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Home Study Material Semester 1 कम्प्यूटर शिक्षा कम्प्यूटर का परिचय
Chapter 1 • कम्प्यूटर शिक्षा

कम्प्यूटर का परिचय

UP DELED Semester 1 के कम्प्यूटर शिक्षा विषय के इस अध्याय में कम्प्यूटर के विकास एवं इतिहास, प्रमुख गणना यंत्रों, कम्प्यूटर इतिहास के कालक्रम, कम्प्यूटर की पाँच पीढ़ियों, कम्प्यूटर के अर्थ एवं विशेषताओं, उपयोग, लाभ-हानियों तथा आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण, आकार एवं तीव्रता के आधार पर कम्प्यूटर के विभिन्न प्रकारों का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

8
Topics
15
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10+
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Notes
Topic 1 कम्प्यूटर का विकास एवं प्रारम्भिक इतिहास

कम्प्यूटर का विकास एवं प्रारम्भिक इतिहास

कम्प्यूटर के विकास की शुरुआत

कम्प्यूटर का इतिहास बहुत पुराना है। प्रारम्भिक समय में मनुष्य गणना करने के लिए अपनी उँगलियों का प्रयोग करता था। धीरे-धीरे गणना की आवश्यकता बढ़ी और मनुष्य ने विभिन्न यांत्रिक तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विकास किया।

कम्प्यूटर के क्रमिक विकास में मुख्य रूप से निम्न उपकरणों और मशीनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा—

  1. एबेकस (Abacus)
  2. यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र (Mechanical Digital Calculator)
  3. पंचकार्ड से नियंत्रित लूम (Loom)
  4. डिफरेंस इंजन (Difference Engine)
  5. ऑटोमैटिक सीक्वेंस कंट्रोल्ड कैलकुलेटर (Automatic Sequence Controlled Calculator)

1. एबेकस (Abacus)

एबेकस कम्प्यूटर के इतिहास के सबसे प्रारम्भिक गणना यंत्रों में से एक है। इसका इतिहास लगभग 3000 वर्ष पुराना माना गया है। चीन में विकसित यह यांत्रिक गणना यंत्र आज भी चीन, जापान सहित अनेक एशियाई देशों में गणना के लिए प्रयोग किया जाता है।

एबेकस (Abacus) प्राचीन गणना यंत्र
एबेकस (Abacus)

एबेकस में तारों का एक फ्रेम होता है, जिन पर बीड या गोलियाँ पिरोई जाती हैं। प्रारम्भ में व्यापारी इसका प्रयोग गणना के लिए करते थे। इसकी सहायता से अंकों को जोड़ना, घटाना, गुणा करना और भाग देना सम्भव था।

2. ब्लेज पास्कल और पास्कलाइन

17वीं शताब्दी में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल (Blaise Pascal) ने एक यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र विकसित किया। इस मशीन को Adding Machine कहा जाता था और बाद में यह Pascaline के नाम से प्रसिद्ध हुई।

ब्लेज पास्कल द्वारा विकसित पास्कलाइन यांत्रिक गणना मशीन
पास्कलाइन (Pascaline)

यह मशीन मुख्यतः जोड़ और घटाव कर सकती थी। इसमें दाँतेदार पहिए लगे होते थे, जिन पर 0 से 9 तक के अंक अंकित रहते थे। प्रत्येक पहिया इकाई, दहाई, सैकड़ा आदि का स्थान दर्शाता था। एक चक्र पूरा होने पर अगला पहिया घूमता था।

3. जैक्वार्ड लूम (Jacquard’s Loom)

सन 1801 में फ्रांसीसी बुनकर जोसेफ जैक्वार्ड (Joseph Jacquard) ने कपड़ा बुनने के लिए एक विशेष लूम का आविष्कार किया। यह लूम कपड़े की डिजाइन या पैटर्न को नियंत्रित करने के लिए पंचकार्ड का प्रयोग करता था।

जोसेफ जैक्वार्ड का पंचकार्ड नियंत्रित जैक्वार्ड लूम
जैक्वार्ड लूम (Jacquard Loom)

पंचकार्ड पर छेदों की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति के आधार पर लूम के धागों को नियंत्रित किया जाता था। इस प्रकार पंचकार्ड के माध्यम से मशीन को निर्देश देने की अवधारणा आगे के कम्प्यूटर विकास में महत्वपूर्ण सिद्ध हुई।

4. चार्ल्स बैबेज और डिफरेंस इंजन

19वीं शताब्दी के प्रारम्भिक समय को कम्प्यूटर के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। अंग्रेज गणितज्ञ चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) ने गणना में होने वाली त्रुटियों को कम करने के उद्देश्य से यांत्रिक गणना मशीन के विकास का प्रयास किया।

सन 1822 में उन्होंने एक मशीन का निर्माण किया, जिसका नाम डिफरेंस इंजन (Difference Engine) रखा गया। इस मशीन में गियर और शाफ्ट लगे थे तथा यह भाप से चलती थी।

चार्ल्स बैबेज द्वारा विकसित डिफरेंस इंजन
डिफरेंस इंजन (Difference Engine)

5. एनालिटिकल इंजन और कम्प्यूटर के जनक

सन 1833 में चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंस इंजन का विकसित रूप एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) तैयार किया। यह अधिक शक्तिशाली मशीन थी।

एनालिटिकल इंजन को आधुनिक कम्प्यूटर के विकास का आधार माना गया। इसी महत्वपूर्ण योगदान के कारण चार्ल्स बैबेज को कम्प्यूटर का जनक (Father of Computer) कहा जाता है।

6. डॉ. हॉवर्ड आइकेन का मार्क-I

सन 1940 तक विद्युत-यांत्रिक कम्प्यूटिंग का विकास काफी आगे बढ़ चुका था। IBM के चार शीर्ष इंजीनियरों और डॉ. हॉवर्ड आइकेन ने सन 1944 में एक मशीन विकसित की।

इसका आधिकारिक नाम Automatic Sequence Controlled Calculator था। इसे विश्व का पहला विद्युत-यांत्रिक कम्प्यूटर बताया गया है।

डॉ. हॉवर्ड आइकेन का मार्क-I विद्युत यांत्रिक कम्प्यूटर
मार्क-I (Mark-I)

इस मशीन को फरवरी 1944 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय भेजा गया और 7 अगस्त 1944 को विश्वविद्यालय को प्राप्त हुआ। वहीं इसे Mark-I नाम दिया गया। यह लगभग 6 सेकण्ड में एक गुणा तथा 12 सेकण्ड में एक भाग कर सकता था।

7. ए.बी.सी. — एटनासॉफ-बेरी कम्प्यूटर

सन 1945 में एटनासॉफ (Atanasoff) तथा क्लिफोर्ड बेरी (Clifford Berry) ने एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन विकसित की, जिसे A.B.C. नाम दिया गया।

A.B.C. का पूरा नाम Atanasoff Berry Computer है। इसे पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कम्प्यूटर बताया गया है।

प्रमुख विकास एक नजर में

यंत्र / मशीन व्यक्ति / आविष्कारक मुख्य विशेषता
एबेकस प्राचीन गणना यंत्र जोड़, घटाव, गुणा और भाग
पास्कलाइन ब्लेज पास्कल यांत्रिक जोड़ एवं घटाव मशीन
जैक्वार्ड लूम जोसेफ जैक्वार्ड पंचकार्ड द्वारा नियंत्रण
डिफरेंस इंजन चार्ल्स बैबेज यांत्रिक गणना मशीन
एनालिटिकल इंजन चार्ल्स बैबेज आधुनिक कम्प्यूटर के विकास का आधार
मार्क-I हॉवर्ड आइकेन एवं IBM इंजीनियर विद्युत-यांत्रिक कम्प्यूटर
A.B.C. एटनासॉफ एवं क्लिफोर्ड बेरी इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कम्प्यूटर
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • कम्प्यूटर के विकास की शुरुआत मानव द्वारा उँगलियों से गणना करने से मानी जाती है।
  • एबेकस प्रारम्भिक गणना यंत्र था, जिससे जोड़, घटाव, गुणा और भाग किया जाता था।
  • ब्लेज पास्कल ने यांत्रिक गणना मशीन पास्कलाइन विकसित की।
  • जोसेफ जैक्वार्ड ने 1801 में पंचकार्ड नियंत्रित लूम विकसित किया।
  • चार्ल्स बैबेज ने 1822 में डिफरेंस इंजन और 1833 में एनालिटिकल इंजन विकसित किया।
  • चार्ल्स बैबेज को कम्प्यूटर का जनक कहा जाता है।
  • मार्क-I को 1944 में विकसित किया गया और इसका आधिकारिक नाम Automatic Sequence Controlled Calculator था।
  • A.B.C. का पूरा नाम Atanasoff Berry Computer है।
Topic 2 कम्प्यूटर इतिहास का कालक्रम

कम्प्यूटर इतिहास का कालक्रम

कम्प्यूटर इतिहास का कालक्रम

कम्प्यूटर का वर्तमान स्वरूप हजारों वर्षों में हुए निरन्तर विकास का परिणाम है। प्रारम्भ में मनुष्य अपनी उँगलियों और साधारण वस्तुओं की सहायता से गणना करता था। बाद में एबेकस, यांत्रिक गणना मशीन, पंचकार्ड, इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर, माइक्रोप्रोसेसर और पर्सनल कम्प्यूटर जैसे अनेक विकास हुए।

कम्प्यूटर के इतिहास की प्रमुख घटनाओं को कालक्रम में निम्न प्रकार समझा जा सकता है—

प्राचीन काल से 19वीं शताब्दी तक

समय / वर्ष प्रमुख घटना
प्राचीन समय लोग गणना के लिए उँगलियों का प्रयोग करते थे। बाद में कंकड़ एवं मार्बल अर्थात् पत्थरों का प्रयोग किया गया।
3000 ईसा पूर्व प्रथम एबेकस का आविष्कार हुआ तथा इसका प्रयोग बेबीलोनिया के लोगों द्वारा किया गया।
1800 ईसा पूर्व संख्यात्मक समस्याओं को सुलझाने के लिए बेबीलोनिया के गणितज्ञों द्वारा एल्गोरिदम (Algorithms) का विकास किया गया।
500 ईसा पूर्व मिस्र के लोगों ने मनका एवं एबेकस (Abacus) का आविष्कार किया।
200 ई. चीन और जापान में कम्प्यूटिंग ट्रे का प्रयोग प्रारम्भ हुआ। जापान में शोराबोन कम्प्यूटिंग ट्रे का आविष्कार किया गया।
1000 ई. पोप सिलवेस्टर II ने हिन्दू-अरबी अंकों के ज्ञान का प्रयोग करते हुए एक नए एबेकस के निर्माण के लिए यूरोप को तैयार किया।
1617 ई. स्कॉटलैण्ड के आविष्कारक जॉन नेपियर ने हाथी-दाँत की संख्यात्मक छड़ों द्वारा गुणा करने की विधि प्रस्तुत की। ये छड़ें बाद में नेपियर बोन के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
1642 ई. ब्लेज पास्कल ने 19 वर्ष की आयु में पहली यांत्रिक गणना मशीन पास्कलाइन का निर्माण किया।
1673 ई. गॉटफ्रीड लाइबनिज ने एक Mechanical Calculating Machine बनाई, जो जोड़, घटाव, गुणा और भाग कर सकती थी।
1805 ई. जोसेफ मेरी जैकार्ड ने अपने यांत्रिक लूम की कुछ प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए पंचकार्ड का आविष्कार किया।
1822 ई. चार्ल्स बैबेज ने लॉगरिदम की गणना के लिए डिफरेंशिएट इंजन का प्रारूप तैयार किया।
1833 ई. चार्ल्स बैबेज ने सामान्य प्रयोजन के लिए एनालिटिकल मशीन का निर्माण किया, जिसे सामान्य कम्प्यूटर कहा गया।
1855 ई. बैबेज पर आधारित पहला व्यावहारिक यांत्रिक कम्प्यूटर जार्ज एवं एडवर्ड स्क्यूट्स द्वारा बनाया गया।

20वीं शताब्दी में कम्प्यूटर का विकास

वर्ष प्रमुख घटना
1924 Computing-Tabulating-Recording Company को नया नाम International Business Machines (IBM) दिया गया।
1931 कोनराड जूस द्वारा Z1 Calculator का निर्माण किया गया।
1937 जॉर्ज स्टीबिट्ज द्वारा टेलीफोन प्रयोगशाला के लिए प्रथम बाइनरी कैलकुलेटर बनाया गया।
1939 जॉन वी. एटनासॉफ और क्लिफोर्ड बेरी ने A.B.C. (Atanasoff–Berry Computer) बनाया।
1941 कोनराड जूस ने स्वचालित नियंत्रण वाला कैलकुलेटर बनाया, जिसे Z3 कहा गया।
1946 एकर्ट और मौचली बिनेक ने पहला वास्तविक कम्प्यूटर बनाना प्रारम्भ किया, जो तीन वर्ष में पूर्ण हुआ।
1947 Computing Machinery (ACM) के लिए नॉट फॉर प्रॉफिट एसोसिएशन की स्थापना की गई।
1948 मॉरिस वी. विलक्स ने इलेक्ट्रॉनिक डिले स्टोरेज ऑटोमैटिक कैलकुलेटर विकसित किया।
1951 मॉरिस वी. विलक्स द्वारा माइक्रोप्रोग्रामिंग की अवधारणा विकसित की गई।
1951 प्रथम वास्तविक कम्प्यूटर ‘वरविन्द’ को एम.आई.टी. द्वारा चलाया गया।
1952 IBM ने पहला इलेक्ट्रॉनिक Stored Program Computer विकसित किया, जिसे 701 कहा गया।
1954 जॉन बैकस और उनकी टीम ने IBM कम्प्यूटर के लिए FORTRAN प्रोग्राम का निर्माण किया।
1960 पहले रिमूवेबल डिस्क की खोज की गई।
1969 निकोलेस वर्थ ने पहला PASCAL Compiler Software बनाया।
1971 मार्शियन ई. हॉफ और उनकी टीम ने पहला माइक्रोप्रोसेसर Intel 4004 विकसित किया।
1973 R2E द्वारा निर्मित पहला माइक्रो कम्प्यूटर MICRAL फ्रांस के बाजार में उतारा गया।
1975 The Cray-1 सुपर कम्प्यूटर ऑनलाइन आया।
1975 बिल गेट्स एवं पॉल एलन ने बेसिक कम्प्यूटर लैंग्वेज का संस्करण विकसित किया।
1980 बेल लेबोरेटरीज ने Unix Operating System को Microsoft के लिए लाइसेंस दिया। इसके बाद जेनिक्स नामक Unix का संस्करण प्रस्तुत किया गया।
1981 IBM ने Personal Computer को बाजार में उतारा।
1988 मॉरिस कम्प्यूटर वॉर्म खोजा गया, जो इंटरनेट के माध्यम से अन्य कम्प्यूटरों में फैलने, उन्हें बन्द करने तथा खराब करने में सक्षम था।
1990 Motorola 68040 Microprocessor का आगमन हुआ।
1990 Microsoft Windows 3.0 प्रस्तुत किया गया।
1993 Note 3.0 को Lotus द्वारा घोषित किया गया।
1993 IBM द्वारा Power PC Chip आधारित Workstation प्रस्तुत किए गए।
1994 486DX4 नामक Clock-Tripling Microprocessor Intel द्वारा प्रस्तुत किया गया।

कालक्रम से स्पष्ट विकास

इस कालक्रम से स्पष्ट होता है कि कम्प्यूटर का विकास किसी एक आविष्कार का परिणाम नहीं था। साधारण गणना पद्धतियों से प्रारम्भ होकर पंचकार्ड, यांत्रिक मशीन, इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर, प्रोग्रामिंग भाषाएँ, माइक्रोप्रोसेसर और पर्सनल कम्प्यूटर तक अनेक चरणों में इसका विकास हुआ।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • प्राचीन समय में गणना उँगलियों, कंकड़ों तथा पत्थरों से की जाती थी।
  • 3000 ईसा पूर्व प्रथम एबेकस का प्रयोग बेबीलोनिया में किया गया।
  • 1642 में ब्लेज पास्कल ने पास्कलाइन का निर्माण किया।
  • 1805 में जोसेफ मेरी जैकार्ड ने लूम के नियंत्रण के लिए पंचकार्ड का प्रयोग किया।
  • 1822 में चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंशिएट इंजन और 1833 में एनालिटिकल मशीन का निर्माण किया।
  • 1924 में Computing-Tabulating-Recording Company का नाम IBM रखा गया।
  • 1971 में Intel 4004 माइक्रोप्रोसेसर विकसित हुआ।
  • 1981 में IBM ने पर्सनल कम्प्यूटर बाजार में उतारा।
  • कम्प्यूटर का इतिहास निरन्तर यांत्रिक से इलेक्ट्रॉनिक और माइक्रोप्रोसेसर आधारित प्रणालियों की ओर विकास को दर्शाता है।
Topic 3 कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ

कम्प्यूटर के विकास की प्रक्रिया सन 1946 के बाद निरन्तर आगे बढ़ती रही। जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और तकनीक में सुधार हुआ, कम्प्यूटर के आकार, गति, विश्वसनीयता, स्मृति और कार्यक्षमता में भी परिवर्तन होता गया।

मुख्य इलेक्ट्रॉनिक तकनीक के आधार पर कम्प्यूटर के विकास को पाँच पीढ़ियों में बाँटा गया है—

प्रथम से पंचम पीढ़ी तक कम्प्यूटर की पाँच पीढ़ियाँ
कम्प्यूटर की पाँच पीढ़ियाँ
  • प्रथम पीढ़ी — 1946 से 1959
  • द्वितीय पीढ़ी — 1959 से 1965
  • तृतीय पीढ़ी — 1965 से 1971
  • चतुर्थ पीढ़ी — 1971 से 1980
  • पंचम पीढ़ी — 1980 से वर्तमान तक

1. प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर (1946–1959)

सन 1946 से 1959 के बीच विकसित कम्प्यूटरों को प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर कहा जाता है। इनमें मुख्य इलेक्ट्रॉनिक युक्ति के रूप में वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था।

इन कम्प्यूटरों में बाइनरी संख्या पद्धति का प्रयोग होता था। बाइनरी प्रणाली में 1 को ON और 0 को OFF के रूप में प्रयोग किया जाता था।

ENIAC

सन 1946 में प्रथम पीढ़ी का प्रमुख कम्प्यूटर ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Calculator) बनाया गया।

ENIAC का वजन लगभग 30 टन था। इसमें लगभग—

  • 18,000 वैक्यूम ट्यूब,
  • 70,000 प्रतिरोधक (Resistors),
  • 10,000 संधारित्र (Capacitors),
  • 6,000 स्विच

का प्रयोग किया गया था। यह एक सेकण्ड में लगभग 5,000 जोड़ अथवा 350 गुणन क्रियाएँ कर सकता था।

इन कम्प्यूटरों में निर्देश देने के लिए वायरिंग और प्रोग्राम बोर्ड का प्रयोग किया जाता था। प्रत्येक बार प्रोग्राम बदलने पर नए सिरे से कनेक्शन करना पड़ता था।

प्रथम पीढ़ी के अन्य विकास

सन 1951 में एक कम्प्यूटर का निर्माण किया गया जिसमें कैथोड ट्यूब पर मेमोरी संचित होती थी। सन 1952 में IBM मॉडल-701 के निर्माण के बाद कम्प्यूटर के बड़े पैमाने पर निर्माण और विकास की दिशा में प्रगति हुई।

प्रथम पीढ़ी के लाभ
  1. वैक्यूम ट्यूब उस समय उपलब्ध प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक घटक थी।
  2. वैक्यूम ट्यूब तकनीक ने डिजिटल कम्प्यूटरों के विकास को सम्भव बनाया।
  3. ये अपने समय के अत्यन्त तेज गणना उपकरण थे तथा मिली सेकण्ड में गणना कर सकते थे।
प्रथम पीढ़ी की हानियाँ
  1. आकार में बहुत बड़े और भारी थे।
  2. विश्वसनीयता कम थी।
  3. वैक्यूम ट्यूब बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न करती थीं और बार-बार जल जाती थीं।
  4. वातानुकूलन की आवश्यकता होती थी।
  5. एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना कठिन था।
  6. वाणिज्यिक उत्पादन कठिन और महँगा था।
  7. इनका व्यावसायिक उपयोग सीमित था।

2. द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर (1959–1965)

द्वितीय पीढ़ी में वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांजिस्टर का प्रयोग होने लगा। ट्रांजिस्टर अपेक्षाकृत सस्ता, हल्का और कम गर्मी उत्पन्न करने वाला था।

इस पीढ़ी में मेमोरी के लिए मैग्नेटिक कोर का प्रयोग होने लगा। कम्प्यूटर का आकार छोटा हुआ, विश्वसनीयता बढ़ी और जटिल अंकगणितीय तथा तार्किक समस्याओं को हल करना सम्भव हुआ।

इस पीढ़ी के उदाहरणों में IBM 1401 तथा Honey Well 800 आदि सम्मिलित हैं।

द्वितीय पीढ़ी के लाभ
  1. प्रथम पीढ़ी की तुलना में आकार छोटा था।
  2. अधिक विश्वसनीय थे।
  3. कम गर्मी उत्पन्न करते थे।
  4. गणना की गति मिली सेकण्ड से माइक्रो सेकण्ड तक पहुँच गई।
  5. हार्डवेयर विफलताओं की सम्भावना कम हो गई।
  6. एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना अपेक्षाकृत सरल था।
  7. व्यापक व्यावसायिक उपयोग के योग्य बने।
द्वितीय पीढ़ी की हानियाँ
  1. वातानुकूलन की आवश्यकता बनी रही।
  2. अधिक रख-रखाव की आवश्यकता पड़ती थी।
  3. अलग-अलग कार्य इकाइयाँ भिन्न-भिन्न होती थीं।
  4. वाणिज्यिक उत्पादन अभी भी कठिन और महँगा था।

3. तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटर (1965–1971)

तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटरों में ट्रांजिस्टर के स्थान पर इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit — IC) का प्रयोग किया गया।

इन कम्प्यूटरों का आकार छोटा, गति अधिक और विश्वसनीयता बेहतर थी। इनमें हाई लेवल लैंग्वेज जैसे FORTRAN आदि का प्रयोग भी होने लगा।

इस पीढ़ी के प्रमुख कम्प्यूटरों में IBM-360, IBM-370, ICL-2903, CPC-1700 तथा POP-11/45 आदि बताए गए हैं।

तृतीय पीढ़ी के लाभ
  1. पिछली पीढ़ियों की तुलना में आकार छोटा था।
  2. पहली दो पीढ़ियों से अधिक विश्वसनीय थे।
  3. कम गर्मी उत्पन्न करते थे।
  4. रख-रखाव की लागत कम हुई।
  5. कम विद्युत शक्ति की आवश्यकता होती थी।
तृतीय पीढ़ी की हानियाँ
  1. कुछ परिस्थितियों में वातानुकूलन की आवश्यकता होती थी।
  2. IC Chips के निर्माण के लिए अत्यधिक परिष्कृत तकनीक आवश्यक थी।

4. चतुर्थ पीढ़ी के कम्प्यूटर (1971–1980)

चतुर्थ पीढ़ी का काल सन 1971 से 1980 तक माना गया है। इस पीढ़ी में चिप तकनीक का प्रयोग बढ़ा और माइक्रोप्रोसेसर तथा पर्सनल कम्प्यूटर (PC) अस्तित्व में आए।

इस काल में Distributed Processing और Office Automation का भी विकास हुआ।

इस पीढ़ी के प्रमुख कम्प्यूटरों में Commodor-PET, DCM-TANDY, ZX SPECTRUM तथा IBM-PC आदि सम्मिलित हैं।

चतुर्थ पीढ़ी के लाभ
  1. उच्च घटक घनत्व के कारण कम्प्यूटर आकार में छोटे हुए।
  2. अत्यधिक विश्वसनीय बने।
  3. ऊष्मा का उत्सर्जन बहुत कम हुआ।
  4. प्रायः वातानुकूलन की आवश्यकता नहीं होती थी।
  5. कम रख-रखाव के साथ लागत भी कम हुई।
  6. कम्प्यूटर आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने योग्य बने।
चतुर्थ पीढ़ी की हानियाँ
  1. चिप निर्माण के लिए अत्यधिक परिष्कृत तकनीक की आवश्यकता थी।
  2. जटिल सॉफ्टवेयर का प्रयोग होने लगा।

5. पंचम पीढ़ी के कम्प्यूटर (1980 से वर्तमान तक)

पंचम पीढ़ी का आरम्भ सन 1980 से माना गया है। इस पीढ़ी का मुख्य उद्देश्य कम्प्यूटर को अधिक बुद्धिमान और सक्षम बनाना है।

इस पीढ़ी में कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence) के प्रयोग द्वारा कम्प्यूटरों को सोचने और समझने जैसी क्षमताएँ प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे अनेक कार्य कम समय में स्वयं कर सकें।

पंचम पीढ़ी के लाभ
  1. यह बहुमुखी उपकरण है तथा अनेक प्रकार के कार्य कर सकता है।
  2. अन्य चार पीढ़ियों की तुलना में कम लागत में विकसित किया गया।
  3. अन्य पीढ़ियों की अपेक्षा इसकी गति अधिक है।
  4. इस पीढ़ी में कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence) का प्रयोग होता है।

कम्प्यूटर की पाँच पीढ़ियों की तुलना

पीढ़ी काल मुख्य तकनीक मुख्य विशेषता
प्रथम 1946–1959 वैक्यूम ट्यूब मशीनी एवं असेम्बली भाषा
द्वितीय 1959–1965 ट्रांजिस्टर, फेराइड कोर उच्च स्तरीय भाषा एवं बैच प्रोसेसिंग
तृतीय 1965–1971 Integrated Circuit, SSI एवं MSI Multiprogramming, Multitasking और Operating System
चतुर्थ 1971–1980 LSI, VLSI तथा Semiconductor Memory Microprocessor और Advanced Operating System
पंचम 1980 से वर्तमान ULSI तथा Artificial Intelligence आधारित तकनीक ज्ञान आधारित प्रणाली, कृत्रिम बुद्धि, Computer Vision और Voice Recognition

महत्वपूर्ण संक्षिप्त रूप

  • SSI — Small Scale Integrated Circuits
  • MSI — Medium Scale Integrated Circuits
  • VLSI — Very Long Scale Integrated Circuits
  • ULSI — Ultra Long Scale Integrated Circuits
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • कम्प्यूटर के विकास को मुख्य इलेक्ट्रॉनिक तकनीक के आधार पर पाँच पीढ़ियों में बाँटा गया है।
  • प्रथम पीढ़ी में वैक्यूम ट्यूब और द्वितीय पीढ़ी में ट्रांजिस्टर का प्रयोग हुआ।
  • तृतीय पीढ़ी में Integrated Circuit (IC) का प्रयोग प्रारम्भ हुआ।
  • चतुर्थ पीढ़ी में माइक्रोप्रोसेसर और Personal Computer का विकास हुआ।
  • पंचम पीढ़ी का प्रमुख आधार Artificial Intelligence है।
  • पीढ़ियों के विकास के साथ कम्प्यूटर का आकार घटा, गति और विश्वसनीयता बढ़ी तथा लागत और ऊर्जा-खपत कम होती गई।
Topic 4 कम्प्यूटर का अर्थ, परिभाषाएँ एवं विशेषताएँ

कम्प्यूटर का अर्थ, परिभाषाएँ एवं विशेषताएँ

कम्प्यूटर का अर्थ

कम्प्यूटर शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के Compute शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है—गणना करना। प्रारम्भ में कम्प्यूटर का प्रयोग मुख्यतः गणना करने के लिए किया जाता था, लेकिन वर्तमान समय में इसका उपयोग सूचना-संसाधन, संग्रहण, विश्लेषण और अनेक प्रकार के कार्यों में किया जाता है।

कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य करता है। यह प्राप्त तथ्यों अथवा आँकड़ों को संसाधित करके उन्हें उपयोगी सूचनाओं में परिवर्तित करता है।

सरल शब्दों में, कम्प्यूटर ऐसी इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है जो Input के रूप में सूचना या आँकड़े ग्रहण करती है, उन पर दिए गए निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया करती है और अपेक्षित परिणाम Output के रूप में प्रदान करती है।

कम्प्यूटर की परिभाषाएँ

प्रोफेसर मल्टीमीडिया एनसाइक्लोपीडिया के अनुसार— कम्प्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो सामान्य गणना करता है।

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार— कम्प्यूटर एक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक यंत्र है, जो आँकड़ों पर प्रक्रिया करता है तथा अंकीय गणनाओं के साथ-साथ तुलना एवं तार्किक निर्णय भी कर सकता है। दिए गए निर्देशों के आधार पर यह सूचना, चित्र, चलचित्र तथा एनिमेशन आदि प्रस्तुत कर सकता है।

कम्प्यूटर की प्रमुख विशेषताएँ

1. तीव्र गति (High Speed)

कम्प्यूटर की कार्य करने की गति अत्यन्त तेज होती है। यह बड़ी और जटिल गणनाओं को बहुत कम समय में पूरा कर सकता है। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

2. शुद्धता (Accuracy)

यदि कम्प्यूटर सही प्रकार से कार्य कर रहा हो और उसे सही निर्देश दिए गए हों, तो उसके द्वारा प्राप्त परिणाम अत्यन्त शुद्ध होते हैं। कम्प्यूटर स्वयं गणना में गलती नहीं करता; परिणाम की शुद्धता दिए गए आँकड़ों और निर्देशों पर निर्भर करती है।

3. विश्वसनीयता (Reliability)

कम्प्यूटर की गणनाएँ उच्च स्तर की शुद्धता के साथ की जाती हैं। इसी कारण इसके परिणामों पर भरोसा किया जा सकता है और इसकी विश्वसनीयता अधिक होती है।

4. विशाल संग्रहण क्षमता (High Storage Capacity)

कम्प्यूटर में बड़ी मात्रा में सूचनाएँ, आँकड़े, चित्र आदि सुरक्षित रखे जा सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर संग्रहित सूचना को शीघ्र प्राप्त भी किया जा सकता है।

5. स्मृति (Memory)

कम्प्यूटर की अपनी स्मरण क्षमता होती है। यह बहुत बड़ी मात्रा में पुराने आँकड़ों और सूचनाओं को अपनी स्मृति में सुरक्षित रख सकता है तथा आवश्यकता होने पर उन्हें पुनः उपलब्ध करा सकता है।

6. विविधता (Diversity)

कम्प्यूटर केवल गणना तक सीमित नहीं है। यह विभिन्न प्रकार के कार्य कर सकता है, जैसे—

  • विभिन्न भाषाओं और फॉन्ट में टाइपिंग करना,
  • गणनाएँ करना,
  • सारणियाँ बनाना,
  • ग्राफ एवं चित्र तैयार करना,
  • एनिमेशन बनाना आदि।

इस प्रकार एक ही कम्प्यूटर अनेक प्रकार के कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है।

7. स्वचालन (Automation)

कम्प्यूटर एक स्वचालित यंत्र है। ऑपरेटर द्वारा आवश्यक निर्देश देने और कार्य प्रारम्भ करने के बाद कम्प्यूटर उन निर्देशों का स्वयं पालन करता है तथा अपेक्षित परिणाम प्रदान करता है।

कम्प्यूटर की विशेषताएँ एक नजर में

विशेषता अर्थ
तीव्र गति बहुत कम समय में बड़ी एवं जटिल गणनाएँ करना
शुद्धता सही निर्देश मिलने पर अत्यन्त शुद्ध परिणाम देना
विश्वसनीयता लगातार भरोसेमन्द परिणाम प्रदान करना
विशाल संग्रहण क्षमता बड़ी मात्रा में सूचना एवं आँकड़े सुरक्षित रखना
स्मृति पुरानी सूचनाओं को सुरक्षित रखकर पुनः उपलब्ध कराना
विविधता एक ही यंत्र द्वारा अनेक प्रकार के कार्य करना
स्वचालन निर्देश मिलने के बाद स्वतः कार्य करना
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • कम्प्यूटर शब्द अंग्रेजी के Compute शब्द से बना है, जिसका अर्थ गणना करना है।
  • कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो आँकड़ों को निर्देशों के अनुसार संसाधित करके सूचना में बदलता है।
  • यह Input ग्रहण करता है, उस पर Processing करता है और Output प्रदान करता है।
  • कम्प्यूटर की प्रमुख विशेषताएँ—तीव्र गति, शुद्धता, विश्वसनीयता, विशाल संग्रहण क्षमता, स्मृति, विविधता और स्वचालन हैं।
  • कम्प्यूटर सही निर्देश मिलने पर कम समय में अत्यन्त शुद्ध और विश्वसनीय परिणाम प्रदान कर सकता है।
  • कम्प्यूटर गणना के अलावा टाइपिंग, सारणी, ग्राफ, चित्र और एनिमेशन जैसे अनेक कार्य भी कर सकता है।
Topic 5 कम्प्यूटर के प्रयोग एवं अनुप्रयोग

कम्प्यूटर के प्रयोग एवं अनुप्रयोग

कम्प्यूटर के प्रयोग एवं अनुप्रयोग

वर्तमान समय में कम्प्यूटर का प्रयोग जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में किया जा रहा है। कम्प्यूटर विभिन्न कार्यों को उनके लिए बनाए गए सॉफ्टवेयर की सहायता से सुन्दरता, तीव्रता और सरलता से सम्पन्न करता है।

कम्प्यूटर का प्रयोग शिक्षा, प्रकाशन, मनोरंजन, व्यवसाय, चिकित्सा, मौसम विज्ञान, वैज्ञानिक कार्य तथा इंजीनियरिंग जैसे अनेक क्षेत्रों में किया जाता है।

1. शिक्षा के क्षेत्र में

कम्प्यूटर का सबसे अधिक उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में हो रहा है। मल्टीमीडिया तकनीक के विकास के बाद शिक्षा में कम्प्यूटर का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

एक छोटी-सी CD-ROM में कई पुस्तकों की सामग्री सुरक्षित की जा सकती है और उसे लंबे समय तक संरक्षित रखा जा सकता है। इस प्रकार कम्प्यूटर अध्ययन-सामग्री के संग्रहण और उपयोग में सहायक है।

2. प्रकाशन कार्य में

प्रकाशन कार्य में कम्प्यूटर का व्यापक प्रयोग किया जाता है। विशेष रूप से DTP (Desktop Publishing) की सहायता से छपाई के कार्य की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है।

कम्प्यूटर द्वारा पाठ्य सामग्री तैयार करना, उसे व्यवस्थित करना तथा चित्रों की छपाई करना अधिक सरल हो जाता है।

3. मनोरंजन के क्षेत्र में

मल्टीमीडिया और कम्प्यूटर एनिमेशन ने मनोरंजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। कम्प्यूटर की सहायता से एनिमेशन आधारित फिल्में और आकर्षक दृश्य तैयार किए जाते हैं।

पुस्तक में “जुरासिक पार्क”, “बाल हनुमान” तथा “बाल गणेश” जैसी फिल्मों को कम्प्यूटर एनिमेशन के उदाहरण के रूप में दिया गया है। 3D Animation की सहायता से दृश्यों को अधिक सुन्दर और आकर्षक बनाया जा सकता है।

4. व्यावसायिक क्षेत्र में

व्यवसाय के क्षेत्र में कम्प्यूटर का प्रभाव अत्यधिक है। बैंकिंग और शेयर बाजार जैसे कार्य बड़े स्तर पर कम्प्यूटर पर निर्भर हैं।

कम्प्यूटर की सहायता से—

  • अकाउंटिंग का कार्य,
  • इन्वेन्ट्री कंट्रोल,
  • बैंकिंग कार्य,
  • ई-कॉमर्स आदि

अधिक सरलता और तेजी से किए जा सकते हैं।

5. चिकित्सा क्षेत्र में

स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में कम्प्यूटर का महत्वपूर्ण योगदान है। औषधि-निर्माण से लेकर रोगों के निदान और उपचार तक इसका उपयोग किया जाता है।

औषधि निर्माण में विभिन्न अवयवों की जाँच, उनकी मात्रा निर्धारित करने तथा औषधि के प्रभाव और सफलता का अध्ययन करने में कम्प्यूटर उपयोगी है।

किडनी, लीवर, हृदय और मस्तिष्क से सम्बन्धित चिकित्सीय समस्याओं के निदान में भी कम्प्यूटर सहायक उपकरण के रूप में प्रयोग किया जाता है। वजन मापने से लेकर ब्लड प्रेशर मापने तक अनेक चिकित्सीय कार्यों में इसका उपयोग होता है।

6. मौसम विज्ञान में

मौसम विज्ञान में कम्प्यूटर का व्यापक प्रयोग होता है। इसके माध्यम से मौसम सम्बन्धी विभिन्न परिस्थितियों का अध्ययन और पूर्वानुमान किया जाता है।

कम्प्यूटर की सहायता से—

  • वायुदाब के क्षेत्रों का पता लगाया जाता है,
  • बादलों की स्थिति, गति और दिशा ज्ञात की जाती है,
  • बादलों की ऊँचाई का अनुमान लगाया जाता है,
  • आँधी और तूफान जैसी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जाता है।

7. वैज्ञानिक कार्यों में

अनेक वैज्ञानिक कार्यों को सम्पन्न करने के लिए कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाता है। जटिल गणना और विश्लेषण वाले कार्य कम्प्यूटर की सहायता से अधिक सरलता से किए जा सकते हैं।

पुस्तक में निम्न वैज्ञानिक कार्यों का उल्लेख किया गया है—

  • अणु संरचना,
  • रासायनिक विश्लेषण,
  • वैज्ञानिक सिमुलेशन,
  • भूगर्भीय अध्ययन,
  • खनिजों का विश्लेषण,
  • प्लाज्मा अनुसंधान,
  • इलेक्ट्रॉनिक्स खोज,
  • विद्युत परिपथ आदि।

8. इंजीनियरिंग क्षेत्र में

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी कम्प्यूटर का व्यापक उपयोग किया जाता है। इसकी सहायता से सरल तथा जटिल मशीनों के छोटे-बड़े भागों का उपयोगी और मितव्ययी डिजाइन तैयार किया जा सकता है।

कम्प्यूटर की सहायता से भवन, पुल, बाँध, नहर, जहाज, रेल तथा इंजन आदि के डिजाइन शीघ्रता से तैयार किए जा सकते हैं।

कम्प्यूटर के प्रमुख अनुप्रयोग एक नजर में

क्षेत्र मुख्य उपयोग
शिक्षा अध्ययन-सामग्री का संग्रहण और मल्टीमीडिया आधारित शिक्षण
प्रकाशन DTP, छपाई और चित्रों का प्रकाशन
मनोरंजन Animation और 3D Animation
व्यवसाय Banking, Accounting, Inventory Control और E-commerce
चिकित्सा औषधि निर्माण, रोग निदान और उपचार
मौसम विज्ञान मौसम अध्ययन और आँधी-तूफान का पूर्वानुमान
वैज्ञानिक कार्य विश्लेषण, Simulation और अनुसंधान
इंजीनियरिंग मशीन, भवन, पुल, बाँध, जहाज तथा इंजन का डिजाइन
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • कम्प्यूटर का प्रयोग वर्तमान समय में जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में किया जाता है।
  • शिक्षा में कम्प्यूटर अध्ययन-सामग्री के संग्रहण और मल्टीमीडिया शिक्षण में उपयोगी है।
  • प्रकाशन में DTP तथा मनोरंजन में Animation और 3D Animation का प्रयोग होता है।
  • व्यवसाय में Banking, Accounting, Inventory Control और E-commerce में कम्प्यूटर महत्वपूर्ण है।
  • चिकित्सा में औषधि निर्माण, रोग निदान और उपचार में कम्प्यूटर का उपयोग होता है।
  • मौसम विज्ञान में बादलों, वायुदाब तथा आँधी-तूफान का पूर्वानुमान लगाने में कम्प्यूटर सहायक है।
  • वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग कार्यों में कम्प्यूटर जटिल विश्लेषण, अनुसंधान और डिजाइन को सरल बनाता है।
Topic 6 कम्प्यूटर के लाभ एवं हानियाँ

कम्प्यूटर के लाभ एवं हानियाँ

कम्प्यूटर के लाभ

कम्प्यूटर ने कार्य करने की गति, शुद्धता, संग्रहण तथा सूचना के आदान-प्रदान को सरल बनाया है। इसका उपयोग गणना, नेटवर्किंग, डेटा सुरक्षा, शिक्षा तथा बड़ी मात्रा में सूचनाओं के प्रबन्धन के लिए किया जाता है।

1. कुशल एवं व्यापक गणना स्तर

कम्प्यूटर साधारण अंकगणितीय गणनाओं से लेकर उच्च स्तरीय वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग गणनाओं तक अनेक प्रकार के कार्य कर सकता है। यह मानव की तुलना में अधिक तेजी, शुद्धता और विश्वसनीयता के साथ जटिल गणनाएँ तथा तुलना कर सकता है।

2. नेटवर्किंग (Networking)

नेटवर्किंग के माध्यम से कम्प्यूटर विभिन्न संसाधनों और फाइलों को साझा करने में सहायता करता है। इससे समय और धन की बचत होती है।

कम्प्यूटर नेटवर्क द्वारा दूरस्थ स्थानों तक सूचनाएँ पहुँचाई जा सकती हैं। इंटरनेट पर कार्य करना तथा बैंकिंग जैसी सुविधाएँ भी नेटवर्किंग के माध्यम से उपलब्ध होती हैं।

3. सुरक्षा (Security)

कम्प्यूटर में उपयोगकर्ता पासवर्ड आदि का प्रयोग करके अपनी फाइलों को सुरक्षित रख सकता है। इस प्रकार अनधिकृत व्यक्ति द्वारा फाइलों की प्रतिलिपि बनाने अथवा उन्हें चोरी करने से सुरक्षा मिलती है।

4. डेटा का स्थायित्व (Durability of Data)

कम्प्यूटर में फाइलों और अन्य डेटा को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर फाइलों का Backup भी बनाया जा सकता है, जिससे महत्वपूर्ण डेटा को सुरक्षित रखने में सहायता मिलती है।

5. डेटा संग्रह अथवा प्रयोग में सरलता

कम्प्यूटर किसी व्यक्ति अथवा संस्था के डेटा को व्यवस्थित करने, उसमें आवश्यक परिवर्तन करने, दस्तावेज तैयार करने, मुद्रित करने और तुलना करने में सहायता करता है।

बहुत बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण Excel तथा Word जैसे उपयोगी पैकेजों की सहायता से किया जा सकता है।

6. अच्छा शैक्षिक उपकरण

कम्प्यूटर विद्यार्थियों के लिए एक उपयोगी शैक्षिक उपकरण है। यह समस्याओं को हल करने तथा रचनात्मक और तार्किक अभिव्यक्ति के विकास में सहायता करता है।

कम्प्यूटर की सहायता से अधिगम के अनुभवों को व्यवस्थित करना, कार्य की गति निर्धारित करना तथा चुनौती के स्तर का चयन करना सम्भव होता है।

कम्प्यूटर की हानियाँ

अनेक उपयोगों और लाभों के साथ कम्प्यूटर की कुछ सीमाएँ भी हैं। यह स्वयं निर्णय लेने वाली मानवीय बुद्धि नहीं रखता और अपने कार्य के लिए निर्देश, विद्युत तथा उपयोगकर्ता पर निर्भर रहता है।

1. प्रयोगकर्ता पर निर्भरता

कम्प्यूटर स्वयं अपने आप कार्य प्रारम्भ नहीं करता। उसे कार्य करने के लिए निर्देश देने पड़ते हैं, इसलिए वह उपयोगकर्ता पर निर्भर रहता है।

2. त्रुटियों को स्वयं सही नहीं करता

कम्प्यूटर स्वयं त्रुटियों को पहचानकर उन्हें ठीक नहीं करता। यदि उसे गलत डेटा अथवा गलत निर्देश दिए जाएँ, तो वह उन्हीं के अनुसार कार्य करता है।

3. उपयोगकर्ता के साथ अन्तःक्रिया नहीं करता

कम्प्यूटर एक मशीन है। वह मनुष्य की तरह उपयोगकर्ता के साथ स्वतन्त्र रूप से अन्तःक्रिया नहीं करता, बल्कि दिए गए निर्देशों के अनुसार कार्य करता है।

4. विद्युत आपूर्ति पर निर्भरता

कम्प्यूटर के संचालन के लिए नियमित विद्युत आपूर्ति आवश्यक होती है। बिजली न होने पर सामान्य रूप से कम्प्यूटर कार्य नहीं कर सकता।

5. उत्पादकता सम्बन्धी सीमा

कुछ परिस्थितियों में ऐसा भी हो सकता है कि किसी सरल कार्य को हाथ से करने की तुलना में कम्प्यूटर पर करने में अधिक समय लग जाए। इसलिए प्रत्येक कार्य में कम्प्यूटर का प्रयोग समान रूप से उपयोगी नहीं होता।

6. तार्किक एवं मानवीय क्षमता का अभाव

कम्प्यूटर में मनुष्य जैसी मानसिक क्षमता नहीं होती। वह स्वयं सोच नहीं सकता और उसके भीतर भावनाएँ तथा संवेदनाएँ नहीं होतीं।

नैतिक मूल्यों को समझने अथवा अलग-अलग प्रकार के डेटा में अपने विवेक से भेदभाव करने की क्षमता भी उसमें नहीं होती। वह केवल दिए गए निर्देशों के आधार पर कार्य करता है।

कम्प्यूटर के लाभ एवं हानियाँ एक नजर में

लाभ हानियाँ / सीमाएँ
तीव्र और व्यापक गणना क्षमता उपयोगकर्ता पर निर्भरता
नेटवर्किंग द्वारा सूचना साझा करना त्रुटियों को स्वयं ठीक नहीं करता
फाइल एवं डेटा सुरक्षा स्वतन्त्र मानवीय अन्तःक्रिया का अभाव
डेटा को लंबे समय तक सुरक्षित रखना विद्युत आपूर्ति की आवश्यकता
डेटा संग्रह और प्रबन्धन में सरलता कुछ कार्यों में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है
उपयोगी शैक्षिक उपकरण मानवीय सोच, भावना और नैतिक विवेक का अभाव
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • कम्प्यूटर तीव्र, शुद्ध और व्यापक गणनाएँ करने में सक्षम है।
  • नेटवर्किंग से फाइल और सूचना साझा करने में समय एवं धन की बचत होती है।
  • पासवर्ड और बैकअप के माध्यम से डेटा को सुरक्षित रखा जा सकता है।
  • कम्प्यूटर बड़ी मात्रा में डेटा के संग्रह, प्रबन्धन और विश्लेषण को सरल बनाता है।
  • कम्प्यूटर एक उपयोगी शैक्षिक उपकरण भी है।
  • कम्प्यूटर उपयोगकर्ता, निर्देश और विद्युत आपूर्ति पर निर्भर रहता है।
  • यह स्वयं त्रुटि सुधार, मानवीय सोच, भावना तथा नैतिक निर्णय नहीं कर सकता।
Topic 7 आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार

आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार

आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार

कम्प्यूटर विभिन्न प्रकार के आँकड़ों और सूचनाओं पर कार्य करते हैं। कार्य एवं आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण के आधार पर कम्प्यूटर को मुख्यतः तीन वर्गों में बाँटा जाता है—

  1. एनालॉग कम्प्यूटर (Analog Computer)
  2. डिजिटल कम्प्यूटर (Digital Computer)
  3. हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer)
एनालॉग डिजिटल और हाइब्रिड कम्प्यूटर के प्रकार
एनालॉग, डिजिटल एवं हाइब्रिड कम्प्यूटर

1. एनालॉग कम्प्यूटर (Analog Computer)

एनालॉग का अर्थ दो राशियों के बीच साम्य स्थापित करना है। एनालॉग कम्प्यूटर किसी भौतिक राशि अथवा भौतिक प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक परिपथों की सहायता से विद्युत संकेतों में बदलकर उस पर निरन्तर कार्य करता है।

इस प्रकार के कम्प्यूटर का प्रयोग किसी भौतिक क्रिया का प्रारूप बनाकर उस क्रिया को लगातार जारी रखने के लिए निर्देश देने में किया जाता है।

एनालॉग कम्प्यूटर सामान्यतः शत-प्रतिशत शुद्ध परिणाम प्रस्तुत नहीं करते, परन्तु इनसे लगभग 99 प्रतिशत तक शुद्ध परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

एनालॉग कम्प्यूटर के लाभ

  1. यह ऐसी जटिल गणनाओं को सरलता से हल कर सकता है, जिन्हें डिजिटल कम्प्यूटर द्वारा हल करना कठिन हो।
  2. यह विद्युत के भौतिक गुणों पर आधारित होता है, इसलिए इसमें बाइनरी फॉर्मेट की कोडिंग एवं डी-कोडिंग की आवश्यकता नहीं होती।
  3. यह विभिन्न समीकरणों का बेहतर ढंग से वर्णन और प्रतिनिधित्व कर सकता है।

एनालॉग कम्प्यूटर की सीमाएँ

  1. सतही संकेतों का शोर तथा अन्य विद्युत समस्याएँ इसके परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं।
  2. आन्तरिक शक्ति, विद्युतीय अन्तर-सम्बन्ध और गणना-तत्व इसकी शुद्धता में कमी कर सकते हैं।
  3. इसमें बहुत अधिक मात्रा में डेटा एकत्र नहीं किया जा सकता।
  4. इसकी क्रियान्वयन लागत अधिक होती है।
  5. इसमें तार्किक गुणों की कमी होती है, जिनकी विभिन्न कार्यक्रमों में आवश्यकता पड़ सकती है।

2. डिजिटल कम्प्यूटर (Digital Computer)

सामान्यतः कम्प्यूटर से आशय डिजिटल कम्प्यूटर से ही लिया जाता है। Digit का अर्थ अंक है। डिजिटल कम्प्यूटर प्राप्त होने वाली सूचनाओं को द्विआधारी अंकों (Binary Digits) में परिवर्तित करके कार्य करता है।

डिजिटल कम्प्यूटर की मेमोरी में सूचनाओं को 0 और 1 के रूप में रखा जाता है। जिस प्रकोष्ठ में बाइनरी कोड 1 का संकेत पहुँचता है वह सक्रिय हो जाता है, जबकि 0 का संकेत मिलने पर वह निष्क्रिय रहता है।

इन्हीं Binary Codes 0 और 1 के आधार पर स्वीचिंग सर्किटों को नियंत्रित किया जाता है और कम्प्यूटर गणना, गुणा, भाग या घटाव जैसी क्रियाएँ करता है।

डिजिटल कम्प्यूटर प्रति सेकण्ड लाखों अथवा करोड़ों गणनाएँ कर सकता है। इसलिए जटिल समस्याओं का समाधान बहुत कम समय में किया जा सकता है और परिणाम अत्यन्त शुद्ध प्राप्त होते हैं।

डिजिटल कम्प्यूटर के प्रमुख गुण

  1. सूचनाओं को विश्लेषण के लिए आवश्यक समय तक संग्रहित कर सकता है।
  2. प्राप्त सूचनाओं का संवहन कर सकता है।
  3. अत्यन्त कम समय में विश्लेषण कर सकता है।
  4. शत-प्रतिशत शुद्ध एवं वास्तविक परिणाम प्रस्तुत कर सकता है।
  5. छोटे आकार, कम वजन एवं कम मूल्य के कारण आसानी से उपयोग किया जा सकता है।

डिजिटल कम्प्यूटर के लाभ

  1. डिजिटल कम्प्यूटर अत्यधिक तेजी से कार्य करता है।
  2. कठिन गणनाओं को सरलता से पूरा कर सकता है।
  3. इसमें Volatile और Non-Volatile दोनों प्रकार की मेमोरी हो सकती है, इसलिए बड़ी मात्रा में डेटा स्टोर किया जा सकता है।
  4. इसकी डिजाइन अपेक्षाकृत सरल होती है और यह निर्देश-समूह अर्थात् प्रोग्राम के आधार पर कार्य करता है।
  5. वोल्टेज के उतार-चढ़ाव का डिजिटल कम्प्यूटर पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव पड़ता है।

डिजिटल कम्प्यूटर की सीमाएँ

  1. डिजिटल कम्प्यूटर मानव द्वारा दिए गए निर्देशों पर निर्भर रहता है तथा इसमें मानवीय भावनाओं का अभाव होता है।
  2. Bugs और Virus जैसे कारक इसकी कार्यक्षमता तथा उत्पादकता को प्रभावित कर सकते हैं।

3. हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer)

हाइब्रिड कम्प्यूटर का निर्माण एनालॉग और डिजिटल कम्प्यूटर दोनों के गुणों एवं विशेषताओं को मिलाकर किया गया है। इसलिए इसमें दोनों प्रकार की प्रणालियों की उपयोगी विशेषताओं का समावेश होता है।

पुस्तक में रोबोट को इसका उदाहरण बताया गया है। एनालॉग कम्प्यूटर किसी सिस्टम के नियंत्रण के लिए एक ही क्षण में दिशा-निर्देश प्राप्त कर लगातार कार्य करता रहता है, परन्तु उससे प्राप्त परिणाम शत-प्रतिशत शुद्ध नहीं होते।

अधिक शुद्ध परिणाम प्राप्त करने के लिए एनालॉग संकेतों को डिजिटल रूप में परिवर्तित किया जाता है। इसके लिए विशेष यंत्रों का प्रयोग किया जाता है।

मॉडम की भूमिका

इस कार्य के लिए मॉडम (Modem) का प्रयोग किया जाता है। Modem, Modulator-Demodulator का संक्षिप्त रूप है।

मॉडम एनालॉग संकेतों को डिजिटल संकेतों में तथा डिजिटल संकेतों को एनालॉग संकेतों में परिवर्तित करने का कार्य करता है।

हाइब्रिड कम्प्यूटर का प्रयोग सहायक कम्प्यूटर की भाँति किया जाता है, जिसे मुख्य यंत्र के किसी भाग में लगाया जा सकता है।

हाइब्रिड कम्प्यूटर के लाभ

1. गति (Speed)

हाइब्रिड कम्प्यूटर की गणना गति अत्यधिक तेज होती है। इसमें एनालॉग कम्प्यूटर की सामान्य विन्यास क्षमता का लाभ मिलता है और यह आँकिक समीकरणों को हल करने में उपयोगी होता है।

2. परिशुद्धता (Precision)

हाइब्रिड कम्प्यूटर सामान्य डिजिटल तथा एनालॉग कम्प्यूटर की तुलना में अधिक सही, शुद्ध, विस्तृत और उपयोगी परिणाम प्रदान कर सकता है। गणना करने में भी यह अपेक्षाकृत कम समय लेता है।

3. ऑनलाइन डेटा प्रोसेसिंग

हाइब्रिड कम्प्यूटर में Online Data Processing की क्षमता होती है। इसी कारण इसका प्रयोग औषधीय (Medicinal) क्षेत्रों में भी विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

Analog, Digital और Hybrid Computer में अन्तर

आधार Analog Computer Digital Computer Hybrid Computer
कार्य का आधार भौतिक राशियाँ एवं सतत संकेत Binary Digits 0 और 1 Analog और Digital दोनों का संयोजन
परिणाम लगभग 99% तक शुद्ध अत्यन्त शुद्ध अधिक परिशुद्ध एवं उपयोगी
मुख्य विशेषता निरन्तर भौतिक प्रक्रियाओं पर कार्य तेज गणना एवं डेटा प्रोसेसिंग दोनों प्रणालियों की विशेषताओं का समावेश
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण के आधार पर कम्प्यूटर तीन प्रकार के होते हैं—Analog, Digital और Hybrid।
  • Analog Computer भौतिक राशियों और लगातार बदलने वाले संकेतों पर कार्य करता है।
  • Digital Computer सूचनाओं को Binary Digits 0 और 1 में परिवर्तित करके कार्य करता है।
  • Digital Computer अत्यन्त तेज गति से गणना करता है और बड़ी मात्रा में डेटा संग्रहित कर सकता है।
  • Hybrid Computer में Analog और Digital दोनों कम्प्यूटरों की विशेषताओं का समावेश होता है।
  • Modem एनालॉग संकेतों को डिजिटल तथा डिजिटल संकेतों को एनालॉग संकेतों में परिवर्तित करता है।
  • Hybrid Computer की प्रमुख विशेषताएँ तीव्र गति, परिशुद्धता और Online Data Processing हैं।
Topic 8 आकार एवं तीव्रता के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार

आकार एवं तीव्रता के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार

आकार एवं तीव्रता के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार

कम्प्यूटर विभिन्न आकार, संग्रहण क्षमता और कार्य करने की गति में उपलब्ध होते हैं। कुछ कम्प्यूटर इतने छोटे होते हैं कि एक व्यक्ति आसानी से उनका उपयोग कर सकता है, जबकि कुछ अत्यन्त विशाल और शक्तिशाली होते हैं तथा एक ही समय में अनेक उपयोगकर्ताओं के कार्य कर सकते हैं।

आकार एवं तीव्रता के आधार पर कम्प्यूटर को मुख्यतः चार श्रेणियों में बाँटा जाता है—

  1. माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer)
  2. मेनफ्रेम कम्प्यूटर (Mainframe Computer)
  3. मिनी कम्प्यूटर (Mini Computer)
  4. सुपर कम्प्यूटर (Super Computer)
माइक्रो मिनी मेनफ्रेम और सुपर कम्प्यूटर के प्रकार
माइक्रो, मिनी, मेनफ्रेम एवं सुपर कम्प्यूटर

1. माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer)

माइक्रो कम्प्यूटर में प्रोसेसर के रूप में माइक्रोप्रोसेसर का प्रयोग किया जाता है। इसमें इनपुट के लिए की-बोर्ड तथा आउटपुट देखने के लिए मॉनिटर का प्रयोग होता है।

इसकी क्षमता लगभग एक लाख क्रियाएँ प्रति सेकण्ड बताई गई है। इसका उपयोग व्यावसायिक कार्यों, घरों, मनोरंजन और चिकित्सा आदि क्षेत्रों में किया जाता है।

APPLEMAC, IMAC, IBM P5/2 तथा IBM Compatible इसके उदाहरण हैं।

माइक्रो कम्प्यूटर के प्रमुख प्रकार

1. डेस्कटॉप कम्प्यूटर (Desktop Computer)

डेस्कटॉप कम्प्यूटर एक व्यक्तिगत कम्प्यूटिंग डिवाइस है, जिसे किसी कार्यालय की डेस्क या एक निश्चित स्थान पर रखने के लिए डिजाइन किया जाता है।

इसमें कम्प्यूटर को चलाने वाले मुख्य हार्डवेयर के साथ मॉनिटर, की-बोर्ड और माउस जैसे इनपुट उपकरण जुड़े होते हैं। डेस्कटॉप कम्प्यूटर सामान्यतः एक स्थान पर स्थिर रखा जाता है।

2. पर्सनल कम्प्यूटर (Personal Computer)

पर्सनल कम्प्यूटर आकार में छोटा होता है और यह माइक्रो कम्प्यूटर का ही एक रूप है। इस पर एक समय में मुख्य रूप से एक उपयोगकर्ता कार्य कर सकता है।

इसका ऑपरेटिंग सिस्टम एक साथ कई कार्य कर सकता है तथा इसे इंटरनेट से भी जोड़ा जा सकता है।

पुस्तक में भारत में निर्मित प्रथम कम्प्यूटर का नाम सिद्धार्थ बताया गया है। पर्सनल कम्प्यूटर का उपयोग घरों, व्यावसायिक कार्यों, मनोरंजन और आँकड़ों के संग्रहण आदि में किया जाता है।

3. लैपटॉप (Laptop)

लैपटॉप भी पर्सनल कम्प्यूटर की तरह कार्य करता है, लेकिन आकार में PC से छोटा और आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने योग्य होता है।

इसमें CPU, Monitor, Keyboard, Mouse तथा अन्य आवश्यक ड्राइव एक ही इकाई में संयोजित रहते हैं। यह बैटरी से भी कार्य कर सकता है, इसलिए यात्रा के दौरान भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

लैपटॉप को Wi-Fi तथा Bluetooth के माध्यम से इंटरनेट और अन्य उपकरणों से जोड़ा जा सकता है। IBM, Compaq, Apple और Lenovo आदि इसके उदाहरण बताए गए हैं।

4. पामटॉप (Palmtop)

पामटॉप आकार में अत्यन्त छोटा कम्प्यूटर होता है, जिसे हथेली पर रखकर उपयोग किया जा सकता है। इसमें इनपुट बोलकर भी दिया जा सकता है।

इसे PDA (Personal Digital Assistant) भी कहा जाता है। इसका प्रयोग इंटरनेट, संगीत सुनने, फोन जैसे कार्यों तथा अन्य क्रियाओं के लिए किया जाता है।

माइक्रो कम्प्यूटर के लाभ

  1. माइक्रो कम्प्यूटर की लागत बहुत अधिक नहीं होती।
  2. प्रयोगकर्ता स्वयं इसे चलाने में सक्षम होता है।
  3. बड़ी केन्द्रीय प्रणाली की कुछ समस्याएँ माइक्रो कम्प्यूटर में नहीं होतीं।

2. मेनफ्रेम कम्प्यूटर (Mainframe Computer)

मेनफ्रेम कम्प्यूटर की विशेषता इसकी अधिक आन्तरिक स्मृति, संग्रहण क्षमता और तीव्र कार्य गति है। इसमें बड़ी संख्या में सॉफ्टवेयर और Peripheral Devices जोड़े जा सकते हैं।

मेनफ्रेम कम्प्यूटर पर एक ही समय में एक से अधिक व्यक्ति अलग-अलग कार्य कर सकते हैं। इसके लिए Multitasks Operating System का प्रयोग किया जाता है।

इसका उपयोग मुख्यतः—

  • बैंकिंग,
  • अनुसंधान,
  • रक्षा,
  • अंतरिक्ष आदि क्षेत्रों में किया जाता है।

IBM-370, IBM-5/390 तथा यूनिमैक-1100 इसके उदाहरण दिए गए हैं।

मेनफ्रेम कम्प्यूटर के लाभ

  1. यह अधिक विश्वसनीयता, तीव्र गति और सुरक्षा प्रदान करता है तथा विभिन्न एप्लीकेशन को लंबे समय तक चलाने में सक्षम होता है।
  2. एक ही सर्वर पर अनेक एप्लीकेशन का प्रशासन सरल बनाया जा सकता है।
  3. अनेक Personal Computers के स्थान पर एक Mainframe Computer का उपयोग किया जा सकता है, जिससे प्रशासन और प्रबन्ध की लागत कम हो सकती है।
  4. यह Web आधारित Applications तथा उच्च सुरक्षा एवं तकनीकी सुविधाएँ प्रदान कर सकता है।
  5. यह बड़ी मात्रा में डेटा को सरलता और कुशलता से संग्रहित कर सकता है।

मेनफ्रेम कम्प्यूटर की सीमाएँ

  1. इसे चलाने के लिए विशेष प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।
  2. इसकी प्रारम्भिक लागत बहुत अधिक हो सकती है।
  3. इसके लिए बड़े स्थान और समर्पित पर्यावरण प्रबन्धन की आवश्यकता होती है।
  4. इसे संचालित करने के लिए विशेष Operating Software की आवश्यकता पड़ती है।

3. मिनी कम्प्यूटर (Mini Computer)

मिनी कम्प्यूटर आकार में मेनफ्रेम कम्प्यूटर से काफी छोटा होता है। इसकी संग्रहण क्षमता और गति माइक्रो कम्प्यूटर से अधिक, लेकिन मेनफ्रेम कम्प्यूटर से कम होती है।

यह भी Multi-user Computer होता है, अर्थात् इस पर एक साथ कई लोग कार्य कर सकते हैं।

इसमें B0386 Super Chip का प्रयोग बताया गया है। इसका उपयोग कम्पनियों तथा अनुसंधान सम्बन्धी कार्यों में किया जाता है।

AS 400, BULL HN-DPX2, HP9000 और RISC 6000 इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

मिनी कम्प्यूटर के लाभ

  1. इसे चलाने, प्रोसेसिंग करने और प्रबन्ध करने में अपेक्षाकृत कम खर्च होता है।
  2. इसे चलाने के लिए अत्यधिक तकनीकी कौशल की आवश्यकता नहीं होती।
  3. इसकी कार्यप्रणाली मेनफ्रेम कम्प्यूटर के समान होती है।
  4. यह Online Access में सहायता करता है और Personal Computer का संयोजन भी हो सकता है।

मिनी कम्प्यूटर की सीमाएँ

  1. इसकी Processing Capacity सीमित होती है।
  2. बहुत से Software Applications इसके अनुरूप Code नहीं किए होते हैं।
  3. अधिकतर Database चलाने के लिए Mainframe Computer पर परिपक्व Processing की आवश्यकता हो सकती है।

4. सुपर कम्प्यूटर (Super Computer)

सुपर कम्प्यूटर ऐसा कम्प्यूटर है जिसकी संग्रहण क्षमता एवं गति अत्यधिक तीव्र होती है। यह अपनी पीढ़ी के अन्य कम्प्यूटरों की तुलना में अधिक शक्तिशाली होता है तथा इसमें हजारों माइक्रोप्रोसेसर लगे हो सकते हैं।

पुस्तक के अनुसार विश्व का प्रथम सुपर कम्प्यूटर Cray-1 था, जिसे सन 1976 में Cray Research Company द्वारा विकसित किया गया था।

भारत का प्रथम सुपर कम्प्यूटर PARAM था, जिसे C-DAC द्वारा सन 1991 में विकसित किया गया।

सुपर कम्प्यूटर में Multiprocessing तथा Parallel Processing का प्रयोग किया जाता है। किसी बड़े कार्य को छोटे-छोटे भागों में विभाजित करके समानान्तर रूप से पूरा किया जा सकता है तथा कई व्यक्ति एक साथ कार्य कर सकते हैं।

इसका उपयोग विशेष रूप से—

  • Animated Graphics,
  • परमाणु अनुसंधान तथा
  • अत्यधिक जटिल गणनाओं

में किया जाता है।

सुपर कम्प्यूटर के उदाहरण

  • Cray-3
  • Cyber 205
  • NECSX-3
  • PARAM

सुपर कम्प्यूटर निर्माता कम्पनियों में IBM, Silicon Graphics, Fujitsu और Intel आदि का उल्लेख किया गया है।

सुपर कम्प्यूटर के लाभ

  1. यह अत्यन्त तीव्र गति से कार्य करता है।
  2. बड़ी और कठिन समस्याओं को सरलता से हल कर सकता है।

सुपर कम्प्यूटर की सीमाएँ

  1. सुपर कम्प्यूटर अत्यधिक महँगे होते हैं।
  2. इनके संचालन के लिए अधिक विद्युत शक्ति की आवश्यकता होती है।
  3. ये बहुत अधिक स्थान घेरते हैं।
  4. ये कुछ विशिष्ट Applications के लिए अधिक लाभदायक होते हैं।

चारों प्रकार के कम्प्यूटरों की तुलना

प्रकार मुख्य विशेषता प्रमुख उपयोग / रूप
Micro Computer Microprocessor आधारित, आकार में छोटा Desktop, Personal Computer, Laptop, Palmtop
Mainframe Computer अधिक स्मृति, संग्रहण एवं Multi-user क्षमता Banking, Research, Defence, Space
Mini Computer Micro से शक्तिशाली और Mainframe से छोटा कम्पनी एवं अनुसंधान कार्य
Super Computer अत्यधिक उच्च गति और Processing क्षमता जटिल गणना, Graphics एवं परमाणु अनुसंधान
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • आकार एवं तीव्रता के आधार पर कम्प्यूटर चार प्रकार के होते हैं—Micro, Mainframe, Mini और Super Computer।
  • Micro Computer में Microprocessor का प्रयोग होता है तथा Desktop, PC, Laptop और Palmtop इसके प्रमुख रूप हैं।
  • Mainframe Computer में अधिक स्मृति, संग्रहण और Multi-user क्षमता होती है।
  • Mini Computer, Micro Computer से अधिक शक्तिशाली लेकिन Mainframe से छोटा होता है।
  • Super Computer अत्यन्त तीव्र गति तथा उच्च Processing Capacity वाला कम्प्यूटर है।
  • पुस्तक में Cray-1 को 1976 में विकसित प्रथम Super Computer बताया गया है।
  • भारत का प्रथम Super Computer PARAM था, जिसे C-DAC द्वारा 1991 में विकसित किया गया।

अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

आधुनिक गणनात्मक युक्ति एबेकस (Abacus) का आविष्कार हुआ—

व्याख्या: एबेकस का आविष्कार चीन में हुआ। इसका प्रयोग गणना के लिए किया जाता था।
Q 2

सर्वप्रथम कम्प्यूटर का आविष्कार किया—

व्याख्या: चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंस इंजन तथा एनालिटिकल इंजन का विकास किया और उन्हें कम्प्यूटर का जनक कहा जाता है।
Q 3

बेबीलोनियों द्वारा पहले एबेकस का आविष्कार हुआ—

व्याख्या: कम्प्यूटर इतिहास के कालक्रम में 3000 ईसा पूर्व प्रथम एबेकस का प्रयोग बेबीलोनिया में बताया गया है।
Q 4

1946 से 1959 के मध्य विकसित हुए कम्प्यूटर थे—

व्याख्या: 1946 से 1959 तक का समय कम्प्यूटर की प्रथम पीढ़ी का माना गया है।
Q 5

आकार एवं गति के आधार पर कम्प्यूटर के प्रकार होते हैं—

व्याख्या: आकार एवं तीव्रता के आधार पर कम्प्यूटर चार प्रकार के हैं—माइक्रो, मेनफ्रेम, मिनी और सुपर कम्प्यूटर।
Q 6

निम्न में मिनी कम्प्यूटर नहीं है—

व्याख्या: IBM-370 मेनफ्रेम कम्प्यूटर का उदाहरण है, जबकि BULL HN-DPX2, RISC 6000 और HP 9000 मिनी कम्प्यूटर के उदाहरण हैं।
Q 7

सुपर कम्प्यूटर के उदाहरण हैं—

व्याख्या: क्रे-3, साइबर-205 और परम सभी सुपर कम्प्यूटर के उदाहरण हैं।
Q 8

कम्प्यूटर को कुल कितनी पीढ़ियों में विभाजित किया गया है—

व्याख्या: कम्प्यूटर के विकास को पाँच पीढ़ियों में विभाजित किया गया है।
Q 9

IBM 360 तथा IBM 370 किस पीढ़ी के कम्प्यूटर हैं—

व्याख्या: IBM-360 तथा IBM-370 तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटरों के उदाहरण हैं।
Q 10

प्रथम पीढ़ी का पहला कम्प्यूटर है—

व्याख्या: सन 1946 में विकसित ENIAC को प्रथम पीढ़ी का पहला कम्प्यूटर बताया गया है।
Q 11

कम्प्यूटर क्या है?

व्याख्या: कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो दिए गए निर्देशों के अनुसार आँकड़ों पर प्रक्रिया करता है।
Q 12

कम्प्यूटर की प्रथम पीढ़ी में मुख्य तार्किक पुर्जा क्या प्रयोग हुआ था?

व्याख्या: प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटरों में मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक के रूप में वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था।
Q 13

अनुप्रयोग के आधार पर निम्न में से कम्प्यूटर है—

व्याख्या: एनालॉग, डिजिटल और हाइब्रिड तीनों कम्प्यूटर के प्रमुख प्रकार हैं।
Q 14

एनालॉग और डिजिटल कम्प्यूटर का सम्मिलित रूप है—

व्याख्या: हाइब्रिड कम्प्यूटर में एनालॉग और डिजिटल दोनों कम्प्यूटरों के गुण एवं विशेषताएँ सम्मिलित होती हैं।
Q 15

पी.सी. का पूरा नाम है—

व्याख्या: PC का पूरा नाम Personal Computer अर्थात् पर्सनल कम्प्यूटर है।

पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 1 के विषय कम्प्यूटर शिक्षा के अध्याय कम्प्यूटर का परिचय से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1 2016

कम्प्यूटर की क्या विशेषताएँ हैं?

Q 2 2019

हाइब्रिड कम्प्यूटर किसे कहते हैं?

Q 3 2019

डेस्कटॉप कम्प्यूटर क्या होते हैं?

Practice More Questions

इसी semester और subject के MCQ Tests तथा Previous Year Papers practice करके अपनी तैयारी को और मजबूत बनाइए।

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