मल्टीमीडिया – परिचय, अवधारणा, अर्थ एवं विशेषताएँ
मल्टीमीडिया का परिचय
सामान्य कक्षा-कक्ष की अपेक्षा समावेशी शिक्षा में तकनीकी सहायता की अधिक आवश्यकता होती है। तकनीकी साधनों का प्रयोग विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि बढ़ाने तथा लेखन-अभिव्यक्ति, पठन, गणना और वर्तनी जैसी क्षमताओं में सुधार करने में सहायक होता है।
तकनीकी सहायता विशेष रूप से अधिगम-अक्षम विद्यार्थियों को लेखन तथा उसकी प्रक्रिया में सहायता प्रदान करती है। इसके माध्यम से ऐसे विद्यार्थियों को सामान्य कक्षा-कक्ष में समायोजित होने और अन्य विद्यार्थियों की तरह विभिन्न शैक्षिक क्रियाओं में भाग लेने का अवसर मिलता है।
इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए शिक्षक और तकनीकी सहायक विशेषज्ञों के बीच सहयोग आवश्यक है।
मल्टीमीडिया की अवधारणा (Concept of Multimedia)
लम्बे समय तक सूचनाओं को एकत्र करने और उनका आदान-प्रदान करने का प्रमुख साधन पाठ्य-पुस्तकें थीं। बीसवीं शताब्दी के मध्य कम्प्यूटर एक सहायक Storage Device के रूप में सामने आया। प्रारम्भ में कम्प्यूटर द्वारा किए जाने वाले कार्य मुख्यतः Text आधारित थे, जैसे सामान्य गणना करना और पत्र लिखना।
इस प्रकार एक ही माध्यम पर आधारित कम्प्यूटर कार्य को मोनो मीडिया (Mono Media) कहा गया। बाद में तकनीकी विकास के कारण कम्प्यूटर में तस्वीरों, ग्राफिक्स और वीडियो आदि का प्रभावी प्रयोग सम्भव हुआ। विभिन्न माध्यमों और तकनीकों के इसी संयुक्त रूप को मल्टीमीडिया (Multimedia) कहा जाता है।
दूसरे शब्दों में, मल्टीमीडिया ऐसी एप्लीकेशन है जिसमें एक ही प्रस्तुति में Text, Graphics, Audio और Video जैसे अनेक माध्यमों को सम्मिलित किया जाता है।
मल्टीमीडिया क्षमताओं के प्रभावी उपयोग के लिए केवल Personal Computer पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि आवश्यकतानुसार अतिरिक्त Hardware तथा Software की भी आवश्यकता होती है। कम्प्यूटर पर मल्टीमीडिया प्रस्तुति के लिए पी.सी. को S.P.C. Marketing Council द्वारा बनाए गए मानकों के अनुरूप कार्य करने में सक्षम होना चाहिए।
मल्टीमीडिया का अर्थ
मल्टीमीडिया (Multimedia) का शाब्दिक अर्थ बहुमाध्यम है। इसका आशय ऐसे कम्प्यूटर उपकरणों और प्रणालियों से है जिनमें अलग-अलग माध्यमों का संयुक्त रूप से प्रयोग किया जा सके।
मल्टीमीडिया में पाठ्य-सामग्री, चित्र, श्रव्य सामग्री, एनीमेशन, सिमुलेशन तथा अन्य माध्यमों को कम्प्यूटर की सहायता से एक साथ प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता सूचना प्राप्त करने के साथ-साथ सम्पर्क, संचार तथा नई सामग्री के सृजन से सम्बन्धित कार्य भी कर सकता है।
मल्टीमीडिया के प्रमुख रूप
उपयोगकर्ता की सहभागिता और नियंत्रण के आधार पर मल्टीमीडिया को दो प्रमुख रूपों में समझा जा सकता है—
1. रेखीय मल्टीमीडिया (Linear Multimedia)
जिस मल्टीमीडिया प्रस्तुति में उपयोगकर्ता सामग्री को देख, सुन या पढ़ सकता है, लेकिन उसके संचालन के दौरान उस पर किसी प्रकार का नियंत्रण या परिवर्तन नहीं कर सकता, उसे रेखीय मल्टीमीडिया कहते हैं।
टेलीविजन, सिनेमा और संगीत इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
2. इंटरैक्टिव मल्टीमीडिया (Interactive Multimedia)
जिस मल्टीमीडिया प्रस्तुति में उपयोगकर्ता सक्रिय रूप से भाग ले सकता है और आवश्यकता के अनुसार प्रस्तुति को नियंत्रित या परिवर्तित कर सकता है, उसे इंटरैक्टिव मल्टीमीडिया (Interactive Multimedia) कहा जाता है।
वीडियो गेम और कम्प्यूटर गेम इसके उदाहरण हैं।
शिक्षा में मल्टीमीडिया का महत्व
शिक्षा के क्षेत्र में मल्टीमीडिया समावेशी विद्यार्थियों और शिक्षकों को नया तथा उपयोगी अधिगम वातावरण प्रदान करने में सहायक है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इसके प्रयोग से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
मल्टीमीडिया जनसंचार तथा व्यक्तिगत संचार में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मल्टीमीडिया उपागम की प्रमुख परिभाषाएँ
शिक्षण-अधिगम के क्षेत्र में मल्टीमीडिया को बहुमाध्यम उपागम के रूप में भी समझा जाता है। इसकी प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं—
डॉ. भोरास्कर के अनुसार
वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए विभिन्न तकनीकों तथा मीडिया का सुनियोजित संयोजन में प्रभावी उपयोग करना बहुमाध्यम उपागम है।
National Society for the Study of Education के अनुसार
बहुमाध्यम उपागम ऐसी पद्धति है जिसमें विभिन्न दृश्य-श्रव्य माध्यमों, अनुभवों और अतिरिक्त शिक्षण-सामग्री को इस प्रकार परस्पर सम्बन्धित किया जाता है कि वे एक-दूसरे के प्रभाव और उपयोगिता को सुदृढ़ करें।
बहुमाध्यम उपागम का स्वरूप
मल्टीमीडिया उपागम में विभिन्न माध्यमों से सम्बन्धित अनेक Software अथवा उनका एकीकृत रूप सम्मिलित हो सकता है। यह ऐसा सामूहिक प्रस्तुतीकरण है जिसमें विषय-वस्तु, Graphics, चित्र, आवाज, संगीत तथा Video-Image आदि का कम्प्यूटर द्वारा प्रयोग किया जाता है।
Merriam-Webster Collegiate Dictionary में Multimedia को “Using, Involving or Encompassing Several Media” के रूप में स्पष्ट किया गया है, अर्थात् अनेक माध्यमों का प्रयोग, समावेश अथवा उन्हें अपने अन्तर्गत सम्मिलित करना।
शिक्षण-अधिगम के संदर्भ में बहुमाध्यम उपागम का अर्थ शिक्षण की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए एक से अधिक माध्यमों का प्रयोग करना है।
दीपिका बी. शाह के अनुसार
मल्टीमीडिया का तात्पर्य एक से अधिक माध्यमों से है, जिनका सम्प्रेषण में क्रमशः अथवा साथ-साथ प्रयोग किया जाता है। विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए माध्यमों का अलग-अलग प्रयोग करने के स्थान पर उनका एकीकृत (Integrated) रूप में प्रयोग किया जाना चाहिए।
एन. वैंकटया (1996) के अनुसार
शिक्षण-अधिगम में बहुमाध्यम उपागम का अभिप्राय संचार की आधुनिक तकनीकों का विधिवत् एवं सुचारू रूप से शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग करना है, जिससे व्यक्तिपरक अधिगम को सुधारात्मक तथा प्रभावशाली बनाया जा सके।
बहुमाध्यम उपागम विद्यार्थियों को अधिगम अनुभव स्वाभाविक रूप से प्राप्त करने में सहायता करता है।
शिक्षण-अधिगम में मल्टीमीडिया उपागम
शिक्षण-अधिगम में मल्टीमीडिया उपागम का आशय संचार की आधुनिक तकनीकों का विधिवत् तथा सुचारू रूप से शिक्षा में प्रयोग करना है। यह शिक्षक के हाथ में एक प्रभावी माध्यम है, जिसकी सहायता से वह अपने शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बना सकता है तथा विद्यार्थियों के वांछित व्यवहार में परिवर्तन लाने में सहायता कर सकता है।
इस कारण इसे अनुदेशनात्मक विकास (Instructional Development) से भी सम्बन्धित माना गया है। विभिन्न सम्प्रेषण माध्यमों का अनुदेशन की विधियों के साथ प्रयोग करना ही बहुमाध्यम अथवा मल्टीमीडिया उपागम का मूल आधार है।
मल्टीमीडिया की प्रमुख विशेषताएँ
- मल्टीमीडिया आवश्यकता के अनुसार सम्बन्धित मीडिया से अस्थायी रूप से जुड़ सकता है।
- यह विद्यार्थियों की शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता प्रदान करता है।
- मल्टीमीडिया के प्रयोग से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी बनाया जा सकता है।
- यह औपचारिक, अनौपचारिक एवं निरौपचारिक सभी प्रकार की शिक्षा प्रणालियों में सहायक है।
- इसका प्रयोग दूरवर्ती शिक्षा के क्षेत्र में सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
- शिक्षण-प्रशिक्षण के क्षेत्र में इसका प्रयोग सुगमता से किया जा सकता है।
- यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को रोचक बनाने में सहायता करता है।
- यह पाठ्य-सामग्री को सरल एवं बोधगम्य बनाने में सहायक है।
- मल्टीमीडिया की सहायता से शिक्षक कठिन एवं जटिल पाठ्य-सामग्री को सरलता से पढ़ाकर शक्ति तथा समय की बचत कर सकता है।
- मल्टीमीडिया के माध्यम से प्राप्त ज्ञान अधिक स्थायी होता है।
- Multimedia का शाब्दिक अर्थ बहुमाध्यम है।
- एक ही प्रस्तुति में अनेक माध्यमों का संयुक्त एवं एकीकृत प्रयोग मल्टीमीडिया कहलाता है।
- एक ही माध्यम पर आधारित कम्प्यूटर कार्य को Mono Media कहा गया है।
- मल्टीमीडिया के दो प्रमुख रूप हैं— Linear Multimedia और Interactive Multimedia।
- Linear Multimedia में उपयोगकर्ता प्रस्तुति को नियंत्रित नहीं करता, जबकि Interactive Multimedia में वह सक्रिय रूप से भाग लेकर उसे नियंत्रित या परिवर्तित कर सकता है।
- डॉ. भोरास्कर के अनुसार बहुमाध्यम उपागम में वांछित परिणाम के लिए विभिन्न तकनीकों और मीडिया का सुनियोजित संयोजन किया जाता है।
- एन. वैंकटया (1996) ने बहुमाध्यम उपागम को आधुनिक संचार तकनीकों के विधिवत् प्रयोग द्वारा अधिगम को अधिक प्रभावशाली बनाने से सम्बन्धित माना है।
- मल्टीमीडिया शिक्षण को सरल, प्रभावी, रोचक और बोधगम्य बनाता है तथा इसके माध्यम से प्राप्त ज्ञान अधिक स्थायी होता है।
मल्टीमीडिया के घटक, प्रयोग एवं एप्लीकेशन्स
मल्टीमीडिया के घटक (Components of Multimedia)
मल्टीमीडिया में विभिन्न प्रकार की सूचनाओं को एक साथ प्रस्तुत करने के लिए अनेक माध्यमों का प्रयोग किया जाता है। इसके प्रमुख घटक हैं— टेक्स्ट (Text), ऑडियो (Audio), ग्राफिक्स (Graphics), वीडियो (Video) और एनीमेशन (Animation)।
ये सभी घटक मिलकर सूचना को अधिक सरल, प्रभावी और आकर्षक रूप में प्रस्तुत करने में सहायता करते हैं।
1. टेक्स्ट (Text)
टेक्स्ट सूचना को प्रस्तुत करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। मल्टीमीडिया में टेक्स्ट का प्रयोग मुख्य रूप से शीर्षक (Titles), मुख्य शीर्षक (Headlines), विषय-सूची या मेन्यू (Menu) आदि को प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।
टेक्स्ट फाइलों को देखने और तैयार करने के लिए Microsoft Word, Notepad और WordPad जैसे सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है। अधिकांश टेक्स्ट फाइलें .doc और .txt जैसे प्रारूपों में बनाई जाती हैं।
2. ऑडियो (Audio)
मल्टीमीडिया में ऑडियो से अभिप्राय Recording और Playing आदि से है। ऑडियो मल्टीमीडिया का महत्वपूर्ण घटक है, क्योंकि इसकी सहायता से भाषण, संगीत तथा अन्य ध्वनियों को प्रस्तुत किया जा सकता है।
ऑडियो के प्रयोग से किसी विषय या अवधारणा को समझना अधिक प्रभावी हो सकता है तथा प्रस्तुति की गुणवत्ता भी बढ़ती है।
ऑडियो फाइल चलाने के लिए Quick Time, Real Player और Windows Media Player आदि सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है।
3. ग्राफिक्स (Graphics)
मल्टीमीडिया प्रस्तुति में ग्राफिक्स का महत्वपूर्ण स्थान होता है। चित्रों एवं दृश्य सामग्री के प्रयोग से किसी अवधारणा को अधिक स्पष्ट, प्रभावी और आकर्षक बनाया जा सकता है।
ग्राफिक्स देखने के लिए Windows Pictures और Internet Explorer आदि सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है। ग्राफिक्स को सम्पादित करने के लिए Adobe Photoshop जैसे सॉफ्टवेयर उपयोगी होते हैं।
4. वीडियो (Video)
वीडियो से अभिप्राय ध्वनि (Sound) के साथ चलती हुई तस्वीरों (Moving Pictures with Sound) से है। यह एक-दूसरे से सम्प्रेषण करने और किसी विषय को दृश्य एवं श्रव्य रूप में प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम है।
मल्टीमीडिया में वीडियो के प्रयोग से प्रस्तुति का स्तर अधिक प्रभावी हो जाता है तथा किसी विषय या प्रक्रिया को समझने में समय की बचत भी होती है।
वीडियो देखने के लिए Quick Time, Windows Media Player और Real Player आदि का प्रयोग किया जाता है।
5. एनीमेशन (Animation)
कम्प्यूटर में एनीमेशन का प्रयोग करके चित्रों को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि वे चलते और बोलते हुए प्रतीत हों। इसमें दर्शक की आँखों के सामने प्रत्येक क्षण बदलते हुए दृश्य प्रस्तुत किए जाते हैं।
भारत में एनीमेशन आधारित फिल्मों के उदाहरणों में Delhi Safari, Bal Shri Krishna और Bal Hanuman आदि सम्मिलित हैं।
एनीमेशन से सम्बन्धित सामग्री के लिए Internet Explorer, Windows Pictures और Fax Viewer आदि सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है।
मल्टीमीडिया का प्रयोग एवं अनुप्रयोग
सामान्य कक्षा-कक्ष में मल्टीमीडिया का प्रयोग विद्यार्थियों के बीच अन्तःक्रिया और सहभागिता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। तकनीकी कार्यों को बेहतर ढंग से करने की आदत विकसित करने के साथ यह विद्यार्थियों को अभिप्रेरित भी करता है।
यह विद्यार्थियों की अधिगम सम्बन्धी बाधाओं को दूर करने तथा उनके पठन, लेखन, गणितीय तर्कशक्ति और समस्या-समाधान को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
1. मनोरंजन (Entertainment)
मनोरंजन उद्योग में मल्टीमीडिया का प्रयोग खेलों को वास्तविक जीवन से जोड़ने तथा उन्हें अधिक आकर्षक बनाने के लिए किया जाता है। अनेक कम्प्यूटर गेमों में Graphics, Sound और Animation का संयुक्त प्रयोग किया जाता है।
Virtual Reality जैसी तकनीकों की सहायता से कम्प्यूटर आधारित अनुभवों को वास्तविक जीवन के अनुभवों जैसा बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, Flight Simulator की सहायता से आभासी वातावरण में विमान उड़ाने का अनुभव प्राप्त किया जा सकता है।
2. शैक्षिक मनोरंजन (Edutainment)
शिक्षा और मनोरंजन के संयुक्त प्रयोग को Edutainment कहा जाता है। बच्चों के लिए अनेक Multimedia Games उपलब्ध होते हैं, जिनके माध्यम से वे मनोरंजन के साथ सीख भी सकते हैं।
उदाहरण के रूप में बच्चे इनमें विभिन्न प्रकार की कार चला सकते हैं, विमान उड़ा सकते हैं, संगीत वाद्य-यंत्रों के साथ खेल सकते हैं, गुड़िया को कपड़े पहना सकते हैं, चेहरे बना सकते हैं, उनमें रंग भर सकते हैं तथा चेहरे के आकार में परिवर्तन कर सकते हैं।
इसी प्रकार के अन्य Edutainment Packages बच्चों को अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराते हैं। Microsoft, Sierra और Knowledge Adventure जैसी संस्थाओं द्वारा CD आधारित मल्टीमीडिया सामग्री विकसित की गई, जिनमें छोटे बच्चों के लिए विभिन्न बालगीत (Rhymes) भी उपलब्ध होते थे।
3. व्यावसायिक सम्प्रेषण (Business Communication)
व्यवसाय के क्षेत्र में मल्टीमीडिया एक प्रभावशाली सम्प्रेषण साधन है। इसके माध्यम से कर्मचारी सम्बन्धी संचार, उत्पाद-प्रचार, ग्राहक-सूचना तथा निवेशकों के लिए रिपोर्ट आदि को प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
मल्टीमीडिया तकनीक विभिन्न व्यावसायिक एप्लीकेशन्स को सरल और प्रभावी रूप में प्रस्तुत करने में सहायता करती है।
4. ज्ञान का स्थानान्तरण (Knowledge Transfer)
मल्टीमीडिया के माध्यम से ज्ञान तथा सूचनाओं को प्रभावी ढंग से एक व्यक्ति या समूह से दूसरे तक पहुँचाया जा सकता है। इसका प्रयोग अकादमिक और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में किया जाता है।
शैक्षिक क्षेत्र में Knowledge Transfer को ज्ञान-निर्माण के एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में प्रयोग किया जाता है, जबकि व्यवसाय में ज्ञान का प्रभावी स्थानान्तरण संगठन के संचालन के लिए आवश्यक होता है।
मल्टीमीडिया आधारित शिक्षण भविष्य में एक प्रभावी शिक्षण-सहायक सामग्री के रूप में उपयोगी हो सकता है। व्यावसायिक क्षेत्र में इसका प्रयोग श्रमिकों को अल्पकालिक प्रशिक्षण देने के लिए भी किया जा सकता है। प्रशिक्षण के क्षेत्र में इसका प्रयोग काफी लचीला (Flexible) होता है।
5. पब्लिक एक्सेस (Public Access)
Public Access मल्टीमीडिया एप्लीकेशन्स का ऐसा क्षेत्र है जहाँ उपयोगकर्ताओं को आवश्यक सूचनाएँ शीघ्र उपलब्ध कराई जाती हैं।
Tourist Information System इसका उदाहरण है। इसके माध्यम से किसी स्थान की यात्रा की योजना बनाने वाला व्यक्ति वहाँ पहुँचने से पहले उस स्थान के विभिन्न क्षेत्रों और आकर्षणों की झलक देख सकता है।
6. मल्टीमीडिया एप्लीकेशन्स का उपयोग
विभिन्न प्रकार के Multimedia Applications को सूचनाओं को व्यवस्थित और प्रभावी रूप में प्रस्तुत करने के लिए विकसित किया गया है।
उदाहरण के लिए, रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध Railway Time Table Enquiry System एक Multimedia आधारित व्यवस्था हो सकती है। यह केवल ट्रेन और उसके समय की जानकारी ही नहीं देती, बल्कि इच्छित Boarding Station से गन्तव्य तक का Map भी प्रदर्शित कर सकती है।
प्रमुख मल्टीमीडिया एप्लीकेशन्स
मल्टीमीडिया से सम्बन्धित कुछ प्रमुख एप्लीकेशन्स निम्नलिखित हैं—
- Windows Media Player
- Microsoft Encarta
- Windows Movie Maker
- Picasa
Windows Media Player
Windows Media Player एक Digital Media Player Application है, जो Microsoft Windows के साथ उपलब्ध होता है।
इसका प्रयोग मुख्यतः Personal Computer पर वीडियो देखने और संगीत सुनने के लिए किया जाता है। इसमें वीडियो या गानों को Play List के रूप में व्यवस्थित करके भी देखा और सुना जा सकता है।
Microsoft Encarta
Microsoft Encarta एक Digital Multimedia Encyclopedia था, जो वर्ष 1993 से 2009 तक उपलब्ध रहा।
वर्ष 2008 तक इसमें लगभग 62,000 लेख सम्मिलित थे। यह Software Online तथा 2 से 4 CD या DVD Sets के रूप में उपलब्ध था। वर्ष 2009 में Microsoft ने इसका प्रसार बन्द कर दिया।
Windows Movie Maker
Windows Movie Maker उन उपयोगकर्ताओं के लिए बनाया गया था जो अपने वीडियो को बनाना और सम्पादित (Editing) करना चाहते थे। Microsoft द्वारा इसे Sundance नाम के अन्तर्गत विकसित किया गया था।
इसका प्रयोग वीडियो तैयार करने और सम्पादित करने के साथ-साथ तैयार वीडियो को OneDrive, Facebook और YouTube आदि पर प्रकाशित करने में भी किया जा सकता था।
इसमें वीडियो सम्पादन सरल होता है। वीडियो को आवश्यकतानुसार विभाजित किया जा सकता है, उसमें परिवर्तन किए जा सकते हैं तथा पहले से उपलब्ध विभिन्न Themes की सहायता से वीडियो को अधिक आकर्षक बनाया जा सकता है।
Windows Movie Maker में वीडियो बनाने के प्रमुख चरण
- कैमरे से वीडियो Capture करना अथवा Pen Drive या अन्य Storage Device से वीडियो को Hard Disk में Transfer करना।
- Timeline या Storyboard की सहायता से Video Clips तथा अन्य संसाधनों को एक Film में जोड़ना।
- तैयार Movie को किसी उपयुक्त Format में Export करना तथा आवश्यकता होने पर अन्य लोगों के साथ Share करना।
Picasa
Picasa Laptop या Computer पर चित्रों को देखने, व्यवस्थित करने और सम्पादित करने के लिए Multimedia आधारित Software था।
इसके माध्यम से Digital Pictures का Album बनाया जा सकता था और उसे परिचित लोगों के साथ Share भी किया जा सकता था।
Picasa मूल रूप से Lifescape कम्पनी द्वारा बनाया गया था और बाद में Google ने इसे खरीद लिया।
यह मूल रूप से Windows XP, Vista, Windows 7 और Mac OS X के लिए तैयार किया गया था। बाद में Google ने Wine के साथ मिलकर Linux के लिए भी इसे उपलब्ध कराने का प्रयास किया। Linux Version पुराना होने के कारण उसमें Multimedia Software की विशेष Update सुविधाएँ सम्मिलित नहीं थीं।
विभिन्न Browsers द्वारा अभिनव शिक्षण सामग्री Upload करना
शिक्षण सामग्री को Internet पर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न Browsers जैसे Mozilla Firefox, Internet Explorer, Google Chrome, Opera Mini और UC Browser आदि का प्रयोग किया जा सकता है।
इस प्रकार Upload की गई सामग्री का उपयोग शिक्षक, विद्यार्थी और शोधकर्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार कर सकते हैं। Google Drive में लगभग 15 GB Memory उपलब्ध होने का उल्लेख किया गया है, जिसमें Files Upload की जा सकती हैं।
Upload की जाने वाली फाइलों के प्रमुख प्रकार
मुख्य रूप से दो प्रकार की फाइलें Upload की जा सकती हैं—
1. Re-writable Files
ऐसी फाइलें जिनमें आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन अथवा सुधार किया जा सकता है। इनमें Microsoft Office Files, PDF और Text आधारित Files सम्मिलित हैं।
2. Read Only Files
ऐसी फाइलें जिनमें सामान्यतः परिवर्तन या सुधार नहीं किया जाता। इनमें Music, Videos तथा अन्य Media Files सम्मिलित होती हैं।
एक बार सामग्री Upload होने के बाद उसे विभिन्न स्थानों से Access किया जा सकता है। विद्यार्थी इसका उपयोग अध्ययन में तथा शिक्षक एवं शोधकर्ता शिक्षण और शोध कार्यों में कर सकते हैं।
शिक्षण सामग्री के लिए प्रमुख ऑनलाइन माध्यम
1. YouTube
YouTube Website का प्रयोग Video को Upload, Download तथा Share करने के लिए किया जाता है। उपयोगकर्ता अपना Account बनाकर Video Upload कर सकते हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में Basic Knowledge से लेकर उच्च स्तर तक की अनेक शैक्षिक Videos उपलब्ध होती हैं। शिक्षक, विद्यार्थी और शोधकर्ता इनका उपयोग कर सकते हैं।
2. Prezi
Prezi एक Presentation Tool है। इसका उपयोग पारम्परिक Slide आधारित Presentation के विकल्प के रूप में किया जाता है।
इसमें एक बड़े Canvas पर विभिन्न भागों को Zoom करके सामग्री प्रस्तुत की जाती है। इसका प्रयोग Business और Education दोनों क्षेत्रों में किया जाता है तथा Visual रूप से अधिक उपयोगी प्रस्तुतियाँ तैयार की जा सकती हैं।
इस पर सम्बन्धित शिक्षण सामग्री को Upload भी किया जा सकता है।
3. Google Book
Google Book विभिन्न पुस्तकों, मैगजीन तथा अन्य सामग्री को Upload और Download करने की सुविधा प्रदान करता है। सामग्री Digital Database के रूप में Store रहती है।
शिक्षक और शोधकर्ता के साथ-साथ व्यावसायिक उपयोगकर्ता भी विभिन्न प्रकार की सामग्री को Google Book पर उपलब्ध करा सकते हैं।
- मल्टीमीडिया के पाँच प्रमुख घटक हैं— Text, Audio, Graphics, Video और Animation।
- मल्टीमीडिया का प्रयोग Entertainment, Edutainment, Business Communication, Knowledge Transfer और Public Access में किया जाता है।
- Windows Media Player का प्रयोग वीडियो देखने और संगीत सुनने के लिए किया जाता है।
- Microsoft Encarta वर्ष 1993 से 2009 तक उपलब्ध Digital Multimedia Encyclopedia था।
- Windows Movie Maker का प्रयोग वीडियो बनाने और सम्पादित करने के लिए किया जाता था।
- Picasa चित्रों को देखने, व्यवस्थित करने और सम्पादित करने के लिए प्रयोग किया जाता था।
- शिक्षण सामग्री को Internet पर Upload करके विद्यार्थी, शिक्षक और शोधकर्ता उसका उपयोग कर सकते हैं।
- Upload की जाने वाली फाइलों को Re-writable Files और Read Only Files के रूप में समझा गया है।
- YouTube, Prezi और Google Book शिक्षण-सामग्री को प्रस्तुत एवं उपलब्ध कराने के उपयोगी ऑनलाइन माध्यम हैं।
कम्प्यूटर नेटवर्क: परिचय, उपयोग एवं घटक
कम्प्यूटर नेटवर्क का परिचय
जब दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों को केबल अथवा किसी अन्य संचार माध्यम से इस प्रकार जोड़ा जाता है कि वे आपस में सूचनाओं और डेटा का आदान-प्रदान कर सकें, तो इस व्यवस्था को कम्प्यूटर नेटवर्क (Computer Network) कहा जाता है।
दूसरे शब्दों में, कम्प्यूटर नेटवर्क ऐसी व्यवस्था है जिसमें दो या दो से अधिक कम्प्यूटर किसी संचार माध्यम (Communication Medium) की सहायता से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और परस्पर सम्प्रेषण कर सकते हैं।
अलग-अलग स्थानों पर स्थित कम्प्यूटरों को जोड़ने के लिए केबल, टेलीफोन लाइन, माइक्रोवेव तथा उपग्रह जैसे संचार माध्यमों का प्रयोग किया जा सकता है। इस प्रकार कम्प्यूटर नेटवर्क का क्षेत्र एक छोटे कमरे से लेकर पूरे विश्व तक विस्तृत हो सकता है।
नेटवर्क के माध्यम से एक कम्प्यूटर में संग्रहित डेटा और सूचनाओं को अन्य जुड़े हुए कम्प्यूटरों के साथ Share किया जा सकता है, जिससे दूसरे कम्प्यूटर भी उनका उपयोग कर सकें।
इंटरनेट कम्प्यूटर नेटवर्क का विश्वव्यापी स्वरूप है। इसके माध्यम से बहुत बड़ी संख्या में परस्पर जुड़े कम्प्यूटरों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है।
कम्प्यूटर नेटवर्क के उपयोग एवं अनुप्रयोग
कम्प्यूटर नेटवर्क का प्रमुख उद्देश्य जुड़े हुए कम्प्यूटरों के बीच सूचना, डेटा और संसाधनों का आदान-प्रदान सरल बनाना है। इसके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं—
1. सूचनाओं का आदान-प्रदान
नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग कम्प्यूटरों के बीच सूचनाओं का परस्पर आदान-प्रदान किया जा सकता है। यदि कोई आवश्यक सूचना किसी एक कम्प्यूटर में उपलब्ध है, तो उसे आवश्यकता के अनुसार नेटवर्क से जुड़े अन्य कम्प्यूटरों पर भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कॉलेज से सम्बन्धित सूचना किसी एक कम्प्यूटर में उपलब्ध है, तो आवश्यकता पड़ने पर उसे रजिस्ट्रार या प्राचार्य के कम्प्यूटर पर भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
2. सम्प्रेषण सुविधाएँ प्रदान करना
नेटवर्क प्रणाली ने दूरियों को कम करके सम्प्रेषण प्रक्रिया को सरल बनाया है। इंटरनेट के माध्यम से किसी स्थान पर बैठा व्यक्ति दूर स्थित व्यक्ति तक अपना संदेश शीघ्रता से पहुँचा सकता है।
3. केन्द्रीय सूचना भण्डार से लाभ
नेटवर्क की सहायता से विभिन्न आवश्यक सूचनाओं को एक स्थान पर संग्रहित किया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर उपयोगकर्ताओं को वांछित सूचना उपलब्ध कराई जा सकती है।
व्यापार और उद्योग से जुड़े लोग भी कम्प्यूटर में आवश्यक सूचनाएँ संग्रहित रखते हैं। नेटवर्क प्रणाली आवश्यकता पड़ने पर इन सूचनाओं को प्राप्त करने और उपयोग करने में सहायता करती है।
4. उपयोगी संसाधनों का साझा प्रयोग
नेटवर्क के माध्यम से महँगे तथा उपयोगी उपकरणों और संसाधनों का कई कम्प्यूटरों द्वारा साझा उपयोग किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, Printer, Modem और Scanner जैसे उपकरणों को प्रत्येक कम्प्यूटर के लिए अलग-अलग उपलब्ध कराने के स्थान पर नेटवर्क के माध्यम से उनका सामूहिक उपयोग किया जा सकता है।
नेटवर्क के प्रमुख घटक (Components of Network)
कम्प्यूटर नेटवर्क को कार्यशील बनाने के लिए अनेक घटकों की आवश्यकता होती है। इसके प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं—
- सर्वर (Server)
- क्लाइंट (Client)
- मॉडेम (Modem)
- राउटर (Router)
- चैनल (Channels)
1. सर्वर (Server)
सर्वर नेटवर्क का वह भाग है जो उपयोगकर्ताओं को विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ प्रदान करता है। इसके माध्यम से फाइलों का स्थानान्तरण, प्रिन्ट करना या साझा करना तथा एक स्थान से दूसरे स्थान तक डेटा भेजना जैसे कार्य किए जा सकते हैं।
सर्वर Hardware तथा Software दोनों रूपों में हो सकता है।
2. क्लाइंट (Client)
सर्वर द्वारा जिस कम्प्यूटर को सूचनाएँ और सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, उस प्राप्तकर्ता कम्प्यूटर को क्लाइंट (Client) कहा जाता है। इसे वर्क स्टेशन (Workstation) भी कहा जाता है।
क्लाइंट कम्प्यूटर पर सूचनाओं के संचालन और प्राप्ति के लिए Application Programs का प्रयोग किया जाता है। क्लाइंट सर्वर द्वारा उपलब्ध कराए गए Programs और Files का उपयोग तथा साझा कर सकता है।
3. मॉडेम (Modem)
Modem शब्द Modulator और Demodulator का संक्षिप्त रूप है। यह ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग कम्प्यूटर के साथ जोड़कर निकट या दूर स्थित क्षेत्रों में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है।
मॉडेम की सहायता से Analog Signal को Digital Signal में तथा Digital Signal को Analog Signal में परिवर्तित किया जा सकता है।
इसका प्रयोग कम्प्यूटर, फोन आदि से सम्बन्धित संचार में व्यापक रूप से किया जाता है।
4. राउटर (Router)
राउटर एक प्रकार का Hardware Device है, जो कम्प्यूटर नेटवर्क पर डेटा भेजने का कार्य करता है।
राउटर Wired या Wireless दोनों प्रकार का हो सकता है। अनधिकृत उपयोग से बचाने के लिए इसमें Password का प्रयोग किया जा सकता है।
5. चैनल (Channels)
क्लाइंट और सर्वर के बीच जिस मार्ग से सूचनाओं का प्रवाह होता है, उसे Channel कहा जाता है। Channel को Network Circuit के नाम से भी जाना जाता है।
Channels का चयन उनकी गति और क्षमता के आधार पर किया जाता है और इनके माध्यम से विभिन्न प्रकार की सूचनाओं का संचार एवं प्रसारण किया जाता है।
नेटवर्क के घटक एक नजर में
| घटक | मुख्य कार्य |
|---|---|
| Server | उपयोगकर्ताओं को फाइल, डेटा एवं अन्य सेवाएँ उपलब्ध कराना |
| Client | Server द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना और सेवाओं को प्राप्त करना |
| Modem | Analog और Digital Signals का परस्पर परिवर्तन करना |
| Router | कम्प्यूटर नेटवर्क पर Data भेजना |
| Channel | Client और Server के बीच सूचना के प्रवाह का मार्ग प्रदान करना |
- दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों को संचार माध्यम द्वारा जोड़ने की व्यवस्था Computer Network कहलाती है।
- कम्प्यूटरों को जोड़ने के लिए Cable, Telephone Line, Microwave तथा Satellite जैसे माध्यमों का प्रयोग किया जा सकता है।
- नेटवर्क का प्रयोग सूचनाओं के आदान-प्रदान, सम्प्रेषण, केन्द्रीय सूचना प्राप्त करने तथा संसाधनों के साझा उपयोग के लिए किया जाता है।
- नेटवर्क के पाँच प्रमुख घटक हैं— Server, Client, Modem, Router और Channels।
- Server सुविधाएँ एवं संसाधन उपलब्ध कराता है, जबकि Client उन्हें प्राप्त और उपयोग करता है।
- Modem का पूरा स्वरूप Modulator और Demodulator से सम्बन्धित है तथा यह Analog और Digital Signals को परस्पर परिवर्तित करता है।
- Router नेटवर्क में Data भेजता है और Channel Client तथा Server के बीच सूचना के प्रवाह का मार्ग होता है।
नेटवर्क के प्रकार: LAN, MAN एवं WAN
कम्प्यूटर नेटवर्क के प्रकार
भौगोलिक विस्तार अर्थात् नेटवर्क द्वारा कवर किए जाने वाले क्षेत्र के आधार पर कम्प्यूटर नेटवर्क को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बाँटा जाता है—
- लैन (LAN — Local Area Network)
- मैन (MAN — Metropolitan Area Network)
- वैन (WAN — Wide Area Network)
1. लैन (LAN — Local Area Network)
LAN का पूरा नाम Local Area Network अर्थात् लोकल एरिया नेटवर्क है। यह ऐसा नेटवर्क है जिसमें कम्प्यूटर और अन्य उपकरण एक सीमित भौगोलिक क्षेत्र के भीतर आपस में जुड़े होते हैं।
LAN का प्रयोग सामान्यतः एक कमरे, भवन, कार्यालय, स्कूल, कॉलेज कैम्पस या कम्प्यूटर लैब जैसे छोटे क्षेत्र में किया जाता है। इसमें जुड़े कम्प्यूटरों के बीच डेटा, सूचनाएँ तथा विभिन्न संसाधन साझा किए जा सकते हैं।
LAN में कम्प्यूटरों को जोड़ने के लिए Wired अथवा Wireless तकनीक का प्रयोग किया जा सकता है। सीमित क्षेत्र में स्थापित होने के कारण इसमें डेटा का आदान-प्रदान सामान्यतः तीव्र गति से किया जा सकता है।
LAN के गुण (Merits of LAN)
- LAN के माध्यम से उपयोगकर्ता आपस में डेटा और सूचनाएँ साझा कर सकते हैं।
- किसी संस्था के भीतर सूचनाओं का आदान-प्रदान सरल और तीव्र हो जाता है।
- Printer, Scanner तथा अन्य नेटवर्क संसाधनों को कई कम्प्यूटरों द्वारा साझा किया जा सकता है, जिससे लागत कम करने में सहायता मिलती है।
- नेटवर्क से जुड़े कम्प्यूटर विभिन्न Applications और उपलब्ध संसाधनों का सामूहिक उपयोग कर सकते हैं।
- सूचना और संसाधनों के शीघ्र आदान-प्रदान के कारण संस्था की कार्यक्षमता और उत्पादकता बढ़ सकती है।
LAN के दोष (Demerits of LAN)
- LAN में डेटा तथा संसाधनों की सुरक्षा के लिए उचित Security System आवश्यक होता है।
- नेटवर्क का रख-रखाव एक सामान्य व्यक्तिगत कम्प्यूटर की तुलना में अधिक जटिल हो सकता है।
- Network Hardware और Software की स्थापना पर अतिरिक्त लागत आती है।
- नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक कम्प्यूटर को आवश्यक Network Software और Configuration की आवश्यकता होती है।
- कुछ Applications को नेटवर्क वातावरण के अनुसार Configure या संशोधित करना पड़ सकता है।
2. मैन (MAN — Metropolitan Area Network)
MAN का पूरा नाम Metropolitan Area Network अर्थात् मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क है। इसका विस्तार LAN की तुलना में अधिक होता है और यह सामान्यतः किसी नगर या महानगर के विभिन्न स्थानों पर स्थित कम्प्यूटरों या छोटे नेटवर्कों को आपस में जोड़ता है।
MAN का प्रयोग निजी तथा सार्वजनिक दोनों प्रकार की संस्थाओं द्वारा किया जा सकता है। इसका उपयोग किसी शहर में स्थित अलग-अलग कार्यालयों, संस्थानों या शाखाओं को एक-दूसरे से जोड़ने के लिए किया जा सकता है।
दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े नगरों में अलग-अलग स्थानों पर स्थित नेटवर्कों को आपस में जोड़ने वाली व्यवस्था MAN का उदाहरण हो सकती है।
MAN में उच्च गति के संचार के लिए Optical Fibre जैसे माध्यमों का प्रयोग किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर दूर स्थित स्थानों के बीच Signal को प्रभावी रूप से पहुँचाने के लिए Repeater या अन्य संचार उपकरणों का भी उपयोग किया जाता है।
MAN के गुण (Merits of MAN)
- यह किसी नगर या महानगर में स्थित विभिन्न Sites को आपस में जोड़ने की सुविधा प्रदान करता है।
- इसके माध्यम से Data तथा Voice सहित विभिन्न प्रकार की सूचनाओं का संचार किया जा सकता है।
- इसका विस्तार LAN की तुलना में अधिक होता है।
- उपयुक्त संचार माध्यमों के प्रयोग से विभिन्न स्थानों के बीच उच्च गति का सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है।
MAN के दोष (Demerits of MAN)
- LAN की तुलना में MAN की स्थापना और रख-रखाव अधिक खर्चीला हो सकता है।
- अधिक क्षेत्र में फैले नेटवर्क के कारण इसका प्रबंधन अपेक्षाकृत जटिल होता है।
- विभिन्न Sites के बीच डेटा की सुरक्षा के लिए उचित Security व्यवस्था आवश्यक होती है।
- लम्बी दूरी के संचार के लिए अतिरिक्त Networking Equipment की आवश्यकता हो सकती है।
3. वैन (WAN — Wide Area Network)
WAN का पूरा नाम Wide Area Network अर्थात् वाइड एरिया नेटवर्क है। यह बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ नेटवर्क होता है। इसका विस्तार एक देश, अनेक देशों अथवा महाद्वीपों तक हो सकता है।
WAN में दूर-दूर स्थित कम्प्यूटरों तथा छोटे नेटवर्कों को आपस में जोड़ा जाता है। नेटवर्क से जुड़े मुख्य कम्प्यूटर या Systems को कई स्थितियों में Host कहा जाता है।
WAN का प्रमुख उद्देश्य दूरस्थ स्थानों के बीच Data तथा सूचनाओं का आदान-प्रदान सम्भव बनाना है। इसमें Telephone Lines, Optical Fibre, Microwave, Satellite तथा अन्य Long-Distance Communication Technologies का प्रयोग किया जा सकता है।
Internet विश्व स्तर पर परस्पर जुड़े नेटवर्कों का सबसे बड़ा उदाहरण है और इसे व्यापक अर्थ में WAN से सम्बन्धित नेटवर्क व्यवस्था के रूप में समझा जा सकता है।
WAN का क्षेत्र बहुत विस्तृत होता है, इसलिए इसकी स्थापना, प्रबंधन तथा सुरक्षा LAN की तुलना में अधिक जटिल और खर्चीली हो सकती है।
WAN के गुण (Merits of WAN)
- WAN बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र में स्थित कम्प्यूटरों और नेटवर्कों को जोड़ सकता है।
- दूरस्थ स्थानों के बीच Data और सूचनाओं का आदान-प्रदान सम्भव बनाता है।
- Satellite तथा अन्य दूरसंचार तकनीकों की सहायता से दूर स्थित क्षेत्रों को जोड़ा जा सकता है।
- अलग-अलग स्थानों पर स्थित Workstations को आवश्यक संसाधन और Software Services उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
WAN के दोष (Demerits of WAN)
- इसकी स्थापना और संचालन की लागत LAN की तुलना में अधिक हो सकती है।
- व्यापक नेटवर्क में डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखना अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
- लम्बी दूरी और अनेक नेटवर्क उपकरणों के कारण नेटवर्क प्रबंधन अधिक जटिल हो सकता है।
- किसी Communication Link या Network Device में समस्या आने पर दूरस्थ उपयोगकर्ताओं के बीच संचार प्रभावित हो सकता है।
LAN, MAN एवं WAN में अन्तर
| आधार | LAN | MAN | WAN |
|---|---|---|---|
| पूरा नाम | Local Area Network | Metropolitan Area Network | Wide Area Network |
| विस्तार क्षेत्र | कमरा, भवन, कार्यालय या कैम्पस जैसे सीमित क्षेत्र तक | नगर या महानगर स्तर तक | देश, अनेक देशों या महाद्वीपों तक |
| कनेक्टिविटी | निकट स्थित कम्प्यूटर और Devices को जोड़ता है। | एक शहर में स्थित अनेक LAN या Sites को जोड़ सकता है। | दूर-दूर स्थित LAN, MAN और अन्य Networks को जोड़ सकता है। |
| सामान्य गति | सीमित क्षेत्र के कारण सामान्यतः उच्च गति उपलब्ध होती है। | गति प्रयुक्त Communication Technology पर निर्भर करती है। | गति दूरी, Network Infrastructure तथा Communication Technology पर निर्भर करती है। |
| लागत | अपेक्षाकृत कम | LAN से अधिक | सामान्यतः सबसे अधिक |
| प्रबंधन | अपेक्षाकृत सरल | LAN की तुलना में अधिक जटिल | अधिक विस्तृत और जटिल |
| उदाहरण | School Lab, Office Network, College Campus | City-level Institutional Network | दूरस्थ शाखाओं का नेटवर्क तथा Internet |
LAN → MAN → WAN : विस्तार का क्रम
नेटवर्क के भौगोलिक विस्तार को सरल रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है—
LAN → MAN → WAN
अर्थात् LAN सबसे सीमित क्षेत्र में, MAN उससे बड़े नगर या महानगर स्तर पर तथा WAN सबसे व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में कार्य करता है।
- भौगोलिक विस्तार के आधार पर नेटवर्क के तीन प्रमुख प्रकार हैं— LAN, MAN और WAN।
- LAN का पूरा नाम Local Area Network है और इसका प्रयोग सीमित क्षेत्र में किया जाता है।
- MAN का पूरा नाम Metropolitan Area Network है और यह सामान्यतः नगर या महानगर स्तर पर विभिन्न Networks को जोड़ता है।
- WAN का पूरा नाम Wide Area Network है और यह बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैले Networks को जोड़ता है।
- WAN में Telephone Lines, Optical Fibre, Microwave और Satellite जैसी संचार तकनीकों का प्रयोग किया जा सकता है।
- Internet विश्व स्तर पर परस्पर जुड़े Networks का सबसे बड़ा उदाहरण है।
- विस्तार का क्रम है— LAN → MAN → WAN।
- LAN, MAN और WAN में मुख्य अन्तर उनके विस्तार क्षेत्र, कनेक्टिविटी, लागत और नेटवर्क प्रबंधन के आधार पर किया जाता है।
नेटवर्क टोपोलॉजी
नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है?
कम्प्यूटर नेटवर्क में विभिन्न स्टेशनों या नोड्स (Nodes) को भौतिक रूप से किस प्रकार व्यवस्थित और आपस में जोड़ा गया है, इस व्यवस्था को नेटवर्क टोपोलॉजी (Network Topology) कहा जाता है।
सरल शब्दों में, नेटवर्क में कम्प्यूटरों और अन्य उपकरणों के जुड़ने की संरचना या आकृति को Network Topology कहते हैं।
नेटवर्क टोपोलॉजी के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—
- बस टोपोलॉजी (Bus Topology)
- रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology)
- स्टार टोपोलॉजी (Star Topology)
- मेश टोपोलॉजी (Mesh Topology)
- ट्री टोपोलॉजी (Tree Topology)
1. बस टोपोलॉजी (Bus Topology)
Bus Topology को क्षैतिज टोपोलॉजी भी कहा जाता है। इसमें सभी कम्प्यूटर और अन्य नेटवर्क उपकरण एक मुख्य संचार केबल से जुड़े होते हैं।
इस मुख्य केबल को Bus या Backbone कहा जाता है। प्रत्येक कम्प्यूटर को मुख्य केबल से Drop Cable अथवा Connector के माध्यम से जोड़ा जाता है।
जब कोई कम्प्यूटर सूचना या Signal भेजता है, तो वह मुख्य Bus के माध्यम से नेटवर्क में आगे बढ़ता है।
Bus के दोनों सिरों पर Terminator लगाया जाता है। इसका कार्य Signal को अन्त में अवशोषित करना होता है, जिससे Signal वापस लौटकर नेटवर्क में बाधा उत्पन्न न करे।
Bus Topology की मुख्य विशेषताएँ
- सभी Nodes एक मुख्य Cable या Backbone से जुड़े होते हैं।
- नेटवर्क की संरचना सरल होती है।
- मुख्य Cable सूचना के संचार का प्रमुख माध्यम होती है।
- Bus के दोनों सिरों पर Terminator लगाया जाता है।
2. रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology)
Ring Topology में नेटवर्क के सभी Nodes एक वृत्त या Ring के रूप में जुड़े होते हैं। प्रत्येक Node सामान्यतः अपने निकटवर्ती Nodes से जुड़कर एक बन्द वृत्ताकार संरचना बनाता है।
इस प्रकार नेटवर्क में किसी एक स्थान से चलने वाला Data Ring के मार्ग से अन्य Nodes तक पहुँचता है।
Ring Topology में कम्प्यूटरों को जोड़ने के लिए Twisted Pair Cable, Coaxial Cable अथवा Optical Fibre Cable का प्रयोग किया जा सकता है।
Ring Topology की मुख्य विशेषताएँ
- सभी Nodes एक वृत्ताकार क्रम में जुड़े होते हैं।
- नेटवर्क की आकृति Ring के समान दिखाई देती है।
- Data निर्धारित मार्ग से एक Node से दूसरे Node तक पहुँचता है।
3. स्टार टोपोलॉजी (Star Topology)
Star Topology में नेटवर्क के सभी Nodes या कम्प्यूटर एक केन्द्रीय Hub से जुड़े होते हैं।
इस व्यवस्था में कोई भी दो Nodes सामान्यतः सीधे एक-दूसरे से नहीं जुड़े होते। उनके बीच Data का संचार केन्द्रीय Hub के माध्यम से होता है।
इसकी संरचना तारे के समान दिखाई देती है, इसलिए इसे Star Topology कहा जाता है।
Star Topology की मुख्य विशेषताएँ
- सभी कम्प्यूटर एक Central Hub से जुड़े होते हैं।
- दो Nodes के बीच संचार Hub के माध्यम से होता है।
- प्रत्येक Node का केन्द्रीय बिन्दु से अलग Connection होता है।
4. मेश टोपोलॉजी (Mesh Topology)
Mesh Topology में नेटवर्क के Nodes के बीच अनेक प्रत्यक्ष Connections बनाए जा सकते हैं। एक Node किसी दूसरे Node से जुड़ सकता है और एक ही Node को एक से अधिक Nodes से भी जोड़ा जा सकता है।
इस प्रकार Nodes के बीच कई मार्ग उपलब्ध हो सकते हैं और नेटवर्क की संरचना जाल (Mesh) के समान दिखाई देती है।
Mesh Topology की मुख्य विशेषताएँ
- एक Node एक से अधिक Nodes से जुड़ सकता है।
- Nodes के बीच अनेक Communication Paths बनाए जा सकते हैं।
- इसकी संरचना जाल के समान होती है।
5. ट्री टोपोलॉजी (Tree Topology)
Tree Topology में Nodes को पदानुक्रमिक (Hierarchical) रूप में जोड़ा जाता है। इसकी संरचना पेड़ की शाखाओं के समान दिखाई देती है।
यह कई स्तरों में व्यवस्थित नेटवर्क संरचना होती है। एक मुख्य या Root Level से आगे अन्य Hubs अथवा Nodes जुड़े रहते हैं और उनसे आगे अन्य कम्प्यूटर जुड़े हो सकते हैं।
Tree Topology को Star Topology का विस्तारित या रूपान्तरित रूप भी माना जाता है, क्योंकि इसमें कई Star-जैसे समूह पदानुक्रमिक रूप से जुड़े हो सकते हैं।
Tree Network में यदि Bus Backbone का प्रयोग किया गया हो, तो Backbone के अन्त में Terminator Signal को अवशोषित करता है। इसमें Central या Active Hub के साथ Repeater का प्रयोग भी किया जा सकता है, जो Signal को आगे बढ़ाने या मजबूत करने में सहायता करता है।
Secondary Hubs भी इसमें जुड़े हो सकते हैं और वे Active अथवा Passive प्रकार के हो सकते हैं।
Tree Topology की मुख्य विशेषताएँ
- Nodes पदानुक्रमिक रूप में जुड़े होते हैं।
- इसकी संरचना वृक्ष की शाखाओं जैसी होती है।
- यह Star Topology का विस्तारित रूप हो सकती है।
- इसमें Central Hub, Secondary Hubs तथा Repeater का प्रयोग किया जा सकता है।
प्रमुख नेटवर्क टोपोलॉजी एक नजर में
| टोपोलॉजी | मुख्य संरचना |
|---|---|
| Bus Topology | सभी Nodes एक मुख्य Backbone Cable से जुड़े होते हैं। |
| Ring Topology | सभी Nodes वृत्ताकार क्रम में जुड़े होते हैं। |
| Star Topology | सभी Nodes एक Central Hub से जुड़े होते हैं। |
| Mesh Topology | एक Node अनेक अन्य Nodes से जुड़ सकता है। |
| Tree Topology | Nodes पदानुक्रमिक या शाखानुमा संरचना में जुड़े होते हैं। |
- नेटवर्क में Nodes को व्यवस्थित और जोड़ने की संरचना को Network Topology कहते हैं।
- Network Topology के पाँच प्रमुख प्रकार हैं— Bus, Ring, Star, Mesh और Tree।
- Bus Topology में सभी Nodes एक मुख्य Backbone Cable से जुड़े होते हैं और दोनों सिरों पर Terminator लगाया जाता है।
- Ring Topology में सभी Nodes एक वृत्ताकार संरचना में जुड़े होते हैं।
- Star Topology में सभी Nodes एक Central Hub से जुड़े होते हैं।
- Mesh Topology में एक Node एक से अधिक Nodes से जुड़ सकता है।
- Tree Topology में Nodes Hierarchical रूप से जुड़े होते हैं और यह Star Topology का विस्तारित रूप हो सकती है।
इंटरनेट—अवधारणा, विशेषताएँ, उपयोग एवं घटक
इंटरनेट की अवधारणा (Concept of Internet)
आधुनिक समय में इंटरनेट (Internet) ने सूचना प्राप्त करने, संचार करने तथा अनेक दैनिक कार्यों को सरल, सुविधाजनक और तीव्र बना दिया है। इसका प्रयोग शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन, संचार और सूचना के आदान-प्रदान सहित अनेक क्षेत्रों में किया जाता है।
इंटरनेट के माध्यम से संसार के विभिन्न स्थानों पर स्थित व्यक्ति और संस्थाएँ एक-दूसरे से जुड़कर सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
इंटरनेट के प्रमुख उपयोगों में E-Commerce, E-mail, Online Meeting, Sharing of Ideas, Online Distance Education, Business, Entertainment, Medical Services, Communication, Shopping और Investment आदि सम्मिलित हैं।
ऑनलाइन कम्युनिकेशन (Online Communication)
Online Communication संचार का वह रूप है जिसमें संसार के विभिन्न स्थानों पर स्थित व्यक्ति या संगठन इंटरनेट के माध्यम से एक-दूसरे के साथ संवाद करते हैं।
इंटरनेट का अर्थ एवं परिभाषा
इंटरनेट अनेक तकनीकों, सेवाओं और कम्प्यूटर नेटवर्कों का एक विशाल संयोजन है। यह विश्व के विभिन्न स्थानों पर स्थित नेटवर्कों को आपस में जोड़ता है, जिससे एक नेटवर्क का कम्प्यूटर दूसरे नेटवर्क के कम्प्यूटर से सूचनाओं का आदान-प्रदान (Exchange) कर सकता है।
सरल शब्दों में, विश्व भर में फैले अनेक कम्प्यूटर नेटवर्कों के परस्पर जुड़े हुए विशाल नेटवर्क को इंटरनेट कहते हैं।
इसी कारण इंटरनेट को Network of Networks अर्थात् नेटवर्कों का नेटवर्क भी कहा जाता है।
इंटरनेट द्वारा विभिन्न प्रकार के Documents, Scientific Data, Educational Data, Advertisements तथा संस्थाओं से सम्बन्धित सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं। इन सूचनाओं को विश्व के विभिन्न स्थानों से आवश्यकतानुसार प्राप्त और साझा किया जा सकता है।
इंटरनेट की प्रमुख परिभाषाएँ
- शेरोन क्रॉफर्ड (Sharon Crawford) के अनुसार— इंटरनेट विश्व भर में फैले हजारों नेटवर्कों का एक मुक्त रूप से जुड़ा हुआ समूह है।
- पॉल ई. हॉफमैन (Paul E. Hoffman) के अनुसार— इंटरनेट ऐसा माध्यम है जहाँ विभिन्न प्रकार की जानकारी प्राप्त की जा सकती है, जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है और अन्य लोगों से सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है।
इंटरनेट की प्रमुख विशेषताएँ (Characteristics of Internet)
- इंटरनेट के माध्यम से आवश्यकता के अनुसार बड़ी मात्रा में विभिन्न प्रकार के आँकड़े और सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं।
- यह दूर स्थित कम्प्यूटरों और उपयोगकर्ताओं के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा संचार की सुविधा प्रदान करता है।
- Hyperlinking की सहायता से उपयोगकर्ता एक वेब पेज या सूचना-स्रोत से दूसरे सम्बन्धित स्रोत तक आसानी से पहुँच सकता है।
- इंटरनेट के माध्यम से विभिन्न Multimedia आधारित कार्य किए जा सकते हैं, जैसे— Video Conferencing, Chat और Calling।
- यह व्यावसायिक, राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्प्रेषण में सहायक है।
- इंटरनेट अनेक प्रकार के कार्यों और सेवाओं को सरल तथा सुविधाजनक बनाता है।
- इंटरनेट विभिन्न कम्प्यूटर नेटवर्कों को निर्धारित Protocols के अनुसार आपस में जोड़ता है और उनके बीच विभिन्न क्रियाओं को सम्भव बनाता है, जैसे E-mail भेजना और प्राप्त करना।
- इंटरनेट द्वारा विभिन्न Websites पर उपलब्ध सुविधाओं और सूचनाओं का उपयोग किया जा सकता है। Search Engine की सहायता से आवश्यक सामग्री खोजी जा सकती है।
- यह सूचना प्राप्त करने और सम्प्रेषण का तीव्र तथा अपेक्षाकृत कम खर्च वाला माध्यम है, जिससे समय की भी बचत होती है।
इंटरनेट के उपयोग एवं अनुप्रयोग (Uses and Applications of Internet)
इंटरनेट का प्रयोग जीवन और कार्य के अनेक क्षेत्रों में किया जाता है। इसके प्रमुख अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं—
1. शिक्षा के क्षेत्र में इंटरनेट का अनुप्रयोग
शिक्षा के क्षेत्र में इंटरनेट का प्रयोग विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य उपयोगकर्ताओं को नवीन शिक्षण विधियों, तकनीकों तथा शैक्षिक सूचनाओं तक पहुँच प्रदान करने के लिए किया जाता है।
इंटरनेट की सहायता से देश-विदेश की शिक्षा व्यवस्था, अध्ययन-सामग्री तथा शिक्षा से सम्बन्धित विभिन्न जानकारियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। इस प्रकार इंटरनेट शिक्षा के विभिन्न पक्षों को जोड़ने और ज्ञान प्राप्त करने का महत्त्वपूर्ण माध्यम है।
2. मनोरंजन के क्षेत्र में इंटरनेट का अनुप्रयोग
मनोरंजन के क्षेत्र में इंटरनेट का व्यापक प्रयोग किया जाता है। इसके माध्यम से Video Games, Videos, Songs, Films तथा अन्य मनोरंजन सामग्री प्राप्त की जा सकती है।
उपयोगकर्ता अपनी आवश्यकता और रुचि के अनुसार इंटरनेट से मनोरंजन सामग्री प्राप्त कर सकता है।
3. विज्ञापन के क्षेत्र में इंटरनेट का अनुप्रयोग
विद्यालय, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और व्यावसायिक संस्थाएँ अपनी Websites के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध कराती हैं।
व्यावसायिक संस्थाएँ इंटरनेट पर अपने Products, Services तथा क्रय-विक्रय सम्बन्धी सूचनाओं का प्रचार कर सकती हैं। इंटरनेट के माध्यम से कम समय में अधिक लोगों तक विज्ञापन पहुँचाया जा सकता है।
4. राजनीतिक क्षेत्र में इंटरनेट का अनुप्रयोग
राजनीतिक क्षेत्र में भी इंटरनेट का प्रयोग सूचनाओं तथा विचारों के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है। इंटरनेट के माध्यम से राजनीतिक व्यवस्था, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा शासन से सम्बन्धित जानकारियाँ प्राप्त की जा सकती हैं।
Teleconferencing तथा Social Media जैसे माध्यम विभिन्न विचारों को लोगों तक पहुँचाने में सहायक होते हैं। मोबाइल इंटरनेट के कारण राजनीतिक गतिविधियों से सम्बन्धित सूचनाएँ भी शीघ्र उपलब्ध हो सकती हैं।
5. सम्प्रेषण के क्षेत्र में इंटरनेट का अनुप्रयोग
इंटरनेट सम्प्रेषण का एक शक्तिशाली साधन है। इसके माध्यम से एक व्यक्ति दूर बैठे दूसरे व्यक्ति तक E-mail, Message, Chat तथा Video Conferencing द्वारा सूचना पहुँचा सकता है।
इंटरनेट Online Education तथा दूरस्थ बातचीत में भी उपयोगी है। इस प्रकार यह व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों प्रकार के सम्प्रेषण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
6. यातायात के क्षेत्र में इंटरनेट का अनुप्रयोग
यातायात के क्षेत्र में इंटरनेट का प्रयोग यात्रा से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इसकी सहायता से Train Status, Reservation तथा यात्रा सम्बन्धी अन्य सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं।
यातायात साधनों से सम्बन्धित विभिन्न विवरणों को कम्प्यूटर प्रणाली में संग्रहित करके आवश्यकता के समय प्राप्त किया जा सकता है।
7. व्यावसायिक क्षेत्र में इंटरनेट का अनुप्रयोग
व्यावसायिक क्षेत्र में इंटरनेट का प्रयोग किसी व्यवसाय या उद्योग से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त करने, अन्य व्यापारियों से सम्पर्क स्थापित करने तथा उत्पादों और सेवाओं की जानकारी साझा करने के लिए किया जाता है।
E-mail, Websites तथा अन्य ऑनलाइन माध्यमों की सहायता से व्यावसायिक सम्पर्क स्थापित करना सरल हो जाता है।
8. सामाजिक नेटवर्किंग के क्षेत्र में इंटरनेट का अनुप्रयोग
सामाजिक गतिविधियों और व्यक्तियों को आपस में जोड़ने में इंटरनेट की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। Facebook, Twitter, Blog और LinkedIn जैसी Social Networking Services के माध्यम से व्यक्ति दूसरे लोगों से जुड़ सकता है तथा विचारों और सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकता है।
इन सेवाओं का प्रयोग शिक्षा सम्बन्धी जानकारी प्राप्त करने, व्यावसायिक सम्पर्क स्थापित करने तथा सामाजिक गतिविधियों से सम्बन्धित सूचनाएँ साझा करने के लिए भी किया जाता है।
2014 के लोकसभा चुनाव तथा 2015 के Juvenile Bill से सम्बन्धित ऑनलाइन गतिविधियाँ सामाजिक नेटवर्किंग के सार्वजनिक प्रयोग के उदाहरण के रूप में उल्लेखनीय हैं।
9. आर्थिक क्षेत्र में इंटरनेट का अनुप्रयोग
आर्थिक क्षेत्र में इंटरनेट का प्रयोग विभिन्न देशों की आय-व्यय सम्बन्धी सूचनाएँ, मुद्रा से सम्बन्धित आँकड़े तथा आर्थिक नीतियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
इस प्रकार आर्थिक सूचनाओं और आँकड़ों की उपलब्धता के कारण अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित कार्यों में भी इंटरनेट का व्यापक उपयोग होता है।
इंटरनेट के प्रमुख घटक (Components of Internet)
इंटरनेट के प्रयोग और Web पर उपलब्ध सामग्री तक पहुँचने से सम्बन्धित प्रमुख घटक हैं—
- वेब ब्राउजर (Web Browser)
- सर्वर (Server)
- वेबसाइट एवं वेब पेज (Websites and Web Pages)
- HTTP — Hyper Text Transfer Protocol
- हाइपरलिंक (Hyperlink)
1. वेब ब्राउजर (Web Browser)
Web Browser वह सॉफ्टवेयर है जिसकी सहायता से उपयोगकर्ता इंटरनेट पर उपलब्ध Websites और Web Pages को देख तथा उनका उपयोग कर सकता है।
Browser के माध्यम से Text, Images, Graphics, Data तथा Animation जैसी विभिन्न प्रकार की सामग्री प्राप्त की जा सकती है।
Internet Explorer, Google Chrome और Firefox Web Browser के उदाहरण हैं।
2. सर्वर (Server)
Server नेटवर्क का वह कम्प्यूटर या प्रणाली है जो उपयोगकर्ताओं को विभिन्न सेवाएँ, सूचनाएँ और संसाधन उपलब्ध कराती है।
Websites को Web Server पर Host किया जाता है। जब Browser किसी Web Page या सामग्री के लिए Request भेजता है, तो Server आवश्यक Web Content उपयोगकर्ता को उपलब्ध कराता है।
Server विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं, जैसे—
- Computer Server
- Catalog Server
- Database Server
- File Server
- Mail Server
- Mobile Server
- Sound Server
- Game Server
3. वेबसाइट एवं वेब पेज (Websites and Web Pages)
Website आपस में सम्बन्धित अनेक Web Pages का समूह होती है। किसी Website को उसके Address या Domain Name की सहायता से Access किया जाता है।
Website का प्रारम्भिक या मुख्य पेज सामान्यतः Home Page कहलाता है। Home Page पर Website की प्रमुख सूचनाएँ तथा अन्य Pages तक पहुँचने के लिए Links उपलब्ध हो सकते हैं।
Web Page इंटरनेट पर प्रदर्शित होने वाला एक इलेक्ट्रॉनिक पृष्ठ है, जिसमें Text, Images, Facts, Data तथा अन्य सामग्री हो सकती है। Web Page को सामान्यतः HTML का प्रयोग करके तैयार किया जाता है और Web Browser द्वारा स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाता है।
वेब पेज के प्रकार
Web Pages को सामान्य रूप से दो प्रकारों में समझा जा सकता है—
- Dynamic Web Page: ऐसा Web Page जिसकी सामग्री उपयोगकर्ता की माँग, Data या अन्य परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है।
- Static Web Page: ऐसा Web Page जिसकी सामग्री सामान्यतः निश्चित रहती है और परिवर्तन किए जाने तक उसी रूप में प्रदर्शित होती है।
4. HTTP — Hyper Text Transfer Protocol
HTTP का पूरा नाम Hyper Text Transfer Protocol है। यह Web Browser और Web Server के बीच Web Pages तथा अन्य Web सामग्री के आदान-प्रदान में प्रयोग होने वाला Protocol है।
वेब पर किसी Page अथवा Resource तक पहुँचने और उसे Browser में प्रदर्शित कराने की प्रक्रिया में HTTP महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
5. हाइपरलिंक (Hyperlink)
Hyperlink ऐसा Text, Graphic या Icon होता है जिसकी सहायता से उपयोगकर्ता वर्तमान Web Page से किसी दूसरे Web Page, Website या File तक पहुँच सकता है।
Hyperlink पर Click करने पर उससे जुड़ा Page, Website अथवा Resource खुल जाता है। इस प्रकार Hyperlink विभिन्न Web Pages और सूचनाओं को आपस में जोड़ने का कार्य करता है।
इंटरनेट के घटक एक नजर में
| घटक | मुख्य कार्य |
|---|---|
| Web Browser | Websites और Web Pages को Access एवं प्रदर्शित करना |
| Server | Web Content, Data तथा Services उपलब्ध कराना |
| Website | सम्बन्धित Web Pages का समूह |
| Web Page | Text, Images और अन्य Web Content प्रदर्शित करना |
| HTTP | Browser और Server के बीच Web Content के आदान-प्रदान में सहायता करना |
| Hyperlink | एक Page या Resource को दूसरे से जोड़ना |
- इंटरनेट विश्व भर में फैले अनेक कम्प्यूटर नेटवर्कों का परस्पर जुड़ा हुआ विशाल नेटवर्क है।
- इंटरनेट को Network of Networks भी कहा जाता है।
- इंटरनेट का उपयोग शिक्षा, मनोरंजन, विज्ञापन, राजनीति, सम्प्रेषण, यातायात, व्यवसाय, सामाजिक नेटवर्किंग और आर्थिक क्षेत्रों में किया जाता है।
- इंटरनेट द्वारा E-mail, Online Meeting, Distance Education, Shopping और अन्य अनेक ऑनलाइन कार्य किए जा सकते हैं।
- इंटरनेट के प्रमुख घटक Web Browser, Server, Website/Web Page, HTTP और Hyperlink हैं।
- HTTP का पूरा नाम Hyper Text Transfer Protocol है।
- Website अनेक सम्बन्धित Web Pages का समूह होती है और उसका मुख्य पृष्ठ सामान्यतः Home Page कहलाता है।
- Web Page मुख्यतः Static और Dynamic प्रकार के हो सकते हैं।
- Hyperlink एक Web Page, Website या File को दूसरे Resource से जोड़ने का कार्य करता है।
इंटरनेट की सेवाएँ एवं कम्प्यूटर में इंटरनेट सेटअप
इंटरनेट की सेवाएँ (Services of Internet)
इंटरनेट के माध्यम से उपयोगकर्ता विभिन्न प्रकार की सूचनाओं और सामग्री का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इसमें Text, Graphics, Sound, Data तथा अन्य डिजिटल सामग्री को प्राप्त करने, भेजने और साझा करने के लिए अनेक सेवाएँ उपलब्ध होती हैं।
इंटरनेट की प्रमुख सेवाएँ निम्नलिखित हैं—
- वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web — WWW)
- ई-मेल (E-mail)
- एफ.टी.पी. (FTP — File Transfer Protocol)
- चैटिंग (Chatting)
- सर्च इंजन (Search Engine)
1. वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web — WWW)
World Wide Web का संक्षिप्त रूप WWW अथवा Web है। यह इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं और Web Pages तक पहुँच प्रदान करने वाली एक महत्त्वपूर्ण व्यवस्था है।
Web के माध्यम से संसार के विभिन्न स्थानों पर बैठे उपयोगकर्ता Text, Graphics, Sound, Data, Documents तथा अन्य प्रकार की सूचनाएँ प्राप्त कर सकते हैं।
इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाएँ सामान्यतः Websites के Web Pages के रूप में प्रस्तुत की जाती हैं। उपयोगकर्ता जिस सूचना को प्राप्त करना चाहता है, उसे अपने कम्प्यूटर पर Web Browser की सहायता से देख सकता है।
World Wide Web के प्रमुख उपयोग
- आवश्यक सूचनाओं और सामग्री को Search करना।
- शैक्षिक एवं शोध सम्बन्धी सामग्री प्राप्त करना।
- Research Papers और Documents प्राप्त करना।
- Online Shopping करना।
- संस्थाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की Websites से जानकारी प्राप्त करना।
- व्यावसायिक, शैक्षिक तथा मनोरंजन सम्बन्धी सामग्री तक पहुँचना।
2. इलेक्ट्रॉनिक मेल या ई-मेल (Electronic Mail / E-mail)
E-mail इंटरनेट की ऐसी सेवा है जिसके माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में संदेश और दस्तावेज एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजे तथा प्राप्त किए जा सकते हैं।
पहले पत्र या दस्तावेज भेजने के लिए डाक (Post) का प्रयोग किया जाता था, जिसमें अधिक समय लग सकता था। E-mail द्वारा यही कार्य इंटरनेट की सहायता से बहुत कम समय में किया जा सकता है।
E-mail में संदेश सीधे व्यक्ति द्वारा भौतिक रूप से नहीं पहुँचाया जाता, बल्कि वह इंटरनेट नेटवर्क के माध्यम से एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर तक पहुँचता है।
मेल बॉक्स एवं ई-मेल एड्रेस
E-mail सेवा में उपयोगकर्ता के संदेशों को संग्रहित रखने के लिए एक Mail Box उपलब्ध होता है। प्रत्येक Mail Box का एक विशिष्ट पता होता है, जिसे E-mail Address कहा जाता है।
किसी व्यक्ति को E-mail भेजने के लिए उसका E-mail Address ज्ञात होना आवश्यक है।
उदाहरण—
aman@yahoo.com
इस E-mail Address को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है—
- aman — उपयोगकर्ता के नाम या User Name को दर्शाता है।
- yahoo — E-mail सेवा उपलब्ध कराने वाले संगठन या Domain को दर्शाता है।
- .com — Domain से सम्बन्धित पहचान का भाग है; यहाँ यह Commercial Organisation से सम्बन्धित Domain को दर्शाता है।
Hotmail, Yahoo, Rediffmail तथा Gmail जैसी सेवाओं के माध्यम से E-mail भेजे और प्राप्त किए जा सकते हैं।
3. एफ.टी.पी. (FTP — File Transfer Protocol)
FTP का पूरा नाम File Transfer Protocol है। इसका प्रयोग नेटवर्क या इंटरनेट के माध्यम से कम्प्यूटरों के बीच Files को स्थानान्तरित (Transfer) करने के लिए किया जाता है।
इंटरनेट पर उपयोगकर्ता विभिन्न Files को Upload या Download करते हैं। ऐसे File Transfer से सम्बन्धित कार्यों में FTP का प्रयोग किया जा सकता है।
Website से सम्बन्धित Files को सामान्यतः Web Server पर Store किया जाता है। Files को Web Server पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था को Web Hosting कहा जाता है। FTP Web Server और कम्प्यूटर के बीच Files के आदान-प्रदान में उपयोगी होता है।
4. चैटिंग (Chatting)
इंटरनेट के माध्यम से दो या अधिक व्यक्तियों के बीच वास्तविक समय में संदेशों का आदान-प्रदान करने की प्रक्रिया को Chatting कहा जाता है।
इसके लिए उपयोगकर्ताओं के पास इंटरनेट कनेक्शन होना आवश्यक होता है। Chatting के माध्यम से Text के अतिरिक्त Audio और Video आधारित संवाद भी किया जा सकता है।
चैटिंग के प्रमुख लाभ
- Chatting से विद्यार्थियों को कम्प्यूटर और इंटरनेट के प्रयोग का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो सकता है।
- वर्तमान समय में यह संचार का तीव्र माध्यम है।
- व्यक्तिगत तथा सामूहिक दोनों प्रकार की बातचीत की जा सकती है।
- इससे विद्यार्थियों में Typing Skills का विकास हो सकता है।
- लिखित Chat को आवश्यकता के अनुसार सुरक्षित रखा और पुनः देखा जा सकता है।
- दूर-दराज स्थित व्यक्तियों के बीच आसानी से विचारों और सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकता है।
स्पैम (Spam)
Spam सामान्य रूप से अवांछित या अनचाहे Electronic Messages को कहा जाता है। इसे Electronic Junk Mail अथवा Junk Message के रूप में भी समझा जाता है।
Spam प्रायः बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को भेजे जाने वाले अनचाहे संदेश या विज्ञापन होते हैं। ये E-mail तथा अन्य ऑनलाइन संचार माध्यमों पर प्राप्त हो सकते हैं।
5. सर्च इंजन (Search Engine)
Search Engine ऐसा ऑनलाइन साधन है जिसकी सहायता से World Wide Web पर उपलब्ध आवश्यक जानकारी को खोजा जाता है।
उपयोगकर्ता Search Engine के Interface में कोई शब्द, वाक्यांश (Phrase) अथवा कथन (Statement) दर्ज करता है। Search Engine उससे सम्बन्धित उपलब्ध सूचनाओं और Web Pages को खोजकर उपयोगकर्ता के सामने प्रस्तुत करता है।
प्रमुख सर्च इंजन
- Bing
- Yahoo
- Excite
- Lycos
इंटरनेट की सेवाएँ एक नजर में
| सेवा | मुख्य कार्य |
|---|---|
| World Wide Web | Web Pages और ऑनलाइन सूचनाओं तक पहुँच प्रदान करना |
| Electronic Messages और Documents भेजना एवं प्राप्त करना | |
| FTP | कम्प्यूटरों और Server के बीच Files Transfer करना |
| Chatting | इंटरनेट के माध्यम से संवाद और संदेशों का आदान-प्रदान करना |
| Search Engine | Web पर उपलब्ध आवश्यक सूचना को खोजना |
कम्प्यूटर में इंटरनेट का सेटअप (Performing Setup of Internet in a Computer System)
कम्प्यूटर को इंटरनेट से जोड़ने के लिए Internet Connection को आवश्यक रूप से Configure करना पड़ता है। पारम्परिक Windows प्रणाली में इंटरनेट कनेक्शन स्थापित करने की सामान्य प्रक्रिया निम्न प्रकार से की जाती है—
- Start Menu खोलकर Control Panel पर जाएँ।
- Network and Internet Connections विकल्प का चयन करें।
- Internet सम्बन्धी Options अथवा Connection Settings खोलें।
- Connections Tab में जाकर नया Connection स्थापित करने के लिए Setup विकल्प चुनें।
- आवश्यक Connection Settings भरकर आगे बढ़ें।
- New Connection Wizard प्रारम्भ होने पर Next पर क्लिक करें।
- Connect to the Internet विकल्प चुनकर Next पर जाएँ।
- उपलब्ध Internet Connection के प्रकार के अनुसार उपयुक्त विकल्प चुनें। Broadband Connection होने पर उससे सम्बन्धित Connection Option का चयन करें।
- आवश्यक Setup पूरा होने पर Finish पर क्लिक करें। इसके बाद Internet Connection का उपयोग किया जा सकता है।
Internet Setup का वास्तविक Interface और विकल्प Operating System तथा Connection के प्रकार के अनुसार अलग हो सकते हैं, परन्तु मूल उद्देश्य कम्प्यूटर को उपलब्ध नेटवर्क या Internet Service से जोड़ना होता है।
- इंटरनेट की प्रमुख सेवाएँ WWW, E-mail, FTP, Chatting और Search Engine हैं।
- WWW का पूरा नाम World Wide Web है और यह Web पर उपलब्ध सूचनाओं तक पहुँच प्रदान करता है।
- E-mail के माध्यम से Electronic Messages और Documents भेजे तथा प्राप्त किए जाते हैं।
- प्रत्येक E-mail उपयोगकर्ता का एक विशिष्ट E-mail Address होता है।
- FTP का पूरा नाम File Transfer Protocol है और इसका प्रयोग Files के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है।
- Chatting इंटरनेट के माध्यम से संवाद और संदेशों के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करती है।
- Spam अवांछित Electronic Messages या Junk Mail को कहा जाता है।
- Search Engine World Wide Web पर उपलब्ध जानकारी खोजने में सहायता करता है।
- Google, Bing, Yahoo, Excite और Lycos Search Engine के उदाहरण दिए गए हैं।
- Internet Setup का उद्देश्य कम्प्यूटर को उपलब्ध Network या Internet Service से जोड़ना है।
इंटरनेट पर कार्य एवं बेसिक ऑनलाइन सेवाएँ
इंटरनेट पर कार्य (Working on Internet)
इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं और सेवाओं का उपयोग करने के लिए Web Browser की आवश्यकता होती है। Web Browser के माध्यम से Websites खोली जा सकती हैं, जानकारी खोजी जा सकती है तथा विभिन्न Online Services का उपयोग किया जा सकता है।
इंटरनेट एक्सप्लोरर (Internet Explorer)
Internet Explorer, जिसे Microsoft Internet Explorer, MSIE या IE भी कहा जाता था, Microsoft द्वारा विकसित एक Graphical Web Browser था। इसे वर्ष 1995 से Microsoft Windows के साथ उपलब्ध कराया गया।
वर्ष 2002–03 के आसपास Internet Explorer का Web Browser बाजार में बहुत व्यापक प्रयोग था और इसकी हिस्सेदारी लगभग 95 प्रतिशत तक पहुँच गई थी। उस समय IE-5 तथा IE-6 इसके प्रमुख संस्करणों में थे।
Internet Explorer की कुछ प्रमुख सुविधाएँ
- Internet Explorer 11 में Cross-Site Scripting तथा Click-Hijacking जैसे सुरक्षा खतरों से बचाव के लिए सुरक्षा सुविधाएँ दी गई थीं।
- हानिकारक Scripts को पहचानने और रोकने की सुविधा उपलब्ध थी।
- एक ही Website से सम्बन्धित Tabs को पहचानने में सुविधा देने के लिए सम्बन्धित Tabs को समान रंग में दिखाया जा सकता था।
- Accelerator सुविधा में किसी शब्द या Text को Select करने पर उससे सम्बन्धित Map, जानकारी या अन्य Online Service तक शीघ्र पहुँचा जा सकता था।
बेसिक ऑनलाइन सेवाएँ (Basic Online Services)
इंटरनेट पर सामान्य रूप से प्रयोग की जाने वाली प्रमुख Online Services निम्नलिखित हैं—
- Search Engines
- Chatting
- Internet Calling
- Social Networking
1. सर्च इंजन (Search Engines)
Search Engine इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी को खोजने का साधन है। उपयोगकर्ता किसी शब्द, विषय या जानकारी को Search करके उससे सम्बन्धित Web Pages, Images, Videos तथा अन्य सामग्री प्राप्त कर सकता है।
Google Google द्वारा विकसित एक प्रमुख Search Engine है। इसका प्रयोग इंटरनेट पर विभिन्न प्रकार की जानकारी खोजने के लिए किया जाता है।
Google के व्यापक उपयोग के संदर्भ में प्रतिदिन 3 अरब से अधिक Searches किए जाने का आँकड़ा भी दिया गया है।
Bing
Bing Microsoft का Search Engine है। इसका प्रयोग Web Pages, Videos, Images और Products आदि को खोजने के लिए किया जाता है।
Bing से पहले Microsoft की Search Services को MSN Search, Windows Live Search तथा Live Search जैसे नामों से जाना जाता था।
Yahoo
Yahoo Search Engine के साथ-साथ एक Directory या Subject Index के रूप में भी प्रयोग किया जाता था। इसमें Websites और सूचनाओं को विभिन्न विषयों तथा श्रेणियों में व्यवस्थित किया जाता था।
Excite
Excite Concept-based Search की सुविधा प्रदान करने वाला Search Engine था। इसका प्रयोग Web Publishing से सम्बन्धित कार्यों में भी किया जाता था।
Lycos
Lycos एक व्यापक Search Engine था। इसमें Search Engine तथा Directory दोनों प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध थीं और इसका उपयोग विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी खोजने के लिए किया जाता था।
2. ई-मेल सेवाएँ (E-mail Services)
इंटरनेट पर E-mail भेजने तथा प्राप्त करने के लिए विभिन्न E-mail Services उपलब्ध हैं। इनमें Gmail, Yahoo Mail तथा Rediffmail प्रमुख उदाहरण हैं।
Gmail
Gmail Google की E-mail Service है। इसे वर्ष 2004 में प्रारम्भ किया गया। प्रारम्भ में Gmail उपयोगकर्ताओं को लगभग 1 GB Storage उपलब्ध कराया गया था।
सितम्बर 2009 तक यह Storage लगभग 7.4 GB हो गया था। बाद में Google Account के साथ लगभग 15 GB Storage उपलब्ध कराया गया।
Gmail को वर्ष 2007 में सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया।
Gmail Account बनाने की सामान्य प्रक्रिया
- Gmail की Website खोलें।
- Sign In अथवा नया Account बनाने के लिए Sign Up / Create Account विकल्प चुनें।
- आवश्यक Form में नाम, इच्छित E-mail ID और Password जैसी जानकारी भरें।
- आवश्यक विवरण पूरा करके Account बनाएँ।
- Account बनने के बाद E-mail ID और Password की सहायता से Login किया जा सकता है।
E-mail Account का Password गोपनीय रखना चाहिए और इसे किसी अन्य व्यक्ति को नहीं बताना चाहिए।
Yahoo Mail
Yahoo Mail भी E-mail भेजने और प्राप्त करने की सेवा प्रदान करता था। इसके लिए उपयोगकर्ता का Yahoo Account होना आवश्यक था।
Yahoo ID तथा Password की सहायता से Sign In करके Mail Service का उपयोग किया जाता था। इसके पुराने सेवा-विवरण में उपयोगकर्ताओं को बड़ी मात्रा में, यहाँ तक कि Unlimited Mail Storage उपलब्ध कराने का उल्लेख मिलता है।
Rediffmail
Rediffmail भारत में प्रयोग की जाने वाली E-mail Services में से एक है। Rediff की स्थापना वर्ष 1996 में मुम्बई के अजीत बालकृष्णन द्वारा की गई थी।
Rediffmail में User ID और Password की सहायता से Login करके E-mail भेजे और प्राप्त किए जाते हैं।
3. चैटिंग (Chatting)
Internet Chatting में उपयोगकर्ता इंटरनेट के माध्यम से एक-दूसरे के साथ तत्काल बातचीत कर सकते हैं। इसके लिए विभिन्न Instant Messaging Services का प्रयोग किया जाता रहा है।
Yahoo Messenger
Yahoo Messenger Yahoo की Instant Messaging Service थी। इसे Download करके उपयोगकर्ता एक-दूसरे के साथ Chat कर सकते थे।
इसमें निम्न सुविधाएँ उपलब्ध थीं—
- PC-to-PC Communication
- PC-to-Phone Communication
- Files भेजना
- Webcam का प्रयोग
- Video Communication
- Voice Communication
Yahoo Messenger में Chat Rooms की सुविधा भी रही, जिसे बाद में बन्द कर दिया गया।
Google Talk
Google Talk Google की Instant Messaging Service थी। इसे 24 अगस्त 2005 को प्रारम्भ किया गया।
यह Gmail के साथ भी जुड़ी हुई थी। Gmail User ID के माध्यम से उपयोगकर्ता Chat और Messages का आदान-प्रदान कर सकते थे।
Google Talk को GT, Google Chat तथा Google Messaging जैसे नामों से भी जाना जाता था। इसका Web Client तथा Mobile Devices के लिए भी उपयोग किया जाता था।
Google Hangouts
Google की Communication Services में बाद में Google Hangouts का प्रयोग Text, Voice और Video Communication के लिए किया गया।
इसे Android, Mac, Linux, Windows और Chrome OS जैसे विभिन्न Platforms पर प्रयोग किया जा सकता था तथा इसमें Internet आधारित Voice Communication की सुविधा भी उपलब्ध थी।
4. इंटरनेट कॉलिंग (Internet Calling)
इंटरनेट के माध्यम से किसी दूसरे व्यक्ति से Voice अथवा Video के द्वारा बातचीत करने को Internet Calling कहा जाता है।
Internet Calling के लिए सामान्यतः दोनों उपयोगकर्ताओं के पास उपयुक्त Communication Software तथा Internet Connection होना आवश्यक होता है।
Skype
Skype Internet Calling के लिए प्रयोग किया जाने वाला Communication Software है। इसके माध्यम से इंटरनेट पर Voice Communication किया जा सकता है।
Skype का प्रयोग करने के लिए Software को Download और Install करके Registration किया जाता है। इसके बाद Headset, Speaker, Microphone या USB Phone जैसे उपकरणों की सहायता से बातचीत की जा सकती है।
Skype में Computer-to-Computer Communication के अतिरिक्त SkypeOut और SkypeIn जैसी सेवाओं के माध्यम से सामान्य Telephone Network से भी Calling की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी।
ऐसी Local अथवा International Telephone Calls Computer-to-Computer Calls की तरह पूर्णतः निःशुल्क नहीं होती थीं।
VoIP
VoIP का पूरा नाम Voice over Internet Protocol है। इसके माध्यम से Voice को Internet Protocol आधारित Network पर भेजा जाता है।
Skype, Google Talk, Viber Messenger और WhatsApp जैसे Applications में Internet आधारित Audio अथवा Video Communication की सुविधा का प्रयोग किया गया है।
5. सोशल नेटवर्किंग (Social Networking)
Social Networking के माध्यम से लोग इंटरनेट पर एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं, Messages भेज सकते हैं तथा Photos, Videos और अन्य सूचनाएँ साझा कर सकते हैं।
Facebook एक Social Networking Service है। इसमें उपयोगकर्ता अपनी Profile बना सकते हैं, Contacts से जुड़ सकते हैं तथा Photos, Videos और Messages साझा कर सकते हैं।
Facebook अनेक भाषाओं में उपलब्ध रहा है और इसमें विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ प्रदान की गई हैं।
Facebook की प्रमुख सुविधाएँ
- Marketplace: वस्तुओं तथा सेवाओं से सम्बन्धित जानकारी साझा करना।
- Groups: समान रुचि वाले लोगों के समूह बनाना।
- Events: किसी कार्यक्रम से सम्बन्धित जानकारी और निमंत्रण साझा करना।
- Pages: संस्था, व्यवसाय, समूह या अन्य उद्देश्य के लिए Page बनाना।
- Friend List तथा Privacy सम्बन्धी सुविधाएँ।
- Photo Albums तथा Videos साझा करना।
- Chat तथा Wall/Post के माध्यम से संवाद करना।
- Group, Fan तथा Business Pages बनाना।
- Live Video Streaming करना।
Twitter एक Micro-blogging Social Networking Service है। इसमें उपयोगकर्ता छोटे Messages प्रकाशित करते हैं, जिन्हें Tweet कहा जाता है।
किसी दूसरे User की गतिविधियों को देखने के लिए उसे Follow किया जा सकता है। Public Tweet को दूसरे उपयोगकर्ता पढ़ और Search कर सकते हैं।
किसी विषय या शब्द को विशेष रूप से पहचानने के लिए Hashtag (#) का प्रयोग किया जाता है।
Twitter के पुराने स्वरूप में एक Tweet की सीमा 140 Characters थी। यह सीमा SMS आधारित प्रारम्भिक व्यवस्था से सम्बन्धित थी।
Tweet के प्रमुख प्रकार
- Regular Tweet: सामान्य Text आधारित Tweet।
- Image Tweet: Images के साथ किया गया Tweet। एक Tweet में चार तक Images जोड़ी जा सकती थीं।
- Video Tweet: Video के साथ किया गया Tweet। पुराने स्वरूप में लगभग 30 सेकंड तक के Video का उल्लेख मिलता है।
- Media-Rich Link Tweet: Multimedia Content वाले Link के साथ Tweet।
- Location Tweet: Location Information के साथ Tweet।
- @ Mention: किसी अन्य User को उसके User Name द्वारा सम्बोधित करना।
- Re-tweet: किसी दूसरे User के Tweet को पुनः साझा करना।
- Poll: प्रश्न और विकल्प देकर अन्य Users से प्रतिक्रिया प्राप्त करना। पुराने स्वरूप में Poll को 24 घंटे तक चलाने का उदाहरण दिया गया है।
Google Group
Google Group समान रुचि या उद्देश्य वाले लोगों के समूह के लिए उपयोगी Online Service है। इसके माध्यम से Group Members के बीच Messages और सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकता है।
इसका प्रयोग संस्थागत तथा व्यावसायिक समूहों के Communication के लिए भी किया जा सकता है।
MSN / Windows Live Messenger
Windows Live Messenger Microsoft की Instant Messaging Service थी। इसका उपयोग Chat और Online Communication के लिए किया जाता था।
इसके विभिन्न संस्करण Windows, Java, Mac, BlackBerry तथा iOS जैसे Platforms पर उपलब्ध रहे। कुछ स्थितियों में Yahoo की Messaging Service के साथ भी Compatibility प्रदान की गई थी।
ब्लॉग (Blog)
Blog एक प्रकार की व्यक्तिगत Website अथवा Online Diary है, जिसमें व्यक्ति समय-समय पर अपने विचार, लेख, चित्र, Links या अन्य सामग्री प्रकाशित कर सकता है।
Blog लिखने वाले व्यक्ति को Blogger कहा जाता है। Blog सामान्य विषय पर भी हो सकता है और किसी विशेष विषय को समर्पित भी हो सकता है।
पाठक Blog Posts पर Comments के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
Blog के प्रमुख प्रकार
- Art Blog
- Photography Blog
- Video Blog
- MP3 / Audio Blog
बेसिक ऑनलाइन सेवाएँ एक नजर में
| सेवा | प्रमुख उदाहरण | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| Search Engine | Google, Bing, Yahoo, Excite, Lycos | इंटरनेट पर जानकारी खोजना |
| Gmail, Yahoo Mail, Rediffmail | Electronic Messages भेजना और प्राप्त करना | |
| Chatting | Yahoo Messenger, Google Talk, Hangouts | तत्काल संवाद करना |
| Internet Calling | Skype, VoIP आधारित Applications | Internet द्वारा Voice और Video Communication |
| Social Networking | Facebook, Twitter, Google Group | लोगों से जुड़ना और सामग्री साझा करना |
| Blog | Art, Photo, Video, MP3 Blog | विचार और सामग्री Online प्रकाशित करना |
- Internet Explorer Microsoft द्वारा विकसित Graphical Web Browser था, जिसे 1995 से Windows के साथ उपलब्ध कराया गया।
- Basic Online Services में Search Engine, E-mail, Chatting, Internet Calling और Social Networking प्रमुख हैं।
- Google, Bing, Yahoo, Excite और Lycos प्रमुख Search Engines के उदाहरण हैं।
- Gmail, Yahoo Mail और Rediffmail प्रमुख E-mail Services के उदाहरण हैं।
- Google Talk 24 अगस्त 2005 को प्रारम्भ किया गया था।
- VoIP का पूरा नाम Voice over Internet Protocol है।
- Skype का प्रयोग Internet आधारित Voice Communication के लिए किया जाता है।
- Facebook में Marketplace, Groups, Events और Pages जैसी सुविधाएँ होती हैं।
- Twitter एक Micro-blogging Service है और इसमें Tweet, Hashtag, @ Mention तथा Re-tweet जैसी अवधारणाएँ महत्त्वपूर्ण हैं।
- Blog एक Online Diary या Website का रूप है तथा इसे लिखने वाले व्यक्ति को Blogger कहा जाता है।
शिक्षा सम्बन्धी ऑनलाइन लिंक
शिक्षा सम्बन्धी ऑनलाइन लिंक
इंटरनेट के माध्यम से विद्यार्थी, शिक्षक और अन्य शिक्षा से जुड़े व्यक्ति विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं की Websites तथा Online Platforms से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इनके द्वारा शिक्षा नीतियों, पाठ्य-सामग्री, शिक्षक प्रशिक्षण, नियुक्तियों, शोध तथा शैक्षिक गतिविधियों से सम्बन्धित सूचनाएँ उपलब्ध होती हैं।
शिक्षा से सम्बन्धित प्रमुख Online Links एवं संस्थाएँ निम्नलिखित हैं—
- मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD)
- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) तथा राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT)
- जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET)
- बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश
1. मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD)
MHRD शिक्षा से सम्बन्धित राष्ट्रीय स्तर की नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध कराने वाला प्रमुख सरकारी माध्यम है।
इससे शिक्षा व्यवस्था, शैक्षिक सामग्री, शिक्षकों की योग्यता तथा नियुक्तियों से सम्बन्धित सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं।
Website: www.mhrd.gov.in
MHRD से सम्बन्धित ऑनलाइन माध्यम
- Website: शिक्षा नीतियों, कार्यक्रमों तथा अन्य आधिकारिक शैक्षिक सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए।
- Facebook: शिक्षा से सम्बन्धित नवीन समाचार तथा गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करने के लिए।
- Twitter: शिक्षा सम्बन्धी विचारों, सूचनाओं और नीतियों से सम्बन्धित संक्षिप्त Updates प्राप्त करने के लिए।
- LinkedIn: शिक्षा एवं अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों के बीच Professional Information के आदान-प्रदान के लिए।
2. NCERT एवं SCERT
NCERT
NCERT का पूरा नाम National Council of Educational Research and Training अर्थात् राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद है।
NCERT की Website से शिक्षा तथा प्रशिक्षण से सम्बन्धित सामग्री, सूचनाएँ और अन्य शैक्षिक संसाधन प्राप्त किए जा सकते हैं।
Website: www.ncert.nic.in
SCERT
SCERT राज्य स्तर पर कार्य करने वाली शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्था है। विभिन्न राज्यों में SCERT की अपनी Websites होती हैं, जिनके माध्यम से राज्य विशेष की शिक्षा, पाठ्य-सामग्री और प्रशिक्षण से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
NCERT एवं SCERT के ऑनलाइन माध्यम
- Website: शैक्षिक सामग्री, प्रशिक्षण और शिक्षा से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त करने के लिए।
- Facebook: विभागीय सूचनाएँ प्राप्त करने तथा जनसामान्य तक जानकारी पहुँचाने में उपयोगी।
- Twitter: नवीन शैक्षिक सूचनाओं और गतिविधियों को संक्षिप्त रूप में साझा करने के लिए।
- LinkedIn: विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और अन्य Professionals के बीच शैक्षिक एवं व्यावसायिक जानकारी के आदान-प्रदान के लिए।
3. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET)
DIET का पूरा नाम District Institute of Education and Training अर्थात् जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान है।
DIET की स्थापना जिला स्तर पर मुख्य रूप से प्राथमिक शिक्षा तथा शिक्षक प्रशिक्षण से सम्बन्धित कार्यों के लिए की गई है। प्रत्येक जिले में शिक्षा एवं प्रशिक्षण से सम्बन्धित सूचनाएँ उपलब्ध कराने में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
DIET की Online Services के माध्यम से जिला स्तर की शैक्षिक गतिविधियों, शिक्षक प्रशिक्षण, नियुक्तियों तथा नई और पुरानी शिक्षा नीतियों से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
DIET के ऑनलाइन माध्यम
- Website: जिला स्तर की शिक्षा और प्रशिक्षण सम्बन्धी जानकारी प्राप्त करने के लिए।
- Facebook: जिला शिक्षा से सम्बन्धित गतिविधियों, शिक्षक नियुक्तियों और नीतियों की जानकारी साझा करने के लिए।
- Twitter: जिला स्तर की शैक्षिक नीतियों और नवीन सूचनाओं को साझा करने के लिए।
- LinkedIn: विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े Professionals को आपस में जोड़ने तथा विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए।
4. बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश
बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित Online Portal के माध्यम से प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था से सम्बन्धित विभिन्न सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं।
Website: www.upbasiceduboard.gov.in
इससे बेसिक शिक्षा से सम्बन्धित कार्यक्रमों, गतिविधियों और आवश्यक प्रशासनिक सूचनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
बेसिक शिक्षा परिषद के ऑनलाइन माध्यम
- Website: उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा से सम्बन्धित आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के लिए।
- Facebook: नवीन कार्यक्रमों, आयोजनों, चित्रों और अन्य शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी साझा करने के लिए।
- Twitter: नवीन सूचनाओं, गतिविधियों तथा उनसे सम्बन्धित विचारों को साझा करने के लिए।
- LinkedIn: शिक्षकों तथा शिक्षा से जुड़े Professionals के बीच विचार, शोध और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए।
प्रमुख शैक्षिक संस्थाएँ एक नजर में
| संस्था | स्तर | प्रमुख ऑनलाइन उपयोग |
|---|---|---|
| MHRD | राष्ट्रीय स्तर | शिक्षा नीतियाँ, कार्यक्रम, शिक्षक योग्यता एवं नियुक्ति सम्बन्धी जानकारी |
| NCERT | राष्ट्रीय स्तर | शैक्षिक सामग्री, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण सम्बन्धी जानकारी |
| SCERT | राज्य स्तर | राज्य विशेष की शैक्षिक सामग्री एवं प्रशिक्षण सम्बन्धी जानकारी |
| DIET | जिला स्तर | प्राथमिक शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण तथा जिला स्तरीय शैक्षिक सूचनाएँ |
| बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश | राज्य की बेसिक शिक्षा | बेसिक शिक्षा से सम्बन्धित कार्यक्रम, गतिविधियाँ एवं सूचनाएँ |
शिक्षा में Social Media का महत्त्व
शैक्षिक संस्थाएँ Website के साथ-साथ Facebook, Twitter और LinkedIn जैसे Online Platforms का भी प्रयोग करती हैं। इन माध्यमों से नवीन सूचनाओं को शीघ्र साझा किया जा सकता है तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और अन्य शिक्षा से जुड़े व्यक्तियों के बीच सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है।
- शिक्षा सम्बन्धी प्रमुख Online Institutions में MHRD, NCERT, SCERT, DIET और बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
- NCERT राष्ट्रीय स्तर तथा SCERT राज्य स्तर पर शिक्षा और प्रशिक्षण से सम्बन्धित कार्य करती हैं।
- DIET का पूरा नाम District Institute of Education and Training है और यह जिला स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- MHRD की Website से राष्ट्रीय शिक्षा नीतियों, कार्यक्रमों और शिक्षा सम्बन्धी सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं।
- NCERT की Website www.ncert.nic.in दी गई है।
- बेसिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित Website www.upbasiceduboard.gov.in दी गई है।
- Facebook, Twitter तथा LinkedIn का प्रयोग शैक्षिक सूचनाओं, गतिविधियों, विचारों और Professional Knowledge के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है।
इंटरनेट पर सामग्री Upload–Download एवं Software Installation/Update
डेटा सिक्योरिटी, प्रमुख खतरे एवं व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा
डेटा सिक्योरिटी (Data Security)
कम्प्यूटर, Database तथा Websites में संग्रहित Digital Data को अनधिकृत व्यक्तियों की पहुँच, परिवर्तन, क्षति या नष्ट होने से सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को Data Security कहा जाता है।
Data Security का उद्देश्य डिजिटल सूचनाओं की गोपनीयता और सुरक्षा बनाए रखना तथा Data को Corruption या अनधिकृत Access से बचाना है। किसी भी संस्था के Information Technology System में Data Security का विशेष महत्त्व होता है।
Data Security के अन्तर्गत Data को सुरक्षित रखने के लिए Backup, Data Masking तथा Data Erasure जैसी विधियों का प्रयोग किया जा सकता है।
ऑथेन्टिकेशन (Authentication)
Data Security में Authentication का महत्त्वपूर्ण स्थान है। Authentication का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Digital Data, Software और Hardware तक केवल अधिकृत व्यक्ति (Authorized User) ही पहुँच सके।
किसी व्यक्ति की पहचान सत्यापित करने के लिए Password, Code अथवा Biometric Identification जैसी विधियों का प्रयोग किया जा सकता है।
डेटा सिक्योरिटी के प्रमुख खतरे (Prevailing Threats to Data Security)
कम्प्यूटर और Network पर उपलब्ध Data को विभिन्न प्रकार के Security Threats से खतरा हो सकता है। प्रमुख खतरे निम्नलिखित हैं—
1. सुरक्षा संरचना का अभाव (Non-Existent Security Architecture)
यदि किसी Computer Network में उचित Security Architecture उपलब्ध नहीं है, तो Network तथा उसमें संग्रहित व्यक्तिगत या महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ खतरे में पड़ सकती हैं।
केवल Firewall का प्रयोग ही सम्पूर्ण सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं होता। Network और Data की सुरक्षा के लिए उचित Security व्यवस्था आवश्यक होती है।
2. पुराने Client-Side Software और Applications
Unpatched Client-Side Software and Applications Data Security के लिए एक महत्त्वपूर्ण खतरा हैं। पुराने Software Versions में Security कमजोरियाँ बनी रह सकती हैं, जिनका दुरुपयोग किया जा सकता है।
इसलिए Software और Applications को समय-समय पर Update या Upgrade करना आवश्यक होता है।
3. Phishing तथा Targeted Attacks
Phishing या Spear Phishing जैसे Targeted Attacks के माध्यम से Hackers उपयोगकर्ता की महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं।
ऐसे हमलों में E-mail या अन्य Electronic Messages के माध्यम से संदिग्ध Code या सामग्री भेजी जा सकती है, जिससे Computer System की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
4. Internet एवं Website से खतरे
Internet Browsing के दौरान संक्रमित Websites या Web Content के माध्यम से हानिकारक Code Computer तक पहुँच सकता है।
पुरानी या असुरक्षित Websites तथा Updated न किए गए Browsing Software से Security Risk बढ़ सकता है।
5. खराब Configuration Management
यदि Home या Office Network के Computers को उचित Security Policy और Configuration के बिना जोड़ा गया है, तो वे बाहरी हमलों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
इसलिए Data Security केवल Computer को Network से जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उचित Configuration और Security Management भी आवश्यक है।
6. Cloud Computing
Cloud Computing में बड़ी मात्रा में उपयोगकर्ताओं का Data तथा Applications Online Systems पर उपलब्ध होते हैं। इससे Data Availability और Security से सम्बन्धित चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
Cloud Environment में Software Patching तथा Code Management जैसे सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है।
7. Removable Media
Flash Drive, CD तथा External Hard Drive जैसे Removable Media भी Data Security के लिए खतरा बन सकते हैं।
यदि इन Devices का प्रयोग बिना उचित सुरक्षा के किया जाए, तो इनके माध्यम से Malware या अन्य हानिकारक Programs एक Computer या Network से दूसरे तक पहुँच सकते हैं।
8. Botnet या Zombie Army
Botnet संक्रमित Computers का ऐसा Network होता है जिसमें अनेक Computers किसी हानिकारक Software से प्रभावित होकर दूसरे Systems पर हमले या Malware फैलाने के लिए प्रयोग किए जा सकते हैं।
ऐसे संक्रमित Computer को Bot या Zombie कहा जाता है। कई संक्रमित Computers के समूह को Zombie Army भी कहा जाता है।
Botnet शब्द में Bot का सम्बन्ध Robot तथा Net का सम्बन्ध Network से है।
9. Zero-Day Attack
Zero-Day Attack ऐसा Security Threat है जो किसी Software या Application की ऐसी कमजोरी का लाभ उठा सकता है जिसका समाधान अभी उपलब्ध न हो।
ऐसा Attack Internet के माध्यम से बहुत तेजी से फैल सकता है तथा Network और Data को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा (Personal Data Security)
व्यक्तिगत Data को सुरक्षित रखने के लिए नियमित सावधानी और उचित Data Management आवश्यक है। इसके प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—
1. नियमित Backup / Dumping
महत्त्वपूर्ण Data का नियमित अन्तराल पर Backup लेना चाहिए। यदि Original Data किसी कारण से नष्ट या Corrupt हो जाए, तो Backup की सहायता से उसे पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
2. डेटा की प्रतिलिपि रखना (Keeping Copy)
महत्त्वपूर्ण Data की एक अतिरिक्त Copy सुरक्षित रखनी चाहिए। Processing या Transaction के दौरान किसी प्रकार की त्रुटि अथवा Data Corruption होने पर यह Copy Data को पुनः प्राप्त करने में सहायता करती है।
3. सुरक्षित Web Browsing
Internet का प्रयोग करते समय Safe Web Browsing अपनानी चाहिए। Browser की Security और Privacy Settings पर ध्यान देना चाहिए तथा संदिग्ध या नकली Websites से सावधान रहना चाहिए।
4. Control Plus
महत्त्वपूर्ण Data पर Control Plus जैसी जाँच का प्रयोग Data में हुए परिवर्तन को पहचानने के लिए किया जा सकता है। इससे यह पता लगाने में सहायता मिलती है कि Data में कोई अनचाहा परिवर्तन हुआ है या नहीं।
5. Logging
Logging में System या Transaction से सम्बन्धित गतिविधियों का Record रखा जाता है।
यदि किसी File का Data Corrupt या नष्ट हो जाए, तो उपलब्ध Transaction Logs की सहायता से उसके पूर्व के कार्यों को समझने और Data को पुनः व्यवस्थित करने में सहायता मिल सकती है।
Data Security के खतरे एवं सुरक्षा उपाय एक नजर में
| खतरा | मुख्य समस्या |
|---|---|
| Security Architecture का अभाव | Network और Data अनधिकृत पहुँच के प्रति असुरक्षित हो सकते हैं। |
| Unpatched Software | पुराने Software की Security कमजोरियों का दुरुपयोग हो सकता है। |
| Phishing | धोखाधड़ी से व्यक्तिगत या महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने का प्रयास। |
| Unsafe Internet / Website | हानिकारक Code या Malware Computer तक पहुँच सकता है। |
| Poor Configuration | गलत Network Configuration सुरक्षा को कमजोर कर सकता है। |
| Cloud Computing | Online Data और Applications की Security से सम्बन्धित चुनौतियाँ। |
| Removable Media | Flash Drive, CD आदि से Malware फैल सकता है। |
| Botnet | संक्रमित Computers के समूह द्वारा हानिकारक गतिविधियाँ। |
| Zero-Day Attack | Software की अज्ञात या असुधारी गई कमजोरी का दुरुपयोग। |
व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा के प्रमुख उपाय
| उपाय | उद्देश्य |
|---|---|
| Regular Backup | Data नष्ट होने पर पुनः प्राप्त करना |
| Keeping Copy | Data की अतिरिक्त सुरक्षित प्रतिलिपि रखना |
| Safe Web Browsing | संदिग्ध Websites और Online Threats से बचना |
| Control Plus | Data में हुए परिवर्तन की पहचान करना |
| Logging | System या Transaction Activities का Record रखना |
- Data Security का उद्देश्य Digital Data को अनधिकृत Access, परिवर्तन, क्षति और Corruption से सुरक्षित रखना है।
- Authentication द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि Data, Software तथा Hardware तक केवल अधिकृत व्यक्ति ही पहुँच सके।
- Password, Code और Biometric Identification Authentication के साधन हो सकते हैं।
- Data Security के प्रमुख खतरों में Phishing, Unpatched Software, Unsafe Websites, Poor Configuration, Cloud Computing, Removable Media, Botnet और Zero-Day Attack शामिल हैं।
- Botnet संक्रमित Computers का Network होता है और संक्रमित Computer को Bot या Zombie कहा जाता है।
- Personal Data Security के प्रमुख उपाय हैं— Regular Backup, Keeping Copy, Safe Web Browsing, Control Plus और Logging।
- Regular Backup और अतिरिक्त Copy रखने से Data नष्ट या Corrupt होने पर उसे पुनः प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
- सुरक्षित Web Browsing तथा उचित Security Configuration Data को Online Threats से बचाने में सहायक हैं।
कम्प्यूटर वायरस, Antivirus, Web Tools एवं हिन्दी कम्प्यूटिंग
कम्प्यूटर वायरस (Computer Virus)
कम्प्यूटर की आन्तरिक सुरक्षा के लिए Computer Virus एक प्रमुख खतरा है। Virus ऐसे हानिकारक Computer Programs होते हैं जो अनचाहे रूप से Computer System में प्रवेश करके उसके Data, Files अथवा Programs को प्रभावित कर सकते हैं।
Virus Internet, Pen Drive, संक्रमित Files तथा अन्य Storage Devices के माध्यम से एक Computer से दूसरे Computer तक पहुँच सकता है।
Computer Virus का कोई निश्चित बाहरी रूप नहीं होता। यह किसी Program या File के साथ जुड़कर स्वयं की प्रतियाँ बना सकता है और अन्य Files अथवा Systems को संक्रमित कर सकता है।
Virus के प्रभाव से Files Delete हो सकती हैं, Data नष्ट हो सकता है अथवा Files और Programs ठीक प्रकार से खुलना बन्द कर सकते हैं। इसकी विनाशकारी प्रकृति के कारण इसे Virus कहा जाता है।
कभी-कभी Programming में हुई गंभीर त्रुटियाँ या Bugs भी Software के व्यवहार को हानिकारक बना सकते हैं।
Virus से बचाव एवं उपचार के उपाय
- सबसे पहले यह पहचानने का प्रयास करना चाहिए कि Computer पर Virus Attack हुआ है या नहीं। इसके लिए असामान्य Messages, Files या System Behaviour पर ध्यान देना चाहिए।
- गंभीर संक्रमण की स्थिति में Computer को बन्द करके विशेषज्ञ या Software Engineer की सहायता ली जा सकती है। Antivirus Software की सहायता से Virus को पहचानने और हटाने का प्रयास किया जाता है।
- Virus हटाने के बाद यह सुनिश्चित करना चाहिए कि System पूरी तरह Virus-मुक्त हो गया है, अन्यथा शेष संक्रमित File से Virus पुनः सक्रिय हो सकता है।
- यह पहचानना उपयोगी है कि Virus किस File, Device या प्रक्रिया के माध्यम से आया, ताकि भविष्य में उसी माध्यम से दोबारा संक्रमण से बचा जा सके।
एंटीवायरस (Antivirus)
Antivirus ऐसा विशेष Software है जिसका प्रयोग Computer Virus तथा अन्य हानिकारक Programs को खोजने, रोकने और हटाने के लिए किया जाता है।
Antivirus Software में अनेक ज्ञात Viruses से सम्बन्धित जानकारी उपलब्ध होती है। यह Computer की Files और Programs को Scan करके Virus की पहचान करता है और संक्रमण मिलने पर उपयोगकर्ता को सूचित करता है।
कई Antivirus Programs में Auto-Protect सुविधा होती है, जो Memory में सक्रिय रहकर Computer में आने वाले Data और Files की जाँच करती रहती है।
Antivirus Software के उदाहरण
- PC-cillin
- McAfee
- Quick Heal
- Norton Antivirus
- AVG Antivirus
AVG Antivirus को Download करना
Antivirus Software को Internet से Download करके Computer में Install किया जा सकता है। AVG Antivirus की प्रक्रिया उदाहरण के रूप में निम्न प्रकार दी गई है—
- Web Browser में AVG की Website खोलें।
- उपलब्ध Products में AVG Antivirus Free विकल्प चुनें।
- Free Download विकल्प पर क्लिक करें।
- अगले Page पर Download Now विकल्प चुनें।
- Download प्रारम्भ होने पर Installation File को Computer में Save करें।
- Download पूरा होने के बाद उस File पर Double Click करके Installation प्रारम्भ करें।
AVG Antivirus को Install करना
- Download की गई Installation File खोलें। यदि User Account Control की अनुमति माँगी जाए तो Yes चुनें।
- Installation Window खुलने पर Next पर क्लिक करें।
- License Agreement पढ़कर Accept विकल्प चुनें।
- उपलब्ध Protection Option में आवश्यक विकल्प, जैसे Basic Protection, चुनकर Next पर जाएँ।
- आगे दिए गए Installation निर्देशों के अनुसार Next पर क्लिक करते हुए प्रक्रिया जारी रखें।
- यदि Internet Connection उपलब्ध है तो आवश्यक Updates भी Download हो सकते हैं।
- Installation पूरा होने पर आवश्यकता के अनुसार Computer को Restart करें।
- Restart के बाद AVG Antivirus स्वतः प्रारम्भ होकर Update तथा Protection Status की जाँच कर सकता है।
Antivirus को Update करना
नए Viruses की पहचान करने के लिए Antivirus Software को समय-समय पर Update करना आवश्यक है। Update से Antivirus को नए Threats से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त होती है।
AVG Antivirus Update की प्रक्रिया
- Start Menu से All Programs खोलकर AVG Folder में जाएँ।
- AVG Antivirus खोलकर Update Now विकल्प चुनें।
- Update की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रतीक्षा करें।
- Update पूरा होने पर Protection की स्थिति Up to Date दिखाई दे सकती है।
Antivirus की आवश्यकता
- Virus तथा हानिकारक Programs की पहचान करने के लिए।
- संक्रमित Files को हटाने या सुरक्षित करने के लिए।
- Computer में आने वाली Files और Data की जाँच करने के लिए।
- नए Viruses से सुरक्षा के लिए नियमित Updates प्राप्त करने के लिए।
उपयोगी Web Tools
Internet तथा Computer से सम्बन्धित विभिन्न कार्यों के लिए अनेक Software और Web Tools का प्रयोग किया जाता है। इनमें Microsoft FrontPage और Microsoft Outlook प्रमुख उदाहरण के रूप में दिए गए हैं।
Microsoft FrontPage
Microsoft FrontPage Microsoft द्वारा विकसित एक WYSIWYG HTML Editor तथा Website Administration Tool था।
WYSIWYG का आशय यह है कि उपयोगकर्ता Web Page को जिस प्रकार Edit करता है, उसका Display भी लगभग उसी प्रकार दिखाई देता है। इससे HTML की प्रत्येक तकनीकी Detail को सीधे लिखे बिना Web Pages तैयार किए जा सकते थे।
Microsoft FrontPage का प्रयोग Professional Websites बनाने, Website Data को व्यवस्थित करने तथा Web Publishing से सम्बन्धित कार्यों में किया जाता था।
यह Microsoft Office के विभिन्न पुराने संस्करणों, विशेष रूप से Office 1997 से Office 2007 के दौर में प्रयुक्त हुआ। बाद में इसे Microsoft Office Suite का हिस्सा बनाना बन्द कर दिया गया।
Microsoft Outlook
Microsoft Outlook Microsoft का Personal Information Management Software है। यह Microsoft Office Suite के साथ उपलब्ध रहा है और अलग Application के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है।
Outlook का प्रमुख उपयोग E-mail Management के लिए होता है। इसके अतिरिक्त इसमें Calendar, Task Management तथा अन्य व्यक्तिगत जानकारी व्यवस्थित करने की सुविधाएँ भी उपलब्ध होती हैं।
Microsoft Outlook को Microsoft Exchange Server तथा Microsoft SharePoint Server जैसी सेवाओं के साथ भी प्रयोग किया जा सकता है।
Outlook में E-mail Account
Outlook में E-mail Account विकल्प की सहायता से उपयोगकर्ता अपना E-mail Account जोड़ सकता है। इसमें Domain आधारित अथवा अन्य E-mail Address की आवश्यक जानकारी भरकर Account Configure किया जाता है।
हिन्दी कम्प्यूटिंग (Hindi Computing)
Computer और Internet पर हिन्दी भाषा में पढ़ने तथा लिखने के लिए विभिन्न Software और Online Tools उपलब्ध हैं। सामान्य English Keyboard की सहायता से भी उचित Input Tools का प्रयोग करके हिन्दी में Text लिखा जा सकता है।
हिन्दी Computing के दो प्रमुख पक्ष हैं—
- हिन्दी में Text पढ़ना एवं अनुवाद करना।
- हिन्दी में Text लिखना।
हिन्दी में Text पढ़ना एवं अनुवाद करना
Internet पर किसी अन्य भाषा में उपलब्ध सामग्री को हिन्दी में समझने के लिए Translation Tools का प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए Google Translate तथा Babylon जैसे Tools उदाहरण के रूप में दिए गए हैं।
Google Translate
Google Translate Google द्वारा उपलब्ध कराई गई एक बहुभाषी Translation Service है। इसका प्रयोग Text, Speech, Images, Websites तथा अन्य सामग्री का एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करने के लिए किया जाता है।
Google Translate की शुरुआत अप्रैल 2006 में हुई थी। प्रारम्भिक रूप में इसमें Statistical Machine Translation तकनीक का प्रयोग किया जाता था।
यह अनेक भाषाओं के बीच Translation की सुविधा प्रदान करता है। स्रोत में लगभग 100 भाषाओं के समर्थन का उल्लेख किया गया है।
Google Translate का प्रयोग
- Browser में Google Translate की Website खोलें।
- जिस Text का Translation करना है उसे Copy करके बाएँ Text Box में Paste करें अथवा सीधे Type करें।
- Source Language और जिस भाषा में Translation चाहिए, उस Target Language का चयन करें।
- आवश्यकता होने पर Detect Language विकल्प से भाषा की पहचान की जा सकती है।
- दूसरी Script में लिखने के लिए उपलब्ध Transliteration/Input विकल्प का प्रयोग किया जा सकता है।
- कुछ भाषाओं में Listen विकल्प द्वारा शब्दों या वाक्यों का उच्चारण भी सुना जा सकता है।
- Translation दाएँ Box में प्रदर्शित होता है।
Google Translate की सीमाएँ
- प्रत्येक Translation पूर्णतः शुद्ध नहीं होता।
- कई बार अनुवादित वाक्य का अर्थ स्पष्ट नहीं होता और उसमें मानवीय सुधार की आवश्यकता पड़ सकती है।
- Machine Translation मूल अर्थ का अनुमान देता है, इसलिए शब्दों या वाक्यों का क्रम सुधारना पड़ सकता है।
- Translation की सुविधा उपलब्ध भाषा और Tool की Supported Features पर निर्भर करती है।
Babylon
Babylon एक Dictionary तथा Translation Software के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। इसके माध्यम से विभिन्न भाषाओं में शब्दों और Text का अर्थ तथा अनुवाद प्राप्त किया जा सकता है।
Babylon में Multilingual Dictionary, Text तथा Document Translation, Unit Conversion और Web Search जैसी सुविधाएँ उपलब्ध थीं।
इसे Software/Application अथवा Online Service के रूप में प्रयोग किया जा सकता था। चयनित शब्द या Text पर कार्य करके उसका अर्थ अथवा Translation प्राप्त किया जा सकता था।
हिन्दी में Text लिखना
हिन्दी में Computer पर लिखने के लिए Unicode आधारित Hindi Typing Tools का प्रयोग किया जा सकता है।
कुछ Tools में उपयोगकर्ता English Keyboard से किसी हिन्दी शब्द का उच्चारण English अक्षरों में Type करता है और Spacebar दबाने पर वह शब्द हिन्दी लिपि में बदल जाता है।
इस प्रकार तैयार किए गए Hindi Text को Copy करके Facebook, E-mail, Blog, Microsoft Word तथा अन्य Applications में प्रयोग किया जा सकता है।
Microsoft Indic Language Input Tool
Microsoft Indic Language Input Tool भारतीय भाषाओं में Text लिखने के लिए प्रयोग किया जाने वाला Input Tool है।
इसमें Keyboard को मुख्य Input Device के रूप में प्रयोग करके Transliteration की सहायता से भारतीय भाषाओं में Text लिखा जा सकता है।
उपयोगकर्ता English अक्षरों में शब्द Type करता है और Tool उसे सम्बन्धित भारतीय भाषा की Script में परिवर्तित करने में सहायता करता है। आवश्यकता होने पर बने हुए शब्द को Keyboard द्वारा Edit भी किया जा सकता है।
प्रमुख Tools एक नजर में
| Tool / Software | मुख्य उपयोग |
|---|---|
| Antivirus | Virus को पहचानना, रोकना तथा हटाना |
| AVG Antivirus | Computer को Virus से सुरक्षित रखना तथा नियमित Security Updates प्राप्त करना |
| Microsoft FrontPage | Web Pages और Websites तैयार एवं व्यवस्थित करना |
| Microsoft Outlook | E-mail, Calendar और Personal Information Management |
| Google Translate | एक भाषा से दूसरी भाषा में Translation |
| Babylon | Dictionary एवं Multilingual Translation |
| Indic Language Input Tool | भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिन्दी में Text लिखना |
- Computer Virus हानिकारक Program है जो Files, Data और Programs को प्रभावित या नष्ट कर सकता है।
- Virus Internet, Pen Drive तथा संक्रमित Files के माध्यम से फैल सकता है।
- Antivirus Virus की पहचान, रोकथाम तथा Removal के लिए प्रयोग किया जाने वाला Software है।
- PC-cillin, McAfee, Quick Heal, Norton और AVG Antivirus के उदाहरण हैं।
- नए Viruses की पहचान के लिए Antivirus को नियमित रूप से Update करना आवश्यक है।
- Microsoft FrontPage Website बनाने और Manage करने के लिए प्रयुक्त WYSIWYG HTML Editor था।
- Microsoft Outlook E-mail तथा Personal Information Management के लिए उपयोगी Software है।
- Google Translate एक बहुभाषी Translation Service है जिसकी शुरुआत अप्रैल 2006 में हुई थी।
- Babylon Dictionary तथा Translation Tool के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है।
- Unicode आधारित Hindi Typing Tools द्वारा English Keyboard से हिन्दी Text लिखा जा सकता है।
- Microsoft Indic Language Input Tool Transliteration की सहायता से भारतीय भाषाओं में Text लिखने की सुविधा देता है।