुण
दशमलव भिन्न का अर्थ
वह साधारण भिन्न जिसका हर 10 अथवा 10 की किसी घात के रूप में हो, दशमलव भिन्न कहलाता है।
अर्थात ऐसे भिन्न जिनके हर—
10, 100, 1000, 10000 ...
आदि हों, उन्हें दशमलव भिन्न के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
जैसे—
- 1/10 = 0.1
- 1/100 = 0.01
- 1/1000 = 0.001
साधारण भिन्न और दशमलव भिन्न का संबंध
साधारण भिन्नों में हर कोई भी उपयुक्त संख्या हो सकता है, जबकि दशमलव भिन्नों में हर 10 या 10 की घात के रूप में होता है।
दशमलव भिन्न को समझने के लिए पहले दस बराबर भागों की कल्पना की जा सकती है। किसी पूर्ण वस्तु को दस बराबर भागों में बाँटने पर—
- एक भाग = एक दसवाँ = 1/10
- दो भाग = दो दसवाँ = 2/10
- तीन भाग = तीन दसवाँ = 3/10
इसी प्रकार सौ और हजार बराबर भागों के आधार पर सौवाँ तथा हजारवाँ भाग समझा जा सकता है।
दशमलव संख्या को दशमलव भिन्न के रूप में समझना
दशमलव संख्या में दशमलव बिन्दु के दाईं ओर के अंक क्रमशः दसवें, सौवें, हजारवें आदि स्थानों को प्रदर्शित करते हैं।
उदाहरण — 75.23
संख्या 75.23 में—
- 7 दहाई के स्थान पर है।
- 5 इकाई के स्थान पर है।
- 2 दसवें स्थान पर है।
- 3 सौवें स्थान पर है।
इसे इस प्रकार लिखा जा सकता है—
75.23 = 75 + 2/10 + 3/100
| स्थान | अंक |
|---|---|
| दहाई | 7 |
| इकाई | 5 |
| दसवाँ | 2 |
| सौवाँ | 3 |
उदाहरण — 25.625
संख्या 25.625 को स्थानीय मान के अनुसार—
25.625 = 25 + 6/10 + 2/100 + 5/1000
के रूप में लिखा जा सकता है।
| स्थान | अंक |
|---|---|
| दहाई | 2 |
| इकाई | 5 |
| दसवाँ | 6 |
| सौवाँ | 2 |
| हजारवाँ | 5 |
दशमलव बिन्दु का कार्य
दशमलव बिन्दु स्थानीय मान तालिका के इकाई स्थान से दाईं ओर के विस्तार को प्रदर्शित करता है।
इसके बाईं ओर संख्या का पूर्णांक भाग तथा दाईं ओर दशमलव भाग लिखा जाता है।
जैसे—
25.625
में—
- 25 = पूर्णांक भाग
- 625 = दशमलव बिन्दु के दाईं ओर का भाग
दशमलव भाग के प्रमुख गुण
1. दशमलव के दाईं ओर के अंकों का पठन
दशमलव बिन्दु के दाईं ओर स्थित अंकों को अलग-अलग पढ़ा जाता है, चाहे उनमें शून्य भी उपस्थित हो।
अतः दशमलव संख्या को पढ़ते समय दशमलव बिन्दु के बाद आने वाले प्रत्येक अंक का ध्यान रखना आवश्यक है।
2. दशमलव भाग का मान
दशमलव संख्या का केवल दशमलव भाग सदैव 1 से कम होता है।
जैसे—
- 0.6 < 1
- 0.25 < 1
- 0.625 < 1
3. अंत में शून्य लगाने का प्रभाव
दशमलव भाग के अंत में कितने भी शून्य लगा देने से संख्या का मान नहीं बदलता।
जैसे—
- 0.5 = 0.50 = 0.500
- 2.6 = 2.60 = 2.600
- 25.625 = 25.6250
अर्थात दशमलव संख्या के अंत में शून्य जोड़ने से केवल उसके लिखने का रूप बदलता है, मान नहीं।
दसवाँ, सौवाँ और हजारवाँ
दशमलव बिन्दु के दाईं ओर स्थानों का क्रम—
- पहला स्थान = दसवाँ = 1/10
- दूसरा स्थान = सौवाँ = 1/100
- तीसरा स्थान = हजारवाँ = 1/1000
इसलिए—
0.1 = 1/10
0.01 = 1/100
0.001 = 1/1000
दशमलव भिन्न को समझने की सरल विधि
दशमलव संख्या के प्रत्येक अंक को उसके स्थानीय मान के अनुसार भिन्न के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
जैसे—
25.625
को चरणबद्ध रूप में—
25 + 0.6 + 0.02 + 0.005
और भिन्न रूप में—
25 + 6/10 + 2/100 + 5/1000
लिखा जा सकता है।
- जिस साधारण भिन्न का हर 10 या 10 की किसी घात के रूप में हो, उसे दशमलव भिन्न कहते हैं।
- दशमलव भिन्नों के हर 10, 100, 1000 आदि होते हैं।
- 1/10 = 0.1, 1/100 = 0.01 तथा 1/1000 = 0.001।
- दशमलव बिन्दु के दाईं ओर के स्थान क्रमशः दसवाँ, सौवाँ और हजारवाँ होते हैं।
- 75.23 = 75 + 2/10 + 3/100।
- 25.625 = 25 + 6/10 + 2/100 + 5/1000।
- दशमलव बिन्दु स्थानीय मान तालिका में इकाई के दाईं ओर के विस्तार को प्रदर्शित करता है।
- दशमलव बिन्दु के दाईं ओर के अंकों को अलग-अलग पढ़ा जाता है।
- दशमलव भाग का मान सदैव 1 से कम होता है।
- दशमलव भाग के अंत में शून्य लगाने से संख्या का मान नहीं बदलता।
दशमलव एवं भिन्न का पारस्परिक रूपांतरण
दशमलव संख्या को भिन्न में बदलना
दशमलव संख्या को भिन्न में बदलने के लिए सबसे पहले दशमलव बिन्दु को हटाकर प्राप्त संख्या को अंश में लिखा जाता है। इसके बाद दशमलव बिन्दु के बाद जितने अंक होते हैं, हर में 1 के बाद उतने ही शून्य लगाए जाते हैं।
अर्थात—
- दशमलव के बाद 1 अंक हो → हर = 10
- दशमलव के बाद 2 अंक हों → हर = 100
- दशमलव के बाद 3 अंक हों → हर = 1000
इसके बाद प्राप्त भिन्न को जहाँ संभव हो, सरल किया जाता है।
उदाहरण 1 — 0.35 को भिन्न में बदलें
0.35 में दशमलव के बाद 2 अंक हैं।
इसलिए दशमलव हटाकर 35 को अंश में तथा हर में 100 लिखेंगे—
0.35 = 35/100
अब 35/100 को सरल करने पर—
35/100 = 7/20
अतः—
0.35 = 7/20
उदाहरण 2 — 3.005 को भिन्न में बदलें
3.005 में दशमलव के बाद 3 अंक हैं।
इसलिए—
3.005 = 3005/1000
इसे मिश्र रूप में—
3.005 = 3 5/1000
और 5/1000 को सरल करने पर—
5/1000 = 1/200
अतः—
3.005 = 3 1/200
दशमलव से भिन्न बनाने की सरल विधि
दशमलव हटाएँ → दशमलव के बाद के अंक गिनें → हर में 1 के बाद उतने शून्य लगाएँ → भिन्न को सरल करें।
भिन्न को दशमलव संख्या में बदलना
किसी भिन्न को दशमलव संख्या में बदलने के लिए भिन्न के अंश को हर से विभाजित किया जाता है।
अर्थात यदि भिन्न a/b है, तो दशमलव रूप प्राप्त करने के लिए—
a ÷ b
की प्रक्रिया की जाती है।
उदाहरण 3 — 24/7 को दशमलव में बदलें
24/7 को दशमलव में बदलने के लिए 24 को 7 से भाग देंगे।
3.428
______
7 ) 24.000
21
--
30
28
--
20
14
--
60
56
--
4
अतः दिए गए उदाहरण के अनुसार—
24/7 = 3.428
भिन्न से दशमलव बनाने की विधि
- भिन्न के अंश को भाज्य मानें।
- हर को भाजक मानें।
- अंश को हर से भाग दें।
- आवश्यकता होने पर दशमलव लगाकर शून्य नीचे उतारते जाएँ।
- प्राप्त भागफल भिन्न का दशमलव रूप होगा।
दोनों रूपांतरणों में अंतर
- दशमलव से भिन्न— दशमलव हटाकर हर में 10, 100, 1000 आदि लिखा जाता है।
- भिन्न से दशमलव— अंश को हर से भाग दिया जाता है।
दशमलव स्थान और हर का संबंध
- 0.5 → 5/10
- 0.35 → 35/100
- 3.005 → 3005/1000
इससे स्पष्ट है कि दशमलव के बाद अंकों की संख्या हर में लगाए जाने वाले शून्यों की संख्या निर्धारित करती है।
- दशमलव संख्या को भिन्न में बदलने के लिए दशमलव बिन्दु हटाकर संख्या को अंश में लिखा जाता है।
- दशमलव के बाद जितने अंक हों, हर में 1 के बाद उतने शून्य लगाए जाते हैं।
- 0.35 = 35/100 = 7/20।
- 3.005 = 3005/1000 = 3 1/200।
- भिन्न को दशमलव में बदलने के लिए अंश को हर से भाग दिया जाता है।
- 24/7 = 3.428 दिए गए उदाहरण के अनुसार।
- दशमलव के बाद 1, 2 और 3 अंक होने पर हर क्रमशः 10, 100 और 1000 लिया जाता है।
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अपवर्तक (विभाजक) की अवधारणा
अपवर्तक का अर्थ
जो संख्या किसी दूसरी संख्या को पूरी तरह विभाजित कर देती है, वह उस संख्या की अपवर्तक कहलाती है।
इसे गुणनखण्डों की सहायता से भी समझा जा सकता है। यदि दो पूर्णांकों का गुणनफल किसी संख्या के बराबर हो, तो वे दोनों संख्याएँ उस संख्या के अपवर्तक होती हैं।
यदि—
P × Q = कोई संख्या
तो P और Q उस संख्या के अपवर्तक होंगे।
उदाहरण — 56 के अपवर्तक
संख्या 56 को 7 से पूरी तरह विभाजित किया जा सकता है।
56 ÷ 7 = 8
अतः 7, संख्या 56 का अपवर्तक है।
इसी प्रकार—
7 × 8 = 56
इसलिए 7 और 8 दोनों 56 के अपवर्तक हैं।
गुणनखण्डों द्वारा अपवर्तक को समझना
यदि दो संख्याओं को गुणा करने पर कोई निश्चित संख्या प्राप्त होती है, तो वे दोनों उस संख्या के गुणनखण्ड अथवा अपवर्तक कहलाती हैं।
जैसे—
- 1 × 6 = 6 → 1 और 6, संख्या 6 के अपवर्तक हैं।
- 2 × 3 = 6 → 2 और 3, संख्या 6 के अपवर्तक हैं।
- 3 × 4 = 12 → 3 और 4, संख्या 12 के अपवर्तक हैं।
- 2 × 6 = 12 → 2 और 6, संख्या 12 के अपवर्तक हैं।
- −3 × −4 = 12 → −3 और −4 भी 12 के अपवर्तक हैं।
किसी संख्या के अपवर्तक कैसे ज्ञात करें?
किसी संख्या के अपवर्तक ज्ञात करने के लिए ऐसी संख्याओं की खोज की जाती है जिनसे दी गई संख्या बिना शेषफल के विभाजित हो जाए।
उदाहरण के लिए संख्या 12 लें।
12 को निम्न प्रकार से लिखा जा सकता है—
- 1 × 12 = 12
- 2 × 6 = 12
- 3 × 4 = 12
अतः 12 के अपवर्तक हैं—
1, 2, 3, 4, 6, 12
कुछ संख्याओं के अपवर्तक
| संख्या | अपवर्तक |
|---|---|
| 2 | 1, 2 |
| 3 | 1, 3 |
| 4 | 1, 2, 4 |
| 6 | 1, 2, 3, 6 |
| 8 | 1, 2, 4, 8 |
| 10 | 1, 2, 5, 10 |
| 12 | 1, 2, 3, 4, 6, 12 |
| 15 | 1, 3, 5, 15 |
| 20 | 1, 2, 4, 5, 10, 20 |
| 25 | 1, 5, 25 |
| 30 | 1, 2, 3, 5, 6, 10, 15, 30 |
| 50 | 1, 2, 5, 10, 25, 50 |
| 100 | 1, 2, 4, 5, 10, 20, 25, 50, 100 |
अपवर्तक से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
1. संख्या 1 प्रत्येक संख्या का अपवर्तक है
प्रत्येक संख्या 1 से पूर्णतः विभाजित होती है। इसलिए 1 प्रत्येक संख्या का अपवर्तक होता है।
जैसे—
- 6 ÷ 1 = 6
- 12 ÷ 1 = 12
- 20 ÷ 1 = 20
2. प्रत्येक संख्या स्वयं अपनी अपवर्तक होती है
किसी संख्या को उसी संख्या से भाग देने पर भागफल 1 प्राप्त होता है।
जैसे—
- 6 ÷ 6 = 1
- 12 ÷ 12 = 1
- 25 ÷ 25 = 1
इसलिए प्रत्येक संख्या स्वयं की अपवर्तक होती है।
3. अपवर्तक संख्या को पूर्णतः विभाजित करता है
किसी संख्या का अपवर्तक वह संख्या होती है जो उसे बिना शेषफल के पूरी तरह विभाजित कर दे।
जैसे—
12 ÷ 3 = 4
यहाँ कोई शेषफल नहीं है। इसलिए 3, संख्या 12 का अपवर्तक है।
4. अपवर्तक दी गई संख्या से बड़ा नहीं होता
किसी संख्या का धनात्मक अपवर्तक उस संख्या से छोटा या उसके बराबर होता है।
जैसे 12 के अपवर्तक—
1, 2, 3, 4, 6, 12
इनमें सबसे बड़ा अपवर्तक स्वयं 12 है।
अपवर्तक की पहचान की सरल विधि
किसी संख्या A के लिए यदि—
A ÷ B
करने पर शेषफल 0 प्राप्त हो, तो B, A का अपवर्तक है।
उदाहरण—
56 ÷ 7 = 8
अतः 7, संख्या 56 का अपवर्तक है।
- जो संख्या किसी दूसरी संख्या को पूरी तरह विभाजित करती है, वह उसकी अपवर्तक कहलाती है।
- यदि P × Q किसी संख्या के बराबर है, तो P और Q उस संख्या के अपवर्तक होते हैं।
- 7 × 8 = 56, इसलिए 7 और 8 संख्या 56 के अपवर्तक हैं।
- 12 के अपवर्तक 1, 2, 3, 4, 6 और 12 हैं।
- 1 प्रत्येक संख्या का अपवर्तक है।
- प्रत्येक संख्या स्वयं अपनी अपवर्तक होती है।
- अपवर्तक दी गई संख्या को बिना शेषफल के पूर्णतः विभाजित करता है।
- किसी संख्या का धनात्मक अपवर्तक उस संख्या से छोटा या उसके बराबर होता है।
अपवर्त्य (गुणज) की अवधारणा
अपवर्त्य (गुणज) का अर्थ
किसी पूर्णांक को किसी संख्या से गुणा करने पर प्राप्त परिणाम उस संख्या का अपवर्त्य अथवा गुणज कहलाता है।
उदाहरण के लिए—
3 × 5 = 15
अतः 15, संख्या 3 तथा संख्या 5 से गुणा द्वारा प्राप्त होने वाली संख्या है।
किसी संख्या के गुणज कैसे प्राप्त करते हैं?
किसी संख्या के गुणज ज्ञात करने के लिए उस संख्या का क्रमशः 1, 2, 3, 4, 5... से गुणा किया जाता है।
यदि कोई संख्या n है, तो उसके गुणज इस प्रकार प्राप्त होते हैं—
n × 1, n × 2, n × 3, n × 4, n × 5...
उदाहरण — 8 के प्रथम पाँच अपवर्त्य/गुणज
8 को क्रमशः 1, 2, 3, 4 और 5 से गुणा करेंगे—
- 8 × 1 = 8
- 8 × 2 = 16
- 8 × 3 = 24
- 8 × 4 = 32
- 8 × 5 = 40
अतः 8 के प्रथम पाँच गुणज हैं—
8, 16, 24, 32, 40
उदाहरण — 3 के गुणज
3 को क्रमशः प्राकृतिक संख्याओं से गुणा करने पर—
- 3 × 1 = 3
- 3 × 2 = 6
- 3 × 3 = 9
- 3 × 4 = 12
- 3 × 5 = 15
अतः 3 के गुणज—
3, 6, 9, 12, 15...
उदाहरण — 6 के गुणज
इसी प्रकार—
- 6 × 1 = 6
- 6 × 2 = 12
- 6 × 3 = 18
- 6 × 4 = 24
अतः 6 के गुणज—
6, 12, 18, 24...
विभिन्न संख्याओं के गुणज
| संख्या | अपवर्त्य (गुणज) |
|---|---|
| 1 | 1, 2, 3, 4, 5... |
| 2 | 2, 4, 6, 8, 10... |
| 3 | 3, 6, 9, 12, 15... |
| 4 | 4, 8, 12, 16, 20... |
| 5 | 5, 10, 15, 20, 25... |
| 15 | 15, 30, 45, 60, 75... |
| 20 | 20, 40, 60, 80, 100... |
गुणज अनन्त होते हैं
किसी संख्या के गुणजों की संख्या निश्चित नहीं होती। किसी संख्या को 1, 2, 3, 4, 5... से लगातार गुणा करते जाने पर नए-नए गुणज प्राप्त होते रहते हैं।
अतः किसी संख्या के गुणज अनन्त होते हैं।
जैसे 5 के गुणज—
5, 10, 15, 20, 25...
यह क्रम आगे भी चलता रहता है।
प्रत्येक संख्या स्वयं का गुणज होती है
किसी संख्या को 1 से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
जैसे—
- 8 × 1 = 8
- 15 × 1 = 15
- 20 × 1 = 20
इसलिए प्रत्येक संख्या स्वयं का गुणज होती है।
अपवर्तक और अपवर्त्य में सरल अंतर
अपवर्तक और अपवर्त्य को उनके गुणा-संबंध से समझा जा सकता है।
जैसे—
8 × 3 = 24
यहाँ 24, संख्या 8 को 3 से गुणा करने पर प्राप्त होता है। इसलिए 24, 8 का गुणज (अपवर्त्य) है।
इसी क्रम में—
8 × 1 = 8
8 × 2 = 16
8 × 3 = 24
8 × 4 = 32
8 × 5 = 40
से 8 के गुणज क्रमशः 8, 16, 24, 32 और 40 प्राप्त होते हैं।
गुणज ज्ञात करने की सरल विधि
दी गई संख्या × 1 → पहला गुणज
दी गई संख्या × 2 → दूसरा गुणज
दी गई संख्या × 3 → तीसरा गुणज
दी गई संख्या × 4 → चौथा गुणज
इसी प्रकार यह क्रम आगे बढ़ता रहता है।
- किसी पूर्णांक को किसी संख्या से गुणा करने पर प्राप्त परिणाम उसका अपवर्त्य अथवा गुणज कहलाता है।
- किसी संख्या के गुणज प्राप्त करने के लिए उसे क्रमशः 1, 2, 3, 4... से गुणा किया जाता है।
- 8 के प्रथम पाँच गुणज 8, 16, 24, 32 और 40 हैं।
- 3 के गुणज 3, 6, 9, 12, 15... हैं।
- 6 के गुणज 6, 12, 18, 24... हैं।
- किसी संख्या के गुणज अनन्त होते हैं।
- प्रत्येक संख्या स्वयं का गुणज होती है, क्योंकि किसी संख्या को 1 से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
- 8 × 3 = 24, इसलिए 24 संख्या 8 का गुणज है।
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समापवर्तक एवं समापवर्त्य
समापवर्तक का अर्थ
वे अपवर्तक अथवा गुणनखण्ड जो दो या दो से अधिक संख्याओं में उभयनिष्ठ होते हैं, उन संख्याओं के समापवर्तक कहलाते हैं।
अर्थात दो या अधिक संख्याओं के अपवर्तकों की सूची में जो संख्याएँ सभी में समान रूप से उपस्थित हों, वे उनके समापवर्तक होती हैं।
उदाहरण — 18, 48 और 72 के समापवर्तक
सबसे पहले तीनों संख्याओं के अपवर्तक लिखेंगे।
18 के अपवर्तक—
1, 2, 3, 6, 9, 18
48 के अपवर्तक—
1, 2, 3, 4, 6, 8, 12, 16, 24, 48
72 के अपवर्तक—
1, 2, 3, 4, 6, 8, 9, 12, 18, 24, 36, 72
अब तीनों सूचियों में समान अपवर्तकों को देखें—
1, 2, 3 और 6
अतः 18, 48 और 72 के समापवर्तक हैं—
1, 2, 3, 6
समापवर्तक ज्ञात करने की विधि
- दी गई प्रत्येक संख्या के सभी अपवर्तक लिखें।
- सभी सूचियों की तुलना करें।
- जो अपवर्तक प्रत्येक सूची में समान रूप से उपस्थित हों, उन्हें अलग लिखें।
- ये समान अपवर्तक ही दी गई संख्याओं के समापवर्तक होंगे।
उदाहरण — 12, 10, 15 और 20 के समापवर्तक
| संख्या | अपवर्तक |
|---|---|
| 12 | 1, 2, 3, 4, 6, 12 |
| 10 | 1, 2, 5, 10 |
| 15 | 1, 3, 5, 15 |
| 20 | 1, 2, 4, 5, 10, 20 |
चारों संख्याओं की सूची में केवल 1 समान रूप से उपस्थित है।
अतः 12, 10, 15 और 20 का समापवर्तक—
1
है।
उदाहरण — 64, 36 और 24 के समापवर्तक
| संख्या | अपवर्तक |
|---|---|
| 64 | 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64 |
| 36 | 1, 2, 3, 4, 6, 9, 12, 36 |
| 24 | 1, 2, 3, 4, 6, 8, 12, 24 |
तीनों संख्याओं में उभयनिष्ठ अपवर्तक हैं—
1, 2, 4
अतः 64, 36 और 24 के समापवर्तक 1, 2 और 4 हैं।
समापवर्त्य का अर्थ
वे अपवर्त्य अथवा गुणज जो दो या दो से अधिक संख्याओं के लिए उभयनिष्ठ होते हैं, उन संख्याओं के समापवर्त्य कहलाते हैं।
अर्थात जब दो या अधिक संख्याओं के गुणज लिखे जाते हैं, तो उनमें जो गुणज सभी सूचियों में समान रूप से आता है, वह उन संख्याओं का समापवर्त्य होता है।
उदाहरण — 3, 6 और 9 का समापवर्त्य
तीनों संख्याओं के कुछ गुणज लिखें—
3 के गुणज—
3, 6, 9, 12, 15, 18...
6 के गुणज—
6, 12, 18...
9 के गुणज—
9, 18, 27...
तीनों संख्याओं की गुणज-सूची में 18 समान रूप से उपस्थित है।
अतः 18, संख्या 3, 6 और 9 का समापवर्त्य है।
समापवर्त्य ज्ञात करने की विधि
- दी गई प्रत्येक संख्या के गुणज क्रमशः लिखें।
- सभी गुणज-सूचियों की तुलना करें।
- जो गुणज सभी संख्याओं की सूचियों में समान रूप से उपस्थित हो, वह उनका समापवर्त्य होगा।
उदाहरण — 4, 8 और 12 का समापवर्त्य
4 के गुणज—
4, 8, 12, 16, 20, 24...
8 के गुणज—
8, 16, 24, 32, 40...
12 के गुणज—
12, 24, 36, 48, 60...
तीनों सूचियों में 24 समान गुणज है।
अतः 4, 8 और 12 का समापवर्त्य—
24
है।
समापवर्तक और समापवर्त्य में अंतर
| समापवर्तक | समापवर्त्य |
|---|---|
| समान अपवर्तक या गुणनखण्ड | समान अपवर्त्य या गुणज |
| अपवर्तकों की सूची से ज्ञात होता है | गुणजों की सूची से ज्ञात होता है |
| 18, 48, 72 के लिए 1, 2, 3, 6 | 3, 6, 9 के लिए 18 |
पहचान की सरल विधि
यदि प्रश्न में समान अपवर्तक खोजने हों, तो पहले प्रत्येक संख्या के अपवर्तक लिखें।
यदि प्रश्न में समान गुणज खोजने हों, तो प्रत्येक संख्या के गुणज लिखें।
इस प्रकार—
समान अपवर्तक → समापवर्तक
समान गुणज → समापवर्त्य
- दो या अधिक संख्याओं में समान रूप से उपस्थित अपवर्तक समापवर्तक कहलाते हैं।
- 18, 48 और 72 के समापवर्तक 1, 2, 3 और 6 हैं।
- 12, 10, 15 और 20 में उभयनिष्ठ अपवर्तक 1 है।
- 64, 36 और 24 के समापवर्तक 1, 2 और 4 हैं।
- दो या अधिक संख्याओं में समान रूप से उपस्थित गुणज समापवर्त्य कहलाते हैं।
- 3, 6 और 9 का उभयनिष्ठ गुणज 18 है।
- 4, 8 और 12 का उभयनिष्ठ गुणज 24 है।
- समान अपवर्तक = समापवर्तक तथा समान गुणज = समापवर्त्य।