कम्प्यूटर सिस्टम के घटक एवं कम्प्यूटर हार्डवेयर
कम्प्यूटर सिस्टम के घटक
एक कम्प्यूटर सिस्टम (Computer System) मूल रूप से दो प्रमुख घटकों से मिलकर बना होता है—
- हार्डवेयर (Hardware)
- सॉफ्टवेयर (Software)
कम्प्यूटर में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों मिलकर कार्य करते हैं। ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। किसी एक की अनुपस्थिति में दूसरा अपना कार्य नहीं कर सकता।
कम्प्यूटर हार्डवेयर (Computer Hardware)
कम्प्यूटर के वे सभी भाग जिन्हें देखा और स्पर्श किया जा सकता है, हार्डवेयर कहलाते हैं। कम्प्यूटर तथा उससे जुड़े इनपुट और आउटपुट डिवाइसेज आदि सभी हार्डवेयर की श्रेणी में आते हैं।
सरल शब्दों में, कम्प्यूटर के भौतिक रूप से दिखाई देने और छुए जा सकने वाले उपकरणों को कम्प्यूटर हार्डवेयर कहा जाता है।
कम्प्यूटर हार्डवेयर के प्रमुख प्रकार
कम्प्यूटर से जुड़े हार्डवेयर को उनके कार्य के आधार पर मुख्यतः चार वर्गों में बाँटा गया है—
1. इनपुट डिवाइसेज (Input Devices)
इनपुट डिवाइसेज वे हार्डवेयर उपकरण हैं जिनके माध्यम से आँकड़े और निर्देश कम्प्यूटर तक पहुँचाए जाते हैं।
2. प्रोसेसिंग डिवाइसेज (Processing Devices)
प्रोसेसिंग डिवाइसेज प्राप्त आँकड़ों और निर्देशों पर आवश्यक प्रक्रिया करने से सम्बन्धित हार्डवेयर होते हैं।
3. मेमोरी डिवाइसेज / स्टोरेज डिवाइसेज (Memory Devices / Storage Devices)
मेमोरी अथवा स्टोरेज डिवाइसेज का प्रयोग कम्प्यूटर में आँकड़ों और सूचनाओं के संग्रहण के लिए किया जाता है।
4. आउटपुट डिवाइसेज (Output Devices)
आउटपुट डिवाइसेज वे हार्डवेयर उपकरण हैं जिनके माध्यम से कम्प्यूटर द्वारा किए गए कार्य का परिणाम प्राप्त किया जाता है।
हार्डवेयर का वर्गीकरण एक नजर में
| हार्डवेयर का प्रकार | मुख्य कार्य |
|---|---|
| Input Devices | कम्प्यूटर में आँकड़े एवं निर्देश पहुँचाना |
| Processing Devices | प्राप्त आँकड़ों और निर्देशों पर प्रक्रिया करना |
| Memory / Storage Devices | आँकड़ों और सूचनाओं का संग्रहण करना |
| Output Devices | कम्प्यूटर द्वारा प्राप्त परिणाम उपलब्ध कराना |
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का सम्बन्ध
कम्प्यूटर सिस्टम में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अलग-अलग घटक होते हुए भी एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। हार्डवेयर कम्प्यूटर के भौतिक भागों का निर्माण करता है, जबकि सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर से कार्य कराने के लिए आवश्यक निर्देश प्रदान करता है। इसलिए कम्प्यूटर सिस्टम के सही संचालन के लिए दोनों का साथ होना आवश्यक है।
- कम्प्यूटर सिस्टम के दो मुख्य घटक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर हैं।
- हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर एक-दूसरे के पूरक हैं।
- जिन कम्प्यूटर भागों को देखा और स्पर्श किया जा सकता है, उन्हें हार्डवेयर कहते हैं।
- कम्प्यूटर हार्डवेयर के चार प्रमुख वर्ग हैं—Input, Processing, Memory/Storage और Output Devices।
- Input Devices आँकड़े एवं निर्देश पहुँचाते हैं और Output Devices कम्प्यूटर से प्राप्त परिणाम उपलब्ध कराते हैं।
- Memory/Storage Devices का कार्य आँकड़ों और सूचनाओं को संग्रहित करना है।
इनपुट डिवाइसेज
इनपुट डिवाइसेज क्या हैं?
कम्प्यूटर स्वयं सोचने और समझने की शक्ति नहीं रखता। किसी भी कार्य को सम्पन्न करने के लिए उसे आवश्यक आँकड़े और निर्देश देने पड़ते हैं। जिन युक्तियों की सहायता से ये आँकड़े एवं निर्देश कम्प्यूटर तक पहुँचाए जाते हैं, उन्हें इनपुट डिवाइसेज (Input Devices) कहा जाता है।
सरल शब्दों में, इनपुट डिवाइस उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए डेटा और निर्देशों को कम्प्यूटर में प्रवेश कराने का कार्य करता है।
1. की-बोर्ड (Keyboard)
की-बोर्ड सर्वाधिक उपयोग किए जाने वाले इनपुट डिवाइसेज में से एक है। यह सामान्य टाइपराइटर के की-बोर्ड के समान होता है और कम्प्यूटर से जुड़ा रहता है।
की-बोर्ड उपयोगकर्ता और कम्प्यूटर के बीच एक कड़ी की तरह कार्य करता है। किसी कुंजी को दबाने पर उससे सम्बन्धित सूचना कम्प्यूटर तक पहुँचती है। मुख्य रूप से की-बोर्ड डेटा को डिजिटल फॉर्मेट में बदलकर कम्प्यूटर तक पहुँचाता है।
की-बोर्ड के प्रमुख भाग
1. अल्फान्यूमेरिक या टाइपिंग की (Alphanumeric / Typing Keys)
इनमें अंग्रेजी वर्णमाला की कुंजियाँ A से Z, संख्यात्मक कुंजियाँ 0 से 9 तथा विभिन्न विशेष प्रतीक कुंजियाँ (Special Symbol Keys) होती हैं।
2. न्यूमेरिक की (Numeric Keys)
इनका प्रयोग संख्यात्मक डेटा दर्ज करने अथवा कर्सर की गति से सम्बन्धित कार्यों में किया जाता है। सामान्यतः न्यूमेरिक भाग में 17 कुंजियों का सेट होता है।
3. फंक्शन की (Function Keys)
फंक्शन कुंजियाँ की-बोर्ड के ऊपरी भाग में स्थित होती हैं। इनका प्रयोग विशेष कार्यों को सम्पन्न करने के लिए किया जाता है।
4. कर्सर या एरो की (Cursor / Arrow Keys)
इन कुंजियों का प्रयोग स्क्रीन पर कर्सर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए किया जाता है। ये चार दिशाओं—
- बाएँ (←),
- दाएँ (→),
- ऊपर (↑),
- नीचे (↓)
को दर्शाती हैं। इसलिए इन्हें Direction Keys भी कहते हैं। इनका प्रयोग Navigation के लिए किया जाता है।
5. कंट्रोल की (Control Keys)
कम्प्यूटर पर विभिन्न कार्यों को सम्पन्न करने के लिए कंट्रोल कुंजियों का अकेले अथवा अन्य कुंजियों के साथ संयोजन में प्रयोग किया जाता है।
Enter, Shift, Ctrl, Alt, Windows Logo Key और Esc आदि कंट्रोल की के उदाहरण हैं।
2. माउस (Mouse)
माउस एक चूहे के आकार जैसा दिखाई देने वाला Pointing Device है। इसे माइक्रोमाउस भी कहा जाता है। माउस की सहायता से कम्प्यूटर स्क्रीन पर स्थित किसी विकल्प या मेन्यू को Point किया जा सकता है।
माउस का मुख्य कार्य स्क्रीन को निर्देश देना है। इसके बटनों की सहायता से Click, Double Click, Right Click और Dragging जैसे कार्य किए जाते हैं।
माउस के प्रकार
1. मैकेनिकल माउस (Mechanical Mouse)
इसके नीचे रबर अथवा धातु की गेंद लगी होती है। गेंद के घूमने की दिशा का पता लगाने के लिए इसमें Mechanical Sensors लगे होते हैं। गेंद की गति के आधार पर स्क्रीन पर कर्सर की दिशा निर्धारित होती है।
2. ऑप्टो-मैकेनिकल माउस (Opto-Mechanical Mouse)
यह मैकेनिकल माउस के समान होता है, लेकिन गेंद की गति का पता लगाने के लिए इसमें Optical Sensors का प्रयोग किया जाता है।
3. ऑप्टिकल माउस (Optical Mouse)
ऑप्टिकल माउस में गति का पता लगाने के लिए Laser का प्रयोग किया जाता है। इसमें कोई आन्तरिक Mechanical Moving Parts नहीं होते। यह मैकेनिकल माउस की तुलना में अधिक तीव्र और परिशुद्ध प्रतिक्रिया देता है, परन्तु इसकी कीमत अपेक्षाकृत अधिक होती है।
3. ट्रैक बॉल (Track Ball)
ट्रैक बॉल माउस के समान एक Pointing Device है। अन्तर यह है कि माउस में गेंद नीचे होती है, जबकि ट्रैक बॉल में गेंद ऊपर लगी होती है।
इस गेंद को अँगूठे अथवा अंगुली की सहायता से घुमाया जाता है, जिससे स्क्रीन पर कर्सर की दिशा नियंत्रित की जाती है।
ट्रैक बॉल माउस की अपेक्षा कम स्थान घेरती है और इसे माउस की तरह पूरी सतह पर घुमाने की आवश्यकता नहीं होती। इसका प्रयोग लैपटॉप तथा गेम आदि में किया जाता है।
4. स्टाइलस (Stylus)
स्टाइलस सामान्य पेन जैसा दिखाई देने वाला इनपुट उपकरण है। इसका प्रयोग कम्प्यूटर स्क्रीन, मोबाइल उपकरण अथवा Graphics Tablet पर लिखने, डिजाइन बनाने तथा अन्य इनपुट कार्यों के लिए किया जाता है।
इसका प्रयोग Touch Screen उपकरणों पर भी किया जाता है। स्टाइलस के माध्यम से आँकड़े, चिह्न तथा अन्य सूचनाएँ कम्प्यूटर को प्रदान की जा सकती हैं।
5. लाइट पेन (Light Pen)
लाइट पेन पेन के आकार का प्रकाश-संवेदी Pointing Device है। इसके पीछे एक केबल लगी होती है।
इसे स्क्रीन पर चलाने पर यह प्रकाश की तीव्रता को महसूस करता है और उसकी सहायता से स्क्रीन पर रेखाएँ अथवा आकृतियाँ बनाई जा सकती हैं। इसकी सहायता से मॉनिटर स्क्रीन पर सीधे अंकन किया जा सकता है।
6. स्कैनर (Scanner)
स्कैनर एक विशेष प्रकार का इनपुट डिवाइस है जो फोटोस्टेट मशीन के समान कार्य करता है। इसकी सहायता से रेखाचित्र, आकृति, फोटो और लिखित सामग्री को कम्प्यूटर में उसके मूल रूप के निकट इनपुट किया जा सकता है।
स्कैनर के प्रयोग में की-बोर्ड द्वारा सामग्री टाइप करने अथवा माउस से उसे पुनः बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे कार्य की गति और शुद्धता बढ़ती है।
स्कैनर के प्रमुख प्रकार
स्कैनर को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा गया है—
- इमेज स्कैनर (Image Scanner)
- विशेष उद्देश्य स्कैनर (Special Purpose Scanner)
1. इमेज स्कैनर (Image Scanner)
इमेज स्कैनर का प्रयोग कागज पर लिखी विषयवस्तु तथा चित्रों को स्कैन करने के लिए किया जाता है। इसके प्रमुख प्रकार निम्न हैं—
(i) फ्लैटबेड स्कैनर (Flatbed Scanner)
फ्लैटबेड स्कैनर एक बॉक्स के समान होता है, जिसके ऊपर ढक्कन तथा उसके नीचे काँच की प्लेट होती है। जिस कागज अथवा पुस्तक के पृष्ठ को स्कैन करना हो, उसे काँच की प्लेट पर रखा जाता है।
स्कैनिंग के दौरान इसके भीतर लगा प्रकाश स्रोत एक ओर से दूसरी ओर चलता है और चित्र को पंक्ति-दर-पंक्ति स्कैन करता है। अधिकांश फ्लैटबेड स्कैनर में A4 आकार के कागज को स्कैन किया जा सकता है।
(ii) हैंड-हेल्ड स्कैनर (Handheld Scanner)
हैंड-हेल्ड स्कैनर आकार में छोटा होता है और इसे हाथ में पकड़कर प्रयोग किया जा सकता है। इसका आकार लगभग 10 सेमी होता है तथा इसकी लागत भी कम होती है।
छोटा और आसानी से ले जाने योग्य होने के कारण इसका प्रयोग यात्रा में भी किया जा सकता है। इसका प्रयोग प्रायः दुकानों में Barcode Scan करने तथा उत्पाद एवं उसके मूल्य की जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
(iii) ड्रम स्कैनर (Drum Scanner)
ड्रम स्कैनर का प्रयोग अधिकतर प्रकाशन कम्पनियों में किया जाता है। यह चित्र की अत्यन्त छोटी-छोटी Details को भी अच्छी तरह स्कैन करने में सक्षम होता है।
इसमें PMT (Photomultiplier Tube) तकनीक का प्रयोग किया जाता है। स्कैन किए जाने वाले दस्तावेज को सिलेंडर पर लगाया जाता है और सेंसर द्वारा प्राप्त प्रकाश को प्रक्रिया करके इलेक्ट्रिकल सिग्नल में परिवर्तित किया जाता है।
2. विशेष उद्देश्य स्कैनर (Special Purpose Scanner)
विशेष उद्देश्य स्कैनर किसी निर्धारित कार्य को सम्पन्न करने के लिए विशेष डिजाइन और सॉफ्टवेयर के साथ बनाए जाते हैं। इनके प्रमुख प्रकार हैं—
(i) OCR — Optical Character Recognition
OCR (Optical Character Recognition) ऐसी तकनीक है जो Printed अथवा Handwritten Data को Optical रूप से स्कैन करके अक्षरों की पहचान करती है और उन्हें Character Code जैसे ASCII में बदल सकती है।
यह Text के Light और Dark Areas का विश्लेषण करके अक्षरों को पहचानता है। इसका प्रयोग पहले से टाइप किए गए पृष्ठों को Digital अथवा Computerized रूप में बदलने के लिए किया जाता है।
(ii) OMR — Optical Mark Recognition
OMR (Optical Mark Recognition) का प्रयोग कागज पर चिन्हित क्षेत्रों (Marked Fields) को पढ़ने के लिए किया जाता है। इसमें प्रकाश की सहायता से Pencil Marks की पहचान की जाती है।
इस तकनीक की सहायता से बड़ी मात्रा में डेटा को तेजी से पढ़ा जा सकता है। इसकी प्रक्रिया में मुख्यतः—
- फॉर्म को स्कैन करके उसमें उपस्थित चिह्नों की पहचान करना।
- पहचानी गई जानकारी को आगे की प्रक्रिया के लिए कम्प्यूटर में स्थानान्तरित करना।
शामिल हैं।
(iii) बार कोड रीडिंग (Barcode Reading)
Barcode Reading का प्रयोग Point of Sale Data Recording के लिए किया जाता है। वस्तुओं के ऊपर बनी सफेद और काली रेखाओं के समूह को Barcode कहा जाता है।
Barcode Reader इन रेखाओं को स्कैन करके प्राप्त जानकारी को Digital रूप में कम्प्यूटर तक पहुँचाता है। इसका प्रयोग सुपर मार्केट, पुस्तकालय, बैंक तथा पोस्ट ऑफिस आदि में किया जाता है।
(iv) MICR — Magnetic Ink Character Recognition
MICR (Magnetic Ink Character Recognition) ऐसी तकनीक है जो विशेष Magnetic Ink से मुद्रित चुम्बकीय अक्षरों को पहचानती है।
Magnetic Ink में विशेष प्रकार का Metal Powder होता है। इससे मुद्रित Text मनुष्य द्वारा भी पढ़ा जा सकता है तथा MICR Scanner द्वारा इसे पढ़कर कम्प्यूटर में स्थानान्तरित किया जा सकता है।
MICR का प्रयोग मुख्यतः बैंकों में किया जाता है। इसके द्वारा बैंक चेक पर लिखे—
- चेक नम्बर,
- बैंक नम्बर,
- बैंक ब्रांच नम्बर तथा
- खाता नम्बर
जैसी सूचनाओं को पढ़ा जाता है। MICR Scanner की लागत अधिक होने के कारण इसका प्रयोग मुख्यतः बड़े संस्थानों में किया जाता है।
7. डिजिटल कैमरा (Digital Camera)
डिजिटल कैमरा एक महत्वपूर्ण इनपुट डिवाइस है। इसके द्वारा High Resolution के फोटो खींचकर उन्हें कम्प्यूटर में भेजा जा सकता है। इससे Sound Recording तथा Video Recording भी की जा सकती है।
इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि यह Image को Digital रूप में परिवर्तित कर कम्प्यूटर तक पहुँचाता है।
8. माइक (Mike)
माइक ऐसा उपकरण है जो ध्वनि को विद्युतीय संकेतों में परिवर्तित करता है। इसका प्रयोग मानव भाषा, आवाज और शब्दों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने तथा आवाज रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है।
इसका प्रयोग टेलीफोन, मोबाइल, टेप रिकॉर्डर, रेडियो, टेलीविजन तथा कम्प्यूटर आदि में किया जाता है।
9. डिजिटल बोर्ड (Digital Board)
डिजिटल बोर्ड एक प्रकार का Interactive Smart White Board है। इसका प्रयोग कक्षा में अवधारणाओं को स्पष्ट करने तथा आवश्यक निर्देश प्रदान करने के लिए किया जाता है।
Digital Projector की सहायता से चित्र अथवा अध्ययन सामग्री को बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाता है। बोर्ड के किनारों पर दिए गए Icons की सहायता से प्रदर्शित अध्ययन-सामग्री के साथ कार्य किया जा सकता है।
डिजिटल बोर्ड का प्रदर्शन स्पष्ट और परिशुद्ध होता है तथा इसका प्रयोग लंबे समय तक किया जा सकता है। शिक्षण में यह शिक्षक को विषय प्रस्तुत करने तथा विद्यार्थियों को अध्ययन करने में सहायता करता है।
10. जॉयस्टिक (Joystick)
जॉयस्टिक भी माउस की तरह एक Pointing Device है। इसकी सहायता से कम्प्यूटर स्क्रीन पर कर्सर अथवा किसी आकृति को आगे-पीछे तथा विभिन्न दिशाओं में चलाया जा सकता है।
इसके ऊपरी भाग में Handle होता है, जिसे नीचे लगे Socket में विभिन्न दिशाओं में घुमाया जा सकता है। Handle के पास एक Trigger Button भी होता है।
इसकी यांत्रिक गति को विद्युत संकेतों में बदला जाता है। इसका प्रयोग अधिकतर वीडियो गेम खेलने में किया जाता है।
प्रमुख इनपुट डिवाइसेज एक नजर में
| इनपुट डिवाइस | मुख्य कार्य |
|---|---|
| Keyboard | अक्षर, संख्या एवं निर्देश दर्ज करना |
| Mouse | स्क्रीन पर Pointing, Clicking और Dragging |
| Track Ball | गेंद घुमाकर कर्सर की दिशा नियंत्रित करना |
| Stylus | स्क्रीन या Graphics Tablet पर लिखना एवं डिजाइन बनाना |
| Light Pen | स्क्रीन पर सीधे अंकन करना |
| Scanner | Text, चित्र एवं फोटो को कम्प्यूटर में प्रवेश कराना |
| Digital Camera | फोटो एवं वीडियो को Digital रूप में उपलब्ध कराना |
| Mike | ध्वनि को विद्युत संकेतों में बदलना |
| Digital Board | कक्षा में Interactive अध्ययन-सामग्री प्रदर्शित करना |
| Joystick | कर्सर या आकृति की दिशा नियंत्रित करना |
- आँकड़े एवं निर्देश कम्प्यूटर में पहुँचाने वाली युक्तियाँ Input Devices कहलाती हैं।
- Keyboard के प्रमुख भाग Alphanumeric, Numeric, Function, Cursor/Arrow और Control Keys हैं।
- Mouse मुख्यतः Mechanical, Opto-Mechanical और Optical प्रकार का होता है।
- Track Ball में गेंद ऊपर लगी होती है और उसे अंगुली या अँगूठे से घुमाया जाता है।
- Scanner के दो मुख्य वर्ग Image Scanner और Special Purpose Scanner हैं।
- Image Scanner के प्रमुख प्रकार Flatbed, Handheld और Drum Scanner हैं।
- OCR अक्षरों, OMR चिन्हित क्षेत्रों, Barcode Reader बारकोड तथा MICR चुम्बकीय स्याही से मुद्रित अक्षरों को पढ़ने के लिए प्रयोग किया जाता है।
- Digital Camera फोटो एवं वीडियो, Mike ध्वनि तथा Digital Board शिक्षण-सामग्री को Input के रूप में उपलब्ध कराने में उपयोगी हैं।
- Joystick एक Pointing Device है जिसका प्रयोग मुख्यतः वीडियो गेम में किया जाता है।
प्रोसेसिंग डिवाइसेज एवं CPU
प्रोसेसिंग डिवाइसेज (Processing Devices)
कम्प्यूटर में प्राप्त आँकड़ों और निर्देशों पर आवश्यक प्रक्रिया करने का कार्य प्रोसेसिंग डिवाइसेज द्वारा किया जाता है। कम्प्यूटर की प्रोसेसिंग से सम्बन्धित सबसे महत्वपूर्ण इकाई CPU है।
CPU / माइक्रोप्रोसेसर की अवधारणा
CPU को कम्प्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है। CPU का पूरा नाम Central Processing Unit है। इसकी तुलना मानव मस्तिष्क से की जा सकती है।
जिस प्रकार मानव शरीर के अन्य भाग मस्तिष्क से निर्देश प्राप्त करके कार्य करते हैं, उसी प्रकार कम्प्यूटर के Input, Output और Memory आदि भाग CPU से निर्देश प्राप्त करते हैं।
CPU कम्प्यूटर से सम्बन्धित सभी प्रमुख क्रियाओं को नियंत्रित करता है और उनकी देखरेख करता है। इसलिए इसे कम्प्यूटर की Control Unit Processing से सम्बन्धित मुख्य इकाई माना गया है।
CPU के तीन प्रमुख भाग होते हैं—
- कंट्रोल यूनिट (Control Unit — CU)
- अर्थमेटिक एवं लॉजिक यूनिट (Arithmetic and Logic Unit — ALU)
- मेमोरी यूनिट / इंटरनल रजिस्टर्स (Memory Unit / Internal Registers)
1. कंट्रोल यूनिट (Control Unit — CU)
Input Devices के माध्यम से कम्प्यूटर में भेजी गई सूचनाएँ सबसे पहले स्मृति में संग्रहित होती हैं। कम्प्यूटर की स्मृति मानव मस्तिष्क की तरह तथ्यों और सूचनाओं को धारण करती है तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पुनः उपलब्ध कराती है।
कंट्रोल यूनिट कम्प्यूटर में संग्रहित सूचनाओं और निर्देशों के आधार पर आवश्यक क्रियाओं को नियंत्रित करती है। हमारे द्वारा निर्देश दिए जाने पर CPU आवश्यक गणनाएँ और अन्य कार्य करता है।
इस प्रकार Control Unit का मुख्य कार्य कम्प्यूटर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित और संचालित करना है।
2. अर्थमेटिक एवं लॉजिक यूनिट (Arithmetic and Logic Unit — ALU)
ALU का मुख्य कार्य गणना तथा तार्किक क्रियाएँ करना है। कम्प्यूटर द्वारा किए जाने वाले गणना सम्बन्धी कार्य इसी इकाई द्वारा सम्पन्न किए जाते हैं।
इसके प्रमुख कार्यों में—
- जोड़ना,
- घटाना,
- गुणा करना,
- भाग करना
जैसी अंकगणितीय क्रियाएँ तथा—
- AND,
- OR,
- NOT
जैसी तार्किक क्रियाएँ सम्मिलित हैं।
आँकड़ों की तुलना के आधार पर भी कम्प्यूटर अपने कार्य की दिशा निर्धारित करता है।
3. मेमोरी यूनिट / इंटरनल रजिस्टर्स
Memory Unit अथवा Internal Registers CPU की अत्यन्त तीव्र गति वाली स्मृति का कार्य करते हैं।
Control Unit मुख्य मेमोरी से आवश्यक Operands की Value पढ़कर उन्हें Internal Registers में Store करती है। इसके बाद ALU इन Values को प्राप्त करके आवश्यक गणना करता है।
ALU द्वारा प्राप्त मध्यवर्ती परिणामों को अस्थायी रूप से संग्रहित करने के लिए भी Registers का प्रयोग किया जाता है।
रजिस्टर (Registers)
कम्प्यूटर निर्देशों की व्याख्या करने और विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए अनेक छोटी एवं तीव्र गति वाली Memory Units का प्रयोग करता है, जिन्हें Registers कहा जाता है।
किसी Register की लम्बाई उसमें संग्रहित होने वाले Bits की संख्या के बराबर होती है। उदाहरण के लिए, जो Register 8 Bits संग्रहित करता है, उसे 8-Bit Register कहा जाता है।
रजिस्टर के प्रमुख प्रकार
1. मेमोरी एड्रेस रजिस्टर (Memory Address Register)
यह Register क्रियाशील Memory के उस स्थान का Address रखता है जहाँ आवश्यक Data या Instruction स्थित होता है।
2. मेमोरी बफर रजिस्टर (Memory Buffer Register)
Memory Buffer Register उन Contents को रखता है जिन्हें Memory से पढ़ा जाना हो अथवा Memory में लिखा जाना हो।
3. प्रोग्राम कंट्रोल रजिस्टर (Programme Control Register)
इस Register का प्रयोग कम्प्यूटर द्वारा अगली निष्पादित होने वाली Instruction का पता रखने के लिए किया जाता है।
4. एक्यूम्यूलेटर रजिस्टर (Accumulator Register)
इस Register में System द्वारा उत्पन्न परिणाम संग्रहित किए जाते हैं। प्रमुख Instructions के निष्पादन के समय इसका प्रयोग किया जाता है। बहुत से कम्प्यूटरों में एक से अधिक Accumulator Registers भी हो सकते हैं।
5. इंस्ट्रक्शन रजिस्टर (Instruction Register)
इसका प्रयोग वर्तमान में निष्पादित की जा रही Instruction को रखने के लिए किया जाता है।
6. इनपुट / आउटपुट रजिस्टर (Input/Output Register)
यह Register Input और Output Devices के साथ संचार के लिए प्रयोग किया जाता है। Input Device से प्राप्त Information और Data इस Register के माध्यम से स्थानान्तरित होते हैं तथा Output Information को Output Device तक पहुँचाया जाता है।
रजिस्टर एक नजर में
| रजिस्टर | मुख्य कार्य |
|---|---|
| Memory Address Register | Memory Location का Address रखना |
| Memory Buffer Register | Memory से पढ़े या लिखे जाने वाले Content को रखना |
| Programme Control Register | अगली Instruction का पता रखना |
| Accumulator Register | प्राप्त परिणाम को संग्रहित करना |
| Instruction Register | वर्तमान Instruction को रखना |
| Input/Output Register | Input और Output Devices के साथ Data Transfer करना |
बस (Bus)
Bus एक उपप्रणाली है जिसका प्रयोग कम्प्यूटर के विभिन्न घटकों को आपस में जोड़ने तथा उनके बीच Data स्थानान्तरित करने के लिए किया जाता है।
एक Bus Structure में सामान्य रेखाओं (Common Lines) का समूह होता है। Register के प्रत्येक Bit के लिए एक Line होती है, जिसके माध्यम से Binary Information स्थानान्तरित होती है।
नियन्त्रण संकेत यह निर्धारित करते हैं कि किसी विशेष Register के Data Transfer के समय Bus किस Register का चयन करेगी।
Data Line, Address Line और Control Line Input/Output Bus से सम्बन्धित होते हैं। Magnetic Disk, Printer तथा Terminal जैसे उपकरण कम्प्यूटर से Interface के माध्यम से जुड़े होते हैं।
सिस्टम बस (System Bus)
System Bus कम्प्यूटर सिस्टम के प्रमुख घटकों को जोड़ती है और यह निर्धारित करती है कि सूचना को कहाँ भेजा जाना है।
प्रोसेसिंग स्पीड (Processing Speed)
Processing Speed से यह ज्ञात होता है कि कोई सूचना किस गति से प्राप्त, समझी और उस पर प्रक्रिया की जा रही है।
जिस प्रकार अलग-अलग व्यक्तियों की कार्य करने और सोचने की गति समान नहीं होती, उसी प्रकार कम्प्यूटर भी किसी कार्य को निश्चित गति से पूरा करता है।
CPU की कार्य गति को Hertz (Hz) में मापा जाता है। आधुनिक Processor बहुत अधिक गति से कार्य करते हैं, इसलिए उनकी गति को सामान्यतः GHz में व्यक्त किया जाता है।
1 GHz = 1 अरब Cycles प्रति सेकण्ड
Processing Speed मुख्यतः Clock Speed पर निर्भर करती है।
क्लॉक स्पीड (Clock Speed)
Clock Speed से तात्पर्य प्रति सेकण्ड उत्पन्न होने वाले कम्पनों की संख्या से है। ये कम्पन Oscillator द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं और Processor की कार्य गति निर्धारित करते हैं।
Clock Speed को सामान्यतः—
- Megahertz (MHz) — प्रति सेकण्ड Million कम्पन
- Gigahertz (GHz) — प्रति सेकण्ड Billion कम्पन
में मापा जाता है।
Clock Speed को Quartz Crystal Circuit द्वारा निर्धारित किया जाता है।
प्रोसेसिंग स्पीड की विशेषताएँ
- System Clock में Quartz Crystal के कम्पन CPU की गति निर्धारित करते हैं।
- Clock के एक Tick के बराबर समय में Transistor को ON/OFF करने की प्रक्रिया होती है। इसे एक Clock Cycle कहा जाता है।
- Clock Cycle को Hertz (Hz) में मापा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि Clock Speed 300 MHz है, तो System Clock प्रति सेकण्ड 300 Million Cycles करता है।
- Personal Computer जितनी अधिक गति वाला होगा, उतने अधिक Instructions प्रति सेकण्ड निष्पादित कर सकेगा।
CPU के प्रमुख भाग एवं कार्य एक नजर में
| भाग | मुख्य कार्य |
|---|---|
| Control Unit (CU) | कम्प्यूटर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करना |
| Arithmetic and Logic Unit (ALU) | अंकगणितीय एवं तार्किक क्रियाएँ करना |
| Memory Unit / Internal Registers | Data, Operands और मध्यवर्ती परिणामों को तीव्र गति से संग्रहित करना |
- CPU का पूरा नाम Central Processing Unit है और इसे कम्प्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता है।
- CPU के तीन प्रमुख भाग Control Unit, ALU और Memory Unit/Internal Registers हैं।
- Control Unit कम्प्यूटर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करती है।
- ALU जोड़, घटाव, गुणा, भाग तथा AND, OR, NOT जैसी तार्किक क्रियाएँ करता है।
- Registers CPU की तीव्र गति वाली छोटी Memory Units हैं।
- Bus कम्प्यूटर के विभिन्न घटकों को जोड़कर उनके बीच Data Transfer करती है।
- CPU की गति Hertz में तथा आधुनिक Processor की गति सामान्यतः GHz में मापी जाती है।
- 1 GHz एक अरब Cycles प्रति सेकण्ड के बराबर होता है।
- Processing Speed मुख्यतः Clock Speed पर निर्भर करती है।
कम्प्यूटर मेमोरी एवं प्राइमरी मेमोरी
कम्प्यूटर मेमोरी की अवधारणा
कम्प्यूटर में आँकड़ों (Data) तथा निर्देशों (Instructions) को संग्रहित करने की व्यवस्था होती है। जिस प्रकार मनुष्य किसी तथ्य को अपने मस्तिष्क में धारण करता है और आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग करता है, उसी प्रकार कम्प्यूटर भी आँकड़ों और निर्देशों को अपनी मेमोरी (Memory) में संग्रहित करता है।
आदेश प्राप्त होने पर कम्प्यूटर संग्रहित आँकड़ों और निर्देशों के आधार पर Processing करता है। इन आँकड़ों को कम्प्यूटर की Memory तथा विभिन्न Storage Devices में संग्रहित और आवश्यकतानुसार प्राप्त किया जा सकता है।
डेटा संग्रहण क्षमता की शब्दावली
कम्प्यूटर में Digital Data को संग्रहित करने की क्षमता को विभिन्न इकाइयों में मापा जाता है। किसी कम्प्यूटर अथवा Storage Device में अधिकतम कितना Data संग्रहित किया जा सकता है, इसे उसकी Storage Capacity कहा जाता है।
| इकाई | संग्रहण क्षमता |
|---|---|
| Bit | Binary Digit — 0 या 1 |
| Nibble | 4 Bits |
| Byte / Octet | 8 Bits |
| Kilobyte (KB) | 1024 Bytes |
| Megabyte (MB) | 1024 KB |
| Gigabyte (GB) | 1024 MB |
| Terabyte (TB) | 1024 GB |
| Petabyte (PB) | 1024 TB |
| Exabyte (EB) | 1024 PB |
| Zettabyte (ZB) | 1024 EB |
| Yottabyte (YB) | 1024 ZB |
Bit और Byte
Bit Data Storage की सबसे छोटी इकाई है। एक Bit Binary Coding में केवल 0 या 1 का मान प्रदर्शित करता है।
Byte Data की एक प्रमुख इकाई है। एक Byte में 8 Bits होते हैं।
कम्प्यूटर मेमोरी के प्रकार
कम्प्यूटर में Memory को मुख्य रूप से Primary Memory और Secondary Memory के रूप में समझा जाता है। इसके अतिरिक्त CPU की गति बढ़ाने के लिए Cache Memory का भी प्रयोग किया जाता है।
प्राइमरी या मुख्य मेमोरी (Primary / Main Memory)
Primary Memory कम्प्यूटर की मुख्य आन्तरिक मेमोरी होती है। इसे आन्तरिक, इलेक्ट्रॉनिक अथवा Semiconductor Memory भी कहा जाता है और यह कम्प्यूटर के भीतर स्थापित होती है।
Primary Memory के दो प्रमुख भाग हैं—
- RAM (Random Access Memory)
- ROM (Read Only Memory)
1. RAM — Random Access Memory
RAM का पूरा नाम Random Access Memory है। कम्प्यूटर को दिए जाने वाले तथ्य और सूचनाएँ सर्वप्रथम इसी Memory में संग्रहित किए जाते हैं।
RAM एक Read-Write Memory है, अर्थात् इसमें Data को पढ़ा भी जा सकता है और लिखा भी जा सकता है।
यह कम्प्यूटर की अस्थायी मेमोरी है। विद्युत आपूर्ति बन्द होने पर इसमें संग्रहित Data मिट जाता है।
RAM मुख्यतः दो प्रकार की होती है—
- Static RAM (SRAM)
- Dynamic RAM (DRAM)
Static RAM (SRAM)
SRAM में Data तब तक संग्रहित रहता है जब तक विद्युत आपूर्ति बनी रहती है। इसमें बार-बार Data Refresh करने की आवश्यकता नहीं होती।
SRAM में Memory Cells के लिए Flip-Flop का प्रयोग किया जाता है। यह DRAM की तुलना में अधिक तेजी से कार्य करती है।
Dynamic RAM (DRAM)
DRAM RAM का एक सामान्य प्रकार है। इसमें Data को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर Refresh करना आवश्यक होता है।
DRAM की Memory Cells में Capacitors का प्रयोग किया जाता है। Capacitor के Discharge होने के कारण संग्रहित Data धीरे-धीरे समाप्त हो सकता है, इसलिए Refresh आवश्यक होता है।
SRAM तथा DRAM में अन्तर
| SRAM | DRAM |
|---|---|
| Memory Cell में Flip-Flop का प्रयोग होता है। | Memory Cell में Capacitor का प्रयोग होता है। |
| बार-बार Refresh की आवश्यकता नहीं होती। | समय-समय पर Refresh करना आवश्यक होता है। |
| अपेक्षाकृत कम क्षमता होती है। | अपेक्षाकृत अधिक क्षमता होती है। |
| यह अधिक तीव्र गति से कार्य करती है। | यह SRAM की अपेक्षा धीमी गति से कार्य करती है। |
2. ROM — Read Only Memory
ROM का पूरा नाम Read Only Memory है। इसमें सूचनाएँ स्थायी रूप से संग्रहित रहती हैं।
इस Memory में संग्रहित Data को सामान्य रूप से केवल पढ़ा जा सकता है। इसमें नई सूचना लिखना अथवा पहले से संग्रहित सूचना में परिवर्तन करना सम्भव नहीं होता।
ROM की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कम्प्यूटर की विद्युत आपूर्ति बन्द हो जाने पर भी इसमें संग्रहित सूचनाएँ बनी रहती हैं।
ROM के प्रकार
ROM के तीन प्रमुख प्रकार हैं—
1. PROM — Programmable Read Only Memory
PROM का पूरा नाम Programmable Read Only Memory है। इसमें Program को स्थायी रूप से संग्रहित किया जाता है और बाद में उसमें परिवर्तन करना सम्भव नहीं होता।
2. EPROM — Erasable Programmable Read Only Memory
EPROM का पूरा नाम Erasable Programmable Read Only Memory है। इसमें संग्रहित Program को मिटाकर Memory को पुनः Program किया जा सकता है।
3. EEPROM — Electrically Erasable Programmable Read Only Memory
EEPROM का पूरा नाम Electrically Erasable Programmable Read Only Memory है। इसमें संग्रहित सामग्री को विद्युत विधि से मिटाकर पुनः Program किया जा सकता है।
RAM और ROM में मुख्य अन्तर
| RAM | ROM |
|---|---|
| Random Access Memory | Read Only Memory |
| Read और Write दोनों किया जा सकता है। | मुख्यतः संग्रहित Data को पढ़ा जाता है। |
| अस्थायी Memory है। | स्थायी Memory है। |
| Power बन्द होने पर Data मिट जाता है। | Power बन्द होने पर भी Data सुरक्षित रहता है। |
कैश मेमोरी (Cache Memory)
आधुनिक कम्प्यूटरों में एक विशेष प्रकार की तीव्र गति वाली Memory होती है, जिसे Cache Memory कहा जाता है। यह CPU और Main Memory की गति में अन्तर को कम करने में सहायता करती है।
CPU की Processing Speed बहुत अधिक होती है, जबकि Main Memory की गति उसकी तुलना में कम होती है। Cache Memory इन दोनों के बीच कार्य करके Data Access को अधिक तेज बनाती है।
कैश मेमोरी के प्रमुख गुण
- Cache Memory CPU और Main Memory की गति के अन्तर की क्षतिपूर्ति करने में सहायता करती है।
- यह एक प्रकार के Buffer अर्थात् अस्थायी भण्डारण क्षेत्र के रूप में कार्य करती है।
- वर्तमान में चल रहे Programs तथा आवश्यक Temporary Data को तेजी से उपलब्ध कराने में सहायता करती है।
- इसका प्रयोग CPU की Performance बढ़ाने और Data Access Time कम करने के लिए किया जाता है।
- Cache Memory मुख्य Memory अर्थात् RAM की तुलना में अधिक महँगी होती है।
- Processor किसी Data को पढ़ने या लिखने से पहले यह देखता है कि उसकी Copy Cache Memory में उपलब्ध है या नहीं। उपलब्ध होने पर उसे Cache से ही प्राप्त किया जाता है।
CPU, Cache और Main Memory का सम्बन्ध
Cache Memory CPU और Main Memory के बीच तीव्र गति से Data उपलब्ध कराने का कार्य करती है। CPU आवश्यक Data को पहले Cache में खोजता है। यदि Data Cache में उपलब्ध हो, तो CPU उसे Main Memory की अपेक्षा अधिक तेजी से प्राप्त कर सकता है।
मुख्य मेमोरी एक नजर में
| मेमोरी | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| RAM | अस्थायी Read-Write Memory |
| SRAM | तेज गति, बार-बार Refresh की आवश्यकता नहीं |
| DRAM | समय-समय पर Refresh आवश्यक |
| ROM | स्थायी Read Only Memory |
| PROM | Programmable Read Only Memory |
| EPROM | मिटाकर पुनः Program की जा सकने वाली ROM |
| EEPROM | विद्युत विधि से मिटाकर पुनः Program की जाने वाली ROM |
| Cache Memory | CPU को Data शीघ्र उपलब्ध कराने वाली तीव्र गति की Memory |
- कम्प्यूटर Memory का प्रयोग Data और Instructions को संग्रहित करने के लिए किया जाता है।
- Bit Data Storage की सबसे छोटी इकाई है और एक Byte में 8 Bits होते हैं।
- 1024 Bytes = 1 KB, 1024 KB = 1 MB, 1024 MB = 1 GB तथा 1024 GB = 1 TB होता है।
- Primary Memory के दो मुख्य भाग RAM और ROM हैं।
- RAM अस्थायी Read-Write Memory है तथा Power बन्द होने पर इसका Data मिट जाता है।
- RAM के प्रमुख प्रकार SRAM और DRAM हैं।
- ROM स्थायी Memory है और विद्युत आपूर्ति बन्द होने पर भी इसमें Data सुरक्षित रहता है।
- ROM के प्रमुख प्रकार PROM, EPROM और EEPROM हैं।
- Cache Memory CPU और Main Memory के बीच Data Access की गति बढ़ाने में सहायता करती है।
सेकेंडरी मेमोरी एवं स्टोरेज डिवाइसेज
द्वितीयक या सहायक मेमोरी (Secondary Memory)
Secondary Memory कम्प्यूटर में अलग से जोड़ी जाने वाली ऐसी मेमोरी है जिसमें आँकड़ों को स्थायी रूप से संग्रहित किया जाता है। कम्प्यूटर बन्द होने पर भी इसमें संग्रहित Data नष्ट नहीं होता।
इस मेमोरी में Save की गई Files और Folders को आवश्यकता के अनुसार पुनः खोला, देखा और उनमें परिवर्तन किया जा सकता है। इसकी संग्रहण क्षमता Primary Memory की तुलना में अधिक होती है।
Secondary Memory सामान्यतः Primary Memory की अपेक्षा सस्ती और धीमी होती है। इसमें संग्रहित Data को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है तथा आवश्यकता के अनुसार दूसरे कम्प्यूटर में भी प्रयोग किया जा सकता है।
Hard Disk, Floppy Disk, Magnetic Tape और CD-ROM आदि इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
सेकेंडरी मेमोरी के प्रमुख प्रकार
Secondary Memory के Storage Devices मुख्य रूप से निम्न प्रकार के होते हैं—
- मैग्नेटिक डिस्क / मैग्नेटिक स्टोरेज (Magnetic Disk)
- फ्लैश मेमोरी (Flash Memory)
- ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disc)
1. मैग्नेटिक डिस्क (Magnetic Disk)
Magnetic Disk आँकड़ों को संग्रहित करने और उन्हें पढ़ने की एक युक्ति है। इसमें धातु की गोल प्लेट पर चुम्बकीय परत होती है।
डिस्क पर अनेक Concentric Tracks होते हैं जिनमें चुम्बकीय विधि से सूचनाएँ संग्रहित की जाती हैं। Data को पढ़ने और लिखने के लिए Read/Write Head का प्रयोग किया जाता है।
किसी Track पर सीधे पहुँचने की प्रक्रिया को Random Access कहा जाता है।
Magnetic Storage के प्रमुख उपकरण हैं—
- Hard Disk
- Floppy Disk
- Magnetic Tape
हार्ड डिस्क (Hard Disk)
Hard Disk आकार में Floppy Disk से बड़ी तथा अधिक तीव्र गति से कार्य करने वाली Storage Device है। यह कम्प्यूटर में एक निश्चित स्थान पर लगी रहती है, इसलिए इसे Fixed Disk भी कहा जाता है।
Hard Disk में अनेक Disk एक-दूसरे के ऊपर समानान्तर लगी होती हैं। इन्हें चलाने का कार्य Hard Disk Drive (HDD) करता है।
Hard Disk एक Airtight Box में बन्द रहती है, जिससे यह धूल आदि से सुरक्षित रहती है। इसमें संग्रहित सूचनाओं को पढ़ने और लिखने के लिए Read/Write Head का प्रयोग किया जाता है।
Hard Disk की Storage Capacity Floppy Disk की तुलना में अधिक होती है।
फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)
Floppy Disk पतली और लचीली Plastic Material से बनी Storage Disk होती है। इसी लचीलेपन के कारण इसे Floppy कहा जाता है।
इसके केन्द्र में एक छिद्र होता है जिसके माध्यम से Disk घूमती है। एक Floppy Disk में सामान्यतः 80 Data Tracks होते हैं।
Floppy Disk की Storage Capacity बहुत कम होती है। अधिक क्षमता वाली CD और अन्य Storage Devices के प्रचलन के कारण इसका उपयोग लगभग समाप्त हो गया।
मैग्नेटिक टेप (Magnetic Tape)
Magnetic Tape एक Storage Device है जिसका प्रयोग कम्प्यूटर से प्राप्त सूचनाओं को सुरक्षित रूप से संग्रहित करने के लिए किया जाता है।
इसकी संरचना Audio Cassette की Reel के समान होती है। इसमें लगभग 1/2 इंच चौड़ी Plastic Strip होती है जिस पर चुम्बकीय परत चढ़ी होती है।
Data को पढ़ने और लिखने के लिए Magnetic Tape Drive तथा Read/Write Head का प्रयोग किया जाता है। इसकी Data Storage क्षमता 6250 अक्षरों तक होती है।
Cassette Tape की तरह इस पर भी Data लिखा और मिटाया जा सकता है।
2. फ्लैश मेमोरी (Flash Memory)
Flash Memory एक Solid-State Chip है जिसमें Data को बिना बाहरी विद्युत आपूर्ति के भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
इसका प्रयोग कम्प्यूटर और अन्य Portable Electronic Devices में Removable Storage के रूप में किया जाता है।
Flash Memory एक प्रकार की Electronically Erasable Programmable Read-Only Memory (EEPROM) है।
EEPROM में Content को Byte-by-Byte मिटाया जाता है, जबकि Flash Memory में पूरे Block के Data को मिटाया जा सकता है। इस कारण Flash Memory का प्रयोग अधिक सरल होता है।
पेन ड्राइव या मास स्टोरेज डिवाइस (Pen Drive / Mass Storage Device)
Pen Drive एक छोटा Portable Storage Device है जिसका प्रयोग Data को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने, सुरक्षित रखने तथा संग्रहित करने के लिए किया जाता है।
यह आकार में छोटी होती है, परन्तु इसमें पर्याप्त Data संग्रहित किया जा सकता है। Pen Drive 2 GB, 4 GB, 8 GB, 16 GB और 32 GB जैसी विभिन्न क्षमताओं में उपलब्ध होती हैं।
मेमोरी कार्ड (Memory Card)
Memory Card भी Flash Memory का एक रूप है। इसका प्रयोग Photo, Video तथा अन्य प्रकार के Data को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
इसका प्रयोग Mobile Phone, Digital Camera, Digital Camcorder, Handheld Computer, MP3 Player, PDA, Gaming Console और Printer आदि में किया जाता है।
Memory Card को एक उपकरण से दूसरे उपकरण में आसानी से स्थानान्तरित किया जा सकता है। अलग-अलग उपकरणों के लिए इसके अलग-अलग आकार और प्रकार उपलब्ध होते हैं।
3. ऑप्टिकल डिस्क (Optical Disc)
Optical Disc Polycarbonate Material से बनी Disk होती है जिस पर Metal की Layer लगी होती है। इसमें Data को Laser Rays की सहायता से Read और Write किया जाता है। इसी कारण इसे Optical Disc कहा जाता है।
Optical Disc के प्रमुख प्रकार हैं—
- Compact Disc (CD)
- Digital Video Disc (DVD)
कॉम्पैक्ट डिस्क (Compact Disc — CD)
Compact Disc को सामान्यतः CD कहा जाता है। इसमें लगभग 800 MB तक Data संग्रहित किया जा सकता है।
CD मुख्यतः तीन प्रकार की होती है—
1. CD-ROM
CD-ROM में संग्रहित Data को पढ़ा, सुना और देखा जा सकता है, लेकिन सामान्य रूप से इसमें नया Data Store या पहले से संग्रहित Data मिटाया नहीं जा सकता।
2. CD-R
CD-R का अर्थ Compact Disc Recordable है। इसे WORM — Write Once, Read Many भी कहा जाता है। इसमें Data एक बार लिखा जाता है और उसे अनेक बार पढ़ा जा सकता है।
3. CD-RW
CD-RW का अर्थ CD-Rewritable है। इसमें Data को अनेक बार लिखा, पढ़ा तथा पुनः Record किया जा सकता है।
डिजिटल वीडियो डिस्क (Digital Video Disc — DVD)
DVD आकार में CD के समान दिखाई देती है, लेकिन इसकी Data Storage Capacity अधिक होती है।
DVD में CD की तुलना में लगभग 7 गुना अधिक Data संग्रहित किया जा सकता है। कुछ DVD दोनों सतहों पर Data Store कर सकती हैं, जिससे उनकी Storage Capacity और बढ़ जाती है।
CD की तरह DVD के भी तीन प्रमुख प्रकार बताए गए हैं—
- DVD-ROM
- DVD-R
- DVD-RW
ऑप्टिकल एवं मैग्नेटिक स्टोरेज डिवाइस में अन्तर
| ऑप्टिकल स्टोरेज डिवाइस | मैग्नेटिक स्टोरेज डिवाइस |
|---|---|
| Data को Read और Write करने के लिए Laser का प्रयोग होता है। | Data का संग्रहण चुम्बकीय रूप में होता है; Read/Write के लिए Laser का प्रयोग नहीं होता। |
| चुम्बकीय क्षेत्र से प्रभावित नहीं होती। | चुम्बकीय क्षेत्र से प्रभावित हो सकती है। |
| Hard Disk की तुलना में कम Storage Capacity होती है। | अपेक्षाकृत अधिक Storage Capacity होती है। |
| Data Accessing क्षमता Floppy की तुलना में अधिक होती है। | Floppy की Data Accessing क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है। |
| उदाहरण—CD-ROM, CD-R, CD-RW, DVD | उदाहरण—Hard Disk, Floppy Disk, Magnetic Disk |
प्राथमिक एवं द्वितीयक मेमोरी में अन्तर
| प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) | द्वितीयक मेमोरी (Secondary Memory) |
|---|---|
| इसे मुख्य मेमोरी भी कहा जाता है। | इसे Backup अथवा Secondary Memory कहा जाता है। |
| यह सामान्यतः अस्थिर (Volatile) Memory होती है। | यह स्थिर (Non-Volatile) Memory होती है। |
| System बन्द होने पर अस्थायी Data नष्ट हो सकता है। | System बन्द होने पर संग्रहित Data नष्ट नहीं होता। |
| कम्प्यूटर के संचालन के लिए आवश्यक होती है। | कम्प्यूटर संचालन के लिए अनिवार्य नहीं होती। |
| Microprocessor के साथ अधिक तीव्र गति से कार्य करती है। | Primary Memory की तुलना में धीमी गति से कार्य करती है। |
| RAM और ROM इसके प्रमुख उदाहरण हैं। | Hard Disk, CD-ROM और DVD आदि इसके उदाहरण हैं। |
प्रमुख सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइसेज एक नजर में
| Storage Device | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| Hard Disk | अधिक क्षमता वाली Fixed Magnetic Storage Device |
| Floppy Disk | कम क्षमता वाली लचीली Magnetic Disk |
| Magnetic Tape | चुम्बकीय परत वाली Tape पर Data Storage |
| Flash Memory | Solid-State एवं Non-Volatile Storage |
| Pen Drive | छोटी Portable Flash Storage Device |
| Memory Card | Mobile, Camera आदि में प्रयुक्त Flash Storage |
| CD | Laser द्वारा Read/Write की जाने वाली Optical Disc |
| DVD | CD की तुलना में अधिक क्षमता वाली Optical Disc |
- Secondary Memory में Data स्थायी रूप से संग्रहित रहता है और कम्प्यूटर बन्द होने पर नष्ट नहीं होता।
- Secondary Memory की Storage Capacity Primary Memory से अधिक तथा गति अपेक्षाकृत कम होती है।
- Hard Disk, Floppy Disk और Magnetic Tape चुम्बकीय संग्रहण से सम्बन्धित प्रमुख उपकरण हैं।
- Flash Memory एक Solid-State, Non-Volatile Memory है।
- Pen Drive और Memory Card Flash Memory के प्रमुख उपयोग हैं।
- Optical Disc में Data को Laser Rays की सहायता से Read/Write किया जाता है।
- CD के प्रमुख प्रकार CD-ROM, CD-R और CD-RW हैं।
- DVD की Storage Capacity CD की तुलना में अधिक होती है।
- Primary Memory तेज होती है और कम्प्यूटर के संचालन के लिए आवश्यक होती है, जबकि Secondary Memory मुख्यतः स्थायी Data Storage के लिए प्रयोग की जाती है।
आउटपुट डिवाइसेज
आउटपुट डिवाइसेज क्या हैं?
कम्प्यूटर को दिए गए आँकड़ों और निर्देशों के आधार पर Processing के बाद जो परिणाम प्राप्त होता है, उसे उपयोगकर्ता तक पहुँचाने के लिए जिन उपकरणों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें आउटपुट डिवाइसेज (Output Devices) कहा जाता है।
सरल शब्दों में, वे युक्तियाँ जिनके माध्यम से कम्प्यूटर द्वारा प्राप्त परिणामों को देखा, सुना या अन्य रूप में प्राप्त किया जाता है, Output Devices कहलाती हैं।
प्रमुख Output Devices निम्न हैं—
- मॉनिटर या Visual Display Unit (VDU)
- प्रिन्टर (Printer)
- प्लॉटर (Plotter)
- स्पीकर्स या साउण्ड (Speakers or Sound)
- स्क्रीन इमेज प्रोजेक्टर (Screen Image Projector)
1. मॉनिटर या विजुअल डिस्प्ले यूनिट (Monitor / Visual Display Unit)
मॉनिटर एक महत्वपूर्ण Output Device है जिसके माध्यम से कम्प्यूटर द्वारा किए गए कार्य और प्राप्त परिणामों को स्क्रीन पर देखा जा सकता है।
यह देखने में टेलीविजन के समान होता है और तार द्वारा CPU से जुड़ा रहता है। कम्प्यूटर मॉनिटर विभिन्न आकारों में उपलब्ध होते हैं।
मॉनिटर की प्रमुख विशेषताएँ
- मॉनिटर कम्प्यूटर की सूचनाओं का प्रदर्शन करता है।
- यह Text तथा Graphics दोनों को प्रदर्शित कर सकता है।
- स्क्रीन पर प्रदर्शित Text और Graphics अनेक सूक्ष्म बिन्दुओं से मिलकर बनते हैं।
- यह Binary Output को मनुष्य द्वारा समझे जाने योग्य रूप में प्रदर्शित करता है।
मॉनिटर का वर्गीकरण
Monitor या VDU का वर्गीकरण मुख्यतः दो आधारों पर किया जाता है—
- रंग के आधार पर (Based on Colour)
- सिग्नल के आधार पर (Based on Signals)
रंग के आधार पर मॉनिटर के प्रकार
1. मोनोक्रोम (Monochrome)
Monochrome Display Unit में एक रंग Background तथा एक रंग Foreground के लिए प्रयोग किया जाता है।
इन रंगों का संयोजन Black और White, Green और Black अथवा Amber और Black हो सकता है।
2. ग्रे-स्केल (Grayscale)
Grayscale Monitor एक विशेष प्रकार का Monochrome Display होता है जिसमें Gray रंग के विभिन्न Shades को प्रदर्शित किया जाता है।
3. कलर मॉनिटर (Colour Monitor)
Colour Monitor में मुख्यतः तीन रंगों—
- Red,
- Green,
- Blue
का प्रयोग किया जाता है। इन तीन रंगों के कारण इसे RGB Monitor भी कहा जाता है।
इन रंगों के विभिन्न संयोजनों द्वारा Monitor अनेक रंग प्रदर्शित कर सकता है।
सिग्नल के आधार पर मॉनिटर के प्रकार
1. डिजिटल मॉनिटर (Digital Monitor)
Digital VDU Digital Signals प्राप्त करता है और उन्हें Display के लिए आवश्यक रूप में परिवर्तित करता है।
Digital Monitor स्पष्ट Image शीघ्र उत्पन्न करने में सक्षम होता है।
2. एनालॉग मॉनिटर (Analog Monitor)
Analog VDU Analog Signals प्राप्त करता है। पारम्परिक Analog VDU में चित्र प्रदर्शन के लिए CRT Technology का प्रयोग किया जाता है।
मॉनिटर का वर्गीकरण एक नजर में
| आधार | प्रकार |
|---|---|
| रंग के आधार पर | Monochrome, Grayscale, Colour Monitor |
| सिग्नल के आधार पर | Digital, Analog |
2. प्रिन्टर (Printer)
Printer एक Output Device है जो कम्प्यूटर द्वारा तैयार की गई सूचना को कागज पर मुद्रित रूप में उपलब्ध कराता है।
कम्प्यूटर में दिए गए आँकड़ों और निर्देशों के आधार पर जो सूचना तैयार होती है, उसे Printer कागज पर Print कर देता है। इसके माध्यम से अक्षर, संख्याएँ, रेखाचित्र आदि प्राप्त किए जा सकते हैं।
प्रिन्टर के प्रकार
Printing Technique के आधार पर Printer मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—
- इम्पैक्ट प्रिन्टर (Impact Printer)
- नॉन-इम्पैक्ट प्रिन्टर (Non-Impact Printer)
इम्पैक्ट प्रिन्टर (Impact Printer)
Impact Printer में Printing, यान्त्रिक प्रहार के माध्यम से होती है। इसमें Print Head या Hammer स्याहीयुक्त Ribbon के माध्यम से कागज पर प्रहार करता है और अक्षर मुद्रित होते हैं।
यह Typewriter के समान कार्य करता है। किसी दस्तावेज की एक साथ कई प्रतियाँ तैयार करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
इम्पैक्ट प्रिन्टर के प्रमुख प्रकार
1. डॉट-मैट्रिक्स प्रिन्टर (Dot-Matrix Printer)
Dot-Matrix Printer को Serial Printer भी कहा जाता है। इसमें तारों या Styluses का Matrix होता है जो विभिन्न अक्षरों का निर्माण करता है।
Print Head में छोटे-छोटे Pins लगे होते हैं। सामान्यतः एक Print Head में 9 से 24 Pins होती हैं।
यह तेज गति से Print कर सकता है और अन्य Printers की तुलना में इसकी कीमत कम बताई गई है।
2. डेजीव्हील प्रिन्टर (Daisywheel Printer)
Daisywheel Printer एक Serial Impact Printer है। इसमें Plastic Hub होता है जिसमें अनेक Radial Spokes लगे होते हैं। प्रत्येक Spoke पर एक या अधिक Printing Characters बने होते हैं।
Wheel इच्छित अक्षर के स्थान पर पहुँचकर रुकती है और Print Hammer उस अक्षर को Ink Ribbon पर दबाकर कागज पर Print करता है।
इसकी Resolution Dot-Matrix Printer से बेहतर होती है, लेकिन इसकी Speed अपेक्षाकृत कम होती है।
3. लाइन प्रिन्टर (Line Printer)
Line Printer एक Electromechanical Printer है जो एक समय में एक अक्षर के स्थान पर पूरी Line को Print करता है।
इसकी Printing Speed लगभग 300 से 2000 Lines तक हो सकती है। इसका प्रयोग मुख्यतः Mini और Mainframe Processing Environment में किया जाता है।
नॉन-इम्पैक्ट प्रिन्टर (Non-Impact Printer)
Non-Impact Printer में कागज पर Printing के लिए Print Head द्वारा प्रत्यक्ष प्रहार नहीं किया जाता।
Non-Impact Printer के दो प्रमुख प्रकार हैं—
- Inkjet Printer
- Laser Printer
1. इंकजेट प्रिन्टर (Inkjet Printer)
Inkjet Printer में Printing के लिए छोटे Nozzles का प्रयोग किया जाता है। ये Nozzles स्याही की बहुत छोटी-छोटी बूंदों को कागज पर छोड़ते हैं।
इसमें Text और Graphics की गुणवत्ता अच्छी प्राप्त होती है।
2. लेजर प्रिन्टर (Laser Printer)
Laser Printer में Image Print करने के लिए Laser Beam का प्रयोग किया जाता है। Laser Beam एक Photosensitive Surface पर Image तैयार करती है।
इसके बाद Toner की सहायता से Image को कागज पर स्थानान्तरित और स्थिर किया जाता है।
Laser Printer में सामान्यतः 600 DPI तथा कुछ उच्च Models में 1200 DPI तक Resolution होता है।
इंकजेट और लेजर प्रिन्टर में अन्तर
| इंकजेट प्रिन्टर | लेजर प्रिन्टर |
|---|---|
| कागज पर स्याही प्रवाहित करके Printout तैयार करता है। | Laser और Electrical Charge की सहायता से Printing करता है। |
| सामान्यतः Laser Printer की तुलना में अधिक किफायती होता है। | अपेक्षाकृत अधिक महँगा होता है। |
| स्याही Spray करने के लिए Nozzle का प्रयोग करता है। | Nozzle का प्रयोग नहीं करता। |
| Liquid Ink Cartridge का प्रयोग करता है। | Powder Toner का प्रयोग करता है। |
| Ink Cartridge को Refill किया जा सकता है। | Toner को बार-बार Refill करने की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है। |
3. प्लॉटर (Plotter)
Plotter एक Output Device है जिसका प्रयोग Drawing, Map, Graph तथा Engineering Figures बनाने के लिए किया जाता है।
Plotter के प्रयोग के लिए कम्प्यूटर में विशेष Software की आवश्यकता होती है। यह एक या अधिक Pens की सहायता से कागज पर आकृतियाँ बनाता है।
इससे रंगीन Transparency, Film तथा अन्य प्रकार के चित्र भी तैयार किए जा सकते हैं। Plotter द्वारा बनाई गई आकृतियाँ स्पष्ट और शुद्ध होती हैं।
4. स्पीकर्स या साउण्ड (Speakers or Sound)
Speakers कम्प्यूटर से प्राप्त ध्वनि सम्बन्धी Output को सुनने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
Sound Card की सहायता से Speakers द्वारा विभिन्न प्रकार की ध्वनियाँ सुनाई जा सकती हैं। Sound Card का प्रयोग Sound Input और Output दोनों कार्यों के लिए किया जा सकता है।
Speakers का प्रयोग विभिन्न प्रकार के Sound Effects उत्पन्न करने के लिए भी किया जाता है।
5. स्क्रीन इमेज प्रोजेक्टर (Screen Image Projector)
Screen Image Projector ऐसा Output Device है जिसका प्रयोग कम्प्यूटर के चित्रों और सूचनाओं को बड़ी Screen पर प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है।
इसका उपयोग अधिक लोगों वाले स्थानों पर सूचनाओं, परीक्षाओं तथा अध्ययन-सामग्री को प्रदर्शित करने के लिए किया जा सकता है।
शिक्षण में इसका प्रयोग विषय-वस्तु प्रस्तुत करने तथा Multimedia से सम्बन्धित चलचित्र और अन्य सामग्री दिखाने के लिए किया जाता है।
प्रमुख आउटपुट डिवाइसेज एक नजर में
| Output Device | मुख्य कार्य |
|---|---|
| Monitor / VDU | सूचना, Text और Graphics को Screen पर प्रदर्शित करना |
| Printer | सूचना को कागज पर Print करना |
| Plotter | Drawing, Map, Graph और Engineering Figure बनाना |
| Speaker | ध्वनि के रूप में Output प्रदान करना |
| Projector | कम्प्यूटर की सामग्री को बड़ी Screen पर प्रदर्शित करना |
- कम्प्यूटर द्वारा प्राप्त परिणामों को उपयोगकर्ता तक पहुँचाने वाली युक्तियाँ Output Devices कहलाती हैं।
- Monitor Text तथा Graphics को Screen पर प्रदर्शित करता है।
- रंग के आधार पर Monitor—Monochrome, Grayscale और Colour तथा Signal के आधार पर Digital और Analog प्रकार का होता है।
- Printer मुख्यतः Impact और Non-Impact दो प्रकार के होते हैं।
- Dot-Matrix, Daisywheel और Line Printer प्रमुख Impact Printers हैं।
- Inkjet और Laser प्रमुख Non-Impact Printers हैं।
- Inkjet Printer Liquid Ink और Nozzle का प्रयोग करता है, जबकि Laser Printer Laser Beam और Toner का प्रयोग करता है।
- Plotter का प्रयोग Drawing, Map, Graph और Engineering Figures के लिए किया जाता है।
- Speaker ध्वनि Output प्रदान करता है और Projector सामग्री को बड़ी Screen पर प्रदर्शित करता है।
कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर एवं IPO Cycle
कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software)
कम्प्यूटर तथा उससे जुड़ी विभिन्न Devices से कार्य कराने के लिए Software का प्रयोग किया जाता है। Software को न तो देखा जा सकता है और न ही छुआ जा सकता है।
कम्प्यूटर भाषा में तैयार किए गए व्यवस्थित निर्देशों के समूह को Program अथवा Software कहा जाता है। इन्हीं निर्देशों के अनुसार कम्प्यूटर विभिन्न कार्यों को पूरा करता है।
Software की सहायता से कम्प्यूटर को Boot किया जाता है, Data और Programs को Store तथा Retrieve किया जाता है और विभिन्न समस्याओं का समाधान किया जाता है। Software Development के लिए User-Friendly वातावरण उपलब्ध कराने में भी Software की भूमिका होती है।
कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के प्रकार
Computer Software मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं—
- सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)
- एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)
- प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर (Programming Software)
1. सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)
System Software कम्प्यूटर से स्थायी रूप से जुड़ा रहता है और कम्प्यूटर में विभिन्न कार्यों को सम्पन्न करने के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान करता है।
यह कम्प्यूटर के Hardware तथा अन्य Software के संचालन और समन्वय में सहायता करता है।
सिस्टम सॉफ्टवेयर के प्रमुख कार्य
- Software को चलाने के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करना।
- Printer, Disk और Tape जैसे Peripheral Devices के साथ समन्वय स्थापित करना।
- अन्य Software को Execute करने में सहायता करना।
- Memory, CPU आदि Hardware Resources की निगरानी करना।
सिस्टम सॉफ्टवेयर के उदाहरण
- Operating System — Windows, Linux, Unix, Android आदि।
- Programming Language Translator — Compiler, Assembler और Interpreter।
- Communication Software — Transfer Protocol, E-mail आदि।
- Performance Monitoring Software
2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)
Application Software को Software Package भी कहा जाता है। इसका प्रयोग उपयोगकर्ता द्वारा किसी विशेष कार्य को सम्पन्न करने के लिए किया जाता है।
Application Software Programs का ऐसा समूह होता है जो उपयोगकर्ता की आवश्यकता के अनुसार Data Processing में सहायता करता है। इसके प्रयोग से कार्य की गति, शुद्धता और उत्पादकता बढ़ती है।
जो Application Package सीखने और प्रयोग करने में सरल होता है, उसे User-Friendly Application Software कहा जाता है।
एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के प्रमुख उदाहरण
- Word Processors
- PowerPoint Presentation
- Spreadsheet
3. प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर (Programming Software)
Programming Software का प्रयोग Developer द्वारा अन्य Applications अथवा Software तैयार करने के लिए किया जाता है।
इसके अन्तर्गत मुख्य रूप से—
- Compiler,
- Assembler,
- Debugger
आदि सम्मिलित होते हैं।
कुछ Programming Software इन सुविधाओं को एक साथ उपलब्ध कराते हैं और विकास कार्य के लिए एकीकृत वातावरण प्रदान करते हैं। CNC Programming Applications तथा HSM Express Application इसके उदाहरण हैं।
तीनों प्रकार के सॉफ्टवेयर एक नजर में
| सॉफ्टवेयर का प्रकार | मुख्य कार्य | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| System Software | कम्प्यूटर और Hardware के संचालन के लिए वातावरण एवं नियंत्रण प्रदान करना | Operating System, Compiler, Assembler, Interpreter |
| Application Software | उपयोगकर्ता के विशेष कार्यों को पूरा करना | Word Processor, PowerPoint, Spreadsheet |
| Programming Software | नए Programs और Applications के निर्माण में सहायता करना | Compiler, Assembler, Debugger |
IPO Cycle क्या है?
कम्प्यूटर अनेक छोटी-छोटी और परस्पर सम्बन्धित Devices से मिलकर बना एक System है। इन Devices को उनके कार्य के आधार पर मुख्यतः Input, Processing और Output वर्गों में बाँटा जाता है।
किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए पहले कम्प्यूटर को Data अथवा Instructions दिए जाते हैं। इसके बाद Processor प्राप्त Data और Instructions पर आवश्यक Processing करता है और अन्त में प्राप्त परिणाम को Output Device के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को IPO Cycle — Input, Processing and Output Cycle कहा जाता है।
1. इनपुट (Input)
कम्प्यूटर किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक निर्देश और Data Input Device के माध्यम से प्राप्त करता है।
इस चरण में उपयोगकर्ता द्वारा दी गई जानकारी कम्प्यूटर में प्रवेश करती है, जिससे आगे की Processing सम्भव होती है।
2. प्रोसेसिंग (Processing)
Processing Device, Input Device से प्राप्त निर्देशों और Data के अनुसार कार्य करता है। इस चरण में प्राप्त Data पर आवश्यक गणना और अन्य क्रियाएँ की जाती हैं।
सरल शब्दों में, Input के रूप में प्राप्त Data को उपयोगी परिणाम में बदलने की प्रक्रिया Processing कहलाती है।
3. आउटपुट (Output)
Processing के बाद प्राप्त परिणाम को Output कहा जाता है। Output Device के माध्यम से इस परिणाम को उपयोगकर्ता के सामने प्रस्तुत किया जाता है।
IPO Cycle का क्रम
Input → Processing → Output
| चरण | कार्य |
|---|---|
| Input | Data और Instructions को कम्प्यूटर में देना |
| Processing | प्राप्त Data और Instructions पर आवश्यक प्रक्रिया करना |
| Output | Processing के बाद प्राप्त परिणाम प्रस्तुत करना |
कम्प्यूटर का खण्ड आरेख (Block Diagram)
Computer Block Diagram में मुख्यतः Input Unit, Storage Unit, CPU और Output Unit होते हैं।
Storage Unit में Primary Storage और Secondary Storage सम्मिलित हैं, जबकि CPU में Control Unit तथा Arithmetic and Logical Unit कार्य करती हैं।
Program और Data सबसे पहले Input Unit में प्रवेश करते हैं। आवश्यक Data Storage और CPU के बीच स्थानान्तरित होता है। Processing के बाद प्राप्त Information, Output Unit के माध्यम से Result के रूप में उपलब्ध होती है।
कम्प्यूटर सिस्टम की कार्यप्रणाली एक नजर में
| इकाई | मुख्य भूमिका |
|---|---|
| Input Unit | Program और Data प्राप्त करना |
| Storage Unit | Data और Instructions को संग्रहित करना |
| Control Unit | विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करना |
| Arithmetic and Logical Unit | गणना एवं तार्किक कार्य करना |
| Output Unit | प्राप्त Information या Result प्रस्तुत करना |
- व्यवस्थित निर्देशों के समूह को Program अथवा Software कहा जाता है।
- Software को न देखा जा सकता है और न छुआ जा सकता है।
- Computer Software मुख्यतः System Software, Application Software और Programming Software तीन प्रकार के होते हैं।
- System Software कम्प्यूटर और Hardware के संचालन तथा नियंत्रण में सहायता करता है।
- Application Software उपयोगकर्ता के विशेष कार्यों को सम्पन्न करने के लिए बनाया जाता है।
- Programming Software का प्रयोग नए Programs और Applications बनाने के लिए किया जाता है।
- IPO का पूरा नाम Input, Processing and Output है।
- IPO Cycle का क्रम Input → Processing → Output होता है।
- Computer Block Diagram में Input Unit, Storage Unit, CPU और Output Unit प्रमुख भाग हैं।
कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग एवं प्रोग्रामिंग भाषाएँ
कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग क्या है?
कम्प्यूटर से कोई कार्य कराने के लिए उपयोगकर्ता को उसे आवश्यक निर्देश देने पड़ते हैं। कम्प्यूटर को दिए जाने वाले इन निर्देशों के समूह को Program कहा जाता है।
कम्प्यूटर द्वारा किसी विशेष कार्य को सम्पन्न कराने के लिए उससे सम्बन्धित निर्देशों को व्यवस्थित रूप से तैयार करने की प्रक्रिया को Computer Programming कहा जाता है।
कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज
जिस विशेष भाषा का प्रयोग कम्प्यूटर को किसी कार्य से सम्बन्धित निर्देश देने के लिए किया जाता है, उसे Computer Programming Language कहा जाता है।
प्रोग्रामिंग भाषा निश्चित नियमों पर आधारित होती है। इसमें विशेष शब्दावली, चिन्ह, वाक्य-रचना, व्याकरणिक नियम तथा निर्देश होते हैं, जिनकी सहायता से कम्प्यूटर से कार्य कराया जाता है।
कम्प्यूटर केवल Machine Language को सीधे समझता है। इसलिए अन्य Programming Languages में दिए गए निर्देशों को Machine Language में परिवर्तित करना आवश्यक होता है।
प्रोग्रामिंग भाषाओं का वर्गीकरण
Programming Languages को निम्न वर्गों में बाँटा जाता है—
- निम्न स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (Low Level Programming Language)
- उच्च स्तरीय भाषा (High Level Language)
- चतुर्थ पीढ़ी की भाषा (Fourth Generation Language — 4GL)
- पंचम पीढ़ी की भाषा (Fifth Generation Language — 5GL)
1. निम्न स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (Low Level Programming Language)
निम्न स्तरीय भाषाएँ किसी विशेष कम्प्यूटर की आन्तरिक संरचना और कार्यप्रणाली के अनुसार बनाई जाती हैं। इसलिए इनका प्रयोग सामान्यतः कम्प्यूटर-विशेष पर निर्भर होता है।
Low Level Languages मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं—
- Machine Language
- Assembly Language
मशीनी भाषा (Machine Language)
Machine Language कम्प्यूटर की मूल भाषा है। इसे Binary Language भी कहा जाता है।
इसमें निर्देश 0 और 1 के रूप में लिखे जाते हैं। यही वह भाषा है जिसे कम्प्यूटर सीधे समझ सकता है।
मनुष्य द्वारा दिए गए निर्देशों को कम्प्यूटर के लिए Machine Language में बदलना पड़ता है। Machine Language में लिखे निर्देश कम्प्यूटर के आन्तरिक Hardware पर काफी सीमा तक निर्भर करते हैं।
इसी कारण एक प्रकार के कम्प्यूटर के लिए Machine Language में लिखा गया Program दूसरे प्रकार के कम्प्यूटर पर सामान्यतः प्रयोग नहीं किया जा सकता।
मशीनी भाषा की प्रमुख विशेषताएँ
- यह Binary अर्थात् 0 और 1 पर आधारित होती है।
- कम्प्यूटर इसे सीधे समझ सकता है।
- यह Hardware पर निर्भर होती है।
- इसे लिखना, समझना और Debug करना कठिन होता है।
असेम्बली भाषा (Assembly Language)
Machine Language की जटिलताओं तथा Program निर्माण में आने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए Assembly Language का विकास किया गया।
इसमें Machine Language के Numeric Operation Codes के स्थान पर Letter Symbols या Mnemonics का प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण के लिए—
| कार्य | Mnemonic Code |
|---|---|
| Addition | ADD |
| Load | LDA |
| Jump | JMP |
Assembly Language में Program लिखना Machine Language की तुलना में सरल होता है, लेकिन इसके लिए कम्प्यूटर Hardware की कार्यप्रणाली का ज्ञान आवश्यक होता है।
Assembler
Assembly Language में लिखे Program को Machine Code में बदलने का कार्य जिस Program द्वारा किया जाता है, उसे Assembler कहा जाता है।
2. उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (High Level Programming Language / 3GL)
High Level Languages कम्प्यूटर की आन्तरिक संरचना पर सीधे निर्भर न होकर Programmer की आवश्यकताओं के अनुसार बनाई जाती हैं। इसलिए इन्हें समझना और प्रयोग करना Low Level Languages की तुलना में सरल होता है।
इन भाषाओं में सामान्यतः अंग्रेजी शब्दों के समान निर्देशों का प्रयोग किया जाता है। इनकी सहायता से Games, Graphics, गणनाएँ, व्यावसायिक Processing और वैज्ञानिक कार्यों से सम्बन्धित Programs बनाए जा सकते हैं।
कम्प्यूटर केवल Machine Language को समझता है, इसलिए High Level Language में लिखे Program को Machine Code में बदलने के लिए Compiler या Interpreter की आवश्यकता होती है।
IBM ने सन् 1957 में FORTRAN नामक उच्च स्तरीय भाषा प्रस्तुत की। BASIC, JAVA, PASCAL, LOGO, C++, COBOL आदि भी High Level Languages के उदाहरण हैं।
BASIC
BASIC का पूरा नाम Beginners All Purpose Symbolic Instruction Code है।
JAVA
JAVA एक Programming Language है जिसका विकास C++ के बाद हुआ। इसमें C तथा C++ भाषाओं के गुणों का समावेश है और इसका प्रयोग Internet Programming में किया जाता है।
3. चतुर्थ पीढ़ी की भाषाएँ (Fourth Generation Languages — 4GL)
Fourth Generation Languages किसी निश्चित Computer Architecture पर आधारित नहीं होतीं। इन्हें सामान्य अंग्रेजी जैसी भाषा में लिखा जा सकता है और ये Third Generation Languages की तुलना में अधिक उपयोगी तथा अनुकूल होती हैं।
इनमें अपेक्षाकृत कम Instructions की आवश्यकता होती है। Python, Ruby और Perl जैसी भाषाओं का प्रयोग भी सामान्य प्रयोजन के कार्यों में किया जाता है।
4GL की प्रमुख विशेषताएँ
1. सूक्ष्म प्रकृति
4GL में कम Instructions की आवश्यकता होती है। लगभग 100 पंक्तियों वाले Program को 5 से 10 पंक्तियों में लिखा जा सकता है। इससे Program छोटा होता है और कम स्थान लेता है।
2. गैर-प्रक्रियात्मक
इन भाषाओं में लिखे Programs में कम Procedural Statements की आवश्यकता होती है, जिससे Program अपेक्षाकृत सरल हो जाता है।
3. स्वतंत्र संरचना
Fourth Generation Languages के Programs स्वतंत्र रूप से लिखे जा सकते हैं और अन्य High Level Languages की तरह उन्हें केवल निश्चित Pattern में लिखने की आवश्यकता कम होती है।
4. पंचम पीढ़ी की भाषाएँ (Fifth Generation Languages — 5GL)
Fifth Generation Languages का विकास विभिन्न समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से किया गया है। इनमें Program तैयार करते समय Constraints का प्रयोग किया जाता है।
इन भाषाओं में Programmer मुख्यतः समस्या की स्थिति बताता है तथा Problem को हल करने की प्रक्रिया और Algorithm से सम्बन्धित कार्य कम्प्यूटर आधारित प्रणाली द्वारा किया जाता है।
Prolog, OPS5 और Mercury Fifth Generation Languages के उदाहरण हैं। इनका प्रयोग Artificial Intelligence Research से सम्बन्धित कार्यों में किया जाता है।
Programming Languages एक नजर में
| भाषा | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| Machine Language | 0 और 1 पर आधारित; कम्प्यूटर द्वारा सीधे समझी जाती है |
| Assembly Language | Mnemonic Codes का प्रयोग; Assembler आवश्यक |
| High Level Language / 3GL | Programmer के लिए सरल; Compiler या Interpreter आवश्यक |
| Fourth Generation Language | कम Instructions और अपेक्षाकृत सरल Programming |
| Fifth Generation Language | Problem Solving तथा Artificial Intelligence से सम्बन्धित प्रयोग |
Machine, Assembly एवं High Level Language में अन्तर
| आधार | Machine Language | Assembly Language | High Level Language |
|---|---|---|---|
| समझने में सरलता | लिखना, समझना और Debug करना कठिन | Machine Language की तुलना में सरल | लिखना, समझना और Debug करना सरल |
| प्रयोग | Machine Codes का ज्ञान आवश्यक | Operations से सम्बन्धित Mnemonics याद रखने होते हैं | Syntax याद रखना आवश्यक होता है |
| त्रुटि की सम्भावना | अधिक | Machine Language की तुलना में कम | अपेक्षाकृत कम |
| Machine का ज्ञान | Machine का पूर्ण ज्ञान आवश्यक | Machine का ज्ञान आवश्यक | बहुत अधिक Machine Knowledge आवश्यक नहीं |
| Portability | Portable नहीं | Portable नहीं | Portable होती है |
| Code की लम्बाई | बहुत अधिक | Machine Language से कम | अपेक्षाकृत छोटी |
| Language Translator | आवश्यक नहीं | Assembler आवश्यक | Compiler या Interpreter आवश्यक |
| Code Execution | बहुत तेज | Machine Language की तुलना में धीमा | अन्य की तुलना में धीमा |
तृतीय एवं चतुर्थ पीढ़ी की भाषाओं में अन्तर
| आधार | तृतीय पीढ़ी की भाषा | चतुर्थ पीढ़ी की भाषा |
|---|---|---|
| प्रयोग | मुख्यतः व्यावसायिक Programmer प्रयोग करते हैं। | व्यावसायिक Programmer के साथ कम कम्प्यूटर ज्ञान रखने वाले भी प्रयोग कर सकते हैं। |
| Debugging | त्रुटियाँ दूर करना अपेक्षाकृत कठिन होता है। | त्रुटियाँ दूर करना अपेक्षाकृत सरल होता है। |
| अधिगम | 4GL की तुलना में सीखना कठिन है। | अपेक्षाकृत आसानी से सीखी जा सकती है। |
| Instructions | अधिक Instructions की आवश्यकता होती है। | कम Instructions की आवश्यकता होती है। |
| कार्य निर्धारण | कार्य पूरा करने के लिए विस्तृत Specification आवश्यक होती है। | कार्य का उद्देश्य बताने पर System आगे की प्रक्रिया व्यवस्थित करता है। |
| Understanding और Maintenance | Program पढ़ना, समझना और Maintain करना कठिन होता है। | Code सरल होने से समझना और Maintain करना आसान होता है। |
| उद्देश्य | इनका प्रयोग Batch Operations के लिए किया जाता है। | इनका विकास Online Applications के लिए किया गया है। |
- कम्प्यूटर को किसी कार्य के लिए दिए गए निर्देशों के समूह को Program कहा जाता है।
- कम्प्यूटर केवल Machine Language को सीधे समझता है।
- Machine Language Binary 0 और 1 पर आधारित होती है।
- Assembly Language में Numeric Codes के स्थान पर Mnemonic Codes का प्रयोग किया जाता है और इसे Machine Code में बदलने के लिए Assembler आवश्यक होता है।
- High Level Language अपेक्षाकृत सरल होती है और इसे Machine Code में बदलने के लिए Compiler या Interpreter का प्रयोग किया जाता है।
- FORTRAN, BASIC, JAVA, PASCAL, LOGO, C++ और COBOL High Level Languages के उदाहरण हैं।
- Fourth Generation Languages में कम Instructions की आवश्यकता होती है और Programming अपेक्षाकृत सरल होती है।
- Fifth Generation Languages का सम्बन्ध Problem Solving और Artificial Intelligence आधारित कार्यों से है।
- Prolog, OPS5 और Mercury Fifth Generation Languages के उदाहरण हैं।