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Home Study Material Semester 1 गणित आँकड़ों का ग्राफीय निरूपण एवं बीजीय व्यंजक
Chapter 6 • गणित

आँकड़ों का ग्राफीय निरूपण एवं बीजीय व्यंजक

UP DELED Semester 1 गणित विषय के इस अध्याय में अवर्गीकृत आँकड़ों का निरूपण, पिक्टोग्राफ, बार ग्राफ, पाई ग्राफ, इनके उपयोग, गुण एवं दोष तथा बीजगणित की अवधारणा, सजातीय एवं विजातीय बीजीय व्यंजक, उनके जोड़-घटाव, सरलीकरण, मान ज्ञात करने और सरल समीकरणों का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

8
Topics
15
MCQs
10+
PYQs
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Notes
Topic 1 अवर्गीकृत आँकड़े एवं ग्राफीय निरूपण

अवर्गीकृत आँकड़े एवं ग्राफीय निरूपण

आँकड़ों का अर्थ

दैनिक जीवन में हमें समाचार-पत्र, खेल, रेडियो, दूरदर्शन, विद्यालय तथा अन्य स्रोतों से विभिन्न प्रकार की संख्यात्मक सूचनाएँ प्राप्त होती हैं। इन संख्यात्मक सूचनाओं को सामान्य रूप से आँकड़े कहा जाता है।

जब ये आँकड़े बिना किसी निश्चित क्रम अथवा वर्गीकरण के प्राप्त होते हैं, तो उन्हें अवर्गीकृत आँकड़े कहा जाता है।

अवर्गीकृत आँकड़े क्या होते हैं?

ऐसे आँकड़े जिन्हें अभी किसी निश्चित क्रम, समूह या श्रेणी में व्यवस्थित नहीं किया गया हो, अवर्गीकृत आँकड़े कहलाते हैं।

उदाहरण के लिए किसी कक्षा के 10 विद्यार्थियों के अंग्रेजी विषय के प्राप्तांक इस प्रकार हैं—

35, 20, 15, 7, 42, 37, 38, 47, 7, 12

ये आँकड़े किसी क्रम में व्यवस्थित नहीं हैं, इसलिए ये अवर्गीकृत आँकड़े हैं।

आँकड़ों को व्यवस्थित करने की आवश्यकता

अवर्गीकृत आँकड़ों को सीधे देखकर किसी समूह के बारे में स्पष्ट निष्कर्ष निकालना कठिन हो सकता है।

इसलिए आँकड़ों को उनकी प्रकृति, संख्या, मूल्य अथवा आकार के आधार पर व्यवस्थित और वर्गीकृत किया जाता है।

वर्गीकरण करने से—

  • आँकड़ों को समझना सरल हो जाता है।
  • विभिन्न समूहों की तुलना की जा सकती है।
  • अधिकतम तथा न्यूनतम मान आसानी से पहचाने जा सकते हैं।
  • आँकड़ों को ग्राफ अथवा चित्र के रूप में प्रदर्शित करना आसान हो जाता है।

आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करना

दिए गए प्राप्तांकों को छोटे से बड़े क्रम में लिखने पर—

7, 7, 12, 15, 20, 35, 37, 38, 42, 47

अब इन आँकड़ों को देखकर अलग-अलग श्रेणियों में विद्यार्थियों की संख्या आसानी से ज्ञात की जा सकती है।

उदाहरण — उत्तीर्ण, अनुत्तीर्ण और प्रथम श्रेणी के विद्यार्थी

दिए गए प्रश्न में निम्न मानदण्ड हैं—

  • 17 से कम अंक प्राप्त करने वाला विद्यार्थी अनुत्तीर्ण माना जाएगा।
  • 17 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाला विद्यार्थी उत्तीर्ण माना जाएगा।
  • 30 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाला विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में माना जाएगा।

1. अनुत्तीर्ण विद्यार्थी

17 से कम प्राप्तांक हैं—

7, 7, 12, 15

अतः अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या—

4 विद्यार्थी

2. उत्तीर्ण विद्यार्थी

17 या उससे अधिक प्राप्तांक हैं—

20, 35, 37, 38, 42, 47

अतः उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या—

6 विद्यार्थी

3. प्रथम श्रेणी के विद्यार्थी

30 या उससे अधिक प्राप्तांक हैं—

35, 37, 38, 42, 47

अतः प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या—

5 विद्यार्थी

ध्यान देने योग्य बात

प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाले विद्यार्थी भी उत्तीर्ण विद्यार्थियों में ही सम्मिलित होते हैं।

इसलिए यहाँ—

कुल विद्यार्थी = 10

अनुत्तीर्ण = 4

उत्तीर्ण = 6

उत्तीर्ण विद्यार्थियों में
प्रथम श्रेणी = 5

ग्राफीय निरूपण का अर्थ

आँकड़ों को केवल संख्याओं के रूप में पढ़ने के स्थान पर यदि उन्हें चित्र, प्रतीक, स्तम्भ अथवा वृत्त की सहायता से प्रदर्शित किया जाए, तो इसे आँकड़ों का ग्राफीय निरूपण कहा जाता है।

ग्राफीय निरूपण से बड़ी मात्रा में दी गई जानकारी को कम समय में समझना और विभिन्न आँकड़ों की तुलना करना सरल हो जाता है।

आँकड़ों के प्रमुख ग्राफीय निरूपण

पाठ्यपुस्तक में अवर्गीकृत आँकड़ों को प्रदर्शित करने के लिए निम्न प्रमुख रेखाचित्र बताए गए हैं—

  1. पिक्टोग्राफ
  2. बार ग्राफ / स्तम्भ आरेख
  3. पाई ग्राफ / वृत्त आरेख

तीनों का सामान्य परिचय

निरूपण मुख्य आधार
पिक्टोग्राफ चित्र या प्रतीक
बार ग्राफ समान चौड़ाई वाले स्तम्भ
पाई ग्राफ वृत्त के विभिन्न भाग

परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा

ऐसे आँकड़े जिन्हें किसी निश्चित क्रम या वर्ग में व्यवस्थित नहीं किया गया हो, अवर्गीकृत आँकड़े कहलाते हैं। इन आँकड़ों को समझने और तुलना करने में सुविधा के लिए उन्हें व्यवस्थित कर पिक्टोग्राफ, बार ग्राफ तथा पाई ग्राफ आदि के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है।

वर्गीकरण की सरल प्रक्रिया

अवर्गीकृत आँकड़े
↓
क्रमबद्ध आँकड़े
↓
मानदण्ड के अनुसार वर्गीकरण
↓
तुलना एवं विश्लेषण
↓
ग्राफीय निरूपण
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • बिना किसी निश्चित क्रम अथवा वर्गीकरण के प्राप्त आँकड़े अवर्गीकृत आँकड़े कहलाते हैं।
  • आँकड़ों को प्रकृति, संख्या, मूल्य तथा आकार के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।
  • 35, 20, 15, 7, 42, 37, 38, 47, 7, 12 अवर्गीकृत आँकड़ों का उदाहरण है।
  • इनका आरोही क्रम 7, 7, 12, 15, 20, 35, 37, 38, 42, 47 है।
  • 17 से कम अंक पाने वाले 4 विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हैं।
  • 17 या उससे अधिक अंक पाने वाले 6 विद्यार्थी उत्तीर्ण हैं।
  • 30 या उससे अधिक अंक पाने वाले 5 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में हैं।
  • आँकड़ों के प्रमुख ग्राफीय निरूपण पिक्टोग्राफ, बार ग्राफ और पाई ग्राफ हैं।
  • ग्राफीय निरूपण से आँकड़ों को समझना और उनकी तुलना करना सरल हो जाता है।

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Topic 2 पिक्टोग्राफ — अवधारणा एवं प्रस्तुतीकरण

पिक्टोग्राफ — अवधारणा एवं प्रस्तुतीकरण

पिक्टोग्राफ का अर्थ

ऐसा ग्राफ जिसमें संख्यात्मक आँकड़ों को चित्र, चिह्न या प्रतीक की सहायता से प्रदर्शित किया जाता है, पिक्टोग्राफ कहलाता है।

पिक्टोग्राफ में सामान्य बार, रेखा या बिन्दुओं के स्थान पर किसी वस्तु का चित्र अथवा प्रतीक प्रयोग किया जाता है।

इसे चित्र आलेख, पिक्टोरल चार्ट या पिक्चर ग्राफ भी कहा जाता है।

पिक्टोग्राफ की मुख्य विशेषता

पिक्टोग्राफ में प्रत्येक चित्र या प्रतीक किसी निश्चित संख्या का प्रतिनिधित्व करता है।

जैसे—

1 चित्र = 10 वस्तुएँ

तो 6 चित्रों का अर्थ होगा—

6 × 10 = 60 वस्तुएँ

इसलिए पिक्टोग्राफ को पढ़ने से पहले यह जानना सबसे आवश्यक है कि एक प्रतीक का मान कितना है

पिक्टोग्राफ का संकेत या मान

चित्र के साथ दी गई वह सूचना जो बताती है कि एक चित्र कितनी वस्तुओं या व्यक्तियों को प्रदर्शित करता है, पिक्टोग्राफ का संकेत या मान कहलाता है।

जैसे—

1 चेहरा = 10 विद्यार्थी

1 चित्र = 100 बच्चे

1 फूल = 50 पौधे

पिक्टोग्राफ पढ़ने का नियम

किसी श्रेणी में दिए गए चित्रों की संख्या को एक चित्र के मान से गुणा करने पर उस श्रेणी की वास्तविक संख्या प्राप्त होती है।

वास्तविक संख्या

= चित्रों की संख्या × एक चित्र का मान

उदाहरण 1 — सप्ताह में बेचे गए बॉक्स

पाठ्यपुस्तक के पिक्टोग्राफ में एक दुकानदार द्वारा छह दिनों में बेचे गए काले बॉक्स इस प्रकार प्रदर्शित किए गए हैं—

दिन बेचे गए बॉक्स
सोमवार 4
मंगलवार 2
बुधवार 3
बृहस्पतिवार 5
शुक्रवार 8
शनिवार 1

कुल बॉक्स

4 + 2 + 3 + 5 + 8 + 1

= 23

अतः सप्ताह में कुल 23 बॉक्स बेचे गए।

इस पिक्टोग्राफ से यह भी स्पष्ट है कि—

  • सबसे अधिक बिक्री शुक्रवार को हुई — 8 बॉक्स।
  • सबसे कम बिक्री शनिवार को हुई — 1 बॉक्स।

उदाहरण 2 — पाँच शहरों में अशिक्षित बच्चों की संख्या

पाठ्यपुस्तक के उदाहरण में—

1 चित्र = 100 बच्चे

पिक्टोग्राफ के अनुसार—

शहर चित्रों की संख्या बच्चों की संख्या
आगरा 5 500
बरेली 4 400
झाँसी 7 700
मुरादाबाद 3 300
मथुरा 2 200

कुल अशिक्षित बच्चों की संख्या—

500 + 400 + 700 + 300 + 200

= 2100

अतः पाँचों शहरों में कुल 2100 बच्चे हैं।

उदाहरण 3 — विद्यालय आने के साधन

एक विद्यालय के 300 विद्यार्थी अलग-अलग साधनों से विद्यालय आते हैं। पिक्टोग्राफ में—

1 चेहरा = 10 विद्यार्थी

चित्रों को गिनने पर—

साधन चित्र विद्यार्थी
ऑटो रिक्शा 6 60
कार 4 40
साइकिल 7 70
बस 10 100
पैदल 3 30

कुल विद्यार्थी—

60 + 40 + 70 + 100 + 30

= 300

अतः पिक्टोग्राफ में विद्यालय के सभी 300 विद्यार्थियों का निरूपण किया गया है।

पिक्टोग्राफ में एक प्रतीक के मान तथा चित्रों की सहायता से वास्तविक संख्या ज्ञात करने की प्रक्रिया
एक प्रतीक के निश्चित मान की सहायता से पिक्टोग्राफ पढ़ना और आँकड़ों को प्रदर्शित करना

पिक्टोग्राफ कैसे बनाया जाता है?

पिक्टोग्राफ तैयार करने के लिए निम्न क्रम अपनाया जाता है—

  1. सबसे पहले दिए गए आँकड़ों को व्यवस्थित करें।
  2. आँकड़ों के अनुकूल कोई सरल चित्र या प्रतीक चुनें।
  3. एक प्रतीक के लिए उपयुक्त निश्चित मान निर्धारित करें।
  4. प्रत्येक श्रेणी के लिए आवश्यक चित्रों की संख्या निकालें।
  5. चित्रों को समान आकार और स्पष्ट क्रम में प्रदर्शित करें।
  6. पिक्टोग्राफ के साथ प्रतीक का मान अवश्य लिखें।

उदाहरण 4 — फूलों के पौधों का पिक्टोग्राफ

यदि किसी उद्यान में—

  • गुलाब = 300 पौधे
  • गेंदा = 250 पौधे
  • जूही = 100 पौधे
  • डहेलिया = 150 पौधे
  • रजनीगंधा = 450 पौधे

और—

1 फूल का चित्र = 50 पौधे

तो आवश्यक चित्रों की संख्या—

गुलाब
= 300 / 50
= 6 चित्र

गेंदा
= 250 / 50
= 5 चित्र

जूही
= 100 / 50
= 2 चित्र

डहेलिया
= 150 / 50
= 3 चित्र

रजनीगंधा
= 450 / 50
= 9 चित्र

इन चित्रों को संबंधित फूलों के सामने व्यवस्थित करके पिक्टोग्राफ बनाया जा सकता है।

पिक्टोग्राफ प्रस्तुतीकरण से संबंधित मुख्य बातें

पाठ्यपुस्तक के अनुसार पिक्टोग्राफ बनाते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए—

  • ऐसे चित्र चुनें जिन्हें आँकड़ों से आसानी से जोड़ा जा सके।
  • चित्र या प्रतीक सरल और स्पष्ट होना चाहिए।
  • चित्रों का आकार एक समान रखा जाना चाहिए।
  • चित्रों को आवश्यकतानुसार रंगीन भी बनाया जा सकता है।
  • माह के नाम, सप्ताह के दिन या श्रेणियों के नाम स्पष्ट रूप से लिखे जा सकते हैं।
  • वार्षिक उत्पादन जैसे आँकड़ों को भी पिक्टोग्राफ में प्रदर्शित किया जा सकता है।

पिक्टोग्राफ से जानकारी कैसे प्राप्त करें?

पिक्टोग्राफ देखकर निम्न प्रकार की जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है—

  • किस श्रेणी का मान सबसे अधिक है।
  • किस श्रेणी का मान सबसे कम है।
  • किसी श्रेणी की वास्तविक संख्या कितनी है।
  • सभी श्रेणियों का कुल मान कितना है।
  • दो अलग-अलग श्रेणियों की तुलना।

परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा

ऐसा ग्राफ जिसमें संख्यात्मक आँकड़ों को चित्र, चिह्न या प्रतीक की सहायता से प्रदर्शित किया जाता है, पिक्टोग्राफ कहलाता है। इसमें प्रत्येक चित्र या प्रतीक किसी निश्चित संख्या का प्रतिनिधित्व करता है।

मुख्य सूत्र

वास्तविक संख्या
= चित्रों की संख्या × एक चित्र का मान

चित्रों की संख्या
= वास्तविक संख्या / एक चित्र का मान

पिक्टोग्राफ बनाने की सरल क्रम-विधि

आँकड़े व्यवस्थित करें
↓
चित्र / प्रतीक चुनें
↓
एक प्रतीक का मान निर्धारित करें
↓
आवश्यक चित्रों की संख्या निकालें
↓
चित्र व्यवस्थित करें
↓
संकेत का मान लिखें
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • चित्र, चिह्न या प्रतीक द्वारा आँकड़ों का प्रदर्शन पिक्टोग्राफ कहलाता है।
  • पिक्टोग्राफ को चित्र आलेख या पिक्चर ग्राफ भी कहा जाता है।
  • हर चित्र का एक निश्चित संख्यात्मक मान होता है।
  • वास्तविक संख्या = चित्रों की संख्या × एक चित्र का मान
  • सप्ताह वाले उदाहरण में कुल 23 बॉक्स बेचे गए।
  • सबसे अधिक बॉक्स शुक्रवार को तथा सबसे कम शनिवार को बेचे गए।
  • 1 चित्र = 100 बच्चे होने पर पाँच शहरों में कुल बच्चों की संख्या 2100 है।
  • 1 चेहरा = 10 विद्यार्थी वाले उदाहरण में बस से 100 विद्यार्थी विद्यालय आते हैं।
  • 300, 250, 100, 150 और 450 पौधों के लिए 1 चित्र = 50 पौधे रखने पर क्रमशः 6, 5, 2, 3 और 9 चित्र बनेंगे।
  • पिक्टोग्राफ बनाते समय चित्र सरल, स्पष्ट और समान आकार के होने चाहिए।
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Topic 3 बार ग्राफ / स्तम्भ आरेख

बार ग्राफ / स्तम्भ आरेख

बार ग्राफ / स्तम्भ आरेख का अर्थ

ऐसा ग्राफ जिसमें आँकड़ों को समान चौड़ाई वाले खड़े या क्षैतिज स्तम्भों की सहायता से प्रदर्शित किया जाता है, बार ग्राफ या स्तम्भ आरेख कहलाता है।

स्तम्भों की ऊँचाई अथवा लंबाई संबंधित आँकड़े के मान को प्रदर्शित करती है।

पाठ्यपुस्तक में आँकड़ों को मुख्यतः ग्राफ पेपर पर खड़े स्तम्भों के रूप में दिखाया गया है।

स्तम्भ आरेख की मुख्य विशेषताएँ

  • सभी स्तम्भों की चौड़ाई समान रखी जाती है।
  • दो स्तम्भों के बीच की दूरी भी सामान्यतः समान रखी जाती है।
  • एक अक्ष पर श्रेणियाँ अथवा वर्ग प्रदर्शित किए जाते हैं।
  • दूसरे अक्ष पर संबंधित संख्यात्मक मान प्रदर्शित किए जाते हैं।
  • जिस श्रेणी का मान अधिक होता है, उसका स्तम्भ अधिक ऊँचा होता है।

X-अक्ष और Y-अक्ष

बार ग्राफ बनाते समय दो परस्पर लम्बवत अक्षों का उपयोग किया जाता है—

  • X-अक्ष — क्षैतिज अक्ष
  • Y-अक्ष — ऊर्ध्वाधर अक्ष

सामान्यतः X-अक्ष पर श्रेणियाँ, वर्ष, विद्यार्थियों के नाम या अन्य वर्ग लिखे जाते हैं और Y-अक्ष पर उनकी संख्या, प्राप्तांक या प्रतिशत प्रदर्शित किए जाते हैं।

बार ग्राफ बनाने की प्रक्रिया

  1. दिए गए आँकड़ों को व्यवस्थित करें।
  2. X-अक्ष तथा Y-अक्ष खींचें।
  3. X-अक्ष पर विभिन्न श्रेणियाँ लिखें।
  4. Y-अक्ष पर उपयुक्त पैमाना निर्धारित करें।
  5. प्रत्येक श्रेणी के मान के अनुसार स्तम्भ की ऊँचाई तय करें।
  6. सभी स्तम्भों की चौड़ाई समान रखें।
  7. स्तम्भों के बीच समान दूरी रखें।

पैमाना क्या है?

Y-अक्ष पर आँकड़ों को सुविधाजनक रूप से प्रदर्शित करने के लिए एक निश्चित मान चुना जाता है, जिसे पैमाना कहा जा सकता है।

जैसे विद्यार्थियों की संख्या हजारों में हो तो Y-अक्ष पर—

1 विभाजन = 1000 विद्यार्थी

जैसा उपयुक्त पैमाना लिया जा सकता है।

उदाहरण 1 — विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या

एक विश्वविद्यालय में विभिन्न वर्षों में विद्यार्थियों की संख्या निम्न थी—

वर्ष विद्यार्थियों की संख्या
1985 5000
1995 6500
2005 7000
2015 8000

इस बार ग्राफ में—

  • X-अक्ष पर वर्ष रखे जाएँगे।
  • Y-अक्ष पर विद्यार्थियों की संख्या रखी जाएगी।

स्तम्भों की ऊँचाई क्रमशः 5000, 6500, 7000 और 8000 विद्यार्थियों के अनुसार होगी।

इससे स्पष्ट है कि दिए गए वर्षों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ी और 2015 में सर्वाधिक 8000 विद्यार्थी थे।

संख्या वर्ष 2000 4000 6000 8000 1985 1995 2005 2015 5000 6500 7000 8000

उदाहरण 2 — परीक्षा परिणाम का स्तम्भ आरेख

एम.ए. अंग्रेजी परीक्षा के परिणाम का प्रतिशत—

श्रेणी प्रतिशत
प्रथम श्रेणी 30%
द्वितीय श्रेणी 40%
तृतीय श्रेणी 20%
अनुत्तीर्ण 10%

इस स्तम्भ आरेख में X-अक्ष पर परीक्षा परिणाम की श्रेणियाँ तथा Y-अक्ष पर प्रतिशत प्रदर्शित किया जाएगा।

इससे एक ही दृष्टि में पता चलता है कि—

  • द्वितीय श्रेणी का प्रतिशत सबसे अधिक 40% है।
  • अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत सबसे कम 10% है।

उदाहरण 3 — विद्यार्थियों के प्राप्तांक

पूर्णांक 600 में कुछ विद्यार्थियों के प्राप्तांक निम्न हैं—

विद्यार्थी प्राप्तांक
अमिता 450
नमिता 300
दीप्ति 400
अजय 350
अमर 500
नाजिया 560

बार ग्राफ बनाते समय—

  • X-अक्ष पर विद्यार्थियों के नाम रखेंगे।
  • Y-अक्ष पर प्राप्तांक रखेंगे।
  • Y-अक्ष पर 0 से 600 तक उपयुक्त पैमाना निर्धारित करेंगे।
  • प्रत्येक विद्यार्थी के प्राप्तांक के अनुसार स्तम्भ बनाएँगे।

इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि नाजिया ने सर्वाधिक 560 अंक और नमिता ने सबसे कम 300 अंक प्राप्त किए।

बार ग्राफ में X अक्ष Y अक्ष पैमाना और समान चौड़ाई वाले स्तम्भों द्वारा आँकड़ों का निरूपण
समान चौड़ाई और समान दूरी वाले स्तम्भों की सहायता से आँकड़ों का बार ग्राफ

बार ग्राफ को कैसे पढ़ें?

  1. सबसे पहले X-अक्ष पर दी गई श्रेणियाँ देखें।
  2. Y-अक्ष पर दिया गया पैमाना समझें।
  3. किसी स्तम्भ की ऊँचाई को Y-अक्ष के मान से मिलाएँ।
  4. सबसे ऊँचा स्तम्भ सबसे बड़े मान को दर्शाता है।
  5. सबसे छोटा स्तम्भ सबसे छोटे मान को दर्शाता है।

पिक्टोग्राफ और बार ग्राफ में अंतर

पिक्टोग्राफ बार ग्राफ
चित्र या प्रतीक द्वारा आँकड़े दिखाए जाते हैं स्तम्भों द्वारा आँकड़े दिखाए जाते हैं
एक प्रतीक का निश्चित मान होता है Y-अक्ष पर निश्चित पैमाना होता है
चित्रों की संख्या गिनी जाती है स्तम्भ की ऊँचाई पढ़ी जाती है

परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा

ऐसा आरेख जिसमें आँकड़ों को समान चौड़ाई तथा समान दूरी वाले स्तम्भों की सहायता से प्रदर्शित किया जाता है, बार ग्राफ या स्तम्भ आरेख कहलाता है। स्तम्भों की ऊँचाई संबंधित आँकड़ों के मान को प्रदर्शित करती है।

बार ग्राफ बनाने की सरल क्रम-विधि

आँकड़े व्यवस्थित करें
↓
X-अक्ष और Y-अक्ष बनाएँ
↓
Y-अक्ष पर पैमाना तय करें
↓
X-अक्ष पर श्रेणियाँ लिखें
↓
मान के अनुसार स्तम्भ बनाएँ
↓
समान चौड़ाई और समान दूरी रखें
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • समान चौड़ाई वाले स्तम्भों द्वारा आँकड़ों का प्रदर्शन बार ग्राफ या स्तम्भ आरेख कहलाता है।
  • स्तम्भों के बीच की दूरी समान रखी जाती है।
  • X-अक्ष क्षैतिज तथा Y-अक्ष ऊर्ध्वाधर होता है।
  • X-अक्ष पर सामान्यतः श्रेणियाँ और Y-अक्ष पर संख्यात्मक मान प्रदर्शित किए जाते हैं।
  • स्तम्भ की ऊँचाई संबंधित आँकड़े के मान के अनुसार होती है।
  • विश्वविद्यालय वाले उदाहरण में 1985, 1995, 2005 और 2015 में विद्यार्थियों की संख्या क्रमशः 5000, 6500, 7000 और 8000 है।
  • परीक्षा परिणाम में द्वितीय श्रेणी 40% और अनुत्तीर्ण 10% हैं।
  • 600 पूर्णांक वाले उदाहरण में नाजिया के 560 अंक सर्वाधिक और नमिता के 300 अंक सबसे कम हैं।

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Topic 4 स्तम्भ आरेख के उपयोग, गुण एवं दोष

स्तम्भ आरेख के उपयोग, गुण एवं दोष

स्तम्भ आरेख की उपयोगिता

स्तम्भ आरेख या बार ग्राफ आँकड़ों को इस प्रकार प्रस्तुत करता है कि विभिन्न श्रेणियों के मानों को एक ही दृष्टि में देखा और उनकी तुलना की जा सके।

विशेष रूप से जब आँकड़ों की सरल तुलना करनी हो, तब स्तम्भ आरेख उपयोगी होता है।

स्तम्भ आरेख के प्रमुख उपयोग

पाठ्यपुस्तक के अनुसार स्तम्भ आरेख के प्रमुख उपयोग निम्न हैं—

1. आँकड़ों की सरल तुलना

यदि विभिन्न आँकड़ों की तुलना सरलता से करनी हो, तो स्तम्भ आरेख का उपयोग लाभकारी होता है।

स्तम्भों की ऊँचाई देखकर तुरंत पता लगाया जा सकता है कि किस श्रेणी का मान अधिक और किसका कम है।

जैसे यदि किसी परीक्षा में चार श्रेणियों का प्रतिशत हो—

प्रथम श्रेणी = 30%

द्वितीय श्रेणी = 40%

तृतीय श्रेणी = 20%

अनुत्तीर्ण = 10%

तो स्तम्भों की ऊँचाई देखकर स्पष्ट हो जाता है कि द्वितीय श्रेणी का प्रतिशत सबसे अधिक और अनुत्तीर्ण प्रतिशत सबसे कम है।

2. आँकड़ों की एक ही दृष्टि में व्याख्या

स्तम्भ आरेख की सहायता से कई आँकड़ों को एक साथ देखकर उनके बारे में सामान्य जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

अलग-अलग संख्याओं को बार-बार पढ़ने के स्थान पर स्तम्भों की ऊँचाई देखकर आँकड़ों की स्थिति समझी जा सकती है।

3. आँकड़ों के वर्गीकरण का प्रदर्शन

स्तम्भ आरेख का उपयोग विभिन्न वर्गों या श्रेणियों में बाँटे गए आँकड़ों को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।

जैसे—

  • विद्यार्थियों के प्राप्तांक
  • परीक्षाफल की विभिन्न श्रेणियाँ
  • अलग-अलग वर्षों के आँकड़े

इन श्रेणियों को अलग-अलग स्तम्भों के रूप में प्रदर्शित करके उनकी तुलना की जा सकती है।

स्तम्भ आरेख के गुण

पाठ्यपुस्तक में स्तम्भ आरेख के निम्न प्रमुख गुण बताए गए हैं—

1. आँकड़ों की जानकारी एक ही दृष्टि में

स्तम्भ आरेख की सहायता से सभी प्रदर्शित आँकड़ों के बारे में सामान्य जानकारी एक ही दृष्टि में प्राप्त की जा सकती है।

सबसे ऊँचा तथा सबसे छोटा स्तम्भ देखकर बड़े और छोटे मान की पहचान तुरंत की जा सकती है।

2. तुलना करना आसान

स्तम्भों की ऊँचाई की तुलना करके विभिन्न आँकड़ों के बीच अंतर आसानी से समझा जा सकता है।

इस कारण संख्याओं की लंबी सूची की तुलना में स्तम्भ आरेख अधिक सरल रूप में जानकारी प्रस्तुत करता है।

3. वर्गांतरों या श्रेणियों के प्रदर्शन में सुविधा

पाठ्यपुस्तक के अनुसार स्तम्भ आरेख में वर्गांतरों को आवश्यकता के अनुसार साथ-साथ या अलग-अलग प्रदर्शित किया जा सकता है।

इस प्रकार आँकड़ों के वर्गों को प्रदर्शित करने में अधिक सुविधा मिलती है।

स्तम्भ आरेख के दोष

स्तम्भ आरेख उपयोगी होने के साथ-साथ इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं।

1. बहुत अधिक आँकड़ों के लिए उपयुक्त नहीं

यदि आँकड़ों की संख्या बहुत अधिक हो, तो प्रत्येक आँकड़े के लिए अलग स्तम्भ बनाना कठिन हो जाता है।

ऐसी स्थिति में ग्राफ बहुत बड़ा और जटिल हो सकता है, इसलिए स्तम्भ आरेख अधिक उपयोगी नहीं रहता।

2. केवल साधारण तुलना के लिए अधिक उपयोगी

स्तम्भ आरेख द्वारा विभिन्न आँकड़ों की सामान्य या साधारण तुलना आसानी से की जा सकती है।

लेकिन यदि बहुत सूक्ष्म, विस्तृत अथवा पूर्ण तुलना की आवश्यकता हो, तो केवल स्तम्भ आरेख पर्याप्त नहीं होता।

3. सांख्यिकीय व्याख्या के लिए सीमित उपयोग

यदि आँकड़ों का विस्तृत सांख्यिकीय विश्लेषण या व्याख्या करनी हो, तो स्तम्भ आरेख अकेले पर्याप्त सिद्ध नहीं होता।

यह आँकड़ों को देखने और तुलना करने के लिए उपयोगी है, लेकिन विस्तृत सांख्यिकीय निष्कर्ष निकालने के लिए अन्य विधियों की भी आवश्यकता हो सकती है।

उपयोग और गुण में अंतर

उपयोग गुण
बताता है कि स्तम्भ आरेख कहाँ काम आता है बताता है कि स्तम्भ आरेख उपयोगी क्यों है
आँकड़ों की तुलना तुलना आसानी से हो जाती है
आँकड़ों की व्याख्या जानकारी एक ही दृष्टि में मिलती है
वर्गीकृत आँकड़ों का प्रदर्शन विभिन्न वर्गों को आसानी से दिखाया जा सकता है

गुण और दोष एक साथ

गुण दोष
एक ही दृष्टि में आँकड़ों की जानकारी मिलती है बहुत अधिक आँकड़ों के लिए उपयुक्त नहीं
आँकड़ों की तुलना आसान होती है मुख्यतः साधारण तुलना के लिए उपयोगी
विभिन्न वर्गों को प्रदर्शित करना सुविधाजनक है विस्तृत सांख्यिकीय व्याख्या के लिए पर्याप्त नहीं

परीक्षा में लिखने योग्य उत्तर — स्तम्भ आरेख के उपयोग

स्तम्भ आरेख का उपयोग आँकड़ों की सरल तुलना करने, उन्हें एक ही दृष्टि में समझने तथा वर्गीकृत आँकड़ों को अलग-अलग स्तम्भों के रूप में प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।

परीक्षा में लिखने योग्य उत्तर — स्तम्भ आरेख के गुण

  1. इससे आँकड़ों की जानकारी एक ही दृष्टि में प्राप्त हो जाती है।
  2. विभिन्न आँकड़ों के बीच तुलना आसानी से की जा सकती है।
  3. अलग-अलग वर्गों या श्रेणियों को सरलता से प्रदर्शित किया जा सकता है।

परीक्षा में लिखने योग्य उत्तर — स्तम्भ आरेख के दोष

  1. बहुत अधिक आँकड़ों को प्रदर्शित करने के लिए यह उपयुक्त नहीं है।
  2. इसके द्वारा मुख्यतः साधारण तुलना ही की जा सकती है।
  3. विस्तृत सांख्यिकीय व्याख्या के लिए यह पर्याप्त उपयोगी नहीं है।

कब स्तम्भ आरेख चुनें?

कम या सीमित श्रेणियाँ
↓
आँकड़ों की सरल तुलना चाहिए
↓
मानों को एक दृष्टि में देखना है
↓
स्तम्भ आरेख उपयोगी

कब इसकी सीमा सामने आती है?

बहुत अधिक आँकड़े
↓
बहुत अधिक स्तम्भ
↓
ग्राफ जटिल
↓
स्तम्भ आरेख कम उपयोगी
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • स्तम्भ आरेख आँकड़ों की सरल तुलना के लिए उपयोगी है।
  • इसके द्वारा आँकड़ों को एक ही दृष्टि में समझा जा सकता है।
  • यह आँकड़ों के वर्गीकरण को प्रदर्शित करने में उपयोगी है।
  • स्तम्भ आरेख से विभिन्न आँकड़ों की तुलना आसानी से हो जाती है।
  • विभिन्न वर्गों या श्रेणियों को अलग-अलग प्रदर्शित किया जा सकता है।
  • बहुत अधिक आँकड़ों के लिए स्तम्भ आरेख उपयुक्त नहीं होता।
  • इसके द्वारा मुख्यतः साधारण तुलना की जाती है।
  • विस्तृत सांख्यिकीय व्याख्या के लिए स्तम्भ आरेख पर्याप्त नहीं होता।
Topic 5 पाई ग्राफ / वृत्त आरेख

पाई ग्राफ / वृत्त आरेख

पाई ग्राफ / वृत्त आरेख का अर्थ

जब प्राप्त आँकड़ों को एक वृत्त के विभिन्न भागों के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, तो ऐसे ग्राफ को पाई ग्राफ या वृत्त आरेख कहा जाता है।

वृत्त का प्रत्येक भाग किसी एक श्रेणी या वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है और उस भाग का आकार संबंधित आँकड़े के मान के अनुसार निर्धारित किया जाता है।

पाई ग्राफ को वृत्त आरेख तथा कोणीय आरेख भी कहा जाता है।

पूरा वृत्त कितने अंश का होता है?

किसी वृत्त के केन्द्र पर बनने वाला पूरा कोण—

360°

होता है।

इसलिए पाई ग्राफ में कुल आँकड़ों को 360° के बराबर माना जाता है और प्रत्येक श्रेणी को उसके अनुपात के अनुसार केन्द्रीय कोण दिया जाता है।

प्रतिशत और केन्द्रीय कोण का संबंध

पूरे वृत्त का मान 100% तथा 360° होता है।

अतः—

100% = 360°

1% = 360° / 100

   = 3.6°

इसलिए किसी प्रतिशत को केन्द्रीय कोण में बदलने का सूत्र—

केन्द्रीय कोण

= 3.6° × प्रतिशत

अथवा—

केन्द्रीय कोण

= (360° / 100) × प्रतिशत

प्रतिशत से पाई ग्राफ बनाना

यदि आँकड़े पहले से प्रतिशत में दिए हों, तो प्रत्येक प्रतिशत को 3.6° से गुणा करके उसका केन्द्रीय कोण ज्ञात किया जाता है।

उदाहरण 1 — कक्षा 12 का परीक्षा परिणाम

एक विद्यालय में कक्षा 12 का परिणाम निम्न है—

श्रेणी प्रतिशत
प्रथम श्रेणी 30%
द्वितीय श्रेणी 40%
तृतीय श्रेणी 10%
अनुत्तीर्ण 20%

केन्द्रीय कोण ज्ञात करना

प्रथम श्रेणी के लिए—

30 × 3.6°

= 108°

द्वितीय श्रेणी के लिए—

40 × 3.6°

= 144°

तृतीय श्रेणी के लिए—

10 × 3.6°

= 36°

अनुत्तीर्ण के लिए—

20 × 3.6°

= 72°

जाँच—

108° + 144° + 36° + 72°

= 360°

अतः पाई ग्राफ के चार भाग क्रमशः 108°, 144°, 36° और 72° के होंगे।

श्रेणी प्रतिशत केन्द्रीय कोण
प्रथम 30% 108°
द्वितीय 40% 144°
तृतीय 10% 36°
अनुत्तीर्ण 20% 72°

जब आँकड़े प्रतिशत में न दिए हों

यदि अलग-अलग श्रेणियों की वास्तविक संख्याएँ दी गई हों, तो पहले कुल संख्या ज्ञात की जाती है।

फिर प्रत्येक श्रेणी का केन्द्रीय कोण सीधे निम्न सूत्र से निकाला जा सकता है—

केन्द्रीय कोण

= (श्रेणी की संख्या / कुल संख्या) × 360°

उदाहरण 2 — विभिन्न संकायों में विद्यार्थियों की संख्या

एक विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या—

संकाय विद्यार्थियों की संख्या
कला 550
विज्ञान 450
वाणिज्य 200
कृषि 100

कुल विद्यार्थियों की संख्या—

550 + 450 + 200 + 100

= 1300

कला संकाय का कोण

= (550 / 1300) × 360°

≈ 152.31°

विज्ञान संकाय का कोण

= (450 / 1300) × 360°

≈ 124.62°

वाणिज्य संकाय का कोण

= (200 / 1300) × 360°

≈ 55.38°

कृषि संकाय का कोण

= (100 / 1300) × 360°

≈ 27.69°

इन कोणों की सहायता से वृत्त को चार भागों में विभाजित करके संबंधित संकायों का पाई ग्राफ बनाया जा सकता है।

प्रतिशत निकालकर भी यही प्रश्न हल किया जा सकता है

जैसे कला संकाय का प्रतिशत—

= (550 / 1300) × 100

≈ 42.31%

फिर—

केन्द्रीय कोण

= 42.31 × 3.6°

≈ 152.3°

इसी प्रकार अन्य श्रेणियों के कोण भी निकाले जा सकते हैं।

पाई ग्राफ बनाने की क्रम-विधि

  1. सबसे पहले सभी श्रेणियों की कुल संख्या ज्ञात करें।
  2. प्रत्येक श्रेणी का प्रतिशत या अनुपात ज्ञात करें।
  3. प्रत्येक श्रेणी का केन्द्रीय कोण निकालें।
  4. परकार की सहायता से एक वृत्त बनाएँ।
  5. वृत्त के केन्द्र से एक त्रिज्या खींचें।
  6. चाँदे की सहायता से क्रमशः सभी केन्द्रीय कोण बनाएँ।
  7. प्रत्येक भाग के अंदर संबंधित श्रेणी का नाम या मान लिखें।
प्रतिशत को केन्द्रीय कोण में बदलकर पाई ग्राफ बनाने की प्रक्रिया
100% = 360° के आधार पर प्रतिशत को केन्द्रीय कोण में बदलकर वृत्त आरेख बनाना

परीक्षा उपयोगी उदाहरण — टेलीविजन ब्राण्ड

पाठ्यपुस्तक में टेलीविजन के पाँच ब्राण्ड खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या निम्न दी गई है—

ब्राण्ड संख्या
A 40
B 20
C 15
D 15
E 10

कुल संख्या—

40 + 20 + 15 + 15 + 10

= 100

इसलिए यहाँ प्रत्येक संख्या सीधे प्रतिशत भी है।

अब केन्द्रीय कोण—

A = 40 × 3.6° = 144°

B = 20 × 3.6° = 72°

C = 15 × 3.6° = 54°

D = 15 × 3.6° = 54°

E = 10 × 3.6° = 36°

जाँच—

144° + 72° + 54° + 54° + 36°

= 360°

अतः इन्हीं कोणों की सहायता से पाँचों ब्राण्डों का पाई ग्राफ तैयार किया जाएगा।

वृत्त आरेख की उपयोगिता

पाठ्यपुस्तक के अनुसार पाई ग्राफ / वृत्त आरेख की प्रमुख उपयोगिताएँ—

  1. प्रतिशत या केन्द्रीय कोण के रूप में दिए आँकड़ों को प्रदर्शित किया जा सकता है।
  2. विभिन्न आँकड़ों की तुलना करने में इसका उपयोग किया जाता है।
  3. एक ही चर की विभिन्न श्रेणियों या आयामों को प्रदर्शित करने के लिए यह उपयोगी है।

वृत्त आरेख के गुण

  1. पूरे आँकड़े को विभिन्न भागों में बाँटकर स्पष्ट रूप से दिखाया जा सकता है।
  2. निश्चित श्रेणियों वाले आँकड़ों को कम समूहों में प्रदर्शित करना सरल होता है।
  3. आँकड़ों के अनुपात को वृत्त के कोणीय भागों द्वारा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जा सकता है।

वृत्त आरेख के दोष

  1. यदि श्रेणियों या आँकड़ों की संख्या बहुत अधिक हो, तो पाई ग्राफ जटिल हो जाता है।
  2. पाई ग्राफ बनाने से पहले प्रत्येक भाग का केन्द्रीय कोण ज्ञात करना पड़ता है।
  3. अनेक श्रेणियों के कोणों की गणना करने में अधिक समय लग सकता है।

बार ग्राफ और पाई ग्राफ में अंतर

बार ग्राफ पाई ग्राफ
आँकड़ों को स्तम्भों से प्रदर्शित करता है आँकड़ों को वृत्त के भागों से प्रदर्शित करता है
स्तम्भ की ऊँचाई मान दर्शाती है केन्द्रीय कोण अनुपात दर्शाता है
X-अक्ष और Y-अक्ष का प्रयोग होता है पूरा वृत्त 360° माना जाता है
सीधी तुलना में उपयोगी कुल में विभिन्न भागों का अनुपात दिखाने में उपयोगी

परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा

जब आँकड़ों को एक वृत्त के विभिन्न भागों के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, तो उसे पाई ग्राफ या वृत्त आरेख कहते हैं। पूरे वृत्त का कोण 360° होता है तथा प्रत्येक श्रेणी का केन्द्रीय कोण उसके अनुपात के अनुसार निर्धारित किया जाता है।

महत्वपूर्ण सूत्र

पूरा वृत्त = 360°

100% = 360°

1% = 3.6°

केन्द्रीय कोण
= प्रतिशत × 3.6°

या

केन्द्रीय कोण
= (श्रेणी का मान / कुल मान) × 360°

उत्तर की जाँच

पाई ग्राफ बनाते समय सभी केन्द्रीय कोणों का योग हमेशा—

360°

होना चाहिए।

यदि योग 360° नहीं आता, तो प्रतिशत या कोण की गणना में त्रुटि हुई है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • आँकड़ों को वृत्त के भागों द्वारा प्रदर्शित करने वाला आरेख पाई ग्राफ या वृत्त आरेख कहलाता है।
  • पूरा वृत्त 360° का होता है।
  • 100% = 360° तथा 1% = 3.6°
  • केन्द्रीय कोण = प्रतिशत × 3.6°
  • यदि वास्तविक संख्या दी हो तो केन्द्रीय कोण = (श्रेणी का मान / कुल मान) × 360°
  • 30%, 40%, 10% और 20% के कोण क्रमशः 108°, 144°, 36° और 72° हैं।
  • A = 40, B = 20, C = 15, D = 15 और E = 10 के कोण क्रमशः 144°, 72°, 54°, 54° और 36° हैं।
  • सभी केन्द्रीय कोणों का योग 360° होना चाहिए।
  • वृत्त आरेख प्रतिशत अथवा कुल में विभिन्न भागों का अनुपात प्रदर्शित करने के लिए उपयोगी है।
  • बहुत अधिक श्रेणियाँ होने पर पाई ग्राफ जटिल हो जाता है।

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Topic 6 बीजगणित की अवधारणा एवं बीजीय व्यंजक

बीजगणित की अवधारणा एवं बीजीय व्यंजक

बीजगणित का अर्थ

गणित की वह शाखा जिसमें ज्ञात तथा अज्ञात राशियों को अक्षरों, चिन्हों और संख्याओं की सहायता से व्यक्त करके उनके बीच संबंध स्थापित किया जाता है, बीजगणित कहलाती है।

बीजगणित की सहायता से ऐसी राशियों को भी गणितीय रूप में लिखा जा सकता है जिनका वास्तविक मान हमें प्रारम्भ में ज्ञात नहीं होता।

ज्ञात और अज्ञात राशि

जिस राशि का मान पहले से दिया हुआ हो, वह ज्ञात राशि होती है।

जिस राशि का मान अभी ज्ञात न हो और जिसे किसी अक्षर की सहायता से व्यक्त किया जाए, वह अज्ञात राशि कहलाती है।

जैसे—

ज्ञात राशि = 15

अज्ञात राशि = x

यदि राम के पास 15 टॉफियाँ हों और श्याम उसे कुछ और टॉफियाँ दे, लेकिन उनकी संख्या ज्ञात न हो, तो उस अज्ञात संख्या को x मान सकते हैं।

बीज या चर क्या है?

बीजगणित में अज्ञात अथवा बदलने वाली राशियों को सामान्यतः अक्षरों से व्यक्त किया जाता है।

इन अक्षरों का अलग-अलग मान हो सकता है। इन्हें चर अथवा बीज के रूप में प्रयोग किया जाता है।

पाठ्यपुस्तक के अनुसार इसके लिए हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों वर्णों का प्रयोग किया जा सकता है, जैसे—

क, ख, ग ...

a, b, c, d ...

x, y, z ...

व्यावहारिक प्रश्नों में अज्ञात राशि के लिए सामान्यतः x का प्रयोग किया जाता है।

बीजीय व्यंजक क्या है?

जब ज्ञात संख्याओं और अज्ञात राशियों या चरों को जोड़, घटाव आदि गणितीय संक्रियाओं की सहायता से एक साथ लिखा जाता है, तो प्राप्त गणितीय रूप को बीजीय व्यंजक कहा जाता है।

जैसे—

15 + x

5 − x

20 + 15 − x

ये सभी बीजीय व्यंजक हैं क्योंकि इनमें संख्या के साथ अज्ञात राशि x का प्रयोग किया गया है।

उदाहरण 1 — राम की टॉफियाँ

राम के पास 15 टॉफियाँ थीं। श्याम ने उसे कुछ और टॉफियाँ दे दीं।

श्याम द्वारा दी गई टॉफियों की संख्या ज्ञात नहीं है, इसलिए माना—

श्याम द्वारा दी गई टॉफियाँ = x

अब राम के पास कुल टॉफियाँ—

15 + x

अतः इस परिस्थिति का बीजीय व्यंजक 15 + x है।

उदाहरण 2 — मोहन की चॉकलेट

मोहन के पास 5 चॉकलेट थीं। उसने उनमें से कुछ चॉकलेट अपनी बहन को दे दीं।

माना दी गई चॉकलेट की संख्या = x

तब मोहन के पास बची चॉकलेट—

5 − x

अतः इस परिस्थिति का बीजीय व्यंजक 5 − x होगा।

जोड़ और घटाव की पहचान

  • यदि किसी मात्रा में कुछ जोड़ा जाए → + का प्रयोग करें।
  • यदि किसी मात्रा में से कुछ घटाया या दिया जाए → का प्रयोग करें।

उदाहरण 3 — रुपये का बीजीय रूप

एक छात्र के पास पहले ₹20 थे। दूसरे छात्र ने उसे ₹15 और दे दिए। इसके बाद पहले छात्र ने उनमें से कुछ रुपये खर्च कर दिए।

माना खर्च किए गए रुपये = x

पहले उसके पास—

20 + 15

रुपये हो गए।

अब x रुपये खर्च करने के बाद शेष राशि—

20 + 15 − x

होगी।

अतः इस परिस्थिति का बीजीय व्यंजक 20 + 15 − x है।

शब्दों को बीजीय रूप में कैसे बदलें?

स्थिति बीजीय रूप
15 में x जोड़ा गया 15 + x
5 में से x घटाया गया 5 − x
20 में 15 जोड़ा, फिर x घटाया 20 + 15 − x
ज्ञात और अज्ञात राशियों तथा दैनिक कथनों को बीजीय व्यंजक में बदलने की अवधारणा
अज्ञात राशि को चर मानकर दैनिक परिस्थितियों को बीजीय व्यंजक में बदलना

उदाहरण 4 — अज्ञात राशि का मान

श्याम के पास ₹4357 थे। उसने कुछ रुपये मोहन को दे दिए और उसके पास ₹4000 शेष रहे।

माना मोहन को दिए गए रुपये = x

तब स्थिति को बीजीय रूप में लिखेंगे—

4357 − x = 4000

अब—

x = 4357 − 4000

x = 357

अतः श्याम ने मोहन को ₹357 दिए।

x का प्रयोग क्यों किया गया?

प्रश्न को हल करने से पहले मोहन को दी गई राशि ज्ञात नहीं थी।

इसी अज्ञात राशि को पहले x माना गया और गणना के बाद उसका वास्तविक मान 357 प्राप्त हुआ।

इस प्रकार बीजगणित अज्ञात राशि को किसी अक्षर द्वारा व्यक्त करके उसका मान ज्ञात करने में सहायता करता है।

संख्या और चर में अंतर

संख्या चर
मान स्पष्ट रूप से ज्ञात होता है मान बदल सकता है या प्रारम्भ में अज्ञात हो सकता है
जैसे 5, 15, 20 जैसे x, y, z

बीजगणित को समझने की सरल प्रक्रिया

दैनिक परिस्थिति
↓
ज्ञात राशि पहचानें
↓
अज्ञात राशि को x मानें
↓
जोड़ / घटाव का संबंध पहचानें
↓
बीजीय व्यंजक लिखें

कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण एक साथ

15 टॉफियाँ + x टॉफियाँ
= 15 + x

5 चॉकलेट − x चॉकलेट
= 5 − x

₹20 + ₹15 − ₹x
= 20 + 15 − x

₹4357 − ₹x = ₹4000
⇒ x = ₹357

परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा — बीजगणित

गणित की वह शाखा जिसमें ज्ञात तथा अज्ञात राशियों को अक्षरों, संख्याओं और गणितीय चिन्हों की सहायता से व्यक्त किया जाता है, बीजगणित कहलाती है।

परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा — चर

ऐसी राशि जिसका मान बदल सकता है अथवा प्रारम्भ में ज्ञात न हो और जिसे किसी अक्षर द्वारा व्यक्त किया जाए, चर कहलाती है।

परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा — बीजीय व्यंजक

ज्ञात संख्याओं तथा चरों को गणितीय संक्रियाओं की सहायता से मिलाकर प्राप्त रूप बीजीय व्यंजक कहलाता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • बीजगणित में ज्ञात और अज्ञात दोनों प्रकार की राशियों का प्रयोग होता है।
  • अज्ञात राशि को सामान्यतः किसी अक्षर जैसे x, y या z से व्यक्त किया जाता है।
  • किसी मात्रा के बढ़ने पर जोड़ तथा घटने पर घटाव का चिह्न प्रयोग किया जाता है।
  • अज्ञात राशि का वास्तविक मान ज्ञात होने तक उसका स्थान चर लेता है।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • बीजगणित में ज्ञात एवं अज्ञात दोनों राशियों का प्रयोग होता है।
  • अज्ञात राशि को अक्षरों जैसे x, y, z से प्रदर्शित किया जा सकता है।
  • चर का मान अलग-अलग परिस्थितियों में अलग हो सकता है।
  • राम के पास 15 टॉफियाँ हों और x टॉफियाँ और मिलें, तो कुल टॉफियाँ 15 + x होंगी।
  • 5 चॉकलेट में से x चॉकलेट देने पर शेष 5 − x होंगी।
  • ₹20 में ₹15 जोड़कर x रुपये खर्च करने पर शेष राशि 20 + 15 − x होगी।
  • 4357 − x = 4000 होने पर x = 357
  • संख्याओं और चरों को गणितीय संक्रियाओं से जोड़कर बीजीय व्यंजक बनाया जाता है।
Topic 7 सजातीय बीजीय व्यंजक एवं उनका जोड़-घटाव

सजातीय बीजीय व्यंजक एवं उनका जोड़-घटाव

सजातीय बीजीय व्यंजक का अर्थ

ऐसे बीजीय पद जिनमें चर समान हों तथा उन चरों की घातें भी समान हों, सजातीय पद या सजातीय बीजीय व्यंजक कहलाते हैं।

इनके संख्यात्मक गुणांक अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन चर और उनकी घात समान रहनी चाहिए।

जैसे—

3x² और 7x²

दोनों में चर x तथा उसकी घात 2 समान है। इसलिए ये सजातीय पद हैं।

कुछ अन्य सजातीय पद

5x और 4x

2y और 3y

3ab और 5ab

3x³ और 7x³

4y² और 7y²

इन प्रत्येक जोड़ों में चर तथा उनकी घातें समान हैं।

सजातीय पदों की पहचान

सजातीय पद पहचानते समय तीन बातें देखें—

  1. चर समान हों।
  2. प्रत्येक चर की घात समान हो।
  3. संख्यात्मक गुणांक समान होना आवश्यक नहीं है।

जैसे—

5x और 9x
→ सजातीय

3x² और 8x²
→ सजातीय

4xy और 7xy
→ सजातीय

सजातीय पदों का जोड़

सजातीय पदों को जोड़ते समय केवल उनके संख्यात्मक गुणांकों को जोड़ा जाता है। चर और उसकी घात को ज्यों का त्यों रखा जाता है।

अर्थात—

ax + bx

= (a + b)x

उदाहरण 1 — 5xy, 4xy तथा xy का जोड़

5xy + 4xy + xy

= (5 + 4 + 1)xy

= 10xy

अतः योग 10xy है।

महत्वपूर्ण नियम

दो या दो से अधिक सजातीय पदों को जोड़ने के लिए उनके गुणांक जोड़ते हैं और चर तथा उनकी घातों को समान रखते हैं।

उदाहरण 2 — 5x + 4x + 2y + 3y

यहाँ—

  • 5x और 4x सजातीय हैं।
  • 2y और 3y सजातीय हैं।

अतः—

5x + 4x + 2y + 3y

= (5 + 4)x + (2 + 3)y

= 9x + 5y

अतः सरल रूप 9x + 5y है।

उदाहरण 3 — अलग-अलग घातों वाले सजातीय समूह

सरल कीजिए—

3x³ + 7x³ + 4y² + 7y²

यहाँ—

3x³ + 7x³
= 10x³

और—

4y² + 7y²
= 11y²

अतः—

3x³ + 7x³ + 4y² + 7y²

= 10x³ + 11y²

ऋणात्मक सजातीय पदों का जोड़

यदि सभी सजातीय पद ऋणात्मक हों, तो उनके गुणांकों के परिमाण को जोड़कर उत्तर के आगे ऋणात्मक चिन्ह लगाया जाता है।

उदाहरण 4 — −3ab, −5ab तथा −ab

−3ab + (−5ab) + (−ab)

= −(3 + 5 + 1)ab

= −9ab

अतः योग −9ab है।

उदाहरण 5 — ऋणात्मक x और y पद

−5x + (−4x) + (−2y) + (−3y)

= −9x − 5y

यहाँ x वाले पद आपस में तथा y वाले पद आपस में जोड़े गए हैं।

विपरीत चिन्ह वाले सजातीय पद

यदि सजातीय पदों के चिन्ह अलग-अलग हों, तो उनके गुणांकों को सामान्य पूर्णांकों की तरह जोड़ा या घटाया जाता है।

उदाहरण 6 — 21m तथा −9m

21m + (−9m)

= 21m − 9m

= 12m

अतः योग 12m है।

कोष्ठक वाले व्यंजक में सजातीय पद

कोष्ठक खोलने के बाद सजातीय पदों को पहचानकर उनके गुणांक जोड़े जा सकते हैं।

उदाहरण 7 — 5x + (7x − 3)

5x + (7x − 3)

= 5x + 7x − 3

= 12x − 3

यहाँ 5x तथा 7x सजातीय हैं, इसलिए उनका योग 12x हुआ। स्थिर संख्या −3 अलग रही।

सजातीय बीजीय पदों की पहचान और उनके गुणांकों का जोड़ तथा घटाव
सजातीय पदों में चर और घात समान रहते हैं तथा केवल गुणांकों का जोड़ या घटाव किया जाता है

सजातीय पदों का घटाव

सजातीय पदों को घटाते समय भी केवल उनके गुणांक घटाए जाते हैं। चर और उसकी घात समान रखी जाती है।

अर्थात—

ax − bx

= (a − b)x

उदाहरण 8 — 4x − 8x

4x − 8x

= (4 − 8)x

= −4x

अतः उत्तर −4x है।

कई सजातीय पदों का घटाव

उदाहरण 9 — 15x − 14x − 12y − 3y

पहले x वाले तथा y वाले पदों को एक साथ लें—

15x − 14x − 12y − 3y

= (15 − 14)x − (12 + 3)y

= x − 15y

अतः सरल रूप x − 15y है।

कोष्ठक के साथ घटाव

यदि किसी पूरे व्यंजक को घटाया जा रहा हो, तो कोष्ठक के बाहर का ऋणात्मक चिन्ह भीतर के प्रत्येक पद का चिन्ह बदल देता है।

−(a + b)

= −a − b

−(a − b)

= −a + b

उदाहरण 10 — a − (b − 2a)

कोष्ठक हटाने पर—

a − (b − 2a)

= a − b + 2a

= 3a − b

अतः सरल रूप 3a − b है।

उदाहरण 11 — दो बीजीय व्यंजकों का घटाव

सरल कीजिए—

(4x + 3y + z) − (2x + 3y − z)

दूसरे कोष्ठक के सभी चिन्ह बदलेंगे—

= 4x + 3y + z
  − 2x − 3y + z

अब सजातीय पदों को मिलाएँ—

= (4x − 2x)
  + (3y − 3y)
  + (z + z)

= 2x + 0 + 2z

= 2x + 2z

अतः उत्तर 2x + 2z है।

जोड़ और घटाव का मूल सिद्धान्त

स्थिति क्या करें?
सजातीय पदों का जोड़ गुणांक जोड़ें
सजातीय पदों का घटाव गुणांक घटाएँ
सभी पद ऋणात्मक गुणांक जोड़कर ऋणात्मक चिन्ह रखें
चिन्ह अलग-अलग पूर्णांकों की तरह जोड़-घटाव करें
कोष्ठक के बाहर − भीतर के सभी पदों के चिन्ह बदलें

क्या नहीं करना चाहिए?

केवल उन पदों को जोड़ा या घटाया जा सकता है जिनके चर और उनकी घातें समान हों।

जैसे—

5x + 3x
= 8x

लेकिन—

5x + 3y

को एक ही पद में नहीं बदला जा सकता, क्योंकि x और y अलग-अलग चर हैं।

इसी प्रकार—

4x² + 2x

भी सजातीय पद नहीं हैं क्योंकि x की घातें अलग हैं।

सजातीय पद पहचानने की सरल प्रक्रिया

चर देखें
↓
चर समान?
↓
घात देखें
↓
घात भी समान?
↓
हाँ → सजातीय पद
↓
केवल गुणांक जोड़ें / घटाएँ

परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा

ऐसे बीजीय पद जिनमें चर तथा उनकी संगत घातें समान हों, सजातीय पद कहलाते हैं। सजातीय पदों के जोड़ या घटाव में केवल उनके संख्यात्मक गुणांकों का जोड़ या घटाव किया जाता है तथा चर और उनकी घातें समान रहती हैं।

महत्वपूर्ण उदाहरण एक साथ

5xy + 4xy + xy
= 10xy

5x + 4x + 2y + 3y
= 9x + 5y

−3ab − 5ab − ab
= −9ab

21m − 9m
= 12m

4x − 8x
= −4x

a − (b − 2a)
= 3a − b

(4x + 3y + z) − (2x + 3y − z)
= 2x + 2z
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • समान चर और समान घात वाले पद सजातीय पद कहलाते हैं।
  • सजातीय पदों के गुणांक अलग-अलग हो सकते हैं।
  • सजातीय पदों के जोड़ में केवल गुणांक जोड़े जाते हैं।
  • सजातीय पदों के घटाव में केवल गुणांक घटाए जाते हैं।
  • 5xy + 4xy + xy = 10xy
  • 5x + 4x + 2y + 3y = 9x + 5y
  • −3ab − 5ab − ab = −9ab
  • 21m − 9m = 12m
  • 4x − 8x = −4x
  • कोष्ठक के बाहर ऋणात्मक चिन्ह होने पर भीतर के सभी पदों के चिन्ह बदलते हैं।
  • a − (b − 2a) = 3a − b
  • (4x + 3y + z) − (2x + 3y − z) = 2x + 2z
  • असमान चर या असमान घात वाले पदों को एक ही पद में नहीं जोड़ा जा सकता।

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Topic 8 विजातीय व्यंजक, सरलीकरण एवं सरल समीकरण

विजातीय व्यंजक, सरलीकरण एवं सरल समीकरण

विजातीय बीजीय व्यंजक का अर्थ

ऐसे बीजीय पद जिनमें चर अथवा उनकी घातें समान न हों, विजातीय पद कहलाते हैं।

विजातीय पदों को उनके गुणांक जोड़कर या घटाकर एक ही पद में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।

जैसे—

2x और 3y
→ विजातीय

3x³ और 7y
→ विजातीय

4x² और 5x
→ विजातीय

क्योंकि इन पदों के चर अथवा उनकी घातें समान नहीं हैं।

सजातीय और विजातीय पद में अंतर

सजातीय पद विजातीय पद
चर समान होते हैं चर अलग हो सकते हैं
संगत घातें समान होती हैं घातें अलग हो सकती हैं
गुणांक जोड़कर/घटाकर एक पद बनाया जा सकता है एक ही पद में नहीं मिलाया जा सकता
जैसे 3x² और 7x² जैसे 3x² और 7y

एक ही व्यंजक में सजातीय और विजातीय पद

किसी बड़े बीजीय व्यंजक में अलग-अलग प्रकार के पद हो सकते हैं। उनमें पहले सजातीय पदों को पहचानकर एक साथ लिया जाता है।

जैसे—

5x + 3y + 2x + 3x

यहाँ x वाले पद—

5x, 2x, 3x

सजातीय हैं, जबकि 3y उनसे विजातीय है।

अतः—

5x + 3y + 2x + 3x

= 5x + 2x + 3x + 3y

= 10x + 3y

अतः सरल रूप 10x + 3y है।

विजातीय पदों के साथ जोड़

विजातीय पदों को जोड़कर एक ही पद नहीं बनाया जा सकता।

जैसे—

3x³ + 7y

में दोनों पद विजातीय हैं। इसलिए इसका सरल रूप भी—

3x³ + 7y

ही रहेगा।

व्यंजक का सरलीकरण

किसी बीजीय व्यंजक को सरल करने के लिए उसमें उपस्थित सजातीय पदों को पहचानकर उनके गुणांक जोड़े या घटाए जाते हैं। विजातीय पद अलग-अलग बने रहते हैं।

उदाहरण 1 — 11x − 7y − 2x − 3x

x वाले पदों को एक साथ रखें—

11x − 7y − 2x − 3x

= 11x − 2x − 3x − 7y

= (11 − 2 − 3)x − 7y

= 6x − 7y

अतः सरल रूप 6x − 7y है।

उदाहरण 2 — 15x − 12y − 11x

15x − 12y − 11x

= 15x − 11x − 12y

= 4x − 12y

अतः उत्तर 4x − 12y है।

एक से अधिक प्रकार के सजातीय पद

किसी व्यंजक में अलग-अलग सजातीय समूह हो सकते हैं। प्रत्येक समूह को अलग-अलग सरल किया जाता है।

उदाहरण 3 — 3abc − 2ab² − 5abc + 3ab²

यहाँ—

  • 3abc और −5abc सजातीय हैं।
  • −2ab² और 3ab² सजातीय हैं।

अतः—

3abc − 2ab² − 5abc + 3ab²

= (3abc − 5abc)
  + (−2ab² + 3ab²)

= −2abc + ab²

ab उभयनिष्ठ लेने पर—

= ab(b − 2c)

अतः सरल रूप ab(b − 2c) है।

कोष्ठक वाले व्यंजकों का सरलीकरण

यदि किसी व्यंजक के पहले ऋणात्मक चिन्ह हो, तो कोष्ठक हटाते समय उसके भीतर के प्रत्येक पद का चिन्ह बदल जाता है।

−(a + b)
= −a − b

−(a − b)
= −a + b

उदाहरण 4 — रोहित के आम वाला प्रश्न

पाठ्यपुस्तक के बीजीय उदाहरण में—

(4x − 3y + 7z)
− (−2x − 3y + 7z)

दूसरे कोष्ठक के चिन्ह बदलेंगे—

= 4x − 3y + 7z
  + 2x + 3y − 7z

= 6x

अतः सरल रूप 6x है।

विजातीय और सजातीय पदों की पहचान तथा बीजीय व्यंजक के सरलीकरण और सरल समीकरण की प्रक्रिया
सजातीय पदों को समूहित करके व्यंजक सरल करना और अज्ञात राशि का मान ज्ञात करना

क्या जोड़ें कि इच्छित योग प्राप्त हो?

यदि किसी दिए गए व्यंजक में ऐसा दूसरा व्यंजक जोड़ना हो कि कोई निश्चित योग प्राप्त हो, तो—

जोड़ने वाला व्यंजक

= इच्छित योग − दिया गया व्यंजक

उदाहरण 5 — x − y में क्या जोड़ें कि योग 2x + y हो?

माना जोड़ने वाला व्यंजक = A

(x − y) + A

= 2x + y

अतः—

A
= (2x + y) − (x − y)

= 2x + y − x + y

= x + 2y

अतः x − y में x + 2y जोड़ना होगा

व्यंजक का मान ज्ञात करना

यदि किसी बीजीय व्यंजक में चर का मान दिया हो, तो उस चर के स्थान पर दिया गया मान रखकर गणना की जाती है।

उदाहरण 6 — a = −2 होने पर 5a² + 4a − 2

5a² + 4a − 2

= 5(−2)² + 4(−2) − 2

= 5 × 4 − 8 − 2

= 20 − 10

= 10

अतः व्यंजक का मान 10 है।

ऋणात्मक संख्या की घात में सावधानी

यदि—

a = −2

तो—

a² = (−2)² = 4

a³ = (−2)³ = −8

अर्थात सम घात पर परिणाम धनात्मक तथा विषम घात पर ऋणात्मक हो सकता है।

बीजीय सर्वसमिकाएँ

कुछ विशेष बीजीय सूत्रों की सहायता से वर्ग वाले व्यंजकों को सरलता से विस्तारित किया जा सकता है।

1. योग का वर्ग

(a + b)²

= a² + 2ab + b²

उदाहरण 7 — (x + 5)²

(x + 5)²

= x² + 2(x)(5) + 5²

= x² + 10x + 25

अतः—

(x + 5)² = x² + 10x + 25

2. अंतर का वर्ग

(a − b)²

= a² − 2ab + b²

उदाहरण 8 — (2x − 5)²

(2x − 5)²

= (2x)² − 2(2x)(5) + 5²

= 4x² − 20x + 25

अतः—

(2x − 5)² = 4x² − 20x + 25

सरल समीकरण का अर्थ

जब किसी गणितीय कथन में दो बीजीय राशियों के बीच = चिन्ह द्वारा समानता दिखाई जाती है और उसमें कोई अज्ञात चर हो, तो उसे समीकरण कहते हैं।

समीकरण हल करने का उद्देश्य उस चर का मान ज्ञात करना होता है जिससे दोनों पक्ष बराबर हो जाएँ।

उदाहरण 9 — 3x − 5 = x + 3

3x − 5 = x + 3

x वाले पद एक ओर तथा संख्याएँ दूसरी ओर—

3x − x

= 3 + 5

2x = 8

x = 8 / 2

x = 4

अतः x = 4

उत्तर की जाँच

x = 4 मूल समीकरण में रखें—

3(4) − 5
= 12 − 5
= 7

4 + 3
= 7

दोनों पक्ष बराबर हैं, इसलिए x = 4 सही उत्तर है।

सरल समीकरण का व्यावहारिक प्रयोग — आयु

सलमा अपनी बहन रेशमा से 10 वर्ष बड़ी है। चार वर्ष पहले सलमा की आयु रेशमा की आयु की दोगुनी थी।

माना रेशमा की वर्तमान आयु = x वर्ष

तब सलमा की वर्तमान आयु—

x + 10

चार वर्ष पहले—

रेशमा की आयु = x − 4

सलमा की आयु = x + 10 − 4
             = x + 6

प्रश्नानुसार—

2(x − 4) = x + 6

2x − 8 = x + 6

2x − x = 8 + 6

x = 14

अतः—

रेशमा की आयु = 14 वर्ष

सलमा की आयु
= 14 + 10
= 24 वर्ष

सरलीकरण की मुख्य प्रक्रिया

सभी पद देखें
↓
सजातीय पद पहचानें
↓
सजातीय पदों को समूहित करें
↓
उनके गुणांक जोड़ें / घटाएँ
↓
विजातीय पद अलग रखें
↓
सरल रूप प्राप्त करें

समीकरण हल करने की सरल प्रक्रिया

समीकरण लिखें
↓
चर वाले पद एक ओर
↓
संख्याएँ दूसरी ओर
↓
सजातीय पद सरल करें
↓
चर का मान ज्ञात करें
↓
मूल समीकरण में जाँच करें

महत्वपूर्ण सूत्र एक साथ

(a + b)²
= a² + 2ab + b²

(a − b)²
= a² − 2ab + b²

जोड़ने वाला व्यंजक
= इच्छित योग − दिया गया व्यंजक

परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा — विजातीय पद

ऐसे बीजीय पद जिनके चर अथवा उनकी संगत घातें समान नहीं होतीं, विजातीय पद कहलाते हैं। विजातीय पदों को सीधे जोड़कर या घटाकर एक सजातीय पद में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।

परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा — समीकरण

दो बीजीय राशियों के बीच समानता को = चिन्ह द्वारा व्यक्त करने वाले गणितीय कथन को समीकरण कहते हैं। समीकरण में अज्ञात चर का वह मान ज्ञात किया जाता है जिससे दोनों पक्ष समान हों।

हल करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • केवल सजातीय पदों के गुणांक जोड़े या घटाए जाते हैं।
  • विजातीय पद एक-दूसरे में विलीन नहीं किए जाते।
  • कोष्ठक के पहले ऋणात्मक चिन्ह हो तो भीतर के सभी चिन्ह बदलते हैं।
  • चर का मान रखते समय ऋणात्मक संख्या को कोष्ठक में लिखना सुरक्षित होता है।
  • समीकरण में किसी पद को दूसरी ओर ले जाने पर उसका चिन्ह बदल जाता है।
  • समीकरण का उत्तर मूल समीकरण में रखकर जाँचना चाहिए।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • असमान चर या असमान घात वाले पद विजातीय पद कहलाते हैं।
  • विजातीय पदों को सीधे एक पद में नहीं मिलाया जा सकता।
  • 5x + 3y + 2x + 3x = 10x + 3y
  • 11x − 7y − 2x − 3x = 6x − 7y
  • 3abc − 2ab² − 5abc + 3ab² = ab(b − 2c)
  • x − y में x + 2y जोड़ने पर योग 2x + y प्राप्त होता है।
  • a = −2 होने पर 5a² + 4a − 2 = 10
  • (x + 5)² = x² + 10x + 25
  • (2x − 5)² = 4x² − 20x + 25
  • 3x − 5 = x + 3 का हल x = 4 है।
  • आयु वाले उदाहरण में रेशमा की वर्तमान आयु 14 वर्ष तथा सलमा की 24 वर्ष है।

अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

चित्र, चिह्न या प्रतीक की सहायता से आँकड़ों को प्रदर्शित करने वाला ग्राफ कहलाता है—

व्याख्या: जिस ग्राफ में आँकड़ों को चित्र, चिह्न या प्रतीक द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, उसे पिक्टोग्राफ कहते हैं।
Q 2

यदि एक चित्र 50 पौधों को प्रदर्शित करता है, तो 300 पौधों के लिए कितने चित्र चाहिए?

व्याख्या: चित्रों की संख्या = 300 ÷ 50 = 6।
Q 3

बार ग्राफ में सभी स्तम्भों की चौड़ाई कैसी रखी जाती है?

व्याख्या: बार ग्राफ में सभी स्तम्भों की चौड़ाई समान तथा सामान्यतः उनके बीच की दूरी भी समान रखी जाती है।
Q 4

बार ग्राफ में सामान्यतः श्रेणियाँ किस अक्ष पर प्रदर्शित की जाती हैं?

व्याख्या: सामान्यतः X-अक्ष पर श्रेणियाँ तथा Y-अक्ष पर उनके संख्यात्मक मान प्रदर्शित किए जाते हैं।
Q 5

स्तम्भ आरेख का प्रमुख उपयोग है—

व्याख्या: स्तम्भ आरेख द्वारा विभिन्न श्रेणियों के आँकड़ों की सरल और त्वरित तुलना की जा सकती है।
Q 6

पूरे पाई ग्राफ के केन्द्र पर कुल कोण होता है—

व्याख्या: पूरा वृत्त 360° का होता है, इसलिए पाई ग्राफ के सभी केन्द्रीय कोणों का योग 360° होता है।
Q 7

पाई ग्राफ में 1% के लिए केन्द्रीय कोण कितना होता है?

व्याख्या: 100% = 360°, अतः 1% = 360°/100 = 3.6°।
Q 8

पाई ग्राफ में 40% का केन्द्रीय कोण होगा—

व्याख्या: केन्द्रीय कोण = 40 × 3.6° = 144°।
Q 9

बीजगणित में अज्ञात राशि को सामान्यतः किस प्रकार व्यक्त किया जाता है?

व्याख्या: बीजगणित में अज्ञात राशियों को सामान्यतः x, y, z आदि अक्षरों द्वारा व्यक्त किया जाता है।
Q 10

राम के पास 15 टॉफियाँ हैं और उसे x टॉफियाँ और मिलती हैं। कुल टॉफियों का बीजीय व्यंजक होगा—

व्याख्या: पहले 15 टॉफियाँ थीं और x टॉफियाँ और मिलीं, इसलिए कुल टॉफियाँ 15 + x होंगी।
Q 11

निम्न में से कौन-से पद सजातीय हैं?

व्याख्या: 3x² और 7x² में चर x तथा उसकी घात 2 दोनों समान हैं, इसलिए ये सजातीय पद हैं।
Q 12

5xy + 4xy + xy का सरल रूप है—

व्याख्या: सजातीय पदों के गुणांक जोड़ने पर (5 + 4 + 1)xy = 10xy प्राप्त होता है।
Q 13

निम्न में से कौन-से पद विजातीय हैं?

व्याख्या: 4x² और 2x में चर समान है, लेकिन x की घातें अलग हैं, इसलिए ये विजातीय पद हैं।
Q 14

यदि a = −2 हो, तो 5a² + 4a − 2 का मान होगा—

व्याख्या: 5(−2)² + 4(−2) − 2 = 20 − 8 − 2 = 10।
Q 15

समीकरण 3x − 5 = x + 3 का हल है—

व्याख्या: 3x − 5 = x + 3 ⇒ 3x − x = 3 + 5 ⇒ 2x = 8 ⇒ x = 4।

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पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 1 के विषय गणित के अध्याय आँकड़ों का ग्राफीय निरूपण एवं बीजीय व्यंजक से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1 2016

एक उद्यान में गुलाब, गेंदा, जूही और डहेलिया के पौधों की संख्या क्रमशः 300, 250, 100 और 150 है। इन आँकड़ों को पिक्टोग्राफ द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

Q 2 2017

रमेश के बगीचे में गुलाब, गेंदा, जूही, डहेलिया और रजनीगंधा के पौधों की संख्या क्रमशः 30, 25, 10, 15 और 45 है। इन्हें पिक्टोग्राफ द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

Q 3 2018

एक उद्यान में गुलाब, गेंदा, जूही, डहेलिया और रजनीगंधा के पौधों की संख्या क्रमशः 300, 250, 100, 150 और 450 है। इन आँकड़ों को पिक्टोग्राफ द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

Q 4 2023

रमेश के बगीचे में गेंदा 25, जूही 10, चमेली 15, रजनीगंधा 45 और गुलाब 35 पौधे हैं। इन्हें पिक्टोग्राफ द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

Q 5 2020

किसी कक्षा के विद्यार्थियों द्वारा पूर्णांक 600 में से प्राप्त अंकों को बार ग्राफ द्वारा निरूपित कीजिए— अमित 450, नमिता 300, दीप्ति 400, अजय 350, अमर 500 तथा नाजिया 560।

Q 6 2022

टेलीविजन के पाँच ब्राण्ड A, B, C, D और E को खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या क्रमशः 40, 20, 15, 15 और 10 है। आँकड़ों को पाई ग्राफ द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

Q 7 2016

रोहित के पास (4x − 3y + 7z) आम हैं। उसने (−2x − 3y + 7z) आम अपने भाई को दे दिए। अब उसके पास कितने आम बचे?

Q 8 2017

x − y में क्या जोड़ें कि योगफल 2x + y हो जाए?

Q 9 2018

x(y − z) + y(z − x) + z(x − y) को सरल कीजिए।

Q 10 2018

समीकरण 3x − 5 = x + 3 को हल कीजिए।

Q 11 2018

(x + 5)² का मान ज्ञात कीजिए।

Q 12 2019, 2023

यदि a = −2 हो तो 5a² + 4a − 2 का मान ज्ञात कीजिए।

Q 13 2019

सलमा अपनी बहन रेशमा से 10 वर्ष बड़ी है। 4 वर्ष पहले सलमा की आयु रेशमा की आयु की दो गुनी थी। दोनों की वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।

Q 14 2020

(2x − 5)² का मान ज्ञात कीजिए।

Q 15 2022

यदि x = 1 हो तो 3x(4x − 5) + 3 का मान ज्ञात कीजिए।

Q 16 2023

किसी गाँव में पुरुषों की संख्या 6xy + 5y² − 8z तथा महिलाओं की संख्या 2x + xy − 2y है। ज्ञात कीजिए पुरुषों की संख्या महिलाओं की संख्या से कितनी अधिक है।

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Practice More Questions

इसी semester और subject के MCQ Tests तथा Previous Year Papers practice करके अपनी तैयारी को और मजबूत बनाइए।

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