भाज्य एवं अभाज्य संख्याओं की अवधारणा
अभाज्य संख्या का अर्थ
वे संख्याएँ जिनके केवल दो विभाजक—1 तथा स्वयं संख्या होते हैं, अभाज्य संख्याएँ कहलाती हैं।
अर्थात किसी अभाज्य संख्या को केवल 1 और उसी संख्या से पूर्णतः विभाजित किया जा सकता है।
जैसे—
- 2 के विभाजक = 1, 2
- 3 के विभाजक = 1, 3
- 5 के विभाजक = 1, 5
- 7 के विभाजक = 1, 7
इसलिए 2, 3, 5 और 7 अभाज्य संख्याएँ हैं।
भाज्य संख्या का अर्थ
वे संख्याएँ जिनके दो से अधिक विभाजक होते हैं, भाज्य संख्याएँ कहलाती हैं।
अर्थात ऐसी संख्या जिसे 1 और स्वयं संख्या के अतिरिक्त किसी अन्य संख्या से भी पूर्णतः विभाजित किया जा सके, भाज्य संख्या होती है।
जैसे—
- 4 के विभाजक = 1, 2, 4
- 6 के विभाजक = 1, 2, 3, 6
- 8 के विभाजक = 1, 2, 4, 8
- 9 के विभाजक = 1, 3, 9
इन सभी संख्याओं के दो से अधिक विभाजक हैं, इसलिए ये भाज्य संख्याएँ हैं।
उदाहरण — 7 भाज्य है अथवा अभाज्य?
7 को विभिन्न संख्याओं से विभाजित करके देखें—
- 7 ÷ 2 करने पर पूर्ण संख्या प्राप्त नहीं होती।
- 7 ÷ 3 करने पर पूर्ण संख्या प्राप्त नहीं होती।
- 7 ÷ 7 = 1
- 7 ÷ 1 = 7
अतः 7 केवल 1 और 7 से पूर्णतः विभाजित होता है।
इसलिए 7 एक अभाज्य संख्या है।
उदाहरण — 12 भाज्य है अथवा अभाज्य?
12 को निम्न गुणनखण्डों के रूप में लिखा जा सकता है—
- 1 × 12 = 12
- 2 × 6 = 12
- 3 × 4 = 12
अतः 12 के विभाजक हैं—
1, 2, 3, 4, 6 और 12
12 के दो से अधिक विभाजक हैं, इसलिए 12 एक भाज्य संख्या है।
संख्या 1 की विशेष स्थिति
संख्या 1 न तो भाज्य संख्या है और न ही अभाज्य संख्या।
क्योंकि 1 का केवल एक ही विभाजक 1 है, जबकि अभाज्य संख्या के लिए ठीक दो विभाजक होने आवश्यक हैं।
1 से 14 तक संख्याओं का वर्गीकरण
| संख्या | वर्गीकरण |
|---|---|
| 1 | न भाज्य, न अभाज्य |
| 2 | अभाज्य |
| 3 | अभाज्य |
| 4 | भाज्य |
| 5 | अभाज्य |
| 6 | भाज्य |
| 7 | अभाज्य |
| 8 | भाज्य |
| 9 | भाज्य |
| 10 | भाज्य |
| 11 | अभाज्य |
| 12 | भाज्य |
| 13 | अभाज्य |
| 14 | भाज्य |
उदाहरण — 13 भाज्य है अथवा अभाज्य?
13 को 2 या 3 से भाग देने पर पूर्ण संख्या प्राप्त नहीं होती, जबकि—
- 13 ÷ 13 = 1
- 13 ÷ 1 = 13
अतः 13 केवल 1 और 13 से पूर्णतः विभाजित होता है।
इसलिए 13 एक अभाज्य संख्या है।
उदाहरण — 24 भाज्य है अथवा अभाज्य?
24 को निम्न प्रकार से गुणनखण्डों में लिखा जा सकता है—
- 1 × 24 = 24
- 2 × 12 = 24
- 4 × 6 = 24
इससे स्पष्ट है कि 24 को 1 और 24 के अतिरिक्त अन्य संख्याओं से भी पूर्णतः विभाजित किया जा सकता है।
अतः 24 एक भाज्य संख्या है।
20 से 29 तक अभाज्य संख्याएँ
20 से 29 तक संख्याओं की जाँच करने पर—
- 20 — भाज्य
- 21 — भाज्य
- 22 — भाज्य
- 23 — अभाज्य
- 24 — भाज्य
- 25 — भाज्य
- 26 — भाज्य
- 27 — भाज्य
- 28 — भाज्य
- 29 — अभाज्य
अतः 20 से 29 के बीच अभाज्य संख्याएँ हैं—
23 और 29
40 से 44 तक अभाज्य संख्याएँ
40 से 44 के बीच—
- 40 — भाज्य
- 41 — अभाज्य
- 42 — भाज्य
- 43 — अभाज्य
- 44 — भाज्य
अतः 40 से 44 के बीच अभाज्य संख्याएँ हैं—
41 और 43
2 से 100 तक की अभाज्य संख्याएँ
2 से 100 के बीच अभाज्य संख्याएँ निम्न हैं—
2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37, 41, 43, 47, 53, 59, 61, 67, 71, 73, 79, 83, 89 और 97
भाज्य एवं अभाज्य संख्या की पहचान
किसी संख्या के विभाजक ज्ञात करके उसका वर्गीकरण आसानी से किया जा सकता है।
- यदि संख्या के केवल 1 और स्वयं संख्या दो विभाजक हों → अभाज्य संख्या।
- यदि संख्या के दो से अधिक विभाजक हों → भाज्य संख्या।
- संख्या 1 न भाज्य है और न अभाज्य।
भाज्य और अभाज्य में अंतर
| अभाज्य संख्या | भाज्य संख्या |
|---|---|
| केवल दो विभाजक होते हैं | दो से अधिक विभाजक होते हैं |
| 1 और स्वयं संख्या से विभाजित होती है | 1 और स्वयं के अतिरिक्त अन्य संख्या से भी विभाजित होती है |
| जैसे 2, 3, 5, 7 | जैसे 4, 6, 8, 9 |
- जिस संख्या के केवल दो विभाजक 1 और स्वयं संख्या हों, वह अभाज्य संख्या कहलाती है।
- जिस संख्या के दो से अधिक विभाजक हों, वह भाज्य संख्या कहलाती है।
- संख्या 1 न तो भाज्य है और न ही अभाज्य।
- 7 के केवल 1 और 7 दो विभाजक हैं, इसलिए 7 अभाज्य है।
- 12 के विभाजक 1, 2, 3, 4, 6 और 12 हैं, इसलिए 12 भाज्य है।
- 13 एक अभाज्य संख्या है।
- 24 एक भाज्य संख्या है।
- 20 से 29 के बीच अभाज्य संख्याएँ 23 और 29 हैं।
- 40 से 44 के बीच अभाज्य संख्याएँ 41 और 43 हैं।
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लघुतम समापवर्त्य (LCM) की अवधारणा
लघुतम समापवर्त्य का अर्थ
वह छोटी से छोटी संख्या जिसमें दी गई सभी संख्याओं का पूरा-पूरा भाग चला जाए, उन संख्याओं का लघुतम समापवर्त्य कहलाती है।
लघुतम समापवर्त्य को संक्षेप में ल.स. अथवा LCM लिखा जाता है।
LCM का पूर्ण रूप
LCM तीन शब्दों से मिलकर बना है—
- L = Lowest — लघुतम
- C = Common — उभयनिष्ठ
- M = Multiple — गुणज
अर्थात LCM = Lowest Common Multiple।
उभयनिष्ठ गुणज को समझें
दो या दो से अधिक संख्याओं के ऐसे गुणज जो सभी संख्याओं में समान हों, उभयनिष्ठ गुणज कहलाते हैं।
इन उभयनिष्ठ गुणजों में जो सबसे छोटा होता है, वही उनका लघुतम समापवर्त्य होता है।
उदाहरण — 4, 6 और 8 का LCM
4, 6 और 8 के कुछ उभयनिष्ठ गुणज हैं—
24, 48, 72, 96...
इनमें सबसे छोटी संख्या 24 है।
अतः—
4, 6 और 8 का लघुतम समापवर्त्य = 24
24 ही LCM क्यों है?
24 को 4, 6 और 8 तीनों से पूरा-पूरा विभाजित किया जा सकता है—
- 24 ÷ 4 = 6
- 24 ÷ 6 = 4
- 24 ÷ 8 = 3
और 24 इन तीनों का सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज है। इसलिए 24 उनका लघुतम समापवर्त्य है।
LCM की पहचान की सरल प्रक्रिया
किसी समूह की संख्याओं का लघुतम समापवर्त्य समझने के लिए—
- दी गई संख्याओं के गुणज देखें।
- उनमें समान अर्थात उभयनिष्ठ गुणज पहचानें।
- उभयनिष्ठ गुणजों में सबसे छोटी संख्या चुनें।
- वही संख्या उनका लघुतम समापवर्त्य होगी।
अर्थात—
उभयनिष्ठ गुणज → सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज → लघुतम समापवर्त्य
LCM की मुख्य विशेषता
लघुतम समापवर्त्य ऐसी सबसे छोटी संख्या होती है जो दी गई सभी संख्याओं से पूर्णतः विभाजित हो जाती है।
उदाहरण के लिए 4, 6 और 8 के लिए—
24 ÷ 4, 24 ÷ 6 और 24 ÷ 8
तीनों स्थितियों में पूर्ण संख्या प्राप्त होती है।
लघुतम समापवर्त्य ज्ञात करने की विधियाँ
लघुतम समापवर्त्य ज्ञात करने की मुख्यतः दो विधियाँ हैं—
- गुणनखण्ड विधि
- भाग विधि
इन दोनों विधियों का विस्तृत अध्ययन आगे के Topics में किया जाएगा।
- दी गई सभी संख्याओं से पूर्णतः विभाजित होने वाली सबसे छोटी संख्या उनका लघुतम समापवर्त्य कहलाती है।
- लघुतम समापवर्त्य को ल.स. या LCM लिखा जाता है।
- LCM = Lowest Common Multiple।
- दो या अधिक संख्याओं के समान गुणज उभयनिष्ठ गुणज कहलाते हैं।
- उभयनिष्ठ गुणजों में सबसे छोटा गुणज ही LCM होता है।
- 4, 6 और 8 के उभयनिष्ठ गुणज 24, 48, 72, 96... हैं।
- अतः 4, 6 और 8 का LCM 24 है।
- LCM ज्ञात करने की मुख्य विधियाँ गुणनखण्ड विधि और भाग विधि हैं।
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LCM — गुणनखण्ड विधि
गुणनखण्ड विधि से LCM
गुणनखण्ड विधि में दी गई प्रत्येक संख्या को उसके अभाज्य गुणनखण्डों के रूप में लिखा जाता है। इसके बाद सभी प्राप्त अभाज्य गुणनखण्डों में से प्रत्येक की अधिकतम घात ली जाती है।
इन अधिकतम घात वाले गुणनखण्डों का आपस में गुणा करने पर प्राप्त संख्या दी गई संख्याओं का लघुतम समापवर्त्य (LCM) होती है।
गुणनखण्ड विधि की प्रक्रिया
- दी गई प्रत्येक संख्या के अभाज्य गुणनखण्ड करें।
- गुणनखण्डों को घात के रूप में लिखें।
- प्रत्येक अभाज्य गुणनखण्ड की सबसे बड़ी अर्थात अधिकतम घात चुनें।
- इन अधिकतम घातों का आपस में गुणा करें।
- प्राप्त गुणनफल ही अभीष्ट LCM होगा।
उदाहरण 1 — 8, 12 और 20 का LCM
सबसे पहले तीनों संख्याओं के अभाज्य गुणनखण्ड करेंगे—
8 = 2 × 2 × 2 = 2³ 12 = 2 × 2 × 3 = 2² × 3 20 = 2 × 2 × 5 = 2² × 5
अब अभाज्य गुणनखण्डों की अधिकतम घातें चुनेंगे—
- 2 की अधिकतम घात = 2³
- 3 की अधिकतम घात = 3
- 5 की अधिकतम घात = 5
अतः—
LCM = 2³ × 3 × 5
= 8 × 3 × 5
= 120
इसलिए 8, 12 और 20 का LCM = 120।
यहाँ अधिकतम घात ही क्यों लेते हैं?
LCM ऐसी सबसे छोटी संख्या होनी चाहिए जिसमें दी गई सभी संख्याओं का पूरा-पूरा भाग चले। इसलिए प्रत्येक आवश्यक अभाज्य गुणनखण्ड को उतनी बार लेना पड़ता है जितनी उसकी सबसे अधिक आवश्यकता किसी एक संख्या में है।
उदाहरण में 8 के लिए 2 की घात 3 चाहिए, इसलिए 2 की अधिकतम घात 2³ ली गई।
उदाहरण 2 — 8, 16 और 40 का LCM
अभाज्य गुणनखण्ड—
8 = 2 × 2 × 2 = 2³ 16 = 2 × 2 × 2 × 2 = 2⁴ 40 = 2 × 2 × 2 × 5 = 2³ × 5
अब अधिकतम घातें—
- 2 की अधिकतम घात = 2⁴
- 5 की अधिकतम घात = 5
अतः—
LCM = 2⁴ × 5
= 2 × 2 × 2 × 2 × 5
= 80
इसलिए 8, 16 और 40 का LCM = 80।
उदाहरण 3 — 10, 12 और 24 का LCM
तीनों संख्याओं के अभाज्य गुणनखण्ड—
10 = 2 × 5 12 = 2 × 2 × 3 = 2² × 3 24 = 2 × 2 × 2 × 3 = 2³ × 3
अब 2, 3 और 5 की सबसे बड़ी घात चुनेंगे—
- 2 की अधिकतम घात = 2³
- 3 की अधिकतम घात = 3
- 5 की अधिकतम घात = 5
अतः—
LCM = 2³ × 3 × 5
= 2 × 2 × 2 × 3 × 5
= 120
इसलिए 10, 12 और 24 का LCM = 120।
अधिकतम घात की पहचान
यदि एक ही अभाज्य गुणनखण्ड अलग-अलग संख्याओं में अलग-अलग घात के साथ उपस्थित हो, तो LCM निकालते समय उसकी सबसे बड़ी घात ली जाती है।
जैसे—
8 = 2³ 16 = 2⁴ 40 = 2³ × 5
यहाँ 2 की घातें 3, 4 और 3 हैं। इनमें सबसे बड़ी घात 4 है, इसलिए LCM में 2⁴ लिया जाएगा।
गुणनखण्ड विधि को याद रखने की सरल क्रम-विधि
अभाज्य गुणनखण्ड करें → घात के रूप में लिखें → प्रत्येक की अधिकतम घात चुनें → आपस में गुणा करें → LCM प्राप्त करें
महत्वपूर्ण बात
LCM निकालते समय केवल उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखण्ड ही नहीं लिए जाते, बल्कि दी गई संख्याओं में उपस्थित सभी आवश्यक अभाज्य गुणनखण्ड उनकी अधिकतम घात के साथ लिए जाते हैं।
जैसे 10, 12 और 24 में 5 केवल 10 के गुणनखण्ड में है, फिर भी LCM में 5 लिया जाएगा क्योंकि LCM को 10 से भी पूर्णतः विभाजित होना आवश्यक है।
- गुणनखण्ड विधि में प्रत्येक संख्या को अभाज्य गुणनखण्डों के रूप में लिखा जाता है।
- एक ही अभाज्य गुणनखण्ड की अलग-अलग घातों में से अधिकतम घात ली जाती है।
- सभी आवश्यक अधिकतम घात वाले गुणनखण्डों का गुणनफल LCM होता है।
- 8 = 2³, 12 = 2² × 3 और 20 = 2² × 5।
- अतः 8, 12 और 20 का LCM = 2³ × 3 × 5 = 120।
- 8, 16 और 40 का LCM = 2⁴ × 5 = 80।
- 10, 12 और 24 का LCM = 2³ × 3 × 5 = 120।
- LCM में केवल समान गुणनखण्ड ही नहीं, बल्कि सभी आवश्यक अभाज्य गुणनखण्ड उनकी अधिकतम घात के साथ लिए जाते हैं।
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LCM — भाग विधि एवं अनुप्रयोग
भाग विधि से LCM
भाग विधि में दी गई सभी संख्याओं को एक साथ लिखकर क्रमशः 2, 3, 4... आदि संख्याओं से भाग दिया जाता है।
जिस संख्या में किसी भाजक से पूरा भाग नहीं जाता, उसे अगली पंक्ति में ज्यों का त्यों लिख दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक सभी संख्याओं का भागफल 1 न हो जाए।
अंत में बाईं ओर प्राप्त सभी भाजकों का आपस में गुणा किया जाता है। प्राप्त गुणनफल ही अभीष्ट लघुतम समापवर्त्य (LCM) होता है।
भाग विधि की क्रमिक प्रक्रिया
- सभी संख्याओं को एक पंक्ति में लिखें।
- ऐसी संख्या से भाग दें जिससे कम से कम एक संख्या पूरी तरह विभाजित हो।
- जिस संख्या में भाग न जाए, उसे अगली पंक्ति में ज्यों का त्यों लिखें।
- नई पंक्ति की संख्याओं पर यही प्रक्रिया दोहराएँ।
- जब सभी संख्याएँ 1 हो जाएँ, तब सभी भाजकों को गुणा करें।
- प्राप्त गुणनफल ही LCM होगा।
उदाहरण 1 — 12, 15 और 18 का LCM
2 | 12, 15, 18 | 6, 15, 9 2 | 6, 15, 9 | 3, 15, 9 3 | 3, 15, 9 | 1, 5, 3 3 | 1, 5, 3 | 1, 5, 1 5 | 1, 5, 1 | 1, 1, 1
अब सभी भाजकों का गुणा करेंगे—
LCM = 2 × 2 × 3 × 3 × 5
= 180
अतः 12, 15 और 18 का LCM = 180।
उदाहरण 2 — 56, 70 और 84 का LCM
2 | 56, 70, 84 | 28, 35, 42 2 | 28, 35, 42 | 14, 35, 21 2 | 14, 35, 21 | 7, 35, 21 3 | 7, 35, 21 | 7, 35, 7 5 | 7, 35, 7 | 7, 7, 7 7 | 7, 7, 7 | 1, 1, 1
अतः—
LCM = 2 × 2 × 2 × 3 × 5 × 7
= 840
इसलिए 56, 70 और 84 का LCM = 840।
शेषफल वाले प्रश्नों में LCM का प्रयोग
यदि कोई ऐसी छोटी से छोटी संख्या ज्ञात करनी हो जिसे अलग-अलग संख्याओं से भाग देने पर हर बार समान शेषफल बचे, तो पहले दी गई भाजक संख्याओं का LCM ज्ञात किया जाता है और उसमें वह शेषफल जोड़ दिया जाता है।
उदाहरण 3 — 15, 20, 30 और 40 से भाग देने पर प्रत्येक बार 8 शेष
पहले 15, 20, 30 और 40 का LCM निकालेंगे—
2 | 15, 20, 30, 40 | 15, 10, 15, 20 2 | 15, 10, 15, 20 | 15, 5, 15, 10 2 | 15, 5, 15, 10 | 15, 5, 15, 5 3 | 15, 5, 15, 5 | 5, 5, 5, 5 5 | 5, 5, 5, 5 | 1, 1, 1, 1
अतः—
LCM = 2 × 2 × 2 × 3 × 5
= 120
प्रत्येक स्थिति में शेषफल 8 चाहिए, इसलिए—
अभीष्ट संख्या = 120 + 8
= 128
अतः अभीष्ट छोटी से छोटी संख्या 128 है।
अनुपात की तुलना में LCM का प्रयोग
दो अनुपातों की तुलना करने के लिए उनके हरों का LCM लेकर दोनों भिन्नों को समान हर में बदला जा सकता है।
उदाहरण 4 — 2 : 3 और 5 : 8 में कौन-सा अनुपात बड़ा है?
3 और 8 का LCM—
24
अब—
2/3 = (2 × 8)/(3 × 8) = 16/24
तथा—
5/8 = (5 × 3)/(8 × 3) = 15/24
क्योंकि—
16/24 > 15/24
अतः—
2 : 3 > 5 : 8
माप संबंधी प्रश्नों में LCM
जब अलग-अलग मापों को किसी ऐसी बड़ी मात्रा में पूरा-पूरा समाहित करना हो, जिसमें प्रत्येक दी गई मात्रा का पूरा भाग चले, वहाँ LCM का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण 5 — 32 लीटर और 24 लीटर की बाल्टियाँ
दो बाल्टियों में क्रमशः 32 लीटर और 24 लीटर रसना भरा है। ऐसी मात्रा ज्ञात करनी है जिसे दोनों बाल्टियों से पूरा-पूरा मापा जा सके।
32 और 24 का LCM—
2 | 32, 24 | 16, 12 2 | 16, 12 | 8, 6 2 | 8, 6 | 4, 3 2 | 4, 3 | 2, 3 2 | 2, 3 | 1, 3 3 | 1, 3 | 1, 1
अतः—
LCM = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 3
= 96
अतः ऐसी मात्रा 96 लीटर होगी।
उदाहरण 6 — 12, 18, 24 और 30 से पूर्णतः विभाजित होने वाली छोटी से छोटी संख्या
2 | 12, 18, 24, 30 | 6, 9, 12, 15 2 | 6, 9, 12, 15 | 3, 9, 6, 15 2 | 3, 9, 6, 15 | 3, 9, 3, 15 3 | 3, 9, 3, 15 | 1, 3, 1, 5 3 | 1, 3, 1, 5 | 1, 1, 1, 5 5 | 1, 1, 1, 5 | 1, 1, 1, 1
अतः—
LCM = 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 5
= 360
इसलिए अभीष्ट छोटी से छोटी संख्या 360 है।
उदाहरण 7 — 5, 10 और 15 का LCM
2 | 5, 10, 15 | 5, 5, 15 3 | 5, 5, 15 | 5, 5, 5 5 | 5, 5, 5 | 1, 1, 1
अतः—
LCM = 2 × 3 × 5
= 30
इसलिए 5, 10 और 15 का LCM = 30।
क्षमता संबंधी प्रश्न
तीन डिब्बों में क्रमशः 30 लीटर, 35 लीटर और 40 लीटर दूध हो और ऐसी मात्रा ज्ञात करनी हो जिसमें इन सभी डिब्बों का दूध पूरा-पूरा मापा जा सके, तो इन संख्याओं का LCM निकाला जाता है।
2 | 30, 35, 40 | 15, 35, 20 2 | 15, 35, 20 | 15, 35, 10 2 | 15, 35, 10 | 15, 35, 5 3 | 15, 35, 5 | 5, 35, 5 5 | 5, 35, 5 | 1, 7, 1 7 | 1, 7, 1 | 1, 1, 1
अतः—
LCM = 2 × 2 × 2 × 3 × 5 × 7
= 840
अतः अभीष्ट मात्रा 840 लीटर होगी।
कतार संबंधी प्रश्न
यदि विद्यार्थियों को 15, 20, 25 और 30 की कतारों में इस प्रकार खड़ा करना हो कि हर बार कोई विद्यार्थी शेष न बचे, तो विद्यार्थियों की न्यूनतम संख्या इन संख्याओं का LCM होगी।
2 | 15, 20, 25, 30 | 15, 10, 25, 15 2 | 15, 10, 25, 15 | 15, 5, 25, 15 3 | 15, 5, 25, 15 | 5, 5, 25, 5 5 | 5, 5, 25, 5 | 1, 1, 5, 1 5 | 1, 1, 5, 1 | 1, 1, 1, 1
अतः—
LCM = 2 × 2 × 3 × 5 × 5
= 300
इसलिए विद्यार्थियों की न्यूनतम संख्या 300 होगी।
भाग विधि को याद रखने की सरल प्रक्रिया
संख्याएँ एक साथ लिखें → क्रमशः भाग दें → न कटने वाली संख्या ज्यों की त्यों रखें → सभी को 1 तक पहुँचाएँ → भाजकों का गुणा करें → LCM प्राप्त करें
- भाग विधि में सभी संख्याओं को एक साथ लिखकर क्रमशः विभाजित किया जाता है।
- जिस संख्या में भाग न जाए, उसे अगली पंक्ति में ज्यों का त्यों लिखा जाता है।
- जब सभी संख्याएँ 1 हो जाएँ, तब सभी भाजकों का गुणनफल LCM होता है।
- 12, 15 और 18 का LCM = 180।
- 56, 70 और 84 का LCM = 840।
- 15, 20, 30 और 40 का LCM 120 है; प्रत्येक बार 8 शेष रहने वाली छोटी से छोटी संख्या 128 है।
- 2 : 3 > 5 : 8।
- 32 और 24 का LCM = 96।
- 12, 18, 24 और 30 का LCM = 360।
- 5, 10 और 15 का LCM = 30।
- 30, 35 और 40 का LCM = 840।
- 15, 20, 25 और 30 का LCM = 300।
महत्तम समापवर्तक (HCF) की अवधारणा
महत्तम समापवर्तक का अर्थ
दो या दो से अधिक दी गई संख्याओं का सबसे बड़ा सार्वविभाजक उनका महत्तम समापवर्तक कहलाता है।
अर्थात वह सबसे बड़ी संख्या जो दी गई सभी संख्याओं को पूरा-पूरा विभाजित कर दे, उनका महत्तम समापवर्तक होती है।
महत्तम समापवर्तक को संक्षेप में म.स. अथवा HCF लिखा जाता है।
उभयनिष्ठ विभाजक क्या होते हैं?
जब दो या दो से अधिक संख्याओं के विभाजक लिखे जाते हैं, तो उनमें जो विभाजक सभी संख्याओं में समान होते हैं, वे उभयनिष्ठ विभाजक कहलाते हैं।
इन उभयनिष्ठ विभाजकों में जो संख्या सबसे बड़ी होती है, वही उन संख्याओं का महत्तम समापवर्तक होती है।
HCF ज्ञात करने की मूल प्रक्रिया
- दी गई सभी संख्याओं के विभाजक ज्ञात करें।
- उन विभाजकों में उभयनिष्ठ अर्थात समान विभाजक पहचानें।
- उभयनिष्ठ विभाजकों में सबसे बड़ी संख्या चुनें।
- वही संख्या दी गई संख्याओं का महत्तम समापवर्तक होगी।
उदाहरण — 12, 24 और 36 का महत्तम समापवर्तक
सबसे पहले तीनों संख्याओं के विभाजक लिखेंगे—
12 के विभाजक—
1, 2, 3, 4, 6, 12
24 के विभाजक—
1, 2, 3, 4, 6, 8, 12, 24
36 के विभाजक—
1, 2, 3, 4, 6, 9, 12, 18, 36
तीनों संख्याओं में उभयनिष्ठ विभाजक हैं—
1, 2, 3, 4, 6 और 12
इनमें सबसे बड़ा उभयनिष्ठ विभाजक 12 है।
अतः—
12, 24 और 36 का महत्तम समापवर्तक = 12
12 ही HCF क्यों है?
12 संख्या 12, 24 और 36 तीनों को पूरा-पूरा विभाजित करती है—
- 12 ÷ 12 = 1
- 24 ÷ 12 = 2
- 36 ÷ 12 = 3
और तीनों संख्याओं का इससे बड़ा कोई उभयनिष्ठ विभाजक नहीं है।
इसलिए 12 इन तीनों संख्याओं का HCF है।
महत्तम समापवर्तक को सरल रूप में समझें
HCF में दो बातें आवश्यक हैं—
- संख्या सभी दी गई संख्याओं की उभयनिष्ठ विभाजक हो।
- सभी उभयनिष्ठ विभाजकों में वह सबसे बड़ी हो।
अर्थात—
समान विभाजक → सबसे बड़ा समान विभाजक → HCF
LCM और HCF की मूल अवधारणा में अंतर
| LCM | HCF |
|---|---|
| उभयनिष्ठ गुणजों से संबंधित | उभयनिष्ठ विभाजकों से संबंधित |
| सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज | सबसे बड़ा उभयनिष्ठ विभाजक |
महत्तम समापवर्तक ज्ञात करने की विधियाँ
महत्तम समापवर्तक मुख्यतः दो विधियों से ज्ञात किया जा सकता है—
- गुणनखण्ड विधि
- भागफल विधि
इन दोनों विधियों का विस्तृत अध्ययन अगले Topics में किया जाएगा।
- दी गई संख्याओं का सबसे बड़ा सार्वविभाजक उनका महत्तम समापवर्तक कहलाता है।
- महत्तम समापवर्तक को म.स. अथवा HCF लिखा जाता है।
- जो विभाजक सभी दी गई संख्याओं में समान हों, वे उभयनिष्ठ विभाजक कहलाते हैं।
- उभयनिष्ठ विभाजकों में सबसे बड़ी संख्या HCF होती है।
- 12, 24 और 36 के उभयनिष्ठ विभाजक 1, 2, 3, 4, 6 और 12 हैं।
- अतः 12, 24 और 36 का HCF = 12।
- HCF ज्ञात करने की मुख्य विधियाँ गुणनखण्ड विधि और भागफल विधि हैं।
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HCF — गुणनखण्ड विधि
गुणनखण्ड विधि से HCF
गुणनखण्ड विधि में दी गई प्रत्येक संख्या को उसके अभाज्य गुणनखण्डों के रूप में लिखा जाता है।
इसके बाद सभी संख्याओं में जो अभाज्य गुणनखण्ड उभयनिष्ठ होते हैं, उन्हें चुना जाता है। उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखण्डों की आवश्यक न्यूनतम घातों का गुणनफल दी गई संख्याओं का महत्तम समापवर्तक (HCF) होता है।
गुणनखण्ड विधि की प्रक्रिया
- दी गई प्रत्येक संख्या के अभाज्य गुणनखण्ड करें।
- सभी संख्याओं में समान अर्थात उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखण्ड पहचानें।
- उभयनिष्ठ गुणनखण्डों को उनकी न्यूनतम आवश्यक घात के साथ लें।
- इन उभयनिष्ठ गुणनखण्डों का आपस में गुणा करें।
- प्राप्त गुणनफल ही महत्तम समापवर्तक होगा।
उदाहरण 1 — 18 और 42 का HCF
सबसे पहले दोनों संख्याओं के अभाज्य गुणनखण्ड करेंगे—
18 = 2 × 3 × 3 42 = 2 × 3 × 7
दोनों संख्याओं में उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखण्ड हैं—
2 और 3
अतः—
HCF = 2 × 3
= 6
इसलिए 18 और 42 का महत्तम समापवर्तक = 6।
उभयनिष्ठ गुणनखण्ड को कैसे पहचानें?
18 और 42 के उदाहरण में—
18 = 2 × 3 × 3
↑ ↑
42 = 2 × 3 × 7
↑ ↑
यहाँ 2 और 3 दोनों संख्याओं में समान हैं। इसलिए इन्हीं का गुणनफल HCF में लिया गया।
उदाहरण 2 — 13 और 29 का HCF
13 और 29 दोनों अभाज्य संख्याएँ हैं।
इन दोनों में 1 के अतिरिक्त कोई अन्य उभयनिष्ठ गुणनखण्ड नहीं है।
13 = 13 × 1 29 = 29 × 1
अतः—
13 और 29 का HCF = 1
इस उदाहरण से स्पष्ट है कि यदि दो संख्याओं में 1 के अतिरिक्त कोई उभयनिष्ठ गुणनखण्ड न हो, तो उनका महत्तम समापवर्तक 1 होता है।
उदाहरण 3 — 12, 24 और 36 का HCF
तीनों संख्याओं के अभाज्य गुणनखण्ड करें—
12 = 2 × 2 × 3 = 2² × 3 24 = 2 × 2 × 2 × 3 = 2³ × 3 36 = 2 × 2 × 3 × 3 = 2² × 3²
तीनों संख्याओं में उभयनिष्ठ गुणनखण्ड हैं—
- 2 की उभयनिष्ठ न्यूनतम घात = 2²
- 3 की उभयनिष्ठ न्यूनतम घात = 3
अतः—
HCF = 2² × 3
= 2 × 2 × 3
= 12
इसलिए 12, 24 और 36 का HCF = 12।
न्यूनतम घात क्यों ली जाती है?
HCF ऐसी सबसे बड़ी संख्या होती है जो दी गई सभी संख्याओं को पूरा-पूरा विभाजित कर सके। इसलिए किसी उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखण्ड को उतनी ही बार लिया जा सकता है जितनी बार वह सभी संख्याओं में समान रूप से उपलब्ध हो।
जैसे—
12 = 2² × 3 24 = 2³ × 3 36 = 2² × 3²
यहाँ 2 की घातें 2, 3 और 2 हैं। इनकी उभयनिष्ठ न्यूनतम घात 2² है।
इसी प्रकार 3 की घातें 1, 1 और 2 हैं। अतः उभयनिष्ठ न्यूनतम घात 3¹ ली जाती है।
LCM और HCF की गुणनखण्ड विधि में मुख्य अंतर
| LCM | HCF |
|---|---|
| सभी आवश्यक अभाज्य गुणनखण्ड लिए जाते हैं | केवल उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखण्ड लिए जाते हैं |
| अधिकतम घात ली जाती है | उभयनिष्ठ न्यूनतम घात ली जाती है |
गुणनखण्ड विधि को याद रखने की सरल प्रक्रिया
अभाज्य गुणनखण्ड करें → उभयनिष्ठ गुणनखण्ड पहचानें → न्यूनतम घात चुनें → गुणा करें → HCF प्राप्त करें
- गुणनखण्ड विधि में प्रत्येक संख्या को अभाज्य गुणनखण्डों के रूप में लिखा जाता है।
- सभी संख्याओं में उपस्थित उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखण्ड चुने जाते हैं।
- उभयनिष्ठ गुणनखण्डों की न्यूनतम घातों का गुणनफल HCF होता है।
- 18 = 2 × 3 × 3 तथा 42 = 2 × 3 × 7, इसलिए उनका HCF 6 है।
- 13 और 29 में 1 के अतिरिक्त कोई उभयनिष्ठ गुणनखण्ड नहीं है, इसलिए उनका HCF = 1।
- 12 = 2² × 3, 24 = 2³ × 3 और 36 = 2² × 3²।
- अतः 12, 24 और 36 का HCF = 2² × 3 = 12।
- LCM में अधिकतम घात, जबकि HCF में उभयनिष्ठ न्यूनतम घात ली जाती है।
HCF — भागफल विधि एवं अनुप्रयोग
भागफल विधि से HCF
महत्तम समापवर्तक ज्ञात करने की भागफल विधि में पहले दी गई दो संख्याओं में से छोटी संख्या से बड़ी संख्या को भाग दिया जाता है।
यदि शेषफल प्राप्त होता है, तो अगले चरण में पहले वाले भाजक को उस शेषफल से भाग दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक शेषफल 0 न हो जाए।
जिस चरण में शेषफल 0 प्राप्त होता है, उस चरण का अन्तिम भाजक ही महत्तम समापवर्तक (HCF) होता है।
भागफल विधि की क्रमिक प्रक्रिया
- छोटी संख्या से बड़ी संख्या में भाग दें।
- प्राप्त शेषफल को नया भाजक बनाएँ।
- पिछले भाजक को नए भाजक से भाग दें।
- यही प्रक्रिया बार-बार दोहराएँ।
- जब शेषफल 0 हो जाए, तब अन्तिम भाजक HCF होगा।
उदाहरण 1 — 72 और 126 का HCF
पहले 126 को 72 से भाग देंगे—
1
_____
72 ) 126
72
---
54
शेषफल = 54
अब 72 को 54 से भाग देंगे—
1
____
54 ) 72
54
--
18
शेषफल = 18
अब 54 को 18 से भाग देंगे—
3
____
18 ) 54
54
--
0
अब शेषफल 0 है। इसलिए अन्तिम भाजक 18 ही HCF होगा।
अतः—
72 और 126 का HCF = 18
उदाहरण 2 — 12 और 24 का HCF
2
____
12 ) 24
24
--
0
पहले ही चरण में शेषफल 0 प्राप्त हो गया।
अतः—
12 और 24 का HCF = 12
उदाहरण 3 — 180 और 270 का HCF
पहले 270 को 180 से भाग देंगे—
1
_____
180 ) 270
180
---
90
अब 180 को 90 से भाग देंगे—
2
_____
90 ) 180
180
---
0
अतः अन्तिम भाजक 90 है।
180 और 270 का HCF = 90
तीन संख्याओं का HCF — 13, 39 और 273
तीन संख्याओं के लिए भी क्रमिक भाग की सहायता से HCF ज्ञात किया जा सकता है।
सबसे पहले 273 को 39 से भाग दें—
7
_____
39 ) 273
273
---
0
अतः 39, संख्या 273 को पूर्णतः विभाजित करता है।
अब 39 को 13 से भाग दें—
3
____
13 ) 39
39
--
0
अतः—
13, 39 और 273 का HCF = 13
HCF का व्यावहारिक प्रयोग
HCF का उपयोग ऐसे प्रश्नों में किया जाता है जहाँ किसी सबसे बड़ी समान माप अथवा ऐसी सबसे बड़ी संख्या को ज्ञात करना हो जो दी गई सभी संख्याओं को पूरा-पूरा विभाजित कर सके।
उदाहरण 4 — 90, 108 और 126 को पूरा-पूरा विभाजित करने वाली बड़ी से बड़ी संख्या
तीनों संख्याओं के अभाज्य गुणनखण्ड—
90 = 2 × 3 × 3 × 5 108 = 2 × 2 × 3 × 3 × 3 126 = 2 × 3 × 3 × 7
तीनों में उभयनिष्ठ गुणनखण्ड हैं—
2, 3, 3
अतः—
HCF = 2 × 3 × 3
= 18
इसलिए 90, 108 और 126 को पूरा-पूरा विभाजित करने वाली बड़ी से बड़ी संख्या 18 है।
माप संबंधी प्रश्न — कपड़े के थान
कपड़े के तीन थानों में क्रमशः 125 मीटर, 220 मीटर और 275 मीटर कपड़ा है। ऐसी बड़ी से बड़ी नाप का फीता ज्ञात करना है जिससे तीनों थानों को पूरा-पूरा नापा जा सके।
इसके लिए 125, 220 और 275 का HCF ज्ञात करेंगे।
125 = 5 × 5 × 5 220 = 2 × 2 × 5 × 11 275 = 5 × 5 × 11
तीनों में उभयनिष्ठ गुणनखण्ड 5 है।
अतः—
HCF = 5
इसलिए 5 मीटर की नाप का फीता तीनों थानों के कपड़े को पूरा-पूरा नाप सकता है।
उदाहरण 6 — कमरे की बड़ी से बड़ी समान माप
एक कमरे की लंबाई 30 मीटर तथा चौड़ाई 24 मीटर है। ऐसी बड़ी से बड़ी माप ज्ञात करनी है जो लंबाई और चौड़ाई दोनों को पूरा-पूरा माप सके।
30 और 24 के गुणनखण्ड—
30 = 2 × 3 × 5 24 = 2 × 2 × 2 × 3
उभयनिष्ठ गुणनखण्ड हैं—
2 और 3
अतः—
HCF = 2 × 3
= 6
इसलिए कमरे की लंबाई और चौड़ाई दोनों को पूरा-पूरा मापने वाली सबसे बड़ी माप 6 मीटर होगी।
HCF वाले प्रश्नों की पहचान
यदि प्रश्न में निम्न प्रकार की भाषा हो, तो सामान्यतः HCF की आवश्यकता होती है—
- बड़ी से बड़ी संख्या
- सबसे बड़ा समान विभाजक
- बड़ी से बड़ी समान माप
- सभी दी गई मात्राओं को पूरा-पूरा मापना या विभाजित करना
भागफल विधि को याद रखने की सरल प्रक्रिया
बड़ी संख्या ÷ छोटी संख्या → शेषफल प्राप्त करें → पुराने भाजक को शेषफल से भाग दें → प्रक्रिया दोहराएँ → शेषफल 0 → अन्तिम भाजक = HCF
- भागफल विधि में छोटी संख्या से बड़ी संख्या को भाग दिया जाता है।
- प्राप्त शेषफल को अगले चरण में भाजक बनाया जाता है।
- प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक शेषफल 0 न हो जाए।
- अन्तिम भाजक ही HCF होता है।
- 72 और 126 का HCF = 18।
- 12 और 24 का HCF = 12।
- 180 और 270 का HCF = 90।
- 13, 39 और 273 का HCF = 13।
- 90, 108 और 126 को पूरा-पूरा विभाजित करने वाली बड़ी से बड़ी संख्या 18 है।
- 125 मी., 220 मी. और 275 मी. के कपड़े को पूरा-पूरा नापने वाली बड़ी से बड़ी नाप 5 मीटर है।
- 30 मी. और 24 मी. को पूरा-पूरा मापने वाली बड़ी से बड़ी माप 6 मीटर है।
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LCM–HCF के महत्वपूर्ण सूत्र एवं आधारित प्रश्न
LCM और HCF से संबंधित महत्वपूर्ण सूत्र
लघुतम समापवर्त्य और महत्तम समापवर्तक से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण सूत्र प्रश्नों को शीघ्र हल करने में उपयोगी होते हैं।
1. भिन्नों का LCM
भिन्नों का लघुतम समापवर्त्य ज्ञात करने के लिए अंशों का LCM तथा हरों का HCF लिया जाता है।
अर्थात—
भिन्नों का ल.स. = अंशों का ल.स. / हरों का म.स.
2. भिन्नों का HCF
भिन्नों का महत्तम समापवर्तक ज्ञात करने के लिए अंशों का HCF तथा हरों का LCM लिया जाता है।
अर्थात—
भिन्नों का म.स. = अंशों का म.स. / हरों का ल.स.
3. दो संख्याओं के LCM और HCF का संबंध
दो संख्याओं के लिए उनके लघुतम समापवर्त्य और महत्तम समापवर्तक का गुणनफल उन दोनों संख्याओं के गुणनफल के बराबर होता है।
अर्थात—
ल.स. × म.स. = पहली संख्या × दूसरी संख्या
सूत्र से दूसरी संख्या ज्ञात करना
यदि दो संख्याओं का LCM, HCF तथा उनमें से एक संख्या ज्ञात हो, तो दूसरी संख्या निम्न सूत्र से प्राप्त की जा सकती है—
दूसरी संख्या = (LCM × HCF) / पहली संख्या
उदाहरण 1 — दूसरी संख्या ज्ञात कीजिए
दो संख्याओं का महत्तम समापवर्तक 11 तथा लघुतम समापवर्त्य 693 है। यदि एक संख्या 77 है, तो दूसरी संख्या ज्ञात करें।
सूत्र—
LCM × HCF = पहली संख्या × दूसरी संख्या दूसरी संख्या = (LCM × HCF) / पहली संख्या = (693 × 11) / 77 = 99
अतः दूसरी संख्या = 99।
गुणनफल और HCF से LCM ज्ञात करना
यदि दो संख्याओं का गुणनफल और उनका HCF दिया हो, तो—
LCM = दोनों संख्याओं का गुणनफल / HCF
उदाहरण 2 — HCF और गुणनफल से LCM
दो संख्याओं का महत्तम समापवर्तक 16 तथा उनका गुणनफल 6400 है। उनका LCM ज्ञात कीजिए।
HCF = 16
गुणनफल = 6400
LCM = गुणनफल / HCF
= 6400 / 16
= 400
अतः LCM = 400।
अलग-अलग शेषफल वाले प्रश्न
यदि ऐसी बड़ी से बड़ी संख्या ज्ञात करनी हो जिससे अलग-अलग संख्याओं को भाग देने पर अलग-अलग निश्चित शेषफल प्राप्त हों, तो प्रत्येक संख्या में से उसका संबंधित शेषफल घटाया जाता है।
इसके बाद प्राप्त संख्याओं का HCF ज्ञात किया जाता है।
उदाहरण 3 — 49, 59 और 109 में क्रमशः 1, 3 और 5 शेष
ऐसी बड़ी से बड़ी संख्या ज्ञात करनी है जिससे—
- 49 को भाग देने पर शेष 1 रहे।
- 59 को भाग देने पर शेष 3 रहे।
- 109 को भाग देने पर शेष 5 रहे।
सबसे पहले संबंधित शेषफल घटाएँगे—
49 − 1 = 48 59 − 3 = 56 109 − 5 = 104
अब 48, 56 और 104 का HCF ज्ञात करेंगे।
48 = 2⁴ × 3 56 = 2³ × 7 104 = 2³ × 13
तीनों में उभयनिष्ठ गुणनखण्ड—
2 × 2 × 2
अतः—
HCF = 2 × 2 × 2
= 8
इसलिए अभीष्ट बड़ी से बड़ी संख्या 8 है।
उत्तर की जाँच
8 से भाग देने पर—
49 ÷ 8 → शेष 1 59 ÷ 8 → शेष 3 109 ÷ 8 → शेष 5
अतः उत्तर 8 सही है।
अनुपात और HCF पर आधारित प्रश्न
यदि संख्याएँ किसी सरल अनुपात में दी गई हों और उनका HCF ज्ञात हो, तो अनुपात के पदों को HCF से गुणा करके संख्याएँ प्राप्त की जा सकती हैं।
उदाहरण 4 — संख्याएँ 1 : 2 : 3 के अनुपात में हैं
तीन संख्याएँ 1 : 2 : 3 के अनुपात में हैं और उनका HCF 12 है।
अभीष्ट संख्याएँ—
1 × 12 = 12 2 × 12 = 24 3 × 12 = 36
अतः संख्याएँ हैं—
12, 24 और 36
प्रश्न की पहचान कैसे करें?
| प्रश्न में दिया हो | उपयोग |
|---|---|
| LCM, HCF और एक संख्या | दूसरी संख्या निकालें |
| HCF और दोनों संख्याओं का गुणनफल | LCM निकालें |
| अलग-अलग शेषफल और बड़ी से बड़ी संख्या | शेषफल घटाकर HCF निकालें |
| सरल अनुपात और HCF | अनुपात के पदों को HCF से गुणा करें |
महत्वपूर्ण सूत्र एक साथ
भिन्नों का ल.स. = अंशों का ल.स. / हरों का म.स. भिन्नों का म.स. = अंशों का म.स. / हरों का ल.स. ल.स. × म.स. = पहली संख्या × दूसरी संख्या दूसरी संख्या = (ल.स. × म.स.) / पहली संख्या
- भिन्नों का ल.स. = अंशों का ल.स. / हरों का म.स.
- भिन्नों का म.स. = अंशों का म.स. / हरों का ल.स.
- दो संख्याओं के लिए ल.स. × म.स. = पहली संख्या × दूसरी संख्या।
- LCM = 693, HCF = 11 और एक संख्या 77 होने पर दूसरी संख्या 99 है।
- दो संख्याओं का HCF 16 तथा गुणनफल 6400 होने पर उनका LCM = 400 है।
- अलग-अलग शेषफल वाले बड़ी से बड़ी संख्या के प्रश्न में संबंधित शेषफल घटाकर प्राप्त संख्याओं का HCF निकाला जाता है।
- 49, 59 और 109 में क्रमशः 1, 3 और 5 शेष रहने वाली बड़ी से बड़ी संख्या 8 है।
- 1 : 2 : 3 के अनुपात और HCF 12 के लिए संख्याएँ 12, 24 और 36 हैं।