Home
Store Updates
Home Study Material Semester 2 वर्तमान भारतीय समाज और प्रारम्भिक शिक्षा शिक्षा एवं समाज
Chapter 6 • वर्तमान भारतीय समाज और प्रारम्भिक शिक्षा

शिक्षा एवं समाज

इस अध्याय में शिक्षा एवं समाज की अवधारणा, शिक्षा और समाज का संबंध, समाजीकरण, सामाजिक परिवर्तन, सामाजिक नियंत्रण, सामाजिक स्तरीकरण तथा शिक्षा की सामाजिक भूमिका का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

10
Topics
0
MCQs
10+
PYQs
PDF
Notes
Topic 1 समाज का अर्थ एवं परिभाषा

समाज का अर्थ एवं परिभाषा

समाज का अर्थ

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसका जीवन समाज के बिना अधूरा माना जाता है। समाज केवल व्यक्तियों का समूह नहीं है, बल्कि उनके बीच स्थापित सामाजिक संबंधों की संगठित व्यवस्था है। समाज के माध्यम से व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, संस्कृति को ग्रहण करता है तथा सामाजिक जीवन के नियमों को सीखता है।

समाज शब्द का प्रयोग सामान्यतः उन व्यक्तियों के समूह के लिए किया जाता है जो एक-दूसरे के साथ संबंध स्थापित करके रहते हैं तथा जिनके बीच सहयोग, पारस्परिक निर्भरता और सामाजिक अंतःक्रिया पाई जाती है।

समाज की परिभाषाएँ

मैकाइवर एवं पेज के अनुसार

"समाज सामाजिक संबंधों का जाल (Web of Social Relationships) है।"

राइट के अनुसार

"समाज व्यक्तियों का समूह नहीं है, बल्कि समूह के व्यक्तियों के बीच संबंधों की व्यवस्था है।"

र्यूटर के अनुसार

"जिस प्रकार जीवन कोई वस्तु नहीं बल्कि जीवित रहने की प्रक्रिया है, उसी प्रकार समाज भी कोई वस्तु नहीं बल्कि संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया है।"

समाज का सार

उपरोक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि समाज का वास्तविक आधार सामाजिक संबंध हैं। समाज व्यक्तियों के बीच सहयोग, अंतःक्रिया, पारस्परिक निर्भरता तथा साझा जीवन के कारण अस्तित्व में आता है। इसलिए समाज को सामाजिक संबंधों की एक संगठित एवं गतिशील व्यवस्था माना जाता है।

Topic 2 समाज की विशेषताएँ

समाज की विशेषताएँ

समाज सामाजिक संबंधों की एक जटिल एवं गतिशील व्यवस्था है। समाज को समझने के लिए उसकी प्रमुख विशेषताओं का अध्ययन आवश्यक है।

1. समाज एक अमूर्त व्यवस्था है

समाज को देखा या छुआ नहीं जा सकता, केवल अनुभव किया जा सकता है। यह सामाजिक संबंधों की व्यवस्था है।

2. पारस्परिक निर्भरता

कोई भी व्यक्ति अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं नहीं कर सकता। इसलिए समाज के सदस्य एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।

3. समानता एवं विभिन्नता

समाज में समानता तथा विभिन्नता दोनों पाई जाती हैं। समानता एकता को बढ़ाती है जबकि विभिन्नता सामाजिक प्रगति में सहायक होती है।

4. पारस्परिक जागरूकता

समाज के सदस्यों का एक-दूसरे के अस्तित्व एवं व्यवहार के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। इसके बिना सामाजिक संबंध स्थापित नहीं हो सकते।

5. सहयोग एवं संघर्ष

समाज में सहयोग और संघर्ष दोनों पाए जाते हैं। सहयोग समाज को संगठित करता है जबकि संघर्ष सामाजिक परिवर्तन का कारण बनता है।

6. समाज परिवर्तनशील एवं जटिल है

समाज समय एवं परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है। सामाजिक संबंधों की विविधता के कारण यह एक जटिल व्यवस्था है।

7. समाज केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है

कुछ समाजशास्त्रियों के अनुसार अन्य जीवों में भी सामाजिक जीवन पाया जाता है, किन्तु मानव समाज सबसे विकसित माना जाता है।

परीक्षा उपयोगी

याद रखें : समाज की प्रमुख विशेषताएँ हैं — अमूर्तता, पारस्परिक निर्भरता, समानता एवं विभिन्नता, पारस्परिक जागरूकता, सहयोग एवं संघर्ष, परिवर्तनशीलता तथा जटिलता।

Topic 3 शिक्षा एवं समाज का संबंध

शिक्षा एवं समाज का संबंध

शिक्षा एवं समाज का संबंध अत्यंत घनिष्ठ है। वर्तमान ही नहीं बल्कि प्राचीन काल से यह देखा जाता रहा है कि समाज के स्वरूप के अनुसार शिक्षा का स्वरूप निर्धारित होता है। समाज शिक्षा को प्रभावित करता है तथा शिक्षा भी समाज के विकास एवं परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ओटावे के अनुसार : "किसी भी समाज में दी जाने वाली शिक्षा समय-समय पर उसी प्रकार बदलती है, जिस प्रकार समाज बदलता है।"

समाज के स्वरूप के अनुसार शिक्षा

समाज के स्वरूप के अनुसार शिक्षा की व्यवस्था भी भिन्न-भिन्न होती है। विभिन्न प्रकार के समाज अपनी आवश्यकताओं एवं आदर्शों के अनुरूप शिक्षा प्रदान करते हैं।

  • भौतिकवादी समाज : ऐसे समाज में शिक्षा का उद्देश्य भौतिक समृद्धि एवं व्यावसायिक सफलता प्राप्त करना होता है। इसलिए विज्ञान, तकनीकी तथा रोजगारपरक शिक्षा पर अधिक बल दिया जाता है।
  • आदर्शवादी समाज : ऐसे समाज में आध्यात्मिकता, नैतिकता एवं चरित्र निर्माण को अधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए शिक्षा में नैतिक एवं चारित्रिक विकास पर विशेष बल दिया जाता है।
  • प्रयोजनवादी समाज : ऐसे समाज में शिक्षा को समय एवं परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तनशील माना जाता है तथा व्यावहारिक जीवन से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है।
1. समाज का शिक्षा पर प्रभाव

समाज की परिस्थितियाँ, संस्कृति, राजनीतिक व्यवस्था एवं आर्थिक दशाएँ शिक्षा को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। शिक्षा का स्वरूप समाज की आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित होता है।

  • समाज की भौगोलिक स्थिति शिक्षा की उपलब्धता एवं स्वरूप को प्रभावित करती है।
  • समाज की सामाजिक संरचना के अनुसार शिक्षा के अवसर एवं व्यवस्था निर्धारित होती है।
  • राजनीतिक व्यवस्था शिक्षा के उद्देश्यों, नीतियों एवं पाठ्यक्रम को प्रभावित करती है।
  • समाज की संस्कृति, परम्पराएँ, रीति-रिवाज एवं मूल्य शिक्षा को प्रभावित करते हैं।
  • आर्थिक स्थिति शिक्षा संस्थानों, संसाधनों एवं शैक्षिक अवसरों को प्रभावित करती है।
  • सामाजिक परिवर्तन के साथ शिक्षा का स्वरूप भी बदलता रहता है।
2. शिक्षा का समाज पर प्रभाव

शिक्षा समाज के विकास, परिवर्तन तथा प्रगति का महत्वपूर्ण साधन है। यह समाज की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था को प्रभावित करती है।

  • शिक्षा सामाजिक परिवर्तन एवं सुधारों को बढ़ावा देती है।
  • शिक्षा एवं विज्ञान के माध्यम से मनुष्य भौगोलिक एवं प्राकृतिक बाधाओं पर नियंत्रण प्राप्त करता है।
  • शिक्षा समाज की संस्कृति, परम्पराओं, मूल्यों एवं आदर्शों का संरक्षण करती है।
  • शिक्षा नागरिकों में राजनीतिक जागरूकता विकसित करती है।
  • शिक्षा सामाजिक भावना, सहयोग एवं उत्तरदायित्व का विकास करती है।
  • शिक्षा व्यक्तियों को कुशल बनाकर समाज के आर्थिक विकास में योगदान देती है।
परीक्षा उपयोगी

निष्कर्ष : शिक्षा एवं समाज एक-दूसरे के पूरक हैं। समाज शिक्षा के स्वरूप को निर्धारित करता है तथा शिक्षा समाज के विकास एवं परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है। दोनों एक-दूसरे पर पूर्णतः निर्भर हैं।

Topic 4 समाजीकरण

समाजीकरण

Content Coming Soon...

Topic 5 समाजीकरण के अभिकरण

समाजीकरण के अभिकरण

Content Coming Soon...

Topic 6 सामाजिक परिवर्तन

सामाजिक परिवर्तन

Content Coming Soon...

Topic 7 सामाजिक नियंत्रण

सामाजिक नियंत्रण

Content Coming Soon...

Topic 8 सामाजिक स्तरीकरण

सामाजिक स्तरीकरण

Content Coming Soon...

Topic 9 शिक्षा एवं संस्कृति

शिक्षा एवं संस्कृति

Content Coming Soon...

Topic 10 विद्यालय की सामाजिक भूमिका

विद्यालय की सामाजिक भूमिका

Content Coming Soon...

पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

इस अध्याय से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न जो पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं।

Q 1 2024, 2022

शिक्षा एवं समाज के पारस्परिक संबंध की विवेचना कीजिए।

Q 2 2023, 2021

समाजीकरण क्या है? इसके प्रमुख अभिकरणों का वर्णन कीजिए।

Q 3 2020

सामाजिक परिवर्तन में शिक्षा की भूमिका स्पष्ट कीजिए।