वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. अंतःस्थ व्यंजन की संख्या है-
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) छह।
उत्तर: (c) : अंतःस्थ व्यंजन की संख्या चार है-य, र, ल, व। अन्तःस्थ व्यंजन उन व्यंजनओं को कहा जाता है जो जीभ, तालु दन्त, ओष्ठ के स्पर्श से उच्चरित होता है。
प्रश्न 2. स्पर्श व्यंजनों की संख्या है-
(a) 24
(b) 25
(c) 33
(d) 51
उत्तर: (b) : स्पर्श व्यंजनः- जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय मुँह से हवा कंठ, तालु, मूर्धा, दाँत, या ओठों का स्पर्श करके बाहर आती है। इसी कारण इन्हें स्पर्श व्यंजन कहते हैं। स्पर्श व्यंजन की कुल संख्या 25 हैं। क से म तक स्पर्श व्यंजन हैं。
प्रश्न 3. निम्न में से कौन महाप्राण है?
(a) ख
(b) प
(c) ठ
(d) फ
उत्तर: (b) : महाप्राण व्यंजनों के उच्चारण में 'हकार' जैसी ध्वनि विशेष रूप से रहती है और वायु अधिक मात्रा में निकलती है। प्रत्येक वर्ग का दूसरा और चौथा वर्ण तथा समस्त ऊष्म वर्ण महाप्राण कहलाते हैं, जैसे-ख, घ, छ, झ, ठ, ढ, थ, ध, और श, ष, स, ह।
प्रश्न 4. 'कृश' शब्द का विलोम है-
(a) दृढ़
(b) कठोर
(c) स्थूल
(d) मजबूत।
उत्तर: (c) : विलोम शब्द का अर्थ उल्टा या विपरीत होता है। अतः किसी शब्द का उल्टा अर्थ व्यक्त करने वाला शब्द विलोम शब्द कहलाता है। कृश शब्द का विलोम स्थूल, हष्ट-पुष्ट
प्रश्न 5. इनमें से भाषायी कौशल नहीं है-
(a) लेखन
(b) गद्य
(c) पठन
(d) वाचन।
उत्तर: (b) : भाषा कौशल एक व्यक्ति की वो क्षमता है जो उन्हें किसी एक या एक से अधिक भाषा में बात करने, सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने में सक्षम बनाती है।
भाषा कौशल मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं-
- श्रवण कौशल
- वाचन कौशल
- पठन कौशल
- लेखन कौशल
अतिलघु उत्तरी प्रश्न
प्रश्न 6. ह्रस्व स्वर किसे कहते हैं?
उत्तर: जिन स्वरों के उच्चारण में कम से कम समय लगता है उन्हे ह्रस्व कहते हैं। हिन्दी वर्णमाला में ह्रस्व स्वरों की कुल संख्या चार होती है। जो निम्न हैं- अ, इ, उ, ऋ। ये स्वर हिन्दी के व्यकरण और उच्चारण के माध्यम से महत्त्वपूर्ण होते हैं。
प्रश्न 7. सुधा एवं पंकज शब्द का अर्थ लिखिए।
उत्तर: सुधा नाम का खास महत्त्व है क्योंकि इसका मतलब शुद्ध, अमृत कल्याण, बिजली, आदि होता है। पंकज शब्द का अर्थ कीचड़ में उत्पन्न होने वाला अर्थात कमल का फूल होता है。
प्रश्न 8. कारक किसे कहते हैं? कर्ता कारक का चिन्ह लिखिए।
उत्तर: संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उसके सम्बन्ध का बोध होता है, उसे कारक कहते हैं। हिन्दी में कारक आठ प्रकार के होते हैं-कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, सम्बन्ध अधिकरण और सम्बोधन। कर्ता वाक्य में कार्य को करता है, वह कर्ता कहलाता है। कर्ता वाक्य का वह रूप होता है जिसमें कार्य को करने वाले का पता चलता है। कर्ता का विभक्ति चिन्ह 'ने' होता है。
प्रश्न 9. अभिव्यक्ति के साधनों के नाम लिखिए।
उत्तर: अभिव्यक्ति के साधनों के नाम निम्न हैं-
- बोलकर और सुनकर
- लिखकर और पढ़कर
प्रश्न 10. विराम चिन्ह का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विराम चिन्ह को सरल भाषा में रूकना या ठहरना कहते हैं, जो चिन्ह लिखते, बोलते या पढ़ते समय रूकने का संकेत देते हैं या ठहराव के लिए प्रयोग किए जाते हैं उन्हें विराम चिन्ह कहा जाता है。
प्रश्न 11. मॉण्टेसरी विधि का उपयोग कब किया जाता है?
उत्तर: मॉण्टेसरी विधि का उपयोग लेखन विधि में किया जाता है मॉटेसरी विधि 3 से 6 वर्ष के बीच आने वाले बच्चों के लिए उपयोगी है। इस विधि में सबसे पहले बच्चें जब रेखाएँ, खीचने में उनके हाथ सधने लगें तो उनसे अक्षरों का आकार बनवाना प्रारम्भ करना चाहिए。
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. शिरोरेखा किसे कहते हैं? उदाहरण देते हुए समझाइए।
उत्तर: देवनागरी लिपि में वर्णों के ऊपर लगाई जाने वाली रेखा शिरोरेखा कहलाती है। देवनागरी लिपि के वर्णों पर शिरोरेखा लगाना अनिवार्य माना जाता है। अतः प्रत्येक शब्द पर शिरोरेखा अवश्य हो। शिरोरखा बिल्कुल सीधी होनी चाहिए。
प्रश्न 13. लेखन शिक्षण के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लेखन शिक्षणः- भावों एवं विचारों की अभिव्यक्ति जब लिखित रूप में होती है तो इसे लेखन कौशल कहते हैं। लेखन शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बालक के व्यक्तित्व का विकास एवं उसकी आत्म प्रकाशन तथा निर्णय शक्ति को प्रभावपूर्ण बनाना。
प्रश्न 14. श्रुत लेख का अर्थ एवं महत्त्व बताइए।
उत्तर: श्रुतलेख का अर्थ है सुने हुए को लिखना या सुनकर लिखना। श्रुतलेख में अध्यापक बोलता है और छात्र सुनकर बोले हुए वाक्य या वाक्यांश को लिखता है। श्रुतलेख में सुन्दर लिखावट का तो महत्त्व होता ही है, किन्तु इसके साथ ही साथ भाषा की शुद्धता का भी महत्त्व होता है। श्रुतलेख से श्रवण लेखन कौशल का अधिक विकास होता है
प्रश्न 15. ऊष्ण व्यंजन किसे कहते हैं? उनके नाम लिखिए।
उत्तर: ऊष्म व्यंजन- वो सभी वर्ण जिनका उच्चारण करते वक्त हमारे मुख मुँह से ऊष्म अर्थात गर्म वायु बाहर की ओर निकलती है उन्हें ऊष्म व्यंजन कहते हैं। हिन्दी वर्णमाला में कुल 4 वर्णों को ऊष्म व्यंजन के रूप में जाना जाता है जो निम्नलिखित हैं- जैसे स, श, ष, और ह。
प्रश्न 16. देवनागरी लिपि की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: किसी भी भाषा को साधारण रूप में लिखना लिपि कहलाता है। हिन्दी भाषा को जिस लिपि लिखा जाता है वह देवनागरी लिपि कहलाती है।
देवनागरी लिपि की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- वर्ण विभाजन में वैज्ञानिकता
- प्रत्येक ध्वनि के लिए एक चिन्ह
- अपरिवर्तनीय उच्चारण
- उच्चारण और लेखन में एकरूपता
- वर्णानात्मक लिपि
- समग्र ध्वनियों को अंकित करने की क्षमता
- गत्यात्मक लिपि
- स्पष्टता
- नियमबद्धता
प्रश्न 17. विलोम तुकांत एवं समानार्थी शब्दों का आशय उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: विलोम- किसी शब्द का विपरीत अर्थ बताने वाले शब्दों को विलोम शब्द अथवा विपरीतार्थक शब्द कहते हैं। जैसे- 'अस्त' का विलोम उदय
तुकांतः- तुकांत शब्दों को हिन्दी भाषा में ऐसे दो शब्दों के रूप में जाना जाता है जिनके अंत का वर्ण समान होता है, जैसे पढ़ना- लिखना। इन शब्दों में पढ़ना और लिखना का अंतिम वर्ण (अक्षर) 'ना' है, जो दोनों में समान है इसलिए इन्हें तुकांत शब्द कहा जाता है。
समानार्थीः- वे शब्द जिनका अर्थ एक समान होता है समानार्थी शब्द कहलाते हैं। समानार्थी शब्द को हम पर्यायवाची शब्द भी कहते हैं। जैसे- कमल का समानार्थी जलज, पंकज, सरोज आदि。
प्रश्न 18. अनुस्वार एवं अनुनासिक ध्वनियों में क्या अन्तर है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अनुस्वारः- अनुस्वार वे व्यंजन हैं जो स्वर के बाद आते हैं। नाक से अनुस्वार की आवाज निकलती है। जैसे-पसंद, संभावना, अंतिम आदि。
अनुनासिक- अनुनासिक (ँ) वे स्वर हैं जिनमें मुख से अधिक तथा नासिका से कम ध्वनि निकलती है। जैसे गाँव, चाँ, काँच आदि